यूपी की ऐतिहासिक छलांग, जेम पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की खरीद

यूपी की ऐतिहासिक छलांग, जेम पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की खरीद

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Yogi Adityanath government: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर वर्ष 2017 में इसकी स्थापना से अब तक ₹1 लाख करोड़ (₹1 ट्रिलियन) से अधिक की खरीद दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। देश के सभी राज्यों द्वारा जेम के माध्यम से की गई कुल खरीद में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है। यह उपलब्धि प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी, एफिशियंसी और इन्क्लूसिव पब्लिक प्रोक्योरमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान

उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में- जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव शशिभूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया।

योगी सरकार के सुशासन मॉडल की बड़ी उपलब्धि

उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि केवल सरकारी खरीद के आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे योगी सरकार के गुड गवर्नेंस और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जेम के व्यापक उपयोग से सरकारी विभागों की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी, सरल और जवाबदेह बनाने में मदद मिली है। सरकारी खरीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक प्रक्रियाओं में होने वाली जटिलताओं को कम करने, अधिक विक्रेताओं को प्रतिस्पर्धा का अवसर देने और सरकारी संस्थानों को बेहतर कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

₹1 लाख करोड़ की खरीद ‘वैल्यू फॉर मनी’

जेम पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों ने डिजिटल खरीद व्यवस्था को बड़े पैमाने पर अपनाया है। इसके माध्यम से खरीद प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी, कम्पीटीशन, एफिशियंसी और ‘वैल्यू फॉर मनी’ को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। योगी सरकार की नीति के अनुरूप सरकारी खरीद को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के साथ-साथ छोटे और स्थानीय कारोबारियों को भी सरकारी बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

एमएसएमई, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिले अवसर

जेम के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद को केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित रखने के बजाय एमएसएमई, महिला उद्यमियों, एससी/एसटी वर्ग द्वारा संचालित उद्यमों और स्टार्टअप्स के लिए भी अवसरों का विस्तार किया है। इस व्यवस्था से छोटे उद्यमों को देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच बनाने का डिजिटल मंच मिला है। इससे प्रदेश के स्थानीय उद्यमियों के लिए सरकारी बाजार का दायरा बढ़ा है और उन्हें राज्य के बाहर भी अपने उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिला है।

क्षमता निर्माण पर भी जोर

उत्तर प्रदेश की सफलता में ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में समय-समय पर अधिकारियों, विभागों और अन्य हितधारकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, ताकि जेम की सुविधाओं और प्रक्रियाओं का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सके। इसी दिशा में किए गए प्रयासों को ‘बेस्ट आउटरीच इनिशिएटिव फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ राष्ट्रीय पुरस्कार के माध्यम से मान्यता मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार और जेम के बीच लगातार बेहतर होते समन्वय ने प्रदेश में सार्वजनिक खरीद सुधारों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, समावेशी और परिणाम आधारित बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

Kartik Aaryan: कार्तिक आर्यन के घुटने की हुई सर्जरी, कबीर खान की फिल्म के सेट पर हुए थे चोटिल

Kartik Aaryan: एक्टर कार्तिक आर्यन की मुंबई के एक अस्पताल में घुटने की सफल सर्जरी हुई है। हाल ही में अपनी एक फिल्म के सेट पर एक्शन सीन करते समय उनके घुटने में चोट लग गई थी, जिसके बाद उन्हें सर्जरी करवानी पड़ी।

उनके प्रवक्ता के बयान के मुताबिक नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले एक्टर अभी ठीक हो रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द ही शूटिंग शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा, “कार्तिक आर्यन को अपनी फिल्म के सेट पर एक एक्शन सीन करते समय घुटने में चोट लग गई थी। उनकी सर्जरी सफल रही और अब वह घर पर आराम कर रहे हैं और ठीक हो रहे हैं। वह जल्द ही सेट पर लौटेंगे।”

