IT Stocks : आईटी में अब इंडेक्स के बजाय इंडिविजुअल स्टॉक्स पर करें फोकस, एकतरफा तेजी की उम्मीद नहीं

IT Stocks : बाजार में एक ऐसा भी समय था जब आईटी सेक्टर से हर कोई दूर रहना चाहता था। एआई की सुनामी की वजह से सब डरे हुए थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से या फिर कुछ हफ्ते से आईटी सेक्टर में एक ठहराव सा दिखा है या यह भी कह सकते हैं कि इसमें मजबूती दिख रही है। ऐसे में अब सेक्टर पर क्या रणनीति होनी चाहिए इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आईटी पर हम तब बुलिश हुए थे जब इंडेक्स 27,000 पर था। वहां से 31,000 तक का मूव आ चुका है। अब आईटी व्यू बहुत क्लियर है। अब आप आईटी में एकतरफा तेजी नहीं देख सकते, जैसा कि पहले हमने 27,000 के स्तर से देखा था।

निफ्टी आईटी अभी भी 200 डे मूविंग एवरेज क्रॉस नहीं कर पाया है। ऐसे में अभी भी यह कहना बहुत मुश्किल है कि ये एक बेयर मार्केट रैली है या एक नई रैली की शुरुआत है। लेकिन एक बड़ा मूव प्ले हो चुका है। ऐसे में अब आईटी में स्पेसिफिक स्टॉक्स पर फोकस करने की जरूरत है। किसी एकतरफा तेजी की उम्मीद न करें। इस समय आईटी के तीन-चार स्टॉक्स, जैसे कि कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और ओएफएसएस के शेयर अच्छे लग रहे है। टाटा टेक भी अच्छा लग रहा है।

आईटी में अब इंडेक्स पर फोकस करने के बजाय इंडिविजुअल स्टॉक्स पर फोकस करें,क्योंकि आईटी में जो बड़ी ट्रेड थी वो प्ले आउट हो चुकी है। हालांकि, अगर आईटी इंडेक्स 32500 को क्रॉस करेगे तो शायद आपको आईटी इंडेक्स में बड़ी ट्रेड प्ले आउट होगी।

AnandRathi Wealth के ज्वाइंट CEO फिरोज अजीज ने कहा कि उन्होंने जून महीने में कहा था कि आईटी अपने सबसे बुरे दौर से बाहर आ चुका है। हम अक्सर यही देखते हैं कि निफ्टी को सालाना आधार पर कौन 3-4 फीसदी से आउटपरफार्म कर सकता है। हम शॉर्ट टर्म रैली नहीं देखते है। हमें पहले निफ्टी की तुलना में निफ्टी आईटी में 3-4 फीसदी के आउटपरफार्मेंस का अंदाजा लगाया है। पिछले 1-1.5 महीनों में हमें ऐसा ही देखने को मिला है। अब यहां से हमें निफ्टी आईटी से इतनी ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। फिर भी हमें इसमें 2-3 फीसदी का एक्सेस रिटर्न देखने को मिल सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट सुदीप बंद्दोपाध्याय का कहना है कि आईटी तो एक वैल्यू ट्रैप है। एआई रिलेटेड डिसरप्शन रियल है। इस डिसरप्शन से बाहर कौन आएगा वो तो समय बताएगा। लेकिन इस समय फंडामेंटली मीडियम टर्म के नजरिए से आईटी से दूर रहने की सलाह होगी। लार्ज कैप्स से तो बिल्कुल ही दूर रहने की जरूरत है। हालांकि, एआई पर फोकस करने वाली मिड कैप आईटी की चुनिंदा कंपनियों पर नजर रहनी चाहिए।

SW Capital के डायरेक्टर पंकज जैन ने कहा कि अभी आईटी से रिस्क रिवॉर्ड लार्जकैप आईटी के पक्ष में अच्छे होते दिख रहे हैं। आईटी शेयरों के पिछले 4-5 हफ्तों के मूव से कुछ अच्छे सिगनल मिले हैं। इनके नतीजे भी उम्मीद से अच्छे रहे हैं। साथ ही इनकी मैनेजमेंट कमेंट्री भी अच्छी रही है। लार्जकैप आईटी को लेकर उम्मीदें दिख रही है। लेकिन इस सेक्टर में बहुत स्टॉक स्पेसिफिक रहने की जरूरत है।

