Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जीरोधा (Zerodha) के एप्लीकेशन का रास्ता साफ कर दिया। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि सेबी के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। जीरोधा की जीरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स ने इसका एप्लीकेशन 27 अप्रैल 2026 को फाइल किया था। सेबी ने ऐसे समय में एप्लीकेशन को मंजूरी दी है, जब मर्चेंट बैंकिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म्स देश में बढ़ते प्राइमरी कैपिटल मार्केट का फायदा उठाने के लिए इसमें दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं।

Merchant Banker बनने से क्या मिलेगा Zerodha को?

मर्चेंट बैंकर का लाइसेंस मिलने के बाद जीरोधा अपने मौजूदा ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर इंवेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर में एंट्री कर सकेगी। इसके तहत कंपनी कई तरह के काम कर सकेगी, जैसे कि कंपनियों के IPO और FPO (फॉलो-ऑप पब्लिक ऑफर) मैनेज करने के साथ-साथ राइट्स इश्यू और कैपिटल मार्केट के दूसरे ट्रांजैक्शंस में कंपनियों का काम करना। इस कदम से जीरोधा की इंवेस्टमेंट बैंकिंग में एंट्री होगी।

जीरोधा ने ब्रोकिंग बिजनेस के बाहर तेजी से बढ़ाया कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में जीरोधा ने अपने ट्रेडिशनल ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर कई फाइनेंशियल सर्विसेज शुरू की जैसे कि एसेट मैनेजमेंट, जीरोधा कैपिटल के जरिए लेंडिंग, और अपने प्रोप्रॉयटरी फंड के जरिए इंवेस्टमेंट्स। इसके अलावा इसे गिफ्ट सिटी में ब्रोकर-डीलर के रूप में काम करने के लिए IFSCA (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी) से रजिस्ट्रेशन मिल चुका है, जिससे यह भारतीय निवेशकों को विदेशी निवेश की सुविधा दे सकती है। अब यह मर्चेंट बैंकिंग में भी एंट्री करने वाली है। 31 अगस्त, 2026 तक सेबी के पास कुल 248 रजिस्टर्ट मर्चेंट बैंकर्स थे तो सेबी के एप्लीकेशन स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर काम चल रहा है।

मर्चेंट बैंकिंग के लिए नियम हुए और सख्त

जीरोधा के मर्चेंट बैंकिंग में आने से पहले सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के लिए नियम सख्त किए थे। सेबी ने कैटेगरी I मर्चेंट बैंकर्स की मिनिमम नेटवर्थ ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ तो कैटेगरी II मर्चेंट बैंकर्स के लिए मिनिमम ₹10 करोड़ की नेटवर्थ तय की है। इसमें सिर्फ पहली कैटेगरी वाले ही मर्चेंट बैंकर्स मेनबोर्ड सेगमेंट के आईपीओ को मैनेज कर सकते हैं। नए नियमों में लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी रखी गई हैं और मर्चेंट बैंकर्स की कुल अंडरराइटिंग ऑब्लिगेशंस को लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है। मौजूदा मर्चेंट बैंकर्स के लिए इन बढ़ी हुई जरूरतों को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है तो जीरोधा जैसी नई कंपनियों को शुरुआत से ही नए नियमों के मुताबिक जरूरी नेटवर्थ बनाए रखना होगा।

Union Budget 2027: यूनियन बजट 2027 बनाने की प्रक्रिया शुरू, सरकार ने जारी किया सर्कुलर

Union Budget 2027: बजट 2027 बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (बजट डिविजन) ने सरकार के सभी मंत्रालयों को बजट सर्कुलर 2027-28 इश्यू कर दिया है। यूनियन बजट हर साल 1 फरवरी को पेश होता है। इस साल 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाला बजट वित्त वर्ष 2027-28 का केंद्र सरकार का बजट होगा।

12 अक्टूबर से प्री-बजट मीटिंग्स शुरू हो जाएंगी

मंत्रालयों को सर्कुलर जारी होने के साथ ही 2026-27 के रिवाइज्ड एस्टिमेट (RE) और 2027-28 के लिए बजट एस्टिमेट (BE) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सर्कुलर में मंत्रालयों से दोनों का अनुमान पेश करने को कहा गया है। प्री-बजट मीटिंग्स का सिलसिला 12 अक्तूबर, 2026 से शुरू हो जाएगा। इसकी अध्यक्षता एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी करेंगे।

