इंडोनेशिया के शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी, क्या अब इमर्जिंग मार्केट का दर्जा गंवाने का खतरा टला?

इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में मंगलवार यानी 20 अक्तूबर को रिकवरी दिखी। शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक जकार्ता कंपोजिट 3.46 फीसदी चढ़कर 5,168 पर चल रहा था। इसकी वजह एमएससीआई की चेतावनी के बाद अथॉरिटीज की तरफ से उठाए गए कदम हैं। हालांकि, अभी यह सवाल बना हुआ है कि अथॉरिटीज की कोशिश के बाद एमएससीआई का रुख बदलेगा या नहीं। एमएससीआई ने 16 अक्तूबर यानी शुक्रवार को इंडोनेशिया के शेयर बाजार को इमर्जिंग मार्केट्स कि लिस्ट से बाहर करने की धमकी दी थी।

बीते दो सत्रों में करीब 15 फीसदी गिरा था JCI

Jakarta Composite Index (JCI) मंगलवार को एक समय 4.3 फीसदी तक उछल गया था। इससे बीते दो सत्रों में आई करीब 15 फीसदी की गिरावट के बाद बाजार को कुछ राहत मिली है। हालांकि, इस रिकवरी के बावजूद इंडोनेशिया का शेयर बाजार दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन वाला बाजार बना हुआ है। 2026 में जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 40 फीसदी गिर चुका है। दुनिया के किसी बड़े बाजार में इस दौरान शायद ही इतनी गिरावट आई है।

MSCI ने शुक्रवार को दी थी बड़ी चेतावनी 

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई। MSCI ने पिछले हफ्ते कहा था कि इंडोनेशियो को इमर्जिंग मार्केट का अपना दर्जा (Status) गंवाना पड़ सकता है। यह ग्लोबल शेयर सूचकांकों से भी बाहर हो सकता है। एमएससीआई के अचानक इस ऐलान से इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में 16 अक्तूबर को बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी। अगर एमएससीआई ऐसा करता है तो दक्षिणपूर्व एशिया की इस सबसे बड़ी इकोनॉमी से काफी पैसा बाहर जा सकता है।

एक्सचेंज ने कमी दूर करने के लिए उठाए कदम

ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI की चेतावनी के बाद इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज ने कुछ कदम उठाए हैं। उसने कहा है कि वह बेंचमार्क इंडेक्स के कैलकुलेशन से बहुत ज्यादा ओनरशिप वाली कंपनियों को हटाएगा। इस बारे में 19 अक्तूबर यानी सोमवार को एमएससीआई के प्रतिनिधियों और एक्सचेंज के अधिकारियों की बीच बातचीत हुई।

निवेशकों का भरोसा बहाल करना सबसे जरूरी

इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ जेफ्री हेंडरिक के मुताबिक, JCI में ऐसी कंपनियों का वेटेज करीब 18 फीसदी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को हटाने के समय का ऐलान बाद में होगा। हालांकि, इनवेस्टर्स का कहना है कि सिर्फ बेंचमार्क में बदलाव करने से निवेशकों का भरोसा बहाल नहीं होगा। इसके लिए कंपनियों की ओनरशिप में पारदर्शिता लानी होगी, गवर्नेंस को स्ट्रॉन्ग करना होगा और नियमों के पालन पर फोकस करना होगा।

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फॉरेन इनवेस्टर्स कर चुके हैं 5 अरब डॉलर की बिकवाली

ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशक इस साल इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में करीब 4.9 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं। अगर MSCI इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट्स की लिस्ट से हटाता है तो बाजार में और बिकवाली दिख सकती है। एमएससीआई इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट की लिस्ट से हटाकर स्टैंडएलोन मार्केट की लिस्ट में डाल सकता है। इससे इंडोनेशिया के शेयर बाजार को बड़ा झटका लगेगा।

HDFC Bank News: डिप्टी MD कैजाद भरूचा 31 दिसंबर को पद छोड़ेंगे, पहले CEO पद की रेस में थे शामिल

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के साथ HDFC बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा ने पद छोड़ने का फैसला किया है। वह 31 दिसंबर 2026 को बैंक से विदा लेंगे। भरूचा तीन दशक से ज्यादा समय से बैंक के साथ काम कर रहे हैं। बैंक ने शनिवार को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।