 

Market Mantra : चिराग दारूवाला से जानें 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा सितंबर, ग्लोबल अनिश्चितता में कहां करें निवेश

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Mantra : कोटक AMC की शिबानी कुरियन से जानें, शेयर बाजार के इस रोलर कोस्टर राइड में कहां बनेगा पैसा

Market Mantra : शेयर बाजार इस समय जोरदार रोलर कोस्टर राइड में हैं। ग्लोबल अनिश्चितता,तिमाही नतीजों और बाजार के वैल्यूएशन निवेश की रणनीति पर बड़ा असर डाल रहे हैं। ऐसे में दिग्गज फंड मैनेजर क्या नजरिया लेकर चल रहे हैं, अब आगे बाजार की दिशा क्या होगी? इन सब बातों को लेकर निवेशक कंफ्यूज है। ऐसे में निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं? इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं कोटक महिंद्रा AMC की सीनियर फंड मैनेजर और इक्विटी रिसर्च हेड शिबानी कुरियन।

Q1 नतीजे बाजार के लिए करेंगे बड़े ट्रिगर का काम 

बाजार पर बात करते हुए शिबानी कुरियन ने कहा कि वेस्ट एशिया संकट के चलते बाजार में काफी उतार-चढ़ाव है। शॉर्ट टर्म में बाजार का रुख वेस्ट एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी। Q1 अर्निंग्स सीजन से बाजार की रिकवरी को सपोर्ट मिलेगा। अब तक Q1 नतीजे ज्यादातर अनुमान से बेहतर रहे। Q1 नतीजे बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर का काम करेंगे।

लार्जकैप प्राइवेट बैंकों के नतीजों से मिली निराशा

उन्होंने आगे कहा कि मिडकैप कंपनियों के नतीजे सुस्त रहे हैं। OMCs को छोड़कर सभी सेक्टर्स के मजबूत नतीजे आए हैं। स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे मिलेजुले रहे हैं। NBFCs, ऑटो और कैपिटल गुड्स में अनुमान से बेहतर नतीजे देखने को मिले हैं। लार्जकैप प्राइवेट बैंकों के नतीजों से निराशा मिली है। पिछले 2 साल के मुकाबले अर्निंग्स सीजन में सुधार की उम्मीद दिख रही है।

IT सेक्टर का आउटलुक अभी भी सुस्त

आईटी सेक्टर पर अपनी राय साझा करते हुए शिबानी कुरियन ने कहा कि IT सेक्टर का आउटलुक अभी भी सुस्त है। डिस्क्रिशनरी खर्च में कम सुधार देखने को मिला है। ज्यादातर IT कंपनियों ने ग्रोथ गाइडेंस घटाई है। AI और कंपिटीशन के चलते प्राइसिंग में दबाव देखने को मिल रहा है। IT कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ और आउटलुक कमजोर है। AI से वॉल्यूम ग्रोथ को सपोर्ट मिला है। मिडकैप IT में वैल्यूशन बेहतर दिख रहे हैं। उनके फोकस फंड में 25-30 शेयर हैं। कैपिटल गुड्स, हेल्थकेयर सेक्टर पर ओवरवेट हैं। फाइनेंशियल पर भी ओवरवेट हैं। लेकिन इंश्योरेंस स्पेस पर अंडरवेट हैं।

 

Experts View : आशीष चतुरमोहता से जानें, मौजूदा बाजार में क्या करें निवेशक, लंबे समय के लिए कहां लगाएं दांव?

