जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया गया है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर किया था। शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे। 

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क्या था पूरा मामला

खुद को 'हिन्दुत्व एक्टिविस्ट' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और कथित घटना की गंभीरता के बावजूद जेल जाने से बच गए। CJP ने उस प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसके दौरान कथित मारपीट की घटना हुई थी। संगठन लगातार स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। CJP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी में फ्रैक्चर के दावे को नकारा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में साधारण चोट लगी थी। पुलिस ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है।  पुलिस के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल पर हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

 

 

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया जब भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

 

हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें डर था कि उनके साथ मारपीट या उनकी हत्या तक की जा सकती है। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उनकी राजनीतिक संबद्धता को लेकर लोगों ने उस क्लिप को मजाक या व्यंग्य के तौर पर बनाया था।

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निशु आजाद ने क्या आरोप लगाए?

निशु आजाद ने भारद्वाज के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके समर्थकों ने उन्हें परेशान किया और दुष्कर्म की धमकियां भी दीं। निशु के अनुसार, इन धमकियों को लेकर उन्होंने अलग से FIR भी दर्ज कराई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय के साथ गंभीर मारपीट हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी अब तक बाहर क्यों है और पुलिस से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर संजय की खोपड़ी में फ्रैक्चर होने की बात को लेकर गलत सूचना फैलाई गई थी। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और आरोपी से पूछताछ भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अभी कुछ नोटिस दिए जाने बाकी हैं।  जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल करने समेत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले को मिला राजनीतिक रंग

निशु आजाद के मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने निशु के प्रति समर्थन जताया है। इसके बाद जंतर-मंतर की घटना और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

Asian Games में नीरज की जगह यह भाला फेंक खिलाड़ी करेगा एथलेटिक्स दल की अगुवाई

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राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले भाला फेंक के एथलीट यशवीर सिंह को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए चोटिल नीरज चोपड़ा की जगह गुरुवार को 77 सदस्यीय भारतीय एथलेटिक्स टीम में शामिल किया गया जबकि लंबी दूरी के धावक अभिषेक पाल को कथित डोपिंग उल्लघंन के लिए नाडा (राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी) से नोटिस जारी किए जाने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने लुधियाना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए 77 सदस्यीय ट्रैक एवं फील्ड टीम की घोषणा की। लुधियाना अभी राष्ट्रीय युवा चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा है।

पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ के धावक तेजस शिरसे को भी टीम से बाहर कर दिया गया है क्योंकि वह हाल ही में ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान चोटिल हो गए थे।अभिषेक को पिछले महीने नाडा ने नोटिस भेजा था क्योंकि उनके डोपिंग नमूने में महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवा पाई गई थी।

खेल मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में 73 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम की घोषणा की थी जिसमें शिरसे और अभिषेक भी शामिल थे। मंत्रालय ने बुधवार को छह नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया।

इन खिलाड़ियों में 200 मीटर की धाविका हरिता भद्रा, 400 मीटर दौड़ में भाग लेने वाली किरण पहल, पोल वॉल्टर सिंधुश्री जी, त्रिकूद की एथलीट आशा इलंगो, चक्का फेंक की खिलाड़ी सान्या यादव और हैमर थ्रोअर प्रवीण कुमार शामिल हैं।

इस तरह से पहले घोषित किए गए 73 खिलाड़ियों में से दो खिलाड़ियों अभिषेक और शिरसे के बाहर होने और बुधवार को छह खिलाड़ियों के जुड़ने से अंतिम संख्या 77 हो गई है।AFI ने आयोजकों से यह भी अनुरोध किया है कि पिछले एशियाई खेलों के दोहरे पदक विजेता अविनाश साबले को 5000 मीटर दौड़ में भाग लेने की अनुमति दी जाए। साबले की पसंदीदा 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित है।

पिछले साल एसीएल सर्जरी कराने के बाद साबले ने इस सत्र में केवल एक ही दौड़ में हिस्सा लिया है। उन्होंने 2023 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता था।

