भारत ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित ओआईसी के प्रस्ताव की कड़ी निंदा की

भारत ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के प्रस्ताव को खारिज करते हुए सोमवार को कड़े शब्दों में कहा कि संगठन ने पाकिस्तान को अपने “कट्टरपंथी एजेंडे” को आगे बढ़ाने के लिए अपने मंच का ‘दुरूपयोग’ करने की छूट दे रखी है।

नई दिल्ली ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओआईसी की ओर से भारत के बारे में की गई टिप्पणियां “दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण व झूठी हैं तथा पाकिस्तान के इशारे पर की गई हैं।

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विदेश मंत्रालय ने कहा हम 17-18 अक्टूबर को बगदाद में हुई ओआईसी की विदेश मंत्री परिषद की बैठक में पारित प्रस्तावों में भारत के खिलाफ की गई टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।

मंत्रालय ने कहा भारत के बारे में की गई टिप्पणियां दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण व झूठी हैं तथा पाकिस्तान के इशारे पर की गई हैं। हमें इस बात से निराशा है कि ओआईसी ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसके कट्टरपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपने मंच के दुरूपयोग की अनुमति दी है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने कहा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। राजनीतिक मकसद से किया जाने वाला दुष्प्रचार इस सच्चाई को कभी नहीं बदल सकता।

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ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

लद्दाख पर चीनी दावे का भारत ने दिया जवाब

नई दिल्ली। लद्दाख के कई हिस्सों पर दावा जताने के चीन के बयान का भारत ने जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लद्दाख भारत का हिस्सा है और चीन के इनकार करने से यह वास्तविकता नहीं बदलने वाली है। इससे पहले चीन ने  लद्दाख की 28 जगहों को अपना बताया है। चीन ने मंगलवार को इन जगहों के नाम तय करने के भारत के फैसले पर आपत्ति भी जताई। चीन ने कहा, ‘ये इलाके हमारे हैं और भारत के नाम बदलने या नया नाम रखने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं बदलेगा’।

गौरतलब है कि भारत ने दो अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था। भारत की ओर से इन इलाकों के नाम आधिकारिक रूप से तय करने के 10 दिन के बाद चीन ने प्रतिक्रिया दी। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि सीमा के पश्चिमी हिस्से के ये इलाके उसके हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के मुताबिक, भारत के इस फैसले से सीमा के पश्चिमी हिस्से में उन इलाकों पर चीन का दावा नहीं बदल सकता, जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है। चीन की इस आपत्ति पर भारत ने भी जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि लद्दाख भारत का हिस्सा है। चीन के इनकार करने से यह हकीकत नहीं बदलेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए गए हैं। यह काम लद्दाख प्रशासन और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर किया गया है। जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम नक्शे में दर्ज करने का मकसद उनकी सही पहचान करना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना है।

चीन ने लद्दाख की 28 जगहों को अपना बताया:भारत ने नाम बदले थे; इनमें गोगरा- हॉट स्प्रिंग, जहां दोनों देशों की सेनाएं टकराई थीं

