UP News: रक्षाबंधन पर सीएम योगी का बेटियों को तोहफा! बताया कब मिलेगी 50,000 छात्राओं को फ्री स्कूटी

UP News: रक्षाबंधन पर उत्तर प्रदेश की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा तोहफा देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि अक्टूबर-नवंबर में यूपी की 50,000 महिला अंडरग्रेजुएट छात्राओं को स्कूटी दिए जाएंगे। सीएम योगी शुक्रवार (28 अगस्त) को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में यह ऐलान किया। सीएम योगी ने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई तक और आगे भी सरकार हमेशा उसके साथ खड़ी है।

उन्होंने कहा, “हमने एक और व्यवस्था की है। हमारे लिए पहले ये काम बड़ा था कि रक्षाबंधन पर इस कार्यक्रम को करेंगे, अभी हम अक्टूबर या नवंबर में प्रदेश की 50,000 बेटियों को जो स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं, एक स्कूटी उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। 50,000 बेटियों को हम स्कूटी भी प्रदान करने जा रहे हैं…।”

सीएम योगी ने आगे कहा, “यूपी में पहले पहचान का संकट था आधी आबादी को न सुरक्षा थी, न सम्मान था, न स्वावलंबन था, तो हमारी आर्थिक स्थिति बदहाल होनी ही होनी थी। यूपी उस दौर को जब याद करता है, तो रोंगटे खड़े होते हैं। कहीं दंगे, कहीं कर्फ्यू, कहीं असुरक्षा, कहीं उपद्रव, हर योजना में बेईमानी और भ्रष्टाचार, लेकिन धर्म चक्र बदलता है। अगर उस समय उपद्रव था, तो पीएम मोदी के नेतृत्व में जब डबल इंजन की सरकार यूपी में आई, तो उपद्रव को उत्सव में बदल दिया गया है, कर्फ्यू और दंगा से मुक्त करके यूपी को चंगा बना दिया गया है।”

‘योजना का केंद्र बिंदु बेटी’

मुख्यमंत्री ने कहा, “अब हर योजना का केंद्र बिंदु बेटी है, आधी आबादी है। हमारा पहला संकल्प था उत्तर प्रदेश की बेटी को भयमुक्त वातावरण देंगे। उसे अपने विश्वास के दम पर खड़ा होने का पूरा अवसर देंगे और मुझे खुशी है कि हमने जो कहा था, बेटी को सुरक्षा की गारंटी देंगे, यह केवल एक फिजिकल सिक्योरिटी नहीं थी, यह मेंटल सिक्योरिटी भी थी, हेल्थ सिक्योरिटी भी थी। प्रदेश में लगभग साढ़े 12 करोड़ महिलाएं हैं। सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और नेतृत्व की यात्रा में भागीदार है। हमारी नीति है कि हर बेटी, बहन और मां को आत्मनिर्भर महसूस होना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “डबल इंजन सरकार ने बेटी की यात्रा को जन्म से शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार, आय और उसके सपनों की उड़ान तक एक इकोसिस्टम से जोड़ा है। महिलाएं चूल्हे से चेक, चेक से कारोबार और कारोबार से टेक्नोलॉजी तक पहुंच रही हैं। 2017 में प्रदेश में महिला पुलिसकर्मी करीब 10 हजार थीं, अब 45 हजार हो गई हैं। पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती अनिवार्य की गई है। 32 हजार पदों पर भर्ती चल रही है, जिसके बाद यह संख्या 50 हजार हो जाएगी।”

बुजुर्गों के लिए बस फ्री

सीएम योगीने कहा कि इसके बाद 60 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिलेगी। योगी ने कहा कि महिला स्वावलंबन और सम्मान की बात होने पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई साहस और स्वाभिमान की प्रतीक थीं, इसलिए योजना का नाम उनके नाम पर रखा गया है। एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग साढ़े 12 करोड़ आधी आबादी है। सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन एवं नेतृत्व की यात्रा में सहभागी है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सीएम ने कहा कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, झांसी सभी जनपदों में अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हॉस्टल में 500 कामकाजी महिलाओं के मुफ्त रहने की व्यवस्था रहेगी।

महिला बीट पुलिस की तैनाती

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार उत्तर प्रदेश में महिला बीट पुलिस की तैनाती हुई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 में 10,000 महिला पुलिसकर्मी थीं, अब यह संख्या 45,000 हो गई है। योगी ने कहा कि सम्मान तब आता है, जब महिला के घर में शौचालय, बिजली, रसोई में धुआंमुक्त ईंधन, नल में जल और खाते में सीधे पैसा पहुंचे और विपत्ति में सरकार साथ खड़ी हो।