दस सितंबर को होने वाली प्रतियोगिता में एशियाई खेलों के लिए चुने गए अधिकतर एथलीट भाग लेंगे।गुलवीर सिंह और पारुल चौधरी एशियाई खेलों में तीन-तीन स्पर्धाओं में भाग लेंगे। गुलवीर 10,000 मीटर, 5000 मीटर और 1500 मीटर में जबकि पारुल 3000 मीटर स्टीपलचेज, 5000 मीटर और 1500 मीटर में हिस्सा लेंगी।

एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम इस प्रकार है:-

पुरुषों:-गुरिंदरवीर सिंह (100मी), अनिमेष कुजूर (100 मीटर, 200 मीटर, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), राजेश रमेश (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), विशाल थेनारासु कयालविझी (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), कृष्ण कुमार (800 मी), मोहम्मद अफसल पुलिककलाकथ (800मी), यूनुस शाह (1500 मी), अभिषेक पाल (5000 मी, 10000 मी), गुलवीर सिंह (1500 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर)। सावन बरवाल (मैराथन), कार्तिक कारकेरा (मैराथन), तेजस शिरसे (110 मीटर बाधा दौड़), यशस पलाक्ष (400 मीटर बाधा दौड़), संतोष कुमार तमिलारासन (400 मीटर बाधा दौड़), अविनाश साबले (3000 मीटर स्टीपलचेज), प्रणव प्रमोद गुरव (मिश्रित 4×100 मीटर रिले), मोहम्मद अशफाक (4×400 मीटर रिले), धर्मवीर चौधरी (4×400 मीटर रिले), जय कुमार (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), मनु थेक्किनालिल साजी (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), आदर्श राम ज्योति शंकर (ऊंची कूद), सर्वेश कुशारे (ऊंची कूद) , कुलदीप कुमार (पोल वॉल्ट), देव मीना (पोल वॉल्ट), मुरली श्रीशंकर (लंबी कूद), शाहनवाज खान (लंबी कूद), प्रवीण चित्रवेल (ट्रिपल जंप) कार्तिक उन्नीकृष्णन (ट्रिपल जंप), करणवीर सिंह (गोला फेंक), तजिंदरपाल सिंह तूर (गोला फेंक), दमनीत सिंह (हथौड़ा फेंक), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), रोहित यादव (भाला फेंकने का खेल), तौफीक नौशाद (डेकाथलॉन), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

महिला:– प्राची चौधरी (400 मी), गौतमी जयारमन (800 मी), पूजा (800मी, 1500मी), पारुल चौधरी (1500 मीटर, 5000 मीटर, 3000 मीटर स्टीपलचेज़), सीमा (5000 मी, 10000 मी), प्रियंका गोस्वामी (मैराथन रेस वॉक), मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक), ज्योति याराजी (100 मीटर बाधा दौड़), नंदिनी कोंगन (100 मीटर बाधा दौड़), उन्नति अयप्पा बोलैंड (200मी), अनु राघवन (400 मीटर बाधा दौड़), विथ्या रामराज (400 मीटर बाधा दौड़), अंकिता ध्यानी (3000 मीटर स्टीपलचेज), तमन्ना (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), नित्या गंधे (4×100 मीटर रिले), सरबानी नंदा (4×100 मीटर रिले), अबिनया राजराजन (4×100 मीटर रिले) स्नेहा सत्यनारायण (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), सुदेशना शिवंकर (4×100 मीटर रिले), रशदीप कौर (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), अनसा बाबू (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले),

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

swatantra bhardwaj and nishu azad

जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता पर हुए हमले के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या की धारा लगाने की मांग की है। ALSO READ: 'डरो मत, मैं साथ हूं': पिता पर हमले के बाद निशु आजाद के समर्थन में आए राहुल गांधी

 

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हमारी साथी निशु के पिता संजय के साथ मारपीट हुई, उनका सिर फोड़ा गया। खुलेआम ये घटना हुई। लगातार हमारी टीम सौरव और हमारी पूरी टीम दिल्ली पुलिस से मांग करती रही कि इन गुंडों को आप गिरफ्तार करें, इन पर हत्या के प्रयास का चार्ज लगाएं लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रही। 
 

उन्होंने कहा कि अब देश की राजधानी में हालात ऐसे हो गए हैं कि गुंडे ये खुलेआम कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने संजय का सिर फोड़ा, पूरी कोशिश थी उन्हें जान से मारने की। खुद कबूल कर रहे हैं कि उस पर हत्या के प्रयास का केस बनता था लेकिन दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा और भाजपा के गुंडों की शय पर उस व्यक्ति के साथ कुछ नहीं किया।

रांका ने कहा कि आज देश के लिए, हमारे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन है जहां पर खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले लोग दावा करते हैं कि उन्होंने किसी को जान से मारने का प्रयास किया लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमारी पूरी टीम निशु और उनके पिता, संजय के साथ पहले दिन से खड़ी रही है। हम दिल्ली पुलिस से मांग करेंगे कि इन गुंडों को, जिन्होंने खुद की पहचान बताई है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए, उन पर हत्या के प्रयास की धाराएं लगाई जाएं, जितनी भी संगीन धाराएं उन पर लगती हैं, लगाई जाएं।

 

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हुए हमले का मामला फिर से सुर्खियों में है। 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हाथापाई में गाजियाबाद के रहने वाले संजय कुमार के सिर में चोट लग गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल पॉडकास्ट क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने यह दावा किया कि उसने ही निशु के पिता संजय कुमार का सिर फोड़ा था और राजनीतिक रसूख के चलते वह बिना किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई के बच निकला।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दी सफाई

जंतर-मंतर पर CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर एक पॉडकास्ट के दौरान किए दावे पर कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि लोग जिसे हमला कह रहे हैं, वह असल में आत्मरक्षा था। अगर मैंने आत्मरक्षा में ऐसा नहीं किया होता, तो भीड़ मुझे पीट-पीटकर मार सकती थी या मेरी हत्या हो सकती थी। मेरे पास वीडियो सबूत हैं। मुझे 10-15 लोगों ने घेर लिया था। जब मैंने आत्मरक्षा में कदम उठाया, तो उनके सिर पर चोट लग गई।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि राहुल गांधी और अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा पॉडकास्ट क्लिप नकली है। जो लोग कह रहे हैं कि मुझे कपिल मिश्रा के प्रभाव के कारण छोड़ा गया, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान मेरे भाइयों की तरह हैं। लोगों को समझना चाहिए कि क्या बात व्यंग्य में कही गई थी।

बिहार डूबेगा या बचेगा?:नेपाल में दूसरा ग्लेशियर फटने वाला है; 8 दिनों में ऐसा क्या हुआ कि सरकार बोली- हालात गंभीर हैं

बिहार डूबेगा कि बचेगा…नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 8 दिन बाद अब हर कोई जानना चाहता है। राज्य की 8 नदियां- गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। दूसरी तरफ नेपाल में दूसरे ग्लेशियर के फटने का अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसा क्यों कहा जा रहा कि अबकी ग्लेशियर फटा तो पटना सहित 10 शहर डूब जाएंगे, हिमालय की चोटी पर क्या चल रहा है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। बिहार की चिंता बढ़ाने वाले 3 बड़े फैक्टर 1. नेपाल में फटने वाला है दूसरा ग्लेशियर चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में एक नया ग्लेशियल लेक फटने वाला है। कब फटेगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना कठिन है। नया ग्लेशियल लेक लांगटांग लिरुंग हिमालय के पश्चिमी ढलान पर, रसुवा में तेनजिंग के ठीक सामने है। दरअसल… नेपाल से निकलने वाली 7 से 9 बड़ी नदियां बहकर बिहार-UP के मैदानी इलाकों में आती हैं। जब नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश होती है, तो इन्हीं नदियों के जरिए बिहार में बाढ़ का पानी आता है। इसे ऐसे समझिए… केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी, गंडक, बागमती और घाघरा ही वे नदियां हैं, जो बिहार में बाढ़ लाती हैं। इसलिए अगर अबकी बार ग्लेशियर फटा तो फिर भारी मात्रा में पानी बिहार पहुंचेगा। 2. 8 नदियां उफान पर, दबाव बढ़ा तो टूट जाएंगे बाढ़ ताजा हालात है कि बिहार की आठ नदियां गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। 3 सितंबर तक बिहार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक… वहीं, नेपाल में आई तबाही के दिन 26 अगस्त से 3 सितंबर की सुबह 8 बजे तक बिहार में 3 बैराज से 1.98 करोड़ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। एक क्यूसेक पानी यानी 28.3 लीटर/प्रति सेकंड। मतलब 56,119.4 करोड़ लीटर/प्रति सेकंड पानी बिहार में 9 दिन के अंदर आ चुका है। मतलब अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। 3. नेपाल में बारिश का अलर्ट, नदियों में बढ़ेगा पानी बिहार की सबसे बड़ी चिंता नेपाल में भारी बारिश का अलर्ट है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, फिर भी रसुवा और नुवाकोट में अचानक बाढ़ आने की ज्यादा संभावना है। दोनों जिलों में भोटेकोशी, त्रिशूली और छोटी नदियों का जलस्तर काफी बढ़ सकता है, जिससे अचानक बाढ़ आने का भारी खतरा है। वहीं, नेपाल के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों यानी 6 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। नेपाल के जल संसाधन विभाग ने कहा कि कोशी बेसिन की सप्तकोशी, तमोर, अरुण, दूधकोशी, तामाकोशी और सुनकोशी तथा नारायणी बेसिन की नारायणी, त्रिशूली, बूढ़ी गंडकी, मर्स्यांगदी, सेती और काली गंडकी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विभाग ने नेपाल की छोटी नदियों में पानी बढ़ने की भी बातें कही है। इधर… पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 5 सितंबर तक पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सीवान जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जबकि, पटना, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा और बेगूसराय में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। …तो क्या बड़े शहर भी डूब सकते हैं? बिल्कुल। राज्य की नदियों में बढ़ते पानी से 13 जिले दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर, मुंगेर प्रभावित हैं। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर की शाम अलर्ट जारी करते हुए कहा कि पटना में गंगा नदी हाई फ्लड लेबल को क्रास करने वाली है। इसलिए सभी पदाधिकारी और लोग अलर्ट रहें। निचले इलाकों को बचाने के लिए तुरंत तैयारी में जुट जाएं। विभाग ने कहा है कि दक्षिण बिहार की सोन, पुनपुन, दरधा में बढ़ते पानी को देखते हुए नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मतलब साफ है कि अगर नेपाल से और पानी आया तो बिहार के कम से कम 10 से ज्यादा शहर डूब सकते हैं। जिसमें राजधानी पटना भी शामिल हो सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है…

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

Maa Dunagiri Temple

उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। करीब 8,000 फीट ऊंचाई पर स्थित इस प्राचीन मंदिर तक 365 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जाता है। मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी लोगों से अल्मोड़ा आगमन पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन करने की अपील की है। ALSO READ: कीर्तिखाल का भैरवगढ़ी मंदिर: गढ़वाल के रक्षक काल भैरव का धाम, जानें क्या है खास

 

सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद अल्मोड़ा के द्वाराहाट क्षेत्र में स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। मां आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह पावन धाम अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जनपद अल्मोड़ा आगमन पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

 

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट से लगभग 15-25 किलोमीटर दूर द्रोण पर्वत की चोटी पर स्थित एक प्रसिद्ध और प्राचीन शक्तिपीठ है। समुद्र तल से करीब 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ALSO READ: क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

 

क्या है दूनागिरी का हनुमान जी और द्रोणाचार्य से कनेक्शन

कहा जाता है कि त्रेतायुग में जब लक्ष्मण को मेघनाथ के द्वारा शक्ति लगी थी, तब सुशेन वैद्य ने हनुमान जी से द्रोणाचल नाम के पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहा था। हनुमान जी उस स्थान से पूरा पर्वत उठा रहे थे तो यहां पर पर्वत का एक छोटा सा टुकड़ा गिरा।