6 अक्टूबर तक मंत्रालयों को अपनी मांग बतानी होगी

सभी मंत्रालयों और विभागों को पैसे की अपनी जरूरत के बारे में यूनियन बजट इंफॉर्मेशन सिस्टम (UBIS) को बताने को कहा गया है। उन्हें यह काम 6 अक्तूबर, 2026 तक पूरा करना होगा। उधर, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर अब तक 55,757 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।

सरकार विनिवेश का 78 फीसदी लक्ष्य हासिल कर चुकी है

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। अब तक वह इस टारगेट का 78 फीसदी जुटा चुकी है। अभी इस वित्त वर्ष के खत्म होने में 7 महीने का समय बचा है। अनुमान है कि बाकी पैसा इस दौरान आसानी से जुटा लेगी।

मुश्किल में पेश होगा अगले वित्त वर्ष का बजट 

अगले वित्त वर्ष का यूनियन बजट ऐसे वक्त में पेश होने जा रहा है, जब इकोनॉमी के सामने कई चुनौतियां हैं। वैश्विक स्थितियां खासकर मध्यपूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का असर भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ा रहा है। क्रूड की कीमतों में उछाल से महंगाई लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर महंगाई कंट्रोल में नहीं आती है तो इसका असर जीडीपी ग्रोथ पर भी पड़ेगा। इधर, डॉलर के मुकाबले रुपये में काफी गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

अगले साल यूपी चुनावों का असर बजट पर दिख सकता है

सरकार और आरबीआई की कोशिश महंगाई को जल्द से जल्द काबू में करने पर होगी। उधर, अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है। 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाले बजट पर यूपी चुनावों को असर दिख सकता है। सरकार बजट में विदेशी निवेश बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान कर सकती है।

जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

बाजार के लिए क्या होगा आज गुड फ्राइडे या लगेगी निराशा हाथ, ग्लोबल बाजार से लेकर गिफ्ट निफ्टी तक जानें कैसे मिल रहे है संकेत

शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के सपाट खुलने की संभावना है। GIFT Nifty मामूली बढ़त का संकेत दे रहा है, जबकि पिछले सेशन में Nifty ने लगातार सात दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में फिर से दबाव और कच्चे तेल की कीमतों के एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने से सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है, भले ही एशियाई इक्विटी में मिला-जुला कारोबार हुआ और US स्टॉक फ्यूचर्स में थोड़ी बढ़त दिखी।

सुबह 8:05 बजे GIFT Nifty 25 अंक या 30. प्रतिशत बढ़कर 24,333.5 पर कारोबार कर रहा था। कल भारतीय इक्विटी में जोरदार वापसी हुई थी क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड में कमी से ग्लोबल रिस्क लेने की क्षमता में कुछ सुधार हुआ था। Sensex 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत बढ़कर 77,537.72 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत बढ़कर 24,231.85 पर बंद हुआ।

हालांकि, रात भर में ग्लोबल माहौल कम सपोर्टिव हो गया क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड फिर से बढ़ने लगीं और US-ईरान तनाव के समाधान की उम्मीदें कम होने के बीच कच्चा तेल एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

US बॉन्ड यील्ड में फिर से बढ़ोतरी, वॉल स्ट्रीट पर दबाव

इस हफ्ते की शुरुआत में US ट्रेजरी के दखल से मिली राहत कम समय के लिए ही रही, इसलिए शुक्रवार को भी ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में तनाव इक्विटी के लिए एक मुख्य जोखिम बना रहा। US 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड वापस लगभग 5.25 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि 10-वर्षीय यील्ड 4.71 प्रतिशत को छू गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव पड़ता है और इससे विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की संपत्ति कम आकर्षक हो सकती है।

यील्ड में फिर से बढ़ोतरी का असर रात भर वॉल स्ट्रीट पर दिखा। Dow Jones Industrial Average 703.84 अंक या 1.32 प्रतिशत गिरकर 52,759.21 पर आ गया, जबकि S&P 500 में 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,641.16 और Nasdaq Composite में 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,067.17 पर कारोबार हुआ। रिटेल सेक्टर की बड़ी कंपनी वॉलमार्ट के निराशाजनक नतीजों ने भी सेंटीमेंट को खराब किया, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं।