चीन ने लद्दाख की 28 जगहों के नाम तय करने के भारत के फैसले पर आपत्ति जताई है। चीन ने मंगलवार को कहा कि ये इलाके उसके हैं और भारत के नाम बदलने या रखने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं बदल जाएगा। भारत ने 2 अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था। चीन ने भारत के नाम बदलने के फैसले को अवैध बताया चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि सीमा के पश्चिमी हिस्से के ये इलाके उसके हैं। माओ के मुताबिक, भारत के इस कदम से सीमा के पश्चिमी हिस्से में उन इलाकों पर चीन का दावा नहीं बदल सकता, जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है। भारत ने 28 जगहों के नाम क्यों तय किए? भारत के गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को लद्दाख की 28 जगहों और भौगोलिक क्षेत्रों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। भारत का फैसला 2023 में चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नाम बदलने के जवाब में उठाया गया था। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता रहा है। भारत सरकार का कहना था कि उसका मकसद सरकारी नक्शों और दस्तावेजों में इन जगहों की पहचान को साफ और एक जैसा रखना है। इससे इन संवेदनशील इलाकों को पहचानना भी आसान होगा। गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी सूची में थे भारत की सूची में गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं। ये पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके हैं, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव रहा है। इन जगहों पर भारतीय सैनिक गश्त भी करते हैं। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ गया था। 5 मई को पैंगोंग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। उसी साल जून में गलवान घाटी में भी दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने के लिए बातचीत शुरू की। सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई। 28 जगहों में कौन-कौन से नाम शामिल हैं? भारत की ओर से तय किए गए 28 नामों में पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, जमीन के हिस्से, घाटियां और जल स्रोत शामिल हैं। पहाड़-चोटियां: अतीशा गिरि, कनीष्क पीक, करुण पीर पर्वत, मार्तंड गिरि, द्रक कार्पो, जोलमोरी, रिनचेन जांगपो, साक्यश्री गिरि, मारपा लोत्सावा री, मिलारेपा कांगरी, शिव री, जोरावर पीक और महेश्वर री। दर्रे-ग्लेशियर: चापचिंगल दर्रा, शाचमिरिक दर्रा, पारपिक ग्लेशियर और स्कामरी ग्लेशियर। जमीन के इलाके: ब्रांगसा, कुकसेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण पॉइंट, पंगलुंग और शमाल लुंगपा। घाटी-जल स्रोत: श्कोर्गा घाटी, गुरु रिनपोछे झील, यांगपा नदी और हॉट स्प्रिंग। इन जगहों के नाम तय कर उन्हें भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक नक्शे में शामिल करने का मकसद उनकी पहचान को स्पष्ट करना है। भारत कई बार दावों को खारिज कर चुका है भारत पहले भी चीन के दावों को खारिज करता रहा है। भारत के मुताबिक, चीन के बार-बार दावा करने या बयान देने से जमीन की स्थिति नहीं बदल जाएगी। लद्दाख की 28 जगहों के नाम तय करना भी इन्हें सरकारी नक्शे पर सही पहचान देने की प्रक्रिया का हिस्सा है। ————————– यह खबर भी पढ़ें… अफगानिस्तान ने चीन तक बनाई सड़क, भारत के लिए चिंता: 121 किमी का वाखान कॉरिडोर चीन के लिए सीधा रास्ता अफगानिस्तान ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के जरिए चीन के शिनजियांग तक 121 किलोमीटर लंबी सड़क बना ली है। करीब 55 लाख डॉलर की लागत से बनी इस सड़क का उद्घाटन भी हो गया है। यह सड़क अफगानिस्तान और चीन के बीच पहला सीधा जमीनी रास्ता है। पूरी खबर पढ़ें…

वोट चोरी के खिलाफ जन आंदोलन जारी रहेगा : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनआंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते तथा चुनाव व्यवस्था में सुधार नहीं होता तब तक युवा पीछे नहीं हटेंगे और यह जन आंदोलन चलता रहेगा।

श्री गांधी ने सोमवार को यहां विशेष संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया है और लोगों को राजधानी पहुंचने से रोका जा रहा है, आंदोलनकारी को पीटा जा रहा है और इसे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी भी मौजूदा हालात से परेशान हैं और उनमें से कई विपक्ष के आंदोलन को सही मानते हैं। उनका कहना था कि सच्चाई उनके साथ है और वे न थकेंगे, न रुकेंगे और लड़ते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, जनता और विपक्षी दल एक तरफ हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और ज्ञानेश कुमार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा कर प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के करीब 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तथा विदेश मंत्रालय के भीतर से उन्हें सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकार छीने जाने पर लोग सवाल पूछ रहे हैं।

