सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

satyendra jain

दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। उन्हें 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के 2 जमानती बॉन्ड पर जमानत दी गई है। सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को एंटी-करप्शन ब्रांच ने DJB STP टेंडर घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। ALSO READ: पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

 

विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग्विजय सिंह ने जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सत्येंद्र जैन जमानत दे दी। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन की जमानत पर खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, सत्येंद्र जैन को जमानत मिली। भाजपा का ऑपरेशन पंजाब फेल। 'सत्यमेव जयते'।

एसीबी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दावा किया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं।  जमानत याचिका पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

 

एसीबी के प्रमुख सयुंक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि मामला एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा था।

 

जांच में सामने आया था कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक खास तकनीक और उसके प्रदाता यूरोटेक को फायदा हुआ। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ा।

 

एसीबी ने इस मामले में 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले में पैसों के पूरे लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम की जांच जारी है।

Raghav Chadha SIR Row: ‘दिल्ली वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश’; राघव चड्ढा के पंजाब ड्राफ्ट लिस्ट विवाद में नया मोड़, AAP का बड़ा आरोप

Raghav Chadha SIR Row: पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम ‘शिफ्टेड’ (दूसरी जगह चले गए) बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया है कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया है। वहीं, AAP ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा दिल्ली में अपना नाम वोटर लिस्ट में रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश कर रहे थे।

आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व सहयोगी पर आरोप लगाया कि इसके लिए चड्ढा ने कथित तौर पर बैकडेटेड प्रोसेस” (पुरानी तारीख वाली प्रक्रिया) का सहारा लिया गया। पार्टी का कहना है कि अब चड्ढा अपनी ही स्थिति का ठीकरा AAP और पंजाब सरकार पर फोड़ रहे हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग के एक सीनियर अधिकारी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में चड्ढा का नाम शामिल करने के लिए पर्दे के पीछे की किसी भी कोशिश के दावों को खारिज करते हुए पीटीआई से कहा, “ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया और न ही उठाया जा रहा है।” आपको बता दें कि चड्ढा ने अप्रैल में AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन की थी।

क्या है पूरा विवाद?

पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के बाद तैयार की गई वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में राघव चड्ढा के नाम के आगे “शिफ्टेड” स्टेटस दर्ज किया गया है। पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को कहा कि वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में उनके नाम के आगे शिफ्टेड (यानी कहीं और चले गए) लिखा गया है। जबकि उनका वोटर ID मोहाली में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार राजनीतिक बदले की भावना से चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है।

X पर एक पोस्ट में चड्ढा ने कहा, “पंजाब में AAP सरकार अब बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा सांसद हूं और मेरा वोटर ID पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। इसके बावजूद वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरे नाम के आगे ‘शिफ्टेड’ लिखा गया है।” उन्होंने आरोप लगाया, “यह सिर्फ क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है।” चड्ढा ने कहा कि वह SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

‘शिफ्टेड किसने मार्क किया’?

चड्ढा ने आगे कहा, “अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ एक ड्राफ्ट लिस्ट है, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं। ‘दावे और आपत्तियों’ (claims and objections) की प्रक्रिया के दौरान सुधार किए जा सकते हैं, जो अभी चल रही है। फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर में जारी की जाएगी। मैं पहले से ही SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हूं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें “शिफ्टेड” किसने मार्क किया? इस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया और ऊंचे लेवल पर इसे किसने मंजूरी दी?

पंजाब अधिकारियों पर लगाया आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल थे। चड्ढा ने आरोप लगाया, “मुझे ‘शिफ्टेड’ के तौर पर किसने मार्क किया? AAP सरकार के एक अधिकारी ने? उस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया? फिर से AAP सरकार के ही एक अधिकारी ने…। ऊंचे स्तर पर यह प्रक्रिया किसने पूरी की? एक बार फिर उसी AAP सरकार के एक अधिकारी ने।” उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी तक, पंजाब सरकार के अधिकारी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया के हर चरण में तैनात होते हैं।

उन्होंने कहा, “BLO आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के अधिकारी असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं। सबसे ऊपर पंजाब कैडर का IAS अधिकारी होता है जो मुख्य चुनाव अधिकारी के तौर पर काम करता है।” उन्होंने दावा किया कि ऐसे अधिकारी राजनीतिक दबाव में आ सकते हैं क्योंकि उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर राज्य सरकार के कंट्रोल में होते हैं।

राज्यसभा सांसद ने आरोप लगाया, “इन अधिकारियों को पता है कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद AAP सरकार ही उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका ट्रांसफर कर सकता है और कौन उनकी जिंदगी मुश्किल बना सकता है। इस तरह, AAP सरकार राजनीतिक बदला लेने के लिए राज्य के अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डालती है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब से उन्होंने “भ्रष्ट” पार्टी छोड़ी है, तब से आम आदमी पार्टी का नेतृत्व उनसे नाराज है।

