Government bars sugar-based ethanol in 2026-27 tender: Report

Government bars sugar-based ethanol in 2026-27 tender: Report
Car being refuelled with petrol

Sugar-based ethanol has been left out of India’s ethanol tender for the 2026-27 supply year, according to a Reuters report. Citing the tender issued on October 16, the report states that the government has instructed state-run oil marketing companies (OMCs) to ensure no sugar is diverted towards ethanol production for this period. No bids have therefore been invited for ethanol produced using sugarcane juice, sugar or sugar syrup, or B-heavy molasses, the report adds.

  1. Oil firms invited bids for 11 billion litres of ethanol for 2026-27
  2. Tender allows bids for ethanol made from corn, broken rice and surplus FCI rice
  3. Incentive for corn-based ethanol cut from Rs 5.79/litre to Rs 2.79/litre

Tender details

It seeks 11 billion litres for the supply year starting in November 2026

The tender comes from Indian Oil, Bharat Petroleum and Hindustan Petroleum. “The Government of India has issued directions that sugar diversion for ethanol be reduced to zero for ethanol supply year 2026-27,” the tender document said, according to the report.

The companies are looking to procure 11 billion litres of ethanol for the supply year, which kicks off in November 2026. Distillers can submit bids for ethanol produced from corn, broken rice and surplus FCI (Food Corporation of India) rice. Corn-based ethanol will also fetch less this time. Its incentive has dropped by Rs 3 per litre to Rs 2.79 per litre, taking the procurement price from Rs 71.86 per litre to Rs 68.86 per litre, as per the report.

Ethanol blending and sugar supply

India is trying to rein in high sugar prices

Surplus sugar has been a key contributor to India’s ethanol-blending programme for several years. India also consumes more sugar than any other country, and has been trying to increase local production while easing prices.

Reuters had reported in August 2026 that limits on the use of sugarcane for ethanol were being considered for the season starting October 2026. Weaker rains in Maharashtra and Karnataka had already cast doubt on this year’s sugar production at the time.

Ethanol blending is aims to reduce India’s oil imports. E20 petrol, which became compulsory nationwide earlier this year, was introduced to cut emissions as well as the country’s dependence on imported crude. However, diverting sugarcane juice, sugar syrup and B-heavy molasses towards ethanol can lead to a reduction in the amount of sugar produced.

Jantar Mantar: अब दिल्ली में जंतर-मंतर पर नहीं होगा धरना-प्रदर्शन, रामलीला मैदान समेत इन 3 जगहों पर कर सकेंगे प्रोटेस्ट

Jantar Mantar News: राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने की जगहों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की लिस्ट से हटा दिया है। अब उसकी जगह दिल्ली में प्रोटेस्ट के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने इस संबंध में सोमवार (12 अक्टूबर) को एक स्थायी आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।

आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा निर्धारित स्थल के विकल्प के तौर पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की समीक्षा करने के वास्ते एक समिति गठित की थी। आदेश में कहा गया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में गैर अधिसूचित किया गया है।

अब यहां कर सकेंगे प्रदर्शन

जंतर-मंतर को लिस्ट से निकालकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नए स्थानों के तौर पर तय किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन तीनों स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए विस्तृत एवं संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अलग से जारी की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की अपीलों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।

जंतर-मंतर पर हमेशा होता रहता है प्रदर्शन

जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रमुख स्थान रहा है। यहां अलग-अलग मुद्दों को लेकर धरने और प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा। अइस बदलाव के बाद विरोध प्रदर्शन करने वाले संगठनों को नए निर्धारित स्थलों के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी होगी।

दिल्ली में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की अपीलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए अहम है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आदेश के पीछे किसी एक विशिष्ट कारण का विस्तृत उल्लेख नहीं है। इसलिए इस फैसले को किसी खास राजनीतिक दल या प्रदर्शन से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

प्रदर्शन करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों को अब नए निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन की योजना बनानी होगी। इससे विरोध प्रदर्शन के आयोजन, स्थान के चयन और सुरक्षा प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव आएगा। हालांकि, नए स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अनुमति, समय, भीड़ की संख्या और अन्य शर्तों से जुड़े नियम क्या होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध आदेश के आधार पर अलग से सत्यापित की जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा तय जगह के अलावा अन्य उपयुक्त जगहों की जांच करने के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटा दिया गया है। विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नई जगहों रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) को तय किया गया है। इन तीन जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी।”

