Stock Market Holiday: आज, 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर शेयर बाजार बंद; MCX पर भी नहीं होगी ट्रेडिंग

आज, 20 अक्टूबर को देश विजयादशमी (दशहरा) का त्योहार मना रहा है। अधर्म पर धर्म की जीत के इस पर्व पर देश में बैंक, स्कूल, सरकारी ऑफिस समेत कई अन्य संस्थान बंद हैं। शेयर बाजारों में भी छुट्टी है, यानि कि BSE और NSE पर ट्रेडिंग नहीं होगी। शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। 20 अक्टूबर को कमोडिटीज में ट्रेडिंग के प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) में दशहरा पर सुबह के सेशन में छुट्टी है। लेकिन शाम को 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक का सेशन ओपन है।

BSE में इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स, NDS-RST में ट्रेडिंग हॉलिडे है। लेकिन कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन है।

इसी तरह NSE में भी इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, सेगमेंट्स में मंगलवार को छुट्टी है। कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में छुट्टी है लेकिन शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन है।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार बंद

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार

शनिवार/रविवार को पड़ रहे त्योहार

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LTCG Tax: क्या अमेरिकी शेयरों की कमाई पर मिलेगा ₹1.25 लाख टैक्स छूट का फायदा? जानें क्या कहते हैं नियम

LTCG Tax on Global Stocks: बजट 2027 से पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रुख ने इक्विटी टैक्सेशन पर नई बहस छेड़ दी है। विदेशी निवेशकों की निकासी और भारतीय इक्विटी की प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताओं के बीच निवेशक राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में चुनिंदा इक्विटी निवेशों पर मिलने वाली ₹1.25 लाख सालाना LTCG टैक्स छूट का फायदा विदेशी शेयरों पर भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स कैसे लगता है और कौन से निवेश इसके दायरे में आते हैं।

क्या ग्लोबल शेयरों पर ₹1.25 लाख की सालाना LTCG टैक्स छूट मिलती है?

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 198 के तहत मिलने वाला ₹1.25 लाख का सालाना थ्रेशोल्ड सिर्फ इसलिए विदेशी शेयरों के मुनाफे पर लागू नहीं होता कि वे विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं या लंबे समय तक रखे गए हैं।

इस प्रावधान में केवल वे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स शामिल हैं जो योग्य इक्विटी शेयरों, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स और बिजनेस ट्रस्टों की यूनिट्स से मिलते हैं, बशर्ते वे निर्धारित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तों को पूरा करते हों।

विदेशी शेयर आमतौर पर इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। धारा 197 के तहत उनके लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर बिना ₹1.25 लाख की छूट के 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है, जिसमें लागू सरचार्ज और सेस शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी भारतीय निवासी को अमेरिकी शेयरों से ₹1 लाख का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन होता है, तो यह मुनाफा सिर्फ इसलिए टैक्स-फ्री नहीं हो जाता कि यह ₹1.25 लाख से कम है। किसी अन्य राहत या एडजस्टमेंट को छोड़कर, इस पर सरचार्ज और सेस से पहले ₹12,500 का टैक्स बनेगा।

ग्लोबल शेयरों पर LTCG और STCG की गणना कैसे की जाती है?

विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स की गणना, बिक्री मूल्य में से खरीद लागत और ट्रांसफर से जुड़े योग्य खर्चों को घटाकर की जाती है। निवेशकों को इसमें विदेशी मुद्रा रूपांतरण के नियमों का भी ध्यान रखना होता है।

धारा 2(101) के तहत, विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयर उन एसेट्स की श्रेणी में आते हैं जिन पर मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विशिष्ट प्रतिभूतियों के मुकाबले 24 महीने की होल्डिंग पीरियड की परीक्षा लागू होती है।

24 महीने या उससे कम समय के लिए रखे गए विदेशी शेयरों से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है और निवेशक के लागू इनकम-टर्म स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। वहीं, 24 महीने से अधिक समय तक रखे गए शेयर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दर के दायरे में आते हैं।

किन अन्य निवेशों को इस छूट से बाहर रखा गया है?