इसके साथ ही बैंक ने लिली वडेरा को फिर से स्वतंत्र निदेशक बनाने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 26 नवंबर 2026 से शुरू होगा और तीन साल तक चलेगा।

RBI की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव

HDFC बैंक के बोर्ड ने भरूचा के पद छोड़ने के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। बैंक की गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (GNRC) ने भी इस फैसले पर सहमति जताई थी। अब इस प्रस्ताव को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

भरूचा का पद छोड़ने का फैसला ऐसे समय आया है, जब बैंक में एक और बड़ा बदलाव होने वाला है। 27 अक्टूबर को अनूप बागची HDFC बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह इससे पहले ICICI ग्रुप से जुड़े रहे हैं।

CEO पद की दौड़ में थे भरूचा

कैजाद भरूचा का पद छोड़ने का फैसला HDFC Bank में नए CEO की नियुक्ति के बीच आया है। बैंक के मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इससे पहले भरूचा को इस पद के प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा था।

अगस्त और सितंबर में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक ने CEO पद के लिए भरूचा के साथ एक बाहरी उम्मीदवार के नाम पर भी विचार किया था। भरूचा 2014 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे। बैंक ने भरूचा के पद छोड़ने की वजह नहीं बताई है।

बैंक के क्रेडिट सिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका

HDFC बैंक के बोर्ड ने भरूचा के काम की तारीफ की है। बोर्ड के मुताबिक, उन्होंने बैंक की ग्रोथ और उसे एक मजबूत संस्था बनाने में अहम योगदान दिया है।

खास तौर पर बैंक के क्रेडिट सिस्टम को तैयार करने और मजबूत बनाने में उनकी भूमिका रही। क्रेडिट सिस्टम का मतलब है कि बैंक किसे कर्ज देगा, उसकी जांच कैसे होगी और कर्ज से जुड़े जोखिम को कैसे संभाला जाएगा। बोर्ड ने माना कि यह व्यवस्था बैंक की बड़ी ताकतों में से एक है।

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HCL Tech Q2 results: आईटी कंपनी का मुनाफा 11% उछला, रेवेन्यू गाइडेंस बढ़ाया; ₹12 के डिविडेंड का ऐलान

HCL Tech Q2 results: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी HCL टेक्नोलॉजीज ने 12 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 11% बढ़कर 5,132 करोड़ रुपये हो गया।

इससे पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून में कंपनी ने 4,626 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। सालाना आधार पर नेट प्रॉफिट में 21.2% की बढ़ोतरी हुई। प्रॉफिट का आंकड़ा CNBC-TV18 पोल के ₹4,963 करोड़ के अनुमान से ज्यादा है।

कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 3% बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये रहा। पहली तिमाही में यह 34,579 करोड़ रुपये था। वहीं, सालाना आधार पर रेवेन्यू में 11.5% की बढ़ोतरी हुई।

ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार

HCL टेक्नोलॉजीज का ऑपरेटिंग मार्जिन दूसरी तिमाही में बढ़कर 18.2% हो गया। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 131 बेसिस पॉइंट और सालाना आधार पर 71 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ।

नोएडा मुख्यालय वाली इस कंपनी का एडवांस्ड AI से रेवेन्यू 219 मिलियन डॉलर रहा। इसमें तिमाही आधार पर 28.4% और सालाना आधार पर 78% की बढ़ोतरी हुई।

FY27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस बढ़ाया

HCLTech ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है। कंपनी ने इसे पहले के 1-4% से बढ़ाकर 2.5-4% कर दिया है। यानी कंपनी ने अनुमान की निचली सीमा बढ़ाई है। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष के लिए ऑपरेटिंग मार्जिन का अनुमान 17.5-18.5% पर बरकरार रखा गया है।

दूसरी तिमाही में कंपनी को नए सौदों से 3.24 अरब डॉलर का कारोबार मिला। इसमें मर्सिडीज-बेंज से मिला 1.14 अरब डॉलर का बड़ा AI सौदा भी शामिल है।

CEO ने क्या कहा?

