Mohan Bhagwat: ‘सिर्फ सत्ता बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं’, फ्रांस-बांग्लादेश के हालात का जिक्र कर बोले मोहन भागवत

Mohan Bhagwat: देश में हाल के दिनों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि “भारत को कमजोर करने” की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों को “कुछ ऐसे तत्वों का समर्थन मिल रहा है, जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित हैं।”

RSS के विजयादशमी समारोह में, फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में चल रही अशांति की ओर इशारा करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “कुछ पश्चिमी ताकतें समाजों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। फ्रांस और अल्बानिया में जो हो रहा है, उसे देखिए; साथ ही बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों पर भी नजर डालिए। बाहरी प्रभाव इस तरह की अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें सत्ता परिवर्तन की बातें भी शामिल हैं। लेकिन, केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याएं हल नहीं हो जातीं।”

भागवत ने आगे कहा, “भारत और संघ को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। पिछले एक दशक में, भारत ने अनुशासित तरीके से प्रगति की है, और कुछ ऐसी ताकतें हैं जो इस प्रगति में बाधा डालना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों को कुछ ऐसे तत्वों का साथ मिल रहा है, जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित हैं।”

भागवत ने आरोप लगाया कि दुनिया भर में इस तरह की गतिविधियां चलाई जाती हैं, ताकि अपने स्वार्थ साधने वाले लोग और उनके “मोहरे” अपना दबदबा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की इन कोशिशों के आड़े आती है।

उन्होंने कहा कि “असली समस्या यह है कि समाज को इन चुनौतियों को समझने की जरूरत है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन एक अहम हिस्सा हैं, लेकिन विरोध का मकसद समस्याओं का समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में और ज्यादा बंटवारा पैदा करना।”

बता दें कि RSS प्रमुख की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच आई है।

भागवत ने की युवाओं की तारीफ

अपने संबोधन के दौरान भागवत ने देश और दुनिया के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का श्रेय भारत की युवा पीढ़ी को दिया। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर हुए इस प्रयास ने इन ताकतों के कथित मंसूबों को नाकाम कर दिया है।

एक विकासशील देश में विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के बारे में बात करते हुए, RSS प्रमुख ने कहा कि समस्याएं बनी रहेंगी क्योंकि भारत अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर समस्याएं हैं, तो आंदोलन भी होंगे। लोकतंत्र में आंदोलन तो होंगे ही।”

मोहन भागवत ने हाल ही में हुई ‘फ्लाईदुबई’ (Flydubai) घटना का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा, “RSS हिंदू चेतना को जगाने और पूरे समाज को एक सुसंगठित और मजबूत समाज के रूप में ढालने का काम कर रहा है… इन्हीं मूल्यों ने कैप्टन स्मित मच्छार को वह करने के लिए प्रेरित किया, जो उन्होंने किया…”

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शेख हसीना बोलीं- सरकार गिरफ्तार या टॉर्चर कर सकती है:फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी; 2024 में छात्र आंदोलन के बाद भारत आई थीं

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को कहा है कि वह दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा, बांग्लादेश की मौजूदा तारिक रहमान सरकार मुझे गिरफ्तार कर सकती है, मार सकती है या टॉर्चर कर सकती है, लेकिन कितना भी खतरा हो, मुझे इसकी परवाह नहीं है। मुझे अपने देश लौटना ही है। उन्होंने आगे कहा कि वह तारिक रहमान की सरकार से डरती नहीं हैं और अपने देश वापस लौटना उनकी जिम्मेदारी है। हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से वह भारत में रह रही हैं। हसीना ने भारत सरकार को शुक्रिया कहा शेख हसीना ने मुश्किल समय में उन्हें शरण देने के लिए भारत सरकार और लोगों का शुक्रिया किया। उन्होंने 1975 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी भारत ने उन्हें सहारा दिया था। हसीना ने कहा, मैं भारत सरकार, यहां के लोगों और सभी राजनीतिक दलों की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मुझे वैसे ही अपनाया, जैसे 1975 में अपनाया था। दरअसल, 1975 में बांग्लादेश में सैन्य तख्तापलट के दौरान हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। वह बांग्लादेश के संस्थापक थे। इस घटना में हसीना की मां, उनके तीन भाइयों और परिवार के कई दूसरे सदस्यों की भी हत्या कर दी गई थी। उस समय हसीना और उनकी बहन अपनी जान बचाने और सुरक्षा के लिए भारत आई थीं। हसीना बोलीं- मेरे खिलाफ मामले चलाकर विपक्ष को दबाया जा रहा शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि वह उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले चलाकर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं पर लगे आरोपों का फैसला निष्पक्ष सुनवाई के जरिए होना चाहिए। उनके मुताबिक, बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और सभी को शामिल करने वाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपनी सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के भारत आने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव शेख हसीना के भारत आने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का कहना है कि हसीना की वापसी कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। बांग्लादेश सरकार हसीना को भगोड़ा अपराधी बताती है। उसने भारत से कहा है कि हसीना को भारतीय जमीन से राजनीतिक गतिविधियां करने या राजनीतिक बयान देने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि शेख हसीना को पनाह देना भारत की मजबूरी थी। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी। दूसरी ओर, भारत ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के साथ रिश्ते बनाए रखने में दिलचस्पी दिखाई है। प्रधानमंत्री मोदी उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने चुनाव में जीत के बाद तारिक रहमान को बधाई दी थी। रहमान की सरकार कई बार प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी तारिक रहमान सरकार ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। हसीना को वापस भेजने के मुद्दे का असर तारिक रहमान के भारत दौरे पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने हुए BRICS समिट में तारिक रहमान को शामिल होने का न्योता दिया था। इसके अलावा फरवरी से ही भारत की ओर से उन्हें अलग से भारत आने का निमंत्रण दिया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक भी बार भारत का दौरा नहीं किया। उनकी तरफ से हर बार हसीना को वापस लौटाने की शर्त रखी गई है। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। ——————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला-सऊदी ने बिना बताए हमारे नागरिकों को फांसी दी:मस्जिद में अश्लील हरकत करने पर पति-पत्नी को मौत की सजा मिली थी सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। पूरी खबर पढ़ें…