पीएनएएम एंड कंपनी एलएलपी (PNAM & Co. LLP) के पार्टनर मोहित गुप्ता के अनुसार, ₹1.25 लाख का थ्रेशोल्ड सभी प्रकार के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के लिए यूनिवर्सल छूट नहीं है। धारा 198 के दायरे से बाहर रहने वाले प्रमुख निवेश ये हैं:

रियल एस्टेट: जमीन या मकान की बिक्री से होने वाला मुनाफा।

सोना और चांदी: भौतिक कीमती धातुओं से होने वाला लाभ।

डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड: टैक्स का तरीका विशिष्ट म्यूचुअल फंड्स के विशेष नियमों समेत लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।

इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: अगर वे विदेशी इक्विटी में निवेश करते हैं और इक्विटी-ओरिएंटेड फंड की वैधानिक परिभाषा पर खरे नहीं उतरते हैं, तो वे इसके पात्र नहीं हैं।

बॉन्ड और डिबेंचर: टैक्स का स्वरूप इंस्ट्रूमेंट और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है।

अन्य गैर-पात्र एसेट्स: वे मुनाफे जो धारा 198 की पात्रता और STT शर्तों को पूरा नहीं करते।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि क्या उनके निवेश धारा 198 के तहत योग्य हैं और क्या निर्धारित STT शर्तें पूरी होती हैं।

  • ₹1.25 लाख की छूट की सीमा पात्र मुनाफे के लिए एक संयुक्त वार्षिक सीमा है, न कि प्रत्येक स्टॉक, ब्रोकर, डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अलग-अलग मिलने वाली छूट।
  • कैपिटल गेन्स की गणना को सही साबित करने के लिए निवेशकों को खरीद और बिक्री की पुष्टि, ब्रोकरेज स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन खर्च और विदेशी मुद्रा रूपांतरण के रिकॉर्ड संभाल कर रखने चाहिए।
  • निवेशक की रेसिडेंशियल स्थिति और फाइलिंग की परिस्थितियों के आधार पर विदेशी निवेशों में विदेशी संपत्ति और विदेशी आय से जुड़े अतिरिक्त खुलासे की जरूरत पड़ सकती है।
  • जिन निवेशकों ने विदेश में टैक्स चुकाया है, उन्हें अलग से यह आकलन करना चाहिए कि क्या वे लागू प्रावधानों और संधि की शर्तों के तहत विदेशी कर क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

मुख्य अंतर यह है कि किसी निवेश को लंबे समय तक होल्ड करने मात्र से उसका मुनाफा स्वचालित रूप से ₹1.25 लाख की छूट के योग्य नहीं हो जाता। अपनी टैक्स देनदारी की गणना करने से पहले निवेशकों को एसेट कैटेगरी और प्रासंगिक वैधानिक शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold ETF FoF में अब नहीं डाल सकेंगे पैसे! आज से बदल गई ये चीजें

Gold Investment: कुछ म्यूचुअल फंड हाउसेज ने अस्थायी तौर पर गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में नए निवेश पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। यह रोक आज 16 अक्टूबर से ही लागू हो चुकी है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, इनवेस्को इंडिया म्यूचुअल फंड, डीएसपी म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और श्रीराम म्यूचुअल फंड जैसे कई फंड हाउसों ने निवेशकों को नोटिस जारी कर के इसकी जानकारी भेज दी है। इस पाबंदी के बाद अब ये इन म्यूचुअल फंड्स के पास गोल्ड ईटीएफ FoF में नया एकमुश्त निवेश नहीं कर सकेंगे, नई एसआईपी नहीं शुरू कर सकेंगे और न ही मौजूदा एसआईपी में टॉप अप कर सकेंगे। कुछ में तो स्विच-इन ट्रांजैक्शन और नए सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगाई गई है।

क्या है इन नोटिसों में

श्रीराम म्यूचुअल फंड ने नोटिस में कहा कि यह रोक सेबी के के निर्देशों के तहत लगाई गई हैं, जिसे AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के जरिए सूचित किया गया है। हालांकि कोई वजह नहीं बताई गई है। फंड हाउस का कहना है कि 16 अक्टूबर से नए एकमुश्त निवेश, नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन और मौजूदा एसआईपी में निवेश की राशि बढ़ाने यानी स्टेप-अप की मंजूरी नहीं होगी।

