Pharma Mutual Funds: 1 साल में 30% तक रिटर्न, 10 फंड ने दिया 20% से ज्यादा फायदा; क्या अभी भी है निवेश का मौका?

Pharma Mutual Funds: पिछले एक साल में फार्मा सेक्टर ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। Nifty Pharma Index करीब 25% चढ़ा है। वहीं, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टोरल म्यूचुअल फंड्स ने 11% से 30% तक रिटर्न दिया है।

Value Research के आंकड़ों के मुताबिक, 19 एक्टिव फार्मा सेक्टोरल फंड्स में से सिर्फ 10 फंड्स ने एक साल में 20% से ज्यादा रिटर्न दिया। इन फंड्स का औसत रिटर्न 20.7% रहा। BSE Healthcare TRI ने इस दौरान 18.68% रिटर्न दिया।

1 साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फार्मा फंड

फंड1 साल का रिटर्न
Kotak Healthcare Direct29.80%
HDFC Pharma and Healthcare Direct28.85%
PGIM India Healthcare Direct28.04%
Quant Healthcare Direct27.02%
Bajaj Finserv Healthcare Direct26.30%
WhiteOak Capital Pharma and Healthcare Direct

25.87%
ICICI Pru Nifty Pharma Index Direct

23.89%
SBI Healthcare Opportunities Direct23.59%
Mirae Asset Healthcare Direct22.91%
Tata Nifty MidSmall Healthcare Index Direct20.93%

डेटा: Value Research, 28 अगस्त 2026 तक

फार्मा सेक्टर क्यों चढ़ा?

फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी के पीछे कई वजहें रहीं। अमेरिका में भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों के लिए माहौल बेहतर हुआ है। कुछ फार्मा इंपोर्ट पर 100% अमेरिकी टैरिफ से जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स को बाहर रखा गया।

घरेलू मांग भी मजबूत बनी हुई है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट FY27 की पहली तिमाही में 6.8% बढ़कर 8.1 अरब डॉलर पहुंच गया। सरकार भी Biopharma SHAKTI जैसी योजनाओं के जरिए सेक्टर में निवेश बढ़ा रही है।

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आगे निवेश करना सही है?

Anand Rathi Wealth के मुताबिक, फार्मा सेक्टर की वैल्यूएशन हाल की तेजी के बाद बढ़ गई है। फार्मा इंडेक्स करीब 43 गुना P/E पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 37-38 गुना रहा है।

उनका मानना है कि अब आगे की तेजी कमाई की वास्तविक ग्रोथ पर निर्भर करेगी। सेक्टोरल फंड में निवेश से कॉन्सेंट्रेशन रिस्क भी बढ़ता है। ऐसे में सिर्फ हाल की तेजी देखकर फार्मा फंड में पैसा लगाने से पहले जोखिम और वैल्यूएशन पर जरूर विचार करना चाहिए।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Holiday: 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर शेयर बाजार बंद या होगी ट्रेडिंग, क्या कहती है छुट्टियों की लिस्ट

इस साल देश में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार, 4 सितंबर की है। इस दिन पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाएगा। इस त्योहार के चलते कई जगहों पर छुट्टी रहेगी। लेकिन शेयर बाजार में इस मौके पर कारोबार बंद नहीं होगा। BSE और NSE पर जन्माष्टमी के दिन भी बाकी कारोबारी दिनों की तरह ही शेयरों की ट्रेडिंग होगी। इसके अलावा कमोडिटीज में ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) भी खुला रहने वाला है।

वैसे तो शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। शनिवार और रविवार के अलावा सितंबर महीने में अब शेयर बाजार में अगली छुट्टी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगी। BSE पर इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स में ट्रेडिंग हॉलिडे है।वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

NSE पर भी 14 सितंबर को इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी रहेगी। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशन

Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।

1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी:

  • लक्ष्य: ₹1 करोड़
  • समय अवधि: 15 साल (180 महीने)
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने)

गणित का पूरा हिसाब:

कुल निवेश: ₹36,03,060

अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940

कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

2. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹24,02,160
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹15,81,000
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राह

अगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 – ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

Tax-Saving Mutual Fund: इक्विटी मार्केट में निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है और जो निवेशक कंजर्वेटिव हैं, वे म्यूचु्अल फंड्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी मार्केट का एक्सपोजर रखते हैं। हालांकि इसमें एक खामी ये है कि इसमें जो पैसे लगाते हैं, उस पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता है, सिवाय एक विकल्प में। यहां उसी एक म्यूचुअल फंड ऑप्शन यानी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के बारे में बताया जा रहा है, जिसमें निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और ऐसा भी नहीं है कि टैक्स बेनेफिट्स मिल रहा है, तो रिटर्न म्यूचुअल फंड्स के बाकी विकल्पों की तुलना में फीका रहेगा, बल्कि महंगाई को बीट करते हुए तगड़ा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में जितने भी तरीके हैं टैक्स बचाने के, उसमें सबसे कम लॉक-इन भी इसी का है।

