Stocks to Watch: Paytm, Airtel, Nykaa और ONGC समेत इन स्टॉक्स पर फोकस; RBI के ऐलान का मार्केट पर असर!

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 150.50 प्वाइंट्स यानी 0.61% की बढ़त के साथ 24,728.50 पर है। चूंकि आज आरबीआई मौद्रिक नीतियों का ऐलान करने वाला है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 04 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 210.08 प्वाइंट्स यानी 0.27% की गिरावट के साथ 78,428.95 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 159.40 प्वाइंट्स यानी 0.64% की फिसलन के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

आज इन कंपनियों के नतीजे होंगे पेश

पावर ग्रिड, पीबी फिनटेक, ऑरोबिंदो फार्मा, बर्जर पेंट्स इंडिया, बायोकॉन, कमिंस इंडिया, ईक्लर्क्स सर्विसेज, ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स, जीई वर्नोवा टीएंडी इंडिया, इन्वेंटुरस नॉलेज सॉल्यूशंस, जेके लक्ष्मी सीमेंट, श्री रेणुका शुगर्स, एसआईएस और व्हर्लपूल ऑफ इंडिया आज कारोबारी नतीजे पेश करेंगी

इन कंपनियों के रिजल्ट जारी

Bharti Airtel Q1 (Consolidated (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एयरटेल का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 37.3% बढ़कर ₹8,167.4 करोड़ और रेवेन्यू 18.4% उछलकर ₹58,539.1 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए 19.3% बढ़कर ₹33,599 करोड़ और मार्जिन 50 बीपीएस चढ़कर 57.4% पर पहुंच गया। इस दौरान प्रति यूजर औसतन रेवेन्यू ₹250 से ₹264 पर पहुंच गया।

ONGC Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ओएनजीसी का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 112.3% बढ़कर ₹17,034 करोड़ और रेवेन्यू 45.2% उछलकर ₹46,460 करोड़ पर पहुंच गया। क्रूड ऑयल प्राइस-नॉमिनेटेड का नेट रियलाइजेशन 50.4% बढ़कर प्रति बैरल $99.45 पर पहुंच गया।

FSN E-Commerce Ventures (Nykaa) Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नायका का कंसालिडेटेड प्रॉफिट तीन गुना बढ़कर ₹24.5 करोड़ से ₹79.8 करोड़ और रेवेन्यू 29.1% उछलकर ₹2,782 करोड़ पर पहुंच गया। नायका ने ₹32 करोड़ में एमिनु वेलनेस में 51% हिस्सेदारी हासिल की।

Bharti Hexacom Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर भारती हेग्जाकाम का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 23.2% बढ़कर ₹482 करोड़ और रेवेन्यू 10.9% उछलकर ₹2,510 करोड़ पर पहुंच गया।

Marico Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मैरिको का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 27.1% बढ़कर ₹652 करोड़ और रेवेन्यू 22.9% उछलकर ₹3,957 करोड़ पर पहुंच गया।

Kalyan Jewellers India Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कल्याण ज्वैलर्स इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 32% बढ़कर ₹348.7 करोड़ और रेवेन्यू 45.7% उछलकर ₹10,588.9 करोड़ पर पहुंच गया।

United Breweries Q1 (Consolidated)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर यूनाइटेड ब्रूअरीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 9.6% गिरकर ₹166.3 करोड़ पर आ गया लेकिन इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 7.1% उछलकर ₹3,067 करोड़ पर पहुंच गया।

NHPC Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एनएचपीसी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 2.9% बढ़कर ₹1,095.9 करोड़ और रेवेन्यू 18.5% उछलकर ₹3,808.3 करोड़ पर पहुंच गया।

MCX Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एमसीएक्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 103.5% बढ़कर ₹413.4 करोड़ और रेवेन्यू 88.1% उछलकर ₹702 करोड़ पर पहुंच गया।

Sheela Foam Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर शीला का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 9 गुना बढ़कर ₹6.5 करोड़ से ₹61.4 करोड़ और रेवेन्यू 25.6% उछलकर ₹1,031.9 करोड़ पर पहुंच गया।

BSE Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर बीएसई का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 62% बढ़कर ₹874 करोड़ और रेवेन्यू 63.5% उछलकर ₹1,566 करोड़ पर पहुंच गया। इसने इंडिया इंटरनेशनल बुलियन होल्डिंग आईएफएससी में हिस्सेदारी 3.33% से बढ़ाकर 20% कर ली है।

Metropolis Healthcare Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 25.7% बढ़कर ₹56.9 करोड़ और रेवेन्यू 16.6% उछलकर ₹450.2 करोड़ पर पहुंच गया।

PNB Housing Finance Q1 (Standalone YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 4.3% बढ़कर ₹554.5 करोड़ और NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 7.5% उछलकर ₹788.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Deepak Nitrite Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर दीपक नाइट्राइट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 3 गुना बढ़कर ₹112.3 करोड़ से ₹345 करोड़ और रेवेन्यू 36.4% उछलकर ₹2,577.6 करोड़ पर पहुंच गया।

Sanofi India Q2CY26 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर सनोफी इंडिया का प्रॉफिट 20.1% बढ़कर ₹83.5 करोड़ और रेवेन्यू 7.7% उछलकर ₹437.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Stocks to Watch: इस पर भी रहेगी नजर

LIC

सरकार ने 5 अगस्त को ऑफर फॉर सेल के जरिए एलआईसी में 4% हिस्सेदारी वाले 50.59 करोड़ इक्विटी शेयरों के लिए ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह 2.5% वाले 31.62 करोड़ इक्विटी शेयरों के बेस इश्यू साइज के अलावा है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

One 97 Communications (Paytm)

एलीवेशन कैपिटल V ने पेटीएम के 10.20 लाख शेयर ₹139.55 करोड़ में बेचे, तो एसएआईएफ III मॉरीशस कंपनी ने 97.43 लाख शेयर ₹1,332.7 करोड़ में और एसएआईएफ पार्टनर्स इंडिया IV ने भी 41.36 लाख शेयर ₹565.77 करोड़ में बेचे। कुल मिलाकर इन तीनों कंपनियों ने पेटीएम के 1.49 करोड़ शेयर ₹2,038.02 करोड़ में बेचे। ये शेयर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ट्रस्ट, एक्सिस म्यूचुअल फंड, मॉर्गन स्टेनली, गोल्डमैन सैक्स, सोसिएट जेनरल, बीएनपी परिबास फाइनेंशियल मार्केट्स, सुंदरम म्यूचुअल फंड, मैनुलाइफ ग्लोबल फंड, कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, घिसालो मास्टर फंड, फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड और टाटा म्यूचुअल फंड जैसे दिग्गजों ने खरीदे।

Meesho

सोसिएट जेनरल, एक्सिस म्यूचुअल फंड, फिडेलिटी, गोल्डमैन सैक्स, यूटीआई म्यूचुअल फंड, प्रूडेंशियल हांगकांग, मॉर्गन स्टेनली, कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी, एचएसबीसी म्यूचुअल फंड, घिसालो मास्टर फंड, फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, अशोका इंडिया इक्विटी इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट, बीएनपी पारिबास फाइनेंशियल मार्केट्स, डेंडाना इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस और ईस्टस्प्रिंग इन्वेस्टमेंट्स समेत 27 निवेशकों ने एलीवेशन कैपिटल और पीक XV पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट्स से मीशो की 2.27% होल्डिंग के बराबर शेयर ₹1949 करोड़ में ₹186 के भाव पर खरीदे।

Poonawalla Fincorp

पीएफएल एम्प्लॉई वेलफेयर ट्रस्ट ने पूनावाला फिनकॉर्प के 47.08 लाख शेयर (0.53% हिस्सेदारी) ₹222.96 करोड़ में बेच दिए। प्रति शेयर ₹473.5 के भाव पर इन्हें सुंदरम म्यूचुअल फंड, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, हेलियोस म्यूचुअल फंड और मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर जैसे निवेशकों ने खरीदा।

Sudeep Pharma

गोल्डमैन सैक्स फंड्स-गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने नुवामा से सुदीप फार्मा के सुदीप फार्मा के 11.76 लाख शेयर (1.04% हिस्सेदारी) ₹100 करोड़ में खरीदे। नुवामा क्रॉसओवर अपॉर्चुनिटीज फंड-सीरीज III ने 6.14 लाख शेयर और सीरीज IIIA ने फार्मा कंपनी के 5.62 लाख शेयर ₹850 के भाव पर बेचे हैं। जून 2026 तक कंपनी में नुवामा क्रॉसओवर अपॉर्चुनिटीज फंड-सीरीज III की 2.95% और सीरीज IIIA की 2.57% हिस्सेदारी थी।

Zota Health Care

लिप्टस पंच-कार्ड फंड ने वैलिएंट इंडिया अपॉर्चुनिटीज से जोटा हेल्थ केयर के 2.19 लाख शेयर (0.63% हिस्सेदारी) ₹27.18 करोड़ में ₹1,241 के भाव पर खरीदे।

Rajgor Castor Derivatives

यूनिकॉर्न फंड ने राजगोर कैस्टर डेरिवेटिव्स के 8.97 लाख शेयर (3.75% हिस्सेदारी) ₹2.95 करोड़ में ₹32.94 के भाव पर ₹2.96 करोड़ में बेचे। मार्च 2026 तक फंड के पास कंपनी में 5.76% हिस्सेदारी के बराबर 13.77 लाख शेयर थे। इसमें से राघव नरेंद्र राठी ने ₹33 के भाव पर 2.97 लाख शेयर, रमेशचंद्र मदनलाल राठी ने ₹32.90 के भाव पर 3.03 लाख शेयर और माधव नरेंद्र राठी ने ₹32.94 के भाव पर 3 लाख शेयर खरीदे।

Aimtron Electronics

एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट के एल्केमी लॉन्ग टर्म वेंचर्स फंड सीरीज 3 ने प्रति शेयर ₹1,480 के भाव पर एमट्रॉन इलेक्ट्रॉनिक्स के 2.06 लाख शेयर ₹30.48 करोड़ में खरीदे। वहीं प्रमोटर मुकेश जेराम वसानी ने प्रति शेयर ₹1,480.09 के भाव पर कंपनी के 2.1 लाख शेयर ₹31.08 करोड़ में बेचे हैं।

Apollo Pipes

प्रमोटर एस गुप्ता होल्डिंग ने प्रति शेयर ₹522.16 के भाव पर अपोलो पाइप्स के 2.25 लाख शेयर और ₹522.34 के भाव पर ₹2.25 लाख शेयर खरीदे। इस प्रकार प्रमोटर ने ₹23.5 करोड़ में कंपनी में 1% से अधिक हिस्सेदारी हासिल की।

लिस्टिंग

आज मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे तो एचआर हाईजीन प्रोडक्ट्स के शेयरों की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

हुंडई मोटर इंडिया, एडीएफ फूड्स, अजंता फार्मा, अनुह फार्मा, ऑटोमोटिव एक्सल्स, इंडेफ मैन्युफैक्चरिंग, बेयर क्रॉपसाइंस, बर्जर पेंट्स इंडिया, ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, डिसा इंडिया, फर्मेंटा बायोटेक, गांधी स्पेशल ट्यूब्स, गुडइयर इंडिया, इंडैग रबर, आईआरबी इंफ्रा डेवलपर्स, मैट्रिमोनीडॉटकॉम, मुकेश बाबू फाइनेंशियल सर्विसेज, मुंजाल शोवा, ओरिएंटल एरोमैटिक्स, श्रेयांस इंडस्ट्रीज, सिका इंटरप्लांट सिस्टम्स, सोमानी सिरेमिक्स, टीडी पावर सिस्टम्स, अपडेटर सर्विसेज, और वेदांता एल्युमीनियम मेटल के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे। वहीं एसएबी इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया के रिजॉल्यूशन प्लान-सस्पेंशन की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

एलआईसी में आज एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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बांकीपुर से प्रशांत किशोर की जीत के क्या हैं मायने

prashant kishor

मनीष कुमार

प्रशांत किशोर (पीके) की बिहार के उपचुनाव में जीत पर फिलहाल उन्हें गेम चेंजर तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तो साफ है कि बिहार की राजनीति करवट लेना चाह रही है। ALSO READ: दक्षिण कोरिया में गर्मी ने तोड़ा 100 साल का रिकॉर्ड

 

इस जीत का साफ संदेश है कि कुछ वोटर सिर्फ जातिगत समीकरण नहीं देख रहे, बल्कि उनकी नजर में मुद्दों, गवर्नेंस व विकास के साथ-साथ विकल्प भी अहमियत रख रहा है। साथ ही, यह भी तय है कि बतौर विधायक अब अकेले ही प्रशांत किशोर विधानसभा में गवर्नेंस के मुद्दे पर दबाव बनाए रखेंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो एनडीए को मजबूरी मान रहे लोगों को उनकी पार्टी भी विकल्प के रूप में दिखेगी। भारत की राजनीति ने एक बार फिर चौंकाया है। 

 

बीजेपी की पारंपरिक सीट

बांकीपुर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान हुआ था। इस बार 2025 के चुनाव की तुलना में यहां सात प्रतिशत कम वोटिंग हुई। पिछली बार यहां 41.39 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार 34.30 फीसदी वोटिंग हुई। 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद मतदान का यह सबसे कम प्रतिशत है। एनडीए की तरफ से बीजेपी के नीरज सिन्हा और महागठबंधन की ओर से आरजेडी की रेखा गुप्ता सहित कुल 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

 

बांकीपुर की यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी। यह बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। 1995 से यहां बीजेपी जीतती रही है। पहले पिता नवीन कुमार सिन्हा और फिर पुत्र नितिन यहां से लगातार जीतते रहे।

 

यहां से पांच बार लगातार जीतने वाले नितिन को इस बार भी पार्टी की जीत का इतना अधिक भरोसा था कि उन्होंने यहां तक कहा था कि बांकीपुर की जनता इस चुनाव में बीजेपी की जीत के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। लेकिन अब, जब पीके ने बीजेपी के गढ़ में घुसकर सेंध लगा दी है।

 

राजनीतिक समीक्षक एके चौधरी कहते हैं, ‘‘बिहार में चुनाव में जाति ही जीत की गारंटी रही है। इसी समीकरण को देखकर पार्टियां टिकट भी देती रही हैं, यह इतनी जल्दी टूटने वाला नहीं है। हां, इतना जरूर है कि पीके की जीत से उन सुधारों की चर्चा अवश्य ही तेज होगी, जिससे संबंधित मुद्दे वे 2025 के चुनाव से उठा रहे। अब इन मुद्दों से अन्य पार्टियां भी मुंह नहीं मोड़ सकेंगी।'' ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

पीके पर भरोसा बढ़ेगा

प्रशांत किशोर की 'वोटकटवा' वाली छवि पर इसका असर पड़ेगा। 2025 के चुनाव में जनसुराज ने 238 सीट पर अपने प्रत्याशी खड़े थे, किंतु हालत इतनी खराब हुई कि 237 पर पार्टी के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। चौधरी कहते हैं, ‘‘पीके को पिछली बार ही चुनाव लड़ना चाहिए था। राघोपुर सहित अन्य सीटों से उनके चुनाव लड़ने की बात पहले सामने आई, किंतु अंतत: वे शायद हिम्मत नहीं जुटा सके, या यूं कहिए कि अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं थे। पार्टी के मुखिया की यह अनिश्चितता लोगों को शायद रास नहीं आई।''

 

विश्लेषकों का कहना है कि इस जीत से उनका मनोबल तो बढ़ेगा ही, साथ ही उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। आखिरकार, उन्हें चुनौतीपूर्ण लंबी लड़ाई जो लडऩी है। हालांकि बीजेपी के एक नेता कहते हैं, “और कारण जो भी रहे हों, पीके की जीत में भितरघात की भी बड़ी भूमिका रही। अन्यथा इतना अधिक मार्जिन नहीं रहता। निशाने पर कौन और क्यों था, आप समझ सकते हैं।”

 

बीजेपी के गढ़ में मिली यह जीत प्रशांत किशोर के लिए संजीवनी का काम करेगी। राजनीति विज्ञान की अवकाश प्राप्त प्रोफेसर श्यामली घोष कहती हैं, ‘‘अब उनकी शख्सियत केवल एक पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट की नहीं रह जाएगी, बल्कि वह राजनेता के रूप में स्थापित हो जाएंगे। उनकी पार्टी के लिए अवसर बढ़ेंगे, लेकिन बहुत कुछ विधानसभा में उनके परफार्मेंस पर निर्भर करेगा, जिससे आम जनता को लगे कि उनकी बात दमदार तरीके से उठाने वाला कोई है, जिस पर कोई चर्चा नहीं होती।''

 

घोष के मुताबिक प्रशांत किशोर को सरकार के उन वादों को जोरदार तरीके से उछालना होगा, जिन पर काम नहीं हुआ या वे पूरे नहीं हुए। सरकार के आंकड़ों के खेल पर भी उन्हें सक्रिय रहना होगा। तभी उनकी पार्टी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि बिहार में जातिगत रूढ़िवादिता को तोड़ना इतना आसान नहीं है।

 

श्यामली घोष यह भी कहती हैं, ‘‘यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे एनडीए की पार्टियों का कोर वोटर शिफ्ट हो रहा। हां, यह इस बात का संकेत हो सकता है कि सवर्ण सहित इनका शहरी व मिडिल क्लास वोटर इनसे बिदक सकता है। मुझे नहीं लगता कि सम्राट सरकार पर कोई असर पड़ने वाला है।''

 

हालांकि, पीके एनडीए की हार का ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर फोड़ने की कोशिश करते हुए उनसे नैतिक आधार पर इस्तीफे को लेकर तंज तो कसते रहेंगे। जनसुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इसे जनता की जीत और बीजेपी की हार बताते हुए कहा, ‘‘बिहार में लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए इस जीत के बड़े मायने हैं।'' ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध

 

गठबंधनों को करना होगा आत्ममंथन

बिहार में पिछले कई दशकों से कोई भी पार्टी अकेले सत्ता पर काबिज नहीं हो सकी है। जातिगत समीकरणों को देखते हुए गठबंधन उनकी मजबूरी बन जाती है। सत्ता पक्ष में बीजेपी, जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (लोक जनशक्ति पार्टी), उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा) और जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) है तो विपक्ष में आरजेडी, कांग्रेस और माले सहित सात पार्टियां हैं। पिछले 21 सालों के अधिकांश समय में एनडीए सत्ता और आरजेडी विपक्ष में है। यह परिणाम इन दोनों गठबंधनों के लिए झटका तो है ही, साथ यह एक अवसर भी है।

 

श्यामली घोष कहती हैं, ‘‘अब समय आ गया है कि दोनों ही पक्ष आत्ममंथन करें। किसी वर्ग विशेष को अपनी जागीर का हिस्सा नहीं समझें। अपनी नीतियों तथा रणनीति की समीक्षा करें। क्योंकि, अगर एनडीए से शहरी वोटरों का मोहभंग दिख रहा है तो आरजेडी का माइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण भी कहीं न कहीं दरक रहा।''

 

