15 अगस्त पर लाल किले में दिखेगा नया इतिहास! जश्न में पहली बार दो ऐतिहासिक पल

15 अगस्त से पहले दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। लाल किले के पास दंगल पार्क में भारतीय सेना के जवानों ने पारंपरिक 21 तोपों की सलामी रिहर्सल की जा रही है। इस बार समारोह में ‘युवा शक्ति’, ‘विकसित भारत 2047’ और ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने को खास जगह दी जाएगी।

युवा शक्ति और Gen-Z

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इस बार लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की युवा शक्ति और Gen-Z पर फोकस रहेगा। इसमें युवाओं की अचीवमेंट, उनकी नई सोच और देश के डेवलपमेंट में उनके योगदान को सामने रखा जाएगा। साथ ही 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को भी खास तरीके से दिखाया जाएगा। सेरेमनी में युवा अचीवर्स को स्पेशल गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह

इस साल ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे खास जगह दी जाएगी। पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे।

टेक्नोलॉजी और साइंस

स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक अचीवमेंट को भी दिखाया जाएगा। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस और मॉडर्न टेक्निक सेक्टर में देश ने जो प्रगति की है, उसकी झलक विजुअल्स के जरिए दिखाई जाएगी। इन्विटेशन कार्ड में ‘सेवा तीर्थ’ को प्रायोरिटी दी गई है, जो पब्लिक सर्विस और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दिखाती है।

इंटर्नशिप और डेवलपमेंट स्कीम

इस बार समारोह में देश के युवा प्रतिभाओं को खास सम्मान दिया जाएगा। इंटरनेशनल फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमैटिक्स ओलंपियाड 2026 में मेडल जीतने वाले 19 स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम के इंटर्न, स्किल डेवलपमेंट स्कीम का लाभ लेने वाले और MY भारत के वॉलंटियर्स जैसे युवा अचीवर्स भी समारोह में शामिल होंगे।

जल संरक्षण

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की जगहों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे जाएंगे। इसका मकसद लोगों का ध्यान जल संरक्षण और पानी बचाने की जरूरत की ओर अट्रैक्ट करना है।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की परंपरा, युवाओं की ताकत और भारत की तरक्की की झलक एक साथ दिखाएगा। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने से यह मौका और खास बन गया है। युवा प्रतिभाओं के सम्मान और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ समारोह में विकसित भारत 2047 का संदेश भी मिलेगा।

Electric Air Taxi: 2028 तक खत्म हो जाएगा ट्रैफिक जाम का झंझट! भारत के आसमान में उड़ेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और कारें, जानें सभी डिटेल्स

Electric Air Taxi in india News: भारत में आने वाले कुछ सालों में हवाई सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के मुताबिक, भारत का लक्ष्य 2028 तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियों और कारों को आसमान में उड़ान भरते देखना है। इसके लिए अगले साल से इन अत्याधुनिक विमानों की टेस्टिंग और ट्रायल को और तेज किया जाएगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि भारत 2028 तक देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी की उड़ान शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उम्मीद है कि इस नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग अगले साल तेज हो जाएगी।

हाल ही में बेंगलुरु में सरला एविएशन के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए नायडू ने कहा कि इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे भीड़-भाड़ वाले महानगरों के लिए आवाजाही का एक नया विकल्प बन सकते हैं। ANI के मुताबिक नायडू ने कहा, “हम चाहते हैं कि 2028 तक ये मशीनें भारत में उड़ान भरें। इनकी बहुत ज्यादा जरूरत है, न सिर्फ बेंगलुरु में, बल्कि मुंबई और दिल्ली में भी…।”

15 मिनट में नोएडा से गुरुग्राम

कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल से टैक्सी बुक करते हैं। लेकिन यह टैक्सी सड़क पर आने के बजाय किसी बिल्डिंग की छत पर बने खास वर्टिपैड पर आपका इंतजार कर रही है। आप लिफ्ट से ऊपर पहुंचते हैं, एक ऐसे इलेक्ट्रिक विमान में बैठते हैं जो देखने में किसी बड़े ड्रोन जैसा लगता है। कुछ ही सेकंड में वह सीधे आसमान में उड़ जाता है।

सड़क के जाम में फंसने के बजाय यह एयर टैक्सी शहर के ऊपर से उड़ते हुए आपको एयरपोर्ट तक पहुंचा देती है। दावा है कि भविष्य में ऐसी यात्रा के जरिए एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि एयर टैक्सी शुरू होने के बाद नोएडा से गुरुग्राम पहुंचने में सिर्फ 10 से 15 मिनट लगेंगे।

मंत्री ने क्या कहा?

मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरला एविएशन अगले साल पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में आ जाएगी। जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) टेस्टिंग, सुरक्षा और नियमों पर इंडस्ट्री के साथ काम करना जारी रखेंगे। नायडू ने यह भी कहा कि DGCA ने सरला एविएशन को डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल दिया है, जो कंपनी के eVTOL एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट में एक रेगुलेटरी कदम है। मंत्री ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अगले साल हम पूरी तरह से टेस्टिंग के दौर में होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “2028 तक हम इसे हकीकत बनाने की योजना बना रहे हैं।”

क्या होती है इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी?

इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को टेक्नीकल भाषा में eVTOL यानी Electric Vertical Take-Off and Landing Aircraft कहा जाता है। इन टैक्सी की खासियत यह है कि इन्हें हेलीकॉप्टर की तरह रनवे की जरूरत नहीं होती। ये डायरेक्ट जमीन या वर्टिपैड से ऊपर उड़ सकते हैं। साथ ही उसी तरह नीचे उतर भी सकते हैं।

Electric Air Taxi

इनके डिजाइन में फ्लाइट और हेलीकॉप्टर दोनों की झलक दिखाई देती है। इनमें कई रोटर या इलेक्ट्रिक फैन लगाए जाते हैं, जो विमान के पंखों या उसके बाहरी हिस्सों पर लगे होते हैं। हेलीकॉप्टर की तरह eVTOL भी लंबवत उड़ान भर सकता है। लेकिन इसमें एक बड़े रोटर की जगह कई छोटे रोटर या फैन इस्तेमाल किए जाते हैं।

बैटरी और इलेक्ट्रिक तकनीक ने खोला रास्ता

eVTOL टेक्नोलॉजी का विचार नया नहीं है। इस दिशा में कई दशकों से काम हो रहा है। लेकिन हाल के सालों में बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति ने इसे कमर्शियल इस्तेमाल के करीब पहुंचा दिया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी बड़े पैमाने पर सफल होती हैं तो शहरों में सड़क ट्रैफिक का कुछ हिस्सा आसमान में शिफ्ट किया जा सकता है।

जॉर्जिया टेक के वर्टिकल लिफ्ट रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की निदेशक मर्लिन स्मिथ के मुताबिक, बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं। ऐसे में परिवहन के मौजूदा तरीकों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।

किन कामों में इस्तेमाल हो सकती हैं eVTOL?

शुरुआत में इलेक्ट्रिक एयर कारों का इस्तेमाल लोगों को कम और मध्यम दूरी तक पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। कई eVTOL कंपनियां एयरलाइंस के साथ मिलकर एयर-टैक्सी सर्विस शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को लाने-ले जाने तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इनका उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जैसे-

  • मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में एयर टैक्सी का इस्तेमाल हो सकेगा।
  • आग बुझाने और फायरफाइटिंग में भी ये काम करेगा।
  • इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में, खेती और कृषि कार्यों में, पर्यटन क्षेत्र में, शहरों के बीच एयर टैक्सी सेवा का लाभ उठाया जा सकेगा।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

अमेरिका में Archer, BETA Technologies और Joby जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी विकसित करने और उन्हें कमर्शियल सर्विस में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियां अंतिम FAA सुरक्षा मंजूरी के करीब पहुंच चुकी हैं। हालांकि, आम यात्रियों के लिए एयर टैक्सी की नियमित बुकिंग कब से शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं है। फिर भी इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का दौर लोगों की उम्मीद से काफी करीब है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह टेक्नोलॉजी?

