पीएम मोदी ने कहा डीबीटी ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए, मोबाइल फोन बना गवर्नेंस का हिस्सा

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत का मोबाइल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उम्मीद से ज्यादा विकसित हुआ है। यह अब शासन और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी का एक प्रमुख साधन बन गया है। सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सिस्टम के माध्यम से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए गए हैं। नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण के उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सैकड़ों सरकारी सेवाएं अब मोबाइल फोन के माध्यम से उपलब्ध हैं और डीबीटी के परिणामस्वरूप 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा किए गए हैं।

पिछले दशक में टेलीकम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी की भूमिका में बदलाव पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन सुशासन का एक उपकरण बन गया है। डीबीटी ने न केवल सरकारी पैसे के ट्रांसफर की सुविधा प्रदान की है बल्कि इस पैसे को गलत हाथों तक पहुंचने से रोकने में भी मदद की है।

जिन लोगों को पहले की व्यवस्था से फायदा हुआ था उनका जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों ने कमाई खो दी है,उन्हें मोदी पसंद नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि बदलावों के विरोध के बावजूद,वह उन्हें लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बचाए गए धन का इस्तेमाल अब सही उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

मोदी ने डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में इसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा मोबाइल फोन अब चैट का माध्यम नहीं रह गया है,लेकिन इससे यात्रा कम हो गई है, प्रतीक्षा का समय कम हो गया है और सुविधा अधिक हो गई है। यह देश के नागरिकों से टेक्नोलॉजी से मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 10-12 सालों में मोबाइल फोन अपनी सिर्फ बातचीत की पारंपरिक भूमिका से काफी आगे बढ़ गए हैं और गरर्नेंस के लिए एक माध्यम बन गए हैं। उन्होंने कहा,एक दशक पहले डिजिटल विभाजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। नई तकनीक तेजी से कुछ खास लोगों का विशेषाधिकार बनती जा रही थी। सरकार ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से मोबाइल फोन को अपनी डिजिटल रणनीति का केंद्र बनाकर इसका जवाब दिया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि डीपफेक एक “बड़ी चुनौती” है और धोखाधड़ी और सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए एक वैश्विक ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एक समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया क्योंकि डिजिटल खतरे तेजी से राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने सरकारों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों से साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसे खतरों से निपटने का अनुभव है और वह अपनी सीख अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा’ तक PM मोदी के 25 साल, वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा का भव्य समापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होने के मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत निकाली गई ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’ का बुधवार को वडनगर में समापन हुआ। इस अवसर पर वडनगर में गौरवपूर्ण समापन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी मौजूद रहे। इस दौरान अलग-अलग राज्यों से पहुंचे बाइकर्स और सेवा यात्रियों का स्वागत किया गया और उन्हें सम्मानित भी किया गया।

सीएम ने क्या कहा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’ के समापन अवसर पर कहा कि, “7 अक्टूबर, 2001 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा दायित्व संभाला था। आज प्रधानमंत्री ने लगातार 25 वर्षों तक जनसेवा और सुशासन का दायित्व निभाकर देश में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले जननायक बनने का गौरव हासिल किया है। ” सीएम ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ने सत्ता को पद के बजाय सेवा का माध्यम माना और गरीबों, मध्यम वर्ग, किसानों, महिलाओं और युवाओं के विकास पर जोर दिया।”

भारत की ताकत दुनिया के सामने मजबूत

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आगे कहा कि, “गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात समिट, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, बुलेट ट्रेन, GIFT City और सेमीकंडक्टर हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट मोदी के विकास के विजन को दिखाते हैं। पीएम मोदी के नागरिक-केंद्रित शासन के चलते देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।” उन्होंने कहा कि, “कोरोना के दौरान वैक्सीन की मदद, ग्रीन एनर्जी के लक्ष्यों, अनुच्छेद 370 हटाने, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और अंतरिक्ष व रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे कदमों से भारत की ताकत दुनिया के सामने मजबूत हुई है। पटेल ने प्रधानमंत्री को जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने में गुजरात की युवा शक्ति अहम भूमिका निभाएगी।”

