Krishna Janmotsav 2026: आज आधी रात में पधारेंगे मुरलीधर श्याम, जानें आज निशिता काल पूजा विधि, महत्व और पारण का सही समय

Krishna Janmotsav 2026: आज भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और आज के दिन ही द्वापर युग में देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में भक्त वत्सल मनमोहन श्याम अपने लाखों करोड़ों भक्तों के बीच जन्म लेते हैं। निशिता काल में जब यह पल आता है, तब शंख और घंटों की आवाज और कृष्ण कन्हैया लाल की जय के साथ भगवान के अवतरण का उत्सव मनाया जाता है।

इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का 5253वीं जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। बहुत से भक्त आज के दिन व्रत करते हैं, घर और मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म और लीलाओं की झाकियां सजाते हैं। आइए कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते हैं तिथि, समय, महत्व, पूजा विधि, नियम, व्रत के प्रकार और पारण का समय।

जन्माष्टमी 2026: मध्यरात्रि निशिता काल पूजा विधि

  • भगवान कृष्ण की मूर्ति को धोकर साफ चौकी पर एक नया या साफ कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद फलों, मोर पंख, तुलसी के पत्तों और पालकी को सजाएं।
  • भगवान कृष्ण की लड्डू गोपाल मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल और आखिर में गंगाजल की कुछ बूंदें डालें।
  • मूर्ति को साफ कपड़े से सुखाएं, इसके बाद नए कपड़े पहनाएं, आभूषण लगाएं, मुकुट में मोर पंख और हाथ में बांसुरी दें। चंदन और रोली का तिलक और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पंजीरी, तुलसी पत्ते, फल-फूल, माखन-मिश्री और पंचमेवा का भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान कृष्ण को पालने में बिठाएं और ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ की गीत गाते हुए धीरे से झुलाएं।
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा मंत्र ‘ऊं’ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। संभव हो तो कृष्ण अष्टकम का जाप करें।
  • भगवान कृष्ण की जन्म घोषणा करने के लिए शंख बजाएं फिर घी के दीये और कपूर से आरती करें। प्रसाद और चरणामृत सभी में बांटें।
  • पारण व्रत से जुड़े नियम

कई भक्त जाने-अनजाने में आधी रात की आरती के फौरन बाद ही व्रत तोड़ देते हैं। जबकि जन्माष्टमी व्रत का पारणा अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों के समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।

अष्टमी तिथि 5 सितंबर को सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसलिए सही मायने में पारण शनिवार की सुबह ही करनी चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, चीनी, तिलक के लिए रोली और चंदन पाउडर, अक्षत (साबुत चावल) मौली या कलावा, अभिषेक करने के लिए तांबे का लोटा, शंख, आरती के लिए भीमसेनी कपूर और सूती बत्तियां, भोग के लिए पंचमेवा, माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी आरती की थाली, घी का दीया, अगरबत्ती, तुलसी पत्ता, मोर पंख, बांसुरी, मूर्ति के लिए वस्त्र।

Krishna Janmashtami 2026: क्यों आधी रात को हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म, जानें उनके जन्म समय के पीछे छिपा पूरा रहस्य

Janmashtami 2026: ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करें यशोदा मैया…’, इन हिंदी गानों के साथ मनाए जन्माष्टमी

Janmashtami 2026: पूरे देश में जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई जा रही है। इस खास मौके पर देशभर के मंदिरों को और घरों को झाकी के साथ सजाया जाता है। दही हांडी आयोजित होती है। इस दौरान बॉलीवुड के कई मशहूर सुनने को मिलते हैं। ऐसे में हम आपके लिए बॉलीवुड गानों की लिस्ट लाए हैं, जो भगवान कृष्ण के इस त्योहार का मजा बढ़ा देंगे।

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया…

फिल्म ‘अमर प्रेम’ का गाना ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया..’ दिल को छूता है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया है, आनंद बक्शी से इसके बोल लिखे हैं। जबकि आर.डी. बर्मन का संगीत है। जन्माष्टमी के खास मौके पर सोशल मीडिया पर भी ये खूब ट्रेंड होता है।

गो गो गोविंदा

जबरदस्त बीट्स और जोश भरी कोरियोग्राफ़ी वाला यह सुपरहिट गाना, जिसमें प्रभु देवा और सोनाक्षी सिन्हा हैं, पारंपरिक दही-हंडी सेलिब्रेशन के कॉम्पिटिशन वाले जोश, खुशी और असली उत्साह को बखूबी दिखाता है।