भारत जैसे तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भारी ट्रैफिक वाले देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी भविष्य के परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। खासतौर पर भारी ट्रैफिक जाम का सामने करने वाली दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में एयरपोर्ट और शहर के दूसरे हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

Electric Air TaxiS

अगर तकनीक, सुरक्षा, लागत और इससे जुड़े अथॉरिटी की मंजूरी से जुड़ी चुनौतियां समय पर दूर होती हैं, तो 2028 के आसपास भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का सपना हकीकत में बदलता दिखाई दे सकता है। यानी आने वाले समय में सड़क पर कैब बुक करने के साथ-साथ मोबाइल से आसमान में उड़ने वाली टैक्सी भी बुक करने का विकल्प मिल सकता है।

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एक साल में 1.14 रुपये करोड़ इनकम टैक्स जमा किया, फिर शख्स ने ऐसा क्यों कहा कि कमाई अपनी नहीं लगती

एक शख्स की सोशल मीडिया पोस्ट ने देश में टैक्स व्यवस्था और टैक्सपेयर्स की उम्मीदों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। दावा किया गया कि उसने इस साल 1.14 करोड़ रुपये इनकम टैक्स जमा किया, जिसके बाद उसने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि कई बार ईमानदार टैक्स देने वालों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सिस्टम में जाता हुआ महसूस होता है। उसकी पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने टैक्स भुगतान, सरकारी सुविधाओं और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी।

कई यूजर्स का कहना है कि टैक्स देश के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन बदले में बेहतर सेवाएं और पारदर्शिता भी मिलनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि बड़े योगदान देने वाले ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए अलग सुविधाओं या प्रोत्साहन पर भी विचार किया जा सकता है।

टैक्स समरी शेयर कर बताई अपनी परेशानी

X पर वायरल हुई पोस्ट में शख्स ने अपनी टैक्स समरी का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें भारी टैक्स भुगतान का दावा किया गया है। उसने कहा कि ईमानदारी से टैक्स देने वाले लोगों की परेशानियों और उनकी अपेक्षाओं पर अक्सर कम चर्चा होती है, जबकि वे देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं।

विदेश से ऑफर मिले, फिर भी भारत में रहने का फैसला

शख्स ने बताया कि उसे अमेरिका से नौकरी के ऑफर भी मिले थे, लेकिन उसने अपने बुजुर्ग माता-पिता की वजह से भारत में रहने का फैसला किया। हालांकि, उसका कहना है कि ज्यादा टैक्स देने वाले कई लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी आवाज उतनी प्रभावी तरीके से नहीं सुनी जाती।

टैक्स और सुविधाओं को लेकर छिड़ी बहस

उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर टैक्स व्यवस्था, सरकारी सुविधाओं और टैक्सपेयर्स को मिलने वाली सेवाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि ज्यादा योगदान देने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं और अधिक जवाबदेही क्यों नहीं मिलनी चाहिए।

यूजर्स बोले- टैक्स जरूरी है, लेकिन जवाबदेही भी होनी चाहिए

एक यूजर ने लिखा कि टैक्स देश के विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन टैक्स देने वालों को बदले में बेहतर सेवाएं, पारदर्शिता और जवाबदेही भी मिलनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए कुछ विशेष सुविधाओं या रियायतों पर विचार किया जाना चाहिए।

ईमानदार टैक्सपेयर्स बनाम सिस्टम पर बहस

कुछ यूजर्स ने अपनी निजी परेशानियां भी साझा कीं। एक यूजर ने कहा कि नौकरीपेशा लोग अपनी आय और खर्चों पर लगातार टैक्स देते हैं, जबकि कुछ व्यवसायी अपनी वास्तविक आय के हिसाब से उतना टैक्स नहीं देते। इस पोस्ट ने एक बार फिर टैक्स व्यवस्था में समानता और जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज कर दी है।

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एक लोकेशन ने खड़ा कर दिया विवाद! गुरुग्राम में Rapido राइड का वीडियो वायरल

गुरुग्राम में Rapido राइड के बाद यात्री और बाइक राइडर के बीच हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वायरल वीडियो में महिला यात्री और राइडर के बीच ड्रॉप लोकेशन को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है। महिला का आरोप है कि उसे तय जगह पर नहीं छोड़ा गया, जबकि राइडर का कहना है कि उसने ऐप में दिख रही लोकेशन के अनुसार ही ट्रिप पूरी की। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं में सही लोकेशन पिन, यात्री की सुविधा और राइडर की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी इस मामले पर अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं और यह बहस तेज हो गई है कि ऐसी स्थिति में गलती आखिर किसकी मानी जाए।

ड्रॉप पॉइंट को लेकर शुरू हुआ विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला यात्री राइडर पर आरोप लगाती है कि उसे गलत जगह उतारा गया। महिला का कहना था कि उसकी असली मंजिल परिसर के अंदर थी, लेकिन राइडर उसे बेसमेंट के रास्ते ले जाकर किसी दूसरी जगह छोड़ गया। गुस्से में महिला ने सवाल किया कि जब उसे सही जगह जाना था तो राइडर वहां तक क्यों नहीं पहुंचा।