देश की सेवा में एक भी दिन नहीं किया आराम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 अक्टूबर को ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इसी दिन 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जनसेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि, “पीएम मोदी ने पिछले 25 वर्षों में बिना एक भी दिन आराम किए देश के विकास और गरीबों के कल्याण के लिए काम किया।” चौहान ने कोरोना संकट और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भी सराहना की।” उन्होंने कहा कि, “नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वाराणसी से वडनगर तक बाइक रैली के जरिए पहुंचे युवाओं की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना होनी चाहिए और उन्हें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।”

मद् भगवद् गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि गीता में बताए गए ‘सात्विक कर्ता’ के सभी गुण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में दिखाई देते हैं। वे राग-द्वेष और अहंकार से परे रहकर धैर्य के प्रतीक बन गए हैं।

पश्चिम बंगाल के सीएम ने क्या कहा

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वडनगर पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि को नमन करते हुए कहा कि, इस धरती ने देश को एक दूरदर्शी नेता दिया है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘राष्ट्र प्रथम’ और गरीब कल्याण को ध्यान में रखते हुए देश में विकास और सुशासन को बढ़ावा मिला। अधिकारी के मुताबिक, किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, सड़क और रेलवे के विस्तार, पीएम आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि और उड़ान योजना जैसी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए देशभर के लोग एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। अधिकारी ने वाराणसी से वडनगर तक निकाली गई सेवा यात्रा को देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने वाला प्रयास बताया।

सेवा यात्रा के समापन कार्यक्रम में गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और निकोल विधायक जगदीश विश्वकर्मा ने देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बाइकर्स और युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि, “7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी और अब उनकी जनसेवा के 25 साल पूरे हो गए हैं। इस यात्रा के दौरान युवाओं को सरकार की अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला।” विश्वकर्मा ने कहा कि, “मोदी का 25 साल का सार्वजनिक जीवन ‘जनसेवा और राष्ट्रसेवा’ के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनके नेतृत्व में देश के विकास, सुशासन और आर्थिक मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं, जिससे भारत की वैश्विक पहचान भी मजबूत हुई है।

पीएम मोदी के 25 साल के जनसेवा का सफर

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के जनसेवा के सफर को लोगों तक पहुंचाने के लिए वाराणसी से वडनगर तक सेवा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 500 बाइकर्स और कई युवा शामिल हुए, जिन्होंने 10 राज्यों के गांवों और शहरों में पहुंचकर सफाई अभियान, पौधारोपण, नशामुक्ति और लोगों से संवाद जैसे सामाजिक काम किए। अभियान से बड़ी संख्या में लोग जुड़े और पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऑनलाइन युवाओं का उत्साह बढ़ाया। यात्रा के दौरान वडनगर के शर्मिष्ठा तालाब का जल काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचाया गया, जबकि वाराणसी से लाए गए पवित्र जल से वडनगर के हाटकेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक किया गया। इस पहल के जरिए वाराणसी और वडनगर के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाया गया।

कौन-कौन था मौजूद

सेवा यात्रा के समापन समारोह में राज्य सरकार के मंत्री सर्व ऋषिकेशभाई पटेल, कौशिकभाई वेकरिया, प्रवीणभाई माली, कमलेशभाई पटेल, गुजरात प्रदेश प्रभारी तरुण चुग, सांसद सर्व हरिभाई पटेल, मयंक नायक, राजेंद्रभाई शुक्ल, मध्य प्रदेश के सांसद वी.डी. शर्मा, मेहसाणा जिला पंचायत अध्यक्ष नितिनभाई पटेल, विधायक सर्व किरीटभाई पटेल, मुकेशभाई पटेल, सरदारभाई चौधरी, सुखाजी ठाकोर, राजेश चावड़ा, पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल, मेहसाणा दूध सागर डेयरी के चेयरमैन अशोकभाई चौधरी, मेहसाणा डिस्ट्रिक्ट बैंक के चेयरमैन विनोदभाई पटेल, वडनगर नगर पालिका अध्यक्ष, सेवा संकल्प अभियान गुजरात प्रदेश प्रभारी और पूर्व मंत्री ब्रिजेश मेरजा, भाजपा प्रदेश महामंत्री प्रशांतभाई कोराट, उपाध्यक्ष नटुजी ठाकोर, अग्रणी भरतभाई पंड्या, सीताबेन पटेल, गिरीशभाई राजगोर, मेहसाणा जिला प्रभारी भरतभाई डांगर सहित बाइकर्स, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

