LTCG Tax: क्या अमेरिकी शेयरों की कमाई पर मिलेगा ₹1.25 लाख टैक्स छूट का फायदा? जानें क्या कहते हैं नियम

LTCG Tax on Global Stocks: बजट 2027 से पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रुख ने इक्विटी टैक्सेशन पर नई बहस छेड़ दी है। विदेशी निवेशकों की निकासी और भारतीय इक्विटी की प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताओं के बीच निवेशक राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में चुनिंदा इक्विटी निवेशों पर मिलने वाली ₹1.25 लाख सालाना LTCG टैक्स छूट का फायदा विदेशी शेयरों पर भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स कैसे लगता है और कौन से निवेश इसके दायरे में आते हैं।

क्या ग्लोबल शेयरों पर ₹1.25 लाख की सालाना LTCG टैक्स छूट मिलती है?

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 198 के तहत मिलने वाला ₹1.25 लाख का सालाना थ्रेशोल्ड सिर्फ इसलिए विदेशी शेयरों के मुनाफे पर लागू नहीं होता कि वे विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं या लंबे समय तक रखे गए हैं।

इस प्रावधान में केवल वे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स शामिल हैं जो योग्य इक्विटी शेयरों, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स और बिजनेस ट्रस्टों की यूनिट्स से मिलते हैं, बशर्ते वे निर्धारित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तों को पूरा करते हों।

विदेशी शेयर आमतौर पर इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। धारा 197 के तहत उनके लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर बिना ₹1.25 लाख की छूट के 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है, जिसमें लागू सरचार्ज और सेस शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी भारतीय निवासी को अमेरिकी शेयरों से ₹1 लाख का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन होता है, तो यह मुनाफा सिर्फ इसलिए टैक्स-फ्री नहीं हो जाता कि यह ₹1.25 लाख से कम है। किसी अन्य राहत या एडजस्टमेंट को छोड़कर, इस पर सरचार्ज और सेस से पहले ₹12,500 का टैक्स बनेगा।

ग्लोबल शेयरों पर LTCG और STCG की गणना कैसे की जाती है?

विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स की गणना, बिक्री मूल्य में से खरीद लागत और ट्रांसफर से जुड़े योग्य खर्चों को घटाकर की जाती है। निवेशकों को इसमें विदेशी मुद्रा रूपांतरण के नियमों का भी ध्यान रखना होता है।

धारा 2(101) के तहत, विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयर उन एसेट्स की श्रेणी में आते हैं जिन पर मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विशिष्ट प्रतिभूतियों के मुकाबले 24 महीने की होल्डिंग पीरियड की परीक्षा लागू होती है।

24 महीने या उससे कम समय के लिए रखे गए विदेशी शेयरों से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है और निवेशक के लागू इनकम-टर्म स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। वहीं, 24 महीने से अधिक समय तक रखे गए शेयर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दर के दायरे में आते हैं।

किन अन्य निवेशों को इस छूट से बाहर रखा गया है?

पीएनएएम एंड कंपनी एलएलपी (PNAM & Co. LLP) के पार्टनर मोहित गुप्ता के अनुसार, ₹1.25 लाख का थ्रेशोल्ड सभी प्रकार के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के लिए यूनिवर्सल छूट नहीं है। धारा 198 के दायरे से बाहर रहने वाले प्रमुख निवेश ये हैं:

रियल एस्टेट: जमीन या मकान की बिक्री से होने वाला मुनाफा।

सोना और चांदी: भौतिक कीमती धातुओं से होने वाला लाभ।

डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड: टैक्स का तरीका विशिष्ट म्यूचुअल फंड्स के विशेष नियमों समेत लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।

इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: अगर वे विदेशी इक्विटी में निवेश करते हैं और इक्विटी-ओरिएंटेड फंड की वैधानिक परिभाषा पर खरे नहीं उतरते हैं, तो वे इसके पात्र नहीं हैं।

बॉन्ड और डिबेंचर: टैक्स का स्वरूप इंस्ट्रूमेंट और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है।

अन्य गैर-पात्र एसेट्स: वे मुनाफे जो धारा 198 की पात्रता और STT शर्तों को पूरा नहीं करते।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि क्या उनके निवेश धारा 198 के तहत योग्य हैं और क्या निर्धारित STT शर्तें पूरी होती हैं।

  • ₹1.25 लाख की छूट की सीमा पात्र मुनाफे के लिए एक संयुक्त वार्षिक सीमा है, न कि प्रत्येक स्टॉक, ब्रोकर, डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अलग-अलग मिलने वाली छूट।
  • कैपिटल गेन्स की गणना को सही साबित करने के लिए निवेशकों को खरीद और बिक्री की पुष्टि, ब्रोकरेज स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन खर्च और विदेशी मुद्रा रूपांतरण के रिकॉर्ड संभाल कर रखने चाहिए।
  • निवेशक की रेसिडेंशियल स्थिति और फाइलिंग की परिस्थितियों के आधार पर विदेशी निवेशों में विदेशी संपत्ति और विदेशी आय से जुड़े अतिरिक्त खुलासे की जरूरत पड़ सकती है।
  • जिन निवेशकों ने विदेश में टैक्स चुकाया है, उन्हें अलग से यह आकलन करना चाहिए कि क्या वे लागू प्रावधानों और संधि की शर्तों के तहत विदेशी कर क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

मुख्य अंतर यह है कि किसी निवेश को लंबे समय तक होल्ड करने मात्र से उसका मुनाफा स्वचालित रूप से ₹1.25 लाख की छूट के योग्य नहीं हो जाता। अपनी टैक्स देनदारी की गणना करने से पहले निवेशकों को एसेट कैटेगरी और प्रासंगिक वैधानिक शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या बाजार मनाएगा आज गुड फ्राइडे का जश्न या मिलेगी निराशा, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है। गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद, GIFT निफ्टी एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। हाल ही में टेक्नोलॉजी शेयरों में हुई बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में सुधार, वॉल स्ट्रीट में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे सकती है। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार में सुधार के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 84 अंक या 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 23,072 पर कारोबार कर रहा था। यह गुरुवार को निफ्टी के 23,000 के स्तर के करीब बंद होने के बाद एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। पिछले सत्र में भारतीय बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई थी। सेंसेक्स 1,533.72 अंक (2.11 प्रतिशत) उछलकर 74,315.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 374.65 अंक (1.66 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेजी रही