शुक्रवार सुबह US इक्विटी फ्यूचर्स से थोड़े सकारात्मक संकेत मिले; S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत ऊपर रहे।

बॉन्ड मार्केट की चिंताओं के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। कई प्रमुख इंडेक्स साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहे थे क्योंकि निवेशक ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी से जूझ रहे थे। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरियाई और ताइवानी शेयरों में थोड़ी बढ़त देखी गई। हालांकि, जापान का निक्केई 0.8 प्रतिशत गिर गया और इसमें 4 प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक गिरावट की संभावना थी।

US-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट $93 के करीब

घरेलू निवेशकों के लिए कच्चा तेल एक और बड़ी चिंता का विषय बना रहा, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिरोध के कारण कीमतें लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड पहले $94.71 प्रति बैरल तक पहुंचा, लेकिन बाद में प्रॉफिट बुकिंग के कारण इसमें थोड़ी नरमी आई। फ्यूचर्स अंत में 0.7 प्रतिशत गिरकर $93.12 प्रति बैरल पर रहे, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत से अधिक ऊपर बने रहे। US क्रूड 0.7 प्रतिशत गिरकर $86.18 प्रति बैरल पर आ गया।

तेल की कीमतों को उस समझौते की कम होती उम्मीदों से सहारा मिला है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह से फिर से खुल सकता था; यह उम्मीद तब कम हुई जब US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन ईरान पर “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” लगाएगा।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक: आगे की रिकवरी के लिए 24,265 का स्तर अहम

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि अगर निफ्टी 24,265 के स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है, तो इसकी रिकवरी 24,400 तक बढ़ सकती है; वहीं, अगर यह इस स्तर को पार नहीं कर पाता है, तो यह 24,000-24,250 के दायरे में ही बना रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म को 24,000-23,800 पर मजबूत सपोर्ट दिख रहा है और उम्मीद है कि इंडेक्स 24,000-24,600 की व्यापक रेंज में रहेगा। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयरों को सहारा देना जारी रखा और 3,537 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशक नेट सेलर बन गए और उन्होंने 583 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेश के प्रवाह पर नज़र बनी रहेगी क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से डॉलर एसेट्स का आकर्षण बढ़ सकता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी 70 अंक चढ़ा, सेंसेक्स-निफ्टी की हो सकती है मजबूत शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में किया खूब निवेश, जानिए कहां से हुई इनकी निकासी

जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने कुछ खास सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है। इस दौरान कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ सबसे ज्यादा नेट इक्विटी निवेश किया गया है। वहीं,कैपिटल गुड्स और टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में इनकी सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली है।

 FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव

जुलाई में FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव आया है। महीने के दूसरे आधे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ से जबरदस्त खरीदारी हुई है। वहीं, मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में हुई खरीदारी के विपरीत दूसरे हिस्से में बिकवाली देखने को मिली है।

कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में हुआ सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश 

जुलाई में कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश रहा है। इस सेक्टर में इस दौरान 10,201 रुपए करोड़ की खरीदारी हुई है। इस सेक्टर में 1 से 15 जुलाई के बीच 7,361 करोड़ रुपए और महीने के दूसरे हिस्से में 2,840 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया है।

हेल्थकेयर सेक्टर  पर भी आया FPI का दिल

हेल्थकेयर सेक्टर इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा। इसमें FPIs का नेट निवेश 7,731 करोड़ रुपए रहा। इस सेक्टर में FPIs ने पहले हिस्से में 4,101 करोड़ रुपए और दूसरे हिस्से में 3,630 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स  भी आया पसंद

महीने के आगे बढ़ने के साथ ही कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीदारी में तेजी आई। FPIs ने 1-15 जुलाई के दौरान इस सेक्टर में 2,384 करोड़ रुपये और महीने के दूसरे हिस्से में 4,958 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे इसमें महीने का कुल नेट निवेश 7,342 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में भी हुई खरीदारी

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में 5,993 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। जिसके बाद FPIs ने महीने के दूसरे आधे हिस्से में 1,056 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली की,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में 4,937 करोड़ रुपए का नेट निवेश देखने को मिला।