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श्री गांधी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उन्होंने लोकतंत्र तथा चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब देते हुए याचिका दायर करने को कहा है। इंडिया गठबंधन के नेता अब मिलकर उच्चतम न्यायालय जाकर याचिका दायर करेंगे। लोगों से जन आंदोलन में जुटने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा में विश्वास रखने वाले सभी दलों के लोग इस लड़ाई में शामिल होंगे। जब तक संविधान की रक्षा, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, चुनाव व्यवस्था में सुधार और देश के लोगों को न्याय नहीं मिलता आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले दिन विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग जाते समय रोका गया और बस में बैठाया गया, दूसरे दिन जंतर-मंतर जाते समय भी उन्हें रोका गया और धक्का-मुक्की हुई, जबकि तीसरे दिन विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष उच्चतम न्यायालय जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से हर दिन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई जारी रखने, किसी से डरे बिना आंदोलन से पीछे नहीं हटने का आह्वान किया और कहा कि यह आंदोलन भगवान शिव का तांडव और शिव की बारात की तरह लोक कल्याण के लिए है इसमें कुछ भी पहले से तय नहीं होता और इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।

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होर्मुज के पास जहाज पर ड्रोन हमला, 2 भारतीय लापता:भारत ने हमले रोकने को कहा; 3 दिन में भारतीय नाविकों वाले तीन जहाजों पर हमला

होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय क्रू वाले एक टैंकर पर रविवार को ड्रोन से हमला हुआ। जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से 9 को बचा लिया गया, जबकि 2 अब भी लापता हैं। हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पिछले 3 दिनों में इस क्षेत्र में भारतीय क्रू वाले 3 जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें से एक हमला एमटी वाल्थेरा पर हुआ था, जिसके बाद जहाज में आग लग गई थी। भारत ने जहाजों पर होने वाले हमले तुरंत रोकने को कहा है। सोहर बंदरगाह के पास हमला हुआ निकारागुआ के झंडे वाले टैंकर एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर ओमान के सोहर बंदरगाह के पास जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि भारतीय अधिकारी स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर लापता नाविकों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। ओमान की राजधानी मस्कट में भारतीय दूतावास भी मामले पर नजर रख रहा है और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। दूसरे टैंकर वाल्थेरा पर भी हमला, सभी 11 भारतीय सुरक्षित रविवार को ही मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले टैंकर एमटी वाल्थेरा पर होर्मुज स्ट्रेट में एक ड्रोन या मिसाइल से हमला हुआ। इससे जहाज में आग लग गई। इस टैंकर पर भी 11 भारतीय नाविक सवार थे। सोनोवाल ने बताया कि सरकार जहाज के प्रबंधन से जुड़ी कंपनी के संपर्क में है और नाविकों की सुरक्षा पर नजर रख रही है। 9 अक्टूबर को भी हमला हुआ था इससे पहले 9 अक्टूबर को पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के जहाज एमटी जेम नंबर 2 पर शारजाह के पास ड्रोन से हमला हुआ था। इस जहाज पर 22 भारतीय नाविक सवार थे। इस तरह 9 से 11 अक्टूबर के बीच खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों को ले जा रहे तीन जहाजों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री रास्तों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत ने तुरंत हमले रोकने को कहा भारतीय विदेश मंत्रालय ने व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की निंदा की है। भारत ने सभी पक्षों से तुरंत तनाव कम करने और व्यापारिक जहाजों, नाविकों व नागरिक ठिकानों पर हमले रोकने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। संघर्ष का हल बातचीत और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से व्यापार को सुरक्षित और बिना रुकावट जारी रखने पर भी जोर दिया। दुनिया के जहाजों पर 3.20 लाख से ज्यादा भारतीय नाविक भारत दुनिया में व्यापारिक जहाजों के लिए नाविक उपलब्ध कराने वाले बड़े देशों में शामिल है। जहाजरानी मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में भारत में 3.20 लाख से ज्यादा सक्रिय नाविक थे। अमेरिका और इजराइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों में भारतीय नाविकों की मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं। पिछले हफ्ते विदेश मंत्रालय ने ओमान के तट के पास पनामा के झंडे वाले एक जहाज पर हुए हमले की निंदा की थी। मंत्रालय ने क्षेत्र में जहाजों पर हो रहे हमलों को रोकने और शांति बनाए रखने की अपील की थी। ————————- यह खबर भी पढ़ें… भारतीय नाविकों वाले जहाज पर 48 घंटे में तीसरा हमला:ब्लैक सी में 2 हमले, यूक्रेनी ड्रोन तेल टैंकर से टकराया रूस के ब्लैक सी तट के पास एक तेल टैंकर पर समुद्री ड्रोन से हमला किया गया। हमले के बाद टैंकर में आग लग गई। टैंकर पर 23 लोगों का क्रू था। सभी भारतीय नागरिक थे और उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

