NSE के आईपीओ की संभावित डेट आते ही रॉकेट बने IFCI और New India Assurance Company के शेयर

न्यू इंडिया एश्योरेंस और आईएफसीआई के शेयर 4 सितंबर को रॉकेट बन गए। इसकी वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ से जुड़ी एक बड़ी खबर है। खबर के मुताबिक, एनएसई 25 सितंबर को अपने शेयर लिस्ट कराना चाहता है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट में बताया गया है कि सेबी से एनएसई के आईपीओ को अगले हफ्ते मंजूरी मिल सकती है।

11 सितंबर को हो सकता है प्राइस बैंड का ऐलान 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, एप्रूवल के बाद NSE सेबी के पास अपडेटेट ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करेगा। इस खबर में यह भी बताया गया है कि एनएसई 11 सितंबर को आईपीओ में शेयर के प्राइस बैंड का ऐलान कर सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपने शेयर की लिस्टिंग 25 सितंबर को चाहता है। इस खबर में कहा गया है कि एक्सचेंज ने सेबी को इस बारे में लिखा है। वह जवाब का इंतजार कर रहा है।

New India Assurance का शेयर 16 फीसदी उछला

इस खबर का 4 सितंबर को IFCI और New India Assurance के शेयरों पर असर दिखा। आईएफसीआई का शेयर एक समय 11 फीसदी तक चढ़ गया था। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 12:45 बजे यह शेयर 8.43 फीसदी चढ़कर 104 रुपये पर चल रहा था। New India Assurance का शेयर 16.29 फीसदी चढ़कर 227 रुपये पर चल रहा था। दोनों कंपनियों की एनएसई में हिस्सेदारी है। एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करेगा NSE

IFCI सरकार की कंपनी है। यह एक एनबीएफसी है। इसकी स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) में 52 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसकी NSE में 4.4 फीसदी हिस्सेदारी है। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी की NSE में 1.42 फीसदी हिस्सेदारी है। एनएसई का आईपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। करीब 55 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर एनएसई आईपीओ में 6 फीसदी हिस्सेदारी बेचती है तो इश्यू का साइज 31,500 करोड़ रुपये रह सकता है।

अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्युंडई के नाम

अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई मोटर इंडिया के नाम है। उसने 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ 2024 में पेश किया था। इससे पहले LIC ने करीब 21000 करोड़ रुपये का आईपीओ 2022 में पेश किया था। ह्युंडई ने सबसे बड़े आईपीओ के एलआईसी का रिकॉर्ड तोड़ा था।

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4 सितंबर को बीएसई के शेयरों में भी दिखी तेजी 

NSE का मुकाबला बीएसई से है। बीएसई एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज है। लेकिन, ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिहाज से यह एनएसई से काफी पीछे है। बीएसई के शेयर पहले से एनएसई में सूचीबद्ध हैं। 4 सितंबर को बीएसई के शेयरों में तेजी दिखी। 1 बजे शेयर का भाव 3.23 फीसदी चढ़कर 3,413 रुपये पर चल रहा था।

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जेफरीज ने बताई NSE की एक खास खूबी, 4% टूट गए BSE और MCX के शेयर

BSE-MCX Shares vs NSE IPO: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने आईपीओ की तैयारियों में जुटी एनएसई को अधिक डाईवर्सिफाइड कह दिया तो बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए। तेज गिरावट के साथ ये निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स के टॉप लूजर बन गए जो खुद 2% कमजोर हुआ है। बता दें कि एनएसई ने बाजार नियामक सेबी के पास ₹30 हजार करोड़ के रिकॉर्डतोड़ आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल किया है। इस ड्राफ्ट ने लिस्टेड मार्केट में हलचल बढ़ा दी है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा। अभी देश में सबसे बड़ा आईपीओ लाने का रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया का है जिसने ₹27858 करोड़ का आईपीओ सालव 2024 में पेश किया था।

NSE को लेकर क्या कहना है Jefferies का

जेफरीज का कहना है कि एनएसई का प्रोडक्ट मिक्स बीएसई और एमसीएक्स की तुलना में अधिक डाईवर्सिफाईड है जिसमें से इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ अधिकतर सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 90% से अधिक है। जेफरीज ने जिक्र किया है कि एनएसई ने वैश्विक पियर्स की तुलना में अपना एक टेक प्रोडक्ट सुईट बनाया है और यह कमोडिटीज बिजनेस में विस्तार कर रही है। एनएसई के क्लियरिंग कॉरपोरेशन की कैश मार्केट में 88% और एफएंडओ मार्केट में 91% हिस्सेदारी है। एनएसई के पास टेक्नोलॉजी और डेटा ऑफरिंग्स का एक सुईट है जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 13% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक ओवरऑल इंडियन एक्सचेंज का 70% रेवेवन्यू एनएसई का है। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी कैश, इंडेक्स ऑप्शंस, सिंगल स्टॉक ऑप्शंस, इक्विटी फ्यूचर्स, कमोडिटी एफएंडओ, बॉन्ड्स और करेंसी डेरिवेटिव्स हैं।

कंपनी के सेहत की बात करें तो जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि कोलोकेशन और डार्क फाइबर केस से जुड़े प्रोविजंस में ₹1390 करोड़ और टीएपी मामले में ₹670 करोड़ के पेमेंट्स ने मिलकर एनएसई के वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए पर दबाव डाला। जेफरीज के मुताबिक सेबी सेटलमेंट फीस एक बार का होता है तो इसे निकालने पर देखें तो एनएसई का नॉर्मलाइज्ड ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए मार्जिन 76-77% पर काफी हद तक स्थिर है।

Options कितनी कमाऊ है एक्सचेंजेज के लिए?

