दिल्ली के एक एक्सिडेंट में पैर गंवाने वाली 26 साल की रीना को मिलेगा 2.55 करोड़ का मुआवजा! ट्रिब्यूनल ने सुनाया गजब का फैसला

दिल्ली में एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2024 में हुई दुर्घटना में पैर गंवाने वाले महिला उद्यमी के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। इस दुर्घटना में 26 साल की एंटरप्रेन्योर रीना के स्कूटर को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद घुटने के नीचे उसका बायां पैर कट गया था। दिल्ली की ट्रिबयूनल ने इस मामले में 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है।

पीठासीन अधिकारी गुंजन गुप्ता रीना की दावा याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने ट्रक की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 22 फरवरी, 2025 से 30 दिनों के अंदर 9% सालाना ब्याज के साथ 2.55 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया। 15 अक्टूबर के अपने आदेश में, ट्रिब्यूनल ने कहा, “इस फैसले के पहले के हिस्से में याचिकाकर्ता की फंक्शनल डिसेबिलिटी को 100% माना गया है। बताई गई डिसेबिलिटी और उससे होने वाली दिक्कतों के साथ, सुधार की कोई संभावना नहीं होने पर, याचिकाकर्ता वैसी जिंदगी नहीं जी पाएगी जैसी वह एक्सीडेंट से पहले जीती थी।”

यह एक्सीडेंट 5 नवंबर, 2024 को पीरागढ़ी चौक पर हुआ था। रीना अपने दो साल के बेटे के साथ पीछे बैठी थी, तभी ट्रक ने स्कूटर को टक्कर मार दी। ट्रक का एक पहिया उसके बाएं पैर पर चढ़ गया, जिसे बाद में काटना पड़ा। उसकी तीन सर्जरी हुईं। बीमा कंपनी ने स्कूटर चलाने वाले को दोषी ठहराया और कहा कि महिला ने हेलमेट नहीं पहना था। ट्रिब्यूनल ने इन बातों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रैश ड्राइविंग पर रीना की गवाही का कोई जवाब नहीं था। ट्रक का ड्राइवर-कम-मालिक, महिंदर सिंह, ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ और उसके खिलाफ एक उल्टा नतीजा निकाला गया।

ट्रिब्यूनल ने भविष्य में कमाने की क्षमता के नुकसान के लिए याचिकाकर्ता रीना को 1.68 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा अवॉर्ड किया। हालांकि बाएं निचले अंग के लिए विकलांगता 80% सर्टिफाइड थी, ट्रिब्यूनल ने फंक्शनल विकलांगता को 100% माना क्योंकि रीना को अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया गया।

घटना के समय याचिकाकर्ता परिवार की महीने की इनकम 58,915 रुपये थी, जिसमें एक होममेकर के तौर पर उसके योगदान के 6,000 रुपये शामिल थे। उसके दो से चार साल के तीन बच्चे हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिल न होने की वजह से मेडिकल खर्च से मना नहीं किया जा सकता और गलत काम करने वाले को पीड़ित की मेडिक्लेम पॉलिसी का फायदा नहीं मिल सकता। ट्रिब्यूनल ने पीड़ित को अलग-अलग मदों में कुल 2.55 करोड़ रुपये दिए।

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मिलती है सभी पापों से मुक्ति, 21 या 22 अक्टूबर कब है अश्विन एकादशी व्रत

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मिलती है सभी पापों से मुक्ति, 21 या 22 अक्टूबर कब है अश्विन एकादशी व्रत

Papankusha Ekadashi 2026: हिंदू कैलेंडर में हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत किया जाता है। माना जाता है कि पूरे साल में आने वाले एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और उनकी कृपा से वैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है। हर माह की तरह अश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसे पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। माना जाता है कि एकादशी व्रत में विष्णु सहस्रनाम और भगवद्गीता का पाठ करने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस साल पापांकुशा एकादशी का व्रत 21 या 22 अक्टूबर किस दिन किया जाएगा?