सप्ताह की शुरुआत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी, जिसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी की। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें गिरने वाले शेयरों की तुलना में बढ़ने वाले शेयरों की संख्या लगभग तीन गुना अधिक रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक 2.5 प्रतिशत चढ़ा। इसने गुरुवार की उस गिरावट से उबरने में मदद की, जिसने सूचकांक को अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

जापान का टॉपिक्स (Topix) 1.7 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.9 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.4 ​​प्रतिशत ऊपर रहे। इसके विपरीत, इंडोनेशिया के बाजार में 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसका कारण यह चिंता है कि इंडोनेशिया को वैश्विक स्टॉक सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा; S&P 500 फ्यूचर्स लगभग स्थिर स्तर पर कारोबार कर रहे थे।

निवेशकों के AI शेयरों से हटने के बीच वॉल स्ट्रीट में तेजी

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। शुरुआती नुकसान से उबरते हुए, निवेशकों ने अपना ध्यान हेल्थकेयर और कंज्यूमर शेयरों की ओर मोड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन और कर्ज के स्तर को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.08 प्रतिशत बढ़कर 52,177.69 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,744.06 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.08 प्रतिशत बढ़कर 26,713.03 पर पहुंच गया।

हेल्थकेयर शेयरों (जैसे एली लिली और यूनाइटेडहेल्थ) में खरीदारी देखने को मिली, जबकि कई टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बना रहा, क्योंकि निवेशक बढ़ती उधारी लागत (borrowing costs) के बीच अपने निवेश पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे थे।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, लेकिन अभी भी $105 के ऊपर

शुक्रवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। निवेशक एक तरफ मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई के जोखिमों पर विचार कर रहे थे, तो दूसरी तरफ इस बात पर भी नजर रखे हुए थे कि क्या अमेरिका वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ (अघोषित टैंकर बेड़े) पर लगी पाबंदियों को कम करने के लिए कोई कदम उठा सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.39 प्रतिशत गिरकर $105.51 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ $97.43 प्रति बैरल पर आ गया।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों के लिए निकट भविष्य का नजरिया ‘सावधानी के साथ सकारात्मक’ (cautiously positive) बना हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में लगातार तेजी की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह को ऐसे महत्वपूर्ण कारक बताया, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

पोनमुडी के अनुसार, निवेशक विदेशी निवेश प्रवाह पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) में कोई टिकाऊ सुधार हो रहा है या नहीं। वहीं, बाजार में आई यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty 4-5 महीने में 26000-26500 पर होगा, एक्सपर्ट ने किया बड़ा दावा

आप क्या शेयरों से निवेश निकालने या सिप बंद करने के बारे में सोच रहे हैं? यह गलती आपको जोरदार मुनाफा कमाने से रोक सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने निफ्टी के लिए 26,000-26,500 का टारगेट दिया है। उसका कहना है कि अगले 4-5 महीनों में निफ्टी नया ऑल-टाइम हाई बना सकता है। 13 अक्टूबर को निफ्टी 1.60 फीसदी चढ़कर 22,721 पर बंद हुआ।

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलेगा

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के सीईओ गौरव भंडारी को उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक स्थितियां जल्द बदलेंगी। इसके बाद बाजार में रिकवरी शुरू होगी। उन्होंने अमेरिका में बॉन्ड यील्ड घटने, डॉलर में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी की उम्मीद जताई। इससे भारतीय बाजार में तेजी आएगी। ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए जो टारगेट दिया है, उसका मतलब है कि सूचकांक करीब 17 फीसदी चढ़ सकता है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड जल्द घटने की उम्मीद 

भंडारी का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा लेवल पर लंबे समय तक नहीं रह सकती। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.35 फीसदी तक पहुंच गई है। इस साल यील्ड 110 बेसिस प्वाइंट्स उछली है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी यील्ड में गिरावट आने पर विदेशी निवेश भारतीय बाजार में आएगा। डॉलर के भी कमजोर होने की उम्मीद है। इन दोनों वजहों से विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव आएगा।

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजीशन

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स में काफी शॉर्ट पोजीशन बनाई है। वैश्विक स्थितियां बदलते ही उन्हें शॉर्ट कवरिंग करनी पड़ सकती है। उन्होंने निवेशकों को बाजार से दूरी बनाने की जगह अच्छी क्वालिटी के शेयरों में निवेश की सलाह दी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी खरीदारी से बाजार को काफी सहारा दिया है। अगर आगे भारतीय बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है तो बाजार में बड़ी तेजी दिख सकती है।

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बीते एक साल में निफ्टी करीब 10 फीसदी गिरा है

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। इससे शेयरों में निवेश करने वाले लोग निराश हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों में निवेश करने वाले लोग भी मायूस हैं, क्योंकि उनका पैसा इस दौरान बढ़ने की जगह घटा है। बाजार में रिकवरी आने पर उन निवेशकों को बड़ा फायदा होगा, जिन्होंने गिरावट के बीच भी सिप से अपना निवेश जारी रखा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।

अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

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Daily Voice: बाजार में अभी डिफेंसिव नजरिया बनाए रखने की जरूरत, लंबी अवधि में इंश्योरेंस सेक्टर दिखाएगा कमाल

Daily Voice : कोर महंगाई की चाल को देखते हुए 2027 की शुरुआत में फेड फंड्स रेट में एक और बढ़ोतरी संभव है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% से 7% के बीच स्थिर रहेगी। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। इंश्योरेंस सेक्टर में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना दिख रही है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन से इस सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। ये बातें वॉटरफ़ील्ड एडवाइज़र्स के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर और इक्विटीज़ हेड विपुल भोवर ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।

क्या आप US ट्रेज़री मार्केट को ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ा जोखिम मानते हैं?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यूएस का बॉन्ड मार्केट,ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम की नींव है। इस मार्केट में होने वाले स्ट्रक्चरल बदलाव आज ग्लोबल मार्केट पर असर डालने वाले सबसे अहम मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर हैं। जब “रिस्क-फ्री” US सॉवरेन डेट से अच्छा रिटर्न मिलता है तो यह ग्लोबल एसेट एलोकेशन की रणनीतियों को पूरी तरह से बदल देता है।

ट्रेजरी यील्ड के बढ़ने से ग्लोबल इक्विटी मल्टीपल्स पर दबाव पड़ता है और दुनिया भर की कंपनियों के लिए कर्ज लेने की लागत बढ़ जाती है। इसके कारण प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकते हैं,कैपिटल एक्सपेंडिचर में रुकावट आ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

क्या अमेरिका की वित्तीय स्थिति टिकाऊ नहीं लगती?