भूटान के प्रधानमंत्री टोबगे ने पीएम मोदी को क्यों कहा ‘विष्णु का अवतार’? दुनियाभर के नेताओं ने दी बधाई

PM Modi 25 years in office: जापान, भूटान और फिलीपींस सहित कई देशों के नेताओं ने बुधवार (7 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 साल पूरे करने पर बधाई दी। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने पीएम मोदी को ‘विष्णु का अवतार’ बताया है। उन्होंने यह बात 2019 में नई दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई अपनी निजी मुलाकात और एक ज्ञानी एवं दूरदर्शी नेता के गुणों के बारे में अपनी समझ के आधार पर कही। पीएम मोदी 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए थे। उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद पर सेवाएं दीं। मई 2014 में वह भारत के प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे।

शेरिंग टोबगे ने अपने शुभकामना संदेश में पीएम मोदी को ‘हमारे समय का अवतार’ बताया। टोबगे ने 2019 में नई दिल्ली में एक आम नागरिक के तौर पर PM मोदी से हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा था कि वह उन्हें बड़े भाई और ‘विष्णु के अवतार’ के रूप में देखते हैं। टोगबे ने कहा, “हमारे क्षेत्र में प्रबुद्ध शासकों को लंबे समय से इसी रूप में देखा जाता रहा है।”

भूटानी प्रधानमंत्री ने कहा कि PM मोदी ने भारतीयों के मन में खुद के प्रति और अपने देश के लिए मजबूत भरोसा जगाया। उन्होंने कहा, “वह भारत को लेकर ज्यादा गर्व महसूस करते हैं, उसके समक्ष मौजूद संभावनाओं के प्रति अधिक महत्वाकांक्षी हैं और दुनिया में उसकी जगह को लेकर ज्यादा आश्वस्त हैं। यह एक प्रबुद्ध शासक के गुण हैं।”

अन्य नेताओं ने क्या कहा?

जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने इस मौके पर मोदी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत के विकास और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की साख बढ़ाने में मोदी के योगदान की सराहना की। तकाइची ने X पर एक पोस्ट में कहा, “PM मोदी वर्षों से भारतीय समाज और राष्ट्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं। वह 2001 से अपने बेहतरीन राजनीतिक नेतृत्व के जरिये सरकार के प्रमुख के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं।”

उन्होंने लिखा, “भारत के विकास को गति देने के साथ-साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश की साख बढ़ाई है। एक साथी नेता के तौर पर, इन सभी उपलब्धियों के लिए मैं उनके प्रति सम्मान जाहिर करती हूं।” तकाइची ने जुलाई की अपनी हालिया भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें मोदी के साथ जापान-भारत विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने के लिए ठोस कदमों पर चर्चा करने का सौभाग्यपूर्ण अवसर मिला।

तकाइची ने अगले साल जापान और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह मुक्त और स्वतंत्र हिंद प्रशांत क्षेत्र के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक हैं। ताकि जापान और भारत, जिनकी रणनीतिक दिशा एक जैसी है, अपनी साझेदारी को और आगे बढ़ा सकें।

फिलीपींस के राष्ट्रपति ने भी दी बधाई

फिलीपींस के राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस ने PM मोदी को भारत के लोगों की सेवा की राह में लगातार सफलता की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “गुजरात से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करने तक, प्रधानमंत्री मोदी का सफर सुशासन, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर खास जोर देने वाला रहा है, जिससे भारत में बदलाव लाने और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका बढ़ाने में योगदान मिला है।”

