अमेरिका में 43 लाख की सर्जरी भारत में सिर्फ 4.3 लाख में हुई! फिर भी अमेरिकी महिला ने बताईं ये 3 कमियां

अमेरिका की एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों तेजी से चर्चा में है। उन्होंने अपनी मां के इलाज से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने अलग-अलग देशों में मेडिकल खर्च को लेकर बहस छेड़ दी। मां की सर्जरी के लिए अमेरिका में मिले खर्च के अनुमान ने परिवार को दूसरे विकल्प तलाशने पर मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने विदेश में इलाज कराने के बारे में सोचा और कई देशों पर विचार किया। इसी दौरान भारत का विकल्प भी उनके सामने आया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि इलाज के साथ नए देश में अस्पताल, सुविधाओं और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी भरोसा जरूरी था।

लेकिन भारत पहुंचने के बाद सामने आया अनुभव उनके लिए उम्मीद से अलग रहा। महिला ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद भारत की मेडिकल सुविधाओं और इलाज की लागत को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

डॉक्टर की सलाह पर भारत आए

इसी दौरान महिला के एक डॉक्टर दोस्त ने उन्हें भारत में इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद परिवार ने भारत आने का फैसला किया। महिला के अनुसार, भारत के एक बड़े अस्पताल में उनकी मां की सर्जरी हुई। अस्पताल में रहने का खर्च भी इसमें शामिल था।

सिर्फ ₹4.3 लाख में हुआ इलाज

महिला ने बताया कि भारत में सर्जरी और अस्पताल में रहने समेत कुल खर्च करीब 4,500 डॉलर यानी 4.3 लाख रुपये आया। अमेरिका में मिले अनुमान से तुलना करें तो यह रकम करीब दस गुना कम थी। हालांकि, इलाज का वास्तविक खर्च मरीज और बीमारी के हिसाब से अलग हो सकता है।

इलाज की गुणवत्ता ने किया प्रभावित

महिला ने केवल कम खर्च की तारीफ नहीं की। उन्होंने भारत में मिली मेडिकल सुविधाओं और देखभाल को भी अच्छा बताया। उनके मुताबिक, इलाज उनकी उम्मीद से बेहतर रहा। इसी वजह से उन्होंने भारत में मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं पर भी बात की।

भारत में मेडिकल टूरिज्म का बड़ा मौका

महिला का मानना है कि भारत अगर विदेशी मरीजों के लिए यात्रा, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को और बेहतर करे, तो मेडिकल टूरिज्म में देश और आगे बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, भारत के पास इस क्षेत्र में काफी बड़ी संभावनाएं हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अमेरिका और भारत में इलाज की लागत पर चर्चा शुरू कर दी। कई यूजर्स ने सवाल किया कि अमेरिका जैसे विकसित देश में मेडिकल ट्रीटमेंट इतना महंगा क्यों है कि लोग इलाज के लिए विदेश जाने पर मजबूर हो रहे हैं।

निजी अस्पतालों की भी हुई तारीफ

कुछ यूजर्स ने भारत के निजी अस्पतालों की तारीफ की। उनका कहना था कि कई अस्पताल कम लागत में अच्छी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत की सरकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अभी सुधार की जरूरत है।

विदेशी मरीजों को मिलती है मदद

मेडिकल टूरिज्म से जुड़े लोगों के मुताबिक, कई भारतीय अस्पताल विदेशी मरीजों को इलाज के साथ दूसरी सुविधाओं में भी मदद करते हैं। इनमें एयरपोर्ट ट्रांसफर, रहने की व्यवस्था, अपॉइंटमेंट और इलाज का शेड्यूल शामिल हो सकता है।

 

Viral Post: ‘मेंटल पीस के लिए बिना ऑफर के छोड़ दी नौकरी’, वायरल हुआ इंजीनियर का पोस्ट

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इंजीनियर का पोस्ट काफी तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उसने बिना किसी नई नौकरी के पुरानी नौकरी छोड़ने के फैसला किआ। इस फैसले को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग के मुताबिक नौकरी और करियर से ज्यादा जरूरी मानसिक सुकून है, वहीं कुछ ने कहा कि, मौजूदा नौकरी के माहौल में बिना किसी दूसरे ऑप्शन के इस्तीफा देना जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

सॉफ्टवेयर इंजीनियर गौरव शरण ने X पर एक छोटा सा पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “बिना किसी ऑफर के इस्तीफा दे दिया। किसी भी चीज से ज्यादा मेंटल पीस जरूरी है।” अपने इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी या ऑफर तय किए बिना ही मौजूदा नौकरी छोड़ने का फैसला किया। गौरव शरण का ये पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। लोग इस पोस्ट पर कई कमेंट किए।