महीने के दूसरे पखवाड़े में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बढ़ी खरीदारी 

महीने के दूसरे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी खरीदारी में तेजी देखने को मिली। जुलाई के पहले पखवाड़े में सिर्फ 60 करोड़ रुपये के नेट इन्वेस्टमेंट के बाद, FPIs ने दूसरे हिस्से में 3,298 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में होने वाला कुल निवेश 3,358 करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने कंस्ट्रक्शन मटीरियल में 2,445 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया,जिसमें से 1,574 करोड़ रुपए पहले पखवाड़े में और 871 करोड़ रुपए दूसरे पखवाड़े में आए।

जुलाई में सर्विस सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपए की नेट खरीदारी देखने को मिली। FPIs ने पहले पखवाड़े में इस सेक्टर में 2,353 करोड़ रुपए का निवेश किया,जबकि दूसरे पखवाड़े में 30 करोड़ रुपए की मामूली बिकवाली की।

फाइनेंशियल सर्विसेज में हुई बिकवाली

असेट अंडर कस्टडी (AUC) के आधार पर FPI पोर्टफोलियो के सबसे बड़े सेक्टर,फाइनेंशियल सर्विसेज़ में जुलाई में 694 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली हुई। FPIs ने महीने के पहले हिस्से में 1,975 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल सर्विसेज़ स्टॉक्स खरीदे,लेकिन दूसरे हिस्से में 2,669 करोड़ रुपये के स्टॉक्स बेचे।

जुलाई के आखिर में इस सेक्टर का AUC 21.13 लाख करोड़ रुपए था। जबकि 15 जुलाई को यह 21.39 लाख करोड़ रुपए पर था। फिर भी FPI पोर्टफोलियो में यह सेक्टर सबसे बड़ा निवेश वाला सेक्टर बना रहा।

कई दूसरे सेक्टर में भी भारी बिकवाली हुई। जुलाई में कैपिटल गुड्स सेक्टर से 6,275 करोड़ रुपए की नेट FPI निकासी हुई,जबकि टेलीकॉम सेक्टर में 5,725 करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई। पावर सेक्टर में 2,863 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली हुई।

FPI AUC में फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा

फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा,ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स का FPI AUC में 5.40 लाख करोड़ रुपये का हिस्सा रहा। इसके बाद हेल्थकेयर का नंबर आता है, जिसका हिस्सा 5.33 लाख करोड़ रुपये रहा। फिर कैपिटल गुड्स का हिस्सा 4.89 लाख करोड़ रुपये रहा।

जुलाई के आखिर में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इक्विटी AUC 3.93 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का AUC 1.98 लाख करोड़ रुपये रहा। रियल्टी सेक्टर का हिस्सा भी काफी बड़ा रहा,जो 1.54 लाख करोड़ रुपये पर रहा।

 

Market cues : निफ्टी के लिए 24200 पर तत्काल सपोर्ट, इसके नीचे जाने पर आ सकती है भारी गिरावट

CM भूपेंद्र पटेल अमेरिका-कनाडा दौरे पर रवाना, Vibrant Gujarat Global Summit 2027 के लिए करेंगे रोड शो

CM भूपेंद्र पटेल अमेरिका-कनाडा दौरे पर रवाना, Vibrant Gujarat Global Summit 2027 के लिए करेंगे रोड शो

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए हैं। वर्ष 2002 के बाद सरकारी कामकाज के सिलसिले में अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले वे गुजरात के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। आगामी Vibrant Gujarat Global Summit 2027 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री के साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी अमेरिका और कनाडा के दौरे पर गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एम. के. दास, प्रधान सचिव संजीव कुमार, विक्रांत पांडे के साथ-साथ एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) एन. नटराजन, ममता वर्मा और राजीव कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह दौरा 17 से 24 अगस्त तक चलेगा।

 

Vibrant Gujarat Summit 2027 के लिए निवेशकों को आमंत्रण

 

मुख्यमंत्री के इस दौरे के दौरान अमेरिका और कनाडा में विभिन्न प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की जाएंगी। इन बैठकों में गुजरात में निवेश की संभावनाओं और अवसरों पर चर्चा होगी। इसके अलावा Vibrant Gujarat Global Summit 2027 के लिए विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से रोड शो आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में निवेश के अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स की जानकारी देकर उद्योगपतियों को समिट में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया जाएगा।