राधा कैसे न जले

ए.आर. रहमान का ये गाना यह सदाबहार गाना राधा और भगवान कृष्ण के बीच की चंचल, रोमांटिक नोक-झोंक और हल्की-फुल्की जलन को बहुत खूबसूरती से दिखाता है, जो इसे किसी भी त्योहार की शाम के लिए एक ज़रूरी और शानदार गाना बनाता है।

‘वो किसना है’

बांसुरी की दिल को छू लेने वाली धुन और सुखविंदर सिंह की दमदार आवाज़ से सजी यह शानदार गाना भगवान कृष्ण के बारे में बताता है। यह आपकी प्लेलिस्ट में एक गहरा और उत्साह बढ़ाने वाला आध्यात्मिक एहसास जोड़ता है।

राधे-राधे

तेज लोक संगीत की धुनों और जोश भरे आधुनिक रिदम वाला यह एनर्जेटिक गाना मथुरा और गोकुल की जीवंत गलियों से प्रेरित है। यह गाना घर पर होने वाले जश्न में हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर देगा।

मच गया शोर

अमिताभ बच्चन अभिनीत यह सदाबहार रेट्रो गाना, त्योहारों के दौरान होने वाले मेल-जोल, खुशी-खुशी गाए जाने वाले गीतों और सड़कों पर होने वाले उत्सव के उस जादुई माहौल को दर्शाता है, जिसने पीढ़ियों से भारतीय त्योहारों की पहचान बनाई है।

मैया यशोदा

यह प्यारा ग्रुप डांस गाना मैया यशोदा से नटखट शिकायतों के ज़रिए छोटे कान्हा की शरारतों भरी बचपन की हरकतों को खूबसूरती से दिखाता है। यह आपके त्योहार के माहौल में अपनापन, परिवार का जुड़ाव और भारतीय संस्कृति की क्लासिक खूबसूरती लाता है।

चांदी की दाल पर

90 के दशक के जोशीले डांस म्यूज़िक वाले इस मज़ेदार और चंचल गाने से प्लेलिस्ट में एक हल्की-फुल्की और शरारती रौनक आ जाती है। यह गाना कृष्ण के मशहूर शरारती अंदाज़ को बॉलीवुड के मज़ेदार और एंटरटेनिंग रूप में पेश करता है।

कान्हा सो जा ज़रा

ज़बरदस्त एनर्जी वाले डांस गानों के बीच एक सुकून देने वाला बदलाव पेश करने वाला यह शानदार और बेहतरीन ढंग से रचा गया लोरी-नुमा गीत, एक शांत और सुकून भरा माहौल बनाता है। यह देर रात मंदिर की प्रार्थनाओं और आधी रात की दिव्य आरती की रस्मों के लिए एकदम सही है।

जन्माष्टमी पर वृंदावन जाने से पहले पढ़ें यह गाइड! बांके बिहारी मंगला आरती का समय, रूट डायवर्जन और पार्किंग नियम

जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, ऐसे में शहर में जाम और भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने कई रास्तों पर वाहनों की एंट्री रोक दी है। 3 सितंबर की सुबह से 5 सितंबर की सुबह तक मथुरा और वृंदावन के कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन और नो-एंट्री लागू रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। इसलिए सफर शुरू करने से पहले रूट और पार्किंग की जानकारी समझ लेना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।

vrinda

मंगला आरती का समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि रात 1:45 बजे होगी। आरती के लिए सिर्फ 600 पासधारक भक्तों को मंदिर में प्रवेश मिलेगा। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंगला आरती का लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। इससे मंदिर में एंट्री न मिलने वाले भक्त भी घर बैठे इस खास आरती के दर्शन कर सकेंगे। भीड़ को कंट्रोल करने के साथ ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं तक आरती का दर्शन पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ये रूट बंद

जन्माष्टमी के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ को देखते हुए कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी। भूतेश्वर तिराहा, मसानी चौराहा, डीग गेट, गोकरण तिराहा, चौक बाजार, भरतपुर गेट, कृष्णापुरी, स्टेट बैंक चौराहा और महाविद्या कॉलोनी जैसे रास्तों से वाहनों को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। मसानी चौराहा से जन्मभूमि और चौक बाजार की तरफ भी वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। डीग गेट से जन्मभूमि की ओर भी वाहन नहीं जा सकेंगे। वहीं गोवर्धन चौराहा और मंडी चौराहा से भूतेश्वर की तरफ भारी वाहन, रोडवेज बस और ट्रैक्टर नहीं जा पाएंगे।

