Bhadrapad Amavasya 2026 Upay: सितंबर में आने वाली दर्श अमावस्या पर पितरों के आशीर्वाद के लिए जरूर करें ये उपाय, जानें सही तारीख

Bhadrapad Amavasya 2026 Upay: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष स्थान है। माना जाता है कि इस दिन पितरों के नाम पर दान-पुण्य करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूरे साल में 12 अमावस्या तिथियां आती हैं। इनमें दर्श अमावस्या का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का वह समय है जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य हो जाता है, उसे दर्श अमावस्या कहते हैं। इस तिथि को पितृ शांति और पितृ दोष निवारण के उपाय करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल भाद्रपद माह में दर्श अमावस्या संयोग बन रहा है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिथौरा अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

दर्श अमावस्या तारीख और समय

वर्ष 2026 में दर्श अमावस्या 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 10 सितंबर 2026, रात 10:35 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त : 11 सितंबर 2026, सुबह 08:58 बजे तक

उदय तिथि के अनुसार मुख्य पूजा, स्नान-दान और पितृ कर्म 11 सितंबर को ही किए जाएंगे।

महत्व और मान्यताएं

कुश एकत्र करना : इस दिन धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के लिए ‘कुशा’ (पवित्र घास) उखाड़कर एकत्रित की जाती है।

पितृ तर्पण और दान : पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना, पितरों के लिए तर्पण व पिंडदान करना और गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पिथौरा अमावस्या व्रत : शादीशुदा महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन माता दुर्गा/गौरी की पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं।

दोष निवारण : कालसर्प दोष, पितृ दोष और शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन विशेष उपाय और पूजा की जाती है।

दर्श अमावस्या पर क्या करें?

दर्श अमावस्या के दिन आपको कुछ काम करने चाहिए जिससे आपके ऊपर पूर्वजों की कृपा बनी रहे और उनकी नाराजगी से भी बचा जा सके-

दर्श अमावस्या के दिन पानी में काले तिल मिलाकर पूर्वजों के नाम से जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद तर्पण करना शुभ माना जाता है।

दर्श अमावस्या के दिन स्नान करके पीपल के वृक्ष में दीपक जलाएं, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और पूर्वजों की कृपा बनी रहती है।

दर्श अमावस्या के दिन चंद्रमा की पूजा से पूर्वजों की कृपा भी बनी रहती है और जीवन में खुशहाली आती है। हालांकि, इस दिन रात के समय चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं देता है, लेकिन चंद्रोदय की दिशा में अर्घ्य देते हुए पूजा करनी चाहिए।

दक्षिण दिशा को पूर्वजों की दिशा माना जाता है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों के नाम का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे पितरों का आशीर्वाद भी बना रहता है।

Aja Ekadashi 2026: आज अजा एकादशी के व्रत में जरूर सुनें राजा हरीशचंद्र की ये कथा, श्री हरि की कृपा से मिलेगा सभी कष्टों से छुटकारा

Aja Ekadashi 2026: 6 या 7 सितंबर, कब किया जाएगा अजा एकादशी का व्रत? नोट करें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हर एकादशी व्रत का अलग नाम और महत्व होता है। इस दिन बहुत से भक्त फलाहार उपवास करते हैं, तो कुछ निर्जला व्रत भी करते हैं। एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तिथि तक माने जाते हैं। हर माह की तरह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी या अन्नदा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक काल में चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने अपने वचन और सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण राज्य, पत्नी और पुत्र तक त्याग दिया था। जब वे अत्यंत कष्ट झेल रहे थे, तब महर्षि गौतम के बताए अनुसार उन्होंने अजा एकादशी का निष्काम भाव से व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए, उनका मृत पुत्र जीवित हो गया और उन्हें पुनः अपना खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ।

अजा एकादशी व्रत 2026 की तारीख

अजा एकादशी व्रत तारीख : 7 सितंबर 2026 (सोमवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ : 6 सितंबर 2026, शाम 07:29/07:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 7 सितंबर 2026, शाम 05:03/05:05 बजे तक

व्रत पारण समय : 8 सितंबर 2026, सुबह 06:02 से 08:33 बजे तक

अजा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक

प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक

अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक

गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक

अमृत काल: 03:59 PM से 05:29 PM तक

सायाह्न सन्ध्या: 06:48 PM से 07:58 PM तक

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से पीले) पहनकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान की सफाई कर पीले कपड़े पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान को पीला चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। भोग में तुलसी दल (पत्ते) अनिवार्य रूप से शामिल करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें।
  • अगले दिन द्वादशी को शुभ समय में पूजा और दान-पुण्य के बाद ही व्रत खोलें।

अजा एकादशी व्रत के मुख्य नियम

एकादशी के दिन चावल (अक्षत), तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और शराब का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

फलाहार में दूध, फल, मखाने या सेंधा नमक से बनी चीजें ली जा सकती हैं।

इस दिन किसी की निंदा न करें और घर में शांति बनाए रखें।

Aja Ekadashi 2026 Date: भादों की पहली एकादशी होगी अजा एकादशी, इस दिन बन रहे दुर्लभ संयोग में पूजा और व्रत का मिलेगा राजसुख

Aja Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। ऐसा ही एक व्रत है अजा एकादशी का भी। यह व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। यह भादों माह की पहली एकादशी होती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। आइए जानें इस साल ये व्रत कब किया जाएगा, किस दुर्लभ योग में पूजा और व्रत करने से मिलेगा राजसुख और इसका महत्व क्या है?

अजा एकादशी 2026 तारीख

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 07:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर दिन सोमवार को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 8 सितंबर मंगलवार को सुबह में 6 बजकर 2 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट के बीच कर सकते हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग में अजा एकादशी

इस बार की अजा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 06 बजकर 14 मिनट पर बनेगा और यह अगले दिन 8 सितंबर को सुबह 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। व्रत वाले दिन प्रात:काल से लेकर सुबह 06:41 ए एम तक व्यतीपात योग है, उसके बाद से वरीयान् योग बनेगा, जो 8 सितंबर को तड़के 03:38 ए एम तक है, फिर परिघ योग होगा।

अजा एकादशी 2026 मुहूर्त

यदि आपको अजा एकादशी का व्रत रखना है तो पूजा का मुहूर्त सुबह में 06:02 ए एम से 07:36 ए एम तक है, उसके बाद सुबह में 09:10 ए एम से 10:45 ए एम तक है। इस समय में आप भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:54 ए एम से दोपहर 12:44 पी एम तक है।

अजा एकादशी महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज्य, परिवार और सम्मान को वापस पाने के लिए महर्षि गौतम के सुझाव पर अजा एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें उनका सब कुछ पुनः प्राप्त हो गया था। माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से अजा एकादशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके समस्त पाप और पूर्व जन्म के बुरे कर्म नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप और दीप अर्पित करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
  • इस दिन गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण किया जाता है।