यह भी कहा जाता है कि इस स्थान पर गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी। दूनागिरी में कत्यूरी शासक सुधारदेव ने 1318 ईसवी में मंदिर निर्माण कर दुर्गा मूर्ति स्थापित की। मंदिर में शिव व पार्वती की मूर्तियां विराजमान है।

घुटनों को दें रोजाना थोड़ी केयर, दर्द और जकड़न में काम आएंगी ये 7 आदतें

घुटनों में दर्द आजकल काफी आम समस्या हो गई है। घुटना हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी जोड़ है, जो खड़े होने, चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने जैसे रोज के कामों में हमारा साथ देता है। ऐसे में जब घुटने में दर्द, जकड़न या सूजन होने लगे तो छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लग सकते हैं। घुटने का दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से ही नहीं होता, बल्कि चोट, ज्यादा वजन, लंबे समय तक बैठे रहने या घुटने पर ज्यादा प्रेशर पड़ने की वजह से भी परेशानी हो सकती है।

यदि घुटनों में हल्का दर्द है या मामूली खिंचाव की वजह से परेशानी हो रही है, तो रोज की कुछ आसान आदतों से राहत पाने में मदद मिल सकती है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या घुटने में ज्यादा सूजन और चलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वहीं सामान्य और हल्के दर्द में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी परेशानी को कम करने और घुटनों को आराम देने में मदद कर सकते हैं।

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1. अदरक वाली चाय का सेवन 

अदरक में जिंजरोल जैसे नेचुरल कंपोनेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन से जुड़े प्रोसेस पर असर डाल सकते हैं। इसलिए कुछ लोगों को अदरक की चाय से हल्की परेशानी में आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इसे घुटने के दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। एक इंच अदरक के टुकड़ों को एक कप पानी में करीब 5 मिनट उबालकर छान लें। स्वाद के लिए नींबू या थोड़ा शहद मिला सकते हैं।

2. अचानक दर्द हो तो RICE तरीका अपनाएं

दर्द अचानक पैर मुड़ने, गिरने या चोट लगने के बाद शुरू हुआ है, तो शुरुआती समय में RICE तरीका अपनाया जा सकता है। इसमें Rest यानी आराम, Ice यानी बर्फ, Compression यानी हल्का दबाव और Elevation यानी पैर को ऊंचा रखना शामिल है। दर्द बढ़ाने वाली एक्टिविटी रोकें और बर्फ को कपड़े में लपेटकर 15 से 20 मिनट तक लगाएं। जरूरत पड़ने पर हल्का क्रेप बैंडेज लगाएं और आराम करते समय पैर को तकिए पर थोड़ा ऊंचा रखें।

3. नी-कैप के साथ सही जूते-चप्पल पहनें

कुछ लोगों को घुटने का सपोर्ट यानी नी-कैप पहनने से चलने-फिरने में सहारा मिल सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। यदि इस्तेमाल करें तो सही साइज का नी-कैप ही पहनें। साथ ही ऐसे जूते-चप्पल चुनें जिनमें पैर को अच्छा सपोर्ट मिले और चलने में आराम रहे।

4. एप्सम सॉल्ट वाले गर्म पानी में पैर रखें

एप्सम सॉल्ट को गर्म पानी में डालकर पैर रखने से कुछ लोगों को जकड़न और थकान में आराम महसूस हो सकता है, हालांकि इसके असर के पक्के सबूत नहीं हैं। एक बाल्टी गर्म पानी में करीब दो कप एप्सम सॉल्ट डालकर पैरों को 15 से 20 मिनट तक रखा जा सकता है। पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो और बाद में पैरों को अच्छी तरह सुखा लें।

5. स्ट्रेचिंग करें और हल्की एक्सरसाइज रूटीन में शामिल करें

घुटनों में दर्द होने पर पूरी तरह आराम करने के बजाय हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना मददगार हो सकता है। इससे घुटने के आसपास की मसल्स एक्टिव रहती हैं और जोड़ को हिलाने में आसानी होती है। हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच के लिए कुर्सी पर बैठकर एक पैर सामने सीधा करें और थोड़ा आगे झुकें। काफ स्ट्रेच में दीवार पर हाथ रखकर एक पैर पीछे करें और एड़ी जमीन पर रखें। इसके अलावा कुर्सी पर बैठकर पैर को सीधा करके 5 सेकंड रोकें और फिर नीचे करें।