राइडर ने दी अपनी सफाई

वहीं Rapido राइडर ने अपनी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा कि उसने वही किया जो ऐप में लोकेशन दिखाई गई थी। उसका कहना था कि उसने स्क्रीन पर दिख रहे डेस्टिनेशन के हिसाब से ही यात्री को वहां छोड़ा। राइडर ने सफाई देते हुए कहा कि वह ऐप की बताई हुई लोकेशन को फॉलो कर रहा था और उसी के आधार पर ट्रिप पूरी की।

वीडियो बनाने वाला शख्स भी बहस में कूदा

इस दौरान एक अन्य व्यक्ति वीडियो रिकॉर्ड करता हुआ नजर आया, जिसने बीच में आकर महिला से किराया देने के लिए कहा। उसकी बार-बार दखलअंदाजी से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। महिला ने उसे बीच में बोलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन बहस लगातार बढ़ती चली गई।

आखिर में महिला ने किया पेमेंट

काफी देर तक चली बहस के बाद महिला ने अपना फोन निकाला और Rapido राइडर के QR कोड को स्कैन कर किराया चुका दिया। हालांकि, पेमेंट करने के बाद भी उसने राइडर और वीडियो बना रहे व्यक्ति से अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद महिला वहां से चली गई, लेकिन यह मामला सोशल मीडिया पर ऐप की लोकेशन और राइडर की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ गया है।

सोशल मीडिया पर लोग दे रहे अलग-अलग राय

वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग राइडर के पक्ष में नजर आए और बोले कि अगर ऐप में गलत लोकेशन पिन थी तो पूरी जिम्मेदारी राइडर की नहीं हो सकती। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि राइडर को यात्री से पुष्टि करके ही अंतिम ड्रॉप करना चाहिए था।

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राइजिंग भारत समिट में बोले प्रियांक खड़गे- कर्नाटक में विजिलेंटिज्म पर जीरो टॉलरेंस, कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं

Priyank Kharge news: कर्नाटक के गृह, आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि राज्य सरकार विजिलेंटिज्म के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और कानूनी प्रावधान हर किसी पर समान रूप से लागू होते हैं। न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट के दौरान मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता के साथ आयोजित ‘फायरसाइड चैट – हाउ कर्नाटक इज बिल्डिंग द इनोवेशन इकोनॉमी ऑफ भारत? में बोलते हुए खड़गे ने कहा कि राज्य में किसी भी तरह के विजिलेंटिज्म की इजाजत नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। कानून सबके लिए एक बराबर है।

पुलिसिंग और प्रशासन में टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल

कर्नाटक में गवर्नेंस और कानून-व्यवस्था के क्रियान्वयन पर बात करते हुए खड़गे ने बताया कि राज्य ने पुलिसिंग और सार्वजनिक प्रशासन में तकनीक को तेजी से इंटिग्रेट किया है। ट्रैफिक मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और पुलिसिंग के क्षेत्रों में डिजिटल टूल्स का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रियांक खड़गे ने कहा कि हम ट्रैफिक, साइबर सुरक्षा और पुलिसिंग आदि में तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। गवर्नेंस में तकनीक के उपयोग के हमारे प्रयासों की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है।

पुलिस की उपस्थिति और निगरानी में सुधार के लिए सरकार ने एक नया एप्लिकेशन पेश किया है। खड़गे ने कहा कि अब पुलिस की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ा एक्शन: ₹2700 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना

राज्य में सड़क सुरक्षा और प्रवर्तन उपायों को उजागर करते हुए खड़गे ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ की गई बड़े पैमाने की कार्रवाई के आंकड़े साझा किए। पूरे राज्य में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 7.7 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों से राज्य भर में ₹2700 करोड़ से अधिक का जुर्माना लिया गया है।

क्विक कॉमर्स और गिग वर्कर्स पर क्या बोले मंत्री?

