Government bars sugar-based ethanol in 2026-27 tender: Report

Government bars sugar-based ethanol in 2026-27 tender: Report
Car being refuelled with petrol

Sugar-based ethanol has been left out of India’s ethanol tender for the 2026-27 supply year, according to a Reuters report. Citing the tender issued on October 16, the report states that the government has instructed state-run oil marketing companies (OMCs) to ensure no sugar is diverted towards ethanol production for this period. No bids have therefore been invited for ethanol produced using sugarcane juice, sugar or sugar syrup, or B-heavy molasses, the report adds.

  1. Oil firms invited bids for 11 billion litres of ethanol for 2026-27
  2. Tender allows bids for ethanol made from corn, broken rice and surplus FCI rice
  3. Incentive for corn-based ethanol cut from Rs 5.79/litre to Rs 2.79/litre

Tender details

It seeks 11 billion litres for the supply year starting in November 2026

The tender comes from Indian Oil, Bharat Petroleum and Hindustan Petroleum. “The Government of India has issued directions that sugar diversion for ethanol be reduced to zero for ethanol supply year 2026-27,” the tender document said, according to the report.

The companies are looking to procure 11 billion litres of ethanol for the supply year, which kicks off in November 2026. Distillers can submit bids for ethanol produced from corn, broken rice and surplus FCI (Food Corporation of India) rice. Corn-based ethanol will also fetch less this time. Its incentive has dropped by Rs 3 per litre to Rs 2.79 per litre, taking the procurement price from Rs 71.86 per litre to Rs 68.86 per litre, as per the report.

Ethanol blending and sugar supply

India is trying to rein in high sugar prices

Surplus sugar has been a key contributor to India’s ethanol-blending programme for several years. India also consumes more sugar than any other country, and has been trying to increase local production while easing prices.

Reuters had reported in August 2026 that limits on the use of sugarcane for ethanol were being considered for the season starting October 2026. Weaker rains in Maharashtra and Karnataka had already cast doubt on this year’s sugar production at the time.

Ethanol blending is aims to reduce India’s oil imports. E20 petrol, which became compulsory nationwide earlier this year, was introduced to cut emissions as well as the country’s dependence on imported crude. However, diverting sugarcane juice, sugar syrup and B-heavy molasses towards ethanol can lead to a reduction in the amount of sugar produced.

घुटनों को दें रोजाना थोड़ी केयर, दर्द और जकड़न में काम आएंगी ये 7 आदतें

घुटनों में दर्द आजकल काफी आम समस्या हो गई है। घुटना हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी जोड़ है, जो खड़े होने, चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने जैसे रोज के कामों में हमारा साथ देता है। ऐसे में जब घुटने में दर्द, जकड़न या सूजन होने लगे तो छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लग सकते हैं। घुटने का दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से ही नहीं होता, बल्कि चोट, ज्यादा वजन, लंबे समय तक बैठे रहने या घुटने पर ज्यादा प्रेशर पड़ने की वजह से भी परेशानी हो सकती है।

यदि घुटनों में हल्का दर्द है या मामूली खिंचाव की वजह से परेशानी हो रही है, तो रोज की कुछ आसान आदतों से राहत पाने में मदद मिल सकती है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या घुटने में ज्यादा सूजन और चलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वहीं सामान्य और हल्के दर्द में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी परेशानी को कम करने और घुटनों को आराम देने में मदद कर सकते हैं।

knee pos

1. अदरक वाली चाय का सेवन 

अदरक में जिंजरोल जैसे नेचुरल कंपोनेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन से जुड़े प्रोसेस पर असर डाल सकते हैं। इसलिए कुछ लोगों को अदरक की चाय से हल्की परेशानी में आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इसे घुटने के दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। एक इंच अदरक के टुकड़ों को एक कप पानी में करीब 5 मिनट उबालकर छान लें। स्वाद के लिए नींबू या थोड़ा शहद मिला सकते हैं।

2. अचानक दर्द हो तो RICE तरीका अपनाएं

दर्द अचानक पैर मुड़ने, गिरने या चोट लगने के बाद शुरू हुआ है, तो शुरुआती समय में RICE तरीका अपनाया जा सकता है। इसमें Rest यानी आराम, Ice यानी बर्फ, Compression यानी हल्का दबाव और Elevation यानी पैर को ऊंचा रखना शामिल है। दर्द बढ़ाने वाली एक्टिविटी रोकें और बर्फ को कपड़े में लपेटकर 15 से 20 मिनट तक लगाएं। जरूरत पड़ने पर हल्का क्रेप बैंडेज लगाएं और आराम करते समय पैर को तकिए पर थोड़ा ऊंचा रखें।

3. नी-कैप के साथ सही जूते-चप्पल पहनें

कुछ लोगों को घुटने का सपोर्ट यानी नी-कैप पहनने से चलने-फिरने में सहारा मिल सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। यदि इस्तेमाल करें तो सही साइज का नी-कैप ही पहनें। साथ ही ऐसे जूते-चप्पल चुनें जिनमें पैर को अच्छा सपोर्ट मिले और चलने में आराम रहे।

4. एप्सम सॉल्ट वाले गर्म पानी में पैर रखें

एप्सम सॉल्ट को गर्म पानी में डालकर पैर रखने से कुछ लोगों को जकड़न और थकान में आराम महसूस हो सकता है, हालांकि इसके असर के पक्के सबूत नहीं हैं। एक बाल्टी गर्म पानी में करीब दो कप एप्सम सॉल्ट डालकर पैरों को 15 से 20 मिनट तक रखा जा सकता है। पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो और बाद में पैरों को अच्छी तरह सुखा लें।