डीएसपी म्यूचुअल फंड ने 15 अक्टूबर के अपने नोटिस में कहा है कि 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के कट-ऑफ समय के बाद के सभी एप्लीकेशन खारिज हो सकते हैं और पैसा निवेशकों को वापस कर दिया जाएगा।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड समेत कई बड़े भारतीय म्यूचुअल फंडों ने गोल्ड ईडीएफ में बल्क सब्सक्रिप्शन यानी एक साथ भारी निवेश रोकने के लिए नोटिस जारी किए हैं।

दशहरा-दिवाली से ठीक पहले रोक

गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में निवेश पर रोक दशहरा और दिवाली से ठीक पहले लगाई गई हैं, जब आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। गोल्ड ईटीएफ एफओएफ म्यूचुअल फंड की वह स्कीम है, जिसका पैसा गोल्ड ईटीएफ में लगाया जाता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल त्योहारी सीजन के दौरान गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश बढ़ा था, क्योंकि स्टॉक मार्केट से कमजोर रिटर्न मिलने के कारण सोने-चांदी का क्रेज बढ़ गया। वहीं इस साल मांग थोड़ी सुस्त पड़ी और भारत में सोने का आयात अगस्त के $230 करोड़ से घटकर सितंबर में $180 करोड़ रह गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IDBI Bank की 60% हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax, लेकिन डील का इस शेयर पर भी दिखेगा असर

CSB Bank Share Price: केरलम के थ्रिसूर की प्राइवेट लेंडर सीएसबी बैंक के शेयरों पर आज इसलिए नजर रहेगी क्योंकि इसके प्रमोटर ने एक और बैंक पर दांव लगाया है। एक कारोबारी दिन पहले सामने आया कि आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी फेयरफैक्स (Fairfax) खरीदने जा रही है, जोकि सीएसबी बैंक की प्रमोटर है। अभी सीएसबी बैंक के शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को बीएसई पर यह 4.07% की बढ़त के साथ ₹320.95 पर बंद हुआ था। आईडीबीआई बैंक का भी शेयर बीएसई पर 9.07% के उछाल के साथ ₹90.44 पर बंद हुआ।

IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax और क्या है CSB Bank से कनेक्शन

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है। फेयरफैक्स सरकार और एलआईसी से आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में खरीदेगी। इसमें से 30.48% हिस्सेदारी सरकार और 30.24% हिस्सेदारी एलआईसी बेचेगी, जिसे कनाडा इंक खरीदेगी। इसकी पेरेंट कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स है। इस डील के पूरा होने के बाद यह फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी एफडीआई डील होगी।

अब सवाल उठता है कि आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री का सीएसबी बैंक से क्या लेना-देना है। सितंबर तिमाही के आखिरी में एफआईएच मॉरीशस इंवेस्टमेंट्स की इसमें 40% हिस्सेदारी है, जोकि फेयरफैक्स की एक एंटिटी है।

क्या दो बैंक में हो सकती है होल्डिंग?

बैंक ओनरशिप और कंट्रोल को लेकर आरबीआई के नियमों के मुताबिक कोई प्रमोटर एंटिटी एक समय में दो प्रतिस्पर्धी बैंक नहीं चला सकती है। ऐसे में अगर आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए फेयरफैक्स को मंजूरी मिलती है तो इसे या तो सीएसबी बैंक में हिस्सा बेचना होगा या आईडीबीआई बैंक के साथ विलय का रास्ता निकालना होगा यानी कि इंटीग्रेशन प्रोसेस और अधिक कॉम्प्लेक्स हो सकता है। सीएसबी बैंक बात करें तो इसमें फेयरफैक्स इकलौती प्रमोटर एंटिटी है और बाकी 60% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं। सितंबर तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से इसमें म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 13.15% है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले करीब 63 हजार खुदरा निवेशकों की इसमें 12.56% हिस्सेदारी है।