तीन नए धरना-प्रदर्शन केंद्रों की डिटेल्स

दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, राजधानी में विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नए निर्धारित स्थल होंगे:-

1. रामलीला मैदान: दिल्ली का रामलीला मैदान लंबे समय से बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है।

2. बुराड़ी मैदान: बुराड़ी क्षेत्र में स्थित मैदान को भी धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। यहां प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया संशोधित SOP के तहत तय की जाएगी।

3. सीबीडी मैदान, पूर्वी दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को तीसरे निर्धारित स्थल के रूप में चुना गया है। इसके जरिए राजधानी में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

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2022 के पुराने आदेश में किया गया संशोधन

दिल्ली पुलिस ने बताया कि नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन करता है। नए स्थलों पर धरना-प्रदर्शन की व्यवस्था को लेकर आगे अलग से गाइडलाइंस जारी किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थानों और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। हालांकि, उपलब्ध आदेश में नई SOP के सभी डिटेल्स नियमों का उल्लेख नहीं किया गया है।

Jr NTR: जाह्नवी कपूर के एआई मॉर्फ्ड वीडियो को देख भड़के जूनियर एनटीआर, लीगल एक्शन लेने की चेतावनी दी

Jr NTR: एक बार फिर से जान्हवी कपूर को ‘देवरा’ फिल्म के उनके गाने ‘चुट्टामल्ले’ के एक परेशान करने वाले AI-जनरेटेड वीडियो के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें वह जूनियर NTR के साथ नजर आई थीं। वायरल हो रहा यह AI वीडियो एक्ट्रेस के लुक का मॉर्फ्ड वर्जन है, जिसे डिजिटल रूप से बदलकर ऐसे अश्लील सीन बनाए गए हैं जो ओरिजिनल गाने का हिस्सा कभी नहीं थे।

जूनियर NTR ने X पर ऐसे भद्दे वीडियो बनाए जाने की कड़ी आलोचना की और साफ कहा कि वह इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने लिखा, “यह दिमागी रूप से बीमार लोगों का घिनौना और बेशर्मी वाला काम है। जिस देश में महिलाओं को मां और देवी के रूप में पूजा जाता है, जहां ‘मातृदेवो भव’ सिर्फ एक कहावत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है, वहां कुछ लोग इतने नीचे गिर गए हैं कि वे AI का इस्तेमाल करके किसी महिला का बेहद अपमानजनक तरीके से अनादर कर रहे हैं। AI का इस्तेमाल करके ऐसी घिनौनी चीज बनाना शब्दों से परे शर्मनाक है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस मॉर्फ्ड ‘चुट्टामल्ले’ वीडियो के पीछे जो घटिया लोग हैं, मैं उनमें से किसी को नहीं बख्शूंगा। इसे बनाने वालों और इसे फैलाने वालों के खिलाफ मैं हर संभव कानूनी कार्रवाई करूंगा। कृपया ऐसे कंटेंट को न देखें, न शेयर करें और न ही उस पर कोई प्रतिक्रिया दें। आज यह किसी और के साथ हुआ है। कल यह आपकी मां, बहन, पत्नी या बेटी के साथ भी हो सकता है।”

एक्टर ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है और मैं सभी राज्य सरकारों और भारत सरकार से अपील करता हूं कि वे AI के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कदम उठाएं और कड़े नियम बनाएं।”

देवरा के बारे में

‘चुट्टामल्ले’ एक रोमांटिक गाना है, जो मुख्य किरदारों के बीच की केमिस्ट्री को दिखाता है। यह गाना जंगल और समुद्र बीच के शानदार बैकग्राउंड पर फिल्माया गया है और इसे जान्हवी कपूर द्वारा निभाए गए फीमेल लीड किरदार के नजरिए से दिखाया गया है। इसे अनिरुद्ध रविचंदर ने कंपोज़ किया है और रामाजोगाया शास्त्री ने लिखा है। शिल्पा राव ने अपनी आवाज दी है और बोस्को मार्टिस ने कोरियोग्राफी की है। ‘चुट्टामल्ले’ तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज किया गया था।

इस फिल्म में जूनियर एनटीआर के साथ जान्हवी कपूर, सैफ अली खान, प्रकाश राज, श्रीकांत मेका, टॉम शाइन चाको और नारायण जैसे कई बड़े कलाकार शामिल थे। यह फिल्म 27 सितंबर, 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में जूनियर एनटीआर ने दोहरी भूमिका निभाई है – देवरा और वरधा दोनों की। जसुधा आर्ट्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को साराजू हरि कृष्णा और सुधाकर मिक्किलीनेनी ने प्रोड्यूस किया था और नंदमुरी कल्याण राम ने इसे पेश किया था। यह फिल्म तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी सहित कई भाषाओं में रिलीज हुई थी।

El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

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Gadkari proposes graded license points system for improper behaviour

Gadkari proposes graded license points system for improper behaviour
Nitin Gadkari

In a bid to address driver behavioral issues, the Government of India is planning to introduce a points system for driving licences and vehicle registration certificates. Under this system, repeat traffic offenders could face suspension or cancellation of their licences, according to Road Transport and Highways Minister Nitin Gadkari.

Habitual offenders to be penalised while benefits could be given to those with good records: Gadkari

The proposed system aims to improve driving behaviour and hold habitual offenders accountable, Gadkari said while speaking at the Society of Indian Automobile Manufacturers’ (SIAM) 66th Annual Convention. “My ministry is planning to introduce a graded point system in driving licences and vehicle registration certificates,” Gadkari said. Under the proposed system, points would be deducted for offences committed by drivers, with action taken once the accumulated penalty points cross a specified limit.

“Every offense will cut points on the driving licence. And after a particular limit, the licence will get suspended or even cancelled,” Gadkari said. The minister said the policy would distinguish between responsible drivers and those who repeatedly violate rules. Drivers with good records could receive benefits, including possible incentives from insurance companies, while habitual offenders would face penalties.

“These are exactly the people who have good points; they will get incentives from insurance or companies or whatever benefits will be there. But for those who are habitually making mistakes, the penalty is there. That is the principle behind this policy,” Gadkari said. He said changing driver behaviour was an important challenge in efforts to improve road safety. “Driver behaviour is a big problem. We are now doing a lot of things for that,” Gadkari said.

The proposed points-based system is expected to encourage more responsible driving behaviour, the minister said. He did not specify a timeline for the implementation of the proposed system or provide further details on how the points mechanism would operate.

Iran-US War Update: होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत! भारत सरकार का बड़ा एक्शन, ईरानी राजनयिक तलब

Iran-US War Update: भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों की मंगलवार (14 जुलाई) को कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘एमटी अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दोनों जहाजों के कुल 46 चालक दल के सदस्यों में से 30 भारतीय नाविक थे। ‘एमटी अल बहियाह’ पर सवार 12 भारतीयों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक अन्य घायल हो गया है।” मंत्रालय के अनुसार, “एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीयों में से नौ घायल हुए हैं जिनमें से दो के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।”

मंत्रालय ने कहा कि भारत इन हमलों और नाविकों को निशाना बनाने वाली हिंसा की घटनाओं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त एवं सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालने वाले कृत्यों की कड़ी निंदा करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों के फिर से शुरू होने और तनाव बढ़ने पर अपनी गहरी चिंता भी दोहराते हैं। साथ ही शांति के हित में हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत एवं कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील करते हैं।”

मृतक के परिवार के प्रति जताई संवेदना

विदेश मंत्रालय ने मृतक भारतीय नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। साथ ही घायल भारतीयों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई।

ईरान के राजनयिक को किया तलब

घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस दौरान भारत ने इन हमलों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर चल रहे कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे सभी हिंसक हमलों की कड़ी निंदा करता है, जो नाविकों की जान को खतरे में डालते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही को बाधित करते हैं।

UAE में भारतीय मिशन लगातार संपर्क में है

विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं। सरकार प्रभावित भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता

भारत ने पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ती हिंसा और सैन्य तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी समाधान है।

कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना गंभीर खतरा

भारत ने अपने बयान में दोहराया कि कमर्शियल जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

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इस रूट्स पर होने वाले हमले न केवल नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। घायल भारतीयों को सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस मामले को राजनयिक स्तर पर भी मजबूती से उठा रही है।

Instagram Ad Row: क्या भारत में बैन होगा इंस्टाग्राम? सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, जानिए क्या है विवाद

Instagram Ad Row: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘पेड’ विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो और अन्य विवादित कंटेंट को लेकर मेटा (Meta) को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने यह नोटिस शनिवार 4 जुलाई की शाम को जारी किया। इस नोटिस में दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि मेटा, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट, जो बच्चों के यौन शोषण संबंधी कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। साथ ही कंपनी से 7 दिनों के भीतर डिटेल्स जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को उन सभी विज्ञापनों और सामाग्रियों को हटाने का आदेश दिया है जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार को बढ़ावा देते हैं या उन तक पहुंच आसान बनाते हैं।”

क्या है आरोप?

यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश के एक दिन बाद उठाया गया है। इसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मेटा को तलब करने को कहा था। यह मामला इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा को भेजे नोटिस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के विज्ञापनों के आरोपों पर स्पष्टीकरण और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

7 दिन में देना होगा जवाब

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली दिग्गज टेक कंपनी मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व है। मंत्रालय का यह ताजा कदम BBC की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था। इससे सुरक्षा उपायों में गंभीर कमियां उजागर हुईं।

BBC की जांच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन भी देखे गए। जबकि मेटा की विज्ञापन नीतियां स्पष्ट रूप से अश्लील कंटेंट पर रोक लगाती हैं। यह आरोप है कि इंस्टाग्राम ने ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले ‘पेड’ विज्ञापन दिखाए। ये यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसा कंटेंट बेचा जा रहा था।

सरकार क्या चाहती है?

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, सरकार यह जानना चाहेगी कि ऐसे विज्ञापनों को कैसे मंजूरी दी गई आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या सुरक्षा उपाय करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि अगर आरोप बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले ‘पेड’ विज्ञापनों से संबंधित हैं, तो एक मध्यस्थ होने के बावजूद मेटा किसी तीसरे पक्ष के कंटेंट के तर्क या बचाव का सहारा नहीं ले सकती।

सूत्रों में से एक ने कहा, “अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा जिनसे प्लेटफॉर्म को रेवेन्यू मिलता है।” उसने कहा कि जहां मंत्रालय मामले के तकनीकी और नियामक पहलुओं की समीक्षा करेगा। वहीं, अगर किसी एजेंसी, प्राधिकरण या व्यक्ति को लगता है कि कानून के तहत अपराध हुआ है, तो वे विज्ञापनदाता या प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकार ने ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई

भारत सरकार ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट के मामले में ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट का तुरंत पता लगाने, उसे हटाने और उसकी रिपोर्ट करने के साथ-साथ डिजिटल परिवेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने समय-समय पर उन वेबसाइट को भी ब्लॉक किया है जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट होते हैं। यह कार्रवाई इंटरपोल से मिली लिस्ट के आधार पर की गई है, जो भारत की नेशनल नोडल एजेंसी CBI को मिलती है।

Meta पर बढ़ा दबाव

सरकार के इस नोटिस के बाद Meta पर अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। यदि कंपनी तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती या निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है CSEAM?

Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) वह अवैध कंटेंट होता है। इनमें बच्चों के यौन शोषण या उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट शामिल होते हैं। भारत में ऐसे कंटेंट का निर्माण, प्रसार, प्रचार या शेयर करना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं। ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मेटा को दूसरी बार भेजा गया है नोटिस

इस सप्ताह दूसरी बार मेटा जांच के दायरे में आया है। इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी करके व्हाट्सऐप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ के बारे में सवाल पूछा था। सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘फिशिंग’ डिजिटल अरेस्ट घोटाला और किसी और का रूप धारण किए जाने वाले हमले काफी बढ़ सकते हैं।

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सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप ‘यूजरनेम फीचर’ को पेश करने में देरी करेगा।

R Madhavan Watch: 40 लाख की घड़ी पहनकर पद्म श्री लेने ने पहुंचे माधवन, दुनियाभर में सिर्फ 10 पीस मौजूद

R Madhavan Watch: 23 जून को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आर. माधवन को भारतीय सिनेमा में उनके शानदार और बड़े योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें उनकी पत्नी सरिता और बेटे वेदांत की मौजूदगी में दिया गया, जो उनके लिए खुशी ज़ाहिर करते हुए दिखे। इस बीच, एक्टर के पहनावे ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

‘रहना है तेरे दिल में’ फ़िल्म के स्टार ने क्लासिक नेवी-ब्लू एथनिक आउटफिट पहना था, लेकिन सबकी नज़र उनकी लिमिटेड-एडिशन घड़ी पर टिकी रह गई। एक्टर ने टाइटन की ‘जलसा नेबुला’ घड़ी पहनकर भारत की विरासत को शान से दिखाया; इस घड़ी में 18-कैरेट रोज़ गोल्ड का केस लगा है।

घड़ी के मार्बल डायल पर जयपुर के हवा महल से प्रेरित एक मिनिएचर पेंटिंग बनी है। कहा जा रहा है कि इस लिमिटेड-एडिशन घड़ी की कीमत 40 लाख है और रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया भर में ऐसी सिर्फ़ 10 घड़ियां ही उपलब्ध हैं।

अवार्ड मिलने के बाद आर. माधवन ने दिल से एक नोट लिखा। उन्होंने लिखा, “पद्म श्री मिलने पर मैं बहुत विनम्र और आभारी महसूस कर रहा हूं और सच में सम्मानित महसूस कर रहा हूं। देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक से मुझे सम्मानित करने के लिए मैं भारत सरकार का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मैं महाराष्ट्र सरकार का भी उतना ही आभारी हूं कि उन्होंने मेरा नाम आगे बढ़ाया और मेरे सफ़र पर भरोसा जताया। यह सम्मान मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा। जिन लोगों ने मेरी फ़िल्में देखीं, मेरे किरदारों को पसंद किया, मेरी कामयाबियों का जश्न मनाया, मेरी कमियों को नज़रअंदाज़ किया और इतने सालों तक मेरा साथ दिया—यह सम्मान जितना मेरा है, उतना ही आपका भी है। आपके प्यार ने ही मेरे जीवन और करियर के हर पड़ाव पर मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।”

उन्होंने आगे कहा, “आज मुझे ज़िम्मेदारी का गहरा एहसास भी हो रहा है। यह सम्मान मुझे याद दिलाता है कि हर विशेषाधिकार के साथ एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है—ईमानदारी, विनम्रता और उत्कृष्टता के मूल्यों को बनाए रखना; सिनेमा की उस दुनिया में सार्थक योगदान देना जिसने मुझे सब कुछ दिया है; और जिस भी तरह से हो सके, अपने देश की सेवा करना। मैं यह सम्मान सिनेमा की जादुई दुनिया, मेरे साथ काम करने वाले हर कलाकार और टेक्नीशियन, और अपने परिवार को समर्पित करता हूँ जो मेरी ताकत रहे हैं… दिल से धन्यवाद। जय हिंद। साथ ही @varoinmarwah का भी धन्यवाद, जो हमेशा सभी खास मौकों पर मुझे इतना शानदार लुक देते हैं..”

आर. माधवन आखिरी बार ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ में नज़र आए थे। इसके बाद वे तमिल फ़िल्मों ‘GDN’, ‘अधिरष्टसाली’ और ‘सर्कल’ में दिखाई देंगे।

Indian Citizenship Proof: ‘मेरे भारतीय होने का आखिर सबूत क्या है?’; पासपोर्ट को लेकर MEA के बयान से छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Indian Citizenship Proof: पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से दिए गए एक बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। MEA ने कहा है पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। यह एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण…। फिलहाल MEA के बयान ने एक बार फिर यह सवाल राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि आखिर भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत और निर्विवाद सबूत क्या माना जाना चाहिए।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं, तो आखिर भारतीय नागरिक होने का सबूत क्या माना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पहचान (Identity), निवास (Residence) और नागरिकता (Citizenship) तीन अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।

लेकिन आम लोगों के लिए ये अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। यही कारण है कि जब आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट की कानूनी स्थिति पर चर्चा होती है, तो नागरिकता को लेकर भ्रम और बहस पैदा हो जाती है।

सोशल मीडिया यूजर्स के रिएक्शन

MEA के बयान के बाद कई यूजर्स ने इसे विरोधाभासी बताते हुए कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी किया जाता है। ऐसे में यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज पर्याप्त माना जाएगा?

एक यूजर ने X पर लिखा, “अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, आधार नहीं है और वोटर आईडी भी नहीं है, तो फिर भारतीय होने का सबूत आखिर क्या है?” वहीं, एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “लगता है अब नागरिकता साबित करने के लिए माथे पर अपनी मातृभाषा में टैटू बनवाना पड़ेगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “MEA के मुताबिक पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है और सिर्फ यात्रा करने के लिए जारी किया गया डॉक्यूमेंट है। तो भाई, इतनी जांच के बाद पासपोर्ट जारी करते वक्त उसमें नेशनैलिटी के आगे जो इंडियन लिखा होता है वो फिर क्या देख के या चेक करके लिखा होता है? गजबे है।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने भी मजाकिया अंदाज में लिखा, “आधार नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है। पासपोर्ट नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है…। लेकिन इन दोनों के माध्यम से देश में हर दस्तावेज बना सकते है। हर दस्तावेज…। अजब सिस्टम की गजब कहानी!”

आधार और वोटर आईडी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

पासपोर्ट को लेकर बहस ऐसे समय में सामने आई है जब अदालतें भी कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि कुछ दस्तावेज पहचान और निवास का प्रमाण तो हो सकते हैं। लेकिन नागरिकता का नहीं…। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आधार कार्ड को केवल पहचान का दस्तावेज माना था, लेकिन नागरिकता का नहीं। इसी तरह 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक कथित बांग्लादेशी नागरिक की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आधार कार्ड और वोटर आईडी अपने आप में भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।

पासपोर्ट पर क्या लिखा होता है?

बहस के दौरान कई लोगों ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति (Property of the Government of India) है। सरकार के निर्देश पर इसे वापस लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट जारी करने के लिए नागरिकता की जांच की जाती है। लेकिन इसका कानूनी उद्देश्य मुख्य रूप से यात्रा और अंतरराष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित करना है।

फिर नागरिकता कैसे साबित होती है?

भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक आधिकारिक ‘सिटिजनशिप कार्ड’ नहीं है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित नियमों के आधार पर किया जाता है। परिस्थिति के अनुसार नीचे दिए गए निम्न दस्तावेज नागरिकता संबंधी दावे को मजबूत कर सकते हैं:-

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • माता-पिता की नागरिकता संबंधी दस्तावेज
  • नागरिकता प्रमाण पत्र (यदि रजिस्ट्रेशन या प्राकृतिककरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त हुई हो)
  • सरकारी रिकॉर्ड और अन्य वैधानिक दस्तावेज
  • अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरण या अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है।

E-पासपोर्ट पर सरकार का जोर

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सर्विस के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, चिप से लैस ई-पासपोर्ट (e-Passport) का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

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इन ई-पासपोर्ट में सुरक्षा तकनीक, बेहतर प्रमाणीकरण सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DigiLocker के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेगी।

क्या E20 फ्यूल से इंश्योरेंस पॉलिसी हो जाएगी बेकार? सरकार ने बताया पूरा सच

E20 Fuel: भारत सरकार ने कहा है कि देश का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सुरक्षित, ग्राहकों के लिए फायदेमंद और आर्थिक रूप से लाभकारी बना हुआ है। साथ ही सरकार ने उन चिंताओं को भी खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस पॉलिसी की वैधता पर असर पड़ सकता है।

वहीं, अब इस पर तेल मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह बात पूरी तरह गलत है। मंत्रालय ने बताया कि इस मामले को लेकर जिन-जिन लोगों या कंपनियों से बात करनी थी, उनसे बात कर ली गई है और यह साफ हो गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंश्योरेंस पर कोई असर नहीं पड़ता।

मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग दुनिया भर में अपनाई जाने वाली एक मान्य प्रक्रिया है और इसे कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिनमें अमेरिका, ब्राजील और जापान शामिल हैं। इसके अलवा, यह भी बताया कि ब्राजील ने लंबे समय से इथेनॉल की ज्यादा मात्रा मिलाने (ब्लेंडिंग) का तरीका अपनाया है, और वहां E27 पेट्रोल का स्टैंडर्ड ब्लेंड है।

सरकार के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत करने में मदद मिली है। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रोग्राम से इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कृषि उत्पादों (फीडस्टॉक) की लगातार मांग बनी है, जिससे किसानों की आय बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

वहीं सरकार के बयान में आगे कहा गया है, “इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और देश को साफ-सुथरी मोबिलिटी की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाती है।”

सरकार ने कहा कि वह वैज्ञानिक सबूतों और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत के आधार पर, इस प्रोग्राम को “सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए” लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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