सऊदी के एयरपोर्ट पर हमले में घायल भारतीय की मौत:जयशंकर ने दुख जताया; हूतियों ने आज फिर किया हमला, 12 भारतीय घायल

सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एयरपोर्ट पर शनिवार को हुए हूती विद्रोहियों के हमले में घायल एक भारतीय की मौत हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारतीय नागरिक की मौत पर दुख जताया। उन्होंने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। जयशंकर ने कहा कि भारतीय दूतावास परिवार की हर संभव मदद करेगा। भारतीय दूतावास ने बताया कि वह मृतक के परिवार के संपर्क में है। दूतावास शव को जल्द भारत लाने में मदद करेगा। इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने रविवार को रियाद एयरपोर्ट पर फिर हमला किया। इस हमले में 12 भारतीयों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। एयरपोर्ट पर दो दिन में दूसरी बार हमला सऊदी सेना के मुताबिक, रविवार को एयरपोर्ट पर एक मिसाइल या दूसरा विस्फोटक हथियार गिरा। इससे यात्रियों के एक हॉल में आग लग गई। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में भी कुछ लोग घायल हुए हैं। शनिवार को इसी एयरपोर्ट पर हुए हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी और 308 लोग घायल हुए थे। मरने वालों में सऊदी अरब के चार नागरिक, बांग्लादेश के दो नागरिक और अमेरिका, जॉर्डन, फिलिस्तीन, सीरिया, सूडान और मिस्र के एक-एक नागरिक शामिल थे। हूतियों ने सऊदी एयरपोर्ट पर फिर हमले की धमकी दी यमन के हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने एयरलाइंस और यात्रियों को सऊदी अरब के एयरपोर्ट और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी है। हूतियों का कहना है कि वे यमन के गृहयुद्ध में सऊदी अरब की भूमिका के विरोध में हमले कर रहे हैं। संगठन ने कहा है कि सऊदी अरब के एयरपोर्ट को फिर निशाना बनाया जा सकता है। हूतियों के खिलाफ हमला कर सकता है अमेरिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया हमले की जानकारी मिलने के बाद फैसला लिया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हमले की निंदा की। उन्होंने पुष्टि की कि हमले में एक अमेरिकी नागरिक की भी मौत हुई है। ब्रिटेन ने भी सऊदी अरब को और मदद देने की संभावना जताई है। एयर इंडिया समेत कई एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं सऊदी अरब पर बढ़ते हमले के बीच कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने रियाद और दूसरे सऊदी एयरपोर्ट के लिए उड़ानें रोक दी हैं। इनमें एयर इंडिया, फ्लाईदुबई, लुफ्थांसा ग्रुप और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस शामिल हैं। यूरोपीय संघ की विमानन सुरक्षा एजेंसी ने भी सऊदी हवाई क्षेत्र को लेकर अपनी चेतावनी बढ़ाई है। एजेंसी के मुताबिक, हूती विद्रोही अब सऊदी अरब के अंदर तक हमले करने में सक्षम हैं और उनका ध्यान एयरपोर्ट जैसे विमानन ठिकानों पर भी बढ़ा है। भारत ने कहा- आम नागरिकों पर हमले तुरंत बंद हों भारत के विदेश मंत्रालय ने रविवार को रियाद एयरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमले की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि आम नागरिकों और उनके इस्तेमाल वाली जगहों को बार-बार निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ऐसे हमले तुरंत बंद होने चाहिए। भारत ने कहा कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा में वहां की सरकार और जनता के साथ खड़ा है। भारत ने उम्मीद जताई कि इस क्षेत्र में जल्द ही शांति बहाल होगी। रियाद एयरपोर्ट पर हमले बढ़े 19 सितंबर 2026 – एयरपोर्ट के ईंधन भंडारण क्षेत्र के पास हमला हुआ, जिससे वहां आग लगी और काला धुआं उठता देखा गया। हूती समूह ने रियाद के सैन्य व रणनीतिक ठिकानों पर हमले का दावा किया। 7 अक्टूबर 2026 – रियाद और आभा एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए हमलों में एक सूडानी नागरिक की मौत हुई और 8 अन्य लोग घायल हुए। 8 अक्टूबर 2026 – एयरपोर्ट पर दो अलग-अलग हमले हुए। पहला एयरपोर्ट सुविधाओं पर और दूसरा सऊदी एयरलाइंस के खड़े विमान (एयरबस A320) पर। इनमें कैप्टन हमूद अली अल-कलीसामी (सऊदी पायलट) समेत 3 सऊदी नागरिकों की मौत हुई।

नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़:कई पुल-घर बहे, 4 लापता; लैंडस्लाइड से स्यारी नदी का रास्ता बंद, बिहार में भी खतरा

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में कई घर और पुल बह गए। चार लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कई मशीनें भी बह गईं। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यारी नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया। इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भूस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ से जुड़ी 4 तस्वीरें… अब मैप से समझें कहां हुआ हादसा बिहार में भी बाढ़ का खतरा बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने से बिहार में भी खतरा बढ़ सकता है। यह नदी आगे त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं। SMS भेजकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का समय मिल सकता है। उप्रेती के मुताबिक, प्रशासन ने लोगों को SMS भेजकर अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है। पहाड़ी इलाकों में बिना बारिश के भी बाढ़ का खतरा नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आने का खतरा बना रहता है। पहाड़ से मिट्टी और पत्थर खिसककर जब नदी या नाले का रास्ता रोक देते हैं, तो पानी एक जगह जमा होने लगता है। कुछ समय बाद जब मिट्टी और पत्थरों की रुकावट टूटती है, तो जमा पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। इससे नदी के किनारे बसे गांवों में अचानक बाढ़ आ जाती है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा भी बहाकर ले जाता है। इससे घर, सड़कें और पुल टूट सकते हैं। ऐसी बाढ़ आने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसी इलाके में बारिश हुई हो। पहाड़ के ऊपरी हिस्से में जमा पानी अचानक नीचे आने से दूर बसे गांवों में भी तबाही मच सकती है। 45 दिन पहले आई बाढ़ से भारी तबाही नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। चीन के तिब्बत से लगी सीमा के पास शुरू हुई इस बाढ़ का असर भोटेकोशी नदी और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। अचानक आए तेज पानी ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली बनाने वाली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती दिनों में सैकड़ों शव बरामद किए गए थे और बड़ी संख्या में लोग लापता थे। बाद में 5 अक्टूबर को नेपाल सरकार ने बताया कि इस बाढ़ में कम से कम 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 5000 लोग अब भी लापता हैं। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया। बाढ़ से 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी तबाह हुए। इसके बाद राहत और बचाव अभियान के साथ प्रभावित लोगों को दोबारा बसाने की तैयारी शुरू की गई। ——————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में फ्लोरिडा के तट से टकराया इसायस तूफान अमेरिका के मेक्सिको की खाड़ी से लगे तटीय इलाकों में शुक्रवार को इसायस तूफान टकराया। फ्लोरिडा और अलबामा में 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ईरान के 19 जहाज श्रीलंका के पास फंसे:खाना-पानी और ईंधन की कमी, अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से मदद करने से बच रही सरकार