इस पर उन्होंने आगे कहा कि जरूरी खर्च और ब्याज पर होने वाले भारी खर्च(जो इस साल 1 ​​लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो गए हैं) में लगातार बढ़ोतरी से एक ढांचागत असंतुलन पैदा हो रहा है। अगर बड़े नीतिगत सुधार नहीं किए गए तो कर्ज का यह बढ़ता बोझ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को घटा सकता है और भविष्य में आर्थिक मजबूती में बाधा डाल सकता है।

कांग्रेसनल बजट ऑफिस का अनुमान है कि 2026 में फ़ेडरल घाटा लगभग 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा,जो अमेरिका की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 6 प्रतिशत है। इसके चलते अमेरिकी जनता पर मौजूद कर्ज GDP के 100 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

क्या आपको उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक US फ़ेडरल रिज़र्व दो और बार ब्याज दरें बढ़ाएगा और उसके बाद अगले साल की पहली तिमाही में एक और बढ़ोतरी करेगा?

सितंबर 2026 में चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की,जिससे ये दरें 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत की रेंज में आ गईं। ‘डॉट प्लॉट’ से पता चला कि FOMC के 18 में से 16 सदस्यों को उम्मीद है कि इस साल कम से कम एक बार और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होगी,हालांकि सिर्फ़ चार सदस्यों को दो और बार बढ़ोतरी की उम्मीद है।

एनर्जी की बढ़ती लागत की वजह से आई महंगाई इस सख्ती को सही ठहराती है। कोर महंगाई के ट्रेंड को देखते हुए 2027 की शुरुआत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। इसलिए,हालांकि इस साल एक और बढ़ोतरी की संभावना है,लेकिन दो और बार बढ़ोतरी होने की संभावना कम है।

क्या आपको लगता है कि भारत की विकास दर 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास स्टेबल हो जाएगी?

भारत की आर्थिक विकास दर के 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच स्टेबल होने की उम्मीद है। IMF ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत GDP विकास दर का अनुमान लगाया है। महामारी के बाद के असर, सरकारी खर्च और रुकी हुई मांग की वजह से भारत में विकास दर 7.8 प्रतिशत के करीब रही है, लेकिन बेस इफ़ेक्ट के कम होने और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व ऊंची ब्याज दरों जैसी ग्लोबल चुनौतियों के कारण इतनी ऊंची दरें शायद लंबे समय तक बनी न रह पाएं। हालांकि, 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

अमेरिकी डॉलर में बढ़ोतरी के अहम कारण क्या हैं?

अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर ज़्यादा यील्ड (रिटर्न) मुख्य रूप से महंगाई के दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होती है, जो ग्लोबल इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल अस्थिरता बढ़ने से जोखिम से बचने वाले निवेशक अमेरिकी डॉलर से मिलने वाली सुरक्षा और लिक्विडिटी की ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा,अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी विदेशी निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला खर्च डॉलर की मांग को और बढ़ा रहा है। दूसरे G10 देशों की तुलना में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मज़बूती, डॉलर की स्थिति को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी के तौर पर और मजबूत कर रही है।

क्या आप इक्विटी को लेकर इसलिए सतर्क हैं कि तेल की कीमतें ज़्यादा हैं और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं या आपकी इस सोच के पीछे कोई और भी वजह है?

तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई की चिंताएं भी हैं। ऐसे में,मौजूदा महंगे वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए बाजार में अभी तुरंत पॉजिटिव असर डालने वाली कोई वजह नहीं दिख रही है। ऐसे में जब तक अर्निंग्स की साफ तस्वीर नहीं दिखती या वैल्यूएशन में जरूरी टाइम करेक्शन नहीं होता,तब तक डिफेंसिव रुख अपनाना ही बेहतर है।

क्या आपको भारत में भी ब्याज दरें बढ़ाने का दौर शुरू होता दिख रहा है?

उम्मीद है कि भारत में ब्याज दरें बढ़ाने का दौर अक्टूबर 2026 में मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक से शुरू होगा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने फरवरी 2023 से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है, लेकिन घरेलू और ग्लोबल स्तर पर बढ़ते दबावों के कारण इसमें बदलाव की जरूरत है।

कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये की कीमत घटने की वजह से खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ग्लोबल फाइनेंशियल हालात के खराब होने के साथ,अर्थशास्त्रियों को दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे दर बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगी और सख्ती का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।

क्या आपको लगता है कि मौजूदा स्तरों पर इंश्योरेंस सेक्टर में खरीदारी का मौका है?