HCLTech के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सी विजयकुमार ने कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। नई बुकिंग सालाना आधार पर 27% बढ़कर 3.3 अरब डॉलर रही। इसके साथ ही पहली छमाही की बुकिंग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

उन्होंने बताया कि कंपनी का EBIT मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 131 बेसिस पॉइंट बढ़कर 18.2% हो गया। सर्विसेज बिजनेस में तिमाही आधार पर 3% की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान अलग-अलग सेक्टर और भौगोलिक क्षेत्रों में कारोबार बढ़ा। कंपनी का कुल रेवेन्यू तिमाही आधार पर 2.3% बढ़ा।

विजयकुमार के मुताबिक, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर एडवांस्ड AI से रेवेन्यू तिमाही आधार पर 28.4% और सालाना आधार पर 78% बढ़ा। उन्होंने कहा कि कंपनी के AI प्रोडक्ट और सेवाओं को ग्राहकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इससे कंपनी को भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद है।

Anthropic के साथ AI पार्टनरशिप

HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic के साथ ग्लोबल प्रीमियर पार्टनरशिप का भी ऐलान किया है। इसका मकसद दुनिया भर की कंपनियों में एजेंटिक AI को अपनाने की रफ्तार बढ़ाना है। इस साझेदारी में सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और गवर्नेंस पर खास ध्यान दिया जाएगा।

HCLTech की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा ने कहा कि एडवांस्ड AI से रेवेन्यू में तेजी कंपनी की रणनीति को सही साबित करती है। उनके मुताबिक, रणनीतिक साझेदारियों और AI टेक्नोलॉजी में निवेश के दम पर कंपनी दुनिया भर की कंपनियों और सरकारों के लिए भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर बनने की स्थिति में है।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ी

30 सितंबर 2026 तक HCLTech में कुल 2,30,339 कर्मचारी थे। सितंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने 6,450 नए कर्मचारियों को जोड़ा। इनमें 6,136 फ्रेशर्स शामिल थे। वहीं, पिछले 12 महीनों के दौरान कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 12.8% रही। इससे पिछली तिमाही में यह दर 12.7% थी।

हर शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड

HCLTech ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

12 अक्टूबर को HCL टेक्नोलॉजीज के शेयर 0.5% की बढ़त के साथ 1,223 रुपये पर बंद हुए। कंपनी ने बाजार बंद होने के बाद तिमाही नतीजों का ऐलान किया।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अक्टूबर में IPO का मेला, Jio Platforms और Zetwerk समेत एक दर्जन कंपनियां कतार में

IPO Fair in October: जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms), जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस (Zetwerk Manufacturing Business), और एवांडा इलेक्ट्रो (Avaada Electro) समेत करीब एक दर्जन कंपनियों का इस महीने अक्टूबर में आईपीओ आने वाला है। मर्चेंट बैंकर्स के मुताबिक इनके अलावा और भी कई कंपनियां कतार में हैं। ये आईपीओ अलग-अलग सेक्टर्स से होंगे, जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग। इनमें से कुछ कंपनियां आईपीओ के जरिए सिर्फ नए शेयर जारी करेंगी तो कुछ में सिर्फ मौजूदा शेयरहोल्डर्स ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत शेयर बेचेंगे तो कुछ में दोनों का कॉम्बिनेशनल होगा।

इस महीने आने वाले आईपीओ

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21-23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है।

HD Fire Protect IPO: फायर प्रोटेक्शन उपकरण और सिस्टम बनाने वाली एचडी फायर प्रोटेक्ट के ₹712 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड फिक्स हो चुका है। निवेशक इसमें प्रति शेयर ₹258-₹271 के भाव पर बोली लगा सकेंगे। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर का सेल का होगा और यह 12-15 अक्टूबर तक खुला रहेगा।

Fusion CX: एआई से लैस कस्टमर एक्सपीरिएंस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर फ्यूजन सीएक्स ने ₹702 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹275-₹289 पर फिक्स किया है। यह इश्यू 14-16 अक्टूबर के बीच खुला रहेगा।

Zetwerk IPO: टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म जेटवर्कका ₹5000 करोड़ का आईपीओ 15-19 अक्टूबर तक खुला रहेगा। इस इश्यू के तहत ₹2600 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे।

Tonbo Imaging IPO: थर्मल इमेजिंग और डिफेंस सेक्टर से जुड़ी टेक्नोलॉजी सिस्टम बनाने वाली टोंबो इमेजिंग ने ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत अधिकतम 1.22 करोड़ इक्विटी शेयर बेचने का प्रस्ताव पेश किया है। ययह आईपीओ 15-19 अक्टूबर के बीच खुला रहेगा।