कब है पापांकुशा एकादशी का व्रत?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज ने नेटवर्क 18 को बताया कि अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

सभी पापों से मिलती है मुक्ति

पापांकुशा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पद्म पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत करने से मनुष्य के सभी जाने-अनजाने पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत खास तौर पर उन लोगों के लिए फलदायक माना गया है जो आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति की कामना रखते हैं।

एकादशी व्रत में जरूर करें ये कार्य

  • एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत संकल्प लें।
  • पूजा में भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाएं। पीला रंग उनका प्रिय माना जाता है।
  • भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें।
  • इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।

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Ekadashi October 2026: अक्टूबर में आएंगी इंदिरा और पापांकुशा एकादशी, जानें तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Ekadashi October 2026: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इसे श्री हरि की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में आने वाली 24 एकादशी तिथियों का व्रत करने वाले भक्तों पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा होती है। उनके आशीर्वाद से व्रतियों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें बैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है।

हर माह की तरह अश्विन माह में भी दो एकादशी व्रत किए जाते हैं इंदिरा एकादशी और पापांकुशा एकादशी। इस साल यह दोनों उपवास अक्टूबर माह में किए जाएंगे। इंदिरा एकादशी का खास महत्व है क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान आती है, जब पुरखों के लिए प्रार्थना और पूजा-पाठ किए जाते हैं। यहां इंदिरा एकादशी की तारीखें, तिथि का समय और पारण की जानकारी दी गई है, साथ ही अश्विन में पापांकुशा एकादशी की तारीख भी दी गई है।

इंदिरा एकादशी 

अश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है और यह पुरखों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे रीति-रिवाजों से जुड़ा है। इंदिरा एकादशी इसी समय पड़ती है। माना जाता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

इंदिरा एकादशी 2026 तारीख और समय

इस साल इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे खत्म होगी। हिंदू त्योहारों की तारीखें आमतौर पर सूर्योदय के समय की तिथि से तय होती हैं, इसलिए व्रत 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

इंदिरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

वैदिक कैलेंडर के अनुसार, अश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे खत्म होगी। भक्त 6 अक्टूबर तक पूरे दिन व्रत रख सकते हैं और दिन में भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 6:17 बजे और सूर्यास्त शाम 6:01 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 बजे से 5:28 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2:06 बजे से 2:53 बजे तक रहेगा। गोधूलि बेला शाम 6:01 बजे से 6:26 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 11:45 बजे से 12:34 बजे तक रहेगा।

इंदिरा एकादशी 2026 पारण समय

इंदिरा एकादशी का व्रत बुधवार, 7 अक्टूबर को तोड़ा जाएगा। दिए गए समय के अनुसार, भक्त सुबह की रस्में, प्रार्थना और शास्त्रों का पाठ पूरा करने के बाद सुबह 6:17 बजे से 8:38 बजे के बीच पारण कर सकते हैं।

पापांकुशा एकादशी 2026: यह कब मनाई जाएगी?

पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष में आती है और गुरुवार, 22 अक्टूबर, 2026 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे शुरू होगी और 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे खत्म होगी। इसलिए व्रत की तारीख 22 अक्टूबर है।

पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए, पारण 23 अक्टूबर को किया जाता है। पारण का सही समय जगह के हिसाब से अलग हो सकता है क्योंकि एकादशी मनाने और पारण समय की गणना स्थानीय सूर्योदय और तिथि के हिसाब से होती है।

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Anant Chaturdashi 2026 Date: अनंत चतुर्दशी पर 10 दिन वाले बप्पा लौटेंगे अपने धाम, जानें अनंत चतुर्दशी की सही तारीख और विसर्जन का मुहूर्त

Anant Chaturdashi 2026 Date: हिंदू धर्म में गणेश उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। भाद्रपद माह शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश भगवान धरती पर अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसे गणेश चतुर्थी पर्व के नाम से जाना जाता है। बप्पा 10 दिन अपने भक्तों के बीच अतिथि बन कर रहते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन वापस अपने धाम लौट जाते हैं। लोग गणेश जी का विसर्जन करने से पूर्व उनसे अगले साल फिर आने का निवेदन करते हैं। ताकि उनके शुभ चरणों के आगमन से उनके जीवन में खुशहाली, शुभता और उन्नति आए।

हालांकि, भक्त अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार गणेश जी का विसर्जन डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवे दिन, सातवें दिन और दसवें दिन करते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्तियों के विसर्जन के साथ होता है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग बन रहा है। रवि योग में किए गए कार्य शुभ फलदायी होते हैं।

अनंत चतुर्दशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर दिन शुक्रवार को है।

अनंत चतुर्दशी 2026 श्री हरि की पूजा का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की विधान है। उस दिन पूजा के लिए आपको 16 घंटे 55 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होता है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 6 मिनट तक है।