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवेर ने मोदी को निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 साल पूरे करने पर बधाई दी और कहा कि वह दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी को और गहरा करने के लिए उत्साहित हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने X पर लिखा, “समर्पित जनसेवा के 25 साल पूरे करने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। नेपाल आपके और आपकी सरकार के लिए आने वाले वर्षों में निरंतर सफलता और समृद्धि की कामना करता है।”

नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनुबू ने PM मोदी को बधाई देते हुए कहा, “किसी भी लोकतंत्र में लगातार 25 साल तक नेतृत्व करना एक दुर्लभ उपलब्धि है। मोदी ने दूरदर्शी सोच और विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ नेतृत्व किया है।” उन्होंने कहा, “नाइजीरिया और भारत लोकतांत्रिक देश और ‘ग्लोबल साउथ’ की प्रमुख आवाज के तौर पर एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो ज्यादा निष्पक्ष, समावेशी और प्रतिनिधित्व वाली हो। मुझे पूरा भरोसा है कि उनके नेतृत्व में हमारे लोगों के बीच रिश्ते और भी मजबूत होंगे।”

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बोत्सवाना के राष्ट्रपति डुमा गिदोन बोको ने निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 साल पूरे करने पर मोदी को बधाई दी। उन्होंने कहा, “हम भारत के लोगों के प्रति आपके समर्पण और सेवा भाव की सराहना करते हैं। हम आपकी निरंतर सफलता की कामना करते हैं। दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता की उम्मीद करते हैं।” इस अवसर पर देश भर में आज बीजेपी कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। इसके साथ ही की सार्वजनिक कार्यक्रम में आयोजित हो रहे हैं।

DDA Plans: डीडीए ने दिल्ली के 45 जेजे क्लस्टर्स के इन-सिटू पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की, 1 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

DDA Plans: राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़ा कदम उठाया है। ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ के तहत DDA ने 45 JJ क्लस्टरों के इन-सिटू रिहैबिलिटेशन (उसी जगह पुनर्वास) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 15 परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के लिए तीन ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल से करीब 21,229 परिवारों और एक लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या है DDA की योजना?

दिल्ली के उपराज्यपाल (Delhi LG) सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में DDA ने दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में परिकल्पित In-Situ Rehabilitation (ISR) योजना को आगे बढ़ाने की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनकी मौजूदा जगह या उसके आसपास ही बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। DDA ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसके तहत तीन ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स(TA) नियुक्त किए जाएंगे। ये सलाहकार दिल्ली के 15 प्रोजेक्ट्स से जुड़े 45 JJ क्लस्टरों के लिए विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेंगे।

45 JJ क्लस्टरों में कितने परिवार?

DDA के मुताबिक, इन 15 परियोजनाओं में शामिल 45 JJ क्लस्टर करीब 135.74 एकड़ जमीन पर फैले हुए हैं। इनमें लगभग 21,229 परिवार रहते हैं। प्रस्तावित पुनर्वास योजना से एक लाख से ज्यादा लोगों को बेहतर आवास, नागरिक सुविधाएं और रहने की बेहतर परिस्थितियां मिलने की संभावना है।

ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स क्या करेंगे?

नियुक्त किए जाने वाले ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स सिर्फ जमीन और मकानों का आकलन नहीं करेंगे। बल्कि प्रत्येक परियोजना की पूरी व्यवहार्यता जांचेंगे। इसमें मुख्य रूप से:-

– कितने लोगों और परिवारों के पुनर्वास की जरूरत है

– जमीन पर विकास की कितनी संभावनाएं हैं

– सड़क, पानी, सीवर और अन्य बुनियादी ढांचे की जरूरत

– परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता

– पुनर्वास के लिए उपयुक्त मॉडल

– परियोजना को व्यवस्थित और टिकाऊ तरीके से लागू करने की योजना जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

17 लाख लोगों के पुनर्वास का लक्ष्य

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के 650 से अधिक JJ क्लस्टरों में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों के लिए सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। मौजूदा पहल को इसी बड़े लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। DDA के अनुसार, यह योजना प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के विजन के अनुरूप समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगी।

सिर्फ पुनर्वास नहीं, जमीन का भी बेहतर इस्तेमाल

इस योजना का उद्देश्य केवल झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास करना नहीं है। DDA के मुताबिक, इन-सिटू स्लम रिहैबिलिटेशन के जरिए झुग्गी बस्तियों की जमीन का योजनाबद्ध और बेहतर इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। इससे एक तरफ मौजूदा निवासियों को बेहतर आवास और नागरिक सुविधाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में आवासीय और व्यावसायिक स्थान विकसित किया जा सकेगा। इससे दिल्ली की बढ़ती आबादी के लिए अतिरिक्त हाउसिंग स्टॉक और कमर्शियल स्पेस उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब आगे क्या होगा?