चुनाव आयोग की नियमों का किया जिक्र

उन्होंने कहा, “AAP ने उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार ने उन अन्य सांसदों को भी निशाना बनाया है जिन्होंने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा। यह गलत क्लासिफिकेशन उसी राजनीतिक बदले की भावना का ताजा उदाहरण है।” चड्ढा ने चुनाव आयोग की विस्तृत SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का भी जिक्र किया, जिसमें जन-प्रतिनिधियों की एक “प्रोटेक्टेड लिस्ट” (सुरक्षित सूची) का प्रावधान है।

AAP का पलटवार

चड्ढा की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP की पंजाब यूनिट के प्रवक्ता ने कहा कि स्पेशल समरी रिविजन (SSR) चुनाव आयोग करता है, न कि राज्य सरकार। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में किसका नाम शामिल करना है या किसका नाम हटाना है, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।” प्रवक्ता ने आगे कहा, “यह बात सभी जानते हैं कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, पंजाब में नहीं। अगर वह अब पंजाब में नहीं रहते हैं, तो यह उनकी अपनी जिम्मेदारी थी कि वह या तो वहां अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बनाए रखते या उसे कहीं और ट्रांसफर करवाते। वोटर लिस्ट से अपना नाम हटने के लिए वह अब AAP या पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते।”

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उन्होंने यह भी दावा किया कि AAP को चुनाव आयोग के सूत्रों से जानकारी मिली है कि चड्ढा “बैक-डेटेड प्रोसेस” का इस्तेमाल करके दिल्ली के राजिंदर नगर में वोटर के तौर पर रजिस्टर होने की कोशिश कर रहे थे। AAP प्रवक्ता ने कहा, “अगर बैक डेटेड प्रोसेस या ऐसी कोई गैर-कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो इसकी जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। अगर BJP या किसी और ने बैक-डेटेड प्रोसेस के जरिए नाम दर्ज कराने में मदद की है, तो हम इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगे और सच्चाई सामने लाएंगे।”

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

Raghav Chadha name removed from voter list in SIR

पंजाब में SIR में भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चढ्‍डा का नाम कटने से हड़कंप मच गया। उन्होंने राज्य की भगवंत मान सरकार पर बदले की राजनीति के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स तक लाने का आरोप लगाया। ALSO READ: क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

 

राघव चढ्‍डा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आप सरकार अब बदले की राजनीति को प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स) तक ले आई है।

 

उन्होंने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हूँ और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद, प्रारूप मतदाता सूची में मेरे नाम को स्थानांतरित के रूप में वर्गीकृत किया गया है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। 'दावे और आपत्ति' (क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शन) प्रक्रिया के दौरान नामों को सुधारा जाता है, जो फिलहाल जारी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी। मैं एसआईआर (SIR) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने की प्रक्रिया में हूं।

 

भाजपा सांसद के अनुसार, यह केवल एक लिपिकीय गलती नहीं लगती। यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है। मुझे ‘स्थानांतरित’ के रूप में किसने चिह्नित किया? आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उस वर्गीकरण का सत्यापन किसने किया? फिर से, आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने आगे बढ़ाया? एक बार फिर, वही आप की पंजाब सरकार के अधिकारी ने।

 

उन्होंने कहा कि जमीन पर तैनात बीएलओ (BLO) से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस पूरी प्रक्रिया का हर प्रशासनिक स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों से भरा पड़ा है। बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के एईआरओ, ईआरओ और डीईओ पंजाब सरकार के अधिकारी हैं। सबसे शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं जो पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी जानते हैं कि चुनावी ड्यूटी समाप्त होते ही आप सरकार उनके तबादले, तैनाती और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका तबादला कर सकता है और कौन उनका जीवन कठिन बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक बदले को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाती है।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका नेतृत्व गुस्से में जल रहा है। इसने हममें से उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया था। आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार द्वारा निशाना बनाया गया है। यह गलत वर्गीकरण उस राजनीतिक प्रतिशोध का एक नया अध्याय है।

 

उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) के विस्तृत दिशानिर्देशों का पैराग्राफ 4(d) उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक 'सुरक्षित सूची' (प्रोटेक्टेड लिस्ट) बनाता है जिनके नाम चिह्नित किए गए हैं। इसमें न्यायाधीश, सांसद और विधायक शामिल हैं। यह कहता है: न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों के धारकों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल व लोक सेवा आदि क्षेत्रों की हस्तियों के वे सभी नाम जो पहले चुनावी डेटाबेस में चिह्नित किए गए हैं, उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाना है, ताकि दावों और आत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा संसद सदस्य हूं। यदि मेरे नाम को चिह्नित भी किया गया था, तो पैराग्राफ 4(d) के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची में मेरा नाम शामिल करना अनिवार्य था। इस निर्देश की केवल अनदेखी नहीं की गई, बल्कि मेरे मामले में जानबूझकर इसका उल्लंघन किया गया। आप भले ही पंजाब सरकार चला सकती है, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है।

Maharashtra SIR: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से 2 करोड़ नाम कटे, मुंबई में 35% की भारी गिरावट! नाम जुड़वाने के लिए कैसे करें अप्लाई?