 

हर्ष संघवी सितंबर में जापान और यूरोप के दौरे पर जाएंगे

 

गुजरात सरकार की ओर से वैश्विक स्तर पर निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशों में संपर्क और निवेश प्रोत्साहन अभियान को गति दी जा रही है। इसी कड़ी में राज्य के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी आगामी सितंबर में जापान और यूरोप के दौरे पर जाएंगे। इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य गुजरात में अधिक से अधिक विदेशी निवेश लाना और Vibrant Gujarat Global Summit 2027 को वैश्विक स्तर पर सफल बनाना है।

Market View : निफ्टी कंपनियों के लिए अच्छी रहेगी सितंबर तिमाही, बच्चों का कपड़ा बनाने वाली यह कंपनी कर सकती है कमाल

Market View : मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (Marcellus Investment Managers) के फाउंडर और CIO सौरभ मुखर्जी ने कहा कि वे टाइटन में काफी लंबे समय से निवेशित हैं। अगले 10-15 दिनों में टाइटन की स्टोरी पर उनकी एक किताब भी आ रही है। कंपनी की 20-22 साल की कमाल की हिस्ट्री रही है। कंपनी ने इस दौरान न सिर्फ अपना बल्कि पूरे ज्वेलरी मार्केट का ट्रांसफॉर्मेशन कर दिया है। टाइटन ने लोगों में जिस तरह का भरोसा हासिल किया है और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट किया है वह कमल का है।

पहली तिमाही के नतीजों पर बात करते हुए सौरभ मुखर्जी ने कहा कि इस अवधि में एक बड़ा पॉजिटिव सरप्राइज़ देखने को मिला है। जून तिमाही में निफ्टी की ईपीएस ग्रोथ 7-8 फीसदी रहने की उम्मीद थी। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यह डबल डिजिट में रह सकती है। यह करीबन 3 साल बाद ऐसा पहला क्वार्टर होगा जहां पर डबल डिजिट ग्रोथ दिखेगी। स्मॉल एंड मिड कैप में डबल डिजिट ग्रोथ काफी सालों से दिख रही है, वो नई बात नहीं है। लेकिन निफ्टी में जो भारी भरकम स्टॉक्स है उनके लिए यह तीन साल का बेस्ट क्वार्टर हो सकता। ऐसा लग रहा है कि निफ्टी के लिए सितंबर क्वार्टर भी अच्छा रहेगा। पिछले साल इनकम टैक्स, आरबीआई के रेट और जीएसटी दरों में जो कटौती हुई उसका फायदा जून तिमाही में दिखा। सितंबर तिमाही में भी इसका असर रहेगा। कंज्यूमर बाजार की तरफ रुख कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार कैपेक्स पर थोड़ दबाव तो है लेकिन प्राइवेट कैपेक्स में थोड़ा सा पिकअप दिख रहा है। एक्सपोर्ट ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग में भी सॉलिड पिकअप दिख रहा है। एक्सपोर्ट ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग में विदेशी निवेश भी आ रहा है। कंपनियों की कमाई और ऑपरेटिंग मार्जिन में भी पिक अप दिख रहा है। ऐसे में यह तिमाही काफी अच्छी रही है। अगले 3-4 साल बाजार के लिए अच्छे रहेंगे। इस दौर में क्वालिटी स्टॉक्स अच्छा रिटर्न देंगे।

एक्सपोर्ट से जुड़ा मैन्युफैक्चरिंग स्पेस करेगा बेहतर प्रदर्शन

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए सौरभ मुखर्जी ने कहा कि आगे एक्सपोर्ट से जुड़ा मैन्युफैक्चरिंग स्पेस बेहतर करेगा। इस सेक्टर की एक कंपनी है एसपी एपेरल्स (SP Apparels)। उम्मीद है कि यह शेयर आगे काफी अच्छा प्रदर्शन करेगा। यह कोयम्बटूर के पास बेस्ड बच्चों के लिए कपड़ा बनाने वाली कंपनी है। यह एक्सपोर्ट ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग करती है। यह कोयंबटूर से पूरे वेस्टर्न यूरोप के रिटेलर्स के लिए बच्चों का कपड़ा बनाती है। ध्यान देनें की बात है कि बच्चों का कपड़ा बनाना एक कठिन काम है। इसमें यूरोपियन देशों द्वारा तय किए गए कई हेल्थ एंड सेफ्टी नियमों का पालन करना होता है। एसपी एपेरल्स इस सेगमेंट की लीडिंग प्लेयर है।

