TMC के हाथ से फिसले दो पार्लियामेंट्री पैनल से अध्यक्ष का पद, डोला सेन और काकोली घोष को लगा करारा झटका

राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने शनिवार को अलग-अलग विभागों से जुड़ी संसद की स्थायी समितियों को फिर से बनाया। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पर पड़ा है। पार्टी को दो अहम संसदीय समितियों के अध्यक्ष के पदों से हाथ धोना पड़ा है। इस फैसले से टीएमसी सांसद डोला सेन और कीर्ति आजाद को बड़ा झटका लगा है।

वाणिज्य मामलों पर संसद की स्थायी समिति का नया अध्यक्ष बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी को बनाया गया है। उन्होंने डोला सेन की जगह ली है। वहीं टीएमसी के बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार उनकी पुरानी पार्टी के सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह केमिकल्स और फर्टिलाइजर पर पैनल की चेयरपर्सन बनाई गई हैं। डीएमके एमपी तिरुचि शिवा और के कनिमोझी को उद्योग मामलों पर पार्लियामेंट्री कमिटी और फूड, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन पर पैनल का फिर से अध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के कुछ जरूरी सहयोगी दलों, JD-U, शिवसेना और TDP – के नेताओं को भी अलग-अलग पार्लियामेंट्री कमेटियों के हेड बनाए रखा गया है।

कांग्रेस के शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कुछ विपक्षी नेताओं को भी क्रमशः एक्सटर्नल अफेयर्स और एग्रीकल्चर कमेटियों के चेयरपर्सन के तौर पर बनाए रखा गया है। कांग्रेस के मुकुल वासनिक को एजुकेशन, महिला, बच्चे और युवा मामलों पर पार्लियामेंट्री पैनल का हेड बनाए रखा गया है, जबकि समाजवादी पार्टी के राम गोपाल वर्मा को हेल्थ और फैमिली वेलफेयर पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है। BJP के राधा मोहन सिंह डिफेंस पर पैनल को हेड करेंगे।

JD-U के संजय कुमार झा को ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि शिवसेना के श्रीरंग बार्ने को एनर्जी पर पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के सुजीत कुमार ने अपनी पार्टी के MP बृज लाल की जगह पर पर्सनेल, पब्लिक ग्रीवांस, लॉ और जस्टिस पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन बनाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को कोल, माइंस और स्टील पर पैनल का हेड फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि BJP के राजीव प्रताप रूडी को वॉटर रिसोर्स पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के भर्तृहरि महताब फाइनेंस पैनल के हेड बने रहेंगे, जबकि उनके पार्टी साथी राधा मोहन दास अग्रवाल को होम अफेयर्स पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के निशिकांत दुबे को भी कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पैनल का हेड फिर से बनाया गया है, जबकि महाराष्ट्र से पार्टी MP मेधा विश्राम कुलकर्णी को साइंस और टेक्नोलॉजी, एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज कमेटी का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के सुधीर गुप्ता ने रेलवे पैनल के चेयरपर्सन के तौर पर पार्टी साथी सी एम रमेश की जगह ली है, जबकि कांग्रेस के सप्तगिरी शंकर उलाका को रूरल डेवलपमेंट और पंचायती राज पैनल का हेड फिर से बनाया गया है।

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Vande Bharat Viral Photos: वंदे भारत ट्रेन में जंग लगे टॉयलेट और गंदगी देखकर भड़का, फिर रेलवे ने दी ये सफाई

अहमदाबाद। वंदे भारत एक्सप्रेस की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ट्रेन की साफ-सफाई और मेंटेनेंस को लेकर सवाल उठने लगे। तस्वीरों में ट्रेन का बाहरी हिस्सा गंदा, कुछ कांच के पैनल टूटे हुए और टॉयलेट के कुछ हिस्सों में जंग लगी दिखाई दे रही थी। जियोलॉजिस्ट हिमांशु मुखर्जी ने 2 अक्टूबर को X (formerly Twitter) पर फोटोज शेयर की थीं।

मुखर्जी के अनुसार, ये तस्वीरें ट्रेन नंबर 26901 की हैं, जो साबरमती से वेरावल के बीच चलती है। उन्होंने ट्रेन की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी सफाई और देखभाल ठीक से नहीं हो रही है। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन और रेल मंत्रालय को टैग कर मामले पर ध्यान देने की मांग की।

तस्वीरें सामने आने के बाद ट्रेन की सफाई और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। मुखर्जी ने कहा कि वंदे भारत जैसी ट्रेन की ऐसी हालत देखकर उन्हें अच्छा नहीं लगा। साबरमती-वेरावल वंदे भारत मई 2025 में शुरू हुई थी और यह अहमदाबाद को सौराष्ट्र से जोड़ती है।

ये रहा रेलवे का जवाब

सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद अहमदाबाद के DRM ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टाफ ने ट्रेन के बताए गए हिस्सों की जांच की और जरूरी सफाई व मरम्मत का काम कर दिया।

  • ट्रेन की जांच हुई: लोकल रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के डिब्बों का इंस्पेक्शन किया और दिखने वाली कमियों को ठीक किया।
  • पैसेंजर से अपील: रेलवे ने पैसेंजर से भी सफर के दौरान ट्रेन में सफाई रखने और कचरा सही जगह पर डालने की अपील की।

