Delhi Traffic Advisory: आज घर से निकलने से पहले जान लें ट्रैफिक एडवाइजरी, दिल्ली की 25 से ज्यादा सड़कों पर रहेगा डायवर्जन

Delhi Police Traffic Advisory: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और दिल्ली में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली में 12 अक्टूबर को कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित रह सकती है। ट्रैफिक पुलिस ने 12 अक्टूबर के लिए एक अहम ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने कई जगहों पर डायवर्जन की तैयारी की है, जो जरूरत के अनुसार सुबह 6 बजे से लागू होगें। ऐसे में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या ISBT जाने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देख लेना चाहिए।

सुबह 6 बजे से होगा डायवर्जन

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, जरूरत पड़ने पर सुबह 6 बजे से कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अगर जरूरी ना हो तो यात्रा से बचें और अगर रेलवे स्टेशन, ISBT या एयरपोर्ट जाना जरूरी है तो घर से थोड़ा जल्दी निकलें। खासकर नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली से होकर जाने वाले लोगों को एक्स्ट्रा टाइम लेकर चलने की सलाह दी गई है। ऐसे में अगर आज आप ऑफिस, कॉलेज या बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे हैं तो सबसे पहले ट्रैफिक एडवाजरी का अपडेट जरूर जान लें।

इन रास्तों पर होगा डावर्जन

ट्रैफिक प्रभावित होने वाले प्रमुख स्थानों में शंकर रोड-वंदे मातरम टी-पॉइंट, धौला कुआं फ्लाईओवर, झंडेवालान, पंचकुइयां, मंडी हाउस, डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक, राम चरण अग्रवाल चौक, मिंटो रोड-डीडीयू मार्ग, गुरु नानक चौक, चेम्सफोर्ड रोड, कनॉट प्लेस, लोधी रोड फ्लाईओवर, नीला गुम्बद, मदरसा टी-पॉइंट, सम्राट होटल, सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग, भीकाजी कामा प्लेस, मोती बाग फ्लाईओवर, रिंग रोड-सैन मार्टिन मार्ग, अशोका रोड-जंतर मंतर रोड, विंडसर पैलेस, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रेल भवन, जय सिंह रोड-संसद मार्ग, बाराखंबा रोड, गोल डाकखाना, पटेल चौक और आरएमएल अस्पताल के आसपास के रास्ते शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार इन डायवर्जन और प्रतिबंधों में बदलाव किया जा सकता है। इसलिए लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक का ताजा अपडेट जरूर देखें और जरूरत पड़ने पर दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करें।

 

CJP कल मांगेगी परमिशन

CJP ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के नेता आशुतोष रंका ने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे वह सौरव दास और संगठन के अन्य सदस्यों के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे। वहां दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन के लिए तारीख और अनुमति देने का अनुरोध किया जाएगा। रंका के मुताबिक, अगर पुलिस 24 घंटे के अंदर प्रदर्शन की तारीख नहीं देती है, तो संगठन अपने स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा करेगा।

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नो मोर ट्रैफिक जाम! दिल्ली में आ रहा है AI सिस्टम, करोड़ों का बजट पास

नई दिल्ली। दिल्ली अब रोज सड़क पर लगने वाले जाम और बढ़ते ट्रैफिक को संभालने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने राजधानी के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दी है। इस सिस्टम में AI और रियल टाइम ट्रैफिक डेटा की मदद से सड़कों पर ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने की कोशिश होगी।

यह प्रोजेक्ट दिल्ली पुलिस लागू करेगी। इसके तहत 42 बड़े ट्रैफिक कॉरिडोर को शामिल किया गया है। काम तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।

ट्रैफिक के हिसाब से खुद बदलेंगे सिग्नल

ITMS में ट्रैफिक सिग्नल सड़क पर गाड़ियों की संख्या के हिसाब से खुद बदलेंगे। ज्यादा ट्रैफिक होने पर सिग्नल की टाइमिंग अपने आप एडजस्ट होगी। बड़े रास्तों के सिग्नल आपस में जुड़े रहेंगे, जिससे बार-बार रुकने और देरी को कम किया जा सकेगा। सिस्टम जाम, धीमी रफ्तार और हादसों का भी तुरंत पता लगाएगा। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस जरूरत के अनुसार डायवर्जन कर सकेगी। एंबुलेंस और दूसरी इमरजेंसी गाड़ियों के लिए जरूरत के समय ग्रीन कॉरिडोर बनाने में ITMS मदद करेगा।