Bonfiglioli Transmissions IPO: इटली के बोनफिगलिओली ग्रुप की भारतीय सब्सिडियरी बोनफिगलिओली ट्रांसमिशन का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा, जिसके तहत अधिकतम 4.32 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी। यह इश्यू 15-19 अक्टूबर तक खुलेगा।

Sahajanand Medical Technologies IPO: पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल इश्यू ला रही मेडिकल डिवाइस बनाने वाली सहजानंद मेडिकल का आईपीओ 15-19 अक्टूबर को खुलेगा। इसके तहत 1.39 करोड़ शेयरों की बिक्री होगी।

और भी कंपनियां कतार में

एवांडा इलेक्ट्रो (Avaada Electro) की योजना ₹7600 करोड़, पारस हेल्थकेयर (Paras Healthcare) की ₹1800 करोड़ और एनडीआर इनविट ट्रस्ट (NDR InvIT Trust) की ₹750 करोड़ का आईपीओ लाने की है। इसके अलावा गुजरात विक्ट्री फॉर्जिंग्स (Gujarat Victory Forgings) ने अधिकतम 1.97 करोड़ शेयरों का आईपीओ लाने का प्रस्ताव रखा है। इन चारों आईपीओ के तहत नए शेयर जारी होंगे और ऑफर फॉर सेल विंडे के तहत भी शेयरों की बिक्री होगी। इसके अलावा एसएफसी एंवयार्नमेंटल टेक (SFC Environmental Tech) की भी योजना आईपीओ लाने की है, जिसके तहत ₹150 करोड़ के नए शेयर जारी हो सकते हैं और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत 1.23 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री हो सकती है।

इस साल कैसा रहा आईपीओ मार्केट में हाल

जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच मार्केट में इस साल तेज उठा-पटक रही और हाहाकार का माहौल बना हुआ है। इन सबके बीच इस साल 2026 के नौ महीनों में कंपनियों ने 96 कंपनियों के जरिए ₹1.1 लाख करोड़ से अधिक जुटाए। इसमें से 35 आईपीओ तो अकेले पिछले महीने सितंबर में आए थे।

जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स की हेड और एमडी नेहा अग्रवाल का कहना है कि मार्केट की तेज उठा-पटक के बावजूद अच्छी क्वालिटी वाले शेयरों की मांग बनी हुई है। नेहा के मुताबिक सेकंडरी मार्केट में विदेशी निवेशकों का निवेश घटता-बढ़ता रहा लेकिन प्राइमरी मार्केट में देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट मिलता रहा।

नेहा का कहना है कि जिन कंपनियों की कमाई साफ तौर पर दिख रही है, जिनका कॉर्पोरेट गवर्नेंस अच्छा है और जो कैपिटल का सही इस्तेमाल कर रही हैं, उनमें निवेशकों की दिलचस्पी अधिक हो सकती है। वहीं साथ ही आगे उन्होंने यह भी कहा कि जिन कंपनियां का वैल्यूएशन सही रहेगी, उन्हें निवेशकों का शानदार रिस्पांस दिख सकता है और लिस्टिंग के बाद भी वे अच्छा परफॉर्म कर सकती हैं।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है। 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 9 अक्टूबर को TCS, Wipro, Infosys, JSW Steel, NCC समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटक

शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कई शेयर फोकस में रहने वाले हैं। लिस्ट में TCS, JSW स्टील, P N गाडगिल ज्वेलर्स, NCC, पेस डिजिटेक, ITC जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, तिमाही बिजनेस अपडेट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा शुक्रवार को SME सेगमेंट में 3 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही कुछ शेयर एक्स-डिविडेंड और एक्स-बोनस ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के नतीजे

पूनावाला फिनकॉर्प, केनरा HSBC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आनंद राठी वेल्थ, कैन फिन होम्स, वॉटरवेज लीजर टूरिज्म, हैथवे भवानी केबलटेल एंड डेटाकॉम

10 अक्टूबर को इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

एवेन्यू सुपरमार्ट्स, LCC इन्फोटेक, प्रीमियर पॉलीफिल्म

शुक्रवार को इन शेयरों पर रहेगी नजर

IT कंपनियों के शेयर: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, HCL Technologies और इंफोसिस समेत कई टेक कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने इन कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने H-1B वर्कर वीजा सिस्टम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया।