ये भी पढ़ें- Sonia Gandhi Book Row: ‘हम पुस्तक को पब्लिश करने के लिए तैयार थे, लेकिन…’; Penguin ने सोनिया गांधी की किताब छापने से किया इनकार? दी ये सफाई

उन्होंने आगे कहा, “हर घर शौचालय माताओं, बहनों की गरिमा का आधार था। ‘उज्ज्वला’ ने केवल धुएं से राहत नहीं दी। बल्कि फेफड़े खराब होने वाली बीमारियों से भी मुक्ति दी। पक्के घरों ने परिवारों को सुरक्षा दी तो जल जीवन मिशन ने समय व श्रम की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। डीबीटी ने बिचौलियों को हटाकर सीधे लाभार्थियों के खाते में पैसा देना शुरू किया।”

IMD Heavy Rain Alert: मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट! यूपी-MP में आसमान से आफत, इन राज्यों में 3 सितंबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर खतरनाक रूप लेता दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा समेत कई राज्यों में आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का भी खतरा जताया गया है। पिछले 24 घंटे में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ गया है।

यूपी-मध्य प्रदेश में फिर भारी बारिश की दस्तक

पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 28 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। उत्तर प्रदेश में भी 28 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार यह कम दबाव का क्षेत्र फिलहाल पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में मौजूद है, हालांकि अगले 24 घंटे में इसके कमजोर पड़ने की संभावना है।

मध्य प्रदेश में इन दिनों सतर्क रहें

पूर्वी मध्य प्रदेश में 28 से 30 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश की संभावना है। इसके बाद 2 और 3 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रह सकता है:-

  • पूर्वी मध्य प्रदेश में 29 अगस्त से 2 सितंबर तक कहीं-कहीं भारी बारिश होगी।
  • 28 अगस्त और 3 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश में 28 अगस्त तथा 2-3 सितंबर को भारी बारिश की आशंका है।
  • छत्तीसगढ़ में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
  • मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सावधानी की जरूरत है।

ओडिशा में सबसे बड़ा खतरा! 30 अगस्त को बेहद भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट के पास 29 अगस्त के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा में 28 से 31 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। लेकिन 30 अगस्त को स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि मौसम विभाग ने इस दिन अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।

ओडिशा में 28-29 अगस्त और 31 अगस्त को भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा राज्य में गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है।

उत्तराखंड में भी लगातार बारिश का दौर जारी

उत्तराखंड में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। 28 से 30 अगस्त और फिर 2-3 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बहुत भारी बारिश की भी आशंका है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़क संपर्क प्रभावित होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

बिहार में बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट

बिहार में आज यानी 28 अगस्त को मध्यम से गंभीर बिजली गतिविधि की संभावना जताई गई है। राज्य में 28 अगस्त से 1 सितंबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 28 अगस्त से 3 सितंबर के बीच गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है। झारखंड में भी 28 से 31 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

बंगाल और पूर्वोत्तर में भी मौसम बिगड़ेगा

पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी 28 अगस्त से 3 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक बारिश का असर

पिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान में 7-11 सेंटीमीटर, जबकि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में भी इस दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।

दक्षिण भारत में बारिश अपेक्षाकृत कम, लेकिन तेज हवाओं का खतरा

मौसम विभाग ने बताया है कि प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं। फिर भी तटीय कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। उत्तर आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 28-29 अगस्त को तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 50-60 किमी प्रति घंटे तक झोंकों के साथ पहुंच सकती है।

मछुआरों के लिए भी समुद्र में जाने की मनाही जैसा अलर्ट

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्री परिस्थितियों को लेकर मछुआरों को चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश के तटों के आसपास 29 अगस्त से 1 सितंबर के बीच मौसम खराब रहने की संभावना है। अंडमान सागर में भी तेज हवाओं और 50-70 किमी प्रति घंटे तक की थंडरस्क्वॉल की संभावना जताई गई है।

अगले कुछ दिन बेहद अहम

IMD के पूर्वानुमान से साफ है कि 28 अगस्त से 3 सितंबर तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। सबसे ज्यादा चिंता ओडिशा की है, जहां 30 अगस्त को अत्यधिक भारी बारिश का खतरा है। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भी अलग-अलग दिनों में भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह है।

ये भी पढ़ें- Sonia Gandhi Book Row: ‘हम पुस्तक को पब्लिश करने के लिए तैयार थे, लेकिन…’; Penguin ने सोनिया गांधी की किताब छापने से किया इनकार? दी ये सफाई