मथुरा आने वालों के लिए पार्किंग व्यवस्था

शहर में वाहन लेकर जाने की बजाय श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर गाड़ी खड़ी करनी होगी। यमुना एक्सप्रेसवे और वृंदावन की तरफ से आने वालों के लिए पीएमबी पॉलीटेक्निक स्कूल, जयसिंहपुरा, अनुज चौधरी के खाली प्लॉट और आरके ज्वैलर्स के सामने पार्किंग की व्यवस्था की गई है। गोकुल रेस्टोरेंट और हाईवे की तरफ से आने वाले वाहनों को आरएसएस संस्था के सामने, आईएसबीटी बस अड्डे और रामलीला मैदान में पार्क कराया जाएगा। वहीं धौलीप्याऊ की तरफ से आने वाले श्रद्धालु रेलवे ग्राउंड में वाहन खड़ा कर सकेंगे।

वृंदावन में इन रास्तों पर नो-एंट्री

जन्माष्टमी पर वृंदावन में भी ट्रैफिक रेगुलेशन काफी सख्त रहेगी। छटीकरा, रुक्मिणी विहार, पानीगांव, वृंदावन कट और सौ-शय्या जैसे रास्तों से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी। छटीकरा-वृंदावन रोड पर मल्टीलेवल पार्किंग से आगे वाहन नहीं जा सकेंगे। इसी तरह मथुरा-वृंदावन मार्ग पर सौ-शय्या से आगे भारी और चार पहिया वाहनों को रोक दिया जाएगा। वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आईटीआई, दारुक, मंडी, पवनहंस हेलीपैड, एमवीडीए, पशुपैठ, पैराग्लाइडिंग और शिवा ढाबा समेत कई जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

यात्रा से पहले रखें ये सावधानी

जन्माष्टमी में भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह से कई जगहों पर पार्किंग से मंदिर तक पैदल जाना पड़ सकता है। इसलिए बुजुर्गों और बच्चों के साथ जर्नी कर रहे हैं तो पहले से इसकी तैयारी रखें। अपना फोन, पर्स, चश्मा और जरूरी सामान सेफ रखें, क्योंकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामान संभालकर रखना जरूरी है।

इससे आप जाम और रास्ता बंद होने जैसी परेशानी से काफी हद तक बच सकते हैं। इस तरह आप जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन की ट्रिप को आसान और परेशानी-फ्री बना सकते हैं।

Janmashtami Krishna photo Vastu: जन्माष्टमी पर वास्तु अनुसार घर में लगाएं श्रीकृष्ण की तस्वीर, गलत दिश में लगी तस्वीर ला सकती है कंगाली

Janmashtami Krishna photo Vastu: हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। भगवान विष्णु के सभी अवतारों में श्रीकृष्ण अवतार सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। भगवान कृष्ण के भक्त भारत ही नहीं दुनिया के कोने-कोने में हैं। इतना ही नहीं, कान्हा के मंदिर भी दुनिया के कई देशों में हैं।

हमारे देश में श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों से लेकर घरों में तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रौनक रहती है। लोग उपवास करते हैं, घरों में कृष्ण जन्म और बाल कृष्ण की लीलाओं की झांकियां सजाते हैं। घरों को रोशनी और भगवान कृष्ण की तस्वीरों से सुशोभित करते हैं। माना जाता है कि जन्माष्टमी के मौर पर भगवान कृष्ण की तस्वीर घर में लगाने से सकारात्मकता बढ़ती है, समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। लेकिन भगवान कृष्ण की तस्वीर को सही दिशा में लगाना भी बहुत जरूरी है, अन्यथा यह कंगाली का कारण भी बन सकती है। इसलिए तस्वीर घर में लाने पहले, वास्तु अनुसार उसे लगाने के नियम जानना जरूरी होता है।

कैसी तस्वीर लगानी चाहिए?

वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए- धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है।

संतान प्राप्ति के लिए- अगर आप संतान की प्राप्ति चाहते हैं, तो जन्माष्टमी के दिन घर में बाल गोपाल की तस्वीर लगाएं।

धन-धान्य में वृद्धि के लिए- समृद्धि के लिए भगवान श्रीकृष्ण की गायों के साथ वाली तस्वीर लगाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसी तस्वीर लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका शुभ प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है।

सुख-शांति के लिए- जो लोग घर में सुख, शांति और सकारात्मक संचार चाहते हैं, तो वे लोग घर में श्रीकृष्ण की मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं। मान्यता है कि प्रभु के इस स्वरूप की तस्वीर लगाने से व्यक्ति को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

तस्वीर लगाने की सही और शुभ दिशा

वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को सबसे सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि इस दिशा में ईश्वर और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार भी तस्वीर लगाने के लिए उपयुक्त रहती है। तस्वीर को दीवार पर इतनी ऊंचाई पर लगाएं कि वह देखने वाले की आंखों की सीध में रहे, इसे बहुत ज्यादा ऊपर या बिल्कुल नीचे फर्श के पास न टांगें।

बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर का नियम

बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा की दीवार सबसे बेहतर होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि तस्वीर बिल्कुल बिस्तर के सिरहाने या पैरों की तरफ न लगी हो। साथ ही, दर्पण के ठीक सामने तस्वीर लगाने से बचना चाहिए।

इस दिशा में भूलकर भी न लगाएं तस्वीर

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए इस दिशा में भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है।

यहां भी श्रीकृष्ण की तस्वीर लागने से बचें

इसके अलावा, शौचालय, रसोई के ठीक ऊपर या बहुत निचले स्थानों पर भी ईश्वर का चित्र न लगाएं।

Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर शुभ माना जाता है इन 5 चीजों को घर लाना, भगवान कृष्ण की कृपा से भर जाता है घर

Janmashtami 2026: 4 सितंबर को जन्म लेंगे लड्डू गोपाल, जानें देश के अलग-अलग हिस्सों में क्या है जन्माष्टमी का पर्व मनाने का तरीका

Janmashtami 2026: हजारों साल पहले द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के भक्त श्रद्ध और उल्लास से उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन देश ही नहीं पूरी दुनिया के कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट, पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। बहुत से श्रद्धालु इस दिन उपवास करते हैं और अपने घरों में कृष्ण लीला की झांकियां सजाते हैं और मध्य रात्रि श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। वैसे इस पर्व को देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाने की अलग-अलग परंपरा है। आइए जानें इसके बारे में

मध्यरात्रि पूजा कृष्ण के जन्म का प्रतीक

जन्माष्टमी के त्योहार का सबसे अहम हिस्सा है मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था, जब उनके माता-पिता, देवकी और वासुदेव, राजा कंस द्वारा कैद किए गए थे। इसलिए भक्त दिन में व्रत रखते हैं और उनकेा जन्मोत्सव मनाते हैं। यह उत्सव मथुरा और वृंदावन में खास तौर पर बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

कृष्ण के चरण चिह्न से सजाते हैं घर

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लोग अपने घरों को साफ करते हैं और सजाते हैं। पूजा के कमरे की ओर जाने वाले दरवाजे से अक्सर चावल के आटे से छोटे पैरों के निशान बनाते हैं। छोटे पैर बाल कृष्ण के घर में आने को दिखाते हैं। यह एक ऐसी परंपरा है, जिससे भक्त प्रभु के बाल स्वरूप की लीला का आनंद लेते हैं।

महाराष्ट्र में होती दही हांडी प्रतियोगिता

कृष्ण का मक्खन और दही के लिए प्रेम सभी जानते हैं। भारत के महाराष्ट्र राज्य में जन्माष्टमी के मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। दही हांडी में गोविंदा नाम के नौजवानों के ग्रुप ह्यूमन पिरामिड बनाते हैं और जमीन से बहुत ऊपर लटके एक मटके तक पहुंचकर उसे तोड़ते हैं। मटके में पारंपरिक रूप से दही, मक्खन, दूध और दूसरी चीजें होती हैं।

केरल में मटकी फोड़ने की है परंपरा

केरल में जन्माष्टमी पर्व पर मटकी फोड़ने की परंपरा है। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान, स्थानीय लोग उरियाडी मनाते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग प्रसाद से भरे मिट्टी के मटके को जमीन से ऊपर लटकाकर फोड़ने की कोशिश करते हैं। केरल में जन्माष्टमी पर्व को अष्टमी रोहिणी के नाम से जाना जाता है।