ड्रैगन फ्रूट की खेती से छप्परफाड़ कमाई! महाराष्ट्र के किसान ने अपनाया ऐसा तरीका, आज सालाना ₹2 करोड़ का कारोबार!

किसान अगर कुछ नया करने की ठान ले, तो खेती से भी करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले महेश असाबे ने इसे सच कर दिखाया है। उनके परिवार ने कुछ साल पहले सिर्फ 3 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया था। आज उनका फार्म 60 एकड़ तक फैल चुका है और सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये पहुंच गया है। खास बात यह है कि महेश ने खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाई और दूसरे देशों से भी सीख ली। उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।

पिता ने शुरू की थी खेती

महेश असाबे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकोला गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करता था। महेश ने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड फूड प्रोसेसिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।

साल 2013-14 में उनके पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस फल के बारे में पढ़ा था और जाना था कि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। सूखे इलाकों में भी इसकी खेती की जा सकती है। यही बात उन्हें इस फसल की ओर खींच लाई।

बांग्लादेश से मंगाए 9,000 पौधे

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना परिवार के लिए एक नया प्रयोग था। इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश से करीब 9,000 पौधे मंगवाए। Startup Pedia के मुताबिक, पौधों पर शुरुआती निवेश करीब ₹9.9 लाख था। परिवार ने तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। साल 2015-16 में पहली फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ करीब पांच टन उत्पादन मिला। उपज बेचकर परिवार को लगभग ₹5 लाख की कमाई हुई।

धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की मांग और कीमत बढ़ने लगी। साल 2017 तक परिवार इसे ₹150 से ₹250 प्रति किलो के भाव पर बेचने लगा। इससे खेती को बड़े स्तर पर ले जाने का हौसला मिला।

इजरायल और वियतनाम से सीखी खेती की नई तकनीक

महेश ने खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। पढ़ाई के दौरान वह 45 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इजरायल गए। वहां उन्होंने पानी का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक कृषि तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखे। साल 2018 में उन्होंने वियतनाम का दौरा भी किया, जहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीकों को समझा। लौटकर उन्होंने अपने खेत में एक-एक एकड़ के अलग-अलग प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए, ताकि खेती की विभिन्न तकनीकों को आजमाया जा सके।

3 एकड़ से 60 एकड़ तक पहुंचा फार्म

आज महेश असाबे Rukmini Farms and Nursery का संचालन करते हैं। उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट के अलावा अनार, सीताफल और अमरूद भी उगाए जाते हैं।

खेती में पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और तालाब जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। निराई जैसे नियमित कामों में मशीनों का इस्तेमाल भी शुरू किया गया, जिससे खेती को संभालना आसान हुआ।

ड्रैगन फ्रूट से ₹1.25 करोड़ की सालाना कमाई

Startup Pedia के मुताबिक, महेश ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल करीब ₹1.25 करोड़ कमाते हैं। उनके फार्म में सालाना लगभग 200 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे फलों से होने वाली कमाई को जोड़ दें, तो उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब ₹2 करोड़ पहुंच जाता है।

महेश की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक अपनाना, बाजार की मांग समझना और लगातार सीखते रहना कितना महत्वपूर्ण है। तीन एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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बांग्लादेश बोला-सऊदी ने बिना बताए हमारे नागरिकों को फांसी दी:मस्जिद में अश्लील हरकत करने पर पति-पत्नी को मौत की सजा मिली थी

सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। बांग्लादेश सरकार ने रविवार को कहा है कि उसे सजा होने से पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्हें इस मामले का पता फांसी दिए जाने के बाद चला। कैदियों की सूची में नाम थे, लेकिन सजा का जिक्र नहीं था द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में बांग्लादेश के दूतावास ने जेलों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मांगी थी। सऊदी सरकार ने जो सूची भेजी, उसमें इस पति-पत्नी के नाम भी शामिल थे। हालांकि, सूची में यह जानकारी नहीं थी कि दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि उनकी सरकार ने मामले की ज्यादा जानकारी लेने के लिए सऊदी अरब से संपर्क किया है। सऊदी सरकार का जवाब मिलने के बाद ही बांग्लादेश तय करेगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएं। सऊदी सरकार ने कहा- मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को इस्लामी कानून के तहत ‘ताजीर’ के नियमों के आधार पर मौत की सजा दी गई। ताजीर ऐसी सजा होती है, जिसकी गंभीरता तय करने का अधिकार न्यायाधीश के पास होता है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों का अपराध गंभीर था और उन्होंने मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया था। इसी वजह से उन्हें मौत की सजा दी गई। सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रहते हैं सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रहते और काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो कम वेतन वाली नौकरियां करते हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक और आर्थिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। ऐसे में बांग्लादेशी नागरिकों को सजा दिए जाने के मामले में दोनों देशों के बीच जानकारी साझा किए जाने का सवाल अहम हो गया है। बांग्लादेश सरकार अब सऊदी अरब के जवाब का इंतजार कर रही है। सऊदी अरब में इस साल करीब 100 लोगों को फांसी एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, सऊदी अरब में इस साल अब तक करीब 100 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। कई विदेशी नागरिकों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। इससे पहले 2011 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आठ बांग्लादेशी पुरुषों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। उन्हें मिस्र के एक नागरिक की हत्या का दोषी ठहराया गया था। फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में श्रीलंकाई नागरिक की सजा रद्द इसी महीने सऊदी अरब ने श्रीलंका के एक नागरिक की मौत की सजा रद्द कर दी थी। उसे फेसबुक पर एक टिप्पणी करने के लिए धर्म का अपमान करने का दोषी ठहराया गया था। इस मामले को लेकर श्रीलंका में विरोध हुआ था। इसके बाद उस व्यक्ति को राहत दिलाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें की गईं। आखिरकार, सऊदी अरब ने उसकी मौत की सजा रद्द कर दी। ———————– यह खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया की महिला सांसद हेलेन को कार से कुचला:ऑफिस के बाहर मारी टक्कर, हालत गंभीर; 43 साल का आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार ऑस्ट्रेलिया में निर्दलीय महिला सांसद हेलेन हेन्स को सोमवार को उनकी ऑफिस के बाहर कार से कुचल दिया गया। 65 साल की हेन्स की हालत गंभीर है। उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

IMD Rain Alert: इन राज्यों में अगले 7 दिन होगी आफत वाली बारिश! 25 अक्टूबर तक आंधी-बिजली का भी खतरा, आपके इलामें ऐसा रहेगा मौसम

IMD Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, दक्षिण भारत के राज्यों में 25 अक्टूबर तक बारिश का दौर जारी रहने की आशंका है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 21 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, केरल और माहे में आज यानी 19 से 25 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भी अलग-अलग दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, कई इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का भी खतरा है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में हवा की रफ्तार झोंकों के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके अलावा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी कुछ दिनों तक बारिश और खराब मौसम देखने को मिल सकता है।

मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में बहुत भारी बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:30 बजे तक समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। इन इलाकों में बारिश की मात्रा 12 से 20 सेंटीमीटर के बीच रही। वहीं, केरल और तटीय कर्नाटक में भारी बारिश दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। लगातार बारिश के कारण दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रहने की संभावना है।

किस राज्य में कब होगी बारिश? जानिए IMD का पूरा पूर्वानुमान

तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

आज यानी 19 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 22 से 25 अक्टूबर के दौरान भी कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। 19 से 25 अक्टूबर तक गरज-चमक, बिजली और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

केरल और माहे में सात दिन बारिश की आशंका

19 से 25 अक्टूबर तक कई स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। 19 और 20 अक्टूबर को 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि 21 से 23 अक्टूबर के बीच गरज-चमक, बिजली और 40-50 किमी प्रति घंटे की हवाओं के झोंके आने की संभावना है।

