Food Safety : बिस्किट में भरा भूसा, दूध में डिटर्जेंट और यूरिया, उपभोक्ता अपने सेहत की कैसे करें सुरक्षा !

Food Safety : दूध और डेयरी प्रोडक्ट में डिटर्जेंट और यूरिया, घी में जानवर की चर्बी,लाल मिर्च पाउडर में लाल मिट्टी, धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, जीरा में घास के बीज और अब बिस्किट में जानवरों की खिलाने वाला भूसा!ये सब फूड रेगुलेटर के छापों पकड़ा गया और साबित हो चुका है, फिर भी भारत में मिलावट का खेल धड़ल्ले से जारी है आखिर क्यों? कैसे रुकेगा मिलावट का काला कारोबार? आज कंज्यूमर अड्डा में इसी पर बात की गई है।

सबसे पहले समझते हैं कि फसाई (FSSAI) के छापों में ताजा खुलासा क्या हुआ है। FSSAI ने कंज्यूर्स की शिकायत पर की जांच की तो पाया कि प्रिया गोल्ड बिस्किट में ‘फाइबर’ के सोर्स के रूप में जानवरों को खिलाने वाला चोकर का इस्तेमाल किया जा रहा था । जांच में मिली चोकर की बोरियों पर साफ लिखा था कि ये केवल मवेशियों के खाने के लिए है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग प्लांट में साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का भारी उल्लंघन भी पाया गया। FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

दूसरा मामला है दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा मिलाने का। डोडला डेयरी (Dodla Dairy) के फुल क्रीम दूध के सैंपल स्टैंडर्ड टेस्टिंग में फेल हो गए। जब रेफरल लैब से जांच कराई गई तो दूध में डिटर्जेंट की पुष्टि हुई। इस दूध में फैट भी तय मात्रा से कम था और ये मानव शरीर के लिए असुरक्षित और हानिकारक घोषित किया गया।

तीसरा मामला है पीली किशमिश में जहरीला पेस्टिसाइड का। UEIR Organic Foods की पीली किशमिश के सैंपल में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक पाए गए। कंज्यूमर इस प्रोडक्ट को ‘ऑर्गेनिक’ और हेल्दी मानकर खा रहे हैं। जबकि इनमें मौजूद केमिकल अवशेष उल्टा सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हां अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे की फसाई (FSSAI) भारत का फूड रेग्यूलेटर है।

मिलावट के तरीके

दूध और डेयरी उत्पाद में डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च मिलाया जाता है। वहीं, घी और मक्खन में वेजीटेबल तेल, चर्बी, स्टार्च मिलाया जाता है। हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट और मेटानिल येलो मिला जाता है। लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा और लाल मिट्टी मिलाई जाती है। धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, गोबर और भूसी मिलाई जाती है। काली मिर्च में पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं। जीरा में घास के बीज और झाड़ू के तिनके मिला दिए जाते हैं। हींग में स्टार्च, गोंद और राल मिलाए जाते हैं। वहीं, सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल और सस्ता पाम ऑयल मिला दिया जाता है। शहद में चीनी की चाशनी, राइस सिरप गुड़ का घोल मिलाया जाता है। वहीं, चीनी और गुड़ में चाक पाउडर और वॉशिंग सोडा मिला दिया जाता है। हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन की मिलावट की जाती है। वहीं, फल पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन गैस का इस्तेमाल होता है।

मिलावट की सजा

मानक पूरे ना करने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ के लिए 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत ब्रांडिंग/भ्रामक प्रचार के लिए 3-10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। असुरक्षित भोजन पर 6 महीने तक जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। भोजन से चोट या बीमारी होने पर 1 साल जेल की जेल और 3 लाख जुर्माना हो सकता है। भोजन से गंभीर बीमारी होने पर 6 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। भोजन से मृत्यु होने पर आजीवन कारावास और 10 लाख जुर्माना लगाया जा सकता है।

यहां दर्ज करें शिकायत 

FSSAI के Food Safety Connect ऐप पर और FSSAI के टोल-फ्री नंबर पर मिलावट की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

खरीदारी के समय इन बातों पर ध्यान दें

पैकिंग पर FSSAI लाइसेंस नंबर होना चाहिए। एगमार्क (Agmark) / FSSAI लोगो होना चाहिए। अनचाही या असामान्य महक/स्वाद नहीं होना चाहिए। विश्वसनीय और सीलबंद पैकेट ही खरीदें।