स्मार्ट सिस्टम से ट्रैफिक पर रहेगी नजर

  • AI कैमरों से रेड लाइट तोड़ने, तेज रफ्तार और गलत दिशा में गाड़ी चलाने वालों की पहचान होगी।
  • बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
  • ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल और गलत पार्किंग का भी पता चलेगा।
  • सिस्टम चोरी और ब्लैकलिस्टेड वाहनों की पहचान करने में मदद करेगा।
  • लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सड़कों पर लगे वेरिएबल मैसेज साइन से जाम, डायवर्जन और पार्किंग की जानकारी मिलेगी।
  • ट्रैफिक से जुड़ी ताजा जानकारी नेविगेशन सर्विस के साथ भी शेयर की जाएगी, जिससे लोग बेहतर रास्ता चुन सकेंगे।

1,092 सिग्नल और 1,029 एनफोर्समेंट लोकेशन

इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में 1,092 जगहों पर स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और 1,029 जगहों पर ट्रैफिक नियमों की निगरानी के लिए सिस्टम लगाया जाएगा। इसके साथ ट्रैफिक कमांड और कंट्रोल सेंटर भी बनाया जाएगा। डेटा सिक्योरिटी के लिए डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सिस्टम होगा। जरूरत के हिसाब से आगे इसमें नई टेक्नोलॉजी और फीचर भी जोड़े जा सकेंगे।

ITMS को पूरी दिल्ली में एक साथ लागू नहीं किया जाएगा। इसे तीन चरणों में शुरू किया जाएगा। हर चरण में टेस्टिंग और जांच के बाद ही आगे का काम किया जाएगा। इसका मकसद ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना, जाम कम करना और सड़क सुरक्षा बढ़ाना है।

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।

राइजिंग भारत समिट में बोले प्रियांक खड़गे- कर्नाटक में विजिलेंटिज्म पर जीरो टॉलरेंस, कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं

Priyank Kharge news: कर्नाटक के गृह, आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि राज्य सरकार विजिलेंटिज्म के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और कानूनी प्रावधान हर किसी पर समान रूप से लागू होते हैं। न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट के दौरान मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता के साथ आयोजित ‘फायरसाइड चैट – हाउ कर्नाटक इज बिल्डिंग द इनोवेशन इकोनॉमी ऑफ भारत? में बोलते हुए खड़गे ने कहा कि राज्य में किसी भी तरह के विजिलेंटिज्म की इजाजत नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। कानून सबके लिए एक बराबर है।

पुलिसिंग और प्रशासन में टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल

कर्नाटक में गवर्नेंस और कानून-व्यवस्था के क्रियान्वयन पर बात करते हुए खड़गे ने बताया कि राज्य ने पुलिसिंग और सार्वजनिक प्रशासन में तकनीक को तेजी से इंटिग्रेट किया है। ट्रैफिक मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और पुलिसिंग के क्षेत्रों में डिजिटल टूल्स का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रियांक खड़गे ने कहा कि हम ट्रैफिक, साइबर सुरक्षा और पुलिसिंग आदि में तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। गवर्नेंस में तकनीक के उपयोग के हमारे प्रयासों की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है।

पुलिस की उपस्थिति और निगरानी में सुधार के लिए सरकार ने एक नया एप्लिकेशन पेश किया है। खड़गे ने कहा कि अब पुलिस की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ा एक्शन: ₹2700 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना

राज्य में सड़क सुरक्षा और प्रवर्तन उपायों को उजागर करते हुए खड़गे ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ की गई बड़े पैमाने की कार्रवाई के आंकड़े साझा किए। पूरे राज्य में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 7.7 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों से राज्य भर में ₹2700 करोड़ से अधिक का जुर्माना लिया गया है।

क्विक कॉमर्स और गिग वर्कर्स पर क्या बोले मंत्री?

