हैकर ग्रुप ने SBI के 3.75 लाख रिकॉर्ड चोरी होने का दावा किया, ग्राहकों की निजी जानकारी और लोन दस्तावेज लीक होने की आशंका

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों का डेटा चोरी होने का दावा किया गया है। Siriusim नाम के एक अज्ञात हैकर ग्रुप का कहना है कि उसके पास बैंक से जुड़े ग्राहकों के गोपनीय रिकॉर्ड हैं। इनमें निजी जानकारी, घर के पते, लोन एप्लीकेशन और खाता खोलने से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

साइबर सिक्योरिटी पर नजर रखने वाले CyberPulse56 ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। अकाउंट के मुताबिक, हैकर ग्रुप के पास कथित तौर पर CSV फॉर्मेट में 3.75 लाख रिकॉर्ड और 2,722 PDF दस्तावेज हैं।

चोरी का डेटा सही हुआ तो?

हालांकि, SBI का डेटा चोरी होने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अभी यह भी साफ नहीं है कि डेटा कहां से आया और क्या यह सीधे SBI के सिस्टम से जुड़ा है। रिकॉर्ड की संख्या से यह भी पता नहीं चलता कि कितने अलग-अलग ग्राहक प्रभावित हुए हैं।

CyberPulse56 ने 16 अक्टूबर को पहली बार इस दावे की जानकारी दी थी। वहीं, The Economic Times के मुताबिक, 20 अक्टूबर तक SBI ने उसकी ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया था।

अगर यह डेटा असली साबित होता है, तो इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। साइबर अपराधी ग्राहकों की पहचान चुराने, वित्तीय धोखाधड़ी करने, फर्जी लोन आवेदन देने और फिशिंग के जरिए बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

20 वित्तीय संस्थानों पर साइबर हमले

यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारतीय वित्तीय संस्थानों पर साइबर हमलों की खबरें सामने आई हैं। The Economic Times ने 15 अक्टूबर को बताया था कि इसी महीने करीब 20 बैंक, NBFC और फिनटेक कंपनियां साइबर हमलों का शिकार हुई थीं। इन हमलों में कथित तौर पर चोरी किए गए लॉगिन क्रेडेंशियल और पेमेंट API की कमजोरियों का फायदा उठाया गया।

CERT-In ने 9 अक्टूबर को वित्तीय संस्थानों को ऐसे हमलों को लेकर चेताया था। हालांकि, इन घटनाओं और SBI से जुड़े दावे के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

RBI के नियम क्या कहते हैं?

RBI के जुलाई 2026 में जारी निर्देशों के मुताबिक, बैंकों को साइबर घटना का पता चलने के छह घंटे के भीतर DAKSH प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करना होगा। CERT-In को भी इसकी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, बैंकों को सुरक्षा में सेंध की जांच करनी होगी और ऐसी घटनाएं दोबारा रोकने के उपाय करने होंगे।

CERT-In के 2022 के निर्देशों में भी तय श्रेणी की साइबर घटनाओं की जानकारी छह घंटे के भीतर देने का प्रावधान है।

SBI ने ग्राहकों को क्या सलाह दी है?

SBI अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कहता है कि उसके डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म अनधिकृत पहुंच से बचाव के लिए ऑथेंटिकेशन कंट्रोल, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और दूसरे सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करते हैं।

बैंक ग्राहकों को यह भी सलाह देता है कि वे अपना पासवर्ड, PIN और OTP किसी के साथ साझा न करें। बैंकिंग से जुड़ी जानकारी मांगने वाले संदिग्ध मैसेज का जवाब देने से भी बचें। फिलहाल, Siriusim के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी साफ नहीं है कि कथित डेटा असली है या इससे SBI के किसी ग्राहक की जानकारी वास्तव में उजागर हुई है।

Nifty Outlook: 21 अक्टूबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? क्रूड समेत ये बड़े फैक्टर करेंगे तय

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लखनऊ कैफे ऑनर मर्डर केस : पुलिस महकमे में भूचाल! DCP, ACP और SO पर गिरी गाज, फरार मॉडल श्रद्धा पर 25 हजार का इनाम