 

लोगों ने किए कमेंट

एक यूजर ने बताया कि, “उसने 2025 में बिना किसी नई नौकरी के ऑफर के इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नई नौकरी मिलने में उसे करीब दो महीने का समय लगा। इस दौरान उसे कई ऑफर मिले, लेकिन कोई भी उसकी घर से काम करने की पसंद के मुताबिक नहीं था।” एक और यूजर ने कहा, “नौकरी छोड़ने से पहले कम से कम एक नया ऑफर अपने हाथ में होना बेहतर है, ताकि बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े।” यूजर ने कहा कि, “मौजूदा नौकरी छोड़ने से पहले कम से कम एक नया ऑफर अपने पास होना चाहिए, क्योंकि जॉब मार्केट की वास्तविक स्थिति उम्मीद से काफी अलग हो सकती है।”

एक यूजर ने बताया कि, “कई कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं, जो तुरंत काम शुरू कर सकते हैं और 60 दिन तक इंतजार नहीं करना चाहतीं। ऐसे में पहले इस्तीफा देने वाले उम्मीदवार रिक्रूटर्स को ज्यादा आसानी से उपलब्ध लग सकते हैं और उन्हें नौकरी के बेहतर मौके मिल सकते हैं।”

Video: नाई की दुकान से इंटरनेट तक… Techie ने 90s के गानों वाला ऐसा डिजिटल अड्डा बनाया कि Paytm फाउंडर भी तारीफ करने लगे

आज के दौर में जब हेयरकट के साथ प्रीमियम सैलून, हेयर स्पा और महंगे हेयर ट्रीटमेंट आम हो गए हैं, वहीं इंटरनेट पर एक छोटे से डिजिटल प्रयोग ने लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है। टेक प्रोफेशनल यश भारद्वाज ने एक ऐसा अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स के बीच पुरानी यादों का पिटारा खोल दिया। यह पहल उस दौर की झलक दिखाती है, जब मोहल्ले की छोटी-सी नाई की दुकान सिर्फ बाल कटवाने की जगह नहीं होती थी, बल्कि वहां बैठकर गाने सुनना और आसपास के लोगों से बातचीत करना भी अनुभव का हिस्सा हुआ करता था। आज की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच 90s की ऐसी यादों को डिजिटल अंदाज में दोबारा सामने लाने की कोशिश लोगों को काफी पसंद आ रही है।

आखिर इस वेबसाइट में ऐसा क्या खास है, जिसने इंटरनेट यूजर्स को पुराने जमाने में पहुंचा दिया? यही वजह है कि यह अनोखा प्रयोग तेजी से चर्चा में आ गया है।

Yash Bhardwaj ने बनाया Salon.wtf

डेवलपर यश भारद्वाज ने इस प्रोजेक्ट को Salon.wtf नाम दिया है। वेबसाइट पर ऐसे गानों का संग्रह उपलब्ध है, जो पुराने भारतीय बार्बरशॉप की याद दिलाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने प्रोजेक्ट को साझा करते हुए लिखा कि यह वेबसाइट उस दौर की याद दिलाती है, जब लोग महंगे सैलून के बजाय ‘सैलून’ या मोहल्ले की नाई की दुकान पर जाते थे और करीब ₹20 में साधारण हेयरकट के साथ ऐसे गाने सुनते थे, जो माहौल को खास बना देते थे।

इंटरनेट यूजर्स बोले- ‘इसने तो पुराना जमाना याद दिला दिया’

वेबसाइट सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उन्हें ऐसे समय में वापस ले गया, जब इंटरनेट और प्रीमियम सैलून रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं थे। एक यूजर ने इसे इंटरनेट पर इंसानी रचनात्मकता का शानदार उदाहरण बताया और कहा कि ऐसी चीजें इंटरनेट की असली खूबसूरती दिखाती हैं।

वेबसाइट में गाने इस्तेमाल करने पर उठा कॉपीराइट सवाल

प्रोजेक्ट को लेकर सिर्फ तारीफ ही नहीं हुई, बल्कि इसके कानूनी पहलू पर भी सवाल उठे। एक यूजर ने, जो खुद कुछ इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, भारद्वाज से पूछा कि ऑनलाइन संगीत इस्तेमाल करते समय कॉपीराइट से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस पर भारद्वाज ने बताया कि वेबसाइट अपने सर्वर पर गाने स्टोर नहीं करती।