अजय राय की छुट्टी! कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी यूपी की कमान, जानिए कौन हैं ये, क्यों बनाया गया इन्हें अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाते हुए उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल की नेता और वरिष्ठ विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और लगातार तीन बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचने वाली आराधना मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस ने प्रदेश में अपने पारंपरिक वोट बैंक और महिला नेतृत्व दोनों को एक साथ साधने का बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जानिए पारिवारिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मी आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के दिग्गजों में गिने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मिसाल माना जाता है। प्रमोद तिवारी ने प्रतापगढ़ जिले की ऐतिहासिक रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था। आराधना मिश्रा की शुरुआती और उच्च शिक्षा प्रयागराज में ही हुई। उन्होंने 1997 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया और मानवाधिकार विषय की पढ़ाई भी पूरी की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 34.1 करोड़ रुपये है। इसमें 6.1 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 28 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

त्रिस्तरीय पंचायत से विधानमंडल तक: ऐसा रहा राजनीतिक सफर

आराधना मिश्रा को राजनीति विरासत में जरूर मिली, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत धरातल से की। उन्होंने वर्ष 2001 से लगातार तीन कार्यकाल के लिए ब्लॉक प्रमुख के रूप में काम किया और स्थानीय निकायों में काम करने का लंबा अनुभव हासिल किया। वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत मनरेगा की उत्तर प्रदेश राज्य निगरानी एवं सतर्कता समिति की सदस्य भी मनोनीत की गईं। इसके अलावा 2012 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस की मीडिया कैंपेन कमेटी की सक्रिय सदस्य रहीं।

वर्ष 2014 में जब उनके पिता प्रमोद तिवारी राज्यसभा के लिए चुने गए, तब रामपुर खास सीट पर हुए उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने जीत दर्ज कर पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में कदम रखा। वर्ष 2017 की प्रचंड बीजेपी लहर में भी उन्होंने रामपुर खास सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वह उन चुनिंदा 7 कांग्रेस विधायकों में शामिल थीं जो उस चुनाव में जीत दर्ज कर पाए थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 14000 से अधिक वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।

2019 से संभाल रही हैं विधानमंडल दल की नेता की कमान

आराधना मिश्रा ‘मोना’ की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने अक्टूबर 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर कांग्रेस की मुख्य रणनीतिकार बनी हुई हैं। इसके अलावा वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रमुख पैनलों की सदस्य हैं और राष्ट्रीय टीवी बहसों में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती रही हैं।

क्यों बनाया गया उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कई अहम रणनीतिक और राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा प्रभाव रहा है। आराधना मिश्रा एक प्रमुख और स्थापित ब्राह्मण चेहरा हैं। कांग्रेस लंबे समय से अपने पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है, ऐसे में उन्हें कमान सौंपना एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

महिला नेतृत्व को बढ़ावा

कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार जोर देती रही है। आराधना मिश्रा राज्य की अग्रिम पंक्ति की महिला नेताओं में शामिल हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में प्रमोद तिवारी का मजबूत जनाधार रहा है। आराधना मिश्रा ने उस विरासत को न सिर्फ संभाला है बल्कि तीन बार लगातार चुनाव जीतकर अपनी खुद की मजबूत जनस्वीकार्यता भी साबित की है। ब्लॉक स्तर से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक काम करने का उनका लंबा अनुभव पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में मददगार साबित हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि आराधना मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पार्टी एक नए उत्साह और मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरेगी।

Diwali 2026 Dates: कब मनाया जाएगा दिवाली का त्योहार? जानें दिवाली से लेकर चित्रगुप्त पूजा तक की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Diwali 2026 Dates: हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पूरे साल में आने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। लोग इसके लिए काफी पहले से तैयारियां करते हैं। दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों का त्योहार है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और चित्रगुप्त पूजा या भाई दूज के साथ संपन्न होता है। घर, बाजार, आस-पड़ोस हर तरफ इस त्योहार की तैयारियों की धूम रहती है। आइए जानें इस साल ये पंच दिवसीय पर्व कब से शुरू होगा और किस दिन मनाई जाएगी दिवाली? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिवाली 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को दिन में 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के आधार पर दिवाली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को है।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

8 नवंबर को दिवाली की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 1 घंटा 56 मिनट का रहेगा। आप शाम में 05 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 50 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजा विधि विधान से कर सकते हैं।

आयुष्मान योग में मनेगी दिवाली

इस बार की दिवाली पर आयुष्मान् योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा। दिवाली पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर 9 नवंबर को 03:03 ए एम तक मान्य है। उसके बाद से सौभाग्य का प्रारंभ होगा। आयुष्मान् योग व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। दिवाली पर स्वाति नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर पूरी रात तक है।

धनतेरस 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाते हैं। इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को है, लेकिन धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। उस दिन ही प्रदोष व्रत की पूजा भी होगी। 6 नवंबर को धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम में 6 बजकर 02 मिनट से शाम 7 बजकर 57 मिनट तक है।

दिवाली कैलेंडर 2026

6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस, धन त्रयोदशी

7 नवंबर, शनिवार : काली चौदस, हनुमान पूजा

8 नवंबर, रविवार : दिवाली, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा

10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट

11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर देश की पहली ऐसी सुविधा विकसित करने जा रहा है, जहां कृत्रिम रूप से सूर्य की रोशनी तैयार कर फोटोवोल्टिक सिस्टम की जांच की जा सकेगी। संस्थान ने बेंगलुरु की नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के साथ समझौता किया है। इस परियोजना में आईआईटी कानपुर के रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क फाउंडेशन (टेक्नोपार्क) की सदस्य कंपनी इनवेरिएंस ऑटोमेशन भी सहयोग करेगी। इसके तहत कंसंट्रेटेड फोटोवोल्टिक (सीपीवी) सिस्टम के लिए देश का पहला सन सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इससे सीपीवी मॉड्यूल को बाजार में उतारने से पहले उनकी क्षमता और गुणवत्ता की जांच देश में ही हो सकेगी।