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भारत में प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ शुरू! इन शहरों में निवेश से मिलेगा बम्पर रिटर्न

अब्रॉड में रहने वाले इंडियन (NRI) अब भारत में घर और प्रॉपर्टी (property) खरीदने में पहले से ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अच्छी कमाई, बेहतर रिटर्न (returns) और भारत के रियल एस्टेट बाजार (real estate market) में बढ़ते भरोसे की वजह से वे बड़े शहरों में तेजी से इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, इन शहरों में सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं NRI:

Delhi-NCR (दिल्ली-एनसीआर)

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दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम (Bengaluru), NRI इंवेटर्स की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां लग्जरी प्रोजेक्ट्स, अच्छी सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी (metro connectivity), बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस (corporate office) और तेजी से डेवलप हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि यहां इन्वेस्टमेंट करने पर अच्छे रिटर्न (return) की उम्मीद रहती है।

 

Bengaluru (बेंगलुरु)

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बेंगलुरु को भारत की IT केपिटल कहा जाता है। यहां देश-विदेश की बड़ी टेक कंपनियां (tech companies) मौजूद हैं, जिससे नौकरी के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती आबादी और किराये के घरों की मांग के कारण NRI इस शहर को लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

 

Hyderabad (हैदराबाद)

 

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हैदराबाद तेजी से आगे बढ़ता हुआ रियल एस्टेट (real estate) बाजार है। यहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी सेक्टर (IT sector) का विस्तार और दूसरे बड़े शहरों की तुलना में किफायती प्रॉपर्टी कीमतें इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में NRI का रुझान इस शहर की ओर तेजी से बढ़ा है।

 

Mumbai (मुंबई)

 

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मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ NRI इन्वेस्टर्स की सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट मार्केट भी है। यहां लग्जरी अपार्टमेंट, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और ऊंची प्रॉपर्टी वैल्यू (property value) इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती है। 2024 में भारतीय रियल एस्टेट के प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट का लगभग 50% हिस्सा मुंबई को मिला, जिससे इसकी पॉपुलैरिटी और मजबूत हुई।

 

अच्छे रिटर्न (Good Returns) की उम्मीद

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भारत के कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में NRI मानते हैं कि आज किया गया इन्वेस्टमेंट आने वाले वर्षों में अच्छा प्रॉफिट दे सकता है। इसी वजह से वे रियल एस्टेट को सिक्योर और फायदेमंद इन्वेस्टमेंट मानते हैं।

 

किराये से कमाई (Rental Income) का मौका

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कई NRI भारत में घर खरीदकर उसे किराये पर दे देते हैं। इससे उन्हें हर महीने रेगुलर इनकम होती है और साथ ही समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत (property’s value) बढ़ने का भी फायदा मिलता है।

 

निवेश (Investment) करना हुआ आसान

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सरकार ने NRI के लिए प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान बना दी है। डिजिटल बैंकिंग (digital banking), ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन (documentation) और सिंपल रेगुलेशन की वजह से अब विदेश में रहकर भी भारत में इन्वेस्टमेंट करना आसान हो गया है।

 

परिवार (Family) और भविष्य (Future) की जरूरत

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कई NRI अपने माता-पिता या परिवार के रहने के लिए भारत में घर खरीदते हैं। वहीं कुछ लोग रिटायरमेंट (retirement) के बाद भारत लौटने की प्लानिंग बनाकर पहले से ही प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।

IT Sector की रौनक पर Sensex में 300 अंकों की तेजी, 3 वजहों से 24150 के पार Nifty

Share Market Rally: एशियाई बाजारों में मिले-जुले रुझान के बीच डॉलर इंडेक्स की नरमी से घरेलू स्टॉक मार्केट में रौनक दिख रही है। शुरुआती कारोबार में ही घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेस सेंसेक्स और निफ्टी 50 उछल पड़े। सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक ऊपर चढ़ गया तो निफ्टी 50 भी 24150 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट को सपोर्ट मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:23 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 246.45 प्वाइंट्स यानी 0.32% की बढ़त के साथ 77,431.88 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 66.00 प्वाइंट्स यानी 0.27% के उछाल के साथ 24,144.50 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 328.87 प्वाइंट्स उछलकर 77,514.30 और निफ्टी 88.90 प्वाइंट्स चढ़कर 24,167.40 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: इन वजहों से मिला सपोर्ट

