होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार को एक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ। इस जहाज में 5 भारतीय सवार थे। ओमान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को बताया कि पांचों भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। ये नाविक कुवैत के झंडे वाले टैंकर एमटी काजिमाह III पर सवार थे। यह कच्चे तेल से भरा था और अफ्रीका की ओर जा रहा था। हालांकि, यह हमला किसने किया, यह अभी जानकारी तक सामने नहीं आई। फरवरी से अब तक होर्मुज में हमलो में 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, इन हमलों में 11 भारतीय नाविकों की जान गई। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर 4500 भारतीय नाविक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इससे पहले मंगलवार को बताया था कि इस क्षेत्र में चल रहे व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, इस समय फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 6 कमर्शियल जहाज हैं। इसके अलावा 6 विदेशी झंडे वाले जहाज भी हैं, जो भारत के लिए सामान लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं। जायसवाल के मुताबिक, भारत का शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर नजर रख रहा है। भारतीय दूतावासों और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावास नाविकों की सुरक्षा और भलाई के लिए जरूरी कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनकी भलाई भारत की प्राथमिकता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाविकों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। जयशंकर ने कहा था, समुद्र में नए खतरे पहले से मौजूद जमीन से जुड़े संकटों को और बढ़ा रहे हैं। भारतीय नाविकों के साथ दूसरे देशों के नाविकों की भी जान गई है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तुरंत तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों के लिए काम कर रहे जहाजों के क्रू की सुरक्षा बनी रहेगी और ऊर्जा की सप्लाई के साथ-साथ दुनिया का व्यापार भी बिना रुकावट चलता रहेगा। ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है और उसके पास पैसा नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि ईरान की कमाई होर्मुज से होने वाले कारोबार पर निर्भर है। अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकेबंदी की है, जो लोहे की दीवार जैसी है। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर हमला करेगा सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को उतार सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
30 सितंबर 2026, सुबह 9 बजकर 21 मिनट। सऊदी अरब के आसमान में अचानक एक प्लेन मुंह के बल नीचे गिरने लगा। कुछ मिनट के भीतर 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट पर आ गया। रफ्तार भी 760 से बढ़कर 1110 किमी/घंटा हो गई। विमान में बैठे यात्री आखिरी प्रार्थना करने लगे। लेकिन कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ एक ‘हीरो’ की हिम्मत और जज्बे ने सभी 180 जानें बचा लीं। नाम है- कैप्टन स्मित मच्छर। इजराइल के पीएम नेतन्याहू, भारतीय पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कैप्टन स्मित की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने 9/11 जैसा बड़ा हादसा होने से बचा लिया। आखिर कौन हैं स्मित मच्छर, कॉकपिट में क्या हुआ और क्या वाकई 9/11 जैसा हादसा टला; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकपिट में क्या हुआ कि अचानक गिरने लगा था विमान? जवाबः ये फ्लाईदुबई एयरलाइन का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान था। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे प्लेन ने UAE के दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी। कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित और एक को-पायलट मौजद था। फ्लाइट इजराइल के तेल अवीव शहर जा रही थी। करीब 8 बजे प्लेन 35,000 फीट की हाइट पर था। टेक ऑफ के करीब ढाई घंटे बाद तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा। प्लेन UAE के एयर स्पेस से निकलकर सऊदी अरब के आसमान पहुंचा। इसके बाद अचानक सब कुछ बदल जाता है…. सवाल-2: स्मित लहूलुहान थे, तो फ्लाइट कैसे सुरक्षित लैंड हुई? जवाबः पहले यात्री, जो कॉकपिट में दाखिल हुए, वो यानिव हायून