 

 

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Aayush Wellness ने लॉन्च की कैल्शियम-विटामिन टैबलेट, 16 अरब डॉलर के बाजार में एंट्री

हेल्थकेयर सेक्टर की Aayush Wellness Limited ने कैल्शियम और विटामिन सप्लीमेंट लॉन्च किया है। कंपनी ने इसका नाम Aayush Calcium Vitamin Tablets रखा है। इसके साथ ही कंपनी ने बोन और जॉइंट हेल्थ यानी हड्डियों और जोड़ों की सेहत से जुड़े बाजार में कदम रखा है।

कंपनी के मुताबिक, यह बाजार 16.3 अरब डॉलर का है। वहीं, ग्लोबल डाइटरी सप्लीमेंट्स बाजार में कंपनी की मौजूदगी पहले से है, जिसे वह अब और मजबूत करना चाहती है।

टैबलेट में क्या-क्या है?

कंपनी के मुताबिक, इस टैबलेट में पांच पोषक तत्व शामिल हैं। इनमें कैल्शियम साइट्रेट, विटामिन D2, मैग्नीशियम, जिंक और फोलिक एसिड शामिल हैं। इन सभी का शरीर में अलग-अलग काम है।

कैल्शियम साइट्रेट शरीर को कैल्शियम देता है। यह हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने के लिए जरूरी है। वहीं, विटामिन D2 शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। यानी शरीर को कैल्शियम का पूरा फायदा मिले, इसके लिए विटामिन D भी जरूरी है।

इसके अलावा, टैबलेट में मैग्नीशियम और जिंक भी हैं। मैग्नीशियम मांसपेशियों के सही कामकाज में मदद करता है। वहीं, जिंक शरीर की कोशिकाओं और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसमें फोलिक एसिड भी मिलाया गया है, जो नई कोशिकाएं बनाने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भूमिका निभाता है।

कंपनी का कहना है कि इस फॉर्मूलेशन का मकसद शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद करना है। इससे हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज को सहारा मिल सकता है।

कंपनी ने क्या कहा?

Aayush Wellness Limited के निदेशक काशीराम जाधव ने कहा कि भारत में कैल्शियम और विटामिन की कमी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। इसी जरूरत को देखते हुए कंपनी ने इस बाजार में कदम रखा है।

उन्होंने कहा कि यह लॉन्च निवारक स्वास्थ्य सेवा और पोषण से जुड़े उत्पादों पर कंपनी के फोकस का हिस्सा है। लोगों में अपनी सेहत और खानपान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे इस तरह के उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।

भारत में कैल्शियम और विटामिन D की कमी पर फोकस

कंपनी के मुताबिक, भारत में विटामिन D की कमी काफी आम है। कंपनी का दावा है कि यह कमी आबादी के 80-90% लोगों तक को प्रभावित कर सकती है। वहीं, 50% से ज्यादा वयस्कों को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिल पाता।

विटामिन D की कमी होने पर शरीर कैल्शियम को ठीक से सोख नहीं पाता। इससे हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है। कैल्शियम और विटामिन D की कमी का असर मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है।

इसी जरूरत को देखते हुए Aayush Wellness अपने न्यूट्रास्यूटिकल पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। कंपनी का लक्ष्य रोजमर्रा की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने वाले और उत्पाद बाजार में उतारना है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कल का मौसम 20 अक्टूबर: अरब सागर में तेज हवाओं का अनुमान! MP, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत इन 12 राज्यों में आंधी-लाइटनिंग का अलर्ट

IMD Weather Update: देश के मौसम में अलग-अलग मौसमी प्रणालियों के एक्टिव होने की वजह से एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा और विस्तृत मौसम बुलेटिन के मुताबिक मंगलवार 20 को देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज काफी कड़ा रहने वाला है। मौसम विभाग ने दक्षिण प्रायद्वीप से लेकर पश्चिमी, मध्य और पूर्वी राज्यों तक करीब 12 राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में तेज हवाओं के चलने की चेतावनी दी गई है।

आइए जानते हैं कल 20 अक्टूबर को देश के विभिन्न राज्यों में कैसा रहेगा मौसम का हाल:-