श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के 19 जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर खाने-पीने के सामान, पानी और ईंधन की कमी हो गई है। इसके बावजूद श्रीलंका सरकार फिलहाल उनकी मदद करने से बच रही है। सरकार को डर है कि ईरानी जहाजों को सहायता देने से अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम पैदा हो सकता है। श्रीलंका का कहना है कि वह किसी भी फैसले से पहले अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो के मुताबिक, ये जहाज देश के तट से करीब 24 समुद्री मील दूर खड़े हैं। हालांकि, श्रीलंका को अमेरिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं मिली है कि ईरानी जहाजों की मदद करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के बाद से फंसे जहाज श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संडे टाइम्स को बताया कि ये ईरान के तेल टैंकर हैं। उनके मुताबिक, होर्मुज में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से दर्जनों ईरानी जहाज फंसे हुए हैं और अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं। होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। श्रीलंका के अमेरिका और ईरान, दोनों से कारोबारी रिश्ते श्रीलंका के लिए यह फैसला आसान नहीं है। देश अभी आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका व ईरान दोनों उसके कारोबारी साझेदार हैं। श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज दिलाने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी। अमेरिका की मदद से कृषि क्षेत्र को खाद्य संकट से उबारने के प्रयास भी किए गए थे। श्रीलंका के अधिकारियों के मुताबिक, जहाजों को सामान और दूसरी सेवाएं देने वाली कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सरकार को मानवीय जरूरतों और अमेरिका के साथ अपने रिश्तों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। पहले भी ईरानी जहाज को मदद दे चुका है श्रीलंका करीब सात महीने पहले अमेरिकी टॉरपीडो हमले में ईरान का नौसैनिक जहाज IRIS Dena डूब गया था। इस घटना में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई थी। यह जहाज भारत के निमंत्रण पर आयोजित नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इसके बाद एक दूसरे ईरानी जहाज को तकनीकी खराबी के कारण श्रीलंका के बंदरगाह पर लाया गया था। उसके घायल नाविकों का श्रीलंकाई अस्पतालों में इलाज किया गया। जहाज से बचाए गए लोगों और घायल नाविकों को बाद में सुरक्षित ईरान भेज दिया गया था। एक्सपर्ट बोले- हमला होने पर मदद देना नैतिक जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार दयान जयतिलके ने कहा कि श्रीलंका मुश्किल स्थिति में है और उसकी मदद करने की भी व्यावहारिक सीमाएं हैं। उनके मुताबिक, दुनिया को यह समझना चाहिए कि श्रीलंका जानबूझकर सहायता से इनकार नहीं कर रहा, बल्कि उसे सावधानी से फैसला लेना पड़ रहा है। जयतिलके ने कहा कि ये युद्धपोत नहीं, बल्कि मालवाहक जहाज हैं, जो ईरान से चीन तक तेल ले जाते थे। अगर इन जहाजों पर हमला होता है और वे मदद के लिए श्रीलंका के जलक्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें तुरंत सहायता देना देश की नैतिक जिम्मेदारी होगी। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया:हमलों के डर से ब्रिटेन से 12 बमवर्षक हटे; अमेरिकी सैनिक होटलों में रहने को मजबूर ईरान पर हमला करके अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाना चाहता था, लेकिन अब यही युद्ध उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ईरानी हमलों के बाद अमेरिका को मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बदलनी पड़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

वेंस बोले-वीजा लेकर अमेरिका में काम करने वाले बंधुआ मजदूर:भारत का जवाब- अमेरिकी अर्थव्यवस्था यही संभाल रहे; H-1B वीजा लेने वालों मे 71% भारतीय

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताया है। भारत ने वेंस के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में प्रवासियों की अहम भूमिका रही है। भारत ने यह भी कहा कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, रिसर्च और रोजगार बढ़ाने में अहम योगदान देते हैं। इससे दोनों देशों को फायदा होता है। अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में 71% भारतीय हैं। वेंस बोले- विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकी लोगों को नौकरी दें वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर वीजा व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकी लोगों को नौकरी देनी चाहिए। वेंस के मुताबिक, पिछले एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि इसी दौरान कंपनी को 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का फायदा मिला। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही। H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड में क्या अंतर है H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। वहीं, ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। ग्रीन कार्ड के लिए PERM प्रक्रिया के तहत कंपनी को यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं था और विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी या काम करने की स्थिति पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। 8 आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम पर रोक अमेरिकी सरकार ने 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM प्रक्रिया से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट के साथ माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देकर अमेरिकी लोगों के रोजगार के अवसर कम कर रही हैं। हालांकि, PERM प्रक्रिया पर रोक लगने से पहले से जारी H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होते। लेकिन इन कंपनियों के जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया चल रही है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें… ——————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे:मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने डेमोक्रेट्स को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर यहां पढ़ें…