भारत में इंश्योरेंस मार्केट की पहुंच अभी भी काफी कम है और 2026 से 2030 के बीच सालाना प्रीमियम ग्रोथ के 6.9 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन की वजह से यह सेक्टर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना रखता है।

 

Market Next Week : मिड और स्मॉल कैप्स में लगातार चौथे हफ्ते दिखी गिरावट, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर चिराग दारूवाला से जाने अक्टूबर में कैसा रहेगा बाजार, राशियों के हिसाब से कहां बनेगा पैसा

सीएनबीसी -आवाज़ की खास पेशकश निवेश का राशिफल विद चिराग दारूवाला में हम सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर चिराग दारूवाला से जानेंगे कि आपकी राशि के लिहाज से अक्टूबर का महीना निवेश के लिए कैसा रहेगा। चिराग जी ने कहा कि हमें निराश होने की जरूरत नहीं है। यह ध्यान में रखिए कोई भी चीज जीवन में परमानेंट नहीं होती है। ऐसे में अच्छा समय चल रहा होता है तब हमें ये सोचना है कि अच्छे समय में हम क्या कार्य करें ताकि आने वाले समय में हमें उसका अच्छा लाभ मिल सके। उसी प्रकार जब खराब समय चल रहा होता है तो हमें थोड़ा सा सब्र रखना है। थोड़ी सी शांति रखनी है और यही प्रभु से प्रार्थना करनी है और यही सोचना है कि यह समय भी निकल जाएगा।

इस महीने कैसी रहेगी ग्रहों की स्थिति

हम बात करेंगे ग्रहों की स्थिति के बारे में। गणेश जी कहते हैं कि अक्टूबर महीने की शुरुआत में सूर्य कन्या राशि में होंगे। बृहस्पति और मंगल कर्क राशि में रहेंगे। वहीं बुध और शुक्र तुला राशि में स्थित होंगे। जबकि शनि, मीन राशि में वक्री रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति शेयर बाजार,व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ कुछ क्षेत्रों में तेजी के भी संकेत दे सकती है। 3 अक्टूबर को शुक्र तुला राशि में वक्री होंगे। शुक्र का अपनी राशि तुला में वक्री होना बाजार में खरीददारी की गतिविधियों को बढ़ा सकता है। बैंकिंग सेक्टर,फाइनेंस सेक्टर,एफएमजी सेक्टर,ज्वेलरी सेक्टर,होटल और लग्जरी सेक्टर में निवेशकों की रुचि बढ़ने के संकेत दिख रहे हैं।

17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के तुला राशि में आने से बाजार में ट्रेडिंग की गतिविधियां बढ़ सकती है। आईटी सेक्टर,टेक्नोलॉजी सेक्टर,टेलीकॉम सेक्टर,बैंकिंग सेक्टर और ब्रोकरेज सेक्टर में हलचल देखने को मिल सकती हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर देखने को मिलेंगे।

24 अक्टूबर को बुध तुला राशि में वक्री होंगे। बुध के वक्री होने से शेयर बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को इस दौरान जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना होगा। जल्दबाजी में आपको कोई भी फैसला नहीं लेना है। रियलस्टेट,कंस्ट्रक्शन सेक्टर,ऑयल गैस सेक्टर,केमिकल सेक्टर,इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेज गतिविधियां देखने को मिल सकती है।

31 अक्टूबर को बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। बृहस्पति के राशि परिवर्तन के बाद निवेशकों को बाजार के प्रति भरोसा बढ़ सकता है। बैंकिंग सेक्टर, फाइनेंस सेक्टर,आईटी,मीडिया,टेलीकॉम,टेक्नोलॉजी,शिक्षा से जुड़े सेक्टर में गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं। विदेशी निवेश और बड़े निवेशकों की भागीदारी में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर अक्टूबर में बाजार में तेजी के साथ-साथ कुछ समय पर उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए सेक्टर और कंपनियों का सही विश्लेषण करके करके ही आपको निर्णय लेना आपके लिए बेहतर होगा।

जानिए राशियों के हिसाब से कैसा रहेगा अक्टूबर का महीना

मेष राशि

गणेश जी कहते हैं मेष राशि वालों बिजनेस में व्यापार में विस्तार करने के लिए यह महीना बहुत ही अच्छा रह सकता है। आपके अटके हुए काम भी पूर्ण हो सकते हैं। रियलस्टेट और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ के अवसर देखने को मिलेंगे। शेयर बाजार में मिड कैप और चुनिंदा सेक्टर पर आपको ध्यान देना होगा। आपकी जो आर्थिक स्थिति है,जो उतार-चढ़ाव चल रहा था,वह थोड़ी मजबूत होती नजर आएंगी और बचत बढ़ाने का भी आपको मौका मिलेगा। नए निवेश से पहले जोखिम और लाभ का अच्छी तरह से आकलन जरूर से करिएगा।

उपाय

प्रत्येक गुरुवार को 101 बार ओम गुरुवे नमः मंत्र का आप जाप कर सकते हैं और गाय माता को गुड़ खिला सकते हैं। यह महीना आपके लिए बेहतरीन रहेगा।

वृषभ राशि

गणेश जी कहते हैं वृषभ राशि वालों इस महीने आपकी आर्थिक योजनाएं धीरे-धीरे सफल होती नजर आएंगी। बैंकिंग सेक्टर,आईटी सेक्टर,फाइनेंस सेक्टर में निवेश अच्छा लाभ देगा। व्यापार में पुराने संपर्कों से लाभ और नए सौदे भी मिल सकते हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े काम में कागजी कार्यवाही सावधानी से करें। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखेंगे तो धन की बचत होगी। अटका हुआ पैसा भी आपको इस महीने मिल सकता है।

उपाय

हर शनिवार को नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी अवश्य मिलाइए। यह महीना आपके लिए अच्छा रहेगा।

मिथुन

राशि गणेश जी कहते हैं मिथुन राशि वालों शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों पर नजर रख सकते हैं। जल्दबाजी में आपको कोई फैसला नहीं लेना है। अच्छे इन्वेस्टर्स आपको मिल सकते हैं। व्यापार कर रहे हैं तो नए ग्राहक मिल सकते हैं। आपकी आमदनी बढ़ेंगी। प्रॉपर्टी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो अच्छे अवसर आपको प्राप्त होंगे। सोने चांदी से जुड़े कारोबार में लाभ के योग भी बन सकते हैं। इस महीने अतिरिक्त आय के नए रास्ते आपको देखने को मिलेंगे। आपके लिए नए रास्ते खुलेंगे।

उपाय

प्रत्येक शुक्रवार को मां लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना करें और खीर का भोग अवश्य लगाइएं।