लखनऊ कैफे ऑनर मर्डर केस : पुलिस महकमे में भूचाल! DCP, ACP और SO पर गिरी गाज, फरार मॉडल श्रद्धा पर 25 हजार का इनाम

Lucknow Cafe Owner Shiva Sharma Case

Lucknow Cafe Owner Shiva Sharma Case: नवाबों के शहर लखनऊ में 28 वर्षीय कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि खाकी के लिए साख का सवाल बन चुका है। घटना के 10वें दिन भी आरोपी फैशन मॉडल श्रद्धा दुबे पुलिस की पकड़ से बाहर है, वहीं दूसरी तरफ इस हाई-प्रोफाइल केस में लापरवाही और गाज गिरने का बड़ा दौर शुरू हो गया है। सोमवार को प्रशासनिक फेरबदल करते हुए लखनऊ के डीसीपी, एसीपी और हजरतगंज थाना प्रभारी को उनके पदों से हटा दिया गया है। 25 हजार की इनामी मॉडल का एक सनसनीखेज इंटरव्यू वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरी जांच की दिशा ही मोड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

5वीं मंजिल से रहस्यमयी मौत या हत्या? : बीती 9 अक्टूबर को हजरतगंज के बालू अड्डा इलाके के ‘अवध ग्रीन अपार्टमेंट’ से गिरकर कैफे मालिक शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा या खुदकुशी माना जा रहा था, लेकिन मृतक की मां रंजना शर्मा के बयानों और साक्ष्यों ने पुलिस की थ्योरी बदल दी। मां का आरोप है कि शिवा की लिव-इन पार्टनर व फैशन मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और साथियों ने शिवा को बेरहमी से पीटा, प्रताड़ित किया और बालकनी से नीचे फेंक दिया।

पुलिस अफसरों का तबादला

मामले में लापरवाही और जांच में देरी की सुगबुगाहट के बीच शासन ने सख्त कदम उठाया है। डीसीपी (मध्य) विक्रांत वीर को यूपी पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। एसीपी रजनीश वर्मा को क्राइम ब्रांच में भेज दिया गया। हजरतगंज थाना प्रभारी (SO) विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

फरार मॉडल का ‘इंटरव्यू बम’ और आत्महत्या का दावा

जब पुलिस मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और सहयोगी दानिश की तलाश में नेपाल बॉर्डर तक खाक छान रही है, तभी श्रद्धा का एक रिकॉर्डेड इंटरव्यू सामने आया। वीडियो में उसने खुद को बेकसूर बताते हुए दावा किया कि शिवा पर 15-20 लाख रुपए का कर्ज था और उसने आर्थिक तंगी में आत्महत्या की है।

 

उसने कहा- घटना वाले दिन शिवा ने खुद को बाथरूम में बंद किया और अचानक बालकनी से छलांग लगा दी। श्रद्धा ने कहा कि मैं भगोड़ी नहीं हूं, पुलिस के सामने सच रखूंगी। साथ ही सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी वायरल हुआ, जिसमें शिवा कथित तौर पर श्रद्धा के 6 लाख के गहने बेच देने की बात मान रहा है।

नेपाल भागने की आशंका और पुलिस का शिकंजा

श्रद्धा का महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन वाहन बहराइच के रूपईडीहा में लावारिस हालत में मिला है, जो नेपाल सीमा से महज 1 किलोमीटर दूर है। पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी नेपाल सीमा पार कर चुके हैं। तीनों मुख्य आरोपियों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया है। फिलहाल, शिवा के परिजनों की मांग है कि जब आरोपी बेकसूर है, तो वह पुलिस के सामने आने के बजाय क्यों भाग रही है?

