Max Healthcare Share Price: 6% उछलकर निफ्टी का टॉप गेनर बना शेयर, सिटी हुआ बुलिश, दिया ‌₹1,240 का टारगेट प्राइस

Max Healthcare Share Price: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (Max Healthcare) के शेयर गुरुवार 18 जून को 6 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह निफ्टी 50 पर टॉप गेनर बना। दोपहर के ट्रेड में मैक्स हेल्थकेयर का स्टॉक 1,088 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जिससे हॉस्पिटल ऑपरेटर की वैल्यू लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह रैली बड़े मार्केट से काफी आगे निकल गई, उस समय निफ्टी 50 0.12 फीसदी की तेजी दिखा रहा था।

बता दें कि सिटी ने पिछले साल स्टॉक में करेक्शन के बाद एक फेवरेबल रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल पर जोर दिया और अगले कई सालों में मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान लगाया। सिटी ने मैक्स हेल्थकेयर स्टॉक पर 1,240 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी। ब्रोकरेज ने कहा कि पिछले साल स्टॉक में लगभग 18 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे वैल्यूएशन हिस्टोरिकल एवरेज पर वापस आ गए हैं।

सिटी के मुताबिक, वैल्यूएशन करेक्शन से स्टॉक का अट्रैक्शन बेहतर हुआ है, ऐसे समय में जब कंपनी मीडियम-टर्म में मज़बूत ग्रोथ प्रोफाइल दे रही है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मैक्स हेल्थकेयर FY26 और FY30 के बीच 20 परसेंट EBITDA कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देगी, जिसे कैपेसिटी बढ़ाने और इसके हॉस्पिटल नेटवर्क में ग्रोथ से सपोर्ट मिलेगा।

सिटी को FY27 में लगभग 15 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है और कहा कि FY28 में ग्रोथ और तेज़ हो सकती है क्योंकि एक्सपेंशन के काम ज़्यादा असरदार तरीके से होने लगेंगे। हालांकि, ब्रोकरेज ने एग्ज़िक्यूशन में देरी को एक बड़ा रिस्क बताया है जो ग्रोथ की रफ़्तार पर असर डाल सकता है।

मैक्स हेल्थकेयर के अपने फिस्कल चौथी तिमाही के रिज़ल्ट बताने के कुछ हफ़्ते बाद ब्रोकरेज की यह पॉज़िटिव कमेंट्री आई है। कंपनी ने Q4 FY26 के लिए नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल 3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 387 करोड़ रुपये पोस्ट किया, जबकि रेवेन्यू 10 फीसदी बढ़कर 2,664 करोड़ रुपये हो गया।

रेवेन्यू ग्रोथ मुख्य रूप से ज़्यादा पेशेंट थ्रूपुट की वजह से हुई, जिसमें एक साल पहले की तुलना में ऑक्यूपाइड बेड डेज़ में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पूरे नेटवर्क में बेड ऑक्यूपेंसी 75 फीसदी पर स्थिर रही, जो हेल्थकेयर सर्विसेज़ की लगातार डिमांड को दिखाता है।

हालांकि, एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स परफॉर्मेंस को मिला-जुला माना। वॉल्यूम ग्रोथ अच्छी रही, लेकिन एग्रेसिव हायरिंग और चल रही कैपेसिटी बढ़ाने की वजह से मार्जिन पर दबाव आया। नतीजों के बाद स्टॉक में गिरावट आई थी क्योंकि अर्निंग्स एनालिस्ट्स के अनुमान से कम रही थीं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स मिस का कारण ज़्यादातर ज़्यादा टैक्स रेट बताया था, हालांकि ब्रोकरेज ने कहा कि ऑपरेटिंग ट्रेंड्स मोटे तौर पर स्थिर रहे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NSE ने 10 साल बाद IPO के लिए दाखिल किया DRHP; ₹30000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को SEBI और BSE के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया। NSE के शेयर सिर्फ BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत शेयरधारक मिलकर NSE की करीब 6% इक्विटी बेचेंगे।

कितना होगा NSE का वैल्यूएशन

अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये माना जा रहा है। इस आधार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO होगा।

दिलचस्प बात यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) इस OFS में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक

ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक होगा। बैंक 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर बेच सकती है। वहीं, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये सभी करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