5. स्ट्रेचिंग करें और हल्की एक्सरसाइज रूटीन में शामिल करें

घुटनों में दर्द होने पर पूरी तरह आराम करने के बजाय हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना मददगार हो सकता है। इससे घुटने के आसपास की मसल्स एक्टिव रहती हैं और जोड़ को हिलाने में आसानी होती है। हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच के लिए कुर्सी पर बैठकर एक पैर सामने सीधा करें और थोड़ा आगे झुकें। काफ स्ट्रेच में दीवार पर हाथ रखकर एक पैर पीछे करें और एड़ी जमीन पर रखें। इसके अलावा कुर्सी पर बैठकर पैर को सीधा करके 5 सेकंड रोकें और फिर नीचे करें।

6. घुटने की हल्के गर्म तेल से मालिश करें

घुटने के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने से कुछ लोगों को दर्द और जकड़न में आराम महसूस हो सकता है। इसके लिए तिल, नारियल या सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल कर सकते हैं। घुटने और आसपास की मसल्स पर करीब 10 मिनट तक हल्के हाथों से गोल-गोल मालिश करें।

7. डाइट में ओमेगा-3 वाली चीजें शामिल करें

ओमेगा-3 शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और सूजन से जुड़े प्रोसेस में भूमिका निभाता है। इसलिए इसे बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। मछली खाने वाले लोग मैकेरल यानी बांगड़ा, सार्डिन और हिलसा जैसी मछली खा सकते हैं, जबकि शाकाहारी लोग अलसी, अखरोट और चिया सीड्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं। साथ ही बहुत ज्यादा तला-भुना खाना कम करना बेहतर है।

घुटने के दर्द के लिए डॉक्टर को दिखाएं

घुटने के दर्द में घरेलू उपायों से राहत न मिले या दर्द बार-बार परेशान करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यदि दर्द दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, घुटने में ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, पैर पर वजन रखने या खड़े होने में परेशानी हो, घुटना अचानक जवाब देने लगे, जोड़ टेढ़ा या असामान्य दिखाई दे या आप घुटने को पूरी तरह मोड़ या सीधा न कर पा रहे हों, तो इसे नजरअंदाज न करें।

न बड़ा रेस्टोरेंट, न महंगा खाना… ₹100 की थाली से लाखों की बिक्री, जानें कैसे चल रहा ये कारोबार?

गांव के पास मुख्य सड़क पर मौजूद एक छोटी-सी खाने की दुकान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। आमतौर पर लोग बड़ी दुकानों और शहरों के कारोबार को ही ज्यादा कमाई वाला मानते हैं, लेकिन इस दुकान की कहानी कुछ अलग तस्वीर दिखाती है। यहां कम कीमत में मिलने वाला खाना और लगातार आने वाले ग्राहक लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। दुकान के मालिक से हुई बातचीत में रोजाना ग्राहकों और टिफिन ऑर्डर को लेकर कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए, जिन्हें देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी चर्चा करने लगे।

खास बात यह है कि दुकान किसी बड़े शहर या महंगे बाजार में नहीं, बल्कि गांव के पास स्थित है। इसके बावजूद कारोबार को लेकर सामने आई जानकारी ने छोटे और स्थानीय बिजनेस की क्षमता पर नई बहस छेड़ दी है। आखिर इस छोटी दुकान की कमाई का पूरा गणित क्या है और लोग इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों कर रहे हैं? आगे जानिए।

₹100 में मिलती है पूरी थाली

सोशल मीडिया यूजर नलिनी उनागर ने इस दुकान की जानकारी X पर साझा की। पोस्ट के मुताबिक, दुकान पर सिर्फ 100 रुपये में पूरी थाली मिलती है। इसमें दो सब्जियां, रोटी, दाल, चावल, पापड़ और सलाद शामिल हैं। यानी ग्राहक को कम कीमत में काफी कुछ खाने को मिल जाता है। दुकान की यही खासियत इसे आसपास के लोगों के लिए पसंदीदा विकल्प बनाती है।

रोज 25 से ज्यादा लोग खाते हैं खाना

नलिनी उनागर ने दुकान के मालिक से बातचीत में पूछा कि रोज कितने लोग यहां खाना खाते हैं। मालिक के अनुसार, हर दिन 25 से ज्यादा ग्राहक दुकान पर बैठकर खाना खाते हैं। दुकान मुख्य सड़क पर होने के कारण वहां आने-जाने वाले लोगों को भी आसानी से खाना मिल जाता है। यही लोकेशन कारोबार के लिए बड़ा फायदा साबित होती दिखाई दे रही है।

40 से ज्यादा टिफिन ऑर्डर भी

दुकान की कमाई सिर्फ सामने बैठकर खाना खाने वाले ग्राहकों से नहीं होती। मालिक के अनुसार, रोजाना 40 से ज्यादा पक्के टिफिन ऑर्डर भी मिलते हैं। जब दोनों आंकड़ों को जोड़ा जाए तो रोजाना 65 से ज्यादा थाली बिकने का दावा सामने आता है।

गांव में कौन मंगाता है टिफिन?