Dollar Vs Rupee : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे गिरकर 94.92 पर हुआ बंद, जानिए आगे कैसी रह सकती है रुपए की चाल

Dollar Vs Rupee : सोमवार, 19 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवाते हुए 3 पैसे की गिरावट के साथ 94.92 के स्तर पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के लगातार बने दबाव के बीच, रुपये की लगातार 6 सेशन की तेजी का सिलसिला टूट गया और यह गिरावट के साथ बंद हुआ।

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.90 पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान, यह 94.75 के हाई और 94.97 के निचले स्तर तक गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज 94.92 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 3 पैसे कम है।

शुक्रवार को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की हाजिर मांग को नियंत्रित करने के उपायों के चलते, रुपया लगातार छठे सत्र में मजबूत हुआ था और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 94.89 पर बंद हुआ।

16 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान, डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा उठाए गए कदमों की मदद से भारतीय रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती आई थी।

लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड, गौरव गर्ग ने कहा कि RBI के कदम शॉर्ट टर्म में करेंसी के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसमें कोई टिकाऊ सुधार तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी पूंजी की निकासी रुकने और बाहरी दबावों में कमी पर आने पर निर्भर करेगा।

गर्ग ने आगे कहा कि हालांकि रुपये में सुधार उत्साहजनक है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या RBI के सपोर्ट के साथ-साथ ग्लोबल और घरेलू बुनियादी हालात (फंडामेंटल्स) भी बेहतर होते हैं।

इस बीच छह बड़ी मुद्राओं के एक बॉस्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.93 पर कारोबार कर रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार (फ्यूचर्स ट्रेड) में 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 108.58 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के चलते उम्मीद है कि रुपया पॉजिटिव रुख के साथ कारोबार करेगा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और FII की निकासी इसमें बड़ी तेजी को सीमित कर सकती हैं।

HDFC सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट, दिलीप परमार का कहना है कि भारतीय रुपया लगातार सातवें सत्र में भी मजबूत हुआ। हालांकि, दिन के दौरान हुई अधिकांश बढ़त गंवाने के बाद, यह मामूली तेजी के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में सुधार और मंगलवार को बाजार में छुट्टी होने से पहले घरेलू शेयरों में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण, रुपये की तेजी सीमित रही। वहीं, RBI के दखल और अमेरिकी डॉलर के स्थिर रहने से रुपये को सहारा मिला। तकनीकी रूप से देखें तो स्पॉट USDINR के लिए 94.70 के स्तर पर सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 95.50 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।

घरेलू इक्विटी बाजार में, सेंसेक्स 876.37 अंक गिरकर 73,852.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257.20 अंक गिरकर 22,888.95 पर आ गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) खरीदार बन गए और उन्होंने कुल 1,165.92 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस बीच, शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.578 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के हेड ऑफ रिसर्च, राजीव शरण का कहना है कि सोमवार को रुपया लगातार सातवें सत्र में मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 94.8 के स्तर को छू गया और डॉलर के मुकाबले 94.95 के आसपास बना रहा। इस तरह, महीने की शुरुआत में 97 के स्तर से आई इसकी जोरदार रिकवरी कायम रही। शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है। 9 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 8.6 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया। इस तरह, सितंबर की शुरुआत से अब तक कुल 60 अरब डॉलर की कमी आई है। यह एक अहम आंकड़ा है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने केवल करेंसी सट्टेबाजों को चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि अपने नियमों को सख्त करने से पहले एक ‘कृत्रिम आधार’ (artificial floor) बनाने के लिए भारी रकम भी खर्च की।

हालांकि शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 1,166 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ना यह बताता है कि RBI हमेशा के लिए बाजार में शांति नहीं बनाए रख सकता। अब बाजार के बुनियादी कारकों (market fundamentals) को ही स्थिति संभालनी होगी।

 

Market Outlook : बाजार की तेजी को लगा ब्रेक, जानिए 21 अक्टूबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

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अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
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अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

UP Holiday List 2026: 18 से 20 अक्टूबर तक दफ्तर बंद, चलिए जानते हैं मायावती, अखिलेश या योगी-किस सरकार में मिलीं ज्यादा छुट्टियां?

UP Holiday List 2026: त्योहारों के बीच उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानवमी के मौके पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का फैसला लिया है। वहीं, रविवार की साप्ताहिक छुट्टी और मंगलवार को विजयादशमी की छुट्टी पहले से तय है। ऐसे में अब सरकारी दफ्तर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे।

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2026 की छुट्टियों की पहले जारी की गई सूची में बदलाव को लेकर आदेश जारी किया है। हालांकि, पुराने आदेश की बाकी सभी बातें पहले की तरह लागू रहेंगी।

बता दें कि शिक्षकों और कर्मचारियों के संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महानवमी पर छुट्टी देने की मांग की थी। इससे पहले राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयादशमी, दोनों त्योहारों के लिए एक ही दिन की छुट्टी घोषित की थी।

दफ्तर कब तक बंद रहेंगे?