कार्तिक को यह चोट डायरेक्टर कबीर खान के साथ अपनी आने वाली फिल्म की शूटिंग के दौरान लगी। प्रोडक्शन से जुड़े एक सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया, “कार्तिक को फोर्टिस रहेजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह डॉक्टरों की देखरेख में हैं। डॉक्टर एक दिन में उनके घुटने की सर्जरी करेंगे, जिसके बाद उन्हें कुछ दिन आराम करना होगा। इसके बाद वह अपने काम पर लौट सकेंगे।” इससे पहले एक्टर को 2023 में आई अपनी फिल्म ‘शहजादा’ की शूटिंग के दौरान भी घुटने में चोट लगी थी।

कार्तिक की नेशनल अवॉर्ड में जीत

भले ही कार्तिक अभी चोट से जूझ रहे हों और ठीक हो रहे हों, लेकिन प्रोफेशनल तौर पर 2026 उनके लिए बहुत खास साल रहा है। एक्टर ने हाल ही में 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट एक्टर इन ए लीडिंग रोल’ का अवॉर्ड जीता। 18 जुलाई को घोषित यह अवॉर्ड कार्तिक को कबीर खान की डायरेक्ट की गई बायोग्राफिकल स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में भारत के पहले पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने के लिए दिया गया।

इस कामयाबी पर इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया देते हुए आर्यन ने लिखा, “अभी भी यकीन नहीं हो रहा… कुछ पल शब्दों से कहीं बड़े होते हैं, और यह उन्हीं में से एक है। बरसों से देखा गया मेरा सपना आखिरकार सच हो गया। हमेशा विनम्र और आभारी रहूंगा… बेस्ट एक्टर नेशनल अवॉर्ड #ChanduChampion।”

कार्तिक को बेस्ट एक्टर का सम्मान मलयालम सिनेमा के दिग्गज ममूटी के साथ मिला, जिन्हें ‘ब्रह्मायुगम’ में उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए यह अवॉर्ड दिया गया। यह कार्तिक का पहला नेशनल अवॉर्ड है, जबकि ममूटी का यह चौथा अवॉर्ड है। ठीक होने के बाद, उम्मीद है कि कार्तिक कबीर खान की बिना नाम वाली फिल्म की शूटिंग फिर से शुरू करेंगे। वह अनुराग बसु की रोमांटिक ड्रामा फिल्म में श्रीलीला के साथ बाकी हिस्सों की शूटिंग भी करेंगे।

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।

Kartik Aaryan: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘एट होम रिसेप्शन’ के लिए कार्तिक आर्यन को किया इनाइट

Kartik Aaryan: बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 अगस्त को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में होने वाले खास ‘एट होम रिसेप्शन’ में शामिल होने के लिए बुलाया है। ‘भूल भुलैया 3’ के एक्टर, 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इस खास कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।

खास बात यह है कि कार्तिक बॉलीवुड के इकलौते एक्टर हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया है और वे खास मेहमानों में शामिल होंगे, जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि ‘एट होम रिसेप्शन’ भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम होता है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां-जैसे राष्ट्रीय नेता, सेना के जवान, खिलाड़ी, कलाकार और खास उपलब्धियां हासिल करने वाले लोग—एक साथ इकट्ठा होते हैं।

कार्तिक को यह निमंत्रण तब मिला है जब उन्हें हाल ही में कबीर खान की खूब पसंद की गई स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनकी एक्टिंग के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट एक्टर’ का अवॉर्ड मिला है। जुलाई में, जब नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले के तौर पर कार्तिक के नाम का ऐलान हुआ, तो उन्होंने सोशल मीडिया पर परिवार के साथ एक खास पल शेयर किया था।

उन्होंने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे अपने परिवार के साथ नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड्स की लाइव घोषणा देखते हुए नजर आ रहे हैं। जैसे ही ‘चंदू चैंपियन’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ के तौर पर उनके नाम की घोषणा हुई, कार्तिक खुशी से चिल्ला पड़े। वीडियो में आगे कार्तिक के माता-पिता को अपने बेटे को गले लगाकर और उनकी इस नई कामयाबी पर बधाई देते हुए, इस गर्व भरे पल को उनके साथ साझा करते हुए दिखाया गया है।