कर्क राशि

गणेश जी कहते हैं कर्क राशि वालों इस महीने आर्थिक मामलों में आपको नई योजनाएं बनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे से जुड़े शेयरों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। व्यापार में किसी नए प्रोजेक्ट से आर्थिक लाभ होने की भी संभावना है। किसी भी प्रकार का लीगल डिस्प्यूट चल रहा था,स्ट्रेस चल रहा था,परेशानी चल रही थी तो वो लीगल डिस्प्यूट धीरे-धीरे समाधान में बदलेगा। यानी कि आपका जो स्ट्रेस है,जो एंग्जायटी है वो इस महीने धीरे-धीरे दूर होती नजर आएगी। म्यूचुअल फंड या फिर नियमित निवेश से भविष्य के लिए धन कमाने में मदद मिलेगी।

उपाय

हर मंगलवार को गणेश जी की पूजा अर्चना करें और ओम गण गणपताय नमः यह मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें।

सिंह राशि

गणेश जी कहते हैं सिंह राशि वालों इस महीने बिजनेस में आपको नए ऑर्डर मिलेंगे। आपको अच्छे इन्वेस्टर्स भी मिल सकते हैं। अगर कोई भी प्रकार का लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट लंबी अवधि का निवेश करने का विचार कर रहे हैं तो जरूर से आपको करना चाहिए। आपको फायदा अच्छा मिलेगा। शेयर बाजार में किसी के भी कहने पर आपको निवेश नहीं करना है। प्रॉपर रिसर्च एक्सपर्ट्स की सलाह लेकर अगर आप निवेश करते हैं तो अच्छा लाभ अवश्य होगा। आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। लेकिन बड़े खर्चों की योजना सोच समझकर बनाइए।

उपाय

प्रत्येक शनिवार को हनुमान जी को तेल और सिंदूर अर्पित करें।

कन्या राशि

गणेश जी कहते हैं कन्या राशि वालों फाइनेंस सेक्टर,इंश्योरेंस सेक्टर और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े निवेश में अच्छे अवसर देखने को मिल सकते हैं। आपके पोर्टफोलियो में बदलाव लाने की भी जरूरत है। व्यापार में आपकी जो मेहनत है उसका आर्थिक परिणाम आपको बहुत अच्छा मिलेगा। प्रॉपर्टी या जमीन में निवेश के लिए थोड़ा सा इंतजार करिए। कुछ अच्छी डील्स क्लोज हो सकती है। शेयर बाजार में जोखिम लेने से पहले पूरी जानकारी जरूर से हासिल करें। जल्दबाजी में आपको कोई फैसला नहीं लेना है। धन की आवक बनी रहेगी लेकिन अचानक खर्चे भी बढ़ सकते हैं।

उपाय

प्रत्येक शनिवार को कौवों को,काले कुत्तों को दूध अवश्य पिलाइए और भोजन अवश्य कराइए। आप यह समझ लीजिए कि यह पितरों के दिन चल रहे हैं। आपके पितरों का आशीर्वाद आपको अवश्य प्राप्त होगा।

तुला राशि

गणेश जी कहते हैं तुला राशि वालों आईटी सेक्टर टेक्नोलॉजी सेक्टर एनर्जी सेक्टर में निवेश करने वालों को अच्छे अवसर प्राप्त हो सकते हैं। बिजनेस में नई तकनीक या फिर नई रणनीति अपनाने से आपको अच्छा लाभ होगा। यह समय यह महीना बदलाव का महीना है। तो किसी भी प्रकार का बदलाव अगर आप पोर्टफोलियो में लाते हैं,इन्वेस्टमेंट्स में बदलाव लाते हैं या व्यापार में बदलाव लाते हैं,वह हर एक प्रकार का बदलाव आपको तरक्की के मार्ग पर अवश्य लेकर जाएगा। आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े जुड़े किसी सौदे में अच्छा लाभ मिल सकता है। पैसों का लेनदेन करते समय सावधानी रखें और बिना जांच के किसी को भी पैसा ना दें।

उपाय

प्रतिदिन सुबह गाय माता को हरा चारा अवश्य खिलाइए। यह महीना बेहतरीन रहेगा।

वृश्चिक राशि

गणेश जी कहते हैं वृश्चिक राशि वालों अभी नहीं तो कभी नहीं जो कार्य करने हैं कर लीजिए जो दिमाग में चीजें चल रही है जो आइडियाज चल रहे हैं उसे बाहर लाने का समय आ चुका है। व्यापार में मुनाफा बढ़ने से कई अवसर आपको मिल सकते हैं। ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर से जुड़े शेयरों पर ध्यान देना होगा । इंश्योरेंस और फाइनेंस से जुड़े निवेश भी आपके लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। खर्चों पर नियंत्रण रखने से आपकी आर्थिक स्थिति और भी मजबूत होगी।

उपाय

जब भी भी संभव हो लाल चीजों का लाल कपड़ों का दान अवश्य करिए।

धनु राशि

गणेश जी कहते हैं धनु राशि वालों इस महीने जो आपके अटके हुए पैसे थे, जो इन्वेस्टमेंट किया हुआ था और मार्केट में पैसा अटक गया था वह अटका हुआ पैसा आपको मिल सकता है। यह महीना आपको अच्छी योजनाएं बनानी है और उसके ऊपर कार्य करना है। म्यूच्यूल फंड और लंबी अवधि की योजनाओं से भी लाभ मिल सकता है। करियर और व्यापार में तरक्की के कारण धन की जो स्थिति है वह मजबूत होगी। एक से अधिक स्रोते से आमदनी प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। लेकिन खर्चों पर आपको ध्यान रखना है।

उपाय

प्रत्येक गुरुवार को ओम ब्रह्म बृहस्पे नमः का 108 बार जाप करें।

मकर राशि

गणेश जी कहते हैं मकर राशि वालों स्टील सेक्टर, सीमेंट सेक्टर, कंस्ट्रक्शन सेक्टर और रियलस्टेट सेक्टर में निवेश के अवसर मिल सकते हैं। बिजनेस में काम का विस्तार करने की योजनाएं सफल हो सकती है। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी और आय के नए स्रोत बनने की भी संभावना है। नियमित निवेश और बचत से भविष्य में आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

