अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअली एक 14-पॉइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किए हैं। इसका मकसद दोनों देशों के बीच जारी जंग को खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम
फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह मुलाकात भारत और अमेरिका के रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए बहुत बड़ी मानी जा रही है। दरअसल, पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच व्यापारिक पाबंदियों (टैरिफ) और हाल ही में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद से रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट आ गई थी। ऐसे में इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं।
“हमारे रिश्तों में आई है नई ऊर्जा”- पीएम मोदी
पिछले 16 महीनों में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी पहली आमने-सामने की मुलाकात में PM मोदी ने बेहद सकारात्मक रुख दिखाया।
राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मिस्टर प्रेसिडेंट, आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई। पिछले साल हमारी मुलाकात वॉशिंगटन में हुई थी और तब से हमारे संबंधों को एक नई रफ्तार मिली है। एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। यह हमारे लिए बेहद खुशी की बात है कि हमारी दोनों टीमों ने मिलकर कुछ लक्ष्य तय किए हैं। हम उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।”
मिडल ईस्ट में शांति के प्रयासों की तारीफ
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व और उनके प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस इलाके में शांति का यह प्रयास लंबे समय तक टिका रहेगा। मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री व्यापार का मुख्य रास्ता) का खुला रहना बेहद जरूरी है और समुद्र में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होनी चाहिए।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ देने की मांग
मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ही साइन होने वाले समझौते (MoU) का जिक्र किया। उन्होंने बेहद मजबूती से भारतीय नाविकों (Seafarers) का मुद्दा उठाया, जो दुनिया के कुल नाविकों का लगभग 10% हैं। हाल ही में हुई तीन भारतीय नाविकों की मौत के जख्मों को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इस नए समझौते में उनकी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाए।
पीएम मोदी ने ट्रंप से साफ शब्दों में कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, समुद्री व्यापार की दुनिया में लाखों भारतीय नाविक पूरी दुनिया के समुद्री रास्तों पर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, जिसमें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ भी शामिल है। वे वैश्विक प्रगति में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं। उनकी सुरक्षा हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। आपने ईरान के साथ इस समझौते को करने के लिए बहुत बड़े प्रयास किए हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जब इस समझौते को लागू किया जाएगा, तो नाविकों की सुरक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी।”
अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। दोनों देशों ने भले ही इस डील की शर्तों को बेहद गुप्त रखा था, लेकिन अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन (CNN) के हाथ इस समझौते का ’14-पॉइंट वाला सीक्रेट ड्राफ्ट’ लग गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस MoU में दुनिया के सबसे अहम तेल रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के भविष्य को लेकर कुछ भी तय नहीं हुआ है।
हालांकि, व्हाइट हाउस और ईरानी मीडिया दोनों ही इस लीक हुए ड्राफ्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मान रहे हैं, लेकिन G7 समिट में मौजूद राजनयिकों ने इसकी मुख्य बातों की पुष्टि की है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ पहले ही इस पर डिजिटल साइन कर चुके हैं।
आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि दुनिया के इन दो कट्टर दुश्मनों के बीच हुए इस गुप्त समझौते के उन 14 पॉइंट्स में क्या लिखा है:
- हर मोर्चे पर तुरंत जंग का खात्मा: दोनों देश और उनके साथी (जैसे लेबनान) तुरंत युद्ध रोकने का ऐलान करते हैं। अब से कोई भी एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा या धमकी नहीं देगा।
- एक-दूसरे का सम्मान: अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे और एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में टांग नहीं अड़ाएंगे।
- 60 दिनों की समय-सीमा: दोनों देश इस शुरुआती समझौते के बाद अगले 60 दिनों के भीतर एक ‘फाइनल एग्रीमेंट’ तैयार करेंगे। आपसी सहमति से यह समय बढ़ाया भी जा सकता है।
- समुद्री नाकाबंदी खत्म और अमेरिकी सेना की वापसी: अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान की समुद्री नाकाबंदी हटा देगा, ताकि पहले की तरह जहाजों की आवाजाही हो सके। फाइनल एग्रीमेंट के 30 दिनों के भीतर अमेरिका इलाके से अपनी सेनाएं भी हटा लेगा।
- समुद्री रास्तों से हटेंगे बारूदी माइंस: ईरान 30 दिनों के भीतर फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से ओमान की खाड़ी तक मर्चेंट जहाजों का रास्ता साफ करेगा। इसके लिए ईरान समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाएगा।
- ईरान के लिए $300 बिलियन का फंड: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपये) के फंड का इंतजाम करेगा।
- सभी पाबंदियों से आजादी: फाइनल एग्रीमेंट के तहत अमेरिका ईरान पर लगे अपने सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाएगा। साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पाबंदियां भी खत्म की जाएंगी।
- परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा ईरान: ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, ईरान के पास पहले से मौजूद यूरेनियम का क्या होगा, यह फाइनल एग्रीमेंट में तय किया जाएगा।
- बातचीत तक ‘जैसे थे’ की स्थिति: जब तक फाइनल डील नहीं हो जाती, तब तक दोनों देश ‘जैसे हैं वैसे ही रहेंगे’। यानी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
- ईरान को तेल बेचने की खुली छूट: जब तक पाबंदियां पूरी तरह नहीं हट जातीं, तब तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बेचने के लिए विशेष छूट (Waivers) देगा। बैंकिंग, इंश्योरेंस और ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं भी मिलेंगी।
- ईरान का जब्त पैसा वापस मिलेगा: जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, अमेरिका ईरान के जब्त किए गए पैसे और संपत्तियों को पूरी तरह आजाद कर देगा। ईरान का सेंट्रल बैंक इस पैसे का इस्तेमाल कर सकेगा।
- निगरानी के लिए बनेगी कमेटी: डील ठीक से लागू हो रही है या नहीं और दोनों देश अपनी बात पर टिके हैं या नहीं, इसकी निगरानी के लिए एक तालमेल तंत्र बनाया जाएगा।
- बची हुई शर्तों पर आगे बात: समुद्री रास्ते खोलने, तेल बेचने की छूट मिलने और पैसे जारी होने के बाद, दोनों देश बची हुई शर्तों को सुलझाने के लिए फाइनल बातचीत के दौर में कदम रखेंगे।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) की पक्की मुहर: जब दोनों देशों के बीच फाइनल एग्रीमेंट बन जाएगा, तो उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव पास कराकर मंजूर किया जाएगा।
अधिकारियों का क्या कहना है?
अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि यह सिर्फ एक “राजनीतिक दस्तावेज” है। असली और महत्वपूर्ण वादे, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर पर्दे के पीछे की गुप्त बातचीत (Back-Channel) में हुए हैं, जिनका जिक्र इस ड्राफ्ट में नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षरों पर टिकी हैं।
फ्रांस के एवियान शहर में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपना रवैया नहीं सुधारा, तो अमेरिका एक बार फिर उस पर बम बरसाना शुरू कर देगा।
यह तीखी चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब दोनों देश पश्चिमी एशिया (Middle East) में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजी हो चुके हैं। इसी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के बीच एक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह समझौता अभी फाइनल नहीं है।
ट्रंप ने अपने ही अंदाज में कहा, “यह सिर्फ एक समझौता (MoU) है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से उन पर गोलियां चलाना और उनके सिर पर बम गिराना शुरू कर देंगे। अगर वे ढंग से बर्ताव नहीं करेंगे, तो मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। हम सीधे उनके सिर के ठीक बीचों-बीच बम गिराने के लिए वापस लौट आएंगे।”
‘यह डील कई मायनों में अच्छी है’
हालांकि, ईरान को घुड़की देने के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप ने इस होने वाले समझौते की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई मायनों में अच्छा है, सबसे खास बात यह कि यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। ट्रंप हमेशा से यह मांग करते रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।
ट्रंप ने इस समझौते के फायदे गिनाते हुए कहा:
सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल: इस समझौते की खबर से ही शेयर बाजार का ग्राफ ऊपर जा रहा है और फ्यूल की कीमतें नीचे आ रही हैं।
खुल जाएगा समुद्री रास्ता: समझौता साइन होने के अगले दो दिनों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से दोबारा खोल दिया जाएगा।
अमेरिका नहीं देगा एक भी पैसा: ट्रंप ने साफ किया कि इस समझौते के तहत वॉशिंगटन (अमेरिका) ईरान को कोई पैसा नहीं दे रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी तीसरे देश के निवेश किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया।
ओबामा पर साधा निशाना: “ईरान ने उन्हें धोखा दिया”
ट्रंप ने इस मौके पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी जमकर भड़ास निकाली। ओबामा के कार्यकाल में हुए मशहूर ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया, “ईरानियों ने ओबामा को धोखा दिया था और उनसे अरबों डॉलर ऐंठ लिए थे।”
बता दें कि ट्रंप शुरू से ही ओबामा की इस न्यूक्लियर डील के खिलाफ रहे हैं। यही वजह थी कि जब वे पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तो उन्होंने 2018 में अमेरिका को इस डील से बाहर कर लिया था।
क्या है इस अमेरिका-ईरान डील में?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए समझौते (MoU) में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:
व्यापार का रास्ता खुलेगा: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को तुरंत खोला जाएगा। यह दुनिया का वो बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% (पांचवा हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार होता है।
पाबंदियां हटेंगी: इसके बदले में ईरान पर लगे अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र (UN) के कड़े प्रतिबंधों को हटाने का रास्ता साफ होगा।
परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
60 दिनों का सीजफायर: दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, ताकि शांति से आगे की बातचीत हो सके।
हर मोर्चे पर जंग का खात्मा: इस डील का फोकस लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दुश्मनी और लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना है, जिसकी मांग ईरान लगातार कर रहा था।
