CA की छुट्टी… AI ने भरा इनकम टैक्स रिटर्न! ‘Claude’ के इस वायरल प्रॉम्प्ट पर छिड़ी बहस

ITR Filing with AI: टेक्नोलॉजी और AI का दायरा अब केवल कंटेंट लिखने या कोडिंग करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब सीधे आपके टैक्स और फाइनेंस से जुड़े जटिल कामों में भी एंट्री कर चुका है। आजकल देश में टैक्स सीजन चल रहा है और इस दौरान कुछ भारतीय प्रोफेशनल्स ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए AI टूल्स का सहारा लेकर सबको चौंका दिया है।

सोशल मीडिया पर कुछ प्रोफेशनल्स ने इसके जबरदस्त अनुभव साझा किए हैं। एक डेटा सिक्योरिटी एनालिस्ट ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के एआई टूल ‘क्लॉड’ (Claude) का इस्तेमाल करने के बाद अपना एक्सपीरियंस बताते हुए कहा कि इसे यूज करते वक्त ऐसा महसूस हुआ, ‘जैसे कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मेरे बगल में ही बैठा हो’।

NRI एग्जीक्यूटिव बोले: ‘चीजें रटने के बजाय मैंने सीखी पूरी प्रक्रिया’

अमेजन के सीनियर एग्जीक्यूटिव अखिल सूद, जो फिलहाल वाशिंगटन में रहते हैं, उन्होंने पहली बार भारत में अपना ITR फाइल करने के लिए AI असिस्टेंट का इस्तेमाल किया। उनके लिए यह प्रयोग केवल ऑटोमेशन तक सीमित नहीं था, बल्कि टैक्स जैसे उलझाऊ प्रोसेस को स्पष्टता से समझना था।

अखिल सूद ने लिंक्डइन पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा, ‘एक एनआरआई के रूप में टैक्स फाइलिंग हमेशा से ही जरूरत से ज्यादा जटिल लगती रही है। पहले मुझे किसी सीए को ढूंढने, डॉक्यूमेंट्स भेजने, उनके जवाब का इंतजार करने और ऐसी टैक्स शब्दावली को समझने में घंटों बिताने पड़ते थे, जिससे मैं परिचित नहीं था।’

उन्होंने आगे बताया कि इस AI टूल ने न केवल उनके सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी समझाया कि फॉर्म में हर एक फील्ड क्यों है, उसमें क्या जानकारी भरी जानी चाहिए, इनकम की अलग-अलग कैटेगरी कैसे काम करती हैं और सबमिट करने से पहले किन बातों को वेरीफाई करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘बिना सोचे-समझे फॉर्म भरने के बजाय, मुझे ऐसा लगा कि मैं वास्तव में इस पूरी प्रक्रिया को सीख रहा हूं।’ इसके अलावा एआई ने टैक्स पोर्टल पर आने वाली दिक्कतों को पहचानने और ग्रीवांस दर्ज करने के तरीके भी सुझाए।

बेंगलुरु के सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट ने शेयर किया पूरा ‘AI Prompt’

इस मामले में एक और एडवांस केस बेंगलुरु के इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट उद्देश्य कुमार का सामने आया। उन्होंने केवल गाइडेंस ही नहीं ली, बल्कि Claude के डेस्कटॉप ऐप के जरिए पूरी फाइलिंग प्रोसेस को प्रैक्टिकली एग्जीक्यूट कराया।

उद्देश्य के मुताबिक, इस AI टूल ने खुद उनके Form 16 का विश्लेषण किया, उसकी तुलना Annual Information Statement (AIS) से की, डेटा में अंतर को पकड़ा, साल के बीच में नौकरी बदलने के मामले को अच्छे से संभाला, पोर्टल के एरर्स और सेशन टाइमआउट की समस्या को सुलझाया और अंत में रिटर्न को सफलतापूर्वक सबमिट भी कर दिया।

उद्देश्य कुमार ने उस सटीक AI Prompt यानी कमांड को भी शेयर किया, जिसका इस्तेमाल उन्होंने क्लॉड के ‘Chrome MCP’ (मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल) के जरिए किया था।

डेटा प्राइवेसी को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

जैसे ही उद्देश्य ने यह पोस्ट शेयर की, सोशल मीडिया यूजर्स ने डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक लिंक्डइन यूजर ने लिखा, ‘आपने अपने दस्तावेज किसी ऐसे सीए के साथ साझा नहीं किए जो शायद उनका दुरुपयोग करना न जानता हो बल्कि आपने उन्हें एक एआई कंपनी के साथ साझा किया है जिसके पास ऐसा करने की पूरी तकनीकी क्षमता है।’ एक अन्य यूजर ने डर जताया कि यह सारा डेटा एआई मॉडल को ट्रेन करने के काम आ सकता है, जिससे भविष्य में प्राइवेसी लीक होने का खतरा है।

इन चिंताओं पर उद्देश्य कुमार ने सफाई देते हुए कहा, ‘आमतौर पर लोग अपना पैन और फॉर्म 16 व्हाट्सएप पर सीए के साथ शेयर कर देते हैं या क्रेडेंशियल्स अनजान पोर्टल्स पर डाल देते हैं। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। क्लॉड मेरे अपने ब्राउजर के अंदर चल रहा था और इस पूरी प्रक्रिया में ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ यानी मैं खुद हर कदम पर नजर रख रहा था।’

क्या कहती है कंपनी की पॉलिसी?

एंथ्रोपिक की पॉलिसी के अनुसार, यूजर्स का डेटा पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड होता है और जब तक यूजर खुद सहमति न दे, तब तक उनके डेटा का इस्तेमाल मॉडल को ट्रेन करने के लिए नहीं किया जाता है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: ‘असिस्टेंट’ मानें, ‘रिप्लेसमेंट’ नहीं

टैक्स और तकनीकी जानकारों का मानना है कि एआई का इस्तेमाल रिसर्च या काम को तेज करने के लिए एक सहायक के रूप में तो बेहतरीन है, लेकिन इस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। एआई में भ्रम या गलत जानकारी बना देना की समस्या होती है। इसलिए, अंतिम रूप से रिटर्न सबमिट करने से पहले किसी योग्य प्रोफेशनल या सीए से डेटा को री-वेरीफाई करवाना हमेशा सुरक्षित रहता है।

आखिर क्यों AI की तरफ आकर्षित हो रहे हैं लोग?

  • कम माथापच्ची: डॉक्यूमेंट्स शेयर करने, सीए के फॉलो-अप और लंबे इंतजार की पूरी प्रक्रिया एक सिंगल गाइडेड सेशन में सिमट जाती है।
  • सीखने का मौका: केवल फॉर्म भरने के बजाय लोग टैक्स कंप्लायंस की बारीकियों को लाइव सीख पा रहे हैं।
  • कम लागत: साधारण टैक्सपेयर्स जैसे- ITR-1 भरने वाले के लिए यह एक बेहद किफायती और आत्मनिर्भर विकल्प बनता जा रहा है।
  • महत्वपूर्ण समय: यह बदलाव ऐसे समय में देखा जा रहा है जब इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत भारत का टैक्स फ्रेमवर्क एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जिसका उद्देश्य फॉर्म की नंबरिंग, डिस्क्लोजर और कंप्लायंस को और ज्यादा सरल बनाना है।