कैसी है सेहत

सीएसबी बैंक ने हाल ही में सितंबर तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया है, जिसमें सामने आया कि बैंक का ग्रास एडवांसेज सालाना 22% और डिपॉजिट्स 18% की रफ्तार से बढ़ा। इस दौरान टर्म डिपॉजिट्स भी 22% बढ़ा तो गोल्ड लोन बिजनेस की ग्रोथ 36% रही। अब एक साल में शेयरों के चाल की बात करें इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 5 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹574.70 पर था, जिससे आठ महीने में यह 48.65% टूटकर 15 सितंबर 2026 को एक साल के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि अभी भी यह ₹197 के आईपीओ प्राइस से ऊपर है।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना गिरा, चांदी एक दिन में ₹5000 फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अक्तूबर को सोने और चांदी दोनों में गिरावट आई। रुपये में मजबूती ने सोने और चांदी पर दबाव बढ़ाया। सोना 1,800 रुपये गिरकर 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने यह बताया।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5000 रुपये गिरकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। रुपये में बुधवार को भी मजबूती दिखी। यह 19 पैसे की मजबूती के साथ 95.17 के लेवल पर आ गया। यह रुपये में मजबूती का लगातार चौथा दिन था। आरबीआई ने फॉरेक्स मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस रोकने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे रुपये में तेजी आई है।

रुपये में मजबूती का पड़ा असर 

ट्रेडर्स ने बताया कि रुपये में मजबूती से सोने का इंपोर्ट सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की घरेलू कीमतों पर पड़ता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों और रुपये में मजबूती से घरेलू बाजार में सोने में गिरावट आई।

सोने में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं

स्मार्टवेल्थ डॉट एआई के फाउंडर पंकज सिंह ने कहा कि भारत में त्योहारी मांग और चीन की लगातार खरीदारी से सोने में ज्यादा गिरावट आने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतने की सलाह है। करेंसी में उतार-चढ़ाव का असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत में सोने के निवेशकों के रिटर्न पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी

आनंदराठी शेयर में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में नरमी दिखी। इसकी कीमत 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे चली गई, जो इस हफ्ते सोने का सबसे कम भाव है। उन्होंने कहा कि करीब बीते दो हफ्तों से सोने की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं। डॉलर 18 महीनों के हाई लेवल से नीचे आया है। इसके बावजूद यह मजबूत बना हुआ है।

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चांदी 59 डॉलर से नीचे आई 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.49 फीसदी गिरकर 4,140 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर में तो एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। यह 58.49 डॉलर प्रति औंस पर था। इससे पहले 27 जुलाई को चांदी का भाव 58.40 डॉलर प्रति औंस था। मार्केट की नजरें फेडरल रिजर्व की मीटिंग पर लगी हैं, जो इस महीने के आखिर में होने वाली है।

HD Fire Protect IPO: एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹213 करोड़, 13 अक्टूबर से ओपनिंग; ग्रे मार्केट में उड़ान भर रहा है शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में HD फायर प्रोटेक्ट का ₹712.31 करोड़ का IPO आज, 13 अक्टूबर से खुलने वाला है। एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से 213.11 करोड़ रुपये जुटाए। प्राइस बैंड के अपर एंड पर 25 इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को 78.64 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए गए। कुल एंकर एलोकेशन में से, 56,52,331 इक्विटी शेयर 9 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को दिए गए। इनमें SBI म्यूचुअल फंड, HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी, कोटक म्यूचुअल फंड, UTI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी, PGIM इंडिया, बंधन म्यूचुअल फंड और मिरे एसेट शामिल हैं।

बजाज लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने कुल 14.95 करोड़ रुपये के 5.51 लाख शेयर सब्सक्राइब किए। अशोका व्हाइटओक, एलियांज ग्लोबल इनवेस्टर्स फंड और अमुंडी फंड्स जैसे दूसरे बड़े इनवेस्टर्स ने भी एंकर बुक में हिस्सा लिया।