दक्षिण भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का तांडव

दक्षिण प्रायद्वीप में उत्तर-पूर्वी मानसून और अन्य सक्रिय प्रणालियों के असर से बारिश का दौर पूरी तरह चरम पर है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 20 अक्टूबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।

इसके अलावा केरल और माहे संग तटीय आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश देखने को मिलेगी। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल के कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की गति से तेज तूफानी हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली कड़केगी।

केरल, माहे, लक्षद्वीप, रायलसीमा और तेलंगाना के हिस्सों में भी 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश के मैदानी इलाकों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी जबकि तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी आकाशीय बिजली चमकने के साथ छिटपुट बौछारें पड़ने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत इन राज्यों में आंधी-लाइटनिंग का अलर्ट

दक्षिण भारत के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी चक्रवातों और मौसमी गतिविधियों की वजह से मौसम बिगड़ा रहेगा। मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, ओडिशा और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बादलों की गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने की गतिविधियां दर्ज की जाएंगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की भी संभावना है।

इसके अलावा पश्चिम भारत के कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों में कल 40 से 50 किमी/घंटे की गति से तेज आंधी-तूफान और झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है, जिससे इन क्षेत्रों में भी मौसम प्रभावी बना रहेगा।

अरब सागर में स्क्वॉली वेदर और तेज हवाओं की चेतावनी

समुद्री और तटीय इलाकों में उठने वाली हलचल को देखते हुए मौसम विभाग ने विशेष चेतावनी जारी की है। दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में स्क्वॉली वेदर के एक्टिव रहने की संभावना है, जिसके तहत वहां 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लेकर 60 किमी/घंटे तक के तेज हवा के झोंके चल सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को सलाह दी गई है कि वे संबंधित समुद्री क्षेत्रों में सावधानी बरतें।

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Climate impact Alert: जलवायु परिवर्तन की मार से गेहूं में होगा बड़ा बदलाव! रोटी की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा; सेहत पर भी पड़ सकता है असर

Climate impact ON wheat: जलवायु परिवर्तन का असर अब हमारी थाली तक पहुंच सकता है। जी हां, जिस गेहूं से हर दिन करोड़ों लोगों की रोटी बनती है, उसकी पोषण संबंधी गुणवत्ता और प्रोटीन संरचना भविष्य में बदल सकती है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी में सामने आया है कि वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का स्तर बढ़ने से गेहूं के प्रोटीन की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। इसका असर न केवल आटे और ब्रेड की क्वालिटी पर पड़ सकता है, बल्कि गेहूं से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण हो सकता है।

स्टडी में खुलासा हुआ है कि वातावरण में बढ़ती CO₂ गेहूं की प्रोटीन संरचना को बदल सकती है। इसका असर बेकिंग गुणवत्ता पर पड़ने के संकेत मिले हैं। जर्मनी के लीबनिज इंस्टीट्यूट फॉर फूड सिस्टम्स बायोलॉजी और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल फूड केमिस्ट्री (Food Chemistry) में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गेहूं की खेती पर विचार करते समय केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। अनाज की गुणवत्ता और उसमें मौजूद प्रोटीन के प्रकारों को भी समझना जरूरी है।

हवा में बढ़ती CO₂ से गेहूं पर कितना असर?

स्टडी के अनुसार, वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है। वर्ष 1980 में इसका स्तर लगभग 340 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) था, जो 2024 में बढ़कर करीब 425 ppm तक पहुंच गया। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह स्तर 600 ppm तक जा सकता है। गेहूं दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में से एक है। ऐसे में वातावरण में CO₂ की बढ़ती मात्रा के बीच इसकी खेती और अनाज की क्वालिटी में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों ने इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए गेहूं की अलग-अलग किस्मों पर प्रयोग किया।

10 किस्मों पर हुआ प्रयोग, सामने आए चौंकाने वाले बदलाव

शोधकर्ताओं ने सर्दियों में उगाई जाने वाली गेहूं की 10 खेती की किस्मों को वास्तविक कृषि और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप उगाया। इनमें से कुछ पौधों को सामान्य परिस्थितियों में मौजूद CO₂ के स्तर पर रखा गया। जबकि अन्य पौधों को 546 ppm की बढ़ी हुई CO₂ में उगाया गया। फसल तैयार होने के बाद वैज्ञानिकों ने गेहूं के दानों में मौजूद प्रोटीन का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके लिए हाई-रिजॉल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