तारीखदिनस्थितिकारण
18 अक्टूबररविवारबंदसाप्ताहिक छुट्टी (महाअष्टमी)
19 अक्टूबरसोमवारबंदनए आदेश के तहत महानवमी की सार्वजनिक छुट्टी
20 अक्टूबरमंगलवारबंदपहले से घोषित विजयादशमी/दशहरा की छुट्टी
21 अक्टूबरबुधवारखुलेंगेसरकारी दफ्तर दोबारा खुलेंगे

क्या योगी सरकार ने पहली बार किसी त्योहार की छुट्टी बढ़ाई है?

नहीं। इस साल की शुरुआत में, राज्य सरकार ने 26 और 27 मार्च को राम नवमी के मौके पर दो दिन की छुट्टी की घोषणा की थी, और 15 जनवरी को मकर संक्रांति के लिए सार्वजनिक अवकाश था। अक्टूबर 2024 में, सरकार ने नवमी के दिन छुट्टी घोषित की।

अलग-अलग सरकारों के दौरान यूपी में छुट्टियों को लेकर क्या बदलाव आए हैं?

राज्य सरकारें पहले भी अपनी छुट्टियों की सूची का इस्तेमाल एक राजनीतिक संकेत देने के लिए करती रही हैं। मई 2007 में मायावती सरकार ने 9 अक्टूबर को-जो बीएसपी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि है-छुट्टी घोषित की थी। हालांकि, अक्टूबर 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इस छुट्टी को खत्म कर दिया।

बता दें कि सपा सरकार ने महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती, अजमेर उर्स, तथा चंद्रशेखर और महाराणा प्रताप की जयंती पर भी छुट्टियां घोषित की थीं।

वहीं अप्रैल 2017 में, योगी कैबिनेट ने 15 छुट्टियां रद्द कर दीं थी, जिनमें चेटी चंड, परशुराम जयंती, छठ पूजा और वाल्मीकि जयंती शामिल थीं। सरकार का कहना था कि स्कूलों को इन महापुरुषों के बारे में पढ़ाना चाहिए, न कि उनके नाम पर छुट्टी देनी चाहिए।

सरकारछुट्टीफैसलासमयकिससे संबंधित
मायावती (BSP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टी घोषितमई 2007बहुजन समाज के प्रमुख नेता
मायावती (BSP)कांशीराम की जयंती (15 मार्च)यूपी की छुट्टियों की सूची में शामिल2012 तकबहुजन समाज के प्रमुख नेता
अखिलेश यादव (SP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)छुट्टी रद्द कीअक्टूबर 2012BSP सरकार के फैसले में बदलाव
अखिलेश यादव (SP)महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती (5 अप्रैल)छुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक और सामुदायिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)अजमेर गरीब नवाज उर्सछुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)चंद्रशेखर जयंती (17 अप्रैल) और महाराणा प्रताप जयंती (9 मई)छुट्टी घोषित की2012–2017महापुरुषों की जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)चेती चंद, परशुराम जयंती, अजमेर उर्स, जमात-उल-विदा, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, छठ पूजा और ईद-ए-मिलाद समेत 15 छुट्टियांछुट्टियां रद्द कींअप्रैल 2017त्योहार और जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (11 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2024धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)मकर संक्रांति (15 जनवरी)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)रामनवमी (26–27 मार्च)दो दिन की छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (19 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार

क्या योगी ने नवरात्रि के दौरान कुछ और भी कहा?