HD फायर प्रोटेक्ट IPO 15 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹258-₹271 प्रति शेयर और लॉट साइज 55 शेयर है। कंपनी के IPO में 2.63 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में कंपनी के 2 प्रमोटर- हरीश नरशी धरमशी और कुसुम हरीश धरमशी शेयरों को बिक्री के​ लिए रखेंगे। IPO बंद होने के बाद अलॉटमेंट 16 अक्टूबर को फाइनल होगा। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 21 अक्टूबर को हो सकती है।

क्या करती है HD Fire Protect

HD फायर प्रोटेक्ट आग से सुरक्षा करने वाले इक्विपमेंट और सिस्टम बनाती और सप्लाई करती है। यह आग बुझाने के पानी, फोम और गैस-बेस्ड सॉल्यूशंस की पेशकश करती है। कंपनी 8 प्रोडक्ट कैटेगरीज में कई तरह के प्रोडक्ट बनाती है, जैसे कि स्प्रिंकलर, अलार्म वॉल्व व एक्सेसरीज, डेल्यूज वॉल्व और सिस्टम, फोम इक्विपमेंट व सप्रेशन सिस्टम, मॉनिटर व नोजल, वॉटर स्प्रे नोजल, कस्टम-इंजीनियर्ड सिस्टम, गैस सप्रेशन सिस्टम आदि।

कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल, रेजिडेंशियल और कमर्शियल कामों में होता है, जैसे कि ऑयल व गैस, रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल्स, पावर एंड एनर्जी, हेवी इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर। HD Fire Protect के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं।

Bonfiglioli Transmissions IPO: ₹2534 करोड़ का इश्यू 15 अक्टूबर से, ग्रे मार्केट में अभी से चढ़ा शेयर; चेक करें प्राइस बैंड

IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। HD Fire Protect IPO के लिए एंबिट प्राइवेट लिमिटेड, आनंद राठी एडवाइजर्स लिमिटेड और IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।

ग्रे मार्केट में दौड़ रहा है शेयर

HD Fire Protect की लिस्टिंग अच्छी रहने की उम्मीद है। ग्रे मार्केट में शेयर 31.73 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 114 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 23.87 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेवेन्यू 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 505.12 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 116.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लाल मार्केट में इक्विटी म्यूचु्अल फंडों पर निवेशकों का दांव, SIP में आया रिकॉर्ड निवेश, Gold ETF की बढ़ी चमक

Mutual Fund Data: शेयर मार्केट में मचे तूफान के बीच पिछले महीने सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा। हालांकि डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी से ओवरऑल म्यूचुअल फंड में निवेश निगेटिव रहा। म्यूचुअल फंड बॉडी AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के लेटेस्ट आंकड़ों से यह बात सामने आई है। पिछले महीने सितंबर में इक्विटी फंड्स में निवेश करीब ₹9000 करोड़ बढ़ गया तो डेट फंड्स से निकासी मासिक आधार पर तीन गुना से अधिक बढ़ गई। वहीं सितंबर में SIP में कॉन्ट्रिब्यूशन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया लेकिन खातों की संख्या में कमी आई।

Equity Funds में सबसे अधिक क्रेज दिखा SmallCap Funds का

अगस्त महीने में इक्विटी फंडों में निवेश लगभग 19% बढ़ा था और फिर सितंबर महीने में नेट इनफ्लो में और बढ़ोतरी हुई। मासिक आधार पर ₹8,977.93 करोड़ की बढ़ोतरी मासिक निवेश में बड़ी तेजी है। AMFI के आंकड़ों के हिसाब से पिछले महीने इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹38,306.55 करोड़ का निवेश आया जोकि अगस्त महीने में ₹29,328.62 करोड़ के निवेश की तुलना में करीब 31% अधिक रहा।

कैटेगरीवाइज बात करें तो सबसे अधिक ₹9,038.57 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप फंडों में आया। इसके बाद मिड-कैप फंडों में ₹7,834.84 करोड़ का निवेश हुआ। इन दोनों में कुल ₹16,873.41 करोड़ का निवेश आया, जो सभी इक्विटी फंडों में हुए कुल निवेश का लगभग 44% है।