थे। फ्लाइट FZ 1073 की सुरक्षित लैंडिंग के बाद नेतन्याहू ने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर यानिव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर शाबाशी दी। पेशे से प्लंबर यानिव ने नेतन्याहू को बताया कि प्लेन में एक ऑफ-ड्यूटी पायलट भी मौजूद थे। दोनों ने मिलकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कामयाब नहीं हुए। हालांकि बेहोश होने से पहले स्मित ने दरवाजा खोल दिया। तब अंदर पहुंचे यानिव ने बताया, ‘पायलट्स की दोनों सीटें खाली थीं। मैंने देखा एक पायलट फर्श पर लहूलुहान पड़ा था और दूसरा पायलट दोनों सीटों के बीच कंट्रोल पैनल पर चढ़ा था।’ यानिव ने को-पायलट की गर्दन पकड़कर उसे पीछे की तरफ कॉकपिट से बाहर घसीट लिया। नेतन्याहू के पूछने पर यानिव ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि वो कंट्रोल पैनल के साथ छेड़छाड़ करने या उसे डैमेज करने की कोशिश कर रहा था। यानिव ने दूसरे यात्रियों को आवाज दी। सभी ने मिलकर आरोपी को-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया। को-पायलट को काबू करने वाले तीन इजराइली यात्रियों में शामिल त्जिका मानेस के मुताबिक, हमलावर पायलट को काबू करने में करीब 20-25 मिनट लगे। तीनों ने तार वाले हेडफोन से उसे बांध दिया। इसके बाद यानिव ने कंट्रोल स्टिक्स पकड़कर पीछे खींचे, ताकि विमान ऊपर उठ सके। नेतन्याहू ने पूछा, ‘क्या आपने वाकई ऐसा किया था?’ इस पर यानिव ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘हां मैंने स्टिक्स पूरी तरह पीछे खींच दी थीं। मैं प्लेन हादसों के इन्वेस्टीगेशन देखता रहता हूं।’ स्टिक्स खींचने के बाद विमान कुछ स्थिर होने लगा। यानिव के मुताबिक, केबिन में दो पायलट मौजूद थे। वो शुरू में सदमे में लग रहे थे। यानिव ने उनसे चिल्लाकर प्लेन का कंट्रोल लेने को कहा। एक पायलट ने कंट्रोल हाथ में ले लिया और जहाज को सऊदी अरब के ताबुक में प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया। 10:45 बजे प्लेन सुरक्षित एयर पोर्ट पर उतर गया। फ्लाइट में मौजूद एक इजराइली डेंटिस्ट ने स्मित का शुरुआती इलाज किया। यानिव ने कहा, ‘हमने आखिरी तक उन्हें जीवित रखा।’ नेतन्याहू ने खून से सने कपड़े पहने यानिव से पूछा, ‘आपको पता है कि आप क्या रहे थे?’ यानिव ने जवाब दिया, ‘हम शेरों का देश हैं।’ दरअसल, यहूदियों की बाइबिल में यहूदियों की तुलना उठकर खड़े होते हुए शेर से की गई है। जून 2025 में ईरान पर हुए इजराइली हमले का नाम भी- ‘राइजिंग लायन’ था। ये पूरी कहानी फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा, इजराइली रिपोर्ट्स, सऊदी अधिकारियों और यात्रियों के बयानों के आधार पर है। जांच अभी जारी है इसलिए घटनाओं के सीक्वेंस में बदलाव हो सकता है। नेतन्याहू ने यानिव से कहा, ‘तुम्हारे बिना यह एक और 9/11 हो सकता था। इस पर यानिव ने भी कहा कि उनके हिसाब से को-पायलट का यही इरादा था। सवाल-3: क्या वाकई 9/11 जैसी घटना हो सकती थी? जवाबः 11 सितंबर 2001 को आतंकी संगठन अलकायदा के 19 आतंकियों ने 4 घरेलू अमेरिकी विमान हाईजैक कर लिए थे। इनमें से दो को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर और एक को अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की बिल्डिंग से टकराकर क्रैश करवा दिया था। चौथा प्लेन व्हाइट हाउस पर क्रैश होने वाला था, लेकिन यात्रियों की सूजबूझ से पेन्सिलवेनिया के खाली मैदान में क्रैश हुआ। करीब 2900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। यानिव और नेतन्याहू के अलावा कई इजराइली पत्रकारों और आम लोगों ने स्मित के को-पायलट को आतंकी कहा है। नेतन्याहू ने यानिव से बातचीत में कहा, ‘अगर विमान इजराइल पहुंच जाता, तो न जाने क्या होता।’ पीएम मोदी ने भी नेतन्याहू की 9/11 जैसा हमला टलने की बात दोहराई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी को-पायलट ओमान का नागरिक है। इसकी जांच हो रही है कि वह इजराइल आने वाली फ्लाइट का पायलट कैसे बना और क्या इसके लिए उसने ओमान के अलावा इजराइल या किसी और देश की नागरिकता भी हासिल की थी। इजराइली मीडिया सोर्सेज के मुताबिक, वह फ्लाईदुबई एयरलाइंस में एक साल से भी कम समय से काम कर रहा था। यानिव के मुताबिक, वो प्लेन के कंट्रोल्स से छेड़छाड़ कर रहा था। हालांकि फ्लाईदुबई ने हमले के पीछे को-पायलट की मंशा पर कोई बयान नहीं दिया है। उसे इलाज के बाद पूछताछ के लिए UAE ले जाया गया है। अमेरिकी एविएशन एक्सपर्ट जेफ गुजेटी के मुताबिक, ‘प्लेन 10 हजार फीट के नीचे चला जाता, तो उसे क्रैश होने से बचाना मुमकिन नहीं होता। इजराइल ने भी 9/11 जैसा हमला टालने के लिए प्लेन को हवा में ही मार गिराने की तैयारी कर ली थी।’ इजराइली न्यूज पोर्टल वाईनेट ग्लोबल के मुताबिक, इजराइली एयरफोर्स के पायलट जॉर्डन में तैनात थे। अगर प्लेन इजराइल सीमा के अंदर क्रैश होने वाला होता, तो उसे हवा में शूट कर दिया जाता। सवाल-4: कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर और अब उनकी हालत कैसी है? जवाबः मूलतः गुजरात के रहने वाले 39 साल के स्मित परिवार के साथ शुरुआत में मुंबई के घाटकोपर (ईस्ट) में रहते थे। स्मित के मुताबिक, पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था। परिवार का कपड़े का पुराना कारोबार है। स्कूली पढ़ाई के बाद स्मित ने कपड़े के व्यापार से जुड़ा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से BBA की डिग्री ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एविएशन सेमिनार अटेंड करने के दौरान उन्हें पायलट बनने का ख्याल आया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के एक इंस्टीट्यूट से पायलट ट्रेनिंग ली। इसमें करीब 17 लाख रुपए खर्च हुए। इस हादसे के बाद स्मित का 2025 का एक पॉडकास्ट चर्चा में है। इसमें स्मित बता रहे हैं कि पायलट बनने के फैसले से उनकी मां डर गई थीं, लेकिन पिता बिल्कुल शांत थे। 2011 में स्मित बतौर कमर्शियल पायलट मुंबई में स्पाइसजेट एयरलाइंस से जुड़े। स्मित के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले बेंगलुरु से दिल्ली की फ्लाइट उड़ाई। ये एक बोइंग विमान था। स्मित ने 11 साल स्पाइसजेट के विमान उड़ाए। नवंबर 2020 में स्मित ट्रेनिंग कैप्टन बने। इसके बाद वो दूसरे पायलट्स को फ्लाइंग ट्रेनिंग देते थे। जून 2022 में स्मित UAE की एयरलाइंस फ्लाईदुबई से जुड़ गए। यहां वह कैप्टन की पोस्ट पर हैं। कमर्शियल फ्लाइट्स में कैप्टन को पायलट-इन-कमांड कहते हैं। उड़ान के दौरान को-पायलट भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन विमान की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी, उसका कंट्रोल और इमरजेंसी के समय आखिरी निर्णय कैप्टन ही लेता है। फिलहाल स्मित अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ दुबई में ही रहते हैं। अक्टूबर 2025 के पॉडकास्ट में स्मित ने फ्लाइट की सिक्योरिटी और विमान में डॉक्टर्स और क्रू मेंबर्स की अहमियत के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, ‘जब हम ऊपर होते हैं और अगर कुछ हो जाए, तो आपको कौन बचाएगा? आप भाग्यशाली होंगे अगर फ्लाइट में कोई डॉक्टर मौजूद हो, वे आपकी जान बचा सकते हैं।’ स्मित ने एक और किस्सा बताया कि फ्लाइट के दौरान एक प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो गया था। ऐसे में उन्होंने एक नजदीकी एयरपोर्ट ढूंढकर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। घायल होने के बाद स्मित बेहोश हो गए थे, उन्हें सऊदी के तबुक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन पर हमले के आरोपी को-पायलट को भी इसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मित की सर्जरी हुई है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में वाणिज्य दूतावास नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया है कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से बात की है। ——— ये खबर भी पढ़िए… अभिनंदन ने वायुसेना छोड़कर प्राइवेट एयरलाइन क्यों जॉइन की; उन्हें छुड़ाने के लिए भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलें तान दी थीं मिग-21 से पाकिस्तानी F-16 गिराने वाले फाइटर पायलट अभिनंदन वर्धमान ने प्राइवेट एयरलाइन जॉइन कर ली है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना छोड़ दी, जबकि सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होना था। अभिनंदन अब गोवा की प्राइवेट एयरलाइन कंपनी ‘FLY 91’ के लिए ATR विमान उड़ाएंगे। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका ने बुधवार को नेवादा में जमीन के नीचे हाई-एक्सप्लोसिव टेस्ट किया। इसमें परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ। इस प्रयोग का मकसद ऐसी तकनीक को बेहतर बनाना है, जिससे कम ताकत वाले या छिपाकर किए गए परमाणु विस्फोट का भी पता लगाया जा सके। अमेरिका ने साल 2020 में चीन पर लोप नूर परमाणु परीक्षण केंद्र में सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्ट करने का आरोप लगाया था। जमीन के नीचे शक्तिशाली रासायनिक विस्फोटक लगाए प्रयोग नेवादा नेशनल सिक्योरिटी साइट के P-टनल इलाके में किया गया। वैज्ञानिकों ने जमीन के नीचे शक्तिशाली रासायनिक विस्फोटक लगाए और विस्फोट के दौरान पैदा होने वाले कंपन, ध्वनि और दूसरे संकेतों को रिकॉर्ड किया। इसके लिए कई तरह के सेंसर लगाए गए थे। अमेरिका के मुताबिक, इस टेस्ट से मिले डेटा से कंप्यूटर मॉडल और डिटेक्शन सिस्टम को बेहतर किया जाएगा, ताकि दुनिया में कहीं भी होने वाले संभावित परमाणु धमाकों का पता लगाया जा सके। परमाणु बम का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? अमेरिका का मकसद परमाणु धमाका करना नहीं था। वैज्ञानिकों ने उसकी जगह बड़े रासायनिक विस्फोट किए। इन विस्फोटों से जमीन में जो कंपन पैदा हुआ, उसका अध्ययन किया गया। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि अगर भविष्य में कहीं परमाणु परीक्षण होता है, तो उसे पहचानने वाले सिस्टम क्या संकेत पकड़ सकते हैं। छिपे हुए परमाणु धमाके पकड़ना आसान नहीं आमतौर पर जब जमीन के नीचे परमाणु धमाका होता है, तो उससे भूकंप जैसा कंपन पैदा होता है। दुनिया भर में लगे सेंसर इसी कंपन को पकड़कर पता लगाते हैं कि कहीं परमाणु परीक्षण तो नहीं हुआ। लेकिन अगर कोई देश धमाका ऐसी जगह करे कि उसका कंपन बाहर कम पहुंचे, तो उसे पकड़ना मुश्किल हो सकता है। आसान भाषा में कहें तो धमाका तो होगा, लेकिन उसके निशान कमजोर दिखेंगे। अमेरिका का कहना है कि वह ऐसी तकनीक तैयार कर रहा है, जिससे कम ताकत वाले या छिपाने की कोशिश किए गए परमाणु परीक्षणों का भी आसानी से पता लगाया जा सके। चीन ने अमेरिका के आरोप को खारिज किया था अमेरिका का आरोप है कि चीन ने 22 जून 2020 को शिनजियांग के लोप नूर परमाणु परीक्षण केंद्र में सीक्रेट भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वहां 2.75 तीव्रता का भूकंपीय झटका रिकॉर्ड हुआ था। उनका दावा था कि यह सामान्य भूकंप या खनन से हुआ धमाका नहीं था। अमेरिका का कहना है कि चीन ने ‘डिकपलिंग’ तकनीक अपनाई, जिसमें धमाके को जमीन के अंदर बड़ी गुफा में किया जाता है। इससे निगरानी सिस्टम में झटके रिकॉर्ड नहीं होते। चीन ने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। उसका कहना है कि उसने कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया और अमेरिका बिना सबूत के आरोप लगा रहा है। वहीं, CTBTO ने कहा था कि उसके निगरानी नेटवर्क को उस दिन परमाणु परीक्षण का कोई साफ संकेत नहीं मिला। दो छोटे भूकंपीय झटके जरूर दर्ज हुए, लेकिन यह तय नहीं हो सका कि वे भूकंप, किसी दूसरे धमाके या परमाणु परीक्षण की वजह से थे। ——————— ये खबर भी पढ़ें… जिनपिंग के बॉडीगार्ड की पहचान उजागर:व्हाइट हाउस की गेस्ट लिस्ट में नाम-पद सामने आया चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई साल से एक अधिकारी विदेश दौरों और बड़ी बैठकों में नजर आता रहा है। वह कभी शी के पीछे खड़ा दिखा तो कभी उनके साथ मीटिंग में बैठा नजर आया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट से अचानक हाइजैक का अलर्ट मिला। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक विमान ने पहले इमरजेंसी का 7700 कोड भेजा और फिर 7500 कोड भेजा, जिसका मतलब हाइजैक होता है। अलर्ट मिलते ही इजराइल ने विमान की ओर फाइटर जेट भेज दिए। इसके बाद फ्लाइट ने अपना रास्ता बदलकर सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। विमान में करीब 180 यात्री सवार थे, जिनमें 150 से ज्यादा इजराइली नागरिक थे। बाद में इजराइली सूत्रों ने बताया कि विमान हाइजैक नहीं हुआ था बल्कि पायलटों के बीच कहासुनी हो गई थी। वहीं CNN ने दावा किया है कि विमान में दोनों पायलटों के बीच हाथापाई हुई थी। इसी वजह से इमरजेंसी सिग्नल भेजा गया। फ्लाइट के रूट बदलने की वीडियो सऊदी अरब के ऊपर बदला रास्ता फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान सऊदी अरब के ऊपर पहुंचने के बाद अपने तय रास्ते से मुड़ गया था। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान ने करीब दो मिनट में 34 हजार फीट से 16,600 फीट तक की ऊंचाई कम कर ली थी। यह घटना भारतीय समय के हिसाब से रात के समय हुई थी। इसके करीब 12 मिनट बाद विमान से इमरजेंसी सिग्नल भेजा। कुछ समय के लिए फ्लाइट-ट्रैकिंग वेबसाइटों पर विमान की स्थिति दिखनी भी बंद हो गई थी। इजराइल में प्रधानमंत्री-रक्षा मंत्री की इमरजेंसी बातचीत विमान से मिले अलर्ट के बाद इजराइल में सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। हिब्रू मीडिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने भी मामले को लेकर इमरजेंसी बातचीत की। इस दौरान विमान की स्थिति और उसमें सवार यात्रियों को लेकर जानकारी जुटाई गई। इजराइली एयरफोर्स के फाइटर जेट भी विमान की तरफ भेजे गए थे। पायलटों के बीच झगड़ा क्यों हुआ अभी पता नहीं पायलटों के बीच किस बात को लेकर हाथापाई हुई थी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है। विमान के सऊदी अरब में उतरने के बाद अधिकारियों को घटना की पूरी जानकारी जुटाने का मौका मिला है।
—————————- ये खबर भी पढ़ें… जिनपिंग के बॉडीगार्ड की पहचान उजागर: व्हाइट हाउस की गेस्ट लिस्ट में नाम-पद सामने आया चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई साल से एक अधिकारी विदेश दौरों और बड़ी बैठकों में नजर आता रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई साल से एक अधिकारी विदेश दौरों और बड़ी बैठकों में नजर आता रहा है। वह कभी शी के पीछे खड़ा दिखा तो कभी उनके साथ बैठक में बैठा नजर आया। लेकिन चीन ने कभी सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया कि वह कौन है और क्या जिम्मेदारी संभालता है। अब उसकी पहचान सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने शी जिनपिंग के सम्मान में पिछले हफ्ते अमेरिका में एक खास रात्रिभोज आयोजित किया था। इसमें शामिल चीनी मेहमानों की लिस्ट व्हाइट हाउस ने जारी की। इसी लिस्ट से पहली बार झोउ होंगशू का नाम और उनका पद सामने आया। होंगशू को सेंट्रल गार्ड ब्यूरो का डायरेक्टर बताया गया है। यह विभाग चीन के राष्ट्रपति और दूसरे बड़े नेताओं की सुरक्षा करता है। झोउ इसी महीने नई दिल्ली में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान भी मौजूद थे। सालों से शी के साथ दिखते रहे, लेकिन नाम नहीं बताया गया झोउ होंगशू के बारे में चीन में भी बहुत कम जानकारी सार्वजनिक है। उनकी पढ़ाई, शुरुआती नौकरी और पुराने पदों की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। 2022 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं बड़ी राष्ट्रीय बैठक हुई थी। इसमें झोउ होंगशू को भी प्रतिनिधि बनाया गया था। लेकिन तब भी उनकी पूरी प्रोफाइल सार्वजनिक नहीं की गई थी। चीन के पूर्व पार्टी अधिकारी देंग यूवेन ने CNN से कहा कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, झोउ ऐसे पहले बड़े सुरक्षा अधिकारियों में हो सकते हैं, जो इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में लगातार नजर आए हैं। आखिर इस अफसर की नौकरी इतनी सीक्रेट क्यों है? इसकी एक बड़ी वजह वह संस्था है, जिसमें झोउ होंगशू काम करते हैं। सेंट्रल गार्ड ब्यूरो चीन की बेहद गोपनीय सुरक्षा संस्थाओं में से एक है। यह चीन के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा करता है। यह बीजिंग के झोंगनानहाई परिसर की सुरक्षा से भी जुड़ा है। इसी परिसर में चीन के शीर्ष नेता और कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े अधिकारी काम करते हैं। चीन के सरकारी मीडिया ने इस ब्यूरो को पुलिस और सेना, दोनों से जुड़ी एक खास संस्था बताया है। यहां काम करने वाले अधिकारियों के लिए देश के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा बेहद जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि इस संस्था में काम करने वाले अधिकारियों के बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक होती है। खासकर उन अधिकारियों की जानकारी और भी सीमित रहती है, जो सीधे शीर्ष नेताओं की सुरक्षा और कार्यक्रमों से जुड़े होते हैं। 2018 से अलग-अलग मौकों पर जिनपिंग के साथ दिखे झोउ की मौजूदगी का रिकॉर्ड कई साल पुराना है। 2018 में चीन की सेना के नॉर्दर्न थिएटर कमांड के निरीक्षण के दौरान वह तत्कालीन सेंट्रल गार्ड ब्यूरो प्रमुख वांग शाओजुन के साथ नजर आए थे। दोनों ने उस समय सैन्य वर्दी पहन रखी थी। 2019 में शी जिनपिंग जब नेपाल की तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से काठमांडू में मिले थे, तब भी झोउ उनके पीछे बैठे दिखाई दिए थे। 