तमिलनाडु में कृष्ण का स्वागत छोटे पैरों और त्योहार के खाने से होता है

तमिलनाडु में, कृष्ण जन्माष्टमी को गोकुलाष्टमी या कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है। इसमें घरों को कोलम से सजाया जाता है। यहां भी लोग अपने घरों में बाहर से अंदर आते हुए बाल कृष्ण के छोटे पैरों के निशान बना सकते हैं। साथ ही, इस दिन घरों में श्री कृष्ण के लिए पारंपरिक प्रसाद और भोग तैयार किया जता है।

जन्माष्टमी में छप्पन भोग का प्रसाद

भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन का पर्व 56 भोग के बिना अधूरा है। छप्पन भोग, जिसका मतलब है 56 खाने की चीज़ें, कई परंपराओं में कृष्ण को चढ़ाई जाती हैं। इसमें मिठाई, नमकीन, फल और डेयरी से बनी चीजें शामिल हो सकती हैं। मक्खन स्वाभाविक रूप से एक खास जगह रखता है क्योंकि कृष्ण को माखन से बहुत प्यार है।

कृष्ण भक्ति के केंद्र मथुरा और वृंदावन

कुछ ही जगहें कृष्ण जन्माष्टमी से इतनी करीब से जुड़ी हैं जितनी मथुरा और वृंदावन। पारंपरिक रूप से मथुरा को कृष्ण का जन्मस्थान माना जाता है, जबकि वृंदावन में कृष्ण की बाल लीलाओं और युवावस्था की ढेरों कहानियां मौजूद हैं। जन्माष्टमी के दौरान, ब्रज क्षेत्र के मंदिरों और सड़कों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है।

कृष्ण की कहानियों को मंच पर लाती है रास लीला

जन्माष्टमी सिर्फ मंदिर के रीति-रिवाजों के बारे में नहीं है। यह कहानी सुनाने का भी त्योहार है। रास लीला और कृष्ण लीला के प्रदर्शन में कृष्ण के जीवन के किस्से फिर से दिखाने के लिए संगीत, नृत्य, संवाद और शानदार वेशभूषा का इस्तेमाल किया जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन क्षेत्र से जुड़ी है, जबकि कृष्ण-केंद्रित प्रदर्शन परंपराएं मणिपुर और असम जैसी जगहों पर भी महत्वपूर्ण हैं।

अरनमुला में बड़े शाकाहारी भोज के साथ जन्माष्टमी मनाई जाती है

केरल के अरनमुला में, जन्माष्टमी अरनमुला पार्थसारथी मंदिर में अष्टमी रोहिणी वल्ला सद्या से जुड़ी है। सांपों वाली नावें, जिन्हें पल्लियोडम कहा जाता है, मंदिर पहुंचती हैं, जहां नाविक केले के पत्तों पर परोसे गए बड़े शाकाहारी भोजन में शामिल होने से पहले रस्मों में हिस्सा लेते हैं। नाविक वांची पाट्टू गाते हैं, और सामूहिक भोजन दिन के बड़े उत्सव का हिस्सा बन जाता है।

एक त्योहार, मनाने के कई तरीके

जन्माष्टमी का पर्व मनाने का पूरे भारत में एक कारण है। लेकिन यह देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है। कृष्ण का जन्मदिन लोगों को अलग-अलग तरीकों से एक साथ लाता रहता है। परंपराएं राज्य दर राज्य बदल सकती हैं, लेकिन कृष्ण का स्वागत करने की खुशी उन सभी के केंद्र में रहती है।

कृष्ण जन्मोत्सव का अनूठा संयोग! इन खास नक्षत्र में करें कान्हा की पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना

Share Market Holiday: 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर शेयर बाजार बंद या होगी ट्रेडिंग, क्या कहती है छुट्टियों की लिस्ट

इस साल देश में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार, 4 सितंबर की है। इस दिन पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाएगा। इस त्योहार के चलते कई जगहों पर छुट्टी रहेगी। लेकिन शेयर बाजार में इस मौके पर कारोबार बंद नहीं होगा। BSE और NSE पर जन्माष्टमी के दिन भी बाकी कारोबारी दिनों की तरह ही शेयरों की ट्रेडिंग होगी। इसके अलावा कमोडिटीज में ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) भी खुला रहने वाला है।

वैसे तो शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। शनिवार और रविवार के अलावा सितंबर महीने में अब शेयर बाजार में अगली छुट्टी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगी। BSE पर इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स में ट्रेडिंग हॉलिडे है।वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