छुट्टी का यह आदेश नवरात्रि के छठे दिन आया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं की शक्ति के बारे में एक संदेश भी दिया। उन्होंने इस संदेश के जरिए लड़कियों और खेलों के क्षेत्र में अपनी सरकार के कामकाज को सामने रखा।

मां कात्यायनी को समर्पित इस दिन, योगी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने देवी को महिलाओं के साहस, संकल्प और वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली मां कात्यायनी, महिलाओं के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय वीरता का प्रतीक हैं।”

उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले, “राज्य में डर और अराजकता का माहौल था, जहां बेटियों के सपनों को दबा दिया जाता था, उनका आत्मविश्वास कुचल दिया जाता था और मौकों की कमी के कारण उनकी प्रतिभा मुरझा जाती थी।”

सीएम योगी ने कहा कि खेल के मैदान माफियाओं के नियंत्रण में थे, और लड़कियों के सपनों को उड़ान मिलने के बजाय, उन्हें “चार दीवारों के भीतर कैद” कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, “पिछले साढ़े नौ वर्षों में, राज्य में बदलाव का एक नया अध्याय लिखा गया है। डर की जगह सुरक्षा ने ले ली है, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन ने, और संसाधनों की कमी की जगह खेल सुविधाओं के विस्तार ने ले ली है।”

योगी ने खेलों से जुड़ी किन सुविधाओं का जिक्र किया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लड़कियों के पास अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक मजबूत आधार है, जिसमें “गांव के खेल के मैदानों और ब्लॉक-स्तरीय मिनी स्टेडियमों से लेकर जिला स्टेडियम, मंडल स्तरीय खेल कॉलेज और मेरठ में स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय” शामिल हैं।

उन्होंने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को मिलने वाले लाखों-करोड़ों रुपये के नकद पुरस्कारों और खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये चीजें प्रतिभा को बढ़ावा देती हैं, उपलब्धियों का सम्मान करती हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाती हैं।

मुख्यमंत्री ने किन महिला खिलाड़ियों के नाम गिनाए?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी; जूडो में अस्मिता डे; क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह; हॉकी में वंदना कटारिया; और कुश्ती में दिव्या काकरान का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन ने भारत और उत्तर प्रदेश, दोनों का मान बढ़ाया है।

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कौन हैं केटी जकारिया, जिन्हें ट्रंप ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाया?

Katie Zacharia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया का कार्यकाल कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। ट्रंप ने हाल ही में अचानक उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने ट्रंप के पहले कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं, जब व्हाइट हाउस में अधिकारियों को बार-बार बदला जाता था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों ने जकारिया के पद छोड़ने की पुष्टि की। इनमें से एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है, जबकि दूसरे ने बताया कि वह अब इस जिम्मेदारी से अलग हो रही हैं।

केटी जकारिया को पद से हटाने से पहले के पांच दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान उन्हें कई असहज सवालों का सामना करना पड़ा। सवाल पूछने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के कुछ प्रमुख मीडिया समर्थक भी शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि जकारिया को पद से हटाए जाने की पुष्टि होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इस नौकरी पर दोबारा विचार करने की सलाह दी थी।

व्हाइट हाउस में केटी जकारिया का कार्यकाल कैसे लड़खड़ा गया

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को जकारिया की नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्हें कैरोलीन लेविट की जगह नियुक्त किया गया था, जो अब तक की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव थीं और कई सालों से ट्रम्प के करीबी लोगों में शामिल रही थीं।

केटी जकारिया रूढ़िवादी विचारों वाली राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) की मूल कंपनी ‘ट्रम्प मीडिया’ के संचार विभाग में काम कर चुकी थीं। इसके अलावा, ट्रम्प के दूसरे प्रशासन के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ में भी काम किया था।

हालांकि, मंगलवार को जब वह पहली बार व्हाइट हाउस प्रेस कोर के सामने आईं, तो तुरंत ही उन पर सवाल उठने लगे।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ब्रीफिंग के दौरान जकारिया असहज दिखीं। वे रुक-रुक कर बोल रही थीं और ट्रम्प की उपलब्धियों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए-ये सभी पत्रकार ऐसे मीडिया संस्थानों से थे जिनका झुकाव रूढ़िवादी विचारधारा की ओर था या जो ट्रम्प के समर्थक थे। लगभग 14 मिनट बाद उन्होंने बातचीत खत्म कर दी।

बाद में जकारिया ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस सेशन को छोटा रखा था, क्योंकि उसी दिन सुबह ट्रम्प को पत्रकारों के सवालों के जवाब देने थे। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें पहले से पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी थी।