पहले ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स इन 15 परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इन रिपोर्टों में तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर आगे परियोजनाओं की संरचना और क्रियान्वयन का मॉडल तैयार किया जाएगा। DDA का कहना है कि यह प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और टिकाऊ तरीके से JJ क्लस्टरों के पुनर्विकास का आधार तैयार करेगी। यह पहल दिल्ली में झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास और समावेशी शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

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‘2047 तक विकसित भारत, हम करके दिखाएंगे’ जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर PM मोदी का बड़ा संकल्प

PM Modi: राजनीति में लंबा सफर तय करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जनसेवा में अपने 25 साल पूरे किए। इस मौके पर उन्होंने पीछे मुड़कर उपलब्धियों को याद करने के बजाय भारत के विकास के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा “2047 तक विकसित भारत, हम इसे करके दिखाएंगे!”

दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने देश के लोगों का लगातार भरोसा और समर्थन देने के लिए आभार भी जताया।

पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा, “2047 तक विकसित भारत, हम इसे करके दिखाएंगे! इसके साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने, ओलंपिक की मेजबानी करने और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने जैसे लक्ष्यों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन लक्ष्यों को लेकर देश में जो ऊर्जा और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है, वह बेहद खास है।

प्रधानमंत्री की ये बातें तब सामने आईं जब उन्होंने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे किए। यह सफर 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद, 2014 में वे प्रधानमंत्री बने और तब से अब तक तीन कार्यकाल पूरे कर चुके हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “जब मैंने 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी इस मुकाम तक पहुंचूंगा।”

उन्होंने कहा, “आज मैंने लगातार 25 वर्षों की सेवा पूरी कर ली है। यह लोगों के निरंतर आशीर्वाद और समर्थन का परिणाम है।”

‘मैं अपने देश के लोगों के सामने सिर झुकाता हूं’

पीएम मोदी ने अपनी 25 साल की यात्रा में लोगों को सबसे अहम माना और कहा कि यह उपलब्धि उनकी अपनी कामयाबी नहीं, बल्कि नागरिकों से मिले भरोसे और आशीर्वाद का नतीजा है।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं देश के सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने देश के लोगों के सामने सिर झुकाता हूं।”

प्रधानमंत्री ने समर्थन के लिए NDA की सभी पार्टियों का भी धन्यवाद किया।

अपने राजनीतिक सफर के दौरान हुए चुनावों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लोगों ने बार-बार उन्हें सेवा करने का मौका दिया।

उन्होंने कहा, “इस दौरान, चाहे विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव, लोगों ने मुझे अपनी सेवा करने के लिए चुना। आज मैं भारत के लोकतंत्र और संविधान को नमन करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने उन लोगों का भी जिक्र किया जिन्होंने उनका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझने में मदद की।

उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने मेरा विरोध किया, उन्होंने मुझे लोकतंत्र की ताकत दिखाई।”

‘मेरी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ, वह बेकार नहीं गया’

अपनी यात्रा को याद करते हुए PM मोदी ने कहा कि हर अनुभव ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है।

उन्होंने कहा, “मेरी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ, वह बेकार नहीं गया। हर अनुभव ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनका मकसद चुनावों के जरिए मशहूर होना होता, तो वे बहुत पहले ही चुनावी राजनीति में आ सकते थे।

PM मोदी ने कहा, “अगर मैं चुनावी राजनीति में चमकना चाहता, तो मैं बहुत पहले ही राजनीति के मैदान में उतर सकता था।”

इसके बजाय, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपने नजरिए को एक मिशन और कर्तव्य के तौर पर बताया।