अनंत चतुर्दशी 2026 पर रवि योग और शूल योग

इस साल अनंत चतुर्दशी पर रवि योग सुबह में 06 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होगा और सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव होने से सभी दोष मिट जाते हैं। उस दिन शूल योग सुबह से लेकर दोपहर 02 बजकर 51 मिनट तक है, उसके बाद से गण्ड योग बन रहा है। शतभिषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है।

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी पर सुबह में गणेश विसर्जन का समय 6 बजकर 11 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक है। इसमें सुबह के चर, लाभ और अमृत मुहूर्त शामिल हैं।

अपराह्न के समय शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर में 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक है। वहीं चर चौघड़िया मुहूर्त शाम में 04 बजकर 44 मिनट से शाम 06 बजकर 14 मिनट तक है।

रात के समय में गणेश विसर्जन का मुहूर्त 9 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 43 मिनट तक है। देर रात चौघड़िया मुहूर्त 12:13 ए एम से लेकर 26 सितंबर को 04:42 ए एम तक है। इसमें शुभ, अमृत और चर मुहूर्त शामिल हैं।

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश भगवान अपने भक्तों के बीच आते हैं और 10 दिन तक रहने के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन वापस लौट जाते हैं। इस बीच भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हो चुका है और 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। इससे पहले 22 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। ऐसे भक्तों में इस बात को लेकर दुविधा रहती है कि परिवर्तनी एकादशी के दिन गणेश भगवान को किस चीज का भोग लगाना चाहिए? बप्पा के प्रिय मोदक चावल के आटे से बनते हैं और एकादशी के दिन चावल तो क्या व्रत करने वाले भक्त कोई उपवास करते हैं। आइए जानें गणपति बप्पा को उस दिन सामान्य मोदक या अनाज से बनी मिठाई का भोग लगाया जाए या नहीं?

गणेश उत्सव के दौरान कब है परिवर्तिनी एकादशी?

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन का मुख्य दिन 25 सितंबर रहेगा। यानी दस दिनों तक गणपति स्थापना रखने वाले घरों और पंडालों में 22 सितंबर को भी बप्पा विराजमान होंगे। पंचांग के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9:43 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह किया जाएगा।

एकादशी के दिन गणपति को क्या भोग लगाएं?

महाराष्ट्र में लोकप्रिय उकड़ीचे मोदक मुख्य रूप से चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं। वहीं कई जगह गेहूं का आटा, मैदा, सूजी या बेसन इस्तेमाल करके भी मोदक बनाए जाते हैं। मगर एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त इस दिन अन्न का सेवन नहीं करते हैं। इसलिए एकादशी व्रत करने वाले भक्त बप्पा को अर्पित इस भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं कर सकते। गणेश भगवान को भोग लोग अपनी परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर अर्पित करते हैं। इसलिए मोदक अर्पित करने को लेकर कोई कठोर नियम नहीं हैं। एकादशी व्रत करने वाले भक्तों के लिए फलाहारी भोग रखना सबसे सरल विकल्प है।

परिवर्तिनी एकादशी पर गणपति को कौन-कौन से भोग लगाएं?

  • केला, सेब, अमरूद और दूसरे मौसमी फल
  • नारियल
  • मखाना
  • काजू, बादाम, अखरोट और दूसरे सूखे मेवे
  • दूध से बनी ऐसी मिठाइयां जिनमें अनाज न हो
  • मावा, नारियल और मेवों से तैयार मोदक
  • मिश्री और सूखे मेवों से बने फलाहारी नैवेद्य
  • नारियल, मावा और ड्राई फ्रूट्स से बिना अनाज वाला मोदक तैयार किया जा सकता है
  • साबूदाना, राजगिरा या सिंघाड़े के आटे से भी मोदक बनाए जा सकते हैं।

एकादशी पर पहले गणपति की पूजा करें या भगवान विष्णु की?

पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से करने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है। इसलिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले गणपति बप्पा का स्मरण और पूजन किया जा सकता है। गणपति को दूर्वा, फूल, फल और फलाहारी नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा कर एकादशी व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, फल और पंचामृत अर्पित करें। एकादशी के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ते हैं। इसलिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना बेहतर माना जाता है।

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Hartalika teej 2026 Puja Time: क्या हरतालिका तीज पर रहेगा भद्र का साया ? जानें सुबह-शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika teej 2026 Puja Time: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हरतालिका तीज व्रत को सबसे कठिन उपवास माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती महिलाएं लगभग 24 घंटे निर्जला उपवास करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति रूप में पाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने हिमालय पर बिना अन्न-जल हजारों वर्ष कठिन तप किया। माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तो उनकी सखियों ने उनका हरण कर लिया और उन्हें एक जंगल में छिपा दिया। इसी से इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा, क्योंकि संस्कृत में हरत का अर्थ हरण करने से है और आलिका का अर्थ सखी होता है। यानी सखियों द्वारा हरण किया जाना। माना जाता है कि माता पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को जंगल में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था।

हरतालिका तीज का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए किया जाता है। विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही निर्जला व्रत करती हैं। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत सोमवार के दिन 14 सितंबर को किया जाएगा। लेकिन इस साल हरतालिका तीज के दिन भद्रा भी लग रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दिन सुबह-शाम की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक मिलेगा?

हरतालिका तीज व्रत तारीख

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026, रविवार को सुबह 07:09 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 07:07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि में प्रदोष व्रत 14 सितंबर को ही किया जाएगा।

हरतालिका तीज पर भद्रा का साया

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ काल माना गया है। इस समय किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की मनाही होती है। कहा जाता है कि भद्रा काल में किए गए उत्तम फलों का नकारात्मक या अशुभ फल प्राप्त होता है। इस बार हरतालिका तीज के दिन भद्रा का साया रहने वाला है। इस दिन भद्राकाल शाम 07:20 बजे प्रारंभ होगी और अगले दिन 15 सितंबर को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी।

हरतालिका तीज पर सुबह-शाम के पूजन मुहूर्त

हरतालिका तीज के दिन प्रात: काल पूजा का समय सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे तक रहेगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव के पूजन के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम मुहूर्त माना गया है। इस दिन प्रदोष काल शाम 05:43 बजे से शाम 07:13 बजे तक रहेगा।

हरतालिका तीज 2026 व्रत पारण का समय

हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात करना सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि तीज व्रत पारण के दिन भी भद्रा विद्यमान रहेगी। इसलिए व्रत पारण के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे के बाद किया जा सकेगा।

Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: योग निद्रा में जब करवट लेंगे भगवान विष्णु तब होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें तारीख और समय

Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: योग निद्रा में जब करवट लेंगे भगवान विष्णु तब होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें तारीख और समय

Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। श्रीहरि के भक्त इस दिन उपवास करते हैं और विधि-विधान से भगवान की पूजा करते हैं। पूरे साल में हर माह दो एकादशी आती है। इन्हीं में से एक है भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, जिसे परिवर्तनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन चातुर्मास में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। माना जाता है कि हरि कृपा से इस दिन व्रत करने वाले भक्तों के सभी पाप और कष्ट मिट जाते हैं। परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने पर वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात में 8 बजे से प्रारंभ हो रही है। यह तिथि अगले दिन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन पाताल लोक की भद्रा भी रहेगी।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पर रहेगा रवि योग

परिवर्तिनी एकादशी के दिन रवि योग बन रहा है। उस दिन रवि योग सुबह 6 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ होगा और सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होने से कोई दोष नहीं रह जाता है। इस दिन रवि योग के अलावा अतिगंड और सुकर्मा योग भी बनेंगे। अतिगंड योग प्रात:काल से शुरू होकर शाम 04 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इसे शुभ योग नहीं मान जाता है, लेकिन अतिगंड योग के बाद सुकर्मा योग प्रारंभ होगा। सुकर्मा योग पूरी रात तक रहेगा। यह एक शुभ योग है, इसमें कोई भी शुभ काम कर सकते हैं। व्रत के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रात:काल से सुबह 07:06 ए एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र प्रांरभ है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:35 ए एम से 05:22 ए एम के बीच है। इसमें स्नान आदि से निवृत होकर व्रत और पूजा का संकल्प करना उत्तम माना जाता है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 ए एम से दोपहर 01:45 पी एम के बीच हैं।

एकादशी को लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह में 10:43 ए एम से दोपहर 12:14 पी एम तक है, उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:14 पी एम से 01:45 पी एम तक रहेगा। उस दिन का अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 49 ए एम से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 पी एम तक रहेगा।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पारण

परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर बुधवार को होगा। श्रद्धालु सुबह 06:10 ए एम से लेकर 08:35 ए एम के बीच कभी भी पारण करके व्रत को पूरा कर सकते हैं। उस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात में 10 बजकर 50 मिनट पर होगा।