कार्तिक की मां ने खुशी के उस पल में प्यार से उनके गाल पर किस भी किया।

अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कार्तिक ने फ़ोटो-शेयरिंग ऐप पर लिखा, “अभी भी यकीन नहीं हो रहा… कुछ पल शब्दों से कहीं बड़े होते हैं, और यह उन्हीं में से एक है। बरसों से देखा गया मेरा सपना आखिरकार सच हो गया है। हमेशा विनम्र, हमेशा आभारी… बेस्ट एक्टर नेशनल अवॉर्ड #ChanduChampion”

अभय छजलानी, पत्रकारिता के तपस्वी साधक

Abhay Chhajlani

Abhay Chhajlani Naidunia : इंदौर आज समूचे भारत में पत्रकारिता की नर्सरी माना जाता है। महनीय सम्पादकीय परम्परा की नींव माने जाने वाले शहर इंदौर की इमारत की बुलंदी को खड़ा करने में जिन साधकों के श्रम दर्ज हैं, ऐसे योद्धाओं में एक नाम अभय छजलानी भी है।

 

मां अहिल्या की नगरी इंदौर में छजलानी परिवार में 4 अगस्त 1934 को जन्म लेने वाले अभय जी ने हिन्दी पत्रकारिता की नर्सरी माने जाने वाले अखबार 'नईदुनिया' को वटवृक्ष बनाने में अहम भूमिका निभाई। आपने वर्ष 1955 में पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। 1963 में कार्यकारी संपादक का कार्यभार संभाला। बाद में, लंबे अरसे तक आप 'नईदुनिया' के प्रधान संपादक भी रहे।

वर्ष 1965 में पत्रकारिता के विश्व प्रमुख संस्थान थॉम्सन फाउंडेशन, कार्डिफ (यूके) से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र से इस प्रशिक्षण के लिए चुने जाने वाले आप पहले पत्रकार थे। परिवार में पत्नी पुष्पा छजलानी, पुत्र विनय छजलानी और पुत्रियां शीला और आभा हैं।

 

हिन्दी पत्रकारिता के कर्मठ सूत्रधार, जिनके नेतृत्व ने भारतीय पत्रकारिता जगत् को कई मूर्धन्य संपादक सौंपे, जिनमें राजेन्द्र माथुर जी, राहुल बारपुते जी, प्रभाष जोशी जी, शरद जोशी जी आदि हैं। हिन्दी पत्रकारिता की कोंपलो को आपने बहुत करीने से सहेजकर पल्लवित होने में मदद की है। अभय जी नईदुनिया के संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के अलावा कई महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व भी निभा रहे थे। 

 

वे भारतीय भाषाई समाचार पत्रों के शीर्ष संगठन इलना के 3 बार अध्यक्ष रह चुके हैं। वे 1988, 1989 और 1994 में संगठन के अध्यक्ष रहे। वे इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी (आईएनएस) के 2000 में उपाध्यक्ष और 2002 में अध्यक्ष रहे। 2004 में भारतीय प्रेस परिषद् के लिए मनोनीत किए गए, जिसका कार्यकाल 3 वर्ष रहा।

उन्हें 1986 का पहला श्रीकांत वर्मा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। 1995 में मप्र क्रीड़ा परिषद् के अध्यक्ष बने। ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग एंड फ्रेटरनिटी द्वारा वर्ष 1984 का गणेश शंकर विद्यार्थी सद्भावना अवॉर्ड वर्ष 1986 में राजीव गांधी ने प्रदान किया। 

 

पत्रकारिता में विशेष योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1997 में जायन्ट्स इंटरनेशनल पुरस्कार तथा इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार मिला था। पत्रकारिता में अतुलनीय अवदान के लिए भारत सरकार ने उन्‍हें वर्ष 2009 में पद्मश्री प्रदान किया था।

