Video: बिस्किट में गड़बड़ी पर दुकानदार से भिड़ा शख्स, ऑनलाइन शिकायत की बात सुनकर मिला ऐसा जवाब

कई बार रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान लोग छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक मामला बिस्किट के पैकेट को लेकर सामने आया है, जहां एक कंटेंट क्रिएटर ने दुकानदार से ऑनलाइन शिकायत करने की बात कही। दुकानदार के जवाब और दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसे देखने के बाद लोग उपभोक्ता जागरूकता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर चर्चा करने लगे। कई यूजर्स ने शिकायत करने के कदम की तारीफ की, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर ध्यान दिलाया।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अगर किसी पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उपभोक्ता को क्या करना चाहिए और अपनी शिकायत कहां दर्ज करानी चाहिए।

दुकानदार से पूछा- ऑनलाइन शिकायत कर दूं?

राघव दुबे नाम के कंटेंट क्रिएटर ने यह वीडियो शेयर किया है। इसमें वह बिस्किट के पैकेट की गुणवत्ता को लेकर सवाल करते हैं और दुकानदार से पूछते हैं, “Complaint online daalu chalega” यानी क्या वह ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

इस पर दुकानदार जवाब देता है, “हां, डाल दो।” वीडियो में हुई इस छोटी-सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को 1.4 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। कई यूजर्स ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर ग्राहक को आवाज उठानी चाहिए, न कि मामले को अनदेखा करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो पर कई लोगों ने कंटेंट क्रिएटर के कदम की तारीफ की। कुछ यूजर्स ने इसे उपभोक्ता जागरूकता से जोड़कर देखा, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग के काम की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “Good Job”, जबकि दूसरे ने खाद्य सुरक्षा विभाग की तारीफ की। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि शिकायत कहां दर्ज की गई और कार्रवाई होने में कितना समय लगा। यूजर्स का कहना था कि खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र FDA में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की ऑनलाइन सुविधा है। इसके माध्यम से मिलावट, असुरक्षित खाद्य उत्पादों और पैकेट पर गलत जानकारी जैसी समस्याओं की शिकायत की जा सकती है। जुलाई 2026 में विभाग ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में AI की मदद से शिकायतों को संभालने वाला प्लेटफॉर्म शुरू किया था। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने और उनकी स्थिति जानने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी दिखे तो क्या करें?

अगर किसी बिस्किट या पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उसका पैकेट संभालकर रखें। उत्पाद, बैच नंबर और एक्सपायरी तारीख की तस्वीरें लें। खरीदारी का बिल भी सुरक्षित रखें और संदिग्ध उत्पाद का सेवन न करें। इसके बाद निर्माता या संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

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महंगाई दर भी आंकड़ों की बाजीगरी

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दर यानी रेपो रेट करीब 44 महीने के बाद की है। बीते 44 महीनों में ब्याज दर या तो स्थिर रही या उसमें कमी की गई। लंबे समय से रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर था, जिसे बढ़ा कर 5.50 फीसदी कर दिया गया है। मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की दोमासिक बैठक के बाद जब रेपो रेट बढ़ाने की घोषणा हुई तो मामला सिर्फ 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी पर रुक नहीं गया, बल्कि सूत्रों के हवाले से और विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर दावा किया गया कि रेपो रेट में अभी और बढ़ोतरी होगी। यहां तक कहा गया कि इसमें एक फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अगली बैठक दिसंबर में है और उस समय 0.50 फीसदी बढ़ोतरी की बात कही जा रही है।

रेपो रेट बढ़ने और आगे बढ़ते रहने की खबरों का बहुत बड़ा असर गुरुवार, आठ अक्टूबर को शेयर बाजार पर पड़ा। बीएसई का संवेदी सूचकांक एक हजार अंक से ज्यादा गिर गया। निवेशकों के लाखों करोड़ रुपए एक दिन में डूब गए वैसे पिछले नौ हफ्ते से लगातार शेयर बाजार गिर रहा है और करीब 20 लाख रुपए की बाजार पूंजी स्वाहा होने की खबर है।

बहरहाल, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में जो बढ़ोतरी की उसका आधार यह था कि महंगाई बढ़ रही है। सवाल है कि महंगाई कितनी बढ़ रही है? सरकार के आंकड़ों में तो महंगाई इतनी नहीं बढ़ी है कि उसे नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट बढ़ाना पड़े!