स्टडी में विशेष रूप से ग्लूटेन प्रोटीन, एमाइलेज/ट्रिप्सिन इनहिबिटर्स (ATIs), प्यूरोइंडोलिन और सीलिएक रोग से संबंधित कुछ पेप्टाइड्स पर ध्यान दिया गया। नतीजों से पता चला कि CO₂ कॉन्सेंट्रेशन का स्तर बढ़ने पर गेहूं के अलग-अलग प्रोटीन समूहों में एक जैसा बदलाव नहीं हुआ। कुछ प्रोटीन बढ़े। जबकि कुछ की मात्रा घट गई। इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन गेहूं की प्रोटीन संरचना को प्रभावित कर सकता है।

बढ़ेगा एक तरह का प्रोटीन, घट सकता है ग्लूटेन

इस स्टडी में पाया गया कि बढ़ी हुई CO₂ कॉन्सेंट्रेशन में गेहूं के दानों में एमाइलेज/ट्रिप्सिन इनहिबिटर्स (ATIs) की मात्रा बढ़ गई। दूसरी ओर, प्यूरोइंडोलिन, ग्लूटेन प्रोटीन और सीलिएक रोग से एक्टिव हो सकने वाले कुछ पेप्टाइड्स की मात्रा में कमी देखी गई। ATIs ऐसे प्रोटीन हैं जिनकी संभावित हेल्थ संबंधी भूमिका पर वैज्ञानिक अध्यन करते रहे हैं। इनकी मात्रा बढ़ने का असर मानव स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

लेकिन इस स्टडी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बढ़ी हुई CO₂ में उगा गेहूं सीधे तौर पर लोगों को बीमार कर देगा। वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्लूटेन प्रोटीन की मात्रा घटने के साथ गेहूं की बेकिंग गुणवत्ता में गिरावट देखी गई। यानी प्रोटीन की संरचना में बदलाव का असर रोटी, ब्रेड और गेहूं से बनने वाले दूसरे खाद्य पदार्थों की निर्माण संबंधी विशेषताओं पर पड़ सकता है।

क्या गेहूं से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बदल सकता है?

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू गेहूं से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि CO₂ बढ़ने के कारण ATIs और सीलिएक रोग से सक्रिय होने वाले कुछ पेप्टाइड्स की मात्रा में बदलाव हुआ। सीलिएक रोग एक प्रतिरक्षा सिस्टम से जुड़ी बीमारी है, जिसमें ग्लूटेन के सेवन से छोटी आंत को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि, स्टडी में कुछ संबंधित पेप्टाइड्स की मात्रा घटने का संकेत मिला। जबकि ATIs की मात्रा बढ़ी। इसलिए इन बदलावों का कुल स्वास्थ्य प्रभाव क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह समझने के लिए आगे अध्ययन करना जरूरी है कि गेहूं में प्रोटीन संरचना के ये बदलाव वास्तव में मानव शरीर की जैविक और प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाओं को किस तरह प्रभावित करते हैं। फिलहाल इस शोध को गेहूं से जुड़ी बीमारियों में निश्चित वृद्धि या कमी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

हर गेहूं की किस्म पर एक जैसा असर नहीं

पीटीआई के मुताबिक, इस अध्ययन में एक और अहम बात सामने आई कि सभी गेहूं की किस्मों में बदलाव समान नहीं थे। प्रमुख शोधकर्ता सबरीना गाइस्लिट्ज के अनुसार, प्रोटीन संरचना में परिवर्तन की सीमा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि गेहूं की कौन-सी किस्म उगाई गई है। यह निष्कर्ष भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि कुछ किस्में बढ़ी हुई CO₂ परिस्थितियों में अपनी गुणवत्ता बेहतर बनाए रखती हैं, तो उन किस्मों की पहचान और विकास पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों और कृषि क्षेत्रों में और परीक्षण करने होंगे।

भविष्य की खेती के लिए क्या है सबक?