छजलानी जी को इंदौर में इंडोर स्टेडियम अभय प्रशाल स्थापित करने के लिए भोपाल के माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान ने सम्मानित किया था। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान के लिए ऑल इंडिया एचीवर्स कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में 1998 में राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार प्रदान किया। साथ ही, इसी वर्ष लाल बाग ट्रस्ट इंदौर का अध्यक्ष बनाया गया।

 

अभय जी का हिन्दी भाषा के प्रति गहरा प्रेम और लगाव भी रहा, यहां तक कि अपने अखबार में वर्तनी दोष भी न जाएं इस बात की चिंता अभय जी अधिक करते थे। कुछ एक बार तो अख़बार में एक शब्द की गलती हेडिंग में गलत छप जाने के कारण उन्होंने अख़बार में इंक से सुधार करवाएं और प्लेट्स भी बदलवा कर नई छपाई करवाई। ऐसे हिन्दी आग्रही का सम्पूर्ण जीवन हिन्दी भाषा की सेवा में रत रहा।

 

‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा वर्ष 2020 में आपको ‘हिन्दी गौरव अलंकरण’ से विभूषित किया गया। संस्थान ने पहला हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह इंदौर में आयोजित कर अभय जी को अलंकृत किया था। आप मध्य प्रदेश टेबल टेनिस संगठन के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा अभय जी ने शहर के कई खास मुद्दों को भी उठाया। छजलानी जी की खेल गतिविधियों में खास रुचि के चलते ही नईदुनिया प्रकाशन ने हिन्‍दी की पहली खेल पत्रिका ‘खेल हलचल’ का प्रकाशन भी आरंभ किया था।

 

सामाजिक सरोकारों की बात करें तो अभय जी नर्मदा को इंदौर लाने की मुहिम के अगुआ थे। इंदौर के पेयजल संकट को दूर करने के लिए नर्मदा का पानी लाने के आंदोलन में उन्होंने पुरजोर तरीके से कार्य किया। इंदौर में अभय प्रशाल जैसा भव्य इनडोर स्टेडियम बनवाने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

 

इसके अतिरिक्त सामाजिक और राजनीतिक दखलंदाजी भी बेजोड़ रही। एक समय मंत्रिमंडलों का खाका नईदुनिया तय करता था, और अभय जी कई बार निर्णायक भी होते थे। यहां तक कि वे अख़बार की हर विधा, हर क्षेत्र में दक्ष थे। अख़बार की डिजाइनिंग, रिपोर्टिंग, संपादन, मार्केटिंग या कोई भी पद हो, हर पद पर उन्होंने काम किया।

 

उन्होंने सोवियत संघ, जर्मनी, फ़्रांस, जॉर्डन, यूगोस्लाविया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, इंडोनेशिया, तुर्की, स्पेन, चीन आदि कई देशों की यात्रा कर उस अनुभवों को अपनी कार्यशैली में शामिल किया।

 

अभय जी ने 'विकास की व्यथा-कथा-कारवां भाग -1', 'छटपटाता शहर -भाग -2', 'शहर अकेला इस भीड़ में -कारवां -3', 'पीड़ा -ज्यों की त्यो -भाग -कारवां -4', 'अपना इंदौर -चार भागों में', 'मंथन', 'चिंतन', 'धड़कन', 'देखा सुना' किताबों को लिखा एवं आपके संपादन में 'सन्दर्भ-2003', 'सृष्टि का स्वर लता', 'भोपाल आज और कल', 'जब गांधी आए' एवं 'अमर सेनानी' पुस्तक प्रकाशित हुई। इनमें 'अपना इंदौर' बड़ी चर्चित और महनीय पुस्तक रही, जिसमें इंदौर का समग्र इतिहास समाया है।

 