सूरज की रोशनी जैसी होगी कृत्रिम रोशनी

इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है। सन सिम्युलेटर ऐसी तकनीक है, जिसमें प्रयोगशाला के अंदर सूर्य की रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार की जाती हैं। इससे मौसम या दिन के समय पर निर्भर हुए बिना सोलर सिस्टम का परीक्षण किया जा सकता है। अभी सीपीवी सिस्टम के परीक्षण के लिए देश में इस स्तर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नई सुविधा तैयार होने के बाद उत्पादन के अंतिम चरण में ही मॉड्यूल की क्षमता और गुणवत्ता को परखा जा सकेगा।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसी तकनीक और परीक्षण सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे उद्योग के साथ जोड़कर वास्तविक उपयोग तक पहुंचाया जाए। यह परियोजना सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और देश में ही परीक्षण की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छोटे सेल, ज्यादा क्षमता वाला सीपीवी सिस्टम

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने बताया कि सीपीवी सिस्टम सामान्य सोलर पैनल से अलग तरीके से काम करता है। इसमें लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और ज्यादा क्षमता वाले सोलर सेल पर केंद्रित किया जाता है। इन सेल में अर्धचालक की कई परतें होती हैं और हर परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को इस्तेमाल करती है।

उन्होंने बताया कि सीपीवी में सोलर सेल पैनल के करीब 0.1 प्रतिशत हिस्से में ही होते हैं। यानी सेल के लिए जरूरी जगह सामान्य सोलर तकनीक की तुलना में काफी कम हो जाती है। हालांकि ऐसी तकनीक के लिए तेज और सीधी धूप वाले इलाके ज्यादा उपयुक्त होते हैं।

2070 के नेट जीरो लक्ष्य में मददगार

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना होगा। इसके लिए केवल सोलर पैनल बनाना ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और क्षमता जांचने की देश में मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है। सीपीवी सिम्युलेटर इसी दिशा में काम करेगा।

नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सोलर सेल के उत्पादन और परीक्षण की क्षमता को भी बढ़ाना जरूरी है। देश में सीपीवी सिम्युलेटर उपलब्ध होने से बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान गुणवत्ता जांच आसान होगी और सीपीवी तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

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राहुल विकल्प बनने का मैसेज दे रहे हैं

यह कमाल की बात है कि राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ लड़ना है और उन्हीं से वैधता भी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी नेताओं से कहा कि मोदी और शाह भी मानते हैं कि वे जाएंगे तो राहुल आएंगे। हालांकि राहुल ने यह बात एक खास संदर्भ में कही। जो संदर्भ है उससे ऐसा लग रहा है कि राहुल को अब भी कांग्रेस के कई नेताओं के बारे में ऐसा लगता है कि वे उनको नेता नहीं मानते। उनको यह भी लगता है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो उन पर भरोसा नहीं करते। इसलिए उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक या वैधानिक नियुक्ति के पैनल की बैठक के बाद मोदी और शाह ने कहा कि राहुल आएंगे। यह बता कर राहुल ने कहा कि जब मोदी और शाह को भरोसा है तो कांग्रेस नेताओं को भी भरोसा रखना चाहिए।

हालांकि इसका यह मैसेज गया कि कांग्रेस नेता राहुल को अभी नेता नहीं मानते हैं और अपने को नेता मनवाने के लिए वे मोदी और शाह की बात का हवाला दे रहे थे। यह भी याद दिलाया गया कि अमित शाह ने कहा है कि भाजपा 50 साल तक कहीं नहीं जा रही है! तो सवाल है कि राहुल गांधी को कब तक इंतजार करना है? बहरहाल, यह सिर्फ मोदी और शाह से वैधता लेने का मामला नहीं है। राहुल लगातार यह मैसेज दे रहे हैं कि उनका समय आ गया है और वे जीत कर प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साथ भाजपा से नाराज हो रहे और युवा मतदाताओं को वे मैसेज दे रहे हैं। इसलिए उन्होंने यह बात कही और अपने को मोदी व शाह के विकल्प के रूप में पेश किया। इसी वजह से उन्हेंने कुछ समय पहले यह भी दावा किया था कि अब उनको सरकार के अंदर से सूचनाएं मिल रही हैं।

आज का एक्सप्लेनर:क्या वाकई 9/11 जैसी घटना होना तय था; उन 72 मिनटों की कहानी, खून से लथपथ कैप्टन स्मित ने कैसे बचाया