इसके बाद, बुधवार और गुरुवार को वे अलास्का, एरिजोना और मोंटाना में ट्रम्प की रैलियों में उनके साथ गईं, लेकिन उन्होंने कोई और प्रेस ब्रीफिंग नहीं की।

हालांकि, पत्रकारों के सामने उनका यह प्रदर्शन उन कई मुद्दों में से सिर्फ एक था, जो उनके छोटे कार्यकाल के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बने रहे।

केटी जकारिया की कानूनी योग्यताओं को लेकर विवाद

जकारिया की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उन्होंने कुछ रूढ़िवादी टीवी नेटवर्कों पर खुद को वकील बताया।

जकारिया ने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल से पढ़ाई की है, लेकिन वह कैलिफोर्निया की बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। इसके अलावा, उनके पास अमेरिका में वकालत करने के लिए जरूरी कोई अन्य योग्यता भी नहीं थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि वह अमेरिका के किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में वकील के तौर पर पंजीकृत थीं या उन्हें बार में शामिल किया गया था।

हालांकि, जकारिया ने खुद को ‘वकील’ कहने का बचाव करते हुए कहा कि जब वह कानूनी विश्लेषण देती थीं, तो यह शब्द इस्तेमाल करना सही था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने चीन में वकील के तौर पर काम किया था।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “मैंने सभी जरूरी योग्यताओं के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन लॉ (अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कानून) की प्रैक्टिस की है।”

इस विवाद ने उन रूढ़िवादी मीडिया हस्तियों का भी ध्यान खींचा, जो आमतौर पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन करते हैं।

वहीं, फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी, जो लंबे समय से ट्रम्प के सहयोगी रहे हैं, ने सवाल उठाया कि जकारिया ने अपनी योग्यताओं के बारे में खुलकर बात क्यों नहीं की। जब उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वह कैलिफोर्निया बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं, तो हैनिटी ने पूछा, “सीधे यह क्यों नहीं कह दिया कि ‘मैंने पेपरडाइन लॉ स्कूल से पढ़ाई की, फिर करियर का एक अलग रास्ता चुन लिया, और मैंने एक बार बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो पाई’?”

उन्होंने ‘लॉयर’ (वकील) और ‘अटॉर्नी’ (कानूनी प्रतिनिधि) शब्दों के बीच उनके द्वारा किए गए अंतर को भी चुनौती दी और सवाल किया कि उन्होंने सीधे तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि उन्होंने कभी वकालत नहीं की है।

जकारिया ने फिर दोहराया कि वह वकील के तौर पर काम नहीं कर रही थीं और न ही कोई कानूनी सलाह दे रही थीं। शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के एक अलग इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनसे यह कभी नहीं पूछा गया था कि प्रेस सेक्रेटरी बनने से पहले उन्होंने बार परीक्षा पास की है या नहीं।

जकारिया और ट्रम्प, दोनों का यही कहना था कि उन्हें प्रशासन में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशंस (संचार) विभाग में काम करने के लिए रखा गया था।

‘मैं फिर से विचार करने को कहूंगा’: ट्रम्प ने उनके भविष्य पर सवाल उठाए

शुक्रवार तक, जकारिया के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। उसी दिन फॉक्स न्यूज चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान, उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का उन पर अभी भी भरोसा है।

उन्होंने जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आस-पास के सभी लोगों का भरोसा और विश्वास जीत सकूंगी।” उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि वह व्हाइट हाउस में अपनी अगली प्रेस ब्रीफिंग कब करेंगी।

कुछ घंटों बाद, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें अपने पद पर फिर से विचार करने की सलाह दी थी। जॉर्जिया में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मीडिया ने जकारिया के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने उससे कहा, ‘मुझे लगता है कि खुश रहना तुम्हारे लिए बेहतर होगा।'”

“मैंने कहा, ‘सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मैं फिर से सोचता।’ मैंने कहा, ‘तुम इस बारे में सोच लो, लेकिन मैं तो फिर से विचार करता।'”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने उससे पूछा था, “‘केटी, क्या तुम्हें इसकी जरूरत है? मुझे नहीं लगता कि तुम्हें इसकी जरूरत है।'” उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि “उसका जीवन अच्छा रहे,” न कि वह “मीडिया के हाथों बुरी तरह परेशान” हो।

उस समय, राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अपनी यात्राओं से लौटने के बाद वे उनके भविष्य पर चर्चा करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जब मैं वापस आऊंगा, तो हम बात करेंगे।”

जब उनसे किसी संभावित विकल्प (रिप्लेसमेंट) के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इस पद के लिए कई लोग इच्छुक हैं।

व्हाइट हाउस में एक जाना-पहचाना फेरबदल, लेकिन जकारिया के लिए आगे क्या?