खुदरा महंगाई का सबसे ताजा आंकड़ा अगस्त है। अगस्त के महीने में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी रही, जो जुलाई में 4.45 फीसदी थी। यह सरकारी आंकड़ा है। सोचें, रिजर्व बैंक ने खुद चार फीसदी की औसत महंगाई दर बनाए रखने का लक्ष्य तय किया। उसके दो से छह फीसदी का लक्ष्य बनाया है। यानी अधिकतम छह फीसदी तक महंगाई होती है तो काम चल सकता है। उससे ज्यादा होने पर मुश्किल होगी। उसके हिसाब से औसत महंगाई चार फीसदी तक रहे तो ठीक है। फिर 4.45 फीसदी या 4.82 फीसदी की महंगाई दर को पैनिक होने की स्थिति नहीं मान सकते हैं। इसका अर्थ है कि इन आंकड़ों से अलग असली आंकड़ा कुछ और है। महंगाई के सरकारी आंकड़ों से अलग असली महंगाई वह है, जिसे लोग महसूस कर रहे हैं पर सरकार बता नहीं रही है।

असली महंगाई की बात करें तो वह सरकार के आंकड़ों से बहुत ज्यादा है। बरसात खत्म हो गई है फिर प्याज की कीमतें 70 रुपए किलो से कम नहीं हैं। यह स्थिति तब है, जब सरकार सस्ता प्याज बिकवाने की बात कर रही है। इसी तरह 31 अक्टूबर तक सरकार ने शुल्क मुक्त चीनी के आयात की अनुमति दी थी फिर भी चीनी की कीमत 70 रुपए किलो से कम नहीं हो रही है। ईंधन की महंगाई चरम पर है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें बेहिसाब बढ़ी हैं, जिससे माल ढुलाई बहुत महंगा हुआ है और खाने पीने की सारी चीजों की कीमत बढ़ गई है। इसके बावजूद महंगाई का आंकड़ा 4.82 फीसदी बताते है। यह हाथी के दिखाने के दांत हैं। असली महंगाई इससे कहीं ज्यादा है। यह वैसे ही है जैसे गर्मियों में बताया जाता है कि तापमान 45 डिग्री है, लेकिन महसूस होने वाला तापमान 52 डिग्री या उससे ज्यादा है। असल में महसूस होने वाली गर्मी कई दूसरे फैक्टर पर निर्भर करती है। वैसे ही महसूस होने वाली महंगाई अलग है और सरकार का आंकड़ा अलग है।

यह इसलिए भी हुआ क्योंकि सरकार ने महंगाई के आकलन का तरीका भी बदल दिया है। अब 2024 की नई सीरीज के आधार पर महंगाई का आकलन हो रहा है। सरकार ने बड़ी होशियारी से खुदरा महंगाई के बास्केट में खाने पीने की चीजों का वजन कम कर दिया। खुदरा महंगाई का आकलन करने वाली पुरानी सीरीज में खाने और पीने की चीजों का वजन 45.86 फीसदी होता था। नई सीरीज में इसे घटा कर 35.75 फीसदी कर दिया है। यानी 11 फीसदी से ज्यादा की कमी की गई है।

सोचें, जिन वस्तुओं का सबसे ज्यादा उपभोग है और जिन वस्तुओं की कीमतें अलग अलग सीजन में अलग अलग कारणों से बहुत बढ़ती रहती है उनके वजन में इतनी बडी कटौती कर दी गई। जाहिर है इससे महंगाई की दर पहले के मुकाबले कम दिखाई देगी। लेकिन लोगों को ज्यादा महसूस होगी क्योंकि खाने पीने की चीजों की कीमतें तो बेतहाशा बढ़ रही हैं। हालांकि भले सरकार इस महसूस होने वाली महंगाई का आंकड़ा नहीं बता रही है लेकिन उसको पता है और इसलिए रेपो रेट में बढ़ोतरी हुई है।

अमृतसर में बना मैगी का पहाड़! 1000 पैकेट से तैयार हुआ लंगर, देखें वायरल वीडियो

मैगी का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में तुरंत बनने वाला एक आसान और पसंदीदा स्नैक आता है। लेकिन अमृतसर में इसी आम मैगी को कुछ लोगों ने इतने बड़े स्तर पर तैयार किया कि देखने वाले भी हैरान रह गए। यहां 1000 पैकेट वेजिटेबल मैगी एक साथ बनाई गई और फिर इसे लोगों के बीच बांटा गया। बड़े बर्तन में पकती मैगी और उसे लेने के लिए जुटे लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। इस आयोजन ने सिर्फ अपनी विशाल मात्रा की वजह से ध्यान नहीं खींचा, बल्कि लोगों के बीच इस बात पर भी बहस शुरू हो गई कि लंगर में किस तरह का भोजन परोसा जाना चाहिए।

कुछ लोगों ने इसे मिल-बांटकर खाना खिलाने की अच्छी पहल माना, जबकि कुछ ने मैगी की जगह पौष्टिक भोजन को बेहतर विकल्प बताया। यानी एक साधारण सी मैगी ने खाने से आगे बढ़कर परंपरा और पसंद पर चर्चा छेड़ दी।