बीमा कंपनियां भी बेचेंगी हिस्सेदारी

सरकारी बीमा कंपनियां भी इस IPO में अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी।

  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) करीब 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लगभग 60-60 लाख शेयर बेचेंगी।

IPO फाइलिंग से पहले NSE की IPO कमेटी ने बुधवार को बैठक कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। NSE के बोर्ड ने सोमवार को DRHP को मंजूरी दी थी।

जनवरी में मिली थी SEBI की मंजूरी

NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले जनवरी 2026 में SEBI ने एक्सचेंज को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिया था। इसी के बाद लिस्टिंग का रास्ता साफ हुआ।

SEBI की यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह को-लोकेशन विवाद था, जिसमें कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे।

NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए। IPO की तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर समेत कई सलाहकार भी नियुक्त किए। फिलहाल NSE के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

को-लोकेशन केस में सेटलमेंट की कोशिश

NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल की थी। इसमें केस निपटाने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश कर चुकी थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है।

Stocks to Watch: 18 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

YES Bank Share Price: 52-वीक लो से 48% उछला यस बैंक, एक्सपर्ट्स बोले- आगे भी दिख रही है मजबूती

YES Bank Share Price: यस बैंक के शेयर बुधवार को भारी खरीदारी के दम पर करीब 7% चढ़कर 52-वीक के नए हाई पर पहुंच गए। टेक्निकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर में आने वाले दिनों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

52-वीक हाई पर पहुंचा YES Bank

बुधवार के कारोबार के दौरान YES Bank का शेयर 6.52% से ज्यादा उछलकर 25.45 रुपये तक पहुंच गया। आखिर में 5.23% की बढ़त के साथ 25.14 रुपये पर पहुंच गए। शेयर अपने 52-वीक लो से करीब 48% की तेजी दिखा चुका है। वहीं, पिछले एक महीने में इसमें 15% से ज्यादा की बढ़त आई है।

आगे किन लेवल्स पर रहेगी नजर?

Canara Bank Securities के मुताबिक YES Bank ने लंबे समय से बने डाउनवर्ड चैनल से बुलिश ब्रेकआउट दिया है। शेयर अब सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो मजबूत ट्रेंड और बेहतर मोमेंटम का संकेत देता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि 25.52 रुपये का लेवल अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। यह पहले बने स्विंग हाई और एक अहम साइकोलॉजिकल लेवल से भी मेल खाता है।

32 रुपये तक जा सकता है शेयर?

Mirae Asset ShareKhan के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट मुथुसेल्वराज एम. का कहना है कि चौथी तिमाही (Q4FY26) के मजबूत नतीजों के बाद YES Bank में पॉजिटिव ट्रेंड बना हुआ है। वीकली चार्ट पर शेयर एक बुलिश पैटर्न बना रहा है और सभी टाइमफ्रेम के मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है।

उनके मुताबिक निकट अवधि में शेयर 26 रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि 20 रुपये एक अहम सपोर्ट रहेगा। अगर शेयर अपने बड़े रेजिस्टेंस को पार कर लेता है, तो मीडियम टर्म में यह 32 रुपये या उससे ऊपर के स्तर भी छू सकता है।

Anand Rathi की राय

Anand Rathi Share and Stock Brokers के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट जिगर एस. पटेल के अनुसार YES Bank ने 24.25 रुपये के अहम रेजिस्टेंस को पार करते हुए मजबूत ब्रेकआउट दिया है। यह निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है और आने वाले ट्रेडिंग सेशंस में और तेजी की संभावना बनाता है।

Stocks to Watch: 18 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: 18 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: गुरुवार, 18 जून के कारोबार में कुछ शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है। इनमें नए ऑर्डर, प्रोडक्ट लॉन्च, मैनेजमेंट से जुड़े बदलाव, हिस्सेदारी बिक्री जैसी खबरें देखने को मिली हैं। ऐसे में इन शेयरों में बाजार खुलने के बाद बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

Lupin

फार्मा कंपनी Lupin ने अमेरिका में Azilsartan Medoxomil टैबलेट लॉन्च की है। यह दवा वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होती है। इसके साथ कंपनी ने कार्डियोवैस्कुलर सेगमेंट में अपना पोर्टफोलियो और बढ़ाया है।