यह सवाल भी दिलचस्प है कि गांव में टिफिन की जरूरत किसे पड़ती है। मालिक ने बताया कि उनके ग्राहकों में खेतों में काम करने वाले लोग और अकेले रहने वाले बुजुर्ग शामिल हैं। ऐसे लोगों के लिए रोज खाना बनाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सस्ती और तैयार थाली उनके लिए सुविधाजनक विकल्प बन जाती है।

₹100 की थाली से कितनी कमाई?

अगर रोजाना 65 थाली 100 रुपये के हिसाब से बिकती हैं, तो गणित कुछ ऐसा बनता है:

एक दिन की बिक्री: ₹6,500

30 दिन की बिक्री: ₹1.95 लाख

एक साल की बिक्री: ₹23.4 लाख

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कुल बिक्री का अनुमान है, मुनाफा नहीं।

दुकान में कर्मचारी भी नहीं रखने पड़ते

पोस्ट के अनुसार, दुकान का खाना मालिक और उनकी पत्नी खुद तैयार करते हैं। इससे कर्मचारियों की सैलरी का अतिरिक्त खर्च बचता है। इतना ही नहीं, मालिक की अपनी खेती भी है और वह वहां सब्जियां उगाते हैं। इससे दुकान के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ सब्जियों की लागत कम हो जाती है।

हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा मुनाफे का दावा

सोशल मीडिया पोस्ट में दुकान के 60 फीसदी तक मुनाफे का दावा किया गया। इस हिसाब से हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा होने की बात कही गई। लेकिन यही दावा ऑनलाइन बहस का कारण भी बन गया।

मुनाफे के हिसाब पर क्यों उठे सवाल?

कुछ यूजर्स ने कहा कि 1.95 लाख रुपये की मासिक बिक्री का हिसाब तो आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन 1 लाख रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा तय करने के लिए सभी खर्चों को देखना जरूरी है।इन खर्चों में सब्जी और राशन, LPG, बिजली, पैकिंग, खाना खराब होने का नुकसान, डिलीवरी और किराया शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा मालिक और उनकी पत्नी की मेहनत को भी लागत में जोड़ना होगा। इसलिए 60 फीसदी का मुनाफा एक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी से नहीं होती।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि छोटे कारोबार को कम नहीं आंकना चाहिए। उनके मुताबिक, कम कीमत, लगातार ग्राहक और कम खर्च मिलकर छोटे बिजनेस को भी बड़ा बना सकते हैं। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग छोटे और मध्यम स्तर के कारोबार पर निर्भर हैं, इसलिए ऐसी दुकान का सफल होना कोई हैरानी की बात नहीं है।

₹100 में इतनी चीजें, लोगों को लगा शानदार सौदा

कई लोगों ने दुकान की कीमत और खाने की मात्रा की तारीफ भी की। उनका कहना था कि 100 रुपये में इतनी चीजें मिलना ग्राहकों के लिए काफी अच्छा सौदा है। हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि खाने के कारोबार में कम कीमत के साथ साफ-सफाई और गुणवत्ता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक ग्राहक बनाए रखने के लिए स्वाद के साथ हाइजीन भी जरूरी है।

 

Honasa Consumer Q1 Results: ममाअर्थ की पैरेंट कंपनी का मुनाफा 118% उछला, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Honasa Consumer Q1 Results: FMCG कंपनी Honasa Consumer ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे दर्ज किए हैं। Mamaearth की पैरेंट कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 118.4% बढ़कर ₹90.2 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹41.3 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 27% बढ़कर ₹756 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह ₹595.2 करोड़ था। कंपनी ने पहली बार 11.5% का PAT मार्जिन हासिल किया। Honasa Consumer का EBITDA बढ़कर ₹110.1 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹45.7 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 7.68% से बढ़कर 14.57% हो गया।

दो प्रोडक्ट का दमदार प्रदर्शन

Honasa Consumer ने बताया कि उसकी फोकस कैटेगरी में 35% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज हुई। Mamaearth की ग्रोथ हाई-टीन्स में रही। Rice Dewy Bright Face Wash कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला फेस क्लींजर बन गया। वहीं Rosemary हेयर रेंज का सालाना रेवेन्यू ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया।

The Derma Co. ने भी बड़ा मुकाम हासिल किया। इस ब्रांड का सालाना नेट सेल्स वैल्यू ₹1,000 करोड़ के पार पहुंच गया। कंपनी का दावा है कि पिछले 10 साल में वह भारत की पहली FMCG कंपनी बनी है, जिसने दो ₹1,000 करोड़ के ब्रांड खड़े किए हैं।

नए ब्रांड और ऑफलाइन कारोबार भी बढ़ा

Honasa Consumer के नए ब्रांड्स में 40% से ज्यादा ग्रोथ रही। BTM Ventures का सालाना रेवेन्यू ₹150 करोड़ के पार पहुंच गया। यह अब दक्षिण भारत से बाहर महाराष्ट्र और दूसरे बाजारों में भी विस्तार कर रहा है।

ऑफलाइन कारोबार भी मजबूत रहा। जनरल ट्रेड और मॉडर्न ट्रेड, दोनों में 40% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई। कंपनी की पहुंच अब करीब 3 लाख FMCG रिटेल आउटलेट तक हो गई है। Honasa ने इसी तिमाही में FIKN नाम से फ्रेगरेंस कैटेगरी में भी एंट्री की है।

आगे क्या है कंपनी का प्लान?