बड़े भगोने में शुरू हुई हजार पैकेट की तैयारी

वीडियो की शुरुआत मैगी के ढेर सारे पैकेट खोलने से होती है। इसके बाद एक बड़े बर्तन को चूल्हे पर रखा गया और उसमें तेल व मक्खन डाला गया। फिर बारी-बारी से प्याज, शिमला मिर्च, गाजर, मटर, स्वीट कॉर्न, मशरूम और टमाटर जैसी कई सब्जियां डाली गईं। इतनी मात्रा में सामग्री देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि खाना कितने लोगों के लिए तैयार किया जा रहा था।

मैगी में डाली गईं ढेर सारी सब्जियां और पनीर

सब्जियों को अच्छी तरह पकाने के बाद बड़े बर्तन में पानी और मैगी मसाला डाला गया। इसके बाद 1000 पैकेट की मैगी उसमें शामिल कर दी गई। जब मैगी पककर तैयार हुई तो इसमें पनीर के कई किलो टुकड़े भी डाले गए। आखिर में तैयार खाना लोगों को गर्मागर्म परोसा गया।

खाना लेने के लिए जुटे लोग

मैगी तैयार होने के बाद वितरण शुरू हुआ तो लोगों की कतार लग गई। रोजाना घरों और छोटी दुकानों में नजर आने वाली मैगी का इतना बड़ा रूप देखकर वहां मौजूद लोगों के लिए यह अनुभव खास रहा।

वीडियो में कई लोग खाना लेते दिखाई दे रहे हैं। आयोजन का सबसे मानवीय पहलू यही था कि एक आम पसंद के खाने ने अलग-अलग लोगों को एक जगह ला दिया।

तारीफ के साथ उठे सवाल भी

वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं रहीं। कुछ लोगों ने इस प्रयास की सराहना की और कहा कि लोगों को खाना खिलाने की पहल अच्छी है। वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि लंगर जैसे सामुदायिक भोजन में मैगी को शामिल करना कितना उचित है। कुछ लोगों ने इसकी जगह दाल, सब्जी या दूसरे पौष्टिक भोजन को बेहतर विकल्प बताया।

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क्या लंगर सिर्फ खाने का नाम है?

इस आयोजन ने एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया क्या लंगर की पहचान सिर्फ इस बात से तय होनी चाहिए कि उसमें क्या खाना परोसा जा रहा है, या फिर लोगों को मिल-बांटकर भोजन कराना इसका बड़ा उद्देश्य है? सोशल मीडिया पर इसी बात को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ लोगों ने परंपरा पर जोर दिया, जबकि कुछ ने सेवा और लोगों को भोजन उपलब्ध कराने को ज्यादा महत्वपूर्ण माना।

एक साधारण मैगी ने शुरू कर दी बड़ी चर्चा

1000 पैकेट मैगी से तैयार यह आयोजन इसलिए चर्चा में आया क्योंकि इसमें एक बेहद आम चीज को बड़े सामुदायिक भोजन का रूप दिया गया। किसी के लिए यह लोगों को जोड़ने वाली अच्छी पहल थी, तो किसी के लिए लंगर की परंपरा और सेहत से जुड़ा सवाल।

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विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

World Heart Day 2026

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम है-  “दिल की धड़कन को न चूकें,”। 2022 में हृदय रोग से 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी। वर्तमाान में कोरोना काल के बाद अचानक से हृदय गति रुक जाने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में  जानिए कि किस तरह लाइफ स्टाइल बदलकर प्राकृतिक तरीके से हार्ट अटैक  से खुद को बचा सकते हैं।

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हदय रोग के कारण:

  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • मधुमेह
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
  • मोटापा या शरीर का अतिरिक्त वजन
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • अत्यधिक कफ बना रहना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • दीर्घकालिक तनाव
  • हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
  • बड़ी हुई उम्र
  • नींद की खराब गुणवत्ता या अनुपचारित स्लीप एपनिया
  • नमक, चीनी और संतृप्त या ट्रांस वसा से भरपूर अस्वास्थ्यकर आहार
  • दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी और कुछ सूजन संबंधी स्थितियाँ

 

हृदय रोग के लक्षण

  • सीने में दर्द , दबाव, जकड़न या बेचैनी
  • सांस फूलना, खासकर गतिविधि के दौरान या आराम करते समय
  • सांस फूलने या सीने में तकलीफ के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होना।
  • अस्पष्ट थकान या कमजोरी
  • दर्द जो हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है
  • दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित होना ( धड़कन का अनियमित होना)
  • चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बेहोशी
  • पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
  • ठंडे पसीने आना, मतली या उल्टी होना, खासकर सीने में तकलीफ के साथ

 

हृदय रोग का प्राकृतिक इलाज:

  1. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नमक, चीनी और तेल का त्याग करना।
  2. हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  3. उपवास नहीं कर सकते हैं तो भोजन के बीच कम से कम 10 घंटे काअंतराल रखें।
  4. नियमित योगासन करें या अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  5. डॉक्टर की सलाह पर रोज एक अखरोट खाएं।
  6. शुद्ध सात्विक और प्राकृतिक भोजन ही करें। सलाद का सेवन करें। 

 

कौन सी सब्जियां कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल?