उपाय

जरूरतमंद लोगों को दूध,दही,घी,भोजन का दान करें।

कुंभ राशि

गणेश जी कहते हैं कुंभ राशि वालों इस महीने शेयर बाजार में ऊर्जा,पावर और गैस सेक्टर से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। पुराने निवेश में सुधार आने से आर्थिक राहत मिलेगी। बिजनेस में नए लोगों के साथ साझेदारी या फिर नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकता है। आपकी घर या प्रॉपर्टी खरीदने की योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव संभव है। इसलिए कोई भी निवेश कर रहे हैं सोच समझकर करें। जल्दबाजी में फैसला मत लीजिएगा।

उपाय

हर शनिवार शाम को शनिदेव को काले तिल और सरसों का तेल अवश्य अर्पित करें।

मीन राशि

गणेश जी कहते हैं मीन राशि वालों बैंकिंग और आईटी सेक्टर से जुड़े निवेश में अच्छे अवसर बन सकते हैं। महीने की शुरुआत में बनाई गई आर्थिक योजनाएं आगे चलकर लाभ दे सकती है। नौकरी और व्यापार में आय बढ़ने के नए अवसर आपको मिल सकते हैं। यह महीना अपॉर्चुनिटीज वाला महीना है। क्रिएटिविटी का महीना है। तो आप यह समझ लीजिए कि आपको अपनी जो क्रिएटिविटी है,उसे बाहर लाने की जरूरत है। ऑटोमेटिकली आपके जीवन में अपॉर्चुनिटीज का भंडार आपको इस महीने देखने को मिलेगा। प्रॉपर्टी या फिर वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो उसके लिए भी यह महीना बहुत ही बेहतरीन है। म्यूच्यूल फंड जैसे नियमित निवेश के माध्यम से भविष्य के लिए धन जुटाने का समय है।

उपाय

रोजाना सूर्य देव को जल चढ़ाएं। 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करें और 51 बार ओम रिम सूर नमः यह मंत्र का आप जाप अवश्य करिए। यह महीना आपके लिए बेहतरीन रहेगा।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Rupee Falls: 99 तक गिर सकता है रुपया! Kotak Securities ने कहा- ये लेवल टूटा तो बढ़ेगी मुश्किल

Rupee Falls: रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 97 तक गिर सकता है। अगर 97 का स्तर टूट गया, तो यह 98.5 से 99 तक भी जा सकता है। यह अनुमान Kotak Securities के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी ने दिया है।

बनर्जी के मुताबिक रुपये पर कई तरफ से दबाव है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। इंपोर्ट महंगा हुआ है। ग्लोबल यील्ड भी ऊंची है। इन सबका असर रुपये पर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है। लेकिन ग्लोबल हालात रुपये के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

FPI की बिकवाली से दबाव

इस महीने अब तक विदेशी निवेशक करीब 6.1 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। बनर्जी के मुताबिक पिछले दो महीनों में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है।

हाल में FCNR(B) के जरिए भी पैसा आया है। लेकिन इससे रुपये को तुरंत फायदा नहीं मिला। इसका बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में जाने के बजाय RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में गया है।

अगर रुपये पर दबाव और बढ़ा, तो RBI बाजार में अपना दखल बढ़ा सकता है। बनर्जी के मुताबिक ग्लोबल दबाव के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है। ऐसे में 97 का स्तर जल्द दिख सकता है। इसके टूटने पर रुपया और गिर सकता है।

कच्चा तेल भी बढ़ा रहा चिंता

बनर्जी का कहना है कि रुपये पर कच्चे तेल का दबाव भी है। इसे सिर्फ Brent के फ्यूचर्स भाव से नहीं समझना चाहिए। स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमत भी मायने रखती है।

डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतें भी ऊंची हैं। दुनियाभर में रिफाइनरी से जुड़ी दिक्कतों के कारण इनकी कीमतों पर दबाव है। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। महंगा ईंधन महंगाई बढ़ा सकता है। इससे कारोबार और आम लोगों की लागत भी बढ़ती है। इसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।

RBI बढ़ा सकता है ब्याज दर

बनर्जी को आने वाले महीनों में RBI से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है। उन्हें एक से ज्यादा रेट हाइक की संभावना दिखती है। दिसंबर में भी दर बढ़ सकती है।

हालांकि, उनका कहना है कि RBI सिर्फ अमेरिकी फेड के फैसले को देखकर दरें नहीं बढ़ाएगा। घरेलू महंगाई RBI के लिए ज्यादा अहम रहेगी। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद पॉजिटिव रियल इंटरेस्ट रेट बनाए रखना भी RBI का फोकस रहेगा।

US बॉन्ड यील्ड भी परेशानी

अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड तेजी से बढ़ी है। खासकर 10 साल और उससे ज्यादा अवधि वाले बॉन्ड पर दबाव है। इसे ग्लोबल मार्केट के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।

बनर्जी के मुताबिक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों की उधारी भी फंड की मांग बढ़ा रही है। इससे लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है।

जब तक कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें कम नहीं होतीं, ग्लोबल यील्ड पर दबाव बना रह सकता है। लंबे समय तक ऊंची यील्ड और महंगी कमोडिटी से ग्लोबल ग्रोथ और वित्तीय बाजारों पर भी दबाव पड़ सकता है।

Stock Market Crash: निफ्टी में 25 साल की सबसे लंबी गिरावट, ये 7 बड़े कारण क्रैश के जिम्मेदार

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 30 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook:भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 29 सितंबर को लगातार दूसरे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए हैं। आज निफ्टी 22,700 के आसपास रहा। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 242.65 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर और निफ्टी 64.05 अंक या 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ। लगभग 1871 शेयरों में बढ़त हुई, 2321 शेयरों में गिरावट आई और 164 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। टाइटन कंपनी, एटरनल, HCL टेक्नोलॉजीज, HDFC लाइफ और इंफोसिस निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। जबकि डॉ. रेड्डीज लैब्स, NTPC, टाटा स्टील, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में बढ़त देखी गई।