डॉलर इंडेक्स में नरमी

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर के आस-पास आ गया जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। अमेरिका महंगाई के नरम आंकड़ों से इस बात की संभावना बढ़ी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा। इससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स नरम होकर 100.46 पर आ गया। डॉलर की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश बढ़ सकता है।

India VIX में गिरावट

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला है। फिलहाल यह 1.45% की गिरावट के साथ 13.08 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी हाई होने की आशंका है तो इसके कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

IT Stocks से मार्केट को सपोर्ट

आईटी सेक्टर की रौनक से मार्केट को अच्छा सपोर्ट मिला है जिसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के अलावा फिलहाल किसी भी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% या इससे अधिक की उठा-पटक नहीं है। आज मार्केट को आईटी सेक्टर ही चला रहा है। बैंकिंग सेक्टर में हल्की बढ़त है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HCLTech Share Price: अच्छे नतीजों के बाद भी 5% टूटा स्टॉक, अब खरीदें या बेचें? जानिए एक्सपर्ट्स से

HCLTech Share Price: आईटी कंपनी HCL Technologies के शेयर मंगलवार को करीब 5% तक गिर गए। कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए थे, लेकिन पूरे वित्त वर्ष (FY27) के लिए अपना रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस नहीं बढ़ाया। इसी बात से निवेशक और ब्रोकरेज हाउस निराश दिखे।

मंगलवार को शेयर 4.63% गिरकर ₹1,164.60 पर बंद हुआ। इससे पहले लगातार तीन कारोबारी सत्रों में यह शेयर 6.5% से ज्यादा चढ़ चुका था।

नतीजे मजबूत, लेकिन गाइडेंस से निराश

देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी HCLTech का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 20% बढ़कर ₹4,624 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹34,579 करोड़ रहा। दोनों ही आंकड़े बाजार के अनुमान से बेहतर रहे।

इसके बावजूद कंपनी ने FY27 के लिए अपना कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस 1% से 4% और EBIT मार्जिन 17.5% से 18.5% पर ही बरकरार रखा।

ब्रोकरेज क्यों हुए निराश?

एनालिस्टों का कहना है कि मजबूत नतीजों और बड़े ऑर्डर मिलने के बाद बाजार को उम्मीद थी कि कंपनी अपना गाइडेंस बढ़ाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। Centrum Broking के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि आने वाली तिमाहियों में कारोबार की रफ्तार धीमी रह सकती है।

Citi ने शेयर की रेटिंग घटाकर ‘Sell’ कर दी। वहीं J.P. Morgan ने ‘Underweight’ और Jefferies ने ‘Underperform’ रेटिंग बरकरार रखी। ब्रोकरेज का मानना है कि ग्राहकों का टेक्नोलॉजी खर्च अभी भी पूरी तरह नहीं बढ़ा है। खासकर टेलीकॉम और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग कमजोर बनी हुई है।

ICICI Securities की राय

ICICI Securities ने HCLTech पर ‘Reduce’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹1,060 रखा है। मौजूदा शेयर भाव ₹1,164.60 के मुकाबले इसमें करीब 9% की गिरावट की आशंका जताई गई है। ब्रोकरेज के मुताबिक, ने FY27 का गाइडेंस बरकरार रखा है, लेकिन निकट भविष्य में ग्रोथ सीमित रहने की उम्मीद है।

ICICI Securities का कहना है कि जून तिमाही में कंपनी के बड़े ऑर्डर (TCV) मजबूत रहे, लेकिन उसका असर अभी रेवेन्यू ग्रोथ में पूरी तरह नहीं दिख रहा है। साथ ही AI से जुड़ी मांग बढ़ने के बावजूद पारंपरिक आईटी सेवाओं की सुस्त ग्रोथ चिंता का विषय बनी हुई है।

आगे शेयर पर क्या नजर रहेगी?