कुछ खास सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ सब्जियों के बारे में:

 

लहसुन: लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

प्याज: प्याज में भी एलिसिन पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

बैंगन: बैंगन में नियासिन नामक विटामिन होता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है।

पालक: पालक में विटामिन K और फोलेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
 

कोलेस्ट्रॉल कम करने के अन्य उपाय

स्वस्थ आहार: फाइबर से भरपूर आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और साबुत अनाज।

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें।

मोटापे को कम करें: अगर आप मोटे हैं तो अपना वजन कम करें।

धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।

तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आराम करने की तकनीक का अभ्यास करें।

 

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में उपरोक्त बताई गई सब्जियों को शामिल करके आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं और दिल की बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।

 

ध्यान रखें

  • आप अपने डॉक्टर से पूछकर अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
  • नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।

 

‘द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व ‘एंथोसायनिन’ का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

ट्रम्प का व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति को स्टेट डिनर:पत्नी मेलानिया ने मेन्यू तैयार किया; जंगली मशरूम का सूप, तिल लगी मछली परोसी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर आयोजित किया। डिनर की शुरुआत पीले स्क्वैश से बने गाढ़े सूप से हुई। इसमें जंगली मशरूम, हरी जड़ी-बूटियां, कुरकुरे किए गए पैनसेटा के टुकड़े और हरे प्याज के तेल की परत डाली गई थी। इसके बाद तिल की परत वाली सी-बास मछली परोसी गई। इसके साथ बोक चॉय नाम की हरी सब्जी, भुना हुआ बैंगन और हरी चटनी दी गई। बोक चॉय चीन में काफी खाई जाने वाली सब्जी है, जो देखने में छोटी पत्तागोभी जैसी होती है। मिठाई में वनीला फ्लेवर की नरम क्रीम, खट्टी चेरी और अखरोट से बनी मिठाई के साथ आइसक्रीम परोसी गई। इस आइसक्रीम में व्हाइट हाउस में तैयार किया गया शहद इस्तेमाल किया गया था। स्टेट डिनर से जुड़ी 3 तस्वीरें… ट्रम्प बोले- अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर डिनर के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और चीन की राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं, लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पहले से बेहतर हैं। ट्रम्प ने अपने बीजिंग दौरे को याद करते हुए कहा कि चीन में उनका जिस गर्मजोशी से स्वागत हुआ था, अब अमेरिका भी जिनपिंग को वैसा ही सम्मान देना चाहता है। इस दौरान ट्रम्प ने जिनपिंग को अमेरिका के राष्ट्रीय पक्षी बाल्ड ईगल का करीब 3 फीट ऊंचा स्टैच्यू भी तोहफे में दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की आजाद और ऊंची उड़ान भरने वाली भावना का प्रतीक है। डिनर में टेक जगत के बड़े नाम भी पहुंचे स्टेट डिनर में अमेरिका के टेक और बिजनेस जगत के कई बड़े चेहरे भी शामिल हुए। इनमें अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस, टेस्ला और स्पेसएक्स के एलन मस्क, गूगल के सुंदर पिचाई, ओपन-AI के सैम ऑल्टमैन और ग्रेग ब्रॉकमैन, एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग और डेल टेक्नोलॉजीज के माइकल डेल शामिल थे। सैम ऑल्टमैन व्हाइट हाउस पहुंचने पर लोगों को ऑटोग्राफ देते नजर आए। वहीं जेन्सेन हुआंग अपने आम काले लेदर जैकेट के बजाय टक्सीडो पहनकर पहुंचे। जिनपिंग का अमेरिका दौरा, 4 तस्वीरें… ट्रम्प-जिनपिंग की मुलाकात से जुड़ीं 4 अहम बातें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे अहम मुद्दा AI इस बैठक के अहम मुद्दों में रहा। ट्रम्प ने इसे सुपरइंटेलिजेंस कहा। उन्होंने कहा कि आज इन क्षेत्रों में लिए गए फैसलों का असर आने वाले कई दशकों तक रहेगा। जिनपिंग ने AI को लेकर कहा कि यह हमेशा इंसानों के नियंत्रण में रहना चाहिए। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता 2 महीने बढ़ा अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार समझौते को दो महीने और बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दिया गया है। यह समझौता पहले 10 नवंबर को खत्म होना था। जिनपिंग ने 1 लाख अमेरिकी छात्रों को चीन बुलाया जिनपिंग ने अगले 5 साल में 1 लाख अमेरिकी छात्रों को चीन आने का न्योता भी दिया। जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए अपना बाजार खुला रखेगा और उम्मीद करता है कि अमेरिका में चीनी कंपनियों के साथ भी निष्पक्ष व्यवहार किया जाएगा। ट्रम्प ने जिनपिंग को व्हाइट हाउस का निर्माण दिखाया बैठक के दौरान ट्रम्प ने जिनपिंग को व्हाइट हाउस में बन रहे नए बॉलरूम और हेलिपैड का काम भी दिखाया। ट्रम्प ने जिनपिंग को ‘ग्रेनाइट एक्सपर्ट’ बताया और कहा कि उन्हें अच्छा ग्रेनाइट पसंद है। अमेरिकी मीडिया की एंट्री पर विवाद जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच भी विवाद देखने को मिला। ट्रम्प प्रशासन ने CNN, MS NOW और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में एंट्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कोर्ट ने इनकी व्हाइट हाउस में एंट्री बहाल करने का आदेश दिया। इसके बावजूद अगले दिन पत्रकारों को दोबारा अंदर जाने से रोक दिया गया। कई कोशिशों के बाद दोपहर करीब 12 बजे उन्हें व्हाइट हाउस में प्रवेश मिला। मीडिया की एंट्री को लेकर हुए इस विवाद का असर ट्रम्प-जिनपिंग की मुलाकात की टीवी कवरेज पर भी पड़ा। अमेरिका के कई बड़े टीवी नेटवर्क ने दोनों नेताओं की शुरुआती मुलाकात का लाइव प्रसारण नहीं किया। इसी दौरान ओवल ऑफिस में ट्रम्प ने चीनी पत्रकारों को लेकर मजाक करते हुए कहा कि चीन की मीडिया सबसे दोस्ताना है।