सेक्टरों की बात करें तो मीडिया, मेटल और फार्मा को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। ऑटो, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि घरेलू इक्विटी मार्केट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, US ट्रेजरी यील्ड का दो दशक के उच्चतम स्तर के करीब बने रहना और FII की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव है। IPO के ज़रिए रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाने से भी मार्केट में लिक्विडिटी कम हो रही है। साल के आखिर में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना और ग्लोबल स्तर पर सख्त मौद्रिक नीति के माहौल के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कम बना हुआ है।

हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव निकट भविष्य में मार्केट के सेंटीमेंट को प्रभावित करते रहेंगे,लेकिन अब मार्केट का फोकस धीरे-धीरे Q2 की अर्निंग्स पर जा रहा है, जिसके लिए उम्मीदें Q1 की तुलना में कम हैं। अगर US ईरान संघर्ष में बड़ी कमी आती है, तो जोखिम लेने की इच्छा बढ़ने के कारण मार्केट में जबरदस्त रिलीफ रैली आ सकती है। तब तक,निवेशकों के चुनिंदा शेयरों पर फोकस करने की संभावना है। ऐसे में निवेशक ब्रॉडर मार्केट एक्सपोज़र के बजाय फंडामेंटल्स और कमाई की स्पष्टता को प्राथमिकता देंगे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी जून 2026 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर से भी नीचे आ गया है,जिससे एक बड़ी ‘बेयरिश मारुबोज़ू कैंडल’बनी है और गिरावट लगातार आठवें हफ़्ते भी जारी है। मोमेंटम इंडिकेटर्स के’ओवरसोल्ड ज़ोन’में जाने के कारण निकट भविष्य में 23020 के स्तर तक थोड़ी रिकवरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि,जब तक 23150 का स्तर फिर से हासिल नहीं हो जाता,तब तक बड़ा ट्रेंड कमज़ोर ही रहेगा। हालांकि निफ्टी के 22600 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है, लेकिन अगर ऐसा होता है,तो गिरावट और तेज़ हो सकती है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि गिरावट जारी रहने के कारण इंडेक्स अपने 200-हफ़्ते के मूविंग एवरेज तक गिर गया। कोविड के समय आई गिरावट के बाद यह पहली बार है जब निफ्टी 200-हफ़्ते के मूविंग एवरेज तक गिरा है,जो अभी 22,600 पर है।

अगर यह इस लेवल से नीचे जाता है तो बाज़ार में और तेज़ी से गिरावट आ सकती है। हालांकि,अगर निफ्टी 22,600 से ऊपर बना रहता है तो ऊपर की ओर रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। इसलिए,22600 निफ्टी के लिए एक अहम सपोर्ट लेवल बना रहेगा। ऊपर की ओर सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस 22,800 पर है।

PL कैपिटल में चीफ बिज़नेस ऑफिसर एडवाइजरी एंड डीलिंग, विक्रम कसाट का कहना है कि कल हुई बिकवाली का असर आज भी बाजार पर दिखा जिससे बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,कमजोर रुपया और लगातार विदेशी निवेश की निकासी के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कमजोर बना हुआ है।

ब्रेंट क्रूड का भाव $106 प्रति बैरल के आसपास होना खास तौर पर अहम है क्योंकि इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। वहीं,डॉलर के मुकाबले रुपये का ₹96 के स्तर से नीचे जाना मैक्रो रिस्क को और बढ़ाता है।

यह कमजोरी व्यापक है। फाइनेंशियल, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव है। इससे पता चलता है कि निवेशक सिर्फ अलग-अलग सेक्टर के बीच निवेश नहीं बदल रहे हैं,बल्कि जोखिम से बच रहे हैं।

आगे चलकर,बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों,जियोपॉलिटिकल घटनाओं और FII निवेश के प्रवाह पर निर्भर करेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को आक्रामक तरीके से निवेश करने के बजाय कमाई की स्पष्टता,मजबूत बैलेंस शीट और धीरे-धीरे निवेश करने(staggered accumulation)को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

Market Insight : निफ्टी में अब 52-वीक लो भी मुमकिन, 22180-22300 के स्तर टेस्ट होने की संभावना ज्यादा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FEMA उल्लंघन मामले में मास्टर टैलेंट एडुसर्विसेज के खिलाफ RBI की कार्रवाई

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के बाद मास्टर टैलेंट एडुसर्विसेज से जुड़े FEMA उल्लंघनों के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 17 सितंबर, 2026 को कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी किया। यह आदेश FEMA, 1999 की धारा 15 के तहत जारी किया गया।

विदेशी निवेश से जुड़ी रिपोर्टिंग में देरी का मामला

जांच एजेंसी के मुताबिक, जांच में FEMA के तहत कई तरह के उल्लंघन सामने आए थे। इनमें मुख्य रूप से विदेशी निवेश और विदेशी देनदारियों से संबंधित रिपोर्टिंग में देरी शामिल थी।

विदेशी आवक राशि की ARF फॉर्म में रिपोर्टिंग में देरी हुई थी, जिसमें करीब 6.23 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। एक अन्य मामले में ARF की रिपोर्टिंग में देरी हुई थी, जिसमें करीब 6.82 करोड़ रुपये राशि शामिल थी।

जांच में इन मामलों में भी रिपोर्टिंग में देर का पता चला

FC-GPR फॉर्म की रिपोर्टिंग में भी देरी हुई ती, जिसमें करीब 6.23 करोड़ रुपये राशि शामिल थी। एक अन्य FC-GPR रिपोर्टिंग में भी देरी हुई थी, जिसमें करीब 94.48 लाख रुपये की राशि शामिल थी। इसके अलावा Annual Return on Foreign Liabilities and Assets (FLA) की रिपोर्टिंग में भी देरी हुई थी। FEMA के विभिन्न प्रावधानों के तहत FLA फॉर्म की रिपोर्टिंग में भी देरी सामने आई।