अभय जी को अब्बू जी नाम राहुल बारपुते जी ने ही दिया था, प्यार से उनके बेहद खास लोग अब्बू जी कहते थे। अब्बू जी न केवल इंदौर के लिए बल्कि प्रदेश और देश के लिए कृत संकल्पित व्यक्तित्व रहे। दृष्टि संपन्नता में उनका कोई सानी नहीं था। हिन्दी भाषा की सतत् सेवा का ध्येय और साधारण से साधारण व्यक्ति के लिए भी सहज भाव से आदर सहित मिलने वाले चंद लोगों में अभय जी भी शामिल रहे।

 

एक बार मातृभाषा उन्नयन संस्थान के सम्मान के लिए आग्रह हेतु उनसे जब मैं मिलने गया तो उन्होंने इतना आदर दिया, संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली और यह तनिक भी महसूस नहीं होने दिया कि उनकी और मेरी उम्र में लगभग आधी शताब्दी का अंतर है। विनीत भाव से सम्मान ग्रहण करने का आग्रह स्वीकार किया। यही सहजता अभिभूत करती रही।

 

ऐसा भी नहीं रहा कि अभय जी का कभी विवादों से सामना न हुआ हो, लता अलंकरण हो अथवा अन्य मसले, इनके बावजूद भी अभय जी एक महानायक जैसे, हमेशा की तरह सूट-बूट पहने उजले ही नजर आए। एक उम्र गुजार कर नईदुनिया को अपने पसीने से सींचने के कारण ही अभय जी ने इंदौर की वैश्विक पहचान में नईदुनिया को दर्ज करवाया।

 

अपने छोटों से भी असीम नेह रखने वाले अभय जी ने 23 मार्च 2023 को इंदौर में आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार इंदौर के रीजनल पार्क मुक्तिधाम पर किया गया। उनके साथ न केवल नईदुनिया युग ठहर गया बल्कि हिन्दी पत्रकारिता ने एक योद्धा को खो दिया।

जीवन के अंतिम दौर में बीमारी के कारण उनकी स्मृतियां धुंधली जरूर हो रही थीं किंतु चेतना और जिजीविषा वैसी ही बनी रही। लोगों से मिलने की चेष्टा हो अथवा शहर हितार्थ कार्य करने की प्रणाली, साहित्य में रुचि हो अथवा लेखनी को सतत् भाव से बहने देने का कार्य, अभय जी हमेशा से जीवंत व्यक्तित्व के रूप में नजर आए। निश्चित रूप से अभय जी पत्रकारिता का चलता-फिरता विश्वविद्यालय या यूं कहें कि पत्रकारिता के तपस्वी साधक रहे।

‘आजादी सिर्फ मनमानी नहीं, जिम्मेदारी भी है’ लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में अजीत डोभाल का युवाओं को संदेश

शनिवार, 1 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तिलक स्मारक ट्रस्ट की ओर से दिए जाने वाले इस पुरस्कार को डोभाल को प्रदान किया। वहीं, सम्मान समारोह के बाद डोभाल ने युवाओं से कहा कि वे आजादी को सिर्फ बिना किसी रोक-टोक के कुछ भी करने की क्षमता के तौर पर न देखें, बल्कि इसे एक जिम्मेदारी समझें। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं से आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्र-निर्माण के आदर्शों को अपनाने की अपील की।

डोभाल ने कहा, तिलक की विरासत को समझने के लिए उस दौर की कठोर सच्चाइयों को जानना जरूरी है जिसमें वे रहते थे। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी आज़ाद भारत में पली-बढ़ी है और शायद उन मुश्किलों, दमन और पाबंदियों की कल्पना भी न कर पाए जो आजादी की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को झेलनी पड़ी थीं।

उन्होंने कहा कि देश के लिए तिलक का विजन आज भी प्रासंगिक है। डोभाल ने युवाओं से उनके विचारों को समझने और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “लोकमान्य तिलक के जीवन और उनके व्यक्तित्व की गहराई को सही मायने में समझने के लिए उस दौर की परिस्थितियों, चुनौतियों और कठिनाइयों को समझना जरूरी है। उस समय की परेशानियों और हालात की कल्पना करना आज हमारे लिए, खासकर युवाओं के लिए, काफी मुश्किल हो सकता है।”