उन्होंने कहा, “मैं महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि एक मिशन के लिए जीने वाला व्यक्ति हूं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मेरा ध्यान हमेशा कर्म पर रहता है,” और साथ ही यह भी कहा, “मेरा कर्तव्य ही मेरा धर्म है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वे 25 साल पूरे होने को कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते।

पीएम मोदी ने कहा, “मेरे 25 साल पूरे होने का पड़ाव व्यक्तिगत नहीं है।”

श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना

दिन की शुरुआत में, प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह अवसर उनके सरकार के प्रमुख के तौर पर पहली बार कार्यभार संभालने के 25 साल पूरे होने का था।

इस कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने देश, 140 करोड़ भारतीयों और खुद के लिए प्रार्थना की है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने और साथी नागरिकों की सेवा करने की शक्ति और क्षमता के लिए प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा ज्योति यात्रा’ में भाग लेने वाले नागरिकों को भी बधाई और शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा, “आज मैं जो कुछ भी हूं, जहां भी हूं और जिस भी भूमिका में सेवा कर रहा हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान ‘जनता जनार्दन’ का है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा की, “मेरे लिए जनता ही ईश्वर का रूप है।”

उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिकों का भरोसा और पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

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PM मोदी के 25 साल: ‘गुजरात मॉडल’ से ‘विकसित भारत’ तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति

PM Modi 25 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। उस वक्त राज्य के सामने सूखा, पानी की कमी, बिजली संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियां थीं। 25 साल बाद पीएम मोदी की विकास राजनीति का दायरा गुजरात मॉडल से निकलकर ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘विकसित भारत @2047’ तक पहुंच चुका है। यह बदलाव सिर्फ नारों का नहीं, बल्कि विकास की पूरी सोच के विस्तार को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने आज यानी 7 अक्तूबर को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं।

गुजरात मॉडल से हुई शुरुआत

गुजरात में मोदी के शुरुआती शासन की प्राथमिकता प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और निवेश एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था। इसी दौर की चर्चित पहल SWAGAT (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) थी। इसके जरिए आम लोग अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकते थे। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला।

इसी तरह ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। केंद्र सरकार की ओर से पीएम मोदी के 25 साल के शासन को लेकर जारी प्रस्ताव में SWAGAT और ज्योतिग्राम को गुजरात से निकली ऐसी पहलों के तौर पर बताया गया है, जिनका प्रभाव बाद में राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

SWAGAT से क्या बदला?

SWAGAT में तकनीक के जरिए शिकायतों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी का जो मॉडल अपनाया गया, उसी सोच का विस्तार आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दिया। PRAGATI के जरिए केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उनके सामने आ रही अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

‘गुजरात मॉडल’ बना राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा

धीरे-धीरे गुजरात मॉडल की पहचान औद्योगीकरण, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ गई। 2013 में जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने, तब गुजरात मॉडल उनके राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद विकास की यह कहानी और व्यापक हो गई।

विकास के साथ कल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने विकास को सिर्फ उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रखा। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर दिया।

सरकार के 25 साल के प्रस्ताव के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। 4 करोड़ से ज्यादा घर उपलब्ध कराए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं पीएम-किसान के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। इस तरह विकास का पैमाना भी बदल गया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रहा कि कितने निवेश आए या कितने उद्योग लगे। बल्कि यह भी देखा जाने लगा कि कितने परिवारों को बैंक खाता, घर, शौचालय, गैस, नल का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं।

टेक्नोलॉजी बनी सरकार और जनता के बीच कड़ी

पीएम मोदी की विकास सोच में गुजरात से लेकर केंद्र तक एक चीज लगातार दिखाई देती है और वह है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल…। SWAGAT की सोच आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दी। इसके बाद आधार आधारित सेवाओं, डिजिटल भुगतान और UPI ने तकनीक को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, 2014 से अब तक PRAGATI के जरिए 377 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा चुकी है। पहचाने गए करीब 94 फीसदी मुद्दों का समाधान किया गया है। सरकार का कहना है कि PRAