Stock Market Fall: ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे शेयर मार्केट को रेपो रेट में बढ़ोतरी ने और झटका दिया। इसके आसार पहले से ही थे लेकिन आरबीआई ने महंगाई के अपने आउटलुक को भी बढ़ाया तो इससे मार्केट पर दबाव बढ़ाया। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 384 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का खासा दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।
अभी की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 339.85 प्वाइंट्स यानी 0.47% की गिरावट के साथ 72298.85 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 113.05 प्वाइंट्स यानी 0.50% की गिरावट के साथ 22,490.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 384.47 प्वाइंट्स गिरकर 72,254.23 और निफ्टी भी 127.30 प्वाइंट्स टूटकर 22,475.75 तक आ गया था।
Stock Market Fall: ये है वजह
बॉन्ड यील्ड में उछाल
लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। इसने पूरे एशियाई मार्केट में दबाव बना दिया, जिसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।
कच्चे तेल में उबाल
खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने पश्चिमी एशिया से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस चिंता के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के पार पहुंचा तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।
विदेशी निवेशकों की लगातार नवें दिन बिकवाली
FIIs ने लगातार नवें कारोबारी दिन बुधवार 8 अक्टूबर को ₹6,121.37 करोड़ के नेट शेयर बेचे। इससे बाजार में दबाव बना हुआ है।
Sensex की एक्सपायरी
आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स यानी F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की वीकली एक्सपायरी है, जिसका असर मार्केट पर दिख रहा है।
Repo Rate में बढ़ोतरी पर मेटल-रियल्टी सेक्टर में दबाव
आरबीआई ने रेपो रेट में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी की और इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया तो लगातार दूसरे दिन इसकी आंच ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में महसूस हुई। मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स तो 1-1% से अधिक टूट गए तो निफ्टी ऑटो आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव है। वहीं निफ्टी आईटी में 1% से अधिक बढ़त है।
महंगाई बढ़ने की आशंका
आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।
टेक्निकल आउटलुक
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने मार्केट पर दबाव बनाया है। उनका कहना है कि जब FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो ही यह 23,000 की तरफ रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की जरूरत है।
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