Onion Prices: बंगाल में 35 रुपये किलो के भाव से 1400 मिट्रिक टन प्याज बेचा जा चुका, 24 सितंबर को अब कोलकाता पहुंच रही कांदा एक्सप्रेस

Onion Prices: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले पश्चिम बंगाल में प्याज की सप्लाई बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने बड़ी मात्रा में प्याज कोलकाता और आसपास के जिलों तक पहुंचाने का इंतजाम किया है। इसके लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेन, जिसमें ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ (PSF) के बफर स्टॉक से प्याज भरा है, 24 सितंबर 2026 को कोलकाता पहुंचेगी। इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में NAFED और NCCF की मोबाइल वैन के जरिए, लगभग 1,400 MT प्याज पहले ही ₹35 प्रति किलो के भाव पर बांटे जा चुके हैं। यह प्याज मुख्य रूप से सड़क के रास्ते पहुंचाया गया था। अब ‘कांदा एक्सप्रेस’ के आने से प्याज की अतिरिक्त मात्रा को ज्यादा तेजी और आसानी से अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के सीजन में कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

कांदा एक्सप्रेस से आने वाले प्याज को कोलकाता और आसपास के जिलों में बांटने की योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ खुदरा कीमतों पर भी असर डालना है। कोलकाता में फिलहाल 25 से ज्यादा जगहों पर प्याज की खुदरा बिक्री की जा रही है। इनमें कोले मार्केट, मेचुआ मंडी, मानिकतला मार्केट, रामपुरिया मार्केट और श्याम बाजार मार्केट जैसे बड़े बाजार शामिल हैं।

सरकार ‘सुफल बांग्ला’ के जरिए बफर स्टॉक वाले प्याज की रिटेल बिक्री की संभावना पर भी विचार कर रही है। इससे ग्राहकों को प्याज खरीदने के लिए और जगहें मिलेंगी और इस पहल की पहुंच भी बढ़ेगी।

कोलकाता जाने वाली ‘कांदा एक्सप्रेस’, सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत हाइब्रिड रेल-और-रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का इस्तेमाल करके PSF बफर स्टॉक से प्याज़ को धीरे-धीरे बाज़ार में उतारा जा रहा है। NAFED और NCCF के जरिए बफर स्टॉक को बाजार में पहुंचाने का काम 24 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था, और बाजार की जरूरतों के हिसाब से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार सप्लाई भेजी जा रही है।

अब तक बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई देश के 100 से ज्यादा शहरों में की जा चुकी है। सरकार प्याज को बड़े स्तर पर पहुंचाने के लिए रेल और सड़क, दोनों माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है। इससे अलग-अलग राज्यों और शहरों की जरूरत के हिसाब से समय पर प्याज पहुंचाने में मदद मिल रही है।

प्याज की बढ़ी हुई सप्लाई का असर अब इसकी कीमतों पर भी दिखने लगा है। पिछले एक हफ्ते में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज के खुदरा दाम स्थिर रहे या कम हुए हैं। इससे पता चलता है कि बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने के बाद कई जगहों पर इसकी उपलब्धता बेहतर हुई है।

पिछले एक हफ्ते में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज की कीमतों में कमी आई है, उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं।

सरकार मुख्य खपत वाले बाजारों में प्याज की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। उपलब्धता बेहतर करने और मौसम के कारण कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए, जरूरत के हिसाब से बफर स्टॉक से प्याज जारी किया जा रहा है। आने वाले त्योहारों के मौसम समेत स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर अलग-अलग बाजारों में और सप्लाई भेजे जाने की संभावना है।