सितंबर महीने में फ्लेक्सी-कैप फंडों में भी निवेश बढ़कर ₹6,701.80 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹5,059.42 करोड़ था।

लॉर्ज-कैप फंड के भी निवेशक सितंबर में लौटे और लगातार दो महीने तक शुद्ध निकासी के बाद सितंबर में निकासी से अधिक निवेश किया। लॉर्ज कैप फंडों में पिछले महीने ₹859.47 करोड़ का शुद्ध निवेश आया।

इक्विटी इनफ्लो में उछाल के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का AUM सितंबर में घटकर ₹37.54 लाख करोड़ रह गई। अगस्त में यह ₹39.21 लाख करोड़ थी यानी इसमें लगभग 4.3% की गिरावट आई।

डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी

सितंबर में डेट म्यूचुअल फंडों में सबसे बड़ा बदलाव दिखा। इन फंडों से शुद्ध निकासी बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ हो गई, जबकि अगस्त में यह ₹8,127 करोड़ थी।

सबसे अधिक निकासी लिक्विड फंडों से हुई। सितंबर में इनसे ₹95,743.20 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹19,934.29 करोड़ का निवेश आया था। सितंबर में मनी मार्केट फंडों से भी ₹50,846.21 करोड़ की निकासी हुई, जबकि अगस्त में इन फंडों में ₹11,734.71 करोड़ का निवेश आया था। इन दोनों फंडों से कुल मिलाकर से लगभग ₹1.47 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई और इन्होंने डेट फंडों पर ओवरऑल दबाव डाला।

डेट फंड्स का एयूएम मासिक आधार पर अगस्त में ₹19.33 लाख करोड़ से 8.8% फिसलकर सितंबर में ₹17.64 लाख करोड़ पर आ गया।

हाइब्रिड फंड्स हुआ निगेटिव, ईटीएफ इनफ्लो में उछाल

पिछले महीने सितंबर में हाइब्रिड म्यूचुअल फंडों में भी काफी बदलाव देखने को मिला। पिछले महीने इससे ₹456.68 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई, जबकि अगस्त में इसमें ₹10,045.34 करोड़ का शुद्ध निवेश आया था। इसकी बड़ी वजह ऑर्बिट्रेज फंड्स रहे, जिनसे सितंबर महीने में ₹3,956.38 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹3,789.02 करोड़ का निवेश आया था।

पिछले महीने बैलेंस्ड-एडवांटेज फंडों से भी ₹912.43 करोड़ की निकासी हुई। वहीं मल्टी-एसेट एलोकेशन फंडों में निवेश का सिलसिला जारी रहा और इनमें ₹3,666.98 करोड़ आए।

पिछले महीने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में ₹15,501.40 करोड़ का निवेश आया, जो अगस्त के ₹10,160.87 करोड़ से लगभग 53% अधिक है।

सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश लगभग 71% बढ़कर ₹4,450.61 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹2,596.70 करोड़ था तो सिल्वर ETF में भी इस दौरान निवेश भी ₹9,959.96 करोड़ से बढ़कर ₹1,974.32 करोड़ हो गया।

इंडेक्स फंडों की बात करें तो अगस्त महीने में इसमें ₹787.49 करोड़ का निवेश आया था, जबति पिछले महीने इससे ₹3,614.03 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई थी।

विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले ओवरसीज फंडों से निकासी जारी रही। सितंबर में इनसे ₹159.18 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में निकासी ₹72.19 करोड़ थी।

सितंबर महीने में लाइफ साइकिल फंडों में ₹143.75 करोड़ और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹373.90 करोड़ का निवेश आया।