TCS: जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही (Q2) में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 15% बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये रहा। EBIT 6% बढ़कर 17,553 करोड़ रुपये और EBIT मार्जिन घटकर 23.98% रहा। कंपनी ने प्रति शेयर 12 रुपये के दूसरे अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है।

P N Gadgil Jewellers: Q2 में रेवेन्यू सालाना आधार पर 22.4% बढ़ा। रिटेल सेगमेंट में 31.1% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें सेम-स्टोर सेल्स में 25.5% की अच्छी बढ़ोतरी शामिल है। फ्रैंचाइजी बिजनेस में 34.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं ई-कॉमर्स सेगमेंट में 83.6% की गिरावट आई।

JSW Steel: Q2 में कंसोलिडेटेड क्रूड स्टील प्रोडक्शन सालाना आधार पर 5% बढ़कर 7.27 मिलियन टन हो गया। भारत में क्रूड स्टील प्रोडक्शन 5% बढ़कर 7.07 मिलियन टन रहा।

IRB Infrastructure Developers: सितंबर महीने में टोल से होने वाली कमाई सालाना आधार पर 24.1% बढ़कर ₹772.5 करोड़ हो गई।

SML Mahindra: सितंबर महीने में कमर्शियल वाहनों का प्रोडक्शन सालाना आधार पर 19.83% बढ़कर 1,257 यूनिट रहा। कमर्शियल वाहनों की बिक्री 31.90% बढ़कर 1,071 यूनिट पर पहुंच गई। कमर्शियल वाहनों का एक्सपोर्ट 61.59% घटकर 53 यूनिट रह गया।

Waaree Renewable Technologies: कंपनी को एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) से 5 MWp ग्रिड-कनेक्टेड सोलर फोटोवोल्टिक (PV) प्रोजेक्ट के लिए टर्नकी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) काम का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LoA) मिला है। इसमें 10 साल के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस सर्विस भी शामिल है।

NCC: कंपनी को हैदराबाद ग्रोथ कॉरिडोर से ₹1,286.03 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LoA) मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट तेलंगाना में NH-167N पर बडवेल के पास आउटर रिंग रोड (ORR) से नचाराम तक रेडियल रोड-2 के निर्माण के लिए है (पैकेज 1: बडवेल से शबाद)।

Hexaware Technologies: कंपनी ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के साथ कई सालों की पार्टनरशिप की घोषणा की है और एंथ्रोपिक के ‘Claude पार्टनर नेटवर्क’ में एक पसंदीदा पार्टनर बन गई है। इस पार्टनरशिप के तहत Claude को हेक्सावेयर के दो प्लेटफॉर्म्स में शामिल किया जाएगा: AI-नेटिव इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म- Zerovity और एजेंट-बिल्डिंग और गवर्नेंस प्लेटफॉर्म- AgentVerse।

KEC International: कंपनी को अपने ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन, रिन्यूएबल्स, और केबल्स व कंडक्टर्स बिजनेस में ₹1,030 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर्स के साथ, इस साल अब तक मिले ऑर्डर्स की कुल वैल्यू ₹8,600 करोड़ से ज्यादा हो गई है।

Pace Digitek: कंपनी को BSES राजधानी पावर (BSES) से दिल्ली में 57.5 MW/115 MWh स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के डेवलपमेंट के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है। यह प्रोजेक्ट 12 साल के ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) मॉडल के तहत डेवलप किया जाएगा, जिसमें लगभग ₹179.4 करोड़ का खर्च आएगा।

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बल्क और ब्लॉक डील्स

One Mobikwik Systems: बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने 10.78 करोड़ रुपये में 4.48 लाख इक्विटी शेयर खरीदे हैं।

Eimco Elecon: एनिग्मा स्मॉल अपॉर्चुनिटीज फंड ने 10.47 करोड़ रुपये में 47,141 शेयर खरीदे हैं।

ITC: GQG पार्टनर्स इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड ने 36.5 करोड़ इक्विटी शेयर 9,395.44 करोड़ रुपये में बेचे हैं। इसके अलावा, एलायंस विटन PLC ने कंपनी में 16.11 लाख शेयर 41.46 करोड़ रुपये में बेचे हैं। खबरों के मुताबिक, GQG पार्टनर्स और एलायंस विटन ने कुल 2.92 प्रतिशत हिस्सेदारी 14 ग्लोबल और घरेलू इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को बेची।