सरकार देश के बड़े प्याज बाजारों में इसकी उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से प्याज बाजार में भेजा जा रहा है, ताकि इसकी सप्लाई बनी रहे और त्योहारों के सीजन में कीमतों पर ज्यादा दबाव न पड़े।

आने वाले दिनों में भी स्थानीय जरूरत के हिसाब से देश के अलग-अलग बाजारों में प्याज की अतिरिक्त सप्लाई भेजी जा सकती है। खासकर आने वाले त्योहारों के दौरान प्याज की उपलब्धता बनाए रखने पर सरकार का फोकस रहेगा।

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National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी ने दिल्ली HC में ED की याचिका को दी चुनौती, बताया ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’

National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों नेताओं ने कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस चुनौती का विरोध किया है, जिसमें एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है।

18 सितंबर को दाखिल अलग-अलग लेकिन काफी हद तक एक जैसे जवाबों में, कांग्रेस नेताओं ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि एजेंसी, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) का केस नहीं बना सकती।

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

गांधी परिवार ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर उठाए सवाल

दाखिल किए गए जवाबों के मुताबिक, गांधी परिवार का कहना है कि ED की कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह मामला पुलिस में दर्ज FIR के बजाय सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी।

गांधी परिवार का तर्क है कि PMLA में ED की कार्रवाई का आधार “निजी शिकायत” बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि स्वामी की शिकायत उन कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती जो एजेंसी के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई शुरू करने के लिए जरूरी हैं।

उनकी दलीलें PMLA की धारा 5(1) पर केंद्रित हैं। जवाबों में कहा गया है कि यह प्रावधान उन स्थितियों में कार्रवाई की इजाजत देता है जिनमें CrPC की धारा 173 के तहत पुलिस की अंतिम रिपोर्ट शामिल हो, या फिर किसी अधिकृत अधिकारी की शिकायत हो जो ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (सूचीबद्ध अपराध) की जांच कर रहा हो।

बचाव पक्ष का कहना है कि कोई निजी व्यक्ति ऐसी जांच नहीं कर सकता और जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट को मिली शक्तियां इस कानूनी जरूरत को दरकिनार नहीं कर सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

गांधी परिवार ने ‘विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का भी हवाला दिया है।

उनका तर्क है कि इस फैसले के अनुसार, PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (अनुसूचित अपराध) का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि ED ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ‘निजी शिकायत’ के जिक्र का इस्तेमाल तो किया है, लेकिन उसके व्यापक संदर्भ पर ध्यान नहीं दिया है।

बचाव पक्ष ने उस लंबी अवधि की ओर भी इशारा किया है, जिसके दौरान स्वामी ने कथित तौर पर अदालत के सामने सबूत पेश नहीं किए। जवाबों के अनुसार, इसे इस बात के संकेत के तौर पर बताया गया कि निजी शिकायत को कार्यवाही का आधार मानने में क्या मुश्किलें आती हैं।

ED के अपने पुराने रिकॉर्ड का दिया हवाला

गांधी परिवार ने ED के पुराने रिकॉर्ड और बातचीत का हवाला देकर अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की है।

उनके जवाबों में जनवरी और अगस्त 2015 में जारी एजेंसी के टेक्निकल सर्कुलर, 2013 में सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के सामने दी गई जानकारी और 2024 में राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) के तहत मिले जवाब का जिक्र है।

बचाव पक्ष का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि ED ने पहले यह रुख अपनाया था कि PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले FIR जरूरी है।

जवाबों में ED द्वारा जून 2021 में दर्ज ECIR का भी जिक्र है, जो स्वामी की शिकायत के सात साल बाद दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने कहा कि ECIR को ट्रायल कोर्ट के सामने सितंबर 2025 में ही पेश किया गया, जब कोर्ट ने एजेंसी को इसे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था।

नई FIR और ट्रायल कोर्ट का आदेश

जवाबों में 3 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज की गई FIR का भी जिक्र है। हालांकि, गांधी परिवार की दलीलों के अनुसार, ED ने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि वह इस FIR पर निर्भर नहीं है।

हाई कोर्ट के सामने यह विवाद ट्रायल कोर्ट के उस फैसले से पैदा हुआ है जिसमें उसने ED की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। दलीलों के मुताबिक, दिसंबर के आदेश में कहा गया था कि इस शिकायत पर कानूनी तौर पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

गांधी परिवार ने इस बात पर जोर दिया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी और अधिकार-क्षेत्र से जुड़े उन मुद्दों पर आधारित था, जो ‘प्रेडिकेट-ऑफेंस’ (मूल अपराध) के लिए FIR न होने से संबंधित थे। उनका कहना है कि निचली अदालत ने मुख्य आरोपों पर उनके गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला नहीं सुनाया।