सौरभ मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने करीबन चार या पांच महीने पहले इस स्टॉक में पोजीशन बनाई थी। वे कई सालों से इस पर नजर रखे हुए थे। उनकों यह कंपनी काफी साफ सुथरी और अच्छी लगती है। बहुत साल से कंपनी बांग्लादेश फैक्टर से परेशान थी। बांग्लादेश पर यूरोप में भारत के मुकाबले 13-14% कम टैरिफ लगता है। लेकिन जब तो जब पीयूष गोयल ने यूरोप के साथ फ्री ट्रंड एग्रीमेंट पर साइन किया तो एसपी एपेरल्स फिर से लाइम लाइट में आ गया। उम्मीद है कि जनवरी 2027 से एसपी एपेरल्स को टैरिफ के मामले में बांग्लादेश के साथ बराबरी मिल जाएगी। रुपया भी गिर रहा है। कंपनी अच्छा प्रोडक्ट भी बनाती है। कंपनी को करेंसी में कमजोरी और एफटीए का फायदा दोनों ही मिलेगा।

 

 

Market Outlook: सपाट बंद हुआ बाजार, जानिए 11 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FPI की खरीद जारी, अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयरों में लगाए ₹12921 करोड़

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया। बेहतर होती मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से FPI के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।

इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इसके पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।

इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब तक भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ की बिक्री कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने ₹1.66 लाख करोड़ की सेलिंग की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में FPI का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बेहतर ग्रोथ और महंगाई संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा सेकेंडरी मार्केट के जरिए आया है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल IPO तक सीमित नहीं है, बल्कि लिस्टेड भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है।

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा, SBI को सबसे ज्यादा फायदा

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का मानना है कि FPI की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय डेट या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। अगस्त में अब तक उन्होंने बॉन्ड बाजार में जनरल रूट के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

वाइब्रेंट गुजरात के लिए ग्लोबल मिशन, CM अमेरिका-कनाडा तो DyCM हर्ष संघवी संभालेंगे जापान-यूरोप का मोर्चा

Vibrant Gujarat 2026: आगामी वाइब्रेंट गुजरात 2026 समिट को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावशाली और सफल बनाने के लिए गुजरात सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस वैश्विक शिखर सम्मेलन के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न देशों में उच्च स्तरीय रोड शो आयोजित करने की विशेष योजना बनाई जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय अभियान के तहत मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल खुद अमेरिका और कनाडा के दौरे पर जाएंगे, जहां वे वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ सीधा संवाद करेंगे। सरकार जल्द ही इस पूरे विदेश दौरे और रोड शो के आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा कर सकती है।

अमेरिका और कनाडा में आयोजित होंगे हाई-प्रोफाइल रोड शो

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल अमेरिका और कनाडा के प्रमुख आर्थिक शहरों में रोड शो करके अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को गुजरात में पूंजी निवेश (Investment) के लिए विशेष रूप से आमंत्रित करेंगे। इन विदेशी रोड शो का मुख्य उद्देश्य गुजरात को वैश्विक मंच पर निवेश, आधुनिक उद्योग, नई तकनीक और भविष्य के अवसरों के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य (Investment Hub) के रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि राज्य में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आ सके।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी जापान और यूरोप के दौरे पर

मुख्यमंत्री के अलावा राज्य के अन्य वरिष्ठ मंत्री भी विभिन्न देशों का दौरा कर वाइब्रेंट गुजरात का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस योजना के तहत उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी जापान और यूरोपीय देशों के दौरे पर जाकर निवेशकों के साथ बैठकें करेंगे। उनके साथ मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य के वित्त मंत्री कनुभाई देसाई भी विदेश यात्रा कर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करेंगे, ताकि विदेशी कंपनियों को गुजरात की ओर आकर्षित किया जा सके।