जेडीयू-आरजेडी में भी नेतृत्व के प्रति चुनौती बढ़ेगी। कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी तो पहले ही कह चुके हैं कि बिहार में महागठबंधन को चलाने की जिम्मेदारी आरजेडी पर है, लेकिन इस चुनाव में तेजस्वी यादव ने साथी दलों को साथ लेने की जरूरत ही नहीं समझी। हालांकि, आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है।

 

इस खींचतान के बीच गठबंधन की पार्टियों में परिवर्तन के इच्छुक वोटर जनसुराज के प्रति आकर्षित तो हो ही सकते हैं। पटना के बोरिंग रोड निवासी वोटर राहुल कहते हैं, ‘‘परिवर्तन से ही बेहतर मिलता है। पहले विकल्प का अभाव था। लोग यह सोचते थे कि कहीं पहले वाली स्थिति ना लौट आए, इसलिए मजबूरी में वोट करते थे। स्वाभाविक है, जब विकल्प दिखेगा तो लोग आजमाएंगे ही। इसमें गलत क्या है।''

 

प्रशांत किशोर की जीत के फैक्टर अब चाहे जितने गिना लें, फिलहाल बीजेपी का यह भ्रम तो टूट ही गया कि वे बांकीपुर सीट से किसी को भी जीत दिला देंगे।

यात्री परिवहन विजन समिट 2026: सीएम डॉ. मोहन बदलने जा रहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा, कई एक्सपर्ट एक साथ करेंगे मंथन, जानें क्या-क्या होगा समिट में?

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा बदलने जा रहे हैं। यह दिशा एक ओर जहां आम लोगों की जिंदगी बेहतर करेगी, वहीं सरकारी सिस्टम को भी लाभ पहुंचाएगी। दरअसल, 11-12 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' का आयोजन होगा। यह समिट मध्यप्रदेश से सार्वजनिक परिवहन के नए भविष्य का निर्माण करेगी। इस समिट में कई विशेषज्ञ परिवहन संबंधित विषयों पर मंथन करेंगे। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समिट का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और मध्य प्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 पर संबोधन देंगे। वे मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना और यात्री परिवहन को सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विचार रखेंगे। इसके साथ-साथ सीएम डॉ. मोहन उद्योग जगत के प्रतिनिधियों-निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान वे  शिखर सम्मेलन स्मारिका-ज्ञान प्रकाशन का विमोचन भी करेंगे।

 

रणनीतिक साझेदारियों से परिवर्तन की बदलेगी दिशा-बता दें, यह समिट वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, शहरी परिवहन विशेषज्ञों, परिवहन प्राधिकरणों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, ओईएम, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं को एक मंच पर लाएगी। यह समिट नवाचार, डिजिटल तकनीकों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन को नई दिशा देगी। गौरतलब है कि 'यात्री परिवहन विजन समिट 2026' भारत का प्रमुख राष्ट्रीय मंच है। यह मंच स्मार्ट-सुरक्षित-सतत और डिजिटल सार्वजनिक परिवहन के नए युग को गति देने के लिए समर्पित है। यह मंच इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, AI-संचालित फ्लीट प्रबंधन, डिजिटल टिकटिंग, एकीकृत मोबिलिटी समाधान और पीपीपी आधारित नवाचारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श और सहयोग का अवसर देगा।

 

'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' के पहले दिन उद्घाटन सत्र, मुख्य वक्तव्य, उच्चस्तरीय पैनल चर्चाएं, उद्योग प्रदर्शनी, नेटवर्किंग सत्र तथा ज्ञान-साझाकरण संबंधी संवाद आयोजित किए जाएंगे। इनमें नीति, नवाचार, निवेश और यात्री परिवहन के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जबकि, दूसरे दिन प्रतिनिधियों के लिए उज्जैन सांस्कृतिक-विरासत भ्रमण आयोजित किया जाएगा। इसमें श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल दर्शन शामिल होगा। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ राज्य की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

समिट में इन विषयों पर होगी चर्चा

– एमपी मोबिलिटी विजन 2030: बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम्स (ITMS) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी

– भविष्य के लिए तैयार परिवहन अधोसंरचना: पीपीपी के माध्यम से निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना

– डेटा आधारित निर्णय: इंट्रासिटी एवं इंटरसिटी बस मार्गों और संचालन की योजना (AI आधारित एनालिटिक्स सहित)

– वित्तीय रूप से टिकाऊ सार्वजनिक बस संचालन के निर्माण की रणनीतियां

– सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में जनसुरक्षा, विश्वसनीयता एवं सुविधा

– हरित मोबिलिटी: स्वच्छ ईंधन एवं भविष्य के लिए तैयार गाड़ियों का काफिला

– एकीकृत टिकटिंग एवं स्वचालित किराया संग्रहण के माध्यम से निर्बाध यात्राओं को सक्षम बनाना

– यात्री परिवहन में रोजगार एवं उद्यमिता के सृजन के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना

 

इन पर मिल सकते हैं अपेक्षित सकारात्मक परिणाम

– मध्यप्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 के लिए तैयार हो सकता है सकता है रोडमैप

– यात्री परिवहन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) पहलों में आ सकती है तेजी

– डिजिटल रूपांतरण एवं डेटा-आधारित मोबिलिटी गवर्नेंस को मिल सकता है बढ़ावा

– सतत एवं हरित मोबिलिटी समाधानों में निवेश को मिल सकता है प्रोत्साहन

– वित्तीय स्थिरता एवं गैर-किराया राजस्व सृजन के लिए नवाचारी मॉडलों की हो सकती है पहचान

– सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत एवं प्रौद्योगिकी भागीदारों के बीच बेहतर हो सकता है सहयोग

– केंद्र सरकार की योजनाओं एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का हो सकता है सृजन

Aarti Industries: केमिकल कंपनी का मुनाफा 260% उछला, मैनेजमेंट भी बड़े बदलाव हुए

Aarti Industries Q1 Results: केमिकल कंपनी आरती इंडस्ट्रीज ने जून 2026 तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 260.47% बढ़कर ₹155 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹43 करोड़ था। वहीं, रेवेन्यू 42.42% बढ़कर ₹2,387 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹1,676 करोड़ था।

कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई भी मजबूत रही। EBITDA 79.8% बढ़कर ₹383 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 12.71% से बढ़कर 16.04% हो गया। मार्च तिमाही के मुकाबले भी मुनाफा 13.14% और रेवेन्यू 8.20% बढ़ा है।

सब्सिडियरी बेचने से भी हुआ फायदा

आरती इंडस्ट्रीज को तिमाही के दौरान ₹2 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन मिला। यह फायदा Shanti Intermediates में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुआ। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इससे कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। वजह यह है कि इस सब्सिडियरी का रेवेन्यू और मुनाफे में योगदान 0.1% से भी कम था।

आगे की क्या है तैयारी?

आरती इंडस्ट्रीज के CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुयोग कोटेचा ने कहा कि FY27 की शुरुआत अच्छी रही है। हालांकि, दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर कारोबार पर पड़ा। इससे बिक्री का वॉल्यूम थोड़ा दबा रहा। कंपनी को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में मांग बढ़ेगी और वॉल्यूम भी सुधरेगा।

कंपनी ने बताया कि Zone IV Expansion और Chlorotoluene Value Chain प्रोजेक्ट में मजदूरों की कमी की वजह से 4 से 6 महीने की देरी हुई है। अब इन्हें अगले तीन तिमाहियों में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

FY27 के लिए ₹700-800 करोड़ के कैपेक्स का लक्ष्य भी बरकरार रखा गया है। वहीं, Superform Joint Venture और Re Aarti Chemical Recycling Venture भी तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहे हैं।

मैनेजमेंट में भी होगा बड़ा बदलाव

आरती इंडस्ट्रीज को ने नेतृत्व में बदलाव का भी ऐलान किया है। 1 अक्टूबर 2026 से सुयोग कोटेचा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO बन जाएंगे। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।