कर्नाटक में अलर्ट

तटीय कर्नाटक में 19 से 22 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 23 और 24 अक्टूबर को कई जगहों पर बारिश की संभावना है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 21 से 24 अक्टूबर तक व्यापक बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। उत्तर आंतरिक कर्नाटक में भी 22 और 23 अक्टूबर को तेज हवाओं के साथ मौसम सक्रिय रह सकता है।

तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा

तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 19 से 21 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। 20 और 21 अक्टूबर को गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। रायलसीमा में 21 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है। यहां 19 से 23 अक्टूबर के दौरान तेज हवाओं का भी अनुमान है।

लक्षद्वीप

19 से 25 अक्टूबर तक कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। 22 से 25 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 19 और 20 अक्टूबर को तेज हवाएं तथा 21 से 23 अक्टूबर के दौरान गरज-चमक और 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के झोंके आने की संभावना है।

अंडमान-निकोबार में भी बारिश का दौर

पूर्वी भारत में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और ओडिशा में मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, अंडमान-निकोबार में 19 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 20 से 25 अक्टूबर तक कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। द्वीप समूह में 20 अक्टूबर और फिर 23 से 25 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 19 और 20 अक्टूबर को गरज-चमक, बिजली और 30–40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिनके झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

ओडिशा में 19 से 22 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 19 और 20 अक्टूबर को यहां गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं का भी अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 19 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।

अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र, चक्रवात बनने की संभावना

मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र 19 अक्टूबर की सुबह भी उसी इलाके में सक्रिय था। अगले 24 घंटों के दौरान इसके और मजबूत होकर डिप्रेशन यानी अवदाब में बदलने की संभावना है। इसके बाद यह मौसम तंत्र अगले 2 से 3 दिनों में पहले पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा और फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में सोमालिया के तट की ओर बढ़ सकता है।

हालांकि, मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान में इस सिस्टम के चक्रवात में बदलने की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल इसके अवदाब में मजबूत होने की संभावना जताई गई है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी तमिलनाडु के तट के आसपास ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इससे जुड़ी एक ट्रफ रेखा उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और आसपास के पंजाब क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। थाईलैंड की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों तथा दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश और त्रिपुरा के पास भी ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।

दिल्ली-UP समेत उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत का कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, पश्चिम भारत और पूर्वोत्तर भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान किसी बड़े मौसमी बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है। इसका मतलब है कि फिलहाल इन क्षेत्रों के लिए कोई महत्वपूर्ण व्यापक मौसमी गतिविधि का अनुमान नहीं है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

मछुआरों के लिए चेतावनी, समुद्र में जाने से पहले बरतें सावधानी

IMD ने मछुआरों के लिए समुद्री क्षेत्रों में चेतावनी जारी की है:- 

  • 19 से 22 अक्टूबर: दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और उससे सटे समुद्री क्षेत्रों में सावधानी बरतने की जरूरत है।
  • 22 से 24 अक्टूबर: केरल और कर्नाटक के तटों के पास तथा लक्षद्वीप क्षेत्र में मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
  • बंगाल की खाड़ी: मौसम विभाग के इस बुलेटिन में कोई मछुआरा चेतावनी जारी नहीं की गई है।

    मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे समुद्र में जाने से पहले मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

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नेहा बोरा, प्रशांत भूषण पर कांग्रेस की सफाई

कांग्रेस पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी, आइसा और सिविल सोसायटी के कुछ अति उत्साही लोगों के चक्कर में फंस गई है। अभिजीत दीपके के कॉकरोच जनता पार्टी के लोग पुलिस वालों से लेकर जजों के खिलाफ बयान दे रहे हैं या धमका रहे हैं। वे इस अहंकार में घूम रहे हैं कि हमने तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लिया तुम्हारी क्या औकात है। ऐसे ही सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की नेता नेहा बोरा ने कह दिया कि उनको बांग्लादेश में युवाओं के आंदोलन से प्रेरणा मिली। बची खुशी कसर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने पूरी कर दी। उन्होंने 16 अक्टूबर के तिरंगा मार्च की जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अति उत्साह में आकर कह दिया कि आंदोलन का मकसद ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता बदलने का है।

इससे भारतीय जनता पार्टी को मौका मिल गया। उसने नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के बयान को एक साथ मिला दिया। उसने कहना शुरू कर दिया कि कांग्रेस और उसकी तरफ से प्रदर्शन कर रहे लोग बांग्लादेश के मॉडल का इस्तेमाल करके भारत में सत्ता बदलना चाहते हैं। भाजपा ने इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए राजनाथ सिंह के उतार दिया। उन्होंने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह बात कही। उसके बाद से इसका प्रचार हो रहा है।