एनालिस्टों के मुताबिक, HCLTech का फोकस फिलहाल कॉस्ट कंट्रोल और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर है। कंपनी ने ₹12 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो शेयर को ₹1,030-₹1,050 के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिला है। वहीं, ₹1,220-₹1,250 के बीच इसका अगला रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

*रॉयटर्स से इनपुट के साथ

Netweb Share Price: डेटा सेंटर स्टॉक के लिए ₹5000 का टारगेट, BofA ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Shadowfax Technologies में हो सकती है ब्लॉक डील, ₹700 करोड़ के शेयर बेचने की तैयारी में Flipkart

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप शैडोफैक्स टेक्नोलोजिज में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रही है। इस हिस्सेदारी की कीमत 700-750 करोड़ रुपये हो सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने मनीकंट्रोल को बताया, “फ्लिपकार्ट जुलाई महीने के आखिर में एक बड़ी ब्लॉक डील के तहत शैडोफैक्स में शेयर बेच सकती है। शैडोफैक्स के शेयरहोल्डर्स के​ लिए 6 महीने का लॉक-इन पीरियड जुलाई के आखिर में खत्म हो रहा है।”

शैडोफैक्स टेक्नोलोजिज जनवरी 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO ₹1,907.27 करोड़ का था। फ्लिपकार्ट ने शैडोफैक्स के IPO में ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के तहत कुछ शेयर बेचे और शैडोफैक्स में अपनी हिस्सेदारी घटाकर लगभग 8 प्रतिशत कर ली। उसके पास अभी भी लगभग 4.26 करोड़ शेयर हैं। शैडोफैक्स के शेयर की कीमत फिलहाल 230 रुपये के आसपास ट्रेड कर रही है।

फ्लिपकार्ट ने पहली बार 2019 में शैडोफैक्स में निवेश किया था और बाद के फंडिंग राउंड में भी इस लॉजिस्टिक्स कंपनी को सपोर्ट किया। आज शैडोफैक्स, फ्लिपकार्ट के मुख्य लास्ट-माइल डिलीवरी पार्टनर्स में से एक है। यह हाइपरलोकल और ई-कॉमर्स शिपमेंट संभालती है, खासकर पीक डिमांड के समय जब कंपनी का अपना लॉजिस्टिक्स नेटवर्क दबाव में होता है। साथ ही यह उन कई कारोबारों के लिए मुख्य डिलीवरी पार्टनर के तौर पर भी काम करती है, जो पूरी तरह से थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स पर निर्भर हैं।

पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच सकती फ्लिपकार्ट

सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि फ्लिपकार्ट एक बड़ी ब्लॉक डील के तहत 700-750 करोड़ रुपये के शेयर बेच सकती है। यह डील आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद है। हालांकि फ्लिपकार्ट, शैडोफैक्स में अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच सकती। मौजूदा 4.26 करोड़ शेयरों में से, फ्लिपकार्ट के लगभग 3.37 करोड़ शेयर बेचने की संभावना है। अगर यह डील हो जाती है, तो फिर फ्लिपकार्ट के पास शैडोफैक्स में लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। बाकी बचे 89 लाख शेयर फ्लिपकार्ट को अपने पास रखने होंगे क्योंकि वे ‘मिनिमम प्रमोटर कॉन्ट्रीब्यूशन’ का हिस्सा हैं।

मिनिमम प्रमोटर कॉन्ट्रीब्यूशन वह न्यूनतम हिस्सेदारी है, SEBI किसी IPO के बाद लॉक-इन रखने के लिए जरूरी मानता है। ऐसा इसलिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रमोटर्स का कंपनी में लंबे समय तक हित बना रहे और पब्लिक इनवेस्टर्स को भरोसा दिलाया जा सके कि मुख्य शेयरधारक लिस्टिंग के तुरंत बाद बाहर नहीं निकल सकते। इन शेयरों पर एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड लागू होता है, जो कि आमतौर पर 18 महीने होता है। इस दौरान इन्हें बेचा नहीं जा सकता।