इस स्टडी से साफ संकेत मिलता है कि जलवायु परिवर्तन का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि खेतों में कितना अनाज पैदा हो रहा है। यह भी देखना होगा कि उस अनाज में किस तरह के प्रोटीन मौजूद हैं। उसकी बेकिंग गुणवत्ता कैसी है। उसके सेवन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य पहलुओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में गेहूं की ऐसी किस्में विकसित करने की जरूरत होगी, जो बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार के साथ बेहतर गुणवत्ता बनाए रख सकें।

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डेंटिस्ट बनने दुबई गईं भारतीय महिला, डांस फिटनेस से बदली किस्मत, अब हर महीने कमाती हैं 11 लाख रुपये

कभी-कभी जिंदगी में एक छोटा-सा शौक करियर की ऐसी राह खोल देता है, जिसके बारे में इंसान ने कभी सोचा भी नहीं होता। भारतीय महिला मोनिका सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह डेंटिस्ट बनने का सपना लेकर दुबई पहुंची थीं, लेकिन डांस फिटनेस में उनकी दिलचस्पी ने उन्हें एक अलग पहचान दिला दी। आज वह दुबई में महिलाओं की फिटनेस और हेल्थ से जुड़ा अपना बिजनेस चला रही हैं और हर महीने करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये तक कमाती हैं।

भारत से दुबई पहुंचीं, डेंटिस्ट के तौर पर काम करने की थी तैयारी

द नेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोनिका सिंह करीब 12 साल पहले दुबई गई थीं। उनका इरादा वहां डेंटिस्ट के रूप में अपना करियर बनाने का था। इसके लिए उन्हें दुबई हेल्थ अथॉरिटी (DHA) की लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी थी। इसी तैयारी के दौरान वह ग्रुप वर्कआउट क्लास में जाने लगीं। यहां उन्हें डांस फिटनेस पसंद आने लगी। शुरुआत में यह सिर्फ एक्सरसाइज और खुद को फिट रखने का तरीका था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया। मोनिका ने बताया कि वह पहले फिटनेस को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखती थीं। डांस फिटनेस क्लास में जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह इस क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उन्होंने अपने पति से इस बारे में बात की और पति ने भी उनके फैसले का समर्थन किया।

फिटनेस क्लास से शुरू हुआ सफर

मोनिका ने दुबई के अलग-अलग स्टूडियो में ग्रुप एक्सरसाइज क्लास लेना शुरू किया। इससे उन्हें फिटनेस इंडस्ट्री में अनुभव मिला और आगे चलकर अपना बिजनेस शुरू करने का रास्ता खुला। डेंटिस्ट्री की पढ़ाई ने भी उनके काम में मदद की। मानव शरीर की बनावट और उसके काम करने के तरीके की उनकी समझ ने उन्हें फिटनेस और महिलाओं की सेहत को बेहतर तरीके से समझने में मदद की। इसके बाद उन्होंने महिलाओं की वेलनेस, खासकर मिडलाइफ के दौरान होने वाले बदलावों पर ध्यान दिया और इससे जुड़ी ट्रेनिंग भी ली।

23 महिलाओं को देती हैं कोचिंग

आज मोनिका दुबई में महिलाओं को फिटनेस और वेलनेस कोचिंग देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल उनके पास 23 क्लाइंट हैं। उनकी मासिक कमाई 42,000 से 45,000 दिरहम के बीच बताई गई है, जो भारतीय रुपये में करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये होती है। उनका तरीका महिलाओं को जरूरत से ज्यादा कठिन एक्सरसाइज या शारीरिक दबाव में डालने के बजाय उनकी जरूरतों के हिसाब से फिटनेस लक्ष्य हासिल करने में मदद करना है।

लाखों की कमाई के बावजूद निवेश नहीं

अच्छी कमाई होने के बावजूद मोनिका ने अभी निवेश करना शुरू नहीं किया है। वह फिलहाल अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचाकर रखती हैं। उनके सात साल के बेटे की स्कूल फीस, कार लोन और घर के रोजमर्रा के खर्च भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं। मोनिका के मुताबिक, वह घरेलू खर्चों के लिए हर महीने करीब 3,000 से 4,000 दिरहम अलग रखती हैं और बाकी रकम बचाती हैं। घर के अन्य खर्चों की जिम्मेदारी उनके पति संभालते हैं।

अब ऑनलाइन बिजनेस और बड़े घर का सपना

मोनिका का अगला लक्ष्य अपने वेलनेस बिजनेस के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल और ऐप लॉन्च करना है। इसके लिए वह पैसे जोड़ रही हैं, क्योंकि इसे तैयार करने में काफी खर्च आएगा।