HDFC Bank

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में नए चेयरमैन की तलाश तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI ने बैंक के बोर्ड से नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है, क्योंकि मौजूदा अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री का कार्यकाल लगभग खत्म हो चुका है।

HFCL

टेलीकॉम और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी HFCL को RVNL से 2,666.09 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर उत्तर प्रदेश (पश्चिम) में BharatNet Phase-III प्रोजेक्ट के लिए है। कंपनी टेलीकॉम नेटवर्क बनाएगी और 10 साल तक उसका ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी संभालेगी।

Waaree Renewable Technologies

रिन्यूएबल कंपनी Waaree Renewable Technologies को अपने 980 मेगावाट पीक (MWP) / 700 मेगावाट एसी (MWAC) सोलर प्रोजेक्ट में 30.91 करोड़ रुपये का अतिरिक्त EPC ऑर्डर मिला है। इसके बाद इस प्रोजेक्ट की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू बढ़कर 1,044.69 करोड़ रुपये हो गई है।

Bosch Home Comfort India

Bosch Global Software Technologies, Bosch Home Comfort India में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। OFS के जरिए 21.7 लाख शेयर या 7.97% हिस्सेदारी बेची जाएगी। फ्लोर प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर रखा गया है, जो मौजूदा बाजार भाव से करीब 10% कम है।

RVNL

सरकारी रेलवे कंपनी RVNL को East Coast Railway से 967.92 करोड़ रुपये का EPC ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है। इसके तहत Nergundi-Barang और Khurda Road-Vizianagaram सेक्शन में तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए कई बड़े स्टील ब्रिज बनेंगे।

RailTel

सरकारी टेलीकॉम और IT कंपनी RailTel को 52.57 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी डिजास्टर रिकवरी IT इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी। इसके बाद 5 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम भी करेगी।

Apollo Hospitals

हेल्थकेयर कंपनी Apollo Hospitals के खिलाफ चल रही कार्रवाई RBI ने बंद कर दी है। कंपनी ने मामले के निपटारे के लिए 17.8 करोड़ रुपये की कंपाउंडिंग राशि जमा की है।

Balkrishna Industries

टायर कंपनी Balkrishna Industries ने सरोज कुमार खुंटिया को नया CFO नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 18 जून 2026 से प्रभावी होगी।

Vedanta Power

डीमर्जर के बाद शेयर बाजार में लिस्ट हुई Vedanta Power ने भविष्य की ग्रोथ के लिए बड़ा प्लान बनाया है। कंपनी Hydro Power, Battery Energy Storage Systems (BESS) और Nuclear Energy जैसे नए क्षेत्रों में उतरने की तैयारी कर रही है। बढ़ती बिजली मांग और बदलते ऊर्जा बाजार को देखते हुए कंपनी पारंपरिक बिजली उत्पादन से आगे बढ़कर नए कारोबार के अवसर तलाश रही है।

फॉक्सवैगन ग्रुप की कंपनी के साथ HCLTech की बड़ी डील, कारों के लिए बनाएगी AI सॉफ्टवेयर

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Gold Price Today: ₹4800 सस्ता हुआ सोना, ₹5300 टूटी चांदी; जानिए क्यों आई बड़ी गिरावट

Gold Price Today: घरेलू बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मजबूत रुपये और वैश्विक बाजार में कमजोरी के बीच कारोबारियों ने कीमती धातुओं से दूरी बनाई। इससे सोना और चांदी दोनों सस्ते हो गए।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना 4,800 रुपये टूटकर 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स समेत) पर आ गया। एक दिन पहले सोना 1,59,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी में भी बड़ी गिरावट

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। चांदी 5,300 रुपये टूटकर 2,55,400 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर आ गई।

मंगलवार को चांदी 2,60,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम?