Share Market Crash: IT Sector मे रौनक लेकिन Sensex में 700 अंकों की गिरावट, 4 वजहों से Nifty लाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हेल्थकेयर और छोटी एनबीएफसी स्टॉक्स में निवेश से होगा फायदा, एक्सपर्ट प्रंशात खेमका की सलाह

शेयर बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव हो रहा है। व्हाइटओक कैपिटल ग्रुप के फाउंडर प्रशात खेमका का कहना है कि इनवेस्टर्स को अभी अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों के शेयरों पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि व्हाइटओक खुद लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में ऐलोकेशन बदलने की जगह सिर्फ उन बिजनेसेज की पहचान पर फोकस करती है, जिनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रह सकता है।

लंबे समय तक चढ़ने के बाद अब एआई स्टॉक्स पर दबाव

उनका मानना है कि अलग-अलग मार्केटकैप वाले शेयरों का प्रदर्शन साइकिल में अलग-अलग समय पर अच्छा रहता है। इसलिए उन शेयरों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है जिनमें हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चढ़ने के बाद अब AI से जुड़े शेयरों पर दबाव दिख रहा है।

एआई शेयरों में निवेश घटने पर भारत का फायदा

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में आर्टफिशियल इंटेलिजेंस शेयरों को लेकर सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। फिर भी, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह ट्रेंड जारी रहेगा। भारत को तब फायदा हुआ है, जब दुनिया में इनवेस्टर्स ने एआई से जुड़ी कंपनियों में अपने निवेश घटाए हैं। हाल में दक्षिण कोरिया के बाजारों में बड़ी गिरावट दिखी। इसमें चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का बड़ा हाथ था।

लंबी अवधि के लिहाज से टेक्नोलॉजी सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव

खेमका ने कहा कि लंबी अवधि के लिहाज से टेक्नोलॉजी सेक्टर पर अभी भी उनका आउटलुक पॉजिटिव है। उन्होंने कहा कि कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च करना जारी रखेंगी और इनका महत्व कम करने की जगह AI इंडस्ट्री के स्वरूप में बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर एग्जिक्यूशन वाली कुछ मिडकैप कंपनियां खुद को लार्जकैप कंपनियों के मुकाबले जल्द बदलने में कामयाब होंगी।

हेल्थकेयर, एनबीएफसी स्टॉक्स में दिख रहे मौके

उन्होंने हेल्थकेयर को व्हाइटओक का पंसदीदा सेक्टर बताया। उन्होंने कहा कि फार्मा, हॉस्पिटल्स और डायगोस्टिक्स में कई लिस्टेड कंपनियां हैं। इस सेक्टर में काफी डायवर्सिटी है, जिससे सुपर रिटर्न देने की क्षमता वाली कंपनियों की पहचान की जा सकती है। कुछ एनबीएफसी में भी निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं। खासकर छोटी एनबीएफसी ठीक लग रही हैं, जो कम इनकम वाले ग्राहकों पर फोकस करती हैं।

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प्राइवेट डिफेंस कंपनियों के स्टॉक्स भी अट्रैक्टिव

खेमका ने कहा कि अनसेक्योर्ड लोन को लेकर बढ़ती चिंता और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से कई एनबीएफसी कंपनियों के शेयरों में करेक्शन दिखा है। कुछ एनबीएफसी की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव दिख रही है। इंडस्ट्रियल्स में उन्होंने प्राइवेट सेक्टर की डिफेंस कंपनियों, कुछ कैपिटल गुड्स और मशीनरी बिजनेसेज को अट्रैक्टिव बताया।

Ramco Systems Share Price: रैमको सिस्टम्स का शेयर बना रॉकेट, एक महीने में 90 फीसदी चढ़ा

Ramco Systems Share Price: रैमको सिस्टम्स के शेयरों में लगातार जारी तेजी ने इनवेस्टर्स को चौंकाया है। 30 जून को भी इस शेयर में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। बाजार खुलते ही यह शेयर रॉकेट बन गया। एक समय तक यह 7 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया था। 29 जून को भी इस शेयर में तूफानी तेजी दिखी थी। इससे शेयर का भाव 52 हफ्ते के हाई पर पहुंच गया था।