30 सितंबर 2026, सुबह 9 बजकर 21 मिनट। सऊदी अरब के आसमान में अचानक एक प्लेन मुंह के बल नीचे गिरने लगा। कुछ मिनट के भीतर 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट पर आ गया। रफ्तार भी 760 से बढ़कर 1110 किमी/घंटा हो गई। विमान में बैठे यात्री आखिरी प्रार्थना करने लगे। लेकिन कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ एक ‘हीरो’ की हिम्मत और जज्बे ने सभी 180 जानें बचा लीं। नाम है- कैप्टन स्मित मच्छर। इजराइल के पीएम नेतन्याहू, भारतीय पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कैप्टन स्मित की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने 9/11 जैसा बड़ा हादसा होने से बचा लिया। आखिर कौन हैं स्मित मच्छर, कॉकपिट में क्या हुआ और क्या वाकई 9/11 जैसा हादसा टला; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकपिट में क्या हुआ कि अचानक गिरने लगा था विमान? जवाबः ये फ्लाईदुबई एयरलाइन का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान था। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे प्लेन ने UAE के दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी। कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित और एक को-पायलट मौजद था। फ्लाइट इजराइल के तेल अवीव शहर जा रही थी। करीब 8 बजे प्लेन 35,000 फीट की हाइट पर था। टेक ऑफ के करीब ढाई घंटे बाद तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा। प्लेन UAE के एयर स्पेस से निकलकर सऊदी अरब के आसमान पहुंचा। इसके बाद अचानक सब कुछ बदल जाता है…. सवाल-2: स्मित लहूलुहान थे, तो फ्लाइट कैसे सुरक्षित लैंड हुई? जवाबः पहले यात्री, जो कॉकपिट में दाखिल हुए, वो यानिव हायून थे। फ्लाइट FZ 1073 की सुरक्षित लैंडिंग के बाद नेतन्याहू ने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर यानिव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर शाबाशी दी। पेशे से प्लंबर यानिव ने नेतन्याहू को बताया कि प्लेन में एक ऑफ-ड्यूटी पायलट भी मौजूद थे। दोनों ने मिलकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कामयाब नहीं हुए। हालांकि बेहोश होने से पहले स्मित ने दरवाजा खोल दिया। तब अंदर पहुंचे यानिव ने बताया, ‘पायलट्स की दोनों सीटें खाली थीं। मैंने देखा एक पायलट फर्श पर लहूलुहान पड़ा था और दूसरा पायलट दोनों सीटों के बीच कंट्रोल पैनल पर चढ़ा था।’ यानिव ने को-पायलट की गर्दन पकड़कर उसे पीछे की तरफ कॉकपिट से बाहर घसीट लिया। नेतन्याहू के पूछने पर यानिव ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि वो कंट्रोल पैनल के साथ छेड़छाड़ करने या उसे डैमेज करने की कोशिश कर रहा था। यानिव ने दूसरे यात्रियों को आवाज दी। सभी ने मिलकर आरोपी को-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया। को-पायलट को काबू करने वाले तीन इजराइली यात्रियों में शामिल त्जिका मानेस के मुताबिक, हमलावर पायलट को काबू करने में करीब 20-25 मिनट लगे। तीनों ने तार वाले हेडफोन से उसे बांध दिया। इसके बाद यानिव ने कंट्रोल स्टिक्स पकड़कर पीछे खींचे, ताकि विमान ऊपर उठ सके। नेतन्याहू ने पूछा, ‘क्या आपने वाकई ऐसा किया था?’ इस पर यानिव ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘हां मैंने स्टिक्स पूरी तरह पीछे खींच दी थीं। मैं प्लेन हादसों के इन्वेस्टीगेशन देखता रहता हूं।’ स्टिक्स खींचने के बाद विमान कुछ स्थिर होने लगा। यानिव के मुताबिक, केबिन में दो पायलट मौजूद थे। वो शुरू में सदमे में लग रहे थे। यानिव ने उनसे चिल्लाकर प्लेन का कंट्रोल लेने को कहा। एक पायलट ने कंट्रोल हाथ में ले लिया और जहाज को सऊदी अरब के ताबुक में प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ दिया। 10:45 बजे प्लेन सुरक्षित एयर पोर्ट पर उतर गया। फ्लाइट में मौजूद एक इजराइली डेंटिस्ट ने स्मित का शुरुआती इलाज किया। यानिव ने कहा, ‘हमने आखिरी तक उन्हें जीवित रखा।’ नेतन्याहू ने खून से सने कपड़े पहने यानिव से पूछा, ‘आपको पता है कि आप क्या रहे थे?’ यानिव ने जवाब दिया, ‘हम शेरों का देश हैं।’ दरअसल, यहूदियों की बाइबिल में यहूदियों की तुलना उठकर खड़े होते हुए शेर से की गई है। जून 2025 में ईरान पर हुए इजराइली हमले का नाम भी- ‘राइजिंग लायन’ था। ये पूरी कहानी फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा, इजराइली रिपोर्ट्स, सऊदी अधिकारियों और यात्रियों के बयानों के आधार पर है। जांच अभी जारी है इसलिए घटनाओं के सीक्वेंस में बदलाव हो सकता है। नेतन्याहू ने यानिव से कहा, ‘तुम्हारे बिना यह एक और 9/11 हो सकता था। इस पर यानिव ने भी कहा कि उनके हिसाब से को-पायलट का यही इरादा था। सवाल-3: क्या वाकई 9/11 जैसी घटना हो सकती थी? जवाबः 11 सितंबर 2001 को आतंकी संगठन अलकायदा के 19 आतंकियों ने 4 घरेलू अमेरिकी विमान हाईजैक कर लिए थे। इनमें से दो को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर और एक को अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की बिल्डिंग से टकराकर क्रैश करवा दिया था। चौथा प्लेन व्हाइट हाउस पर क्रैश होने वाला था, लेकिन यात्रियों की सूजबूझ से पेन्सिलवेनिया के खाली मैदान में क्रैश हुआ। करीब 2900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। यानिव और नेतन्याहू के अलावा कई इजराइली पत्रकारों और आम लोगों ने स्मित के को-पायलट को आतंकी कहा है। नेतन्याहू ने यानिव से बातचीत में कहा, ‘अगर विमान इजराइल पहुंच जाता, तो न जाने क्या होता।’ पीएम मोदी ने भी नेतन्याहू की 9/11 जैसा हमला टलने की बात दोहराई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी को-पायलट ओमान का नागरिक है। इसकी जांच हो रही है कि वह इजराइल आने वाली फ्लाइट का पायलट कैसे बना और क्या इसके लिए उसने ओमान के अलावा इजराइल या किसी और देश की नागरिकता भी हासिल की थी। इजराइली मीडिया सोर्सेज के मुताबिक, वह फ्लाईदुबई एयरलाइंस में एक साल से भी कम समय से काम कर रहा था। यानिव के मुताबिक, वो प्लेन के कंट्रोल्स से छेड़छाड़ कर रहा था। हालांकि फ्लाईदुबई ने हमले के पीछे को-पायलट की मंशा पर कोई बयान नहीं दिया है। उसे इलाज के बाद पूछताछ के लिए UAE ले जाया गया है। अमेरिकी एविएशन एक्सपर्ट जेफ गुजेटी के मुताबिक, ‘प्लेन 10 हजार फीट के नीचे चला जाता, तो उसे क्रैश होने से बचाना मुमकिन नहीं होता। इजराइल ने भी 9/11 जैसा हमला टालने के लिए प्लेन को हवा में ही मार गिराने की तैयारी कर ली थी।’ इजराइली न्यूज पोर्टल वाईनेट ग्लोबल के मुताबिक, इजराइली एयरफोर्स के पायलट जॉर्डन में तैनात थे। अगर प्लेन इजराइल सीमा के अंदर क्रैश होने वाला होता, तो उसे हवा में शूट कर दिया जाता। सवाल-4: कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर और अब उनकी हालत कैसी है? जवाबः मूलतः गुजरात के रहने वाले 39 साल के स्मित परिवार के साथ शुरुआत में मुंबई के घाटकोपर (ईस्ट) में रहते थे। स्मित के मुताबिक, पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था। परिवार का कपड़े का पुराना कारोबार है। स्कूली पढ़ाई के बाद स्मित ने कपड़े के व्यापार से जुड़ा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से BBA की डिग्री ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एविएशन सेमिनार अटेंड करने के दौरान उन्हें पायलट बनने का ख्याल आया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के एक इंस्टीट्यूट से पायलट ट्रेनिंग ली। इसमें करीब 17 लाख रुपए खर्च हुए। इस हादसे के बाद स्मित का 2025 का एक पॉडकास्ट चर्चा में है। इसमें स्मित बता रहे हैं कि पायलट बनने के फैसले से उनकी मां डर गई थीं, लेकिन पिता बिल्कुल शांत थे। 2011 में स्मित बतौर कमर्शियल पायलट मुंबई में स्पाइसजेट एयरलाइंस से जुड़े। स्मित के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले बेंगलुरु से दिल्ली की फ्लाइट उड़ाई। ये एक बोइंग विमान था। स्मित ने 11 साल स्पाइसजेट के विमान उड़ाए। नवंबर 2020 में स्मित ट्रेनिंग कैप्टन बने। इसके बाद वो दूसरे पायलट्स को फ्लाइंग ट्रेनिंग देते थे। जून 2022 में स्मित UAE की एयरलाइंस फ्लाईदुबई से जुड़ गए। यहां वह कैप्टन की पोस्ट पर हैं। कमर्शियल फ्लाइट्स में कैप्टन को पायलट-इन-कमांड कहते हैं। उड़ान के दौरान को-पायलट भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन विमान की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी, उसका कंट्रोल और इमरजेंसी के समय आखिरी निर्णय कैप्टन ही लेता है। फिलहाल स्मित अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ दुबई में ही रहते हैं। अक्टूबर 2025 के पॉडकास्ट में स्मित ने फ्लाइट की सिक्योरिटी और विमान में डॉक्टर्स और क्रू मेंबर्स की अहमियत के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, ‘जब हम ऊपर होते हैं और अगर कुछ हो जाए, तो आपको कौन बचाएगा? आप भाग्यशाली होंगे अगर फ्लाइट में कोई डॉक्टर मौजूद हो, वे आपकी जान बचा सकते हैं।’ स्मित ने एक और किस्सा बताया कि फ्लाइट के दौरान एक प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो गया था। ऐसे में उन्होंने एक नजदीकी एयरपोर्ट ढूंढकर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। घायल होने के बाद स्मित बेहोश हो गए थे, उन्हें सऊदी के तबुक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन पर हमले के आरोपी को-पायलट को भी इसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मित की सर्जरी हुई है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में वाणिज्य दूतावास नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया है कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से बात की है। ——— ये खबर भी पढ़िए… अभिनंदन ने वायुसेना छोड़कर प्राइवेट एयरलाइन क्यों जॉइन की; उन्हें छुड़ाने के लिए भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलें तान दी थीं मिग-21 से पाकिस्तानी F-16 गिराने वाले फाइटर पायलट अभिनंदन वर्धमान ने प्राइवेट एयरलाइन जॉइन कर ली है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना छोड़ दी, जबकि सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होना था। अभिनंदन अब गोवा की प्राइवेट एयरलाइन कंपनी ‘FLY 91’ के लिए ATR विमान उड़ाएंगे। पूरी खबर पढ़िए…

