महीने की 2 लाख कमाई और 1 लाख सीधा मुनाफा! बेंगलुरु का यह बार्बर कमा रहा है बंपर प्रॉफिट, जानें इनकी सक्सेस सीक्रेट

कई बार बिजनेस शुरू करने के लिए बड़े ऑफिस, महंगे ऐप या लाखों रुपये की टेक्नोलॉजी की जरूरत नहीं होती। लोगों की रोज की जरूरत से जुड़ा कोई साधारण काम भी अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है। बेंगलुरु के एक नाई की कहानी इसी बात का उदाहरण बनकर सामने आई है।एक समय खुद बाल काटने का काम करने वाले इस शख्स ने आगे चलकर अपना सैलून शुरू किया और धीरे-धीरे कारोबार को बढ़ाकर चार आउटलेट तक पहुंचा दिया। सोशल मीडिया पर सामने आई इस कहानी ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा, क्योंकि इसमें एक छोटे और आम दिखने वाले बिजनेस करके कमाई की बढ़ती संभावना दिखाई देती है।

मालिक ने सीधे किसी बड़े बिजनेस या इन्वेस्टमेंट से शुरुआत नहीं की थी। वह पहले खुद नाई का काम करता था और इसी काम का एक्सपीरियंस लेकर आगे अपना सैलून शुरू किया। काम बढ़ने के साथ उसने कारोबार को भी बड़ा किया और अब उसके चार सैलून चलने की बात कही जा रही है। इससे यह भी पता चलता है कि किसी काम का एक्सपीरियंस आगे चलकर अपना बिजनेस खड़ा कर सकता है और उसके लिए ये फॉर्मूला अपना सकते है।

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1. बिजनेस मॉडल (सैलून)

सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, इस सैलून से महीने में करीब 2 लाख रुपये का रेवेन्यू आता है। इसमें से दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी और कमीशन जैसे खर्च निकालने के बाद करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये तक बचने का दावा किया गया है। यानी रोज की जरूरत वाली सर्विस होने की वजह से सैलून का कारोबार लगातार कस्टमर पर डिपेंड रहकर चल सकता है। लेकिन कमाई का यह आंकड़ा हर महीने एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

2. रेवेन्यू और प्रॉफिट

Reddit यूजर के मुताबिक, उनकी दोस्त ने सैलून में काम करने वाले नाई से पूछा कि दुकान से मालिक की कितनी कमाई होती है। जवाब में बताया गया कि सैलून से हर महीने करीब ₹2 लाख का रेवेन्यू आता है। इसमें से दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी और कमीशन जैसे खर्च निकालने के बाद मालिक के पास करीब ₹80 हजार से ₹1 लाख तक बच सकते हैं। यानी कमाई सिर्फ हेयरकट से नहीं, बल्कि खर्चों को संभालकर और कस्टमर की संख्या बनाए रखकर होती है।

3. बिजनेस प्रैक्टिस और एक्सपेंस

इस कहानी पर चर्चा करते हुए कई लोगों ने कहा कि रोज की जरूरत से जुड़े छोटे बिजनेस में अच्छी कमाई हो सकती है। हेयरकट और ग्रूमिंग ऐसी सर्विस हैं जिनकी लोगों को बार-बार जरूरत पड़ती है। इसी तरह चाय की दुकान, नाश्ते की दुकान या दूसरी लोकल सर्विस भी सही जगह और अच्छे कस्टमर बेस के साथ अच्छा बिजनेस कर सकती है।

4. बिजनेस एक्सपीरियंस 

सैलून की कमाई सुनकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति इतनी ही कमाई आसानी से कर सकता है। दुकान खोलने के लिए जगह का किराया, फर्नीचर, मशीनें, स्टाफ, बिजली, सामान और शुरुआती महीनों का खर्च उठाना पड़ता है। इसके अलावा अच्छी लोकेशन पर पहले से कई सैलून मौजूद हो सकते हैं, जिससे मुकाबला भी बढ़ जाता है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने बड़े सैलून या फ्रैंचाइजी के लिए काफी ज्यादा शुरुआती इन्वेस्टमेंट की जरूरत होने की बात भी कही है।

ध्यान दें

यह जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट और यूजर्स के दावों पर आधारित है। इसे किसी बिजनेस की गारंटी या इस्वेस्टमेंट की सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

23 साल के BBA ग्रेजुएट ने नौकरी छोड़ चुना स्टार्टअप का रास्ता, डेढ़ साल में खड़ी कर दी 20 करोड़ की कंपनी

सफलता हासिल करने के लिए हमेशा लंबा अनुभव जरूरी नहीं होता, कई बार एक मजबूत सोच और सही दिशा भी कम उम्र में बड़ी उपलब्धि दिला सकती है। तेलंगाना के युवा साईतेजा गोपिशेट्टी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी के रास्ते के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। कृषि क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने Luminara Legacy नाम से स्टार्टअप शुरू किया, जो किसानों को बेहतर बीज, कृषि उत्पाद और खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर काम करता है।

खास बात यह है कि शुरुआत के महज डेढ़ साल में ही उनकी कंपनी ने करोड़ों रुपये की वैल्यूएशन हासिल कर ली। साईतेजा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो नए आइडिया के साथ अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं।

कृषि क्षेत्र में उतरे साईतेजा, शुरू किया Luminara Legacy

साईतेजा गोपिशेट्टी Saiteja Gopishetty ने Luminara Legacy Pvt. Ltd. की शुरुआत की। यह एग्रीकल्चर स्टार्टअप किसानों को बेहतर बीज, कीटनाशक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर काम करता है। उनका लक्ष्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर उत्पादों के जरिए ज्यादा उत्पादन हासिल करने में मदद करना है।

23 की उम्र में ₹20 करोड़ का सफर

सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, साईतेजा ने ग्रेजुएशन के करीब डेढ़ साल बाद अपनी कंपनी को ₹20 करोड़ के स्तर तक पहुंचा दिया। उनकी कंपनी अब 2028 तक ₹100 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

छोटी उम्र, बड़ा विजन

साईतेजा की कहानी यह दिखाती है कि सफलता सिर्फ उम्र या अनुभव पर निर्भर नहीं करती। सही सोच, मेहनत और किसी समस्या का समाधान देने वाला आइडिया किसी भी युवा को आगे बढ़ा सकता है। कृषि जैसे क्षेत्र में उतरकर उन्होंने यह साबित किया कि नए विचारों और तकनीक के जरिए पारंपरिक सेक्टर में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

साईतेजा की उपलब्धि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और बिजनेस सोच की तारीफ की। लोगों का कहना है कि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना और किसानों से जुड़े क्षेत्र में काम करना प्रेरणादायक है।

एक यूजर ने लिखा कि 23 साल की उम्र में ₹20 करोड़ की कंपनी बनाना दिखाता है कि जब विजन और मेहनत साथ आते हैं तो बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। वहीं अन्य यूजर्स ने उनके भविष्य के लक्ष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

किसानों की समस्या को बनाया बिजनेस का आधार

साईतेजा की सफलता का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने सिर्फ कंपनी बनाने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खेती से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान देने की कोशिश की। यही सोच उनके स्टार्टअप को अलग पहचान दिला रही है।

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