तेजी से बढ़ती ऐप-बेस्ड डिलीवरी सर्विस पर बात करते हुए खड़गे ने माना कि क्विक कॉमर्स के आने से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन बढ़ा है लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस कार्रवाई में सिर्फ डिलीवरी कर्मचारियों को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। खड़गे ने कहा कि 10 मिनट की डिलीवरी के इस दौर में कई तरह के उल्लंघन हो रहे हैं। हम अब उन्हें चार घंटे के लेक्चर दे रहे हैं। ट्रैफिक अपराधों को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन हम सिर्फ गिग वर्कर्स को दोष नहीं दे सकते।

बेंगलुरु के ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए ‘अर्बन मोबिलिटी मिशन’

प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम को कम करने के प्रयासों पर भी बात की। उन्होंने बेंगलुरु को भारत का इनोवेशन हब होने के साथ-साथ इसकी ट्रैफिक कैपिटल के रूप में भी परिभाषित किया। उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ की समस्या से निपटने और परिवहन योजना में सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक अर्बन मोबिलिटी मिशन की स्थापना की है।

खड़गे ने कहा कि, ‘हम अधिक से अधिक लोगों को मास ट्रांजिट सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम ई-कॉमर्स कंपनियों, फ्लीट मैनेजर्स, ट्रैफिक पुलिस, जीबीए (GBA) और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर एक मिशन मोड कमेटी बना रहे हैं।’

शहर के परिवहन परिदृश्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। गवर्नेंस, पुलिसिंग और शहरी बुनियादी ढांचे पर हुई इस व्यापक चर्चा के दौरान प्रियांक खड़गे ने जोर देकर दोहराया कि कर्नाटक की सरकार इस सिद्धांत पर चल रही है कि कानून सबके लिए समान है।

Viral Video: बारिश में जब थम गया ट्रैफिक, तब सड़क पर उतरा ‘स्पाइडर-मैन’, इंटरनेट पर मचा बवाल

महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। भारी बारिश की वजह से लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी बीच भिवंडी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भिवंडी के एक युवक ने लोगों की मदद के लिए अनोखा तरीका अपनाया। यहां एक युवक स्पाइडर-मैन की ड्रेस पहनकर बारिश के बीच सड़क पर उतरा और ट्रैफिक संभालने के साथ-साथ लोगों की मदद करता नजर आया। उसका ये अंदाज लोगों को काफी पंसद आ रहा है और ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

स्पाइडर-मैन की ड्रेस पहनकर आया ये युवक

वीडियो शेयर करते हुए न्यूज एजेंसी ANI ने लिखा, “भिवंडी में जलभराव के बीच स्थानीय निवासी शादाब स्पाइडर-मैन की ड्रेस पहनकर ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलाने में लोगों की मदद कर रहे हैं।” वीडियो में शादाब पानी से भरी सड़क के बीच खड़े होकर वाहनों को रास्ता दिखाते, ट्रैफिक संभालते और लोगों को सुरक्षित निकलने में मदद करते नजर आते हैं। साथ ही वह सड़क पर जमा पानी हटाकर यातायात को आसान बनाने की कोशिश भी करते दिखाई दे रहे हैं।

गाड़ियों को रास्ता दिखाने के साथ-साथ शादाब लोगों से बातचीत करते और राहगीरों से हाथ मिलाते भी नजर आए। उनकी इस पहल की वहां मौजूद कई लोगों ने सराहना की और उनके काम की जमकर तारीफ की है।

क्यों पहनी स्पाइडर-मैन की ड्रैस

ANI से बात करते हुए शादाब ने कहा, “मैंने देखा कि इलाके में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए नगर निगम की टीम अभी तक नहीं पहुंची थी।” उन्होंने बताया कि इसी वजह से उन्होंने खुद लोगों की मदद करने का फैसला किया। स्पाइडर-मैन की पोशाक पहनने की वजह बताते हुए शादाब ने कहा, “फिल्मों में स्पाइडर-मैन जिस तरह लोगों की मदद करता है और उनकी जान बचाता है, उसी से प्रेरित होकर मैंने भी असल जिंदगी में लोगों की मदद करने और सड़क पर जमा पानी हटाने का फैसला किया।”

वीडियो पर यूजर्स ने किया कमेंट

वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने शादाब की पहल की तारीफ करते हुए उन्हें असली सुपरहीरो बताया। एक यूजर ने लिखा, “अगर इसे अच्छा साइड क्वेस्ट नहीं कहेंगे, तो फिर क्या कहेंगे?” वहीं, दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कमेंट किया, “स्पाइडर-मैन: इंडिया चैप्टर।”