डोभाल ने आजादी को बिना किसी रोक-टोक वाली निजी पसंद समझने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि आज के युवा उन आजादियों को मामूली समझें जिनका वे फायदा उठा रहे हैं, और उन कुर्बानियों को न पहचानें जिनकी वजह से ये आजादियां मुमकिन हो पाई हैं। डोभाल के अनुसार, आजादी का मतलब सिर्फ व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि देश के प्रति कर्तव्य और जिम्मेदारियां भी हैं।

उन्होंने कहा, “आज के युवा शायद यह सोचें कि भारत हमेशा से ऐसा ही रहा है, या वे आजादी का मतलब सिर्फ अपनी मर्जी का काम करना समझ बैठें हैं। लेकिन आजादी का असली मतलब यह नहीं है।”

NSA अजीत डोभाल ने युवाओं से भारत के विकास में बड़ी भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि देश अपने इतिहास के एक अहम दौर से गुजर रहा है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से ऊपर देशहित को रखें और एक मजबूत भारत बनाने के लिए मिलकर कोशिश करें। उन्होंने मौजूदा समय को एक दुर्लभ मौका बताया जिसे बर्बाद नहीं करना चाहिए।

बता दें कि उनकी ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब देश ने NEET पेपर लीक समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों जैसे मुद्दों पर छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शन देखे हैं। जहां, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक आजादी में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करने का अधिकार भी शामिल है, वहीं डोभाल ने जिम्मेदारी के साथ आजादी का इस्तेमाल करने और सार्वजनिक जीवन में राष्ट्र-निर्माण को केंद्र में रखने पर जोर दिया।

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लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार क्यों है खास? अजीत डोभाल को मिला सम्मान, जानिए इसका पूरा इतिहास

पुणे में शनिवार को एक समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि इस दौरान देश की सेनाओं की रक्षा और जवाबी कार्रवाई की क्षमता में बड़ा सुधार हुआ है। बता दें कि, यह पुरस्कार हर साल 1 अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर देश और समाज के लिए बेहतरीन काम करने वाले लोगों को दिया जाता है।

अजीत डोभाल को मिला सम्मान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि भारत की विदेश नीति को मजबूत बनाने में भी डोभाल का बड़ा योगदान रहा है। शाह के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वपूर्ण फैसलों में अजीत डोभाल की सलाह और भूमिका अहम रही है। भारत अब लोकमान्य तिलक के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचारों पर आगे बढ़ रहा है और सरकार इस रास्ते पर मजबूती से काम करती रहेगी। अमित शाह ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की सेनाओं की रक्षा और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को नई मजबूती दी है। इस बदलाव में अजीत डोभाल का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है।”

अमित शाह ने कहा कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार बनने के बाद सबसे पहले अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) नियुक्त करने का फैसला लिया था। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सेनाओं को आधुनिक बनाने, उनकी कार्यप्रणाली में सुधार लाने, नई तकनीक अपनाने और उनकी संचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले किए। शाह के अनुसार, इन सभी महत्वपूर्ण कदमों में अजीत डोभाल ने सलाहकार के रूप में अहम भूमिका निभाई। गृह मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति को मजबूत बनाने में भी अजीत डोभाल का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर महत्वपूर्ण फैसले में डोभाल की सलाह और भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

कब शुरू हुआ था यह सम्मान?