‘गाने मेरे सर्वर पर नहीं हैं’

भारद्वाज के अनुसार, वेबसाइट YouTube की मौजूदा प्लेबैक व्यवस्था का इस्तेमाल करती है। उन्होंने बताया कि वीडियो और frame को वेबसाइट के इंटरफेस में छिपाकर केवल ऑडियो अनुभव रखा गया है। उनके मुताबिक, गाने YouTube के माध्यम से ही चल रहे हैं और उन्होंने मूल प्लेयर को अपने तरीके से पेश किया है। हालांकि, किसी वेबसाइट का इस तरह का संगीत उपयोग वास्तव में कानूनी रूप से अनुमत है या नहीं, यह संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तों और लागू कॉपीराइट कानूनों पर निर्भर कर सकता है।

Paytm के संस्थापक भी हुए पुराने दिनों के फैन

वेबसाइट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह पोस्ट Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा तक भी पहुंच गई। उन्होंने X पर इस प्रोजेक्ट को साझा किया और इसकी तारीफ की। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को भारत की पुरानी मोहल्ला बार्बरशॉप और उस दौर के संगीत से जुड़ी यादों को फिर से जीवंत करने वाली कोशिश के तौर पर सराहा।

एक वेबसाइट ने खोल दिया यादों का पिटारा

Salon.wtf की खासियत सिर्फ पुराने गाने नहीं हैं। इसकी लोकप्रियता इस बात को दिखाती है कि तकनीक के जरिए पुरानी यादों को किस तरह नए अंदाज में पेश किया जा सकता है। जहां आज लोग हेयरकट के लिए चमकदार सैलून और डिजिटल अपॉइंटमेंट पसंद करते हैं, वहीं यह छोटा-सा इंटरनेट प्रोजेक्ट लोगों को उस दौर में वापस ले जा रहा है, जब ₹20 का हेयरकट, रेडियो पर बजता गाना और मोहल्ले की नाई की दुकान ही एक अलग तरह का अनुभव हुआ करता था।

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सिर्फ ब्रेड पकौड़ा और गुलाब जामुन बेचकर लाखों की कमाई! वायरल हुई सड़क किनारे की इस दुकान की कहानी

सोशल मीडिया पर इन दिनों सड़क किनारे लगी एक छोटी-सी ब्रेड पकौड़ा और गुलाब जामुन की दुकान काफी वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति ने दुकानदार की संभावित कमाई का अनुमान शेयर किया। दुकान पर सिर्फ ब्रेड पकौड़ा और गुलाब जामुन मिलते हैं, लेकिन फिर भी यहां हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि सीमित सामान बेचने के बावजूद इस स्टॉल का कारोबार काफी अच्छा चलता है। सोशल मीडिया पर कई यूजर इस छोटे से बिजनेस की सफलता और संभावित कमाई को देखकर हैरानी जता रहे हैं।

कितनी होती है कमाई

सोशल मीडिया पर ये पोस्ट X यूजर अंकित पांडे ने शेयर की। उन्होंने लिखा, “यह सड़क किनारे ब्रेड पकौड़ा बेचने वाला 10 साल का कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले कई लोगों से भी ज्यादा कमाई करता है।” अंकित पांडे ने बताया कि सफर के दौरान वह एक ब्रेड पकौड़ा नाम के एक छोटे से स्टॉल पर पहुंचे। अंकित ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यात्रा के दौरान मैं मनोज ब्रेड पकौड़ा नाम की एक छोटी-सी सड़क किनारे की दुकान पर रुका। यहां न कोई आलीशान इंटीरियर था, न एयर कंडीशनिंग और न ही महंगी ब्रांडिंग। इसके बावजूद स्वादिष्ट खाने और ग्राहकों की लगातार भीड़ ने मेरा ध्यान खींच लिया।”

एक दिन में आते हैं 400 कस्टमर

उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने दुकानदार से पूछा, “भैया, आपके पास रोज कितने ग्राहक आते हैं?” इस पर दुकानदार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “करीब 400।” पांडे के मुताबिक, ज्यादातर ग्राहक एक ब्रेड पकौड़ा और एक गुलाब जामुन का ऑर्डर करते हैं। कस्टमर की संख्या जानने के बाद अंकित ने स्टॉल की संभावित रोजाना बिक्री का अनुमान लगाया। उन्होंने लिखा, “अब एक आसान हिसाब लगाते हैं। ब्रेड पकौड़े की कीमत 15 रुपये और गुलाब जामुन की कीमत भी 15 रुपये है। यानी एक ग्राहक का औसत बिल 30 रुपये हुआ। अगर रोज करीब 400 ग्राहक आते हैं, तो 400 × 30 के हिसाब से दुकान की दैनिक बिक्री लगभग 12,000 रुपये बैठती है।”