अब माता-पिता या दादा-दादी की जानकारी नहीं होगी जरूरी, EC ने 20 राज्यों में नए वोटर्स के लिए Form 6 का नियम बदला

अगर आप पहली बार वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने जा रहे हैं, तो आपके लिए एक जरूरी अपडेट है। दरअसल, जिन 20 राज्यों में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) का काम पूरा हो चुका है, वहां नए वोटरों को अब वोटर लिस्ट में अपने माता-पिता के नाम या जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव आयोग ने ‘Form 6’ में बदलाव किया है, ताकि इन राज्यों में आवेदन करने वाले लोग माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी मांगने वाले SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) के बिना ही फॉर्म जमा कर सकें। हालांकि, जिन राज्यों में SIR का काम अभी भी चल रहा है, वहां नए वोटरों को यह घोषणा-पत्र जमा करना जारी रखना होगा।

Form 6 में बदलाव का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले चुनाव आयोग के तीन सदस्यों वाले पैनल के अंदर ही इस बदलाव को लेकर अंदरूनी विरोध की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस घोषणा को जोड़ने पर आपत्ति जताई थी। वहीं, ‘The Indian Express’ के पास मौजूद अंदरूनी रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ में संशोधन किए बिना इसे जोड़ने की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए थे।

हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR और Form 6 पर उसके फैसलों को तीनों कमिश्नरों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। 26 सितंबर को जारी एक स्पष्टीकरण में, चुनाव आयोग ने कहा कि Form 6 के साथ लगे SIR डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था और 1960 के नियमों के तहत तय फॉर्म का इस्तेमाल उन समयों में किया जाएगा जब SIR की प्रक्रिया नहीं चल रही होगी।

क्या बदला है?

पहले जब कोई व्यक्ति पहली बार वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करता था, तो उसे अपने माता-पिता या दादा-दादी का पिछली SIR वाली वोटर लिस्ट में दर्ज विवरण देने की जरूरत नहीं थी।

लेकिन SIR की प्रक्रिया के दौरान Form 6 में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसके तहत नए आवेदकों से पुरानी वोटर लिस्ट से अपना संबंध साबित करने के लिए कुछ जानकारी मांगी जाती थी। इसमें माता-पिता या दादा-दादी से जुड़ी जानकारी भी शामिल थी।

अब जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए वोटरों को Form 6 भरते समय यह अतिरिक्त घोषणा देने की जरूरत नहीं होगी।

चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है। युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग, साथ ही वे लोग जिनके नाम SIR के दौरान या उसके बाद छूट गए थे, वे लगातार अपडेट होने वाली प्रक्रिया के जरिए नाम जुड़वाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

जिन राज्यों में SIR चल रहा है, वहां क्या होगा?

जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी भी चल रही है, वहां यह जरूरत बनी रहेगी।

इन इलाकों में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने वाले नए वोटरों को SIR से जुड़ा डिक्लेरेशन (घोषणा-पत्र) और Form 6 जमा करना होगा। इसमें पिछली वोटर लिस्ट से अपना संबंध साबित करने के लिए जरूरी जानकारी भी देनी होगी।

इससे SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर का नाम जुड़वाने और SIR पूरा होने के बाद लगातार अपडेट होने की अवधि के दौरान नाम जुड़वाने के बीच अंतर हो जाता है।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग का कहना है कि SIR के दौरान या SIR के बाद के समय में, Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग ने कहा, “Declaration Form एक अतिरिक्त दस्तावेज था जिसे उन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मांगा गया था जहां 24 जून, 2025 के SIR आदेश के अनुसार SIR किया गया था। यह उस समय आयोग के सर्वसम्मत फैसले के अनुसार था। वहीं, 26 सितंबर, 2026 को जारी आयोग के प्रेस नोट के अनुसार, उन सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जहां SIR पूरा हो चुका है और जहां यह अभी शुरू होना है, Declaration Form की कोई जरूरत नहीं होगी।”

इससे SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर एनरोलमेंट और SIR पूरा होने के बाद लगातार अपडेट होने की अवधि के दौरान एनरोलमेंट के बीच अंतर पैदा होता है।

EC में मतभेद की वजह बना ‘Form 6’

CEC और दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों में ‘Form 6’ से जुड़ा विवाद भी एक अहम मुद्दा था।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, संधू और जोशी की आपत्तियों के बावजूद ECINET पोर्टल पर अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) को शामिल किया गया था। दोनों आयुक्तों का तर्क था कि ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ में संशोधन किए बिना, प्रशासनिक या सॉफ्टवेयर बदलाव के जरिए कानूनी रूप से अनिवार्य ‘Form 6’ में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

बता दें कि यह विवाद सिर्फ ‘Form 6’ तक ही सीमित नहीं था। खबरों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं, जिनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, ECINET सिस्टम के कामकाज और वोटर लिस्ट के डेटा तक पहुंच जैसे मामले शामिल थे।

इसके बाद EC ने पॉलिसी-लेवल पर बंटवारे के सुझाव को खारिज कर दिया। EC का कहना था कि कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था के कामकाज में आपसी जांच-पड़ताल और अलग-अलग राय होना सामान्य बात है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

जानकारी के लिए बता दें कि Form 6 वह कानूनी आवेदन है जिसका इस्तेमाल योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए करते हैं। SIR के दौरान इसमें जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को लेकर इसलिए विवाद हुआ, क्योंकि पहली बार वोटर बनने वाले लोगों से पुरानी वोटर लिस्ट से जुड़े परिवार के सदस्यों की जानकारी मांगी जा रही थी।

वहीं, इस फैसले को वापस लेने का मतलब है कि किसी राज्य में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आवेदकों को SIR से जुड़ी परिवार की अतिरिक्त जानकारी देने के बजाय सामान्य Form 6 प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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हाल के चुनाव अवैध है: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक में कहा कि हाल के सभी चुनाव अवैध हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार से समझौता कर चुके हैं। करीब ढाई घंटे तक चली सीडब्लुसी की बैठक के बारे में सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि राहुल ने कांग्रेस नेताओं से उनके ऊपर भरोसा करने को कहा। उन्होंने एक नियुक्ति पैनल की बैठक के बाद का किस्सा सुनाते हुए कहा कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माना की उनके बाद राहुल ही प्रधानमंत्री बनेंगे। यह किस्सा सुना कर राहुल ने कहा कि मोदी को जैसे उनके ऊपर भरोसा है वैसे ही कांग्रेस नेताओं को भी रखना चाहिए।