इस प्रचार के कारण कांग्रेस बैकफुट पर आई। कांग्रेस नेताओं को मीडिया के सामने और सोशल मीडिया में सफाई देनी पड़ रही है। जयराम रमेश ने भी सफाई दी। लेकिन न तो नेहा बोरा को फर्क पड़ रहा है और प्रशांत भूषण को। तभी कांग्रेस के नेता इस मामले में गलती स्वीकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के दौरान राहुल का नेहा बोरा के कंधे पर हाथ रखना और उसके अगले दिन घर पर चाय पार्टी में बुला कर मीडिया के सामने बयान दिलवाना ठीक फैसला नहीं था।

अराजकता फैलाना चाहता है विपक्ष

प्रशांत भूषण ने ‘रिजीम चेंज’ की बात कही। वे वकील हैं और राजनीति में भी खूब सक्रिय रहे हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी में थे, जहां से अरविंद केजरीवाल ने उनको निकाल दिया। उन्होंने जब ‘रिजीम चेंज’ की बात कही तो उसका एक खास संदर्भ होता है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को रिजीम नहीं कहा जाता है। रिजीम का मतलब होता है तानाशाहों का शासन, जिसको जन विद्रोह के जरिए या विदेशी ताकतों के समर्थन से बदला जाता है।

विपक्ष के चेहरे पर लोकतंत्र, संविधान, संसदीय प्रणाली, गांधी मार्ग आदि का जो झीना सा परदा था वह परदा भी गिर गया है। उसकी असलियत खुल कर सामने आ गई है। देश और दुनिया को यह पता चल गया है कि भारत का विपक्ष बांग्लादेश के कट्टरपंथी जमात के लोगों के आंदोलन से प्रभावित है और उसी मॉडल पर देश में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता बदलने की मंशा से काम कर रहा है। निष्कर्ष अनजाने में दिए गए किसी प्रदर्शनकारी के बयान या किसी की जुबान से अनायास निकल गए किसी जुमले पर आधारित नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने के लिए प्रदर्शन कर रहे दो अलग अलग लोगों ने इस तरह के बयान दिए है। इसलिए यह सिर्फ संयोग नहीं हो सकता है। सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि वे बांग्लादेश के आंदोलन और वहां के आंदोलनकारियों से प्रभावित हैं तो सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी और आइसा नेताओं की मौजूदगी में कहा कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य ‘रिजीम चेंज’ करना यानी सत्ता बदलना है।

देश के सामान्य नागरिकों को यह समझना चाहिए कि ये दोनों बातें कितनी खतरनाक हैं। एक तो बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा और दूसरी उसी मॉडल से ‘रिजीम चेंज’ की बात, दोनों के गहरे निहितार्थ हैं। सबसे पहले यह समझने की जरुरत है कि बांग्लादेश में क्या हुआ था। बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘जमात ए इस्लामी’ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन किया था। बाद में जब आरक्षण के नियमों में बदलाव किए गए तो कुछ युवा भी उस आंदोलन में जुड़े। लेकिन चाहे जमात के लोग हों या युवाओं की ‘नेशनल सिटीजंस पार्टी’ के लोग हैं, सबने आंदोलन के दौरान जितना सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया उससे ज्यादा हमला वहां के अल्पसंख्यकों यानी हिंदुओं पर किया। बांग्लादेश के ‘जेन जी’ का पूरा आंदोलन वहां के हिंदुओं के खिलाफ था। किस तरह के जघन्य कांड हुए, वह पूरी दुनिया ने देखा। हिंदुओं के घरों को चारों तरफ से घेर कर उनमें आग लगाई गई। हिंदुओं की हत्या करके उनके शव पेड़ से लटकाए गए। क्या भारत में ऐसे हालात बनाना चाहते हैं प्रदर्शनकारी?

उस आंदोलन के बाद भी बांग्लादेश में क्या बदला? हिंसक आंदोलन के जरिए एक चुनी हुई सरकार को हटा दिया गया और एक कठपुतली के रूप में मोहम्मद यूनुस को बैठाया गया। यूनुस के शासन में बांग्लादेश के हिंदुओं पर जितने अत्याचार हुआ उनकी मिसाल नहीं है। उसके बाद भी जब चुनाव हुए तो उसका नतीजा यह निकला कि युवा देखते रह गए और सैनिक तानाशाह रहे जिया उर रहमान व खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान देश के प्रधानमंत्री बन गए। क्या ऐसा ही आंदोलन नेहा बोरा भारत में करना चाहती हैं कि एक चुनी हुई सरकार को अराजकता के जरिए हटाने का प्रयास किया जाए, उसके बाद कोई कठपुतली बैठे और फिर पुराने राज परिवार के किसी व्यक्ति को सत्ता मिल जाए? भारत के विकास और मजबूती से ईर्ष्या कर रहे बहुत से देश भारत की जनता द्वारा लगातार तीसरी बार चुनी हुई सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अस्थिर करना चाह रहे हैं। क्या यह आंदोलन उन विदेशी ताकतों की मंशा पूरी करने के लिए चलाया जा रहा है?