जकारिया को हटाना उसी तरह के अचानक किए गए बदलावों की वापसी है, जो अक्सर ट्रम्प के पहले कार्यकाल में देखने को मिलते थे, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में ऐसे बदलाव कम ही हुए थे।

उनका कार्यकाल एंथनी स्कारामुची से भी छोटा रहा, जो 2017 में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के तौर पर सिर्फ 10 दिन तक इस पद पर रहे थे।

उनके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कारामुची ने ‘X’ पर लिखा, “रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मुझे दूसरों के दुख में कोई खुशी नहीं मिलती।”

प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाए जाने के बावजूद, हो सकता है कि जकारिया ट्रम्प प्रशासन को पूरी तरह से न छोड़ें। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशासन में कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ABC न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि केटी जकारिया को ट्रंप प्रशासन में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी में भेजे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर जकारिया की जगह कौन लेगा।

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ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत:इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला

अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। CNN के मुताबिक, हमलावर को एक स्थानीय नागरिक ने गोली मार दी, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर की उम्र करीब 16 साल थी। एजुकेशन वीक की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल में गोलीबारी का यह इस साल का 26वां मामला है। गोलीबारी के बाद की 3 तस्वीरें मारे गए बच्चे 5 से 11 साल के थे एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, मारे गए बच्चों की उम्र 5, 8 और 11 साल थी। मरने वालों में एक शिक्षक भी शामिल है। इनके परिवारों को जानकारी दे दी गई है। गोलीबारी में घायल 7 साल के एक बच्चे और 54 साल के शिक्षक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस प्रमुख माइक क्रांट्ज ने बताया कि हमलावर बेंड का रहने वाला था। उसने स्कूल के बंद दरवाजों पर गोली चलाकर अंदर घुसने का रास्ता बनाया था। FBI की टीम भी जांच में जुटी FBI के निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया पर बताया कि एजेंसी की टीम घटनास्थल पर मौजूद है। फिलहाल जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या हमलावर पहले कभी इस स्कूल में पढ़ा था। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। आने वाले दिनों में घटना से जुड़ी और जानकारी जारी की जाएगी। स्कूल में करीब 450 छात्र पढ़ते हैं रॉयटर्स के मुताबिक, सिल्वर रेल एलीमेंट्री स्कूल में किंडरगार्टन से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 450 छात्र और 40 कर्मचारी हैं। ओरेगन की गवर्नर टीना कोटेक ने हमलावर को रोकने वाले स्थानीय नागरिक से भी बात की। गवर्नर ने उस नागरिक की तारीफ करते हुए कहा कि उसने बहादुरी से लोगों की जान बचाई। इस साल हुई गोलीबारी की बड़ी घटनाएं 19 अप्रैल, लुइसियाना: श्रेवपोर्ट में गोलीबारी में 8 बच्चों की मौत हुई। इनमें हमलावर के 7 बच्चे शामिल थे। 9 अक्टूबर, पेंसिल्वेनिया: एरी में एक व्यक्ति ने परिवार के 7 सदस्यों और एक परिचित की हत्या कर दी। बाद में उसने खुदकुशी कर ली। 9 अक्टूबर, जॉर्जिया: डगलस में एक व्यक्ति ने परिवार के 4 सदस्यों की गोली मारकर हत्या की और फिर खुदकुशी कर ली। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से 35 की मौत: इनमें 34 बच्चे, 1 महिला टीचर पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक प्राइवेट स्कूल की छत गिरने से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 35 हो गया है। इनमें 34 छात्र और एक महिला टीचर शामिल हैं। सभी बच्चों की उम्र 13 साल या उससे कम है। हादसे के बाद निजी स्कूल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…