बहरहाल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हुए खुलासे पर विचार के लिए हुई कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह समझौता कर चुके हैं और देश की चुनाव व्यवस्था ‘फिक्स’ है। हाल के सभी चुनाव अवैध हैं”। राहुल गांधी ने आगे कहा, “चाहे ईवीएम हो या मतदाता सूची, दोनों से छेड़छाड़ की गई है। दोनों का इस्तेमाल भाजपा चुनाव जीतने की रणनीति के तौर पर कर रही है”।

बैठक में पार्टी ने एक प्रस्ताव मंजूर किया, जिसमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें। इसके अलावा एसआईआर को तत्काल रोकने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। कांग्रेस ने इसमें कहा है कि हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नाम बहाल किए जाएं। मंगलवार को हुई बैठक में 68 सदस्यों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दों को संसद में उठाएगी और प्रदर्शन करेगी।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने व्यवस्थित रूप से उस मजबूत लोकतांत्रिक नींव को खोखला कर दिया है जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया था”। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने युवाओं को वोट देने से रोकने की साजिश रची है। फॉर्म 6 से जुड़े नियमों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया”।

पहली बार पृथ्वी के चक्कर लगाएगा स्टारशिप:26 सैटेलाइट्स भी छोड़ेगा; सबसे ताकतवर रॉकेट का 14वां टेस्ट आज