ED 24 घंटे के अंदर हाई कोर्ट पहुंची

बचाव पक्ष ने उस तेजी पर भी सवाल उठाए हैं जिसके साथ ED हाई कोर्ट पहुंची।

जवाबों के मुताबिक, एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के अंदर अपनी रिविजन याचिका दायर की। गांधी परिवार ने इस रफ्तार को “बिजली की गति” बताया और तर्क दिया कि ऐसा लगता है कि इस कार्रवाई में एजेंसी पर आम तौर पर लागू होने वाली आंतरिक मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया है।

उन्होंने हाई कोर्ट से ED की रिविजन याचिका को खारिज करने का भी आग्रह किया है और इसे “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” बताया है।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 2013 में की गई एक शिकायत से हुई थी। इस शिकायत में Associated Journals Ltd (AJL) के अधिग्रहण को लेकर कथित साजिश के आरोप लगाए गए थे। बता दें कि AJL ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती है।

यह शिकायत ‘यंग इंडियन’ से भी जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास सबसे ज्यादा शेयर हैं। आरोप AJL की उन संपत्तियों से जुड़े हैं जिनकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है, और साथ ही ‘यंग इंडियन’ के जरिए किए गए 50 लाख रुपये के लेन-देन से भी जुड़े हैं।

वहीं, इस मामले में ED ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत दर्ज की। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद एजेंसी दिल्ली हाई कोर्ट गई।

इस मामले में शामिल अन्य लोगों और संस्थाओं में सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

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Onion prices: फिर रुलाने की तैयारी में प्याज के भाव, सब्सिडी के बावजूद मेट्रो शहरों में आसमान छू रहे प्याज के दाम

Onion prices: इस साल प्याज के तेवर एक बार फिर रुलाने वाले लग रहे हैं। सरकार की 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी के बावजूद देश के मेट्रो शहरों में इसकी कीमत ऊंची बनी हुई हैं। मंगलवार को मेट्रो शहरों के खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें ₹53 से ₹60 प्रति किलोग्राम के बीच रहीं। यह आंकड़े उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं।

प्याज की ये ऊंची कीमतें तब हैं, जब सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज को ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचने का फैसला किया था। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, मेट्रो शहरों में, दिल्ली में प्याज ₹53 प्रति किलोग्राम बिका, जो मुंबई के ₹58 प्रति किलोग्राम से थोड़ा कम है। जबकि कोलकाता और चेन्नई में सबसे ज्यादा ₹60 प्रति किलोग्राम दाम दर्ज किए गए। सीएनबीसी टीवी 18 की खबर के अनुसार, 22 सितंबर को पूरे भारत में प्याज का औसत रिटेल दाम ₹54.2 प्रति किलोग्राम था। सबसे ज्यादा दाम ₹100 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम दाम ₹29 प्रति किलोग्राम था।

हालांकि, निजी व्यापार आंकड़ों से पता चला कि खुदरा दाम मंत्रालय के आंकड़ों से काफी अधिक थे। उदाहरण के लिए, दिल्ली में प्याज क्वालिटी और इलाके के हिसाब से ₹60-70 प्रति किलोग्राम के दायरे में बेचा गया, जबकि मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए ₹53 प्रति किलोग्राम का रेट बताया है। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र के दखल के बावजूद प्याज की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सरकार दिल्ली और देश भर के 50 से अधिक शहरों में ₹35 प्रति किलोग्राम के बफर स्टॉक की सब्सिडी वाली बिक्री के जरिए घरेलू सप्लाई बढ़ा रही है।

केंद्र के पास अपनी नोडल एजेंसियों NCCF और नेफेड के जरिए, अभी 2026 के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। ये एजेंसियां कीमतों को कम करने के लिए खुदरा दखल के तहत काम कर रही हैं। ये स्टोर किए गए प्याज को उत्पादक राज्यों से खपत वाले केंद्रों तक थोक में ले जा रही हैं। इस काम में कांडा एक्सप्रेस नाम के एक खास रेल रेक का सहयोग लिया जा रहा है या यह आपूर्ति सड़क के रास्ते की जा रही है। इस स्कीम के तहत, चुनिंदा कीमत-संवेदनशील शहरों में प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर बेचा जा रहा है।

टिफिन में मेथी की सब्जी लाना पड़ा भारी: स्कूल ने छात्र पर ठोका 50 रुपये का जुर्माना, नगर निगम ने भेजा नोटिस

टिफिन में मेथी की सब्जी लाना पड़ा भारी: स्कूल ने छात्र पर ठोका 50 रुपये का जुर्माना, नगर निगम ने भेजा नोटिस

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मुंबई से सटे भायंदर में लंच बॉक्स में एक मेथी की सब्जी लाने पर स्कूली छात्र पर 50 रुपए का जुर्माना लगाने का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। तपोवन विद्यालय के इस वाकये के बाद भायंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (MBMC) के शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूल प्रशासन को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है। ALSO READ: कहीं आपके नाम से तो नहीं चल रही फर्जी SIM तो सावधान, DoT की चेतावनी, 3 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना

 

क्या है पूरा मामला?