Hartalika Teej Puja 2026: हरतालिका तीज पर राशि के अनुसार पूजा करने से मिलेगा अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख, जानें आपकी राशि के लिए क्या है सही

Bhadrapad Amavasya 2026 Upay: सितंबर में आने वाली दर्श अमावस्या पर पितरों के आशीर्वाद के लिए जरूर करें ये उपाय, जानें सही तारीख

Bhadrapad Amavasya 2026 Upay: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष स्थान है। माना जाता है कि इस दिन पितरों के नाम पर दान-पुण्य करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूरे साल में 12 अमावस्या तिथियां आती हैं। इनमें दर्श अमावस्या का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का वह समय है जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य हो जाता है, उसे दर्श अमावस्या कहते हैं। इस तिथि को पितृ शांति और पितृ दोष निवारण के उपाय करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल भाद्रपद माह में दर्श अमावस्या संयोग बन रहा है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिथौरा अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

दर्श अमावस्या तारीख और समय

वर्ष 2026 में दर्श अमावस्या 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 10 सितंबर 2026, रात 10:35 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त : 11 सितंबर 2026, सुबह 08:58 बजे तक

उदय तिथि के अनुसार मुख्य पूजा, स्नान-दान और पितृ कर्म 11 सितंबर को ही किए जाएंगे।

महत्व और मान्यताएं

कुश एकत्र करना : इस दिन धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के लिए ‘कुशा’ (पवित्र घास) उखाड़कर एकत्रित की जाती है।

पितृ तर्पण और दान : पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना, पितरों के लिए तर्पण व पिंडदान करना और गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पिथौरा अमावस्या व्रत : शादीशुदा महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन माता दुर्गा/गौरी की पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं।

दोष निवारण : कालसर्प दोष, पितृ दोष और शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन विशेष उपाय और पूजा की जाती है।

दर्श अमावस्या पर क्या करें?

दर्श अमावस्या के दिन आपको कुछ काम करने चाहिए जिससे आपके ऊपर पूर्वजों की कृपा बनी रहे और उनकी नाराजगी से भी बचा जा सके-

दर्श अमावस्या के दिन पानी में काले तिल मिलाकर पूर्वजों के नाम से जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद तर्पण करना शुभ माना जाता है।

दर्श अमावस्या के दिन स्नान करके पीपल के वृक्ष में दीपक जलाएं, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और पूर्वजों की कृपा बनी रहती है।

दर्श अमावस्या के दिन चंद्रमा की पूजा से पूर्वजों की कृपा भी बनी रहती है और जीवन में खुशहाली आती है। हालांकि, इस दिन रात के समय चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं देता है, लेकिन चंद्रोदय की दिशा में अर्घ्य देते हुए पूजा करनी चाहिए।

दक्षिण दिशा को पूर्वजों की दिशा माना जाता है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों के नाम का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे पितरों का आशीर्वाद भी बना रहता है।

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Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हर एकादशी व्रत का अलग नाम और महत्व होता है। इस दिन बहुत से भक्त फलाहार उपवास करते हैं, तो कुछ निर्जला व्रत भी करते हैं। एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तिथि तक माने जाते हैं। हर माह की तरह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी या अन्नदा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक काल में चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने अपने वचन और सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण राज्य, पत्नी और पुत्र तक त्याग दिया था। जब वे अत्यंत कष्ट झेल रहे थे, तब महर्षि गौतम के बताए अनुसार उन्होंने अजा एकादशी का निष्काम भाव से व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए, उनका मृत पुत्र जीवित हो गया और उन्हें पुनः अपना खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ।

अजा एकादशी व्रत 2026 की तारीख

अजा एकादशी व्रत तारीख : 7 सितंबर 2026 (सोमवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ : 6 सितंबर 2026, शाम 07:29/07:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 7 सितंबर 2026, शाम 05:03/05:05 बजे तक

व्रत पारण समय : 8 सितंबर 2026, सुबह 06:02 से 08:33 बजे तक

अजा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक

प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक

अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक

गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक

अमृत काल: 03:59 PM से 05:29 PM तक

सायाह्न सन्ध्या: 06:48 PM से 07:58 PM तक

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से पीले) पहनकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान की सफाई कर पीले कपड़े पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान को पीला चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। भोग में तुलसी दल (पत्ते) अनिवार्य रूप से शामिल करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें।
  • अगले दिन द्वादशी को शुभ समय में पूजा और दान-पुण्य के बाद ही व्रत खोलें।