SIP में निवेश पहुंचा रिकॉर्ड हाई पर

सितंबर में मासिक SIP कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़कर ₹32,490 करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। अगस्त में यह ₹32,297 करोड़ था। इस बढ़ोतरी के साथ सितंबर 2026 में एसआईपी का एयूएम ₹17.86 लाख करोड़ हो गया। हालांकि एक खास बात ये है कि सितंबर में लगभग 63 लाख नए एसआईपी रजिस्टर हुए, जबकि 73 लाख एसआईपी या तो मेच्योर हो गए या उन्हें बंद कर दिया गया। सितंबर की शुरुआत से लेकर आखिरी तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 10.75 करोड़ से 10.06 करोड़ पर आ गई।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms IPO: ₹1065-₹1119 रह सकता है प्राइस बैंड, 21 अक्टूबर से ओपनिंग; 10 पॉइंट में जानें अहम डिटेल

रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के IPO का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। और हो भी क्यों न, लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। Jio Platforms IPO पर ताजा अपडेट इसके प्राइस बैंड को लेकर है। यह कितना रहने वाला है, इस बारे में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं जियो IPO को लेकर अब तक सामने आईं खास बातें…

संभावित प्राइस बैंड और साइज

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि Jio Platforms Ltd. के प्रस्तावित IPO के लिए प्राइस बैंड 1065-1119 रुपये प्रति शेयर रहने वाला है। ब्लूमबर्ग की कैलकुलेशन के अनुसार, प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर Jio के IPO से लगभग 30200 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

वैल्यूएशन

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 10.3 लाख करोड़ रुपये तक की मार्केट वैल्यू का लक्ष्य रख रही है। लेकिन बातचीत अभी जारी है और प्राइस बैंड, वैल्यूएशन और टाइमिंग सहित अन्य डिटेल अभी भी बदल सकती हैं। IPO का ड्राफ्ट कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास इस साल जून में जमा किया गया था। मंजूरी अगस्त में मिली।

IPO कब खुलेगा और कब लिस्ट होगा

यह पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुल सकता है। एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लिस्ट हो सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

Jio IPO में कितने नए शेयर

19 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक के दौरान चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms को अपने प्रस्तावित IPO के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इश्यू में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की योजना है।

बुक रनिंग लीड मैनेजर

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में Jio Platforms ने घोषणा की कि उसने IPO के लिए 19 इनवेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। इस ऑफर के लिए BRLM हैं- कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, CLSA इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज (पहले IIFL सिक्योरिटीज), जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, JM फाइनेंशियल, JP मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 360 ONE WAM।

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कैसे बन सकता है देश का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब जियो का IPO 30000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहने वाला है।

रिजर्व हिस्से पर क्या अपडेट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पता चला है कि IPO में जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरीज के स्थायी कर्मचारियों के लिए शेयर रिजर्व होंगे। इसके बाद नेट इश्यू का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा। QIB के हिस्से में से 60 प्रतिशत तक हिस्सा एंकर निवेशकों को अलॉट किया जा सकता है। इसमें से कुछ हिस्सा विशेष रूप से म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए रिजर्व होगा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय रोड शो कंप्लीट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में अपने अंतरराष्ट्रीय रोडशो पूरे कर लिए हैं। अब वह 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में सेबी के पास IPO का फाइनल ड्राफ्ट जमा कर सकती है। कंपनी भारत में भी IPO रोडशो आयोजित कर सकती है। IPO के मामले में रोड शो का मतलब है- संबंधित कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग और रिप्रेजेंटेशंस। मीटिंग्स में IPO ला रही कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों से बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके IPO में निवेश करना क्यों उचित है।

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जियो प्लेटफॉर्म्स की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.47 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.1 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 30,000 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 18.8 प्रतिशत बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में Jio के ग्राहकों की संख्या 52.44 करोड़ रही। जियो 5G के सब्सक्राइबर्स की संख्या 26.8 करोड़ है।

Jio Platforms में किसके पास कितनी हिस्सेदारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा के पास 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं गूगल की 7.73 प्रतिशत, सऊदी अरेबिया वेल्थ फंड्स की 2.31 प्रतिशत, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स की 2.31 प्रतिशत, सिल्वर लेक की 1.88 प्रतिशत, मुबादला की 1.85 प्रतिशत, जीए सिंगापुर की 1.34 प्रतिशत, अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 1.16 प्रतिशत और टीपीजी कैपिटल की 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