आयोजन को सुचारू बनाने के लिए 26 सदस्यीय 'कोर कमेटी' का गठन

वाइब्रेंट गुजरात 2026 समिट की तैयारियों को अधिक सुव्यवस्थित और सटीक दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने दो बेहद महत्वपूर्ण कमेटियों का गठन किया है। इसमें उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 26 सदस्यों वाली एक उच्च स्तरीय 'कोर कमेटी' बनाई गई है। यह कोर कमेटी पूरे समिट के आयोजन, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के साथ समन्वय और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों की सीधी निगरानी करेगी।

कार्यान्वयन के लिए 22 उच्च अधिकारियों की 'एग्जीक्यूटिव कमेटी'

समिट के सफल कार्यान्वयन के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर काम में तेजी लाने हेतु राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 22 अनुभवी अधिकारियों की 'एग्जीक्यूटिव कमेटी' भी गठित की गई है। यह कमेटी वाइब्रेंट समिट के कार्यक्रमों के व्यावहारिक कार्यान्वयन, विभिन्न सरकारी विभागों के बीच परस्पर समन्वय बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेगी।

यात्रा की रूपरेखा तैयार, जल्द होगी आधिकारिक घोषणा

फिलहाल राज्य सरकार द्वारा विदेश यात्रा और रोड शो की अंतिम रूपरेखा तैयार की जा रही है। जल्द ही रोड शो के सटीक स्थानों, तिथियों और विदेश जाने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल के बारे में आधिकारिक घोषणा की जाएगी। गुजरात सरकार को पूरा भरोसा है कि इस अंतरराष्ट्रीय अभियान के माध्यम से राज्य में भारी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित करने और नए औद्योगिक समझौतों (MoUs) को बढ़ावा देने में बड़ी सफलता मिलेगी।

 

Market outlook : लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 5 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market outlook :मंगलवार, 4 अगस्त के उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 24,650 से नीचे गिरकर बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 78,428.95 पर और निफ्टी 159.40 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ। लगभग 2030 शेयर बढ़े,2037 शेयर गिरे और 174 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट ग्रासिम इंडस्ट्रीज,HDFC लाइफ,मैक्स हेल्थकेयर,बजाज ऑटो और रिलायंस इंडस्ट्रीज में हुई। जबकि बढ़त वाले शेयरों में हिंडाल्को,ट्रेंट,अपोलो हॉस्पिटल्स,जियो फाइनेंशियल और इटरनल शामिल रहे।

मेटल और मीडिया को छोड़कर,बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी,ऑयल एंड गैस,रियल्टी,इंफ्रा,प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और FMCG इंडेक्स 0.5-2 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.3 प्रतिशत गिरा,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.2 प्रतिशत बढ़ा।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट में रिसर्च हेड संतोष मीणा का कहना है कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के पहले दिन,निफ्टी आखिरी मिनटों में लगभग 200 अंक उछल गया। बड़े इंस्टीट्यूशनल बॉय ऑर्डर्स थिन ऑक्शन विंडो के दौरान ज्यादा लिक्विड NSE पर फोकस करते हुए नजर आए जिससे कई हैवीवेट कंपनियों को बड़ा फायदा हुआ। BSE पर इंस्टीट्यूशनल कैश-मार्केट एक्टिविटी बहुत कम होने के बावजूद,सेंसेक्स अपने 3:15 बजे के लेवल के बहुत करीब रहा। जिससे यह अंतर पैदा हुआ। यह नए सिस्टम के तहत पूरी तरह से डिमांड-सप्लाई का असंतुलन था, न की कोई टेक्निकल गड़बड़ी।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड,विनोद नायर का कहना है कि मंगलवार की वीकली एक्सपायरी और F&O क्लोजिंग प्राइस तय करने के नए सिस्टम के लागू होने से मार्केट ट्रेंड्स में गड़बड़ी आई है। निफ्टी स्टॉक्स और इंडेक्स की दोपहर 3:30 बजे और 3:40 बजे की क्लोजिंग प्राइस के बीच बड़ा अंतर,साथ ही सेंसेक्स से इनका अंतर,यह बताता है कि नया सिस्टम जैसा सोचा गया था वैसा काम नहीं कर रहा है,जिससे प्राइस में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। इससे 15 मिनट के ब्लाइंड डेरिवेटिव्स विंडो क्लोजिंग सेशन से पहले,खासकर रिटेल इन्वेस्टर्स के बीच,पोजीशन्स का फोर्स्ड स्क्वेयर-ऑफ शुरू हो गया है।