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘स्टारशिप’ की 14वीं टेस्ट उड़ान के लिए तैयार है। यह पहली बार होगा जब स्टारशिप को पृथ्वी की ऑर्बिट में भेजा जाएगा। इसकी लॉन्चिंग सोमवार, 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 5:45 बजे से होगी। इससे पहले की सभी टेस्ट उड़ानों में रॉकेट को सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक ही सीमित रखा गया था ताकि सुरक्षा बनी रहे और ज्यादा से ज्यादा डेटा जुटाया जा सके। अब स्टारशिप को पृथ्वी की कक्षा में भेजने का मकसद इसे ऐसा रॉकेट बनाना है, जिसे तेजी से दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। 10 घंटे का सफर, पृथ्वी के लगाएगा 6 चक्कर इस मिशन में स्टारशिप जमीन से लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ेगा। करीब 10 घंटे लंबे इस सफर में यह पृथ्वी के 6 चक्कर पूरे करेगा। मिशन खत्म होने के बाद रॉकेट चिली देश के पास प्रशांत महासागर में सुरक्षित पानी पर लैंड यानी स्प्लैशडाउन करेगा। पहली बार स्पेस में छोड़े जाएंगे 26 नए स्टारलिंक सैटेलाइट्स इस उड़ान से पहली बार नई तकनीक वाले 26 ‘स्टारलिंक V3’ सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे जा रहे हैं। इनसे पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड और नेटवर्क काफी बेहतर हो जाएगा। इस नए मॉडल का सिर्फ एक सैटेलाइट ही नेटवर्क में 1 टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) की डेटा क्षमता जोड़ देगा, यानी इस अकेले मिशन से कुल 26 Tbps की क्षमता जुड़ जाएगी, जो कि फॉल्कन 9 रॉकेट से भेजे जाने वाले छोटे सैटेलाइट्स के मुकाबले लगभग 10 गुना ज्यादा है। रॉकेट से अलग होते ही ये सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर पैनल खोल लेंगे और रेडियो तरंगों व लेजर के जरिए जमीन तथा बाकी सैटेलाइट्स से संपर्क साधेंगे। इसके बाद वे अपने छोटे इंजनों की मदद से तय कक्षा में पहुंच जाएंगे और सभी शुरुआती जांचों के बाद इंटरनेट सर्विस देना शुरू कर देंगे। 3 सैटेलाइट्स में कैमरे लगे हैं, स्टारशिप की करेंगे निगरानी इस मिशन में शामिल 3 सैटेलाइट्स को खास तौर पर बदला गया है। इनमें हाई-टेक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे अंतरिक्ष में स्टारशिप की ‘हीटशील्ड’ यानी गर्मी से बचाने वाली बाहरी परत को स्कैन करेंगे और तस्वीरें सीधे जमीन पर मौजूद वैज्ञानिकों को भेजेंगे। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि धरती पर लौटते वक्त स्टारशिप की हीटशील्ड कितनी सुरक्षित रहती है, ताकि भविष्य में रॉकेट को लॉन्च पैड पर वापस सुरक्षित उतारा जा सके। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 13वां टेस्ट: पहली बार पानी में सुरक्षित तैरता दिखा स्टारशिप स्टारशिप की 13वीं टेस्ट उड़ान में अपर स्टेज ने हिंद महासागर में लैंड किया, जबकि इसके बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। यह पहली बार था जब हमने पूरे स्टारशिप को सुरक्षित पानी में उतारा। लैंडिंग के दौरान स्टारशिप अपनी ‘बेली-फ्लॉप’ स्थिति से सीधा हुआ और पानी पर लंबवत उतरा। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक तरफ झुककर समुद्र में तैरने लगा।
12वां टेस्ट: इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग ‘स्टारशिप’ का 12वां टेस्ट सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा था। इसमें स्टारशिप के नए और बड़े वर्जन (V3) का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। इस टेस्ट को भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया।
11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया था, लेकिन शिप (ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन लीक से ब्लास्ट हो गया था। छठा टेस्ट: लॉन्चपैड पर उतरने में दिक्कत दिखी तो पानी पर लैंड कराया, ट्रम्प भी मौजूद रहे स्टारशिप का छठा टेस्ट 20 नवंबर 2024 को सुबह 03:30 बजे किया गया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी टेस्ट देखने के लिए स्टारबेस पहुंचे थे। इस टेस्ट में बूस्टर को लॉन्च करने के बाद वापस लॉन्चपैड पर कैच किया जाना था, लेकिन सभी पैरामीटर ठीक नहीं होने के कारण इसे पानी में लैंड कराने का फैसला लिया गया। स्टारशिप के इंजन को स्पेस में फिर से चालू किया गया। इसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग हुई। पांचवां टेस्ट: पहली बार बूस्टर को लॉन्चपैड पर कैच किया था स्टारशिप का पांचवां टेस्ट 13 अक्टूबर 2024 को किया गया था। इस टेस्ट में पृथ्वी से 96 Km ऊपर भेजे गए सुपर हैवी बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाया गया, जिसे मैकेजिला ने पकड़ा। मैकेजिला दो मेटल आर्म हैं जो चॉपस्टिक्स की तरह दिखाई देती हैं। वहीं स्टारशिप की पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग कराई गई। स्टारशिप ने जब पृथ्वी के वातावरण में एंट्री की तब उसकी रफ्तार 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे थी और तापमान 1,430°C तक पहुंच गया था। चौथा टेस्ट: स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पानी में लैंडिंग हुई स्टारशिप का चौथा टेस्ट 6 जून 2024 को हुआ था, जो सक्सेसफुल रहा था। 1.05 घंटे के इस मिशन को बोका चिका से शाम 6.20 बजे लॉन्च किया गया था। इसमें स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पृथ्वी पर वापस लाकर पानी पर लैंड कराया गया। टेस्ट का मेन गोल यह देखना था कि स्टारशिप पृथ्वी के वातावरण में एंट्री के दौरान सर्वाइव कर पाता है या नहीं। टेस्ट के बाद कंपनी के मालिक इलॉन मस्क ने कहा था, ‘कई टाइल्स के नुकसान और एक डैमेज्ड फ्लैप के बावजूद स्टारशिप ने समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग की।’ तीसरा टेस्ट: रीएंट्री के बाद स्टारशिप से संपर्क टूटा था ये टेस्ट 14 मार्च 2024 को हुआ था। स्पेसएक्स ने बताया था कि स्टारशिप रीएंट्री के दौरान सर्वाइव नहीं कर पाया, लेकिन उसने उड़ान के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वहीं इलॉन मस्क ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल आधा दर्जन स्टारशिप उड़ान भरेंगे। स्टारशिप ने ऑर्बिट में पहुंचने के बाद पेलोड डोर को खोला और बंद किया। रॉकेट के भीतर दो टैंकों के बीच कई टन तरल ऑक्सीजन को मूव किया। स्टारशिप की पृथ्वी के वातावरण में रीएंट्री कराई गई, लेकिन संपर्क टूट गया। दूसरा टेस्ट: स्टेज सेपरेशन के बाद खराबी आ गई थी स्टारशिप का दूसरा टेस्ट 18 नवंबर 2023 को शाम करीब 6:30 बजे किया गया था। लॉन्चिंग के करीब 2.4 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप का सेपरेशन हुआ। बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 3.2 मिनट बाद 90 Km ऊपर यह फट गया। वहीं स्टारशिप तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ गया। करीब 8 मिनट बाद पृथ्वी से 148 Km ऊपर स्टारशिप में भी खराबी आ गई, जिस कारण उसे नष्ट करना पड़ा। फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम के जरिए इसे नष्ट किया गया था। दूसरे टेस्ट में रॉकेट और स्टारशिप को अलग करने के लिए पहली बार हॉट स्टैगिंग प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया था, जो पूरी तरह सक्सेसफुल रही थी। सभी 33 रैप्टर इंजनों ने भी लॉन्च से सेपरेशन तक ठीक से फायर किया था। पहला टेस्ट: लॉन्चिंग के 4 मिनट बाद विस्फोट हो गया था 20 अप्रैल 2023 को स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट किया गया था। इस टेस्ट में बूस्टर 7 और शिप 24 को लॉन्च किया गया था। उड़ान भरने के 4 मिनट बाद ही मेक्सिको की खाड़ी के पास 30 किलोमीटर ऊपर स्टारशिप में विस्फोट हो गया था। स्टारशिप के फेल होने के बाद भी इलॉनमस्क और एम्प्लॉइज खुशी मना रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि रॉकेट का लॉन्च पैड से उड़ना ही बड़ी सफलता थी। मस्क ने लॉन्चिंग से दो दिन पहले कहा था- सफलता शायद मिले, लेकिन एक्साइटमेंट की गारंटी है। स्पेसएक्स ने कहा था- सेपरेशन स्टेज से पहले ही इसका एक हिस्सा अचानक अलग हो गया, जबकि यह तय नहीं था। इस तरह के एक टेस्ट के साथ हम जो सीखते हैं, उससे सफलता मिलती है। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की रिलायबिलिटी में सुधार करने में मदद करेगा। टीमें डेटा को रिव्यू करना जारी रखेंगीं और अगले फ्लाइट टेस्ट की दिशा में काम करेंगीं।