तेजी से बढ़ती ऐप-बेस्ड डिलीवरी सर्विस पर बात करते हुए खड़गे ने माना कि क्विक कॉमर्स के आने से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन बढ़ा है लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस कार्रवाई में सिर्फ डिलीवरी कर्मचारियों को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। खड़गे ने कहा कि 10 मिनट की डिलीवरी के इस दौर में कई तरह के उल्लंघन हो रहे हैं। हम अब उन्हें चार घंटे के लेक्चर दे रहे हैं। ट्रैफिक अपराधों को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन हम सिर्फ गिग वर्कर्स को दोष नहीं दे सकते।

बेंगलुरु के ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए ‘अर्बन मोबिलिटी मिशन’

प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम को कम करने के प्रयासों पर भी बात की। उन्होंने बेंगलुरु को भारत का इनोवेशन हब होने के साथ-साथ इसकी ट्रैफिक कैपिटल के रूप में भी परिभाषित किया। उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ की समस्या से निपटने और परिवहन योजना में सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक अर्बन मोबिलिटी मिशन की स्थापना की है।

खड़गे ने कहा कि, ‘हम अधिक से अधिक लोगों को मास ट्रांजिट सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम ई-कॉमर्स कंपनियों, फ्लीट मैनेजर्स, ट्रैफिक पुलिस, जीबीए (GBA) और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर एक मिशन मोड कमेटी बना रहे हैं।’

शहर के परिवहन परिदृश्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। गवर्नेंस, पुलिसिंग और शहरी बुनियादी ढांचे पर हुई इस व्यापक चर्चा के दौरान प्रियांक खड़गे ने जोर देकर दोहराया कि कर्नाटक की सरकार इस सिद्धांत पर चल रही है कि कानून सबके लिए समान है।

मुंबई में शख्स ने लाखों की सैलरी छोड़ किया 1.5 करोड़ का इन्वेस्टमेंट’, रेस्टोरेंट और निवेश से हो रही 4 लाख की कमाई

एक व्यक्ति, जिसने ऐसा रास्ता चुना जिसे कई लोग जोखिम भरा मानते थे, अब आर्थिक आजादी और काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन का आनंद ले रहा है। सोशल मीडिया पर अंकित पांडे द्वारा साझा की गई उनकी कहानी ने ऑनलाइन कई लोगों को प्रेरित किया है।

पोस्ट के अनुसार, उस व्यक्ति ने मुंबई में अपनी 1.5 लाख रुपये प्रति महीने की नौकरी छोड़ दी, जबकि लोगों ने उससे कहा कि वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है। उसने अपना फ्लैट लगभग 3 करोड़ रुपये में बेच दिया और कोई दूसरा महंगा अपार्टमेंट खरीदने के बजाय अपने होमटाउन वापस चला गया।

उसने लगभग 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी, 50 लाख रुपये में घर बनवाया और दो रेस्टोरेंट खोलने के लिए लगभग 50 लाख रुपये का निवेश किया। आज, दोनों रेस्टोरेंट जोमैटो और स्विगी पर लिस्टेड हैं और कर्मचारी उन्हें मैनेज करते हैं। बताया जाता है कि इन बिजनेस से उसे इतना मुनाफा होता है कि वह हर महीने लगभग 3 लाख रुपये बचा लेता है।

उसने फिक्स्ड डिपॉजिट में भी 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे उसे ब्याज के तौर पर हर महीने लगभग 1 लाख रुपये मिलते हैं। कुल मिलाकर, उसकी मासिक आय लगभग 4 लाख रुपये बताई जाती है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

एक यूजर ने लिखा, “बिना किसी विरासत, बिना किसी असली सोशल सर्कल और शहर से बिना किसी सच्चे लगाव के, मेट्रो शहर में सिर्फ एक औसत सैलरी पर गुज़ारा करना, एक दुखद जीवन जैसा लगता है।”एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “भले ही यह सच्ची कहानी हो, लेकिन जब वह होमटाउन गया तो उसके पास 3 करोड़ रुपये की पूंजी और पहले की बचत थी, जिससे बिजनेस और नई ज़िंदगी शुरू की जा सकती थी। हर किसी के पास, जो मेट्रो से होमटाउन जाता है, ऐसी सुविधा नहीं होती। अच्छी कहानी है, लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए आदर्श या उनसे जुड़ी हुई नहीं है।”

एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “यह इतना आसान नहीं है! रेस्टोरेंट का बिजनेस ही जोखिम भरा होता है! इतने सारे लाइसेंस और रिश्वत, लेबर की समस्याएं, सफाई के सर्टिफिकेट वगैरह, जिन्हें कॉम्पिटिटर निशाना बना सकते हैं! मैं रोज़ रेस्टोरेंट बंद होते देखता हूं!”