ये नए सिस्टम की शुरुआती दिक्कतें लग रही हैं और एक्सचेंज और मार्केट रेगुलेटर को इन कमियों को दूर करने की जरूरत है। अभी,इसका असर स्टॉक्स और मेन इंडेक्स में ट्रेडिंग के F&O सेगमेंट तक ही सीमित है। खास बात यह है कि ये फंडामेंटल स्ट्रक्चरल परेशानियां नहीं हैं और इन पर कंट्रोल कर लेने की उम्मीद है।

आर्थिक और फाइनेंशियल आउटलुक मजबूत बना हुआ है और इससे लंबे समय के निवेशकों की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। उम्मीद है कि जैसे ही एक्सचेंज अपने नॉर्मल ऑपरेटिंग स्ट्रक्चर पर लौटेंगे,मौजूदा उतार-चढ़ाव थम जाएगा।

मार्केट का फोकस होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की घटनाओं पर बना हुआ है। इस इलाके में शांति लौटने और स्टेबिलिटी आने से क्रूड ऑयल की कीमतों को कम करने और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी लाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा ग्लोबल अनिश्चितताओं और महंगाई की चिंताओं के बीच RBI की पॉलिसी मीटिंग पर सबकी नजरें लगी हुई हैं। इन्वेस्टर्स इन चुनौतियों से निपटने के लिए RBI से पॉलिसी उपायों की उम्मीद कर रहे हैं,साथ ही बैंकिंग सिस्टम के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट की भी उम्मीद है। इससे मार्केट का भरोसा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे मार्केट की दिशा काफी हद तक RBI की पॉलिसी कमेंट्री और तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे,24750-24780 जोन निफ्टी के लिए एक बड़ी रुकावट बना रहेगा। 24780 से ऊपर का ब्रेकआउट इसके लिए 24900 की ओर और ऊपर जाने का रास्ता बना सकता है,जिसके बाद 25050 का लेवल भी देखने को मिल सकता है। नीचे की तरफ, निफ्टी के लिए 24460-24430 जोन से तत्काल सपोर्ट का काम करेगा।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी भी आज गैप-डाउन के साथ खुला और पूरे ट्रेडिंग सेशन में दबाव में रहा। इसमें धीरे-धीरे गिरावट आई। हालांकि,CAS सेटलमेंट प्राइस में तेज रिकवरी (जो 3:15 PM क्लोजिंग लेवल से 400 अंक से ज्यादा ऊपर थी। ने नुकसान को काफी कम करने में मदद की। इंडेक्स आखिरकार 0.58% नीचे 57907 पर सेटल हुआ। डेली चार्ट पर,बैंक निफ्टी ने एक छोटी कैंडल बनाई,जिसकी निचली शैडो लंबी थी। यह निचले लेवल पर खरीदारी बढ़ने का संकेत है।

टेक्निकल नज़रिए से,इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो एक पॉजिटिव ट्रेंड का संकेत है। हालांकि,मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर अभी साइडवेज़ रुझान का संकेत दे रहे हैं,जो शॉर्ट टर्म में मजबूत डायरेक्शनल मूव की कमी का संकेत देते हैं।

आगे 58200-58300 का जोन बैंक निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस एरिया के तौर पर काम करेगा। 58300 से ऊपर मूव करने पर 58800 की तरफ एक नया अपस्विंग हो सकता है,जिसके बाद शॉर्ट टर्म में 59200 का टारगेट भी देखने को मिल सकता है।

वहीं, नीचे की तरफ,57400-57300 का जोन एक अहम सपोर्ट बैंड के तौर पर काम करेगा। जब तक इंडेक्स इस सपोर्ट से ऊपर रहता है,तब तक बड़ा पॉजिटिव स्ट्रक्चर बना रहने की उम्मीद है।

 

भारत में विदेशी निवेश लाने के लिए सरकार ने पेश किया बिल, विदेशी निवेशकों को मिलेगी बड़ी राहत

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।