अजा एकादशी व्रत के मुख्य नियम

एकादशी के दिन चावल (अक्षत), तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और शराब का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

फलाहार में दूध, फल, मखाने या सेंधा नमक से बनी चीजें ली जा सकती हैं।

इस दिन किसी की निंदा न करें और घर में शांति बनाए रखें।

Hal Chhat 2026 Vrat Katha: कल होगा कृष्ण के बड़े भाई दाऊ का जन्म, इस व्रत में जरूर सुनें दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा

Hal Chhat 2026 Vrat Katha: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल छठ का व्रत रखा जाता है। इसे ललही छठ, हरछठ या बलराम जयंती भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुखी जीवन की कामना के लिए माताएं रखती हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था, जिनका मुख्य शस्त्र ‘हल’ है। इसलिए इसका नाम हल छठ पड़ा। इस व्रत में हल से जोते गए खेत का कोई भी अनाज या फल नहीं खाया जाता। केवल पसही के चावल (तिन्नी का चावल), महुआ और बिना जुते उगे साग-सब्जियों का ही सेवन होता है। इस दिन गाय के दूध, दही या घी का उपयोग नहीं किया जाता; केवल भैंस के दूध का ही प्रयोग होता है। हल छठ के व्रत में दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा सुनना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

हलछठ व्रत 2026 की तारीख

इस साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 2 सितंबर को लग रही है, इसलिए इस दिन ही व्रत किया जाएगा। छठ तिथि दो सितंबर की सुबह 06:12 बजे से लेकर तीन सितंबर की सुबह 04:25 बजे तक रहेगी, हालांकि इसमें उदयातिथि का मान नहीं है, पूरे दिन तिथि 2 सितंबर को मिल रही है।

हल छठ 2026: दूध बेचने वाली ग्वालिन की पौराणिक कथा

प्राचीनकाल में एक गर्भवती ग्वालिन थी। हल छठ का दिन था और उसका प्रसवकाल निकट था। वह दूध-दही बेचने के लिए घर से निकली, लेकिन रास्ते में ही उसे तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। वह एक महुए के पेड़ के नीचे बैठ गई और वहीं उसने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। संतान को जन्म देने के बाद ग्वालिन को चिंता हुई कि दूध बेचने में देरी हो गई तो उसका दूध खराब हो जाएगा या ग्राहक चले जाएंगे। उसने नवजात शिशु को महुए की झाड़ियों में छिपाकर सुरक्षित रख दिया और स्वयं दूध बेचने चली गई।

उस दिन हल छठ का व्रत होने के कारण गांव की महिलाएं गाय या भैंस का शुद्ध दूध-दही ही लेना चाहती थीं। ग्वालिन ने लालच में आकर अपने दूध में तालाब का पानी मिला दिया और गांव वालों को झूठ बोलकर बेच दिया कि यह शुद्ध दूध है। जब वह दूध बेचकर वापस महुए के पेड़ के पास पहुंची, तो उसने देखा कि एक किसान खेत जोतने के लिए हल लेकर वहीं से गुजरा था और उसके हल की नोक से बच्चे का पेट चिर गया था। बच्चा लहु-लुहान पड़ा था। यह देखकर ग्वालिन रोने-बिलखने लगी और उसे तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझा कि उसने हल छठ के पावन दिन गांव की व्रती महिलाओं से झूठ बोलकर अशुद्ध/मिलावटी दूध बेचा था, उसी पाप की सजा उसकी मासूम संतान को मिली है।

उसने बिना देर किए गांव की महिलाओं के पास वापस जाकर सच-सच बता दिया और अपने पाप का पश्चाताप किया तथा सभी से क्षमा मांगी। ग्वालिन के सत्य बोलने, सच्चे मन से प्रायश्चित करने और हल छठ माता से प्रार्थना करने पर बलराम जी और छठ माता की कृपा हुई। जब वह वापस पेड़ के पास पहुंची, तो उसने देखा कि उसका बच्चा पूरी तरह से जीवित और स्वस्थ खेल रहा था। तभी से यह मान्यता है कि जो भी माता हल छठ का व्रत पूरी निष्ठा और सत्यता के साथ रखती है, माता उसके बच्चों की हर संकट से रक्षा करती हैं।

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