6. घुटने की हल्के गर्म तेल से मालिश करें

घुटने के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने से कुछ लोगों को दर्द और जकड़न में आराम महसूस हो सकता है। इसके लिए तिल, नारियल या सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल कर सकते हैं। घुटने और आसपास की मसल्स पर करीब 10 मिनट तक हल्के हाथों से गोल-गोल मालिश करें।

7. डाइट में ओमेगा-3 वाली चीजें शामिल करें

ओमेगा-3 शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और सूजन से जुड़े प्रोसेस में भूमिका निभाता है। इसलिए इसे बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। मछली खाने वाले लोग मैकेरल यानी बांगड़ा, सार्डिन और हिलसा जैसी मछली खा सकते हैं, जबकि शाकाहारी लोग अलसी, अखरोट और चिया सीड्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं। साथ ही बहुत ज्यादा तला-भुना खाना कम करना बेहतर है।

घुटने के दर्द के लिए डॉक्टर को दिखाएं

घुटने के दर्द में घरेलू उपायों से राहत न मिले या दर्द बार-बार परेशान करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यदि दर्द दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, घुटने में ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, पैर पर वजन रखने या खड़े होने में परेशानी हो, घुटना अचानक जवाब देने लगे, जोड़ टेढ़ा या असामान्य दिखाई दे या आप घुटने को पूरी तरह मोड़ या सीधा न कर पा रहे हों, तो इसे नजरअंदाज न करें।

बाल धोने का तरीका बदलें! शैंपू से पहले एक्सपर्ट का ये 5 मिनट वाला तरीका अपनाएं

आजकल बालों से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। कंघी करते समय ज्यादा बाल निकलना, बालों का बीच से टूटना या धीरे-धीरे पतला होना कई लोगों के लिए चिंता बन गया है। ऐसे में बालों की खोई हुई मजबूती और चमक वापस पाने के लिए लोग अलग-अलग हेयर केयर प्रोडक्ट्स और घरेलू तरीकों का सहारा लेते हैं। लेकिन हर किसी के बाल अलग होते हैं, इसलिए एक ही तरीका सभी पर एक जैसा असर करे, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में बालों की बेहतर देखभाल के लिए एक आसान रूटीन है, जिसे शैंपू करने से पहले ही अपनाया जा सकता है। इसे प्री-कंडीशनिंग कहा जाता है और इसमें बाल धोने से पहले सही तरीके से तेल लगाने और फिर हेयर वॉश करने का तरीका शामिल है। यदि आप भी बालों के झड़ने और टूटने से परेशान हैं, तो यह आसान तरीका हेयर केयर रूटीन में शामिल कर सकते है।

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1. शैंपू से पहले बालों को ऐसे करें तैयार

जावेद हबीब ने बाल धोने से पहले प्री-कंडीशनिंग का आसान तरीका बताया है। इसके लिए सबसे पहले बालों को हल्का गीला करें और फिर उनकी लंबाई पर थोड़ा तेल लगाएं। तेल लगाते समय बालों और स्कैल्प को जोर-जोर से रगड़ने या मसाज करने से बचें। इस प्रोसेस का मकसद बालों को शैंपू करने से पहले तैयार करना है, ताकि वॉश के दौरान बालों पर ज्यादा खिंचाव न पड़े।

2. स्कैल्प की सफाई पर दें खास ध्यान

बालों को हेल्दी और मजबूत बनाए रखने के लिए उनकी रेगुलर सफाई बहुत जरूरी है। स्कैल्प पर गंदगी, पसीना और तेल जमा रहने से बालों से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए अपने बालों के हिसाब से एक सही वॉशिंग रूटीन बनाएं और उसे रेगुलर फॉलो करें। साफ स्कैल्प बालों की बेहतर देखभाल की पहली सीढ़ी हो सकती है।3. कंघी करने का तरीका