एनालिस्टों के मुताबिक, लगातार दूसरे दिन घरेलू मांग कमजोर रही। वहीं शेयर बाजार में मजबूती के कारण निवेशकों का रुझान दूसरी एसेट की ओर बढ़ा है।

इसके अलावा निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले समेत कई अहम आर्थिक घटनाओं से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी वजह से सोने में खरीदारी कमजोर रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड मामूली गिरावट के साथ 4,327.54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं स्पॉट सिल्वर 0.18% फिसलकर 69.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले पर टिकी हुई है। इस वजह से फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं।

अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर

बाजार की नजर शुक्रवार को होने वाली अमेरिका और ईरान की प्रस्तावित बैठक पर भी है। एनालिस्टों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति होती है तो भू-राजनीतिक तनाव कम हो सकता है। इससे सोने और चांदी जैसी सुरक्षित माने वाले निवेश की मांग घट सकती है।

वहीं अगर बातचीत में कोई बाधा आती है या तनाव बढ़ता है, तो निवेशक फिर से सोने और चांदी की ओर रुख कर सकते हैं।

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“सुधर जाओ, वरना फिर से सिर पर गिराएंगे बम”! G7 समिट में ईरान पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, डील से पहले दी खुली चेतावनी

फ्रांस के एवियान शहर में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपना रवैया नहीं सुधारा, तो अमेरिका एक बार फिर उस पर बम बरसाना शुरू कर देगा।

यह तीखी चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब दोनों देश पश्चिमी एशिया (Middle East) में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजी हो चुके हैं। इसी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के बीच एक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह समझौता अभी फाइनल नहीं है।

ट्रंप ने अपने ही अंदाज में कहा, “यह सिर्फ एक समझौता (MoU) है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से उन पर गोलियां चलाना और उनके सिर पर बम गिराना शुरू कर देंगे। अगर वे ढंग से बर्ताव नहीं करेंगे, तो मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। हम सीधे उनके सिर के ठीक बीचों-बीच बम गिराने के लिए वापस लौट आएंगे।”

‘यह डील कई मायनों में अच्छी है’

हालांकि, ईरान को घुड़की देने के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप ने इस होने वाले समझौते की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई मायनों में अच्छा है, सबसे खास बात यह कि यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। ट्रंप हमेशा से यह मांग करते रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।

ट्रंप ने इस समझौते के फायदे गिनाते हुए कहा:

सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल: इस समझौते की खबर से ही शेयर बाजार का ग्राफ ऊपर जा रहा है और फ्यूल की कीमतें नीचे आ रही हैं।

खुल जाएगा समुद्री रास्ता: समझौता साइन होने के अगले दो दिनों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से दोबारा खोल दिया जाएगा।

अमेरिका नहीं देगा एक भी पैसा: ट्रंप ने साफ किया कि इस समझौते के तहत वॉशिंगटन (अमेरिका) ईरान को कोई पैसा नहीं दे रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी तीसरे देश के निवेश किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया।

ओबामा पर साधा निशाना: “ईरान ने उन्हें धोखा दिया”

ट्रंप ने इस मौके पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी जमकर भड़ास निकाली। ओबामा के कार्यकाल में हुए मशहूर ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया, “ईरानियों ने ओबामा को धोखा दिया था और उनसे अरबों डॉलर ऐंठ लिए थे।”

बता दें कि ट्रंप शुरू से ही ओबामा की इस न्यूक्लियर डील के खिलाफ रहे हैं। यही वजह थी कि जब वे पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तो उन्होंने 2018 में अमेरिका को इस डील से बाहर कर लिया था।

क्या है इस अमेरिका-ईरान डील में?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए समझौते (MoU) में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:

व्यापार का रास्ता खुलेगा: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को तुरंत खोला जाएगा। यह दुनिया का वो बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% (पांचवा हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार होता है।

पाबंदियां हटेंगी: इसके बदले में ईरान पर लगे अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र (UN) के कड़े प्रतिबंधों को हटाने का रास्ता साफ होगा।

परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

60 दिनों का सीजफायर: दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, ताकि शांति से आगे की बातचीत हो सके।

हर मोर्चे पर जंग का खात्मा: इस डील का फोकस लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दुश्मनी और लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना है, जिसकी मांग ईरान लगातार कर रहा था।

US Iran News: शांति समझौते को खामेनेई ने दिखाया ठेंगा! ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर किया ड्रोन हमला, अमेरिका का पलटवार

FPI इनवेस्टमेंट में आई बूम: विदेशी निवेशकों की भारत में जबरदस्त वापसी, इस हफ्ते शेयर बाजार में ₹17,425 करोड़ का निवेश

FPI investment in India: पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 17,425 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह निवेश वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के सही रहने के कारण हुआ। इससे पहले, 18 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 8,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। हालांकि, छुट्टियों […]