इन बयानों को इस संदर्भ में देखने का कारण यह भी है कि प्रशांत भूषण ने ‘रिजीम चेंज’ की बात कही। वे वकील हैं और राजनीति में भी खूब सक्रिय रहे हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी में थे, जहां से अरविंद केजरीवाल ने उनको निकाल दिया। उन्होंने जब ‘रिजीम चेंज’ की बात कही तो उसका एक खास संदर्भ होता है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को रिजीम नहीं कहा जाता है। रिजीम का मतलब होता है तानाशाहों का शासन, जिसको जन विद्रोह के जरिए या विदेशी ताकतों के समर्थन से बदला जाता है। रिजीम सीरिया में असद था, इराक में सद्दाम का था और लीबिया में गद्दाफी का था। भारत में रिजीम नहीं होता है। भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार होती है, जिसे लोकतांत्रिक तरीके से ही बदला जाता है। इंदिरा गांधी की तानाशाही और इमरजेंसी का जवाब भी इस देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से ही दिया था। उनको वोट के जरिए हराया गया था। नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने लगातार तीसरी बार वोट देकर प्रधानमंत्री चुना है। इस जनादेश के बाद नरेंद्र मोदी सबसे ज्यादा समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। देश की जनता न सिर्फ उनको बार बार देश की सत्ता सौंप रही है, बल्कि उनकी अपील पर बंगाल, असम जैसे पूर्वी व पूर्वोत्तर के राज्यों से लेकर पश्चिम में गुजरात और महाराष्ट्र तक भाजपा की सरकार बनवाती है। इतने लोकप्रिय नेता के शासन को ‘रिजीम’ कहना अपने आप में विपक्ष के लोगों की मंशा दिखाने वाला है।

असल में चाहे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हों या कॉकरोच जनता पार्टी जैसे सोशल मीडिया हैंडल्स हों या आइसा जैसे छात्र संगठन हों या प्रशांत भूषण जैसे कथित सिविल सोसायटी के लोग हों, इनका प्रदर्शन एक खास राजनीतिक मंशा से प्रेरित है। वह राजनीतिक मंशा है सरकार बदलने की। दूसरी बात यह है कि इनके प्रदर्शन से आम आदमी का कोई लेना देना नहीं है। जंतर मंतर पर सीजेपी का पहला प्रदर्शन पीड़ित पक्ष यानी पेपर लीक से प्रभावित हुए छात्रों, युवाओं और उनके परिजनों का था। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो प्रदर्शन हो रहा है वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में नाम कटने से प्रभावित मतदाताओं का नहीं है। ऐसे लोग तो सामने आ ही नहीं रहे हैं। क्योंकि ऐसे वास्तविक मतदाता बहुत कम हैं, जिनके नाम कटे हैं और अगर कट गए हैं तो वे उसे जुड़वाने की कोशिश कर रहे हैं। तभी किसी प्रदर्शन में ऐसे लोग नहीं दिख रहे हैं, जिनके नाम कटे हैं। प्रदर्शन के दौरान, जिससे भी पूछा जाता है, वह कहता है कि उसका नाम मतदाता सूची में है। जब प्रभावित पक्ष आंदोलन में नहीं शामिल है तो इसका क्या मतलब है?

जाहिर है इसका मकसद अराजकता फैलाना है। लोगों की भावनाओं को उभार कर सरकार के खिलाफ नाराजगी पैदा करना है। इसमें भी कोई बुराई नहीं है। विपक्ष का यही काम है कि वह सरकार के खिलाफ आम आदमी के मन में नाराजगी बढ़ाने की कोशिश करे। लेकिन इसके लिए पहले आम आदमी के मन में नाराजगी होनी भी तो चाहिए? जिस मामले में आम आदमी प्रभावित था वहां जुड़ा और सरकार ने भी उसे समझते हुए तत्काल केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा कराया। लेकिन मौजूदा प्रदर्शन तो आम आदमी का है ही नहीं। यह राजनीतिक दलों का विरोध है और इसका मकसद संवैधानिक या लोकतांत्रिक तरीके से कोई मुद्दा उठाना नहीं, बल्कि अराजकता फैलाना है। अगर अराजकता फैलाना मकसद नहीं होता है तो क्या कोई समझदार नेता या राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करता है? आपने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया यहां तक तो बात समझ में आती है। लेकिन विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। कांग्रेस की एक प्रदेश कमेटी की ओर से चीफ जस्टिस के लिए असम्मानजनक संबोधन वाला पोस्ट किया गया, जिसे बाद में डिलीट किया गया। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने चीफ जस्टिस के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। यह इससे पहले कभी नहीं हुआ था।

विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को कोहनी मार रहे थे। प्रदर्शनकारी महिला पुलिसकर्मियों की वर्दी पर हाथ डाल रहे थे और उनके नाम सोशल मीडिया में उजागर करके उनको शर्मिंदा करने की कोशिश कर रहे थे। यह सब पहले कभी नहीं हुआ। पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस को उकसाने का प्रयास किया गया ताकि पुलिस पलट कर कार्रवाई करे तो उसका मुद्दा बनाया जाए। यह सोची समझी रणनीति के तहत किया जा रहा था। पूरे प्रदर्शन का मकसद चुनाव आयोग की साख और देश के स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना है। इसके जरिए विपक्ष यह दिखाना चाहता है कि वह अपनी कमजोरी से नहीं हार रहा है, बल्कि उसको हराया जा रहा है। लेकिन इसकी हकीकत देश की जनता से बेहतर और कौन जानता है! आखिर जनता ही वोट देकर भाजपा को जीता रही है और कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों को हरवा रही है। विपक्ष को जनता के जनादेश को अराजक आंदोलनों के जरिए चुनौती देने की बजाय राजनीतिक रूप से अपने को मजबूत करके आगे की लड़ाई की तैयारी करनी चाहिए।

(लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)

बांग्लादेश में पिस्तौल लेकर ड्रग्स तस्करों को पकड़ने पहुंचे मंत्री:6 लोगों को पकड़ा, पुलिस बोली- उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं

बांग्लादेश में एक मंत्री का हाथ में पिस्तौल लेकर ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने का वीडियो सामने आया है। मंत्री इशराक हुसैन राजधानी ढाका की एक बस्ती में अपने साथियों के साथ पिस्तौल लेकर घूमते, लोगों से बात करते दिख रहे हैं। उनके साथ के लोग स्थानीय निवासियों को पकड़ते और तिरपाल से बनी झोपड़ियां तोड़ते दिख रहे हैं। यह घटना शनिवार को गेंडारिया इलाके में हुई। मंत्री और उनके लोगों ने 6 लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। वीडियो सामने आने के बाद मंत्री के ऐसा करने को लेकर आलोचना हो रही है। पुलिस ने भी साफ किया है कि छापेमारी का अधिकार कानून लागू करने वाली एजेंसियों के पास है। मंत्री की कार्रवाई से जुड़े 3 फुटेज… मंत्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया बांग्लादेश के राज्य मंत्री इशराक हुसैन ने बाद में अपने फेसबुक पेज पर कार्रवाई का वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 6 लोगों को पकड़ा गया। हालांकि, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिप्टी कमिश्नर मलिक अहसान उद्दीन सामी ने बताया कि पुलिस 10 लोगों को गेंडारिया थाने लेकर गई। उनके मुताबिक, मंत्री ने कुछ लोगों को पकड़ने के बाद पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने जांच के बाद उन्हें हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि छापेमारी करने का अधिकार केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों को है। हालांकि, बांग्लादेश में कोई भी नागरिक अपराध के संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले कर सकता है। गेंडारिया थाने के प्रभारी मोनिरुज्जमान मोनिर ने बताया कि पकड़े गए लोगों के पास से सफेद पाउडर जैसा पदार्थ मिला है। लेकिन यह ड्रग्स है या नहीं, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला में जांच के बाद ही होगी। अपनी पार्टी के लोगों को भी चेतावनी दी इशराक ने कहा कि ड्रग्स की वजह से देश के युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले 6 महीने से इस मामले में जानकारी जुटा रहे थे। मंत्री ने कहा कि अगर उनकी अपनी पार्टी का कोई व्यक्ति ड्रग्स के कारोबार में शामिल पाया गया, तो उसे और कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह उनकी कार्रवाई का सबसे अहम राजनीतिक पहलू है। उन्होंने कहा, ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान मेरे निर्वाचन क्षेत्र से शुरू हुआ है। यह पूरे बांग्लादेश में फैलेगा। देश में कहीं भी ड्रग्स के लिए जगह नहीं होगी। मंत्री ने कहा कि जो लोग बाहर से आकर ड्रग्स की सप्लाई करने वालों को पकड़ने में मदद करेंगे, उन्हें वे सम्मान देंगे। लोगों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की गुहार लगाई खबर के मुताबिक, पकड़े गए लोगों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की अपील की। इस पर मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि कोई उन्हें मारेगा नहीं। उन्हें पुलिस के हवाले किया जाएगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। मंत्री ने कहा, “कोई तुम्हें हाथ नहीं लगाएगा और न ही तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा। तुम्हें थाने ले जाया जाएगा और पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी। हम यहां तुम्हें पीटने नहीं आए हैं। देश कानून से चलेगा। तुम्हारा मुकदमा चलेगा और न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिलेगी।”