AAA Technologies: संस्थागत निवेशक नॉटिलस प्राइवेट कैपिटल ने 4.19 करोड़ रुपये में 4.05 लाख शेयर बेचे हैं।

SME लिस्टिंग

पैरामाउंट सिंटेक्स

एक्मे इंडिया इंडस्ट्रीज

TNA सॉल्यूशंस

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

एक्सेलिया सॉल्यूशंस इंडिया

स्काईवेज एयर सर्विसेज

कैस्पियन कॉर्पोरेट सर्विसेज

अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, विप्रो, इंफोसिस को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया, H-1B के दुरुपयोग का आरोप

बोनस के लिए ये स्टॉक्स करेंगे एक्स-ट्रेड

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज

मोल्ड-टेक पैकेजिंग

बाय-बैक के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मैं गलत कामों को बंद करने की ठान कर बैठा हूं, बंद कर के रहूंगा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार ने मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनता का लाखों करोड़ रुपया गलत हाथों में जाने से बचाया है और बहुतों की मुफ्त की कमाई बंद की है और ऐसे ही लोग आज उनका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने गलत कामों को बंद करने की ठान रखी हैं और ऐसा करके रहेंगे चाहे उनका विरोध करने वाले कितना ही शोर क्यों न करें। श्री मोदी यहां यशोभूमि में भारत मोबाइल कांग्रेस 2026 का औपचारिक उद्घाटन कर रहे थे। उनका यह बयान ऐसे वातावरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जबकि विपक्ष राज्यों की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चुनाव आयोग के कार्यक्रम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए जगह जगह- धरने प्रदर्शन कर रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा आज सरकार की सैकड़ों सर्विसेज मोबाइल फोन पर हैं। सरकारी मदद अब सीधे बेनिफिशरीज़ के खाते में जाती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से करीब 50 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के मोबाइल में भेजे गए और उनके बैंक अकाउंट में पहुंचे। और इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपए, ये आंकड़ा छोटा नहीं है, 5 लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे हैं।

श्री मोदी ने कहा अब मुझे बताइए, जिनकी ये मुफ्त की कमाई बंद हो गई है, वो क्या, मोदी को प्यार करेंगे क्या? मैंने सही किया कि नहीं किया? करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? ये सारे गलत कामों को बंद करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? वो कितने ही चिल्लाते रहें, चीखते रहें, मैं इसको ठान के बैठा हूं, करके रहूंगा। श्री मोदी ने कहा कि टेलीकॉम के क्षेत्र में भारत में पिछले 10-12 साल में जो क्रांति आई है उसका नागरिक को सीधा-सीधा फायदा हुआ है।

उन्होंने देश विदेश से आयी दूरसंचार जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा आप जानते हैं कि भारत, भाषा और भूगोल, हर प्रकार से डायवर्स देश है, विविधताओं से भरा हुआ देश है। इसके कारण लोगों के जीवन में अनेक असुविधाएं भी आती हैं। मोबाइल कनेक्टिविटी ने इस डायवर्सिटी (विविधता) को भी सुविधा से जोड़ा है। पहले ज्यादातर बैंक शहरों में ही होते थे, अस्पताल शहरों में होते थे, सरकारी दफ्तर ब्लॉक या जिला स्तर पर रहते थे। यानि कुछ भी काम करना हो, सरकारी सेवा लेनी हो, तो लोगों का पैसा और समय दोनों खर्च होता था। 

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डिजिटल गवर्नेंस ने इन परिस्थितियों को बदला है। उन्होंने कहा पुरानी व्यवस्था होती, तो सरकार का 5 लाख करोड़ रुपए लीकेज में चला जाता और ऐसे लोगों की जेब भर देता, मोदी ने इसको रोका है। और अब वही पैसा सही लाभार्थी को मिल रहा है और बचा हुआ पैसा सही काम के लिए उपयोग आ रहा है।

