खत्म हुआ मार्केट में गिरावट का दौर! इस कारण मैक्वेरी को है भरोसा, लगाया इन सेक्टर पर दांव

Market Outlook: मैक्वेरी कैपिटल के एमडी और भारत में इक्विटी हेड संदीप भाटिया का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल अपनी रेंज के निचले स्तर पर हैं। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि मार्केट को झटका देने वाली जितनी भी खबरें हैं, और जो भी दबाव है, उसका खराब दौर अब निश्चित रूप से पीछे छूट चुका है। संदीप के मुताबिक कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी टैरिफ का रिस्क बना हुआ है तो भारत और अमेरिका में ब्याज दरें अभी भी मार्केट के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। इसके अलावा भारत को अभी तक हार्डवेयर और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े थीम में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का पूरा फायदा नहीं मिला है। इन चिंताओं के बावजूद उनका मानना है कि भारतीय कंपनियों के सितंबर 2026 तिमाही के रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रह सकते हैं।

बैंकिंग सेक्टर

किस सेक्टर के कंपनियों के कारोबारी नतीजे धमाकेदार रह सकते हैं, इसे लेकर संदीप ने कोई अनुमान तो नहीं बताया लेकिन यह जरूर कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आउटलुक सुधर रहा है। बैंकिंग सेक्टर उन सेक्टर्स में शुमार है, जिनमें सबसे अधिक दबाव दिखा है लेकिन अब संदीप को उम्मीद है कि अगले दो साल में बैंकों के मार्जिन में सुधार होगा और उनके शेयरों की वैल्यूएशन फिर से बढ़ सकती है, हालांकि नियर टर्म में कमाई पर कुछ दबाव रह सकता है। उनका कहना है कि साल 2027 और साल 2028 में यानी अगले दो वर्षों में बैंकों की कमाई अच्छी रहेगी।

फाइनेंशियल सेक्टर

संदीप भाटिया को फाइनेंशियल सेविंग्स में बड़ा मौका दिख रहा है। उनका अनुमान है कि देश की वित्तीय बचत $50 हजार करोड़ से अधिक है, जोकि और बढ़ सकता है। संदीप का मानना है कि एमसीएक्स, बीएसई और एनएसई को इस रुझान से फायदा हो सकता है।

कंज्यूमर और ऑटो सेक्टर

संदीप भाटिया को उम्मीद है कि कंज्यूमर-ड्यूरेबल कंजम्प्शन से अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने हुंडई इंडिया, मारुति सुजुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी ऑटो कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि फेस्टिवल सीजन के दौरान गाड़ियों की बिक्री जबरदस्त रही है।

पावर और एनर्जी सेक्टर

संदीप भाटिया की पावर और एनर्जी स्पेस में दिलचस्पी बनी हुई है। रिन्यूएबल एनर्जी स्पेस में उन्हें क्लीन मैक्स एंवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस तो पावर इक्विपमेंट और ट्रांसमिशन कंपनियों में हिताची एनर्जी इंडिया पसंद है। उनका कहना है कि यह मौका सिर्फ एआई से जुड़ी बिजली की मांग की वजह से नहीं बन रहा है, बल्कि देश में मजबूत इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ से भी इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आईटी सेक्टर

वैल्यूएशन आकर्षक होने के बावजूद संदीप आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क हैं और अभी इस सेक्टर में निवेश करने से बच रहे हैं। संदीप का मानना है कि जब तक एआई के असर को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक दबाव बना रहेगा।

इंश्योरेंस सेक्टर

संदीप भाटिया का कहना है कि इंश्योरेंस सेक्टर के लिए नियमों में बदलाव बड़ी चिंता बनी हुई है। फिलहाल वह पॉलिसीबाजार की पीबी फिनटेक को लेकर सतर्क हैं और इस सेक्टर पर कोई फैसला लेने से पहले बीमा नियामक IRDA की ड्राफ्ट सिफारिशों के फाइनल होने का इंतजार करना चाहते हैं।

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जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

हेल्थकेयर और छोटी एनबीएफसी स्टॉक्स में निवेश से होगा फायदा, एक्सपर्ट प्रंशात खेमका की सलाह

शेयर बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव हो रहा है। व्हाइटओक कैपिटल ग्रुप के फाउंडर प्रशात खेमका का कहना है कि इनवेस्टर्स को अभी अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों के शेयरों पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि व्हाइटओक खुद लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में ऐलोकेशन बदलने की जगह सिर्फ उन बिजनेसेज की पहचान पर फोकस करती है, जिनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रह सकता है।

लंबे समय तक चढ़ने के बाद अब एआई स्टॉक्स पर दबाव

उनका मानना है कि अलग-अलग मार्केटकैप वाले शेयरों का प्रदर्शन साइकिल में अलग-अलग समय पर अच्छा रहता है। इसलिए उन शेयरों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है जिनमें हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चढ़ने के बाद अब AI से जुड़े शेयरों पर दबाव दिख रहा है।

एआई शेयरों में निवेश घटने पर भारत का फायदा

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में आर्टफिशियल इंटेलिजेंस शेयरों को लेकर सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। फिर भी, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह ट्रेंड जारी रहेगा। भारत को तब फायदा हुआ है, जब दुनिया में इनवेस्टर्स ने एआई से जुड़ी कंपनियों में अपने निवेश घटाए हैं। हाल में दक्षिण कोरिया के बाजारों में बड़ी गिरावट दिखी। इसमें चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का बड़ा हाथ था।

लंबी अवधि के लिहाज से टेक्नोलॉजी सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव

खेमका ने कहा कि लंबी अवधि के लिहाज से टेक्नोलॉजी सेक्टर पर अभी भी उनका आउटलुक पॉजिटिव है। उन्होंने कहा कि कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च करना जारी रखेंगी और इनका महत्व कम करने की जगह AI इंडस्ट्री के स्वरूप में बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर एग्जिक्यूशन वाली कुछ मिडकैप कंपनियां खुद को लार्जकैप कंपनियों के मुकाबले जल्द बदलने में कामयाब होंगी।

हेल्थकेयर, एनबीएफसी स्टॉक्स में दिख रहे मौके

उन्होंने हेल्थकेयर को व्हाइटओक का पंसदीदा सेक्टर बताया। उन्होंने कहा कि फार्मा, हॉस्पिटल्स और डायगोस्टिक्स में कई लिस्टेड कंपनियां हैं। इस सेक्टर में काफी डायवर्सिटी है, जिससे सुपर रिटर्न देने की क्षमता वाली कंपनियों की पहचान की जा सकती है। कुछ एनबीएफसी में भी निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं। खासकर छोटी एनबीएफसी ठीक लग रही हैं, जो कम इनकम वाले ग्राहकों पर फोकस करती हैं।

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प्राइवेट डिफेंस कंपनियों के स्टॉक्स भी अट्रैक्टिव

खेमका ने कहा कि अनसेक्योर्ड लोन को लेकर बढ़ती चिंता और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से कई एनबीएफसी कंपनियों के शेयरों में करेक्शन दिखा है। कुछ एनबीएफसी की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव दिख रही है। इंडस्ट्रियल्स में उन्होंने प्राइवेट सेक्टर की डिफेंस कंपनियों, कुछ कैपिटल गुड्स और मशीनरी बिजनेसेज को अट्रैक्टिव बताया।