दुकानदार की होती है अच्छी बचत

अंकित पांडे ने साफ किया कि कमाई का ये अनुमान दुकानदार की दी गई जानकारी पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनके मुताबिक, रोज के खर्च निकालने के बाद भी दुकानदार की अच्छी बचत हो जाती है। अंकित ने बताया कि दुकानदार के मुताबिक, कमाई का सही हिसाब लगाने से पहले कच्चा सामान, तेल, गैस, किराया और रोजमर्रा के दूसरे खर्चों को अलग किया जाता है। इन सभी खर्चों के बाद भी दुकानदार का दावा है कि उसकी कुल कमाई का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा बचत के रूप में रह जाता है। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

अपना अनुमान साझा करते हुए अंकित पांडे ने लिखा, “इस हिसाब से रोज करीब 8,400 रुपये की बचत होती है। यानी महीने में लगभग 2.5 लाख रुपये और सालभर में करीब 30 लाख रुपये। ये सभी आंकड़े मनोज द्वारा मेरे साथ साझा की गई जानकारी के आधार पर लगाए गए अनुमान हैं।”

वायरल हुआ पोस्ट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि अच्छी क्वालिटी, सही कीमत और ग्राहकों के भरोसे के दम पर छोटे कारोबार भी शानदार कमाई कर सकते हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह कारोबार कमाई वाला जरूर है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।” वहीं, दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, “लगातार अच्छी क्वालिटी और एक जैसा स्वाद ही असली सफलता और कमाई की सबसे बड़ी वजह है।”

एक साल में 1.14 रुपये करोड़ इनकम टैक्स जमा किया, फिर शख्स ने ऐसा क्यों कहा कि कमाई अपनी नहीं लगती

एक शख्स की सोशल मीडिया पोस्ट ने देश में टैक्स व्यवस्था और टैक्सपेयर्स की उम्मीदों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। दावा किया गया कि उसने इस साल 1.14 करोड़ रुपये इनकम टैक्स जमा किया, जिसके बाद उसने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि कई बार ईमानदार टैक्स देने वालों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सिस्टम में जाता हुआ महसूस होता है। उसकी पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने टैक्स भुगतान, सरकारी सुविधाओं और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी।

कई यूजर्स का कहना है कि टैक्स देश के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन बदले में बेहतर सेवाएं और पारदर्शिता भी मिलनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि बड़े योगदान देने वाले ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए अलग सुविधाओं या प्रोत्साहन पर भी विचार किया जा सकता है।

टैक्स समरी शेयर कर बताई अपनी परेशानी

X पर वायरल हुई पोस्ट में शख्स ने अपनी टैक्स समरी का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें भारी टैक्स भुगतान का दावा किया गया है। उसने कहा कि ईमानदारी से टैक्स देने वाले लोगों की परेशानियों और उनकी अपेक्षाओं पर अक्सर कम चर्चा होती है, जबकि वे देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं।

विदेश से ऑफर मिले, फिर भी भारत में रहने का फैसला

शख्स ने बताया कि उसे अमेरिका से नौकरी के ऑफर भी मिले थे, लेकिन उसने अपने बुजुर्ग माता-पिता की वजह से भारत में रहने का फैसला किया। हालांकि, उसका कहना है कि ज्यादा टैक्स देने वाले कई लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी आवाज उतनी प्रभावी तरीके से नहीं सुनी जाती।

टैक्स और सुविधाओं को लेकर छिड़ी बहस

उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर टैक्स व्यवस्था, सरकारी सुविधाओं और टैक्सपेयर्स को मिलने वाली सेवाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि ज्यादा योगदान देने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं और अधिक जवाबदेही क्यों नहीं मिलनी चाहिए।

यूजर्स बोले- टैक्स जरूरी है, लेकिन जवाबदेही भी होनी चाहिए

एक यूजर ने लिखा कि टैक्स देश के विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन टैक्स देने वालों को बदले में बेहतर सेवाएं, पारदर्शिता और जवाबदेही भी मिलनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए कुछ विशेष सुविधाओं या रियायतों पर विचार किया जाना चाहिए।