बांग्लादेश के रिजॉर्ट में आग, 10 की मौत:इनमें 6 लोग एक ही परिवार के; बिना फायर सेफ्टी लाइसेंस के रिजॉर्ट चल रहा था

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में शनिवार सुबह समुद्र किनारे बने एक रिजॉर्ट में आग लगने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक ही परिवार के 6 सदस्य शामिल हैं। आग सुबह करीब 7:25 बजे टुपटुप रेस्टो एंड रिजॉर्ट में लगी। तीन मंजिला लकड़ी की इमारत आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। रिजॉर्ट के पास आग से बचाव के इंतजामों की मंजूरी नहीं थी। जून में चेकिंग के दौरान अधिकारियों ने इसे लेकर चेतावनी भी दी थी। शार्ट सर्किट की वजह से आग लगने की आशंका बांग्लादेश के अखबार प्रोथोम आलो ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। इसके बाद यह आग एयर कंडीशनर में लगी। गैस सिलेंडर में विस्फोट के बाद आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की असली वजह का पता चल सकेगा। आग लगने के समय रिजॉर्ट में करीब 30 लोग मौजूद थे। इनमें से 4 से 5 लोग किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे। बाकी लोगों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। दूसरी मंजिल से कूदकर जान बचाई, पत्नी समेत 5 लोग जल गए तीन मंजिला रिजॉर्ट बांस और लकड़ी से बना था। यह कॉक्स बाजार के लोकप्रिय समुद्र तटीय इलाके कोलातोली के बाहरी हिस्से में स्थित था। यह जगह राजधानी ढाका से करीब 410 किलोमीटर दूर है। रिपोर्ट के मुताबिक अशिकुल इस्लाम अपने परिवार के साथ रिजॉर्ट में छुट्टियां मनाने आए थे। आग लगने पर उन्होंने दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। हालांकि, उनकी पत्नी इसरत जहां मलिहा और परिवार के पांच और लोगों की मौत हो गई। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक जिन 10 मृतकों की पहचान हुई है, उनमें इसरत जहां मलिहा (30), मिलिता मेहेजाबीन अल्वी (23), लैला जहां नाबिला (27), नफिस्ता मीम (27), फरिहा कबीर (33) और पांच साल का फैजान अहमद शामिल हैं।

वसीम जाफर ने किया मुख्य चयनकर्ता पद के लिए आवेदन, ऐसा रहा है करियर

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा आमंत्रित चयन समिति के लिए मुख्य चयनकर्ताओं के लिए आवेदन किया है। यह पोस्ट BCCI ने कुछ दिनों पहले  एक्स पर अजीत आगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद की थी जिसपर वसीम जाफर ने आवेदन किया।

वसीम जाफर लंबे समय तक रहे भारतीय टेस्ट ओपनर

साल 2020 में क्रिकेट के सभी प्रारुपों से संन्यास लेने वाले वसीम जाफर ने भारत की तरफ से 31 टेस्ट मैचों में 34.11 की औसत से 1,944 रन बनाए जिसमें 5 शतक और 11 अर्द्धशतक शामिल हैं। उनका उच्चतम स्कोर 212 रन है।यह सलामी बल्लेबाज उन कुछ भारतीय बल्लेबाजों में शामिल है जिन्होंने वेस्टइंडीज में दोहरा शतक लगाया है। उन्होंने कैरेबियाई टीम के खिलाफ सेंट लूसिया में 212 रन बनाए थे

जाफर ने 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच 2006 में इसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेला था। जाफर ने केवल 2 वनडे खेले जिनमें 10 रन बनाए। उन्हें हालांकि घरेलू क्रिकेट विशेषकर रणजी ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन के लिए याद किया जाता है।

वे रणजी ट्रॉफी में 12,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज हैं। उन्होंने अपने करियर में अधिकतर समय मुंबई का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन बाद के दिनों में वे विदर्भ से खेलने लगे थे। वे रणजी ट्रॉफी में 150 मैच खेलने वाले पहले बल्लेबाज हैं। जाफर ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 1996-97 में पदार्पण किया था।जाफर को घरेलू क्रिकेट का दिग्गज माना जाता है। उन्होंने 260 प्रथम श्रेणी मैचों में 19,000 से ज्यादा रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 50.67 रहा है और उनका सर्वाधिक स्कोर 314 है।

बांग्लादेश क्रिकेट के बल्लेबाजी सलाहकार रह चुके वसीम

साल 2019 में  बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने मीरपुर स्थित अपनी अकादमी के लिए बल्लेबाजी सलाहकार नियुक्त किया था। पहले जाफर ने अकादमी में अंडर-16 और अंडर-19 आयु वर्गों की टीमों को कोचिंग दी थी।बांग्लादेश के युवा बल्लेबाजों के साथ जाफर ने 6 महीने बिताए थे।