चेयरमैन और CEO वरुण आलाघ ने कहा कि कंपनी की ग्रोथ अब सिर्फ एक ब्रांड पर निर्भर नहीं है। अलग-अलग ब्रांड और कैटेगरी से मजबूत मांग मिल रही है। कंपनी आगे भी नए प्रोडक्ट, डिजिटल विस्तार और ऑफलाइन नेटवर्क पर फोकस रखेगी।

Honasa Consumer का शेयर गुरुवार को 2.48% बढ़कर ₹479 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 67.98% का रिटर्न दिया है।

Solar Industries Q1 Results: डिफेंस कंपनी का मुनाफा 93% बढ़ा, रेवेन्यू भी तगड़ा उछाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Noida Plot Scheme: नोएडा एयरपोर्ट के पास घर बनाने का सुनहरा मौका! YEIDA ला रहा 2 नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम, जानिए सबकुछ

YEIDA Residential Plot Schemes: उत्तर प्रदेश के जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रेजिडेंशियल प्लॉट की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) नवरात्रि के दौरान दो नई रिहायशी प्लॉट योजनाएं लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। नई योजनाओं में पहली स्कीम कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इन दोनों योजनाओं की घोषणा अक्टूबर में होने की संभावना है।

आपके बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 जून को फ्लाइट ऑपरेशन शुरू हुए थे। इसके दो दिन बाद कार्गो टर्मिनल भी खुल गया था। YEIDA के एडिशनल CEO शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि अथॉरिटी अभी स्कीम की बारीकियों पर काम कर रही है। जल्द ही प्लॉट की सही संख्या और अन्य जानकारी की घोषणा की जाएगी।

40 वर्गमीटर के प्लॉट वाली होगी LIG स्कीम

हाल ही में YEIDA ने अक्टूबर में नवरात्रि के दौरान दो नई रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम लॉन्च करने की घोषणा की है। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, इनमें से एक स्कीम कम आय वाले ग्रुप के लिए होगी। इसमें 40 वर्ग मीटर के प्लॉट मिलेंगे। दूसरी स्कीम आम जनता के लिए होगी। इसमें प्लॉट का साइज़ 162 से 300 वर्ग मीटर के बीच होगा।

दोनों स्कीम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के पास सेक्टर 5-A में शुरू की जाएंगी। यानी अलग-अलग जरूरत और बजट वाले लोग अपनी पसंद के आकार का प्लॉट हासिल करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे सीमित बजट वाले लोगों को एयरपोर्ट के आसपास अपना घर बनाने का मौका मिल सकेगा।

पहले प्लॉट मिल चुका है तो नहीं कर पाएंगे अप्लाई

YEIDA ने योजनाओं में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा नए लोगों को मौका देने के लिए एक अहम शर्त रखी है। जिन लोगों को पहले नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी या YEIDA की किसी पिछली रेजिडेंशियल प्लॉट स्कीम में प्लॉट मिल चुका है, वे इन नई स्कीम के लिए अप्लाई नहीं कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन लोगों को दोबारा लाभ लेने से रोकना है, जिन्हें पहले ही किसी प्राधिकरण की योजना के तहत रिहायशी प्लॉट आवंटित किया जा चुका है।

प्लॉट की कीमत समेत अन्य जानकारी

फिलहाल, यमुना प्राधिकरण के मुताबिक इस एरिया में रेजिडेंशियल प्लॉट का आवंटन रेट 36,260 रुपये प्रति वर्गमीटर है। हालांकि, नई योजनाओं में प्लॉट की अंतिम कीमत और अन्य शुल्क से जुड़ी जानकारी प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। यह कदम यमुना अथॉरिटी द्वारा जून में एयरपोर्ट के पास ही लकी ड्रॉ के जरिए भारी संख्या में रेजिडेंशियल प्लॉट अलॉट करने के ठीक बाद उठाया गया है। अप्रैल में घोषित उस स्कीम को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

जून में 973 प्लॉट के लिए आए थे 1.1 लाख आवेदन

नई योजनाओं की घोषणा ऐसे समय में हो रही है जब YEIDA की पिछली रिहायशी प्लॉट योजना को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। इतने ही प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज़्यादा वैलिड एप्लीकेशन आए थे। बेहतर एयर कनेक्टिविटी, शानदार लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और इलाके में बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्रोथ की संभावनाओं ने इस क्षेत्र को घर खरीदारों के लिए एक आकर्षक जगह बना दिया है। यह स्कीम अप्रैल में घोषित की गई थी। इसमें 973 प्लॉट के लिए 1.1 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोएडा एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी जमीन को लेकर लोगों में कितनी मजबूत दिलचस्पी है।

नोएडा एयरपोर्ट के कारण बढ़ी इलाके की डिमांड

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तेजी से विकास हो रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद इस इलाके में कनेक्टिविटी एवं निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। बेहतर हवाई संपर्क के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों की उम्मीद ने यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को घर खरीदारों और निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। यही वजह है कि एयरपोर्ट के आसपास रिहायशी प्लॉट की योजनाओं में बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर रहे हैं। अब नवरात्रि के दौरान प्रस्तावित इन दो नई स्कीमों पर भी हजारों-लाखों लोगों की नजर रहने की उम्मीद है।

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Kalanamak Rice: अपनी खास सुगंध और गुणों के लिए फेमस कालानमक चावल की खेती और इसकी बिक्री ने उत्तर प्रदेश के किसानों की किस्मत बदल दी है। हाल के वर्षों में कालानमक चावल के खेती के क्षेत्रफल और प्रोडक्शन दोनों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इससे किसानों की इनकम भी बढ़ी है। साल 2018 में जहां कालानमक चावल का बिक्री मूल्य ₹40 प्रति किलोग्राम था। वहीं, साल 2026 में यह बढ़कर ₹150 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसी का असर है कि सामान्य चावल की तुलना में इसकी खेती करने वाले किसानों के लाभ में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान काला नमक चावल को लेकर अहम जानकारियां शेयर की हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों में आए इस भारी उछाल और बेहतर वित्तीय लाभ की वजह से इस धान को उगाने वाले किसानों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सिद्धार्थनगर जिले में साल 2018 में जहां सिर्फ 2915 किसान कालानमक धान की खेती करते थे। वहीं, 2024 तक यह संख्या बढ़कर 23000 पहुंच गई है। इसके साथ ही सिद्धार्थनगर में 2018 से 2025 के दौरान इसका उत्पादन 5 गुना से अधिक बढ़ा है।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली मदद के बारे में जानिए

कालानमक चावल की खेती करने वाले किसानों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की ओर से वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग से जुड़ी मदद दी जा रही है। पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) मार्जिन मनी योजना के तहत व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाइयों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कालानमक प्रसंस्करण और मिलिंग यूनिट्स बनाने पर 35 फीसदी (अधिकतम ₹10 लाख) तक क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी दी जाती है।

इसके अलावा सरकार कालानमक महोत्सव का आयोजन कर इस चावल के ब्रांड का प्रचार-प्रसार कर रही है। स्थानीय किसानों को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिद्धार्थनगर में ओडीओपी योजना के तहत एक सामान्य सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कालानमक चावल के प्रचार, उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए विशेष प्रोजेक्ट फंडिंग भी निर्धारित की है।

6 नई उन्नत किस्में विकसित, उत्पादकता हुई लगभग दोगुनी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली कालानमक चावल की नई किस्मों के विकास और पारंपरिक किस्मों के संरक्षण में लगी हुई है। पारंपरिक किस्मों के अलावा कालानमक की छह नई और उन्नत किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं। इनमें कालानमक KN3, बौना कालानमक 101, बौना कालानमक 102, कालानमक किरण, पूसा नरेंद्र कालानमक 1 और पूसा सीआरडी कालानमक 2 शामिल हैं।

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नई बौनी और अधिक उपज देने वाली ये किस्में बेहद असरदार साबित हो रही हैं। जहां पारंपरिक किस्मों की औसत उपज 2.5 टन प्रति हेक्टेयर होती है, वहीं इन नई किस्मों की औसत उपज 4.5 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलती है। बीज कार्यक्रम के तहत पिछले 5 वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान कुल 389.6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण कालानमक बीज का उत्पादन कर किसानों को बांटे गए हैं। हर साल 15-20 क्विंटल ब्रीडर बीज का उत्पादन भी किया जा रहा है।

‘बुद्ध राइस’ के नाम से वैश्विक पहचान, सिंगापुर से नेपाल तक निर्यात

सरकार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के माध्यम से कालानमक चावल के निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रही है। APEDA क्षेत्रीय किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़कर सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में निर्यात शिपमेंट की सुविधा प्रदान कर रहा है। जापान, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और म्यांमार जैसे बौद्ध बहुल देशों के हाई प्राइज मार्केट को टारगेट करने के लिए कालानमक चावल को बुद्ध राइस (Buddha Rice) के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।

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धुंध में लिपटे पहाड़ और झरनों की गर्जना, मॉनसून 2026 में एशिया की 10 सबसे खूबसूरत जगहें!

बारिश का मौसम सिर्फ ठंडी हवाएं और सुकून ही नहीं लाता, बल्कि कई जगहों की खूबसूरती भी कई गुना बढ़ा देता है। एशिया में ऐसे कई ट्रैवल डेस्टिनेशन (travel destination) हैं, जो मानसून (monsoon)के दौरान धुंध से ढकी पहाड़ियों, झरनों, हरियाली और खूबसूरत नजारों से किसी फिल्मी सीन जैसे लगते हैं। अगर आपको बारिश में घूमना पसंद है, तो ये जगहें आपकी अगली ट्रिप (trip) के लिए बेहतरीन साबित हो सकती हैं:

Udaipur, India (उदयपुर, भारत)

Udaipur in Monsoon: Best Places to Visit, Things to Do & Stays

राजस्थान का उदयपुर बारिश के मौसम में और भी खूबसूरत दिखने लगता है। दिल्ली, मुंबई और जयपुर जैसे शहरों से यहां ट्रेन, फ्लाइट और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मानसून में पिछोला झील (Lake Pichola) पानी से भर जाती है और सिटी पैलेस का नजारा देखने लायक होता है। आप मानसून पैलेस (Monsoon Palace) , फतेह सागर झील (Fateh Sagar Lake)और बोट राइड का भी आनंद ले सकते हैं।

Munnar, India (मुन्नार, भारत)

10 Places In India That Feel Like Europe During Monsoon

केरल का मुन्नार मानसून में किसी हरे स्वर्ग जैसा नजर आता है। कोच्चि एयरपोर्ट से लगभग 4 घंटे की रोड ट्रिप करके यहां पहुंचा जा सकता है। बारिश के दौरान चाय के बागान, अट्टुकल वॉटरफॉल (Attukal Waterfalls) और धुंध से ढकी पहाड़ियां पर्यटकों (tourists) को खूब आकर्षित करती हैं। यहां बैठकर गर्म चाय के साथ बारिश का आनंद लेना एक अलग ही एक्सपीरियंस है।

Baguio, Philippines (बगियो, फ़िलीपींस)

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अगर आप बारिश के मौसम में ठंडी हवा और पहाड़ों का मजा लेना चाहते हैं, तो फिलीपींस का बगियो शहर बेहतरीन जगह है। मनीला (Manila) से करीब 4 से 6 घंटे की सड़क यात्रा (road trip) करके यहां पहुंचा जा सकता है। में यहां की पहाड़ियां धुंध से ढक जाती हैं और मौसम काफी ठंडा हो जाता है। बरनहम पार्क (Burnham Park) में घूमना, लोकल कैफे में गर्म कॉफी पीना और आसपास के व्यू पॉइंट्स से नजारे देखना यहां का खास एक्सपीरियंस है।

Ubud, Indonesia (उबुद, इंडोनेशिया)

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उबुद बाली द्वीप ( island ) पर है। भारत से पहले बाली (Denpasar) की फ्लाइट लें और वहां से करीब डेढ़ घंटे की टैक्सी राइड करके उबुद पहुंच सकते हैं। बारिश के मौसम में यहां के धान के खेत, झरने और जंगल बेहद हरे-भरे हो जाते हैं। सुबह की सैर, योग सेशन और तेगालालंग राइस टैरेस (Tegalallang Rice Terrace) की खूबसूरती इस मौसम में और बढ़ जाती है।

Chiang Mai, Thailand (चियांग माई, थाईलैंड)

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थाईलैंड (Thailand )का चियांग माई मानसून में हरियाली से भर जाता है। बैंकॉक (Bangkok) से फ्लाइट या ट्रेन के जरिए यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। बारिश के बाद यहां की पहाड़ियां, धान के खेत और दोई इनथानोन नेशनल पार्क (Doi Inthanon National Park) बेहद खूबसूरत दिखते हैं। सुबह मंदिर घूमने और शाम को नाइट मार्केट का मजा लेने का यह अच्छा समय माना जाता है।

 

Hoi An, Vietnam (होई आन, वियतनाम)

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होई आन अपने पुराने शहर और रंग-बिरंगी लालटेनों के लिए मशहूर है। दा नांग एयरपोर्ट से करीब 45 मिनट की रोड ट्रिप करके यहां पहुंचा जा सकता है। बारिश के मौसम में यहां की गलियां और नदी किनारा और भी अट्रेक्टिव दिखते हैं। आप लालटेन बनाने की वर्कशॉप, लोकल फूड और नदी किनारे शाम बिताने का आनंद ले सकते हैं।

Luang Prabang, Laos (लुआंग प्रबांग, लाओस)

Luang Prang Laos View. Mount Phousi. South East Asia, View Town and Surrounding Countryside. Golden Pagoda of Wat Chom Stock Image - Image of mountain, prabang: 251752541

लाओस का यह शांत शहर मानसून में हरियाली से भर जाता है। यहां फ्लाइट से पहुंचना सबसे आसान तरीका है। बारिश के दौरान कुआंग सी वॉटरफॉल (Kuang Si Waterfall) पूरे वेग से बहता है और देखने लायक नजारा पेश करता है। मंदिरों की सैर, मेकांग नदी में बोट राइड और नाइट मार्केट घूमना यहां की खास एक्टिविटी हैं।

Kyoto, Japan (क्योटो, जापान)

Tsuyu Rainy Days In Kyoto, Japan | Outlook Traveller

जापान का क्योटो बारिश के मौसम में बेहद शांत और खूबसूरत लगता है। टोक्यो या ओसाका से बुलेट ट्रेन के जरिए आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। मानसून में यहां के मंदिर, मॉस गार्डन (moss garden) और हाइड्रेंजिया (hydrangea) के फूल बेहद सुंदर नजर आते हैं। इस मौसम में टूरिस्ट की भीड़ भी कम रहती है, जिससे आराम से घूमने का मौका मिलता है।

George Town, Malaysia (जॉर्ज टाउन, मलेशिया)

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मलेशिया के पेनांग द्वीप (Penang Island) पर जॉर्ज टाउन अपने हेरिटेज (street food) और स्ट्रीट फूड (street food) के लिए जाना जाता है। पेनांग एयरपोर्ट (Penang Airport) से कुछ ही देर में यहां पहुंच सकते हैं। बारिश के मौसम में पुरानी इमारतें और सड़कें अलग ही खूबसूरती बिखेरती हैं। यहां का लोकल खाना, कैफे और स्ट्रीट आर्ट टूरिस्ट को खूब पसंद आते हैं।

Arugam Bay, Sri Lanka (अरुगम बे, श्रीलंका)

Sri Lanka with arugam bay coastline wild tropical plants southwest monsoon season 78542208 Stock Photo at Vecteezy

अगर आपको सर्फिंग पसंद है, तो श्रीलंका का अरुगम बे (Arugam Bay) बारिश के मौसम में शानदार जगह है। कोलंबो (Colombo) से डोमेस्टिक फ्लाइट या रोड के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। मानसून के दौरान यहां समुद्र की ऊंची लहरें सर्फिंग के लिए बेहतरीन मानी जाती हैं। इसके अलावा शांत बीच, ताजा सी-फूड और खूबसूरत सूर्योदय भी यहां की खास पहचान हैं।

Thali Price: घर का खाना हुआ महंगा, 5 महीने के हाई पर शाकाहारी और नॉन-वेज थाली की कीमत

Thali Price: जून में घर पर बनने वाली शाकाहारी और नॉन-वेज थाली दोनों की लागत पिछले पांच महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इसकी वजह टमाटर, प्याज, खाद्य तेल, रसोई गैस (LPG) और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतें रहीं। यह जानकारी Crisil Intelligence की मासिक Roti Rice Rate रिपोर्ट में दी गई है।

जून में शाकाहारी थाली की कीमत 28.4 रुपये रही, जो मई में 27.4 रुपये थी। यानी एक महीने में इसमें 4% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, जून 2025 के मुकाबले यह 5% महंगी हो गई। दूसरी ओर, नॉन-वेज थाली की कीमत 58.2 रुपये रही, जो मई में 56.5 रुपये थी। यह मासिक आधार पर 3% और पिछले साल के मुकाबले 6% महंगी हुई।

टमाटर ने सबसे ज्यादा बढ़ाया खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, टमाटर की कीमत एक साल में 31% बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। जून 2025 में यह 32 रुपये प्रति किलो थी। फरवरी और मार्च में ज्यादा गर्मी पड़ने की वजह से गर्मियों की फसल की बुआई देर से हुई और उत्पादन भी कम रहा। इसी कारण टमाटर महंगा हुआ।

वहीं, प्याज की कीमत सालाना आधार पर 2% बढ़ी, क्योंकि बाजार में महंगे रबी स्टॉक की आवक शुरू हुई। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य तेल और LPG सिलेंडर की कीमतों में भी सालाना 10-10% की बढ़ोतरी हुई। इसकी एक वजह पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होना भी रही।

मई के मुकाबले जून में टमाटर 17%, आलू 5% और प्याज 8% महंगे हुए। इसी वजह से जून में शाकाहारी थाली की लागत और बढ़ गई। हालांकि, आलू की कीमतों में 14% की गिरावट आई। नई रबी फसल आने से इसकी कीमत कम हुई। इससे थाली की लागत में बढ़ोतरी कुछ हद तक सीमित रही।

नॉन-वेज थाली क्यों हुई महंगी?

नॉन-वेज थाली की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ब्रॉयलर चिकन रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रॉयलर की कीमत सालाना आधार पर करीब 7% बढ़ी, जबकि महीनेभर में इसमें करीब 2% की तेजी आई।

Crisil के अनुसार, नॉन-वेज थाली की कुल लागत का करीब आधा हिस्सा ब्रॉयलर पर निर्भर करता है। भीषण गर्मी की वजह से सप्लाई कम रही, जिससे चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली।

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Weekly monsoon tracker: बारिश की बढ़ती कमी और जलाशयों का घटता लेवल बढ़ा रहा चिंता, 22.7% गिरी खरीफ फसलों की बुआई

Weekly monsoon tracker:  बारिश की बढ़ती कमी, मॉनसून की धीमी रफ़्तार और जलाशयों के कम लेवल की वजह से खेती-बाड़ी वाले खास राज्यों में चावल और कपास जैसी गर्मियों की फसलों की बुआई पर असर पड़ा है। 25 जून तक खरीफ की बुआई पिछले साल के मुकाबले 22.7 फीसदी कम हुई है।

खरीफ फसलों का रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर रहा, जो एक साल पहले के 236.46 लाख हेक्टेयर से कम है यानी 53.74 लाख हेक्टेयर की कमी आई। यह कमी सभी मुख्य फसलों की कैटेगरी में थी, जिसमें तिलहन, कपास, चावल और दालों का रकबा कम रहा।

तिलहन में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई, जिसका रकबा एक साल पहले के 36.41 लाख हेक्टेयर से 19.42 लाख हेक्टेयर घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गया। तिलहन में, सोयाबीन की बुआई सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई है, जो 13.05 लाख हेक्टेयर कम हुई है, इसके बाद मूंगफली की बुआई 6.42 लाख हेक्टेयर कम हुई है।

भारत का सोयाबीन इंपोर्ट बढ़ रहा है, देश चीन समेत कुछ सप्लायर्स पर निर्भर है। मई तक, भारत के कच्चे सोयाबीन तेल के इंपोर्ट में चीन का 8.1 फीसदी हिस्सा था।

कपास का रकबा 15.70 लाख हेक्टेयर घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि चावल की बुआई 8.65 लाख हेक्टेयर घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गई। दालों का रकबा भी कमज़ोर हुआ है, जो 6.53 लाख हेक्टेयर कम हुआ है, जिसमें अरहर और उड़द सबसे आगे हैं।

बारिश और जलाशयों की चिंताए

बारिश का डिस्ट्रीब्यूशन अभी भी अनियमित है। इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा और विदर्भ में भारी बारिश का अनुमान लगाया है, लेकिन बिहार, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हीटवेव की स्थिति बनी हुई है, जिससे कुछ उत्तरी इलाकों में बुआई में देरी हो रही है।

29 जून को बारिश में कमी 43 फीसदी के हाई लेवल पर पहुंच गई थी। बुआई कमजोर इसलिए है क्योंकि मॉनसून की तरक्की एक जैसी नहीं है, देश के 48 फीसदी हिस्से में कमी है और 26 फीसदी हिस्से में बड़ी कमी है।

रिजर्वॉयर का लेवल चिंता को और बढ़ा देता है। 166 बड़े रिज़र्वॉयर में लाइव स्टोरेज पिछले साल के लेवल से कम था। रिज़र्वॉयर अपनी कैपेसिटी के 26.4 फीसदी तक भरे हुए हैं, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 36 फीसदी था, लेकिन यह पांच साल के एवरेज से 5 फीसदी ज़्यादा है।

खास तौर पर दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में दबाव दिख रहा है, जो खरीफ की खेती के लिए ज़रूरी हैं। दक्षिणी इलाके के रिज़र्वॉयर 20.8 फीसदी पर हैं, जो पिछले साल के 44.7 फीसदी के आधे से भी कम हैं। कर्नाटक के जलाशय एक साल पहले के 48.6 फीसदी के मुकाबले सिर्फ़ 14.7 फीसदी भरे हैं, जबकि तमिलनाडु का स्टोरेज 81 फीसदी से घटकर 34.3 फीसदी हो गया है। पूर्व में, ओडिशा के जलाशय सिर्फ़ 15.3 फीसदी भरे हैं, जो पिछले साल के 22.4 फीसदी से कम है।

जलाशय का लेवल कम होने से धान, कपास और दालों जैसी फसलों के लिए सिंचाई में मदद कम हो जाती है, जिससे बुवाई समय पर बारिश पर ज़्यादा निर्भर हो जाती है। अगर जुलाई में बारिश कमज़ोर रहती है, तो फसल उत्पादन, ग्रामीण आय और खाने की चीज़ों की महंगाई, खासकर दालों और खाने के तेलों को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

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62 की उम्र में भी गजब की फिटनेस! न जिम, न भारी वर्कआउट, फिर भी सबको चौंका रही है इस शख्स की लाइफस्टाइल

फिट रहने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाना या महंगे सप्लीमेंट लेना ही जरूरी हो, ऐसा नहीं है। कई बार छोटी-छोटी रोजमर्रा की आदतें भी उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को चुस्त और स्वस्थ बनाए रख सकती हैं। इसका उदाहरण चेन्नई के 62 वर्षीय एक शख्स हैं, जिन्होंने अपनी सादगी भरी लाइफस्टाइल और आसान फिटनेस रूटीन से लोगों का ध्यान खींचा है। उनकी फिट बॉडी देखकर कई लोग हैरान रह जाते हैं, लेकिन उनकी दिनचर्या किसी प्रोफेशनल एथलीट जैसी नहीं है। न वह भारी वर्कआउट करते हैं और न ही किसी फैंसी डाइट को फॉलो करते हैं।

उनका मानना है कि नियमित व्यायाम, घर का साधारण खाना और अनुशासित दिनचर्या ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे आसान तरीका है। उनकी यही सोच अब सोशल मीडिया पर लोगों को फिटनेस का नया नजरिया दे रही है।

न वेट ट्रेनिंग, न घंटों जिम… फिर भी कमाल की फिटनेस

जब उनसे उनकी फिटनेस का राज पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह जिम जाकर भारी वजन नहीं उठाते। उनकी सुबह हल्की स्ट्रेचिंग से शुरू होती है, जबकि शाम को वह बैडमिंटन खेलते हैं। उनका कहना है कि शरीर को रोज एक्टिव रखना सबसे जरूरी है। दिलचस्प बात यह रही कि जब उनकी फिट बॉडी की तारीफ की गई तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें खुद नहीं पता था कि लोग उन्हें इतना फिट मानते हैं।

घर का खाना ही है सबसे बड़ा ‘सुपरफूड‘

उनकी डाइट बेहद साधारण है। सुबह नाश्ते में 3 इडली, अंडे का सफेद हिस्सा और सलाद खाते हैं। बीच में भूना चना लेते हैं। दोपहर में चपाती, दही-चावल और सब्जियां खाते हैं। रात के खाने में चपाती, सब्जियां, चना और काली दाल शामिल होती है। खास बात यह है कि उन्होंने चावल और रोटी जैसे कार्बोहाइड्रेट को अपनी डाइट से बाहर नहीं किया है।

कम नींद, लेकिन पक्की दिनचर्या

वह रोज करीब 6 घंटे की नींद लेते हैं। हालांकि आमतौर पर 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है, लेकिन उनका कहना है कि नियमित दिनचर्या और एक्टिव लाइफस्टाइल उन्हें पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखती है।

फिट रहने का आसान मंत्र

उनका मानना है कि रोज थोड़ा पसीना बहाना जरूरी है। इसके लिए दौड़ना, तेज चलना, बैडमिंटन या कोई भी पसंदीदा खेल खेला जा सकता है। साथ ही उन्होंने जंक फूड से दूरी बनाने और घर का ताजा खाना खाने की सलाह दी। उनके अनुसार अच्छी दिनचर्या, संतुलित भोजन और नियमित गतिविधियां कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती हैं।

डिस्क्लेमर : यह जानकारी एक व्यक्ति के अनुभव पर आधारित है। स्वास्थ्य, व्यायाम या आहार से जुड़ा कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।