Sonia Gandhi Book Row: ‘हम पुस्तक को पब्लिश करने के लिए तैयार थे, लेकिन…’; Penguin ने सोनिया गांधी की किताब छापने से किया इनकार? दी ये सफाई

Sonia Gandhi Book Row: ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने शुक्रवार (28 अगस्त) को कहा कि वह कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव (Belonging: A Journey of Love)’ किताब का भारत में प्रकाशक यानी पब्लिशर नहीं है। पेंगुइन का यह बयान अमेरिकी पब्लिशर ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ’ द्वारा यह घोषणा किए जाने के कुछ सप्ताह बाद आया है कि किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ (Alfred A Knopf)’, पेंगुइन रैंडम हाउस का एक प्रकाशन संस्थान है।

 ‘हम किताब को पब्लिश करने के लिए तैयार थे’

कंपनी ने एक बयान में कहा, “पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में ‘बिलॉन्गिंग’ की प्रकाशक नहीं है। यह कहना परिस्थितियों की सही तरीके से प्रस्तुति नहीं है कि लेखिका (सोनिया) द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार करने से इनकार करने के कारण पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इसे प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया है।” यह बयान अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि सोनिया गांधी द्वारा पांडुलिपि में ‘संपादकीय बदलाव’ करने से इनकार करने के बाद प्रकाशक पीछे हट गया।

‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने कहा कि वह ‘किताब प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और उत्सुक’ था। लेकिन लेखकों की तथ्य-जांच करना और उन्हें सुझाव देना प्रकाशन प्रक्रिया के सामान्य हिस्से के रूप में उसका विशेषाधिकार और जिम्मेदारी है। कंपनी ने कहा, “संबंधित चर्चाओं के दौरान पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का रुख यही था कि हम किताब प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और उत्सुक बने हुए हैं। हम लेखिका के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।”

‘किताब के डिस्ट्रीब्यूटर की स्थिति अभी साफ नहीं’

इस बीच, भारत में किताब के डिस्ट्रीब्यूटर की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon के एक पेज पर ‘बिलॉन्गिंग’ का ई-बुक वर्जन 2,615 रुपये में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध दिखा। ई-कॉमर्स वेबसाइट के अनुसार, ई-बुक का पब्लिशर ‘हार्पर कॉलिन्स’ यूके का एक प्रकाशन संस्थान विलियम कॉलिन्स है।

क्या है किताब में?

अल्फ्रेड ए. नॉफ की घोषणा के बाद से ही भारत में किताब के पब्लिशर को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। अल्फ्रेड ए. नॉफ द्वारा कुछ दिनों पहले कहा गया था कि सोनिया गांधी अपनी आत्मकथा में भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से एक में विवाह के बाद अपने जीवन, पति राजीव गांधी की हत्या के दुखद दौर और 2004 में प्रधानमंत्री पद अस्वीकार करने सहित कई निजी अनुभव शेयर करेंगी।

सार्वजनिक रूप से अपने निजी जीवन के बारे में बहुत कम ही बात करने वालीं 79 वर्षीय सोनिया ने इस किताब में युद्ध के बाद के इटली में अपने बचपन से लेकर अपने प्रेम-प्रसंग और उसकी वजह से भारत आने तक की कहानी का वर्णन किया है। इससे पहले जून में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पत्रकार और लेखक जो सैको के 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित ग्राफिक उपन्यास को स्थानीय कानूनी, रेगुलेटरी, कमर्शियल और मार्केट संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हटा दिया था।

ये भी पढ़ें- Nepal Floods: पत्नी से आखिरी बार कहा- ‘बाढ़…’, फिर कट गया फोन, नेपाल में त्रासदी से बचे लोगों ने सुनाई खौफनाक आपबीती

खबरों में दावा किया गया था कि प्रकाशक ने गलत मानचित्र के कारण किताब के डिस्ट्रीब्यूट से हाथ खींच लिया था और मूल पब्लिशर की ओर से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस साल फरवरी में भी पब्लिशर उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसने कहा था कि उसने पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को प्रिंट नहीं किया है। यह बयान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब की एक कॉपी दिखाए जाने के कुछ दिन बाद आया था।

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: ‘वंदे मातरम’ पर शर्मिला टैगोर की बात सुन भड़की कंगना रनौत, बोलीं- आपको एक बार पढ़ना चाहिए

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: अभी ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाने के मौजूदा चलन के बजाय इसके छह पद गाने को लेकर राजनीतिक हंगामा चल रहा है। इसी मुद्दे पर दो अभिनेत्रियों के बीच बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर—जिनका रिश्ता राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है—ने सुझाव दिया कि ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं, क्योंकि बाद के पदों में दुर्गा और काली जैसे हिंदू देवी-देवताओं का ज़िक्र है, जिन्हें एक ईश्वर को मानने वाले लोग शायद स्वीकार न कर पाएं।

कंगना रनौत ने इस विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया और उनसे “हिंदू-मुस्लिम सोच” से आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने समझाया कि देवी-देवताओं का जिक्र रचनात्मक रूपक (metaphors) के तौर पर किया गया है, जिसका मकसद राष्ट्रीय शक्ति को जगाना है, न कि ये कोई धार्मिक आदेश हैं।

छह पदों में क्या कहा गया है? विवाद क्या था?