NSE पर भी 14 सितंबर को इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी रहेगी। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

TBZ Share Price: ज्वेलरी कंपनी में खरीद का तूफान, 20% बढ़त के साथ अपर सर्किट; प्रमोटर बेचेंगे 74% हिस्सा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Putrada Ekadashi 2026: आज सावन पुत्रदा एकादशी पर 3 बेहद शुभ योगों का दुर्लभ संयोग, 5 राशियों के जातक धन और करियर में पाएंगे बड़ा लाभ

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म पुत्रदा एकादशी का विशेष स्थान है। यह व्रत साल में दो बार सावन और पौष माह में किया जाता है। आज सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत है। यह व्रत सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान के सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो दंपत्ति निसंतान हैं या जिन्हें संतान सुख प्राप्त करने में बाधाएं आ रही हैं, वे यदि इस व्रत को विधि-विधान से रखते हैं, तो उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार पुत्रदा एकादशी पर सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सर्वार्थ सिद्धि योग को कार्यों में सफलता और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

इन 5 राशियों के लिए शुभ रह सकता है समय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर बनने वाले शुभ योगों का असर कुछ राशियों के लिए सकारात्मक रह सकता है। इस दौरान धन, करियर और कारोबार में अच्छे अवसर मिलने के योग बन सकते हैं।

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है.नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों के लिए करियर में तरक्की के अवसर बन सकते हैं। नया प्रोजेक्ट या कारोबार से जुड़ी कोई अच्छी डील मिल सकती है। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकता है।

सिंह राशि : सिंह राशि वालों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। कारोबारियों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में शुभ रह सकता है। कारोबार विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है। परिवार की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों के लिए अटके हुए काम पूरे होने के योग हैं। नौकरी और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ मानसिक शांति भी प्राप्त हो सकती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Mercury Transit 2026: बुध का स्वराशि कन्या में होगा प्रवेश, इन 5 राशियों के जातकों की होगी मौज और खुलेंगे तरक्की के दरवाजे

Janmashtami Date 2026: 4 या 5 सितंबर, कब मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व? जानें सही तारीख और निशिथ काल पूजा मुहूर्त

Janmashtami Date 2026: जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म के कई प्रमुख व्रत और त्योहारों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने वासुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस दिन को पूरी दुनिया में मौजूद कृष्ण भक्त बहुत धूमधाम से मनाते हैं। कृष्ण भक्त बेसब्री से इस पर्व के आने का इंतजार करते हैं। इस दिन देशभर में खास उत्साह देखने को मिलता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना होती है और 56 भोग लगाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू गोपाल की पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सुख-सृमद्धि में वृद्धि होती है। इस अवसर पर घरों और मंदिरो में लड्डू गोपाल की झांकियां निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन किया जाता है। आइए जानें इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की सही तारीख क्या है और इस दिन निशिथ काल पूजा मूहूर्त क्या है?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 02:25 बजे से होगा। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026, रात 12:13 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

रोहिणी नक्षत्र समय

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ : 4 सितंबर 2026, रात 12:29 बजे

रोहिणी नक्षत्र समाप्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:04 बजे

जन्माष्टमी का निशिथ काल शुभ मुहूर्त

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है :

निशिथ काल मुहूर्त : 4 सितंबर 2026, रात 11:57 बजे से 5 सितंबर 2026, रात 12:43 बजे तक

पूजा अवधि : 45 मिनट

मध्यरात्रि का मुख्य क्षण : रात 12:20 बजे (5 सितंबर)

व्रत पारण का समय

शास्त्रानुसार पारण : 5 सितंबर 2026, सुबह 06:01 बजे के बाद

तत्काल/जन्मोत्सव के बाद पारण : 5 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 12:43 बजे के बाद (पूजा संपन्न होने पर)

जन्माष्टमी व्रत के नियम

  • व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर फलाहार अथवा निर्जल व्रत रखें, जैसा भक्त की शक्ति एवं परंपरा हो।
  • दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन, मंत्र जाप एवं श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें।
  • निशिता काल में विधिवत पूजा करने के पश्चात ही व्रत का पारण करें।
  • व्रत के दौरान क्रोध, वाद-विवाद और तामसिक विचारों से दूर रहें, तथा मन को सात्विक बनाए रखें।

Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा इस दिन, जानें सूतक काल का समय और प्रभाव