लंबे समय में वह अपने परिवार के साथ बड़ा घर खरीदना चाहती हैं। उनकी कहानी बताती है कि करियर का रास्ता हमेशा पहले से तय नहीं होता। कभी-कभी किसी नए अनुभव को मौका देना जिंदगी की दिशा बदल सकता है। हालांकि, उनकी कमाई और सफलता का यह सफर उनकी अपनी परिस्थितियों और बिजनेस पर आधारित है।

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Delhi Weather: बारिश के बाद राजधानी ने ली राहत की सांस, AQI सुधरकर 149 पर पहुंचा; तापमान में भी आई गिरावट

Delhi Weather: दिल्ली में बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत देने के साथ-साथ हवा की सेहत में भी सुधार किया है। गुरुवार को हुई बारिश के बाद राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) घटकर 149 पर पहुंच गया। इससे पहले यानी बुधवार को यह 181 दर्ज किया गया था। बारिश के कारण दिन के तापमान में भी गिरावट आई। हालांकि, कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का AQI कुछ समय के लिए सुधरकर 83 पर आ गया था, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है। हालांकि, बाद में यह फिर से मध्यम श्रेणी में आ गया और गुरुवार को गिरकर 149 पर पहुंच गया।

AQI के अलग-अलग स्तरों को इस तरह समझा जा सकता है:

0-50 के AQI को ‘अच्छा’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मॉडरेट’ (मध्यम), 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘बहुत खराब’ और 401-500 को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है।

बारिश से मिली राहत, दिल्ली के AQI में सुधार

गुरुवार को दिल्ली के कई हिस्सों में बारिश होने से हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) में सुधार आया है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट भी आई है। सफदरजंग में अधिकतम तापमान 28.3°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग पांच डिग्री कम है और बुधवार के तापमान के मुकाबले छह डिग्री कम है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच सफदरजंग में 15.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। लोधी रोड पर 20 मिमी, रिज में 25.2 मिमी, पालम में 11.2 मिमी और आयानगर में 7.2 मिमी बारिश हुई।

दिल्ली के अन्य मौसम केंद्रों पर भी अधिकतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। पालम में अधिकतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि लोधी रोड में यह 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, रिज में अधिकतम तापमान 27.4 डिग्री और आया नगर में 28.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

दिन के तापमान में गिरावट के बावजूद, सभी पांचों मौसम केंद्रों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 23.3°C, लोधी रोड पर 22°C और अयानगर में 23.4°C दर्ज किया गया।

दिल्ली भर में जलभराव और ट्रैफिक जाम की खबरें

बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली और हवा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ, वहीं कई जगहों पर जलभराव के कारण लोगों परेशानी उठानी पड़ी। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था बाधित भी हुई।

जलभराव की शिकायत जखीरा अंडरपास, आश्रम अंडरपास, इंद्रलोक और आजाद मार्केट को जोड़ने वाले अंडरपास, लाजपत नगर फ्लाईओवर और मुनिरका से मिली। वहीं, ITO, आश्रम, कालकाजी मंदिर, ग्रेटर कैलाश, मुनिरका, भैरों मार्ग अंडरपास और मथुरा रोड पर भी ट्रैफिक प्रभावित रहा।

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Jio Platforms IPO: 21 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ, जानें प्राइस बैंड से लेकर कारोबारी सेहत तक 8 बड़ी बातें

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी Jio Platforms ने IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार, 14 अक्टूबर को अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास RHP दाखिल किया। इसमें आईपीओ की पूरी रूपरेखा, जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों की जानकारी दी गई है। आइए, आईपीओ से जुड़ी 8 बड़ी बातें जानते हैं।

1. 21 अक्टूबर को खुलेगा IPO

Jio Platforms का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। निवेशक शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक इसमें बोली लगा सकेंगे। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।

2. 27 करोड़ तक नए शेयर जारी होंगे

इस आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। यानी पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे, बल्कि कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी। हालांकि, कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी, यह अंतिम इश्यू शर्तों पर निर्भर करेगा।

3. जुटाए गए पैसे से चुकाया जाएगा कर्ज

Jio Platforms आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी टेलीकॉम सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Ltd (RJIL) का कर्ज चुकाने में करेगी। इसके अलावा, कुछ रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च की जाएगी। इससे RJIL पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

4. रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2500 करोड़ के शेयर

आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। इसमें तय शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हो सकते हैं, जिनके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हैं।

5. कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर

Jio Platforms ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं। कर्मचारी आईपीओ की शर्तों के मुताबिक इन शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह हिस्सा दूसरे निवेशक वर्गों के लिए उपलब्ध शेयरों से अलग होगा।

6. पहली तिमाही में रेवेन्यू 11.8% बढ़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Jio Platforms का रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.8% बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 35,032 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी 15.1% बढ़कर 20,865 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 18,141 करोड़ रुपये था।

इस दौरान EBITDA मार्जिन 51.78% से बढ़कर 53.26% हो गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7,110 करोड़ रुपये था।

7. 1,065 से 1,119 रुपये प्राइस बैंड

Jio Platforms ने आईपीओ के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। लॉट साइज 13 शेयरों का रहेगा। रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी है। इसके लिए ₹14,534 लगेंगे। लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होने वाली है।

8. जियो 53.33 करोड़ ग्राहक

जियो के पास पहली तिमाही के अंत में 53.33 करोड़ ग्राहक थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 89 लाख नए ग्राहक जोड़े। वहीं, प्रति यूजर औसत मासिक रेवेन्यू (ARPU) 215.6 रुपये रहा।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

शारदीय नवरात्रि व्रत 2026: रोज-रोज साबूदाने की खिचड़ी खाने के 6 नुकसान

शारदीय नवरात्रि व्रत 2026: रोज-रोज साबूदाने की खिचड़ी खाने के 6 नुकसान

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शारदीय नवरात्रि के व्रत में साबूदाने की खिचड़ी सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा फलाहार मानी जाती है। स्वाद और पेट भरने के लिहाज से यह बेहद बढ़िया विकल्प है, लेकिन नवरात्रि के दौरान इसका रोजाना और अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

 

1. वजन बढ़ना और मोटापा

हाई कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी: साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जबकि इसमें प्रोटीन और फाइबर बेहद कम होता है।

अतिरिक्त वसा का जमाव: खिचड़ी बनाते समय इसमें मूंगफली, घी या तेल और आलू का इस्तेमाल होने से शरीर में फैट तेजी से जमा होता है, जिससे मोटापा बढ़ता है।

अन्य बीमारियों का खतरा: अत्यधिक वजन बढ़ने और मोटापे के कारण हृदय संबंधी समस्याएं, रक्तचाप, पथरी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

 

2. ब्लड शुगर लेवल में तेजी से बढ़ोतरी

उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स: साबूदाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी अधिक होता है, जिससे इसे खाते ही शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए हानिकारक: अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन ब्लड शुगर स्पाइक कर सकता है। मधुमेह से पीड़ित या प्री-डायबिटिक लोगों को इसे अपने दैनिक डाइट रूटीन में शामिल न करने या डॉक्टर की सलाह के बाद ही बेहद सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है।

 

3. पाचन संबंधी समस्याएं और कब्ज

फाइबर की कमी: साबूदाने में फाइबर न के बराबर होता है और यह स्वभाव से काफी स्टार्चयुक्त तथा चिपचिपा होता है।

पेट की परेशानियां: लगातार साबूदाना खाने से पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है, जिससे पेट में गैस, भारीपन, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

 

4. हृदय, मस्तिष्क और श्वसन तंत्र पर प्रभाव

अंगों पर असर: साबूदाने का अत्यधिक सेवन मस्तिष्क और हृदय के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

सांस लेने में दिक्कत: अधिक मात्रा में इसके सेवन से सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है।

 

5. गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) में हानिकारक

पथरी की समस्या बढ़ना: यदि किसी को किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) की समस्या है, तो साबूदाने की खिचड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह इस समस्या को और अधिक बढ़ा सकता है।

 

6. अन्य शारीरिक समस्याएं

अन्य लक्षण: बहुत अधिक मात्रा में साबूदाने की खिचड़ी खाने से उल्टी, सिर दर्द, सीने में दर्द, रक्त विकार और थायराइड जैसी कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer): चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

कैंसर होने का पता चला तो अपनी जीवनभर की जमापूंजी खर्च कर अंटार्कटिका घूमने चली गई महिला, लौटी तो छोटा हो चुका था ट्यूमर!