वहीं, मौजूदा चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेंद्र गोगरी अब नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। राशेश गोगरी और रेनिल गोगरी को नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव लंबे समय की उत्तराधिकार योजना और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस का हिस्सा है।

आरती इंडस्ट्रीज के शेयरों का हाल

आरती इंडस्ट्रीज का शेयर गुरुवार को 0.91% की गिरावट के साथ 481.10 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 29.35% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 8% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 17.42 हजार रुपये है।

आरती इंडस्ट्रीज भारत की प्रमुख स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों में से एक है। कंपनी ऐसे केमिकल बनाती है, जिनका इस्तेमाल कई बड़े उद्योगों में होता है। इनमें फार्मा, एग्रोकेमिकल, पॉलिमर, पेंट, डाई, पिगमेंट, एडिटिव्स और होम एंड पर्सनल केयर सेक्टर शामिल हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक को निवेशकों का भरोसा फिर से जीतने के लिए सिर्फ पुराने विवादों को बंद करना काफी नहीं होगा। कॉरपोरेट गवर्नेंस के जानकारों का कहना है कि बैंक को अपनी गवर्नेंस, आंतरिक प्रक्रियाओं और बोर्ड की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि निवेशक अब सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि बैंक के काम करने के तरीके को भी देख रहे हैं।

मामला क्या है?

यह चर्चा MSRDC डिपॉजिट मामले के बाद तेज हुई है। बैंक के बोर्ड ने इस मामले की आंतरिक जांच पूरी की। जांच में CEO शशिधर जगदीशन समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माना और चेतावनी जारी की गई।

हालांकि, बोर्ड ने यह भी माना कि मामले में किसी तरह की निजी कमाई, गलत मंशा या नियमों के उल्लंघन के सबूत नहीं मिले। इसके बाद बोर्ड ने जगदीशन की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश भी की।

एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

Institutional Investor Advisory Services (IiAS) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित टंडन का कहना है कि किसी एक मामले का निपटारा कर देना ही काफी नहीं है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या बैंक ने हाल के गवर्नेंस विवादों से सबक लिया है। क्या बोर्ड की निगरानी पहले से मजबूत हुई है। क्या आंतरिक कंट्रोल बेहतर हुए हैं। उनके मुताबिक गवर्नेंस में सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि उन तक पहुंचने की प्रक्रिया भी उतनी ही अहम होती है।

पुराने मामलों पर भी उठे सवाल

अमित टंडन का कहना है कि इस मामले को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। इसे पूर्व स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और हाल के दूसरे गवर्नेंस विवादों के साथ जोड़कर देखना होगा। उनका मानना है कि अब बैंक की सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों को यह भरोसा दिलाना है कि उसकी गवर्नेंस सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

बोर्ड का संदेश क्या है?

अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख का कहना है कि बोर्ड की स्वतंत्र जांच से साफ हुआ कि यह मामला नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि गवर्नेंस और कारोबारी पहुंच का था। इसलिए बोर्ड ने CEO की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश की। हालांकि, अंतिम फैसला RBI को लेना है।

आगे बैंक के लिए क्या चुनौती?

अश्विन पारेख का मानना है कि CEO, CFO और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर जुर्माना लगाना अपने आप में बड़ा कदम है। इससे बोर्ड ने साफ संदेश दिया है कि जवाबदेही तय की जाएगी।

वहीं, अमित टंडन का कहना है कि अब बहस सजा की मात्रा पर नहीं होनी चाहिए। असली फोकस इस बात पर होना चाहिए कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए बैंक अपनी गवर्नेंस को कितना मजबूत बनाता है।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के शेयर मंगलवार को 0.38% गिरकर 736.75 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.01% गिरा है। वहीं, एक साल में यह 26.64% टूटा है। 5 साल की बात करें, तो निवेशकों को सिर्फ 3.30% रिटर्न मिला है। बैंक का मार्केट कैप 5.64 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।