2023 में सैन फ्रांसिस्को में हुए एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग यानी एपीईसी सम्मेलन के दौरान भी वह शी के साथ नजर आए। इन मौकों की वजह से यह अनुमान लगाया जाता रहा है कि झोउ का पुराना करियर चीन की सेना यानी पीएलए से जुड़ा रहा होगा। हालांकि उनके पुराने पदों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। झोउ से पहले वाले अफसर की मौत भी रही रहस्य झोउ से पहले सेंट्रल गार्ड ब्यूरो के डायरेक्टर वांग शाओजुन थे। अप्रैल 2023 में उनकी मौत हो गई थी। चीन के सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की जानकारी करीब तीन महीने बाद दी थी। मौत की वजह किसी बीमारी को बताया गया, लेकिन बीमारी का नाम नहीं बताया गया। उनकी मौत के बाद ही सरकारी मीडिया ने पहली बार आधिकारिक तौर पर बताया कि वांग सेंट्रल गार्ड ब्यूरो के डायरेक्टर थे। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी के नाम की सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई थी। अगली पार्टी कांग्रेस से पहले झोउ पर नजर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 21वीं राष्ट्रीय कांग्रेस अगले साल अक्टूबर में होने वाली है। यह हर पांच साल में होने वाली बड़ी बैठक है, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव हो सकते हैं। मौजूदा कई वरिष्ठ नेता तब 70 साल से ज्यादा उम्र के हो जाएंगे। इनमें चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी भी शामिल हैं, जो अगले साल 73 साल के हो जाएंगे। ऐसे में पार्टी के युवा अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर रहेगी। झोउ की हालिया सार्वजनिक मौजूदगी को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी जनता से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों को खारिज करने की अपील की गई है। यह भी कहा गया है कि ट्रम्प भरोसे लायक नहीं हैं। IRGC की यह चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। IRGC ने यह भी कहा है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने ट्रम्प पर झूठ बोलने और अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान की अमेरिकी वोटरों से सीधी अपील अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इसी चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले अमेरिकी जनता के नाम 25 पेज की चिट्ठी जारी की है। इसमें अमेरिकी वोटरों से ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाने को कहा गया है। पत्र में IRGC ने यह भी कहा अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें ‘हैनोई हन्ना’ कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं हैं। अमेरिका की जनता को सोचसमझकर फैसला करना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ईरान ने UNGA में कहा था कि वह परमाणु तकनीक का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं छोड़ेगा। IRGC की चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की सीटों के लिए चुनाव होता है। इससे राष्ट्रपति नहीं बदलता लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत और नीतियां लागू करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्र की बात को दोहराते हुए कहा कि ट्रम्प झूठ बोलते हैं और अपने फायदे के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। IRGC के पत्र की 3 प्रमुख बात अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं। वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं। अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे। यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे: युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (SI) करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। ट्रम्प ने हाल ही में हुई UN महासभा में AI को सुपर इंटेलिजेंस (SI) कहने की बात कही थी। व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि AI को आर्टिफिशियल (बनावटी) कहना ठीक नहीं है। यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। ट्रम्प ने AI आधारित एक पोर्टल भी लॉन्च किया है। इसमें एक ही जगह से अमेरिकी सरकार की जानकारी और सरकारी सेवाएं मिलेंगी। ट्रम्प ने कहा कि अब पूरी अमेरिकी सरकार लोगों की हथेली में होगी। ट्रम्प ने बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों (CEO) के साथ बैठक की है। इसमें एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और जेन्सेन हुआंग समेत कई टेक दिग्गज शामिल हुए। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक नैतिक रूप से बाध्यकारी समझौते पर भी साइन किए हैं। इसका मकसद AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और विकास को लेकर कुछ नियम और दिशा तय करना है। बैठक के दौरान ट्रम्प ने दोहराया कि अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब सुपर इंटेलिजेंस कहा जाएगा। डेटा सेंटर के लिए स्थानीय लोगों के साथ काम करेंगी कंपनियां बैठक में AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा भी उठा। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां की स्थानीय कम्युनिटी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियां इन समुदायों की मदद करेंगी। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प ने कहा कि कंपनियों को डेटा सेंटर बनाने से पहले स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों को भी इसका फायदा मिले। टेक कंपनियों ने कहा- सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना जरूरी बैठक में AI के सुरक्षित इस्तेमाल और इसके गलत इस्तेमाल को रोकने पर भी चर्चा हुई। मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को भरोसा होना चाहिए कि यह तकनीक उसी तरह काम करेगी, जिस तरह इसे बनाया गया है। एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इस तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो। ट्रम्प बोले- गलत इस्तेमाल हुआ तो कार्रवाई करेंगे ट्रम्प ने AI सिस्टम की जटिलता और संभावित गलत इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इन मॉडलों का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए होगा। अगर इनका गलत इस्तेमाल किया गया तो सरकार कार्रवाई कर सकेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा में AI को अहम बताया अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन ने कहा कि AI में अमेरिका का नेतृत्व करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि AI और उससे जुड़ी नई तकनीकों का विकास सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। ट्रम्प ने बैठक को बेहद खास बताते हुए कहा कि अमेरिका AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार तथा टेक कंपनियां मिलकर इस तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित करना चाहती हैं। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन ने जंग में विस्फोटकों से लैस रोबोट सैनिक उतारे: रूस के 3000 सैनिकों को मारने का दावा रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की चिंता को अमेरिका ठीक से नहीं समझता। इसका असर रिश्तों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत दशकों से पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद का सामना कर रहा है। जयशंकर ने यह बयान सोमवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में दिया। इसमें भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विदेश नीति के जानकारों ने हिस्सा लिया। जयशंकर ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब पिछले एक साल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच नजदीकी बढ़ी है। वहीं, व्यापार, टैरिफ और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर भारत-अमेरिका के बीच मतभेद भी रहे हैं। जयशंकर बोले- अमेरिका से कई देशों संबंध मुश्किल हुए अमेरिका के पूर्व राजनयिक डेनियल रसेल ने जयशंकर से पूछा कि व्यापार और टैरिफ को लेकर पिछले एक साल में भारत-अमेरिका के रिश्तों में आई खटास को कैसे दूर किया जा सकता है। इस पर जयशंकर ने कहा कि दुनिया के कई देशों के लिए अमेरिका के साथ रिश्ते पहले के मुकाबले मुश्किल हुए हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया के कई देशों के लिए अमेरिका के साथ संबंध पहले से ज्यादा मुश्किल हुए हैं। यह शायद हमारे लिए राहत की बात न हो, लेकिन यही हकीकत है।” विदेश मंत्री ने दुनिया के हालात पर चिंता जताई जयशंकर ने कहा कि दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट और नई तकनीक से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इनका असर सिर्फ संघर्ष वाले देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात अब भी मुश्किल हैं, जबकि अफ्रीका के सूडान में संघर्ष जारी है। जयशंकर दुनिया के सामने ‘4F संकट’ यानी भोजन, ईंधन, खाद और पैसों की कमी को बड़ी चुनौती बताया।