शिकायत के मुताबिक, भायंदर के तपोवन विद्यालय में पढ़ने वाले एक छात्र के टिफिन बॉक्स में मेथी की सब्जी थी। स्कूल ने इस बात पर छात्र से 50 रुपये का जुर्माना वसूल लिया।

 

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पदाधिकारी रॉबर्ट डिसूजा ने इस मामले की शिकायत नगर निगम में दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र जैन समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। दाखिले के समय अभिभावकों को यह हिदायत दी जाती है कि वे बच्चों के खाने में मांसाहारी भोजन या जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां न भेजें। मनसे नेता का कहना है कि किसी खास तरह का भोजन लाने पर बच्चों पर जुर्माना लगाना उनके खान-पान की व्यवस्था पर पाबंदी थोपने जैसा है। ALSO READ: जमुई कांड को लेकर तेजस्वी का तंज, मजाकिया अंदाज में शेयर की सम्राट चौधरी की पुलिस अधिकारी से बात

 

नगर निगम और शिक्षा विभाग की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए भायंदर नगर निगम की शिक्षा अधिकारी सुलभा वतारे ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि स्कूल छात्रों के खाने पर इस तरह के अनुचित प्रतिबंध नहीं लगा सकते। किसी विशेष खाद्य पदार्थ को लाने पर जुर्माना वसूलना शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, छात्रों के मौलिक अधिकारों और राज्य सरकार के नियमों का सीधा उल्लंघन है। नगर निगम ने स्कूल को चेतावनी दी है कि यदि जल्द संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

पहले भी आ चुके हैं ऐसे विवाद

यह घटना मीरा रोड स्थित ‘सेवन स्क्वायर स्कूल’ में हुए विवाद के कुछ दिनों बाद सामने आई है। उस दौरान पर्यूषण पर्व के दौरान लंच बॉक्स में प्याज, लहसुन और अन्य चुनिंदा खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले एक सर्कुलर को लेकर काफी हंगामा हुआ था। हालांकि, भारी विरोध और नोटिस मिलने के बाद उस स्कूल ने अपना सर्कुलर वापस ले लिया था।

जेब पर भारी महंगाई की मार

नई दिल्ली। आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार का सिलसिला जारी है। इस साल के पहले आठ महीने में लगातार महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को अगस्त महीने का महंगाई का आंकड़ा जारी किया, जिसके मुताबिक थोक और खुदरा दोनों महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर खुदरा महंगाई पर पड़ा है। गौरतलब है कि खाने, पीने की चीजों के दाम बढ़ने से ही पिछले आठ महीने से लगातार महंगाई बढ़ रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के महीने में खुदरा महंगाई बढ़ कर 4.82 फीसदी हो गई। जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। जुलाई में भी महंगाई की दर भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तय की गई औसत सीमा से ऊपर रही। रिजर्व बैंक ने चार फीसदी की औसत सीमा तय की है। लगातार तीसरे महीने खुदरा महंगाई इस सीमा से ऊपर रही है। बहरहाल, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में खाने, पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर 5.95 फीसदी रही।

खुदरा महंगाई दर पर सबसे ज्यादा असर खाने, पीने की चीजों की कीमतों का पड़ा है। खाद्य पदार्थों की महंगाई जुलाई के 5.52 से बढ़कर अगस्त में 5.95 फीसदी हो गई। माना जा रहा है कि मानसून की कमजोरी और अनियमितता की वजह से कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में प्याज की महंगाई 48.27 फीसदी, लहसुन की 43.60 फीसदी और अदरक की 73.82 फीसदी।

मानसून के अलावा पश्चिम एशिया के संकट का असर भी महंगाई पर पड़ा है। होर्मुज की खाड़ी बाधित होने से कच्चा तेल महंगा हुआ है, जिससे देश में माल ढुलाई महंगी हो गई है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई है। फरवरी के आखिरी दिन ईरान पर हुए हमले के बाद से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

बहरहाल, अगस्त में खुदरा महंगाई के साथ साथ थोक महंगाई में बढ़ोतरी हुई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक थोक महंगाई बढ़ कर 9.92 फीसदी हो गई। जुलाई में यह 9.78 फीसदी थी। बताया जा रहा है कि खाने, पीने की चीजें, ईंधन, पावर और विनिर्मित उत्पाद महंगे होने की वजह से यह बढ़ोतरी दर्ज की गई। गौरतलब है कि थोक मूल्य सूचकांक में फूड इंडेक्स की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी होती है। अगस्त 2026 में खाने, पीने की चीजों की थोक महंगाई बढ़कर 7.05 फीसदी पर पहुंच गई, जो जुलाई में 6.65 फीसदी थी।