एक महीने में 90 फीसदी चढ़ा शेयर 

Ramco Systems का शेयर बीते एक महीने में करीब 90 फीसदी चढ़ चुका है। इस तेजी ने इनवेस्टर्स को चौंकाया है। खास बात यह है कि इस स्टॉक में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ी है। 29 जून को शेयर बाजार में गिरावट के बीच भी इसमें तेजी आई। 30 जून को भी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद रैमको सिस्टम्स के शेयरों में तेजी दिखी। इस तेजी से शेयर की वैल्यूएशन अचानक काफी बढ़ गई है।

FY21 के बाद पहली बार मुनाफे में आई कंपनी

30 जून को 10:15 बजे रैमको सिस्टम्स का शेयर 7.37 फीसदी चढ़कर 850 रुपये पर चल रहा था। यह कंपनी वर्ल्ड-क्लास एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्रेडक्ट/प्लेटफॉर्म ऑफर करती है। इसने अपने मल्टी-टेनेंट क्लाउड एंड मोबाइल आधारित एंटरप्राइज सॉफ्टेवर से बड़ी हलचल मचाई है। कंपनी ने FY26 में 41.84 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया है। FY21 के बाद पहली बार कंपनी मुनाफे में आई है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट 

30 जून को शेयर बाजार में गिराव देखने को मिला। 10:25 बजे निफ्टी 0.34 फीसदी यानी 55 अंक गिरकर 23,892 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.15 फीसदी यानी 109 अंक की कमजोरी के साथ 76,615 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी और मिडकैप इंडेक्स में हरे निशान में कारोबार हो रहा था। निफ्टी आईटी इंडेक्स में गिरावट दिखी। हालांकि, 29 जून को अमेरिकी बाजारों खासकर नैस्डेक में अच्छी तेजी आई थी। इसके बावजूद 30 जून को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। टीसीएस और इंफोसिस में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट दिखी।

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60% सैलरी हाइक के ऑफर पर जॉब बदलने में इस शख्स ने की ऐसी गलती कि अब पछता रहा! Job स्विच करते वक्त आप भी रखें ये ख्याल

आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में जब भी किसी को बड़ी सैलरी हाइक का ऑफर मिलता है तो वह बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत कंपनी बदल लेता है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ भारी-भरकम पैकेज देखकर नौकरी बदलना हमेशा सही होता है? बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल के सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विषय पर इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। सनी कुमार नाम के एक शख्स ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। ये काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने एक दोस्त की आपबीती सुनाते हुए दावा किया है कि आज के दौर में किसी छोटी कंपनी में ज्यादा सैलरी पाने से बेहतर है कि आप किसी बड़ी कंपनी में थोड़ी कम सैलरी पर काम करें। आइए जानते हैं कि उनके दोस्त ने 60% हाइक के चक्कर में क्या गलती की और नौकरी बदलते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

60% हाइक का ऑफर और फिर लग गया बड़ा झटका

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 ने इस वायरल वीडियो पर डिटेल्ड रिपोर्ट की है। इसके मुताबिक सनी कुमार ने वीडियो में बताया कि उनका एक दोस्त पुणे में मास्टरकार्ड जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। वहां उसकी सैलरी अच्छी थी, वर्क प्रोफाइल पूरी तरह स्टेबल था और वह अपने करियर में काफी अच्छा कर रहा था। इसी बीच उसे एक कंसल्टेंसी फर्म से 60 फीसदी सैलरी हाइक का बड़ा ऑफर मिला। इतने बड़े पैकेज के लालच में आकर उसने मास्टरकार्ड की स्टेबल नौकरी छोड़ दी और नई कंपनी जॉइन कर ली।

6 महीने में ही पलट गई बाजी

सनी के मुताबिक यह फैसला उनके दोस्त के लिए सही साबित नहीं हुआ। नई कंसल्टेंसी कंपनी को जॉइन किए हुए अभी महज छह महीने ही हुए थे कि कंपनी के हाथ से वो प्रोजेक्ट ही फिसल गया जिसके लिए उनके दोस्त को हायर किया गया था। इसके तुरंत बाद कंपनी ने उसके दोस्त से कहा कि या तो वह खुद इस्तीफा दे दे या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