यदि आपके बाल लंबे हैं, तो तेल लगाने के बाद उन्हें बहुत हल्के हाथों से कंघी कर सकते हैं। कंघी करते समय बालों को खींचें नहीं, क्योंकि गीले बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसके बाद करीब 5 मिनट तक तेल को बालों पर लगा रहने दें। इसके बाद आप अपने सामान्य हेयर वॉश रूटीन को फॉलो कर सकते हैं।

4.  हेयर वॉश में रखें इन बातों का ध्यान

करीब 5 मिनट बाद बालों को धोया जा सकता है। इसके लिए आप अपने बालों के हिसाब से शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं। जावेद हबीब ने बाल साफ करने के लिए शिकाकाई जैसे ट्रडीटोनाल हर्ब्स को भी एक ऑप्शन बताया है। सबसे जरूरी बात यह है कि बालों की सफाई और देखभाल को कभी-कभार नहीं, बल्कि रेगुलर रूटीन का हिस्सा बनाएं। यदि बहुत ज्यादा या लगातार बाल झड़ रहे हैं, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, ऐसे में एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा।5. बालों को ज्यादा टाइट बांधने से बचें

बालों को लंबे समय तक बहुत टाइट पोनीटेल, जूड़ा या चोटी में बांधने से उनमें खिंचाव पड़ सकता है। गीले बालों को कसकर बांधने से बचें, क्योंकि इस समय बाल ज्यादा नाजुक होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। कोशिश करें कि बालों को ढीला रखें और सॉफ्ट हेयर टाई का इस्तेमाल करें।

बालों की बेहतर देखभाल के लिए छोटी-छोटी आदतों को अपने रूटीन का हिस्सा बनाना जरूरी है। शैंपू से पहले की सही देखभाल और रेगुलर हेयर केयर से बालों को हेल्दी और मजबूत बनाए रखने में मदद मिल सकती है। मानसून में इन आसान बातों का ध्यान रखकर बालों की खूबसूरती और सेहत बरकरार रखी जा सकती है। रेगुलर देखभाल से बालों को ज्यादा मैनेजेबल बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके लिए बालों की जरूरत के हिसाब से सही रूटीन अपनाना भी जरूरी है।

अफगानिस्तान वनडे के बाद अब टी-20 सीरीज से भी बाहर होने की कगार पर खड़े हार्दिक

जून माह में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हुए हार्दिक पांड्या अब इस देश के खिलाफ इस महीने खेली जाने वाली टी-20 सीरीज से भी बाहर हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके पैर में अकड़न है और टीम प्रबंधन उनको जल्द मैदान पर नहीं उतारना चाहता। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में  मांसपेशियां यानि कि हैमस्ट्रिंग के कारण वह बाहर रहे थे।

गौरतलब है कि मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर ने यह कहा था कि हार्दिक पांड्या को दक्षिण अफ्रीका में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप के लिए भारतीय टीम में शामिल करने की योजना है।

यह चोट उस योजना को पीछे ढकेलती है क्योंकि एक बार फिर हार्दिक पांड्या की खराब फिटनेस सबके सामने उजागर हो जाती है। वह भी तब जब उनको बैंगलूरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से हरी झंडी मिल गई थी।इससे पहले पिछले एकदिवसीय विश्वकप में भी बीच हार्दिक पांड्या टूर्नामेंट चोटिल होकर बाहर हो गए थे।

2 टी-20 विश्वकप जीत चुके हार्दिक पांड्या टी20 टीम में पंड्या की वापसी की संभावना कम लग रही है क्योंकि अगरकर ने साफ कर दिया था कि उनका इस्तेमाल ज्यादातर 50 ओवर प्रारूप में किया जाएगा।अगरकर ने कहा था, ‘‘वह अभी अफगानिस्तान सीरीज के लिए वनडे टीम का हिस्सा हैं। बुमराह की तरह, अगर हम उनसे अच्छा प्रदर्शन करवा सकें और उन्हें वनडे क्रिकेट के लिए फिट रख सकें। इस समय यही मुख्य मक़सद है। ’’