राम मंदिर दान चोरी केस में बड़ा खुलासा! आरोपी ने रिश्तेदारों पर उड़ाए 19 लाख, खरीदी SUV

Ram Mandir : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली और अहम बैठ सोमवार को हुई। चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बैठक के बीच इस मामले को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी मामले की जांच अब और गहराई से की जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि कथित तौर पर निकाले गए पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

आरोपी ने किया बड़ा खुलासा

इस मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ के दौरान पैसों के खर्च से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने बताया कि कथित तौर पर करीब 19 लाख रुपये अपने रिश्तेदारों और परिचितों पर खर्च किए गए। उसने यह भी बताया कि लगभग 6 लाख रुपये एक भाई की शादी में खर्च हुए, 5 से 6 लाख रुपये दूसरे भाई को दिए गए और करीब 3.5 लाख रुपये में एक मारुति ब्रेज़ा कार खरीदी गई।

दोस्त के खाते में ट्रांसफर किए पैसे

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर अपने एक दोस्त के खाते में करीब 2.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। इतना ही नहीं, उसने उसी दोस्त को एक महंगा मोबाइल फोन भी गिफ्ट में दिए थे। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ छोटी-छोटी रकम कई अन्य लोगों में भी बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये जानकारियां तब सामने आईं जब पुलिस ने 24 घंटे की रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला से करीब 13 घंटे तक लगातार पूछताछ की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूछताछ से उन्हें कई अहम सुराग मिले हैं।

जांच के दौरान मिले अमेरिकी डॉलर

जांच के दौरान पुलिस अविनाश शुक्ला को कई जगहों पर भी लेकर गई। इनमें कौशलपुरी का एक योग केंद्र और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्ला ने उन स्थानों की भी पहचान की, जहां कथित तौर पर दान की रकम आपस में बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने और चांदी के गहने, अन्य कीमती सामान और एक गाड़ी जब्त की है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि UP42AP6054 नंबर की मारुति ब्रेज़ा कार कथित तौर पर दान की हेराफेरी से मिले पैसों से खरीदी गई थी। हालांकि, इस कार का पंजीकरण अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के नाम पर कराया गया था।

अब तक आठ लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसों से और भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। इसके लिए पैसों के लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब तक मंदिर में दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रद्धालुओं के दान के कथित दुरुपयोग और पैसों के इस्तेमाल की जांच अभी भी जारी है।

Ram Temple Donation Theft: चंपत राय के इस्तीफे के अलावा राम मंदिर डोनेशन चोरी केस में ट्रस्ट की पहली बैठक से निकलीं ये 5 बड़ी बातें

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी गई। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने माना कि इस मामले में ट्रस्ट के साथ विश्वासघात हुआ है और जिम्मेदार लोगों ने भरोसा तोड़ा है। बैठक में उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। ट्रस्ट ने साफ कहा कि उसे राज्य सरकार की SIT और उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा और व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

बैठक से निकलीं 5 बड़ी बातें

  • 1. SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने पेश की गई

बैठक में सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की जांच रिपोर्ट रखी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की और जांच पर भरोसा जताया।

  • 2. ट्रस्ट ने माना कि भरोसा तोड़ा गया

बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने स्वीकार किया कि इस मामले में ट्रस्ट के विश्वास के साथ धोखा हुआ। आरोप है कि जिम्मेदार लोगों ने अधिकारियों को गुमराह किया और ट्रस्ट का भरोसा तोड़ा।

  • 3. दोबारा ऐसी घटना न हो, इसकी होगी समीक्षा

ट्रस्ट ने फैसला किया कि दान की राशि के संग्रह और निगरानी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की दोबारा गुंजाइश न रहे।

  • 4. चंपत राय और अनिल मिश्रा से मांगा जाएगा पक्ष

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का एजेंडा रखा। स्वामी गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव रखा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को भी बुलाने का फैसला किया गया। दोनों इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखेंगे।

  • 5. CEO का पद बनाने का प्रस्ताव खारिज

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का नया पद बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन ट्रस्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।

फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है और आने वाले समय में इस मामले को लेकर कुछ और अहम फैसले सामने आ सकते हैं। वहीं, दान की कथित गड़बड़ी की जांच SIT लगातार कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।