नई दिल्ली: जिंदगी में कभी-कभी मुश्किल दौर इंसान को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित कर देती है। चीन की 67 वर्षीय Wang Ying के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। थायरॉइड कैंसर का पता चलने के बाद उन्होंने इलाज से पहले अंटार्कटिका घूमने और पेंगुइन की तस्वीरें खींचने का अपना पुराना सपना पूरा करने का फैसला किया। इस journey में उन्होंने अपनी जीवनभर की जमापूंजी खर्च कर दी। लेकिन घर लौटने के बाद अस्पताल में हुई जांच में उन्हें ऐसी खबर मिली, जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी।

कैंसर की खबर के बीच Wang Ying ने पूरा किया अंटार्कटिका जाने का सपना

Wang Ying चीन के युन्नान प्रांत के कुनमिंग शहर की रहने वाली हैं। वह एक स्कूल में प्रशासनिक पद पर काम करती थीं और रिटायरमेंट की तैयारी कर रही थीं, तभी 2013 में उन्हें थायरॉइड कैंसर होने का पता चला। डॉक्टरों ने उन्हें जल्द सर्जरी कराने की सलाह दी थी। Wang को बचपन से ही पक्षियों और Wildlife Photography में दिलचस्पी थी। वह 1,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों की तस्वीरें खींच चुकी थीं। बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न अंटार्कटिका जाकर पेंगुइन की तस्वीरें खींचने का अपना सपना पूरा किया जाए।

अंटार्कटिका ट्रिप पर खर्च किए करीब 1.5 लाख युआन

Wang Ying की करीब एक महीने की अंटार्कटिका यात्रा पर लगभग 1.5 लाख युआन यानी करीब 22,000 डॉलर खर्च हुए। यह रकम उनकी बचत से भी ज्यादा थी। ऐसे में उनकी मां ने यात्रा का बाकी खर्च उठाने में मदद की। अंटार्कटिका पहुंचकर Wang की सबसे बड़ी इच्छा एक ऐसी तस्वीर खींचने की थी, जिसमें एक मां पेंगुइन अपने बच्चे को खाना खिला रही हो। वहां माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तापमान, तेज हवाओं और बर्फबारी के बावजूद वह काफी देर तक बाहर रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने मां पेंगुइन को अपने बच्चे को खाना खिलाते हुए कैमरे में कैद कर लिया।

अस्पताल में जांच हुई तो छोटा मिला ट्यूमर

यात्रा से लौटने के बाद Wang Ying अस्पताल में Follow-up Check-up के लिए पहुंचीं। इस दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उनका ट्यूमर एक महीने पहले हुई जांच के मुकाबले छोटा हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों ने फिलहाल सर्जरी की जरूरत नहीं बताई, लेकिन उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने की सलाह दी।

इस खबर से Wang को राहत मिली और उन्होंने अपनी पसंद के काम को जारी रखने का फैसला किया। डॉक्टरों ने फिलहाल सर्जरी की जरूरत नहीं बताई है। हालांकि, Wang Ying को आगे भी नियमित जांच कराते रहने की सलाह दी गई है।

30 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुकी हैं Wang

Wang Ying को Wildlife Photography का जुनून है। वह अब तक 30 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुकी हैं और अपने शौक पर पेंशन की बड़ी रकम खर्च करती रही हैं। उनकी आगे की यात्रा योजनाओं में अमेरिका, पेरू और अफ्रीका के कुछ देश भी शामिल हैं।

Wang की कहानी चीनी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी यात्रा यह दिखाती है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी लोग अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, कैंसर जैसी बीमारी में इलाज से जुड़े फैसले डॉक्टर की सलाह और नियमित मेडिकल जांच के आधार पर ही लेने चाहिए।

बहन के गुजरने के बाद, उसकी बेटी को अपनी बेटी की तरह पाल रहा है ये भाई | The Better India Hindi

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“मैं अपनी बहन की जगह कभी नहीं ले सकता, लेकिन उसकी बेटी को कभी अकेला महसूस नहीं होने दूंगा।”

बहन को खोना रॉय नोड की जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल था।

लेकिन पीछे रह गई उसकी छोटी-सी बेटी अनाईशा अब उनके लिए एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उसकी बहन की आखिरी निशानी है।

आज रॉय अपनी भांजी आशु को अपनी बेटी की तरह पाल रही हैं- उसकी पढ़ाई, सेहत, सपनों और हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखते हुए।

[Brother raises her niece as her own daughter, , raising my daughter, man fulfills his promise to his late sister, uncle becomes father figure to his niece, emotional story of brother and sister]

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