RBI ने 1.77 लाख रुपये में किया कंपाउंडिंग

ED की जांच के बाद कंपनी ने FEMA के तहत सामने आए उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए RBI में आवेदन किया था। इसके बाद ED ने RBI को कंपाउंडिंग पर कोई आपत्ति नहीं होने की जानकारी दी। जांच एजेंसी ईडी की सहमति के आधार पर RBI ने 17 सितंबर 2026 को इन उल्लंघनों को 1,77,310 रुपये एकमुश्त भुगतान के साथ कंपाउंड कर दिया। इसके साथ ही जिन FEMA उल्लंघनों की कंपाउंडिंग की गई है, उनके संबंध में ईडी की जांच और आगे की कार्यवाही समाप्त हो गई है।

शंकर आनंद

Investment Mantra : मनीफ्रंट के मोहित गांग से जानें ग्लोबल इंन्वेस्टिंग क्यों है जरुरी, क्या हैं इसके तरीके

Investment Mantra : पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार ने ग्लोबल मार्केट को अंडरपरफॉर्म किया है। यही वजह है कि इन दिनों ग्लोबल इंवेस्टिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। अब सवाल है कि ग्लोबल इन्वेस्टिंग करना कैसे है। इसके क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं। किन फंड्स के जरिए हम ग्लोबल मार्केट का एक्सपोजर ले सकते हैं। ग्लोबल इंवेस्टिंग के मौके और चुनौतियों पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं Moneyfront के को-फाउंडर & CEO मोहित गांग।

मोहित गांग की राय

पिछले 2 साल भारतीय बाजार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। 2 साल से US, यूरोप,एशियाई बाजारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। रुपए में गिरावट का भी असर इन्वेंस्ट पर पड़ रहा है। करेंसी हेजिंग मुश्किल होगी। रुपए में गिरावट से ग्लोबल इंवेस्टिंग में ज्यादा रिटर्न मिलता है। रुपया मजबूत होने पर विदेशी निवेश पर कम रिटर्न मिलता है। ऐसे में हमें 10-15 या फिर 25-30 फीसदी ग्लोबल एक्सपोजर रखना चाहिए

ग्लोबल इन्वेस्टिंग क्यों जरूरी और कैसे करें?

भारत का ग्लोबल मार्केट कैप में हिस्सा 3–4% है। सिर्फ घरेलू मार्केट में निवेश करने पर ज्यादा निर्भरता का रिस्क बढ़ता है। भारत में बिग टेक, AI और सेमीकंडक्टर में कम विकल्प हैं। इससे ग्लोबल लीडर कंपनियों की ग्रोथ स्टोरी में निवेश का मौका मिलता है। ग्लोबल इन्वेस्टिंग से इन सेक्टरों में तेजी का फायदा मिल सकता है। लंबी अवधि में रुपया हर साल 2–4% कमजोर होता है। ग्लोबल इन्वेस्टिंग से FX रिटर्न का फायदा मिलता है। इससे साइकिल डायवर्सिफिकेशन का भी फायदा मिलता है। US, चीन और यूरोप के बाजार भारत से अलग हैं। इससे पोर्टफोलियो में गिरावट कम होती है।

भारत में ग्लोबल इन्वेस्टिंग के विकल्प

हम इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स और फीडर फंड्स के जरिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कर सकते हैं। US फंड्स (Nasdaq, S&P 500) में भी निवेश किया जा सकता है। इंटरनेशनल ETFs में निवेश किया जा सकता है। इंडियन एक्सचेंज के जरिए Nasdaq 100 ETF और S&P 500 ETF में निवेश किया जा सकता है। IBKR, Vested, Viewtrade, Stockal जैसे ब्रोकर्स के जरिए डायरेक्ट ग्लोबल इन्वेस्टिंग भी हो सकती है। LRS के तहत $250,000/साल लिमिट तय है। मल्टी-एसेट फंड्स के जरिए भी ग्लोबल इन्वेस्टिंग हो सकती है। कुछ फंड्स में इंटरनेशनल इक्विटी का भी एक्सपोजर होता है। गिफ्ट सिटी के जरिए भी निवेश कर सकते हैं। AIFs और ऑफशोर फंड्स India में रजिस्टर्ड होते हैं। दिक्कत सिर्फ यह है कि RBI की लिमिट्स के चलते निवेश का फ्लो काफी सीमित है।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग के फायदे

इससे बेहतर टैक्स एफिशिएंसी मिलती है। इंडियन कैपिटल गेन नहीं लगता। डॉलर में निवेश की सुविधा मिलती है। इससे ग्लोबल स्ट्रैटेजीज तक पहुंच मिलती है। गिफ्ट सिटी से नए फंड लॉन्च हो रहे हैं। HNIs/UHNIs क्लाइंट्स के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग का गेटवे बन सकता है

निष्कर्ष

ग्लोबल इन्वेस्टिंग अब सिर्फ़ डाइवर्सिफ़िकेशन (अलग-अलग जगहों पर निवेश) नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। ओवरसीज़ मार्केट में अलग-अलग थीम्स में निवेश करने के लिए ‘गिफ़्ट सिटी’ का रास्ता सबसे अच्छा और टैक्स के लिहाज से फायदेमंद है। ब्रोकिंग ऐप्स के ज़रिए सीधे निवेश करने में कई दिक्कतें आ सकती हैं, जैसे कि US में एस्टेट टैक्स और डिविडेंड पर विदहोल्डिंग टैक्स। इसलिए निवेशकों को इस रास्ते को चुनने में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

भले ही रिडेम्पशन (निवेश भुनाने) पर आपको 0% टैक्स देना पड़े, फिर भी आपको इन ट्रांजैक्शन्स की जानकारी अपने भारतीय इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में देनी होगी। क्योंकि यह निवेश RBI की ‘लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम’ (LRS) के तहत विदेशी मुद्रा (USD) में किया जाता है, इसलिए कानूनी तौर पर आपको ‘शेड्यूल FA’ (विदेशी संपत्ति) के तहत इन यूनिट्स की जानकारी देनी होगी और रिडेम्पशन को ‘एग्ज़म्प्ट इनकम’ (टैक्स-मुक्त आय) के तौर पर दिखाना होगा।

 

 

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