तिलक स्मारक ट्रस्ट ने बताया कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी। यह सम्मान सबसे पहले समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को दिया गया था। यह पुरस्कार हर वर्ष 1 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने देश की प्रगति और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

इस हस्तियों को मिल चुका है सम्मान

सबसे पहले यह पुरस्कार समाजवादी नेता एसएम जोशी को प्रदान किया गया था। पिछले वर्षों में यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को मिल चुका है।

Siddhant Kapoor: ‘ईथा’ का टीजर देख सिद्धांत कपूर की आंखों से छलके आंसू, बोले- ‘मेरी प्यारी बहन श्रद्धा…’

Siddhant Kapoor: श्रद्धा कपूर को उनकी आने वाली फ़िल्म ‘ईथा’ के टीजर में उनकी परफ़ॉर्मेंस के लिए तारीफ़ मिल रही है। यह तब हो रहा है जब टीज़र सोशल मीडिया पर रिलीज़ भी नहीं हुआ है। ‘ईथा’ का टीज़र सिनेमाघरों में ‘कॉकटेल 2’ के साथ दिखाया जा रहा है, और जिन लोगों ने इसे वहां देखा है, वे सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ़ कर रहे हैं। इनमें श्रद्धा के भाई, एक्टर सिद्धांत कपूर भी शामिल हैं। एक्टर ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल मैसेज शेयर करके अपनी बहन श्रद्धा के लिए तारीफ़ जाहिर की है, जिससे इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह और बढ़ गया है।

शुक्रवार को, ‘कॉकटेल 2’ की थिएटर रिलीज़ के साथ ‘ईथा’ का टीज़र दिखाए जाने के कुछ ही घंटों बाद, सिद्धांत ने टीज़र में श्रद्धा की तारीफ़ करते हुए एक पोस्ट शेयर किया और लिखा, “मेरी प्यारी बहन, मेरी आंखों में शुक्रगुज़ारी के आंसू हैं।” उनका यह दिल से निकला पोस्ट तब आया, जब दर्शकों ने श्रद्धा कपूर को एक ऐसे अवतार में देखा, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था। इस टीज़र ने फ़ैन्स के बीच काफ़ी चर्चा पैदा कर दी है, और श्रद्धा का ज़बरदस्त ट्रांसफ़ॉर्मेशन सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।

‘ईथा’ टीज़र में श्रद्धा को प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में पारंपरिक साड़ी पहने हुए दिखाया गया है। एक ज़बरदस्त सीन में उन्हें लेबर पेन के दौरान चीखते हुए दिखाया गया है, जहां वे स्टेज पर परफ़ॉर्मेंस के लिए जाने से ठीक पहले बच्चे को जन्म देती हैं। हालांकि टीज़र में श्रद्धा की सिर्फ़ एक झलक दिखाई गई है, लेकिन फ़ैन्स ने उनके ट्रांसफ़ॉर्मेशन की तुरंत तारीफ़ की और कई लोग तो उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिलने की भविष्यवाणी भी कर रहे हैं।

यह टीज़र ‘कॉकटेल 2’ की थिएटर स्क्रीनिंग के साथ दिखाया गया था और इसे YouTube पर शेयर नहीं किया गया था, लेकिन कई दर्शकों द्वारा सोशल मीडिया पर फ़ोन से रिकॉर्ड किए गए फ़ुटेज शेयर करने के बाद प्रीव्यू की क्लिप्स ऑनलाइन सामने आ गईं। लीक हुए इन विज़ुअल्स ने तुरंत लोगों का ध्यान खींचा और फ़ैन्स के बीच ज़बरदस्त चर्चा छेड़ दी।

‘छावा’ की ज़बरदस्त सफलता के बाद, ‘ईथा’ प्रोड्यूसर दिनेश विजान और डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर के बीच एक और सहयोग है। यह ‘स्त्री’ फ़िल्मों के बाद विजान के मैडॉक के साथ श्रद्धा का तीसरा सहयोग भी है। यह फ़िल्म मशहूर महाराष्ट्रीयन लोक कलाकार विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर की ज़िंदगी और विरासत पर आधारित है।

श्रद्धा इस मशहूर कलाकार का किरदार निभा रही हैं। उनके साथ कास्ट में रणदीप हुड्डा और मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब भी शामिल हैं, जो कहानी में अहम भूमिकाएं निभा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, ‘ईथा’ के 28 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने की उम्मीद है, जो रक्षाबंधन की छुट्टी वाले वीकेंड के दौरान होगी।