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि वित्त वर्ष 2020-26 के बीच इक्विटी ऑप्शंस सालाना 56% की रफ्तार से बढ़ा जबकि कैश मार्केट टर्नओवर इस दौरन 19% की ही रफ्तार से बढ़ा। ऑप्शंस प्रीमियम का एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) वित्त वर्ष 2026 में डेली कैश मार्केट मार्केट टर्नओवर का 70% रहा। इस प्रकार इंडियन एक्सचेंजेज पर ऑपरेटिंग रेवेन्यू की 70% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक यह एक्सचेंजों के रेवेन्यू को मार्केट परफॉरमेंस साइकिल से जोड़ता है क्योंकि ऑप्शन ट्रेडिंग प्राइस की बजाय वोलेटिलिटी से अधिक जुड़ी है। अमेरिका से तुलना करें तो भारत में ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के ट्रेड्स अधिक हैं लेकिन प्रीमियम पांचवा हिस्सा।

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PSU Stocks: 7 कारोबारी दिनों में 48% चढ़ा इस सरकारी कंपनी का शेयर, इस कारण निवेशकों को मिला छप्परफाड़ रिटर्न

New India Assurance Shares: न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के शेयरों में आज लगातार सातवें दिन खरीदारी का शानदार रुझान दिखा। इन सात दिनों में यह 48% से अधिक उछलकर यह एक साल के नए हाई पर पहुंच गया। यह इसके शेयरों के लिए अब तक की सबसे लंबी रैली है। इससे पहले नवंबर 2024 में यह लगातार 12 कारोबारी दिनों तक ऊपर चढ़ा था और 21 नवंबर से 9 दिसंबर तक क्लोजिंग बेसिस पर 12 कारोबारी दिनों में यह 22% से अधिक ऊपर चढ़ा था। इसके शेयरों के मौजूदा स्थिति की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 6.56% के उछाल के साथ ₹215.35 (New India Assurance Share Price) पर है। इंट्रा-डे में यह 7.87% उछलकर ₹218.00 तक पहुंच गया था।

New India Assurance के शेयरों में NSE IPO ने भरी चाबी

न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों को एनएसई के आईपीओ से सपोर्ट मिला है। पिछले हफ्ते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने आईपीओ का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया था। इस ड्राफ्ट से सामने आया कि एनएसई के आईपीओ के तहत जो शेयरहोल्डर् अपनी हिस्सेदारी हल्की कर रहे हैं, उनमें न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी का भी नाम है। ड्राफ्ट के मुताबिक न्यू इंडिया एश्योरेंस इस आईपीओ के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 1.05 करोड़ शेयर बेचने वाली है। चूंकि सरकारी इंश्योरेंस कंपनी के लिए एनएसई में होल्डिंग प्रति शेयर महज ₹0.32 के भाव के हिसाब से है तो शेयर बेचने पर इसे तगड़ा फायदा होने वाला है।

मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से न्यू इंडिया एश्योरेंस में सरकार की हिस्सेदारी 85% है तो पब्लिक शेयरहोल्डर्स में एलआईसी की हिस्सेदारी 8.67% और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) की 1.31% होल्डिंग है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले 1.5 लाख छोटे खुदरा निवेशकों की कंपनी में 1.8% हिस्सेदारी है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों ने निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले वित्त वर्ष 2026 के आखिरी कारोबारी दिन 30 मार्च 2026 को बीएसई पर यह ₹116.95 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 3 ही महीने में यह 86.49% उछलकर आज 22 जून 2026 को ₹218.00 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। वैसे बता दें कि सरकारी बीमा कंपनी ने साल 2018 में 1:1 के रेश्यो में बोनस इश्यू जारी किया था और यह बोनस से एडजस्टेड आईपीओ प्राइस ₹400 के नीचे बना हुआ है।

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NSE ने 10 साल बाद IPO के लिए दाखिल किया DRHP; ₹30000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को SEBI और BSE के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया। NSE के शेयर सिर्फ BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत शेयरधारक मिलकर NSE की करीब 6% इक्विटी बेचेंगे।

कितना होगा NSE का वैल्यूएशन

अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये माना जा रहा है। इस आधार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO होगा।

दिलचस्प बात यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) इस OFS में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक

ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक होगा। बैंक 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर बेच सकती है। वहीं, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये सभी करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

बीमा कंपनियां भी बेचेंगी हिस्सेदारी

सरकारी बीमा कंपनियां भी इस IPO में अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी।

  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) करीब 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लगभग 60-60 लाख शेयर बेचेंगी।

IPO फाइलिंग से पहले NSE की IPO कमेटी ने बुधवार को बैठक कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। NSE के बोर्ड ने सोमवार को DRHP को मंजूरी दी थी।

जनवरी में मिली थी SEBI की मंजूरी

NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले जनवरी 2026 में SEBI ने एक्सचेंज को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिया था। इसी के बाद लिस्टिंग का रास्ता साफ हुआ।

SEBI की यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह को-लोकेशन विवाद था, जिसमें कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे।

NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए। IPO की तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर समेत कई सलाहकार भी नियुक्त किए। फिलहाल NSE के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

को-लोकेशन केस में सेटलमेंट की कोशिश

NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल की थी। इसमें केस निपटाने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश कर चुकी थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है।

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