ELSS में निवेश के क्या हैं टैक्स बेनेफिट्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर पुरानी टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.50 लाख तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

एक साल से अधिक होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में से ₹1 लाख से अधिक जितना मुनाफा है, उस पर 10% की दर से तो एक साल से कम वाली होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% की दर से टैक्स देना होगा।

ईएलएसएस की यूनिट्स के रिडेम्प्शन पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं है।

टैक्स बेनेफिट्स के अलावा और क्या है खासियतें

ईएलएसएस इकलौता ऐसा म्यूचुअल फंड प्लान हैं, जिसमें टैक्स बेनेफिट्स मिलता है।

एक और खास बात ये है कि सेक्शन 80सी के तहत जिन-जिन विकल्पों में जितने भी निवेश प्लान हैं, उनमें सबसे कम लॉक-इन पीरियड इसी का है जैसे कि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है तो टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पांच साल है लेकिन ईएलएसएस के मामले में तीन ही साल है।

ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद यूनिट्स बेचने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

इसमें चाहें तो एकमुश्त निवेश कर सकते हैं या एसआईपी (SIP) यानी एक नियमित समय अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार कर सकते हैं।

कैसा है रिटर्न के मामले में

ईएलएसएस में रिटर्न भी तगड़ा मिलता है। सिर्फ तीन साल के ही आंकड़ों को लेकर बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में सालाना 23.84%, आईटीआई ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 19.45%, व्हाइटओक कैपिटल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.63%, एचएसबीसी ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.34% और जेएम ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.27% की रफ्तार से बढ़ा है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

आप डायरेक्ट प्लान में निवेश करते हैं या रेगुलर प्लान में? जानिए किसमें है आपको फायदा

आप म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट स्कीम में इनवेस्ट करते हैं या रेगुलर स्कीम में? शुरुआत में निवेश के दोनों तरीके एक जैसे लगते हैं, लेकिन लंबी अवधि में दोनों के रिटर्न में फर्क आता है। डायरेक्ट स्कीम का रिटर्न रेगुलर स्कीम के रिटर्न से थोड़ा ज्यादा होता है। यही वजह है कि डायरेक्ट स्कीम में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस ने एंफी के डेटा का विश्लेषण किया है। इससे पता चलता है कि डायरेक्ट प्लान में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है।

डायरेक्ट प्लान में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने पाया है कि रिटेल इनवेस्टर्स के म्यूचुअल फंड्स एसेट्स में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह मार्च 2021 में 21.4 फीसदी थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 36.7 फीसदी हो गई। इसका मतलब है कि पांच साल पहले रिटेल म्यूचुअल फंड में होने वाले 5 रुपये के निवेश में से एक से थोड़े ज्यादा का निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए होता था। आज हर तीन में से एक निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए हो रहा है।

हर स्कीम में होता है डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का विकल्प

म्यूचुअल फंड की करीब हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान होते हैं। दोनों प्लान एक ही स्कीम में निवेश करते हैं। सिर्फ निवेश का तरीके में फर्क होता है। निवेशक जब बगैर किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर खुद स्कीम में निवेश करता है तो वह डायरेक्ट प्लान का इस्तेमाल करता है। अगर वह किसी डिस्ट्रिब्यूटर के जरिए निवेश करता है तो वह रेगुलर प्लान के जरिए निवेश करता है।

डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो अपेक्षाकृत कम होता है

दोनों प्लान के बीच सबसे बड़ा फर्क कॉस्ट का है। डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर कमीशन शामिल नहीं होता है। रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर का कमीशन शामिल होता है। इस वजह से एक ही स्कीम के डायरेक्ट और रेगुलर प्लान की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अंतर दिखता है।

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कुल एसेट्स में बढ़ रही डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी 

मार्च 2026 में डायरेक्ट-प्लान का एयूएम 33.28 लाख करोड़ रुपये था। यह इंडस्ट्री के कुल एसेट का 45.1 फीसदी है। यह मार्च 2021 में 43.4 फीसदी था। उधर, कुल एसेट्स में रेगुलर प्लान की हिस्सेदारी घटी है। यह इस दौरान 56.6 फीसदी से घटकर 54.9 फीसदी पर आ गई है। हालांकि, अभी भी यह निवेश का ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। इस तरीके से होने वाले निवेश का एयूएम 40.46 लाख करोड़ रुपये है।