उन्होंने कहा था, ‘‘हम उन्हें कभी भी वापस ला सकते हैं। इससे हमें नितीश रेड्डी जैसे खिलाड़ी को टी20 क्रिकेट में कुछ मौके देने का भी मौका मिलता है। इसलिए पंड्या के मामले में टी20 के लिए थोड़ा आराम और रोटेशन होगा। ’’

विश्वकप फाइनल में नाबाद अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज को ऑस्ट्रेलिया ने किया वनडे टीम से ड्रॉप

मार्नस लाबुशेन को ज़िम्बाब्वे और साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ होने वाली वनडे सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम से बाहर कर दिया गया है। इस बीच उन्हें टेस्ट टीम में अपनी जगह के बारे में फ़ैसला होने का इंतज़ार भी है।गौरतलब है कि मार्नस लाबुशेन वही बल्लेबाज हैं जिन्होंने भारत के खिलाफ एकदिवसीय विश्वकप फाइनल में  नाबाद अर्धशतक जड़ा था।

लाबुशेन ने जून में पाकिस्तान और बांग्लादेश के दौरों पर संघर्ष किया था, हालांकि बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दूसरे वनडे में बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे भेजे जाने के बाद उन्होंने नाबाद 55 रन बनाए थे। लेकिन ट्रैविस हेड और मिचेल मार्श की वनडे टीम में वापसी और चयनकर्ताओं के युवा खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाने के कारण लाबुशेन टीम से बाहर हो गए हैं। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी।

इस दौरे पर जोएल डेविस के वनडे डेब्यू करने की संभावना है। न्यू साउथ वेल्स के इस ऑलराउंडर ने इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ T20I सीरीज़ में प्रभावित किया था। वहीं बाएं हाथ के बल्लेबाज ऑली पीक को एक और मौक़ा दिया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक वनडे कप्तान पैट कमिंस और उनके साथी तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क साउथ अफ़्रीका में टीम से जुड़ेंगे, वहीं जॉश हेज़लवुड दोनों वनडे सीरीज़ में खेलेंगे।

ज़िम्बाब्वे में मार्श टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि साउथ अफ़्रीका में वह और कमिंस कप्तानी की ज़िम्मेदारी साझा करेंगे। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कमिंस कितने मैच खेलते हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने इस दौरे के लिए अपने तेज़ गेंदबाज़ी विकल्पों को मजबूत करते हुए स्पेंसर जॉनसन और बिली स्टेनलेक को भी टीम में शामिल किया है। बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ जॉनसन ने अपना पिछला वनडे 2025 की शुरुआत में खेला था। लंबी चोट के बाद उन्होंने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ T20I टीम में वापसी की थी।

स्टेनलेक पाकिस्तान दौरे के लिए वनडे टीम का हिस्सा थे और रावलपिंडी में खेले गए मैच में उन्होंने सात साल से अधिक समय बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। हालांकि, सीरीज़ में उनके एकमात्र मैच में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था।

चयनकर्ताओं ने वनडे और ऑस्ट्रेलिया ए टीम के बीच खिलाड़ियों को बांटने का फैसला नहीं किया है। 
ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ वनडे मैच 15, 18 और 20 सितंबर को हरारे में खेले जाएंगे। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सीरीज़ के मैच 24, 27 और 30 सितंबर को क्रमशः डरबन, जोहैनसबर्ग और पोटचेफ़स्ट्रूम में होंगे।

ज़िम्बाब्वे और साउथ अफ़्रीका दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया की वनडे टीम

ज़ेवियर बार्टलेट, ऐलेक्स कैरी, कूपर कॉनली, पैट कमिंस (केवल साउथ अफ़्रीका, कप्तान), जोएल डेविस, नेथन एलिस, कैमरन ग्रीन, जॉश हेज़लवुड, ट्रैविस हेड, जॉश इंग्लिस, स्पेंसर जॉनसन, मिचेल मार्श, ऑली पीक, मैथ्यू रेनशॉ, बिली स्टेनलेक, मिचेल स्टार्क (केवल साउथ अफ़्रीका), ऐडम ज़ैम्पा