Maharashtra SIR List: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं।

मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है।

क्यों हटाए गए नाम?

अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे।

इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है।

मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम

SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया।

17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से ‘फर्जी’ या ‘डुप्लीकेट मतदाता’ मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है।

30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा।

18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका

इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा।

ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है।

नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा?

ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।

  • नाम जोड़ने के लिए: Form 6
  • मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7
  • एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8

ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें

महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें।

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Delhi SIR List: दिल्ली के मतदाताओं के लिए वोटर लिस्ट से जुड़ी यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप दिल्ली में मतदाता हैं तो सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम दर्ज है या नहीं। इसके लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO Delhi) की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम मिल जाता है तो फिलहाल आपको कोई दूसरा कदम उठाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर नाम लिस्ट में नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर अप्लाई करना होगा।

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत सोमवार (31 अगस्त) को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 1.45 करोड़ वोटरों में से 47 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवाने का अनुरोध कर सकते हैं। फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी।

वोटर अपना नाम कैसे चेक कर सकते हैं?

वोटर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और चुनाव आयोग के पोर्टल के जरिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकते हैं:-

EPIC (वोटर ID) नंबर से खोजें: राज्य के तौर पर दिल्ली चुनकर और EPIC नंबर एवं कैप्चा कोड डालकर नाम खोजा जा सकता है।

मोबाइल नंबर से खोजें: दिल्ली और अपनी पसंद की भाषा चुनने के बाद, चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालकर नाम देखा जा सकता है।

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न हो तो क्या करें?

अगर किसी वोटर या निवासी का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। योग्य लोग 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें तय डिक्लेरेशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा। जिन लोगों ने अपना घर स्थायी रूप से बदल लिया है और अपना नाम नए निर्वाचन क्षेत्र में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, वे अपने नए पते वाले इलाके में फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

सबसे पहले ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर लिस्ट में नाम चेक करने के लिए दिल्ली के चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाना होगा। वहां नाम देखने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:-

विकल्प 1: EPIC नंबर से करें सर्च

अगर आपके पास वोटर आईडी का EPIC नंबर है तो उसके जरिए अपना नाम खोज सकते हैं। इसके लिए संबंधित जानकारी भरनी होगी और दिल्ली का राज्य/क्षेत्र चुनकर अपना EPIC नंबर दर्ज करना होगा। इसके अलावा मतदाता अपने व्यक्तिगत विवरण के जरिए भी नाम खोज सकता है। इसके लिए सामान्य तौर पर ये जानकारियां मांगी जा सकती हैं:-

नाम

वोटर आईडी में दर्ज रिश्तेदार का नाम

जन्म तिथि

उम्र

लिंग

विधानसभा क्षेत्र

मोबाइल नंबर के जरिए भी रजिस्टर्ड मतदाता की जानकारी खोजने का विकल्प दिया गया है। सर्च करने के बाद सिस्टम पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाता के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी वाला पेज दिखाई देगा, जिसे प्रिंट भी किया जा सकता है।

विकल्प 2: वोटर लिस्ट की PDF में नाम खोजें

दूसरे विकल्प के तहत जारी वोटर लिस्ट की PDF डाउनलोड करके उसमें अपना नाम खोजा जा सकता है। इसके लिए राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और लिस्ट की भाषा जैसी जानकारी चुननी होगी। इसके बाद संबंधित बूथ की वोटर लिस्ट की PDF तैयार होगी। इस PDF में अपना नाम और अन्य डिटेल्स खोजे जा सकते हैं।

अगर ड्राफ्ट लिस्ट में नाम मिल गया तो?

अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद है तो फिलहाल किसी और कार्रवाई की जरूरत नहीं है। हालांकि अपने नाम के साथ दर्ज डिटेल्स जैसे नाम, पता और अन्य मतदाता संबंधी जानकारी को ध्यान से जांच लेना बेहतर है।

अगर नाम नहीं है तो घबराएं नहीं

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं दिखाई देता है तो आपके पास उसे शामिल कराने का मौका है। दी गई जानकारी के अनुसार ऐसे मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच नाम शामिल कराने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए अपने स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करना होगा।

नाम जोड़ने के लिए Form 6 भरना होगा

अगर किसी पात्र वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो उसे फॉर्म- 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा। Form 6 के साथ निर्धारित घोषणा पत्र (Declaration Form) और जरूरी सहायक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। यानी केवल अप्लाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पता बदल गया है तो Form 8

अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में है लेकिन आपने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो इसके लिए Form 8 का इस्तेमाल किया जाएगा। Form 8 के जरिए विधानसभा क्षेत्र के अंदर या किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में निवास स्थान बदलने की स्थिति में आवश्यक बदलाव कराया जा सकता है। इसी फॉर्म के जरिए मतदाता डिटेल्स में सुधार के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

गलत जानकारी होने पर भी ध्यान दें

अगर वोटर लिस्ट में नाम तो है लेकिन नाम, व्यक्तिगत डिटेल्स या अन्य जानकारी में किसी तरह की गड़बड़ी है, तो उसे भी नजरअंदाज न करें। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत संबंधित सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। बताई गई प्रक्रिया के मुताबिक, नाम या अन्य डिटेल्स में गलतियां पाए जाने पर निर्वाचन आयोग संबंधित लोगों को नोटिस भी भेज सकता है।

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एक नजर में पूरी प्रक्रिया

  • नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है तो फिलहाल कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाएं।
  • अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो स्थानीय BLO से संपर्क करें और निर्धारित अवधि में दावा करें।
  • नया नाम जोड़ना है तो Form 6 जमा करें और उसके साथ जरूरी दस्तावेज लगाएं।
  • पता बदलना/डिटेल्स में सुधार करना है तो Form 8 के जरिए आवेदन करें।
  • फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी किया जाएगा।

West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

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24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

विदेशों में लहराया भारत का परचम, अब अपनी ही नागरिकता साबित करने के पड़े लाले! पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के साथ क्या हुआ?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अब तक कई लोग सवाल उठा चुके हैं। वहीं अब एसआईआर पर भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने चिंता जताई है। कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके सूरी ने बताया कि उन्हें भी अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। सूरी पंजाब में वोटर लिस्ट की जांच और अपडेट के लिए चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए है। नवदीप सूरी यूएई व मिस्र में भारत के राजदूत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में उच्चायुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

उन्होंने पंजाब में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान अपने अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। सूरी ने कई पोस्ट के जरिए बताया कि वोटर लिस्ट के सत्यापन के दौरान उन्हें किन परेशानियों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।

नवदीप सूरी ने बताई अपनी परेशानी

नवदीप सूरी ने बताया कि, SIR के दौरान उन्होंने अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर वोटर आईडी और आधार कार्ड जमा किए थे। उस समय उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेज और दी गई जानकारी सही है। लेकिन, कुछ समय बाद एक वॉलंटियर ने उन्हें संदेश भेजकर बताया कि उनकी कुछ जानकारी साल 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही है। इसके बाद सूरी ने इस मामले को समझने और आगे की प्रक्रिया जानने के लिए BLO से दोबारा संपर्क किया।

नोटिस जारी कर फिर बुलाया

सूरी के अनुसार, इसके बाद उन्हें एक नोटिस लेने के लिए फिर से बुलाया गया। वहां उनसे ऐसे कागजात जमा करने को कहा गया, जिनसे उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो सके। इस मांग को लेकर उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पूर्व राजनयिक को भी नागरिकता साबित करने में दिक्कत हो रही है, तो आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया कितनी मुश्किल होगी। उन्होंने चुनाव आयोग से सफाई मांगी।

बताया क्यों नहीं है रिकॉर्ड

सूरी ने बताया कि, साल 2003 में वह भारत से बाहर तैनात थे, इसलिए उस समय के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से उनका डिटेल्स नहीं मिल पाया। अधिकारियों ने उनसे भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट दिखाने को कहा। उन्होंने कहा कि उनके पास वोटर आईडी और आधार के अलावा भी कई जरूरी डॉक्युमेंट मौजूद हैं, जिससे वह अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं। सूरी की इस बात से SIR के दौरान पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों के मिलान को लेकर चल रही चर्चा और बढ़ सकती है।

क्या है SIR

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में केवल योग्य मतदाताओं के नाम ही दर्ज रहें। यह प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई थी, जहां सत्यापन के दौरान मृत लोगों समेत कई नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में भी चुनाव से पहले मतदाता रिकॉर्ड की जांच और सुधार का काम किया गया। SIR के दौरान अगर किसी मतदाता का नाम 2002 या 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है, तो उससे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। ऐसे लोगों को पुराने मतदाता रिकॉर्ड से अपना या अपने परिवार का संबंध साबित करने के लिए जरूरी कागजात देने पड़ सकते हैं।