श्री मोदी ने कहा पीएम किसान सम्मान निधि के तहत हम 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक किसानों के बैंक अकाउंट में जमा कर चुके हैं। किसान को मोबाइल फोन पर ही पैसा जमा होने का मैसेज मिल जाता है। ये पैसा उन करोड़ों छोटे किसानों तक पहुंचा है, जिन तक कभी सरकारी स्कीम्स का लाभ पहुंच ही नहीं पाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि दूरसंचार की चर्चा में अक्सर नेटवर्क और स्पैक्ट्रम पर बहस , मोबाइल टावर, नेटवर्क की पहुंच और गति की बातें होती हैं। लेकिन भारत के लोगों के लिए टेलीकॉम के मायने और भी रहे हैं। बीते 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन आधुनिक संचार के माध्यम के साथ-साथ गुड-गवर्नेंस (सुशासन) का भी अहम औजार बनकर सामने आया है। और यह हमारे डिजिटल इंडिया विजन के केंद्र में रहा है।

श्री मोदी ने कहा आज हम सुनते हैं कि भारत में डेटा सस्ता है, मोबाइल फोन सस्ते हैं, मोबाइल फोन यूजर बेस इतना एक्सपैंड हो गया है, ये अपनी जगह सब सच है, लेकिन ये हुआ कैसे? और ये सब किया क्यों गया? ये जब हम समझेंगे, तो सभी को भारत का फोकस, भारत का ध्यान एकदम स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले तक भारत में डिजिटल डिवाइड बहुत बड़ी चुनौती थी। आधुनिक टेक्नोलॉजी बड़े लोगों का अधिकार बनती जा रही थी। यानि जिसके पास साधन है, वही आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ ले सकता था।

प्रधानमंत्री ने कहा डिजिटल इंडिया अभियान से हमने इस स्थिति को बदलने की ठानी और इसके केंद्र में मोबाइल फोन को लेकर के आए। यह टेक्नोलॉजी के लोकतांत्रीकरण का बहुत बड़ा प्रयास था। उन्होंने कहा कि इसके लिए दूरसंचार क्षेत्र में हर जरूरी सुधार किए गए, अवसंरचना का विस्तार किया गया। हमने इस बात पर ध्यान दिया किया कि मोबाइल फोन और अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर भारत में ही बने।

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पीएम मोदी ने कहा डीबीटी ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए, मोबाइल फोन बना गवर्नेंस का हिस्सा

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत का मोबाइल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उम्मीद से ज्यादा विकसित हुआ है। यह अब शासन और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी का एक प्रमुख साधन बन गया है। सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सिस्टम के माध्यम से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए गए हैं। नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण के उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सैकड़ों सरकारी सेवाएं अब मोबाइल फोन के माध्यम से उपलब्ध हैं और डीबीटी के परिणामस्वरूप 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा किए गए हैं।

पिछले दशक में टेलीकम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी की भूमिका में बदलाव पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन सुशासन का एक उपकरण बन गया है। डीबीटी ने न केवल सरकारी पैसे के ट्रांसफर की सुविधा प्रदान की है बल्कि इस पैसे को गलत हाथों तक पहुंचने से रोकने में भी मदद की है।

जिन लोगों को पहले की व्यवस्था से फायदा हुआ था उनका जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों ने कमाई खो दी है,उन्हें मोदी पसंद नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि बदलावों के विरोध के बावजूद,वह उन्हें लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बचाए गए धन का इस्तेमाल अब सही उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

मोदी ने डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में इसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा मोबाइल फोन अब चैट का माध्यम नहीं रह गया है,लेकिन इससे यात्रा कम हो गई है, प्रतीक्षा का समय कम हो गया है और सुविधा अधिक हो गई है। यह देश के नागरिकों से टेक्नोलॉजी से मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 10-12 सालों में मोबाइल फोन अपनी सिर्फ बातचीत की पारंपरिक भूमिका से काफी आगे बढ़ गए हैं और गरर्नेंस के लिए एक माध्यम बन गए हैं। उन्होंने कहा,एक दशक पहले डिजिटल विभाजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। नई तकनीक तेजी से कुछ खास लोगों का विशेषाधिकार बनती जा रही थी। सरकार ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से मोबाइल फोन को अपनी डिजिटल रणनीति का केंद्र बनाकर इसका जवाब दिया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि डीपफेक एक “बड़ी चुनौती” है और धोखाधड़ी और सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए एक वैश्विक ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एक समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया क्योंकि डिजिटल खतरे तेजी से राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने सरकारों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों से साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसे खतरों से निपटने का अनुभव है और वह अपनी सीख अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