ईमानदार टैक्सपेयर्स बनाम सिस्टम पर बहस

कुछ यूजर्स ने अपनी निजी परेशानियां भी साझा कीं। एक यूजर ने कहा कि नौकरीपेशा लोग अपनी आय और खर्चों पर लगातार टैक्स देते हैं, जबकि कुछ व्यवसायी अपनी वास्तविक आय के हिसाब से उतना टैक्स नहीं देते। इस पोस्ट ने एक बार फिर टैक्स व्यवस्था में समानता और जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज कर दी है।

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NEET Protest में छाई ये ‘देसी मां’, पोस्टर पर लिखी एक लाइन पढ़कर इंटरनेट हुआ दीवाना

दिल्ली में NEET परीक्षा को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन इन दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और प्रदर्शन से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आंदोलन के गंभीर माहौल में भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। तस्वीर में दिखा एक अनोखा संदेश लोगों के दिलों को इस तरह छू गया कि देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से लेकर अन्य मंचों तक लोग इसे जमकर शेयर कर रहे हैं और अपने-अपने अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कई यूजर्स इसे भारतीय माताओं के स्नेह, सख्ती और सुरक्षा की भावना का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विरोध प्रदर्शन की सबसे यादगार और दिल छू लेने वाली तस्वीर कह रहे हैं। यही वजह है कि यह फोटो अब सिर्फ एक वायरल पोस्ट नहीं, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का खास विषय बन चुकी है।

एक तख्ती, जिसने जीत लिया इंटरनेट का दिल

इस तस्वीर को X (पहले ट्विटर) पर शेयर करते हुए कैप्शन लिखा गया, “Bro, whose mom is this?

23 साल के BBA ग्रेजुएट ने नौकरी छोड़ चुना स्टार्टअप का रास्ता, डेढ़ साल में खड़ी कर दी 20 करोड़ की कंपनी

सफलता हासिल करने के लिए हमेशा लंबा अनुभव जरूरी नहीं होता, कई बार एक मजबूत सोच और सही दिशा भी कम उम्र में बड़ी उपलब्धि दिला सकती है। तेलंगाना के युवा साईतेजा गोपिशेट्टी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी के रास्ते के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। कृषि क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने Luminara Legacy नाम से स्टार्टअप शुरू किया, जो किसानों को बेहतर बीज, कृषि उत्पाद और खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर काम करता है।

खास बात यह है कि शुरुआत के महज डेढ़ साल में ही उनकी कंपनी ने करोड़ों रुपये की वैल्यूएशन हासिल कर ली। साईतेजा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो नए आइडिया के साथ अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं।

कृषि क्षेत्र में उतरे साईतेजा, शुरू किया Luminara Legacy

साईतेजा गोपिशेट्टी Saiteja Gopishetty ने Luminara Legacy Pvt. Ltd. की शुरुआत की। यह एग्रीकल्चर स्टार्टअप किसानों को बेहतर बीज, कीटनाशक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर काम करता है। उनका लक्ष्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर उत्पादों के जरिए ज्यादा उत्पादन हासिल करने में मदद करना है।

23 की उम्र में ₹20 करोड़ का सफर

सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, साईतेजा ने ग्रेजुएशन के करीब डेढ़ साल बाद अपनी कंपनी को ₹20 करोड़ के स्तर तक पहुंचा दिया। उनकी कंपनी अब 2028 तक ₹100 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

छोटी उम्र, बड़ा विजन

साईतेजा की कहानी यह दिखाती है कि सफलता सिर्फ उम्र या अनुभव पर निर्भर नहीं करती। सही सोच, मेहनत और किसी समस्या का समाधान देने वाला आइडिया किसी भी युवा को आगे बढ़ा सकता है। कृषि जैसे क्षेत्र में उतरकर उन्होंने यह साबित किया कि नए विचारों और तकनीक के जरिए पारंपरिक सेक्टर में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

साईतेजा की उपलब्धि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और बिजनेस सोच की तारीफ की। लोगों का कहना है कि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना और किसानों से जुड़े क्षेत्र में काम करना प्रेरणादायक है।

एक यूजर ने लिखा कि 23 साल की उम्र में ₹20 करोड़ की कंपनी बनाना दिखाता है कि जब विजन और मेहनत साथ आते हैं तो बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। वहीं अन्य यूजर्स ने उनके भविष्य के लक्ष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

किसानों की समस्या को बनाया बिजनेस का आधार

साईतेजा की सफलता का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने सिर्फ कंपनी बनाने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खेती से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान देने की कोशिश की। यही सोच उनके स्टार्टअप को अलग पहचान दिला रही है।