Disclaimer:मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank Share Price: FIIs ने बेची होल्डिंग तो शेयर धड़ाम, ब्रोकरेजेज का ये है रुझान

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज बिकवाली का भारी दबाव दिखी और इसकी वजह इसका सितंबर तिमाही का शेयरहोल्डिंग पैटर्न है। इसमें सामने आया कि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने इसमें अपनी हिस्सेदारी 2.43% कम की और अब जून तिमाही के आखिरी में 41.82% से घटकर सितंबर तिमाही के आखिरी में 39.39% (FIIs Holding in HDFC Bank) तक आ गई। इसने बैंक के शेयरों पर दबाव बढ़ाया और फिलहाल बीएसई पर यह 1.65% की गिरावट के साथ ₹692.20 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.79% टूटकर ₹691.20 तक आ गया था।

FIIs vs DII in HDFC Bank: किसकी कितनी होल्डिंग?

सितंबर 2026 तिमाही के आखिरी में एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेशकों यानी FIIs की हिस्सेदारी 2.43 पर्सेंटेज प्वाइंट्स कम होकर 39.39% पर आ गई। वहीं दूसरी तरफ इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की होल्डिंग 1.69 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़कर 43.44% हो गई। इसमें म्यूचुअल फंड्स की 31.88% हिस्सेदारी है तो ₹2 लाख तक के निवेश वाले यानी खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 10.87% है।

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सीईओ के तौर पर अनूप बागची की नियुक्ति के असर का मार्केट आकलन कर रहा है। अधिकतर ब्रोकरेज फर्म ने उनकी नियुक्ति का सपोर्ट किया है लेकिन कुछ एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि उन्हें काम संभालने में समय लगेगा।

नुवामा के बीएफएसआई एनालिस्ट हेड आनंद दामा का कहना है कि अनूप को पहले अपनी टीम फिर से बनाने की जरूरत पड़ेगी और फिर एक लंबे समय में वह नए आइडिया ला सकते हैं और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि अनूप बागची की नियुक्ति से एचडीएफसी बैंक की लीडरशिप से जुड़ी एक बड़ी चिंता दूर हो गई और अनूप बागची का अनुभव एक बड़ी ताकत साबित होगी।

अनूप बागची अभी ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के सीईओ हैं और देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ICICI Bank में सीनियर पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने रिटेल और होलसेल बैंकिंग बिजनेस संभाला था। उन्होंने छह साल तक ICICI सिक्योरिटीज को भी लीड किया। उनकी उम्र 56 साल है तो वह लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक की कमान संभाल सकते हैं क्योंकि RBI के नियमों के मुताबिक बैंक सीईओ 70 साल की उम्र तक बने रह सकते हैं।

इंडिपेंडेंट एनालिस्ट नीरज दीवान का कहना है कि प्रोविजनल डेटा और एचडीएफसी ग्रुप के बाहर के किसी शख्स को सीईओ की कमान बैंक के लिए पॉजिटिव है लेकिन निवेशक अभी सतर्कता बरत रहे हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर कुछ और तिमाहियों तक दबाव बना रह सकता है। बैंक ने शनिवार को सितंबर के आखिरी तक अपने डिपॉजिट में लगभग 18.8% और ग्रॉस एडवांस में 16.3% की बढ़ोतरी की जानकारी दी थी।

शेयरों पर क्यों आया दबाव

साल 2023 में अपनी पैरेंट कंपनी एचडीएफसी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक के मार्जिन और ग्रोथ पर असर पड़ा। इसका असर बैंक के शेयरों पर पड़ा और अपने पियर्स के मुकाबले यह कमजोर हुआ। गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण मार्च में चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने भी सेंटीमेंट पर बुरा असर डाला। हालांकि एक स्वतंत्र जांच में उनके दावों की पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन शेयरों पर दबाव बना रहा। प्राइस-टू-एडजस्टेड बुक वैल्यू के आधार पर यह स्टॉक अब आईसीआईसीआई बैंक के मुकाबले 25% डिस्काउंट पर है और साल 2025 में अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद से इसमें लगभग 31% की गिरावट आई है।

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