HDFC Bank Share Price: FIIs ने बेची होल्डिंग तो शेयर धड़ाम, ब्रोकरेजेज का ये है रुझान

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज बिकवाली का भारी दबाव दिखी और इसकी वजह इसका सितंबर तिमाही का शेयरहोल्डिंग पैटर्न है। इसमें सामने आया कि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने इसमें अपनी हिस्सेदारी 2.43% कम की और अब जून तिमाही के आखिरी में 41.82% से घटकर सितंबर तिमाही के आखिरी में 39.39% (FIIs Holding in HDFC Bank) तक आ गई। इसने बैंक के शेयरों पर दबाव बढ़ाया और फिलहाल बीएसई पर यह 1.65% की गिरावट के साथ ₹692.20 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.79% टूटकर ₹691.20 तक आ गया था।

FIIs vs DII in HDFC Bank: किसकी कितनी होल्डिंग?

सितंबर 2026 तिमाही के आखिरी में एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेशकों यानी FIIs की हिस्सेदारी 2.43 पर्सेंटेज प्वाइंट्स कम होकर 39.39% पर आ गई। वहीं दूसरी तरफ इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की होल्डिंग 1.69 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़कर 43.44% हो गई। इसमें म्यूचुअल फंड्स की 31.88% हिस्सेदारी है तो ₹2 लाख तक के निवेश वाले यानी खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 10.87% है।

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सीईओ के तौर पर अनूप बागची की नियुक्ति के असर का मार्केट आकलन कर रहा है। अधिकतर ब्रोकरेज फर्म ने उनकी नियुक्ति का सपोर्ट किया है लेकिन कुछ एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि उन्हें काम संभालने में समय लगेगा।

नुवामा के बीएफएसआई एनालिस्ट हेड आनंद दामा का कहना है कि अनूप को पहले अपनी टीम फिर से बनाने की जरूरत पड़ेगी और फिर एक लंबे समय में वह नए आइडिया ला सकते हैं और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि अनूप बागची की नियुक्ति से एचडीएफसी बैंक की लीडरशिप से जुड़ी एक बड़ी चिंता दूर हो गई और अनूप बागची का अनुभव एक बड़ी ताकत साबित होगी।

अनूप बागची अभी ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के सीईओ हैं और देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ICICI Bank में सीनियर पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने रिटेल और होलसेल बैंकिंग बिजनेस संभाला था। उन्होंने छह साल तक ICICI सिक्योरिटीज को भी लीड किया। उनकी उम्र 56 साल है तो वह लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक की कमान संभाल सकते हैं क्योंकि RBI के नियमों के मुताबिक बैंक सीईओ 70 साल की उम्र तक बने रह सकते हैं।

इंडिपेंडेंट एनालिस्ट नीरज दीवान का कहना है कि प्रोविजनल डेटा और एचडीएफसी ग्रुप के बाहर के किसी शख्स को सीईओ की कमान बैंक के लिए पॉजिटिव है लेकिन निवेशक अभी सतर्कता बरत रहे हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर कुछ और तिमाहियों तक दबाव बना रह सकता है। बैंक ने शनिवार को सितंबर के आखिरी तक अपने डिपॉजिट में लगभग 18.8% और ग्रॉस एडवांस में 16.3% की बढ़ोतरी की जानकारी दी थी।

शेयरों पर क्यों आया दबाव

साल 2023 में अपनी पैरेंट कंपनी एचडीएफसी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक के मार्जिन और ग्रोथ पर असर पड़ा। इसका असर बैंक के शेयरों पर पड़ा और अपने पियर्स के मुकाबले यह कमजोर हुआ। गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण मार्च में चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने भी सेंटीमेंट पर बुरा असर डाला। हालांकि एक स्वतंत्र जांच में उनके दावों की पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन शेयरों पर दबाव बना रहा। प्राइस-टू-एडजस्टेड बुक वैल्यू के आधार पर यह स्टॉक अब आईसीआईसीआई बैंक के मुकाबले 25% डिस्काउंट पर है और साल 2025 में अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद से इसमें लगभग 31% की गिरावट आई है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।