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‘हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये…’, मरीज ने शेयर किया मुंबई के अस्पताल का बिल, लोगों के उड़े होश

अस्पताल में चार दिन रहना…, एक आम सर्जरी… और 11 लाख रुपये से ज्यादा का बिल। मुंबई के एक अस्पताल में हर्निया की सर्जरी के लिए एक मरीज द्वारा 11.04 लाख रुपये चुकाने का दावा करने वाली एक वायरल पोस्ट ने बहस छेड़ दी है। इस दावे ने भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर की बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह चर्चा तब शुरू हुई जब X यूजर निखिल झा ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि उनके एक फॉलोअर की मुंबई के एक नामी अस्पताल में इंग्वाइनल हर्निया की सर्जरी हुई थी। पोस्ट के अनुसार, मरीज से इलाज के लिए 11.04 लाख रुपये लिए गए।

जानकारी शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा था, “कल एक फॉलोअर ने हमें मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अपनी हर्निया सर्जरी के बारे में मैसेज किया। कुल खर्च 11.04 लाख रुपये था। हां, हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये।” आगे अपनी बात रखते हुए झा ने लिखा, “हम इतनी बड़ी रकम देखकर हैरान और स्तब्ध रह गए। अगर छोटी सी हर्निया सर्जरी का खर्च इतना है, तो बड़ी सर्जरी का खर्च क्या होगा? तो क्या मुंबई में अस्पताल में भर्ती होना कोई अपराध बनता जा रहा है? क्या शहर में अच्छी हेल्थकेयर ऐसी लग्जरी बन गई है, जिसे सिर्फ बहुत अमीर लोग ही उठा सकते हैं?”

पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जो इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट का मैसेज लग रहा था। इमेज के अनुसार, कुल मेडिकल खर्च 11,04,100 रुपये था, जबकि सेटल किया गया इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट 4,64,000 रुपये था। डॉक्यूमेंट से पता चला कि मरीज को इंग्वाइनल हर्निया से जुड़े इलाज के लिए 6 जुलाई से 10 जुलाई, 2026 तक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

हालांकि, पोस्ट में इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, जैसे कि कौन सी सर्जरी हुई, कमरे की कैटेगरी, डॉक्टर की फीस, अतिरिक्त प्रक्रियाएं या क्या मरीज़ को अतिरिक्त मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। इसके बावजूद, पोस्ट ने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने प्राइवेट अस्पतालों के खर्च और मेडिकल इलाज के खर्च को उठाने की क्षमता पर अपनी राय दी। जहां कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि हर्निया की सर्जरी का बिल इतना ज्यादा कैसे हो सकता है, वहीं दूसरों ने कहा कि मामले को ठीक से समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है।

एक डॉक्टर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11 लाख रुपये बहुत ज़्यादा हैं। क्या इसमें हेलीकॉप्टर से पिक-अप और ड्रॉप भी शामिल था?” एक यूजर ने हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता के बारे में चिंता जताई और लिखा, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये? यह भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 11 लाख रुपये से ज़्यादा की आम हर्निया सर्जरी कई मध्यम-वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। इंश्योरेंस होने पर भी, अगर क्लेम सीमित हैं या रिजेक्ट हो जाते हैं, तो ऐसे खर्च आर्थिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अस्पताल की कीमतों, इंश्योरेंस सेटलमेंट और मेडिकल बिलिंग में ज़्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी की हेल्थकेयर सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं होनी चाहिए।”

एक और यूजर ने शहरों के बीच इलाज के खर्च की तुलना की और लिखा, “सूरत में हर्निया की सर्जरी का खर्च 1.5 लाख रुपये है, जबकि मुंबई के एक बड़े अस्पताल में उसी प्रक्रिया का खर्च 11.04 लाख रुपये है। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद, पॉलिसीहोल्डर एक जैसा प्रीमियम देते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बड़े मेट्रो अस्पतालों में इलाज का बढ़ता खर्च सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ अस्पताल का बिल पूरी मेडिकल स्थिति को नहीं समझा सकता। यूजर ने लिखा, “यह मैसेज यह नहीं बताता कि कौन सी प्रक्रिया की गई थी। यह समझने के लिए कि क्या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन हुआ था और क्या उसे ICU में रहना पड़ा था, हमें ऑपरेशन नोट्स और डिस्चार्ज समरी देखने की जरूरत है।”