आईटी सेक्टर में अस्थिरता: सनी कुमार की सलाह

इस घटना का उदाहरण देते हुए सनी कुमार ने प्रोफेशनल्स को सलाह दी है कि वे सिर्फ बड़ा पे-चेक देखकर नौकरी बदलने से पहले दो बार जरूर सोचें। उन्होंने वीडियो में कहा कि अगर आप एक अच्छी और स्टेबल कंपनी में हैं, जहां आपकी सैलरी अच्छी है तो मेरा सुझाव यही होगा कि भले ही आपको 60-70% या 100% तक की हाइक भी क्यों न मिल रही हो, कम से कम अगले 6 महीने से एक साल तक जॉब स्विच न करें। इन दिनों आईटी सेक्टर काफी वोलटाइल यानी अस्थिर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सनी कुमार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर नौकरीपेशा लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने सनी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि जॉब सिक्योरिटी जरूरी है लेकिन मेट्रो शहरों की हकीकत भी देखनी होगी। यूजर ने लिखा कि कम सैलरी में मेट्रो शहर के कमरे का किराया और राशन का खर्च उठाना मुश्किल होता है। इसलिए किसी के बहकावे में आने के बजाय अपना फैसला खुद लें। मास्टरकार्ड अच्छी कंपनी है और हमें समझना चाहिए कि हर बार बात सिर्फ हाइक की नहीं, स्टेबिलिटी की होती है।

एक दूसरे यूजर ने कुमार के विचार का समर्थन करते हुए लिखा कि मैं हमेशा सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जॉब बदलूं तो एक बड़ी कंपनी से दूसरी बड़ी कंपनी में ही जाऊं। मैं किसी छोटी कंपनी में नौकरी खोने का रिस्क और उसका रोज का तनाव नहीं झेल सकता।

दूसरा पक्ष: बड़ी कंपनियां भी नहीं हैं लेऑफ से सुरक्षित

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सनी के इस तर्क का विरोध किया कि बड़ी कंपनियां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। उन्होंने इसके लिए उदाहरण भी दिए। एक यूजर ने कमेंट किया कि कोई भी कंपनी सुरक्षित नहीं है।। मुझे बीती 15 जून को ही HSBC से लेऑफ (नौकरी से निकालना) कर दिया गया। दूसरे यूजर ने लिखा कि क्या गारंटी है कि मास्टरकार्ड से भी उसे नहीं निकाला जाता… आजकल बड़ी कंपनियां भी बहुत ज्यादा रीस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं। एक तीसरे शख्स ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘निकाले तो आप बड़ी कंपनी से भी जा सकते हैं और छोटी से भी। अंतर बस इतना है कि छोटी कंपनी ने कम से कम वहां रहने के दौरान आपको 60% ज्यादा पैसे तो दिए।’

जॉब स्विच करते वक्त केवल कंपनी का साइज न देखें, इन बातों का रखें ख्याल

बहस के बीच एक यूजर ने बहुत ही काम की सलाह दी कि फैसला सिर्फ कंपनी के छोटे या बड़े होने के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि आज के दौर में कुछ अन्य महत्वपूर्ण चीजों का एनालिसिस करना जरूरी है:

SaaS कंपनियों से बचें: यूजर के मुताबिक इन दिनों SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) कंपनियों में जाने से बचना चाहिए। नौकरी बदलने से पहले कंपनी के ग्लोबल हेडकाउंट और भारत में उनके कर्मचारियों की संख्या की जांच करें। कंपनी का कुल रेवेन्यू कितना है और उसका नेट प्रॉफिट क्या है, इसकी जानकारी जरूर जुटाएं। कंपनी के भविष्य के प्लान क्या हैं और वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कितना निवेश कर रहे हैं, इन सभी पहलुओं को चेक करने के बाद ही कोई फैसला लें।

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