IANS के साथ एक इंटरव्यू में, अनुभवी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लिखी कविता के सिर्फ दो छंदों (stanzas) को गाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में कई धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं और उन्हें कई देवी-देवताओं का नाम लेने में असहजता महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि जो लोग कड़ाई से एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर में विश्वास) को मानते हैं, उनके लिए “वंदे काली, वंदे दुर्गा” जैसे वाक्यांशों का उच्चारण करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी धार्मिक समुदायों को एकजुट करने के लिए, कविता के शुरुआती दो छंदों तक ही सीमित रहना सबसे समावेशी तरीका है।

कंगना रनौत ने क्या कहा

एक्टर और BJP की लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर तीखी आलोचना की, साथ ही यह भी कहा कि वह अब भी उन दिग्गज स्टार को व्यक्तिगत रूप से पसंद करती हैं और उनका सम्मान करती हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि कोई कलाकार कविता को इतने शाब्दिक अर्थ में कैसे ले सकता है।

उन्होंने कहा कि गानों में शब्दों, कल्पनाओं और उपमाओं का मकसद भावनात्मक असर पैदा करना होता है, न कि धार्मिक क्रियाओं को ठीक-ठीक परिभाषित करना। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान बंकिम चंद्र का दुर्गा या शक्ति का ज़िक्र करना नागरिकों के भीतर आंतरिक उग्रता और शक्ति को जगाने के लिए एक काव्यात्मक आह्वान था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उदाहरण दिय, जिसमें उन्होंने ऐसे युवाओं की ज़रूरत बताई थी जिनकी “नसों में बिजली दौड़ती हो”; उन्होंने कहा कि विवेकानंद मौसम का पूर्वानुमान नहीं दे रहे थे, बल्कि शक्ति की मांग कर रहे थे।

उन्होंने लिखा, “कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ऊर्जा को ‘शक्ति’ कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपना समझकर अपनाएं।”

Vande Mataram: ‘सोनिया गांधी को जनता माफ नहीं करेगी’; अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप, बंकिम चंद्र के वंशज भी नाराज

Vande Mataram Row: कांग्रेस पर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांग की है कि विपक्षी दल इसके लिए देश की जनता एवं गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगे। शाह ने रविवार (16 अगस्त) को आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। शाह चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदे मातरम का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया’

अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया है।” उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम… भारत माता की मैं वंदना करता हूं.. यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।”

शाह ने आगे कहा, “वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को बुला दिया था।” उन्होंने कहा कि यह 150वां साल है वंदेमातरम के प्राकट्य का… लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम रोकने की बात कही?

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए। कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही। हम सब टी.वी. पर देखते रह गए। 80 साल के बाद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का ये अमर गान, जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, वो भी सोनिया गांधी को रास नहीं आता है। सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है।”

शाह ने कहा, “आपके द्वारा किया गया ये पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और थोड़ी भी शर्म बची है तो दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से उन्हें माफी मांगनी चाहिए।”

बंकिम चंद्र के वंशज नाराज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें। चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई।से रोकने के बार-बार प्रयास किए गए। चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश व्यक्त किया। चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को देशभक्ति के धर्म की दीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था। बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी छात्रों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

‘जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी कांग्रेस’

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथित दोहरी नीति नई नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई छात्र परिषद जब मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास गुमनामी के अंधकार में धकेल देगा। चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की है।

क्या है पूरा विवाद?

BJP ने दावा किया है कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर सोनिया गांधी समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। 15 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है जिसमें जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर रही थीं। इसके बाद गांधी और खड़गे को कथित तौर पर गाना रोकने का इशारा करते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोई कोशिश की गई थी। पार्टी ने कहा कि गांधी सिर्फ़ खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। कानून में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया गया है।

ये भी पढ़ें- Vimal Elaichi विज्ञापन पर फंसे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ! महाराष्ट्र FDA ने भेजा नोटिस