ट्रम्प सरकार में नजदीक आए अमेरिका और पाकिस्तान ट्रम्प प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नजदीकी बढ़ी है। जून 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इसके बाद सितंबर 2025 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर ने फिर ट्रम्प से मुलाकात की। इन बैठकों को दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्कों के तौर पर देखा गया। जयशंकर बोले- भारत-चीन के रिश्ते सुधरे जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के रिश्ते पिछले दो साल के मुकाबले बेहतर हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में सीमा पर विवाद के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा। अब सीमा पर हालात सुधरने के साथ रिश्ते भी सामान्य हो रहे हैं। जयशंकर ने कहा, “सीमा पर जैसे हालात होंगे, दोनों देशों के रिश्ते भी वैसे ही रहेंगे।” उन्होंने कहा कि रिश्तों में सुधार का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी समस्याएं खत्म हो गई हैं।लजयशंकर ने कहा कि सीमा पर तनाव के कारण भारत और चीन के बीच आधिकारिक बातचीत, वीजा और सीधी उड़ानों पर असर पड़ा था। भारत लगातार चीन से कहता रहा कि सीमा पर विवाद जारी रहने से दोनों देशों को कोई फायदा नहीं है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में अब कई देश ताकतवर हो रहे हैं और वैश्विक फैसलों में उनकी भूमिका बढ़ रही है।
White House Dinner: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में आयोजित व्हाइट हाउस स्टेट बैंकवेट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। टेक और वॉल स्ट्रीट के दिग्गजों से सजी इस दावत से जुड़ी दो ऐसी बातें और तस्वीरें सामने आई हैं, जो इंटरनेट पर तेजी से ट्रेंड कर रही हैं।
डिनर टेबल पर जिनपिंग की ‘थर्मस’ बनी चर्चा का विषय
व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में सजी भव्य रेड-थीम वाली मुख्य टेबल पर मेहमानों का ध्यान एक अनोखी चीज ने खींचा। टेबल पर महंगी वाइन ग्लासेज और शाही क्रॉकरी के बीच दो थर्मस बोतलें रखी दिखाई दीं। एक काले रंग की और दूसरी सफेद रंग की।तस्वीरों के मुताबिक, काली थर्मस बोतल शी जिनपिंग के पास और सफेद थर्मस बोतल उनकी पत्नी पेंग लियुआन के पास रखी थी।
चीन में पारंपरिक रूप से सेहत के लिए गुनगुना या गर्म पानी पीना दैनिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है। सोशल मीडिया पर यूजर चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि ‘शायद जिनपिंग इसमें गोजी बेरीज (Goji Berries) या अपनी खास ग्रीन टी लेकर आए थे।’
वैसे कूटनीतिक हलकों में विदेशी दौरों पर राष्ट्राध्यक्षों द्वारा अपना पानी या चाय इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन व्हाइट हाउस के आधिकारिक स्टेट डिनर की टेबल पर थर्मस का इस तरह नजर आना लोगों को काफी दिलचस्प लगा।
‘चलो कंस्ट्रक्शन साइट देखने चलते हैं…’ ट्रंप के बयान पर लगे ठहाके
डिनर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने खास अंदाज में माहौल को हल्का-फुल्का बनाते नजर आए। ट्रंप ने शी जिनपिंग को अमेरिका के राष्ट्रीय प्रतीक ‘बाल्ड ईगल’ (Bald Eagle) की एक खास मूर्ति भेंट की।
अपने टोस्ट स्पीच के दौरान ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस का मौजूदा बैंक्वेट हॉल काफी छोटा पड़ता है, इसलिए वह $400 मिलियन की लागत से 1,000 लोगों की क्षमता वाला नया विशाल बॉलरूम बनवा रहे हैं।
ट्रंप ने मुस्कुराते हुए शी जिनपिंग और वहां मौजूद मेहमानों को आमंत्रित किया कि ‘डिनर के बाद चलिए, चलकर नए बॉलरूम की कंस्ट्रक्शन साइट देखते हैं, आप लोग इसके फर्श पर कदम रखने वाले पहले इंसान होंगे।’
जैसे ही दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के डिनर के बाद ‘कंस्ट्रक्शन साइट का मुआयना’ करने की बात सामने आई, टेबल पर बैठे एलन मस्क, टिम कुक, जेन्सन हुआंग और सैम ऑल्टमैन समेत तमाम बड़े उद्योगपति ठहाका लगाकर हंस पड़े।

टेक जगत के दिग्गजों की रही मौजूदगी
यह डिनर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सिलिकॉन वैली के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे। टेस्ला के एलन मस्क, एपल के टिम कुक, एनवीडिया के जेन्सन हुआंग, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई और मेटा के मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गजों ने इसमें शिरकत की।
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