PPF Maturity: 15 साल पूरे होने के बाद भी बंद न करें PPF अकाउंट! मैच्योरिटी पर मिलते हैं 3 बड़े ऑप्शंस, जानें कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा

What to do after PPF Maturity: क्या आपका पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) अकाउंट 15 साल पूरे कर चुका है? अक्सर लोग 15 साल की अवधि खत्म होते ही इसे फिनिश लाइन मानकर पूरा पैसा निकाल लेते हैं। लेकिन ठहरिए! 15 साल बाद भी आपकी सेविंग्स की यह रफ्तार थमने की जरूरत नहीं है। PPF के नियम आपको मैच्योरिटी के बाद ऐसे कई शानदार ऑप्शंस देते हैं, जहां आप बिना कोई रिस्क लिए 7.1% की सालाना गारंटीड ब्याज दर का फायदा उठाना जारी रख सकते हैं।

आइए जानते हैं PPF मैच्योरिटी के बाद आपके पास कौन-कौन से 3 सबसे बड़े विकल्प हैं और आपको इनमें से क्या चुनना चाहिए।

ऑप्शन 1: पूरा पैसा निकालें और अकाउंट बंद करें

अगर आपके पास कोई बड़ा वित्तीय लक्ष्य (जैसे- बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदना) सामने है, तो आप अकाउंट बंद करके पूरा पैसा निकाल सकते हैं। 15 साल का वित्त वर्ष पूरा होने पर आप संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस में क्लोजर फॉर्म भरकर ब्याज सहित पूरा फंड निकाल सकते हैं। PPF ‘EEE’ कैटेगरी में आता है, इसलिए मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होगी।

ऑप्शन 2: बिना पैसा जमा किए अकाउंट चालू रखें

अगर आपको तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है, लेकिन आप भविष्य के लिए नया पैसा भी लॉक नहीं करना चाहते, तो यह ऑप्शन आपके लिए बेस्ट है। आपके मौजूदा जमा पैसों पर सरकार की ओर से तय 7.1% सालाना दर से ब्याज जुड़ता रहेगा। इस विकल्प के तहत आपको हर साल एक बार अपनी जरूरत के मुताबिक पैसा निकालने की आजादी मिलती है।

ऑप्शन 3: नए निवेश के साथ 5-5 साल के लिए बढ़ाएं

अगर आप आगे भी अपनी बचत जारी रखना चाहते हैं, तो अपने अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं।

1 साल का समय: यह विकल्प चुनने के लिए आपको मैच्योरिटी की तारीख से 1 साल के भीतर फॉर्म (Form 4/H) जमा करके एक्सटेंशन का विकल्प चुनना होगा।

कंटिन्यू रखें SIP/निवेश: इसमें आप पहले की तरह हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं और उस पर टैक्स छूट (सेक्शन 80C) और 7.1% का ब्याज पा सकते हैं।

गलती न करें: एक्सटेंशन के इन 2 नियमों में अंतर समझें

निवेशक सबसे बड़ी गलती एक्सटेंशन का चुनाव करने में करते हैं:

पैसा जमा करने के साथ एक्सटेंशन: अगर आपने 1 साल के भीतर ‘With Contribution’ का विकल्प चुन लिया, तो आप नए पैसे जमा करना जारी रख सकते हैं।

बिना पैसे के एक्सटेंशन: अगर आपने बिना योगदान के अकाउंट छोड़ दिया और 1 साल की समय-सीमा निकल गई, तो आप बाद में उसी एक्सटेंशन पीरियड में दोबारा नए पैसे जमा नहीं कर पाएंगे। इसलिए फैसला सोच-समझकर लें।

PPF मैच्योरिटी ऑप्शंस की पूरी डिटेल्स

PPF मैच्योरिटी ऑप्शंस की पूरी डिटेल्स

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपको घर बनाने, मेडिकल इमरजेंसी या अन्य बड़े खर्च के लिए तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है, तो PPF अकाउंट बंद करने के बजाय इसे आगे बढ़ाना ही समझदारी है। अपने अन्य पोर्टफोलियो (EPF, NPS, म्यूचुअल फंड्स) को देखने के बाद ही फैसला लें। PPF 15 साल बाद भी आपके वेल्थ क्रिएशन का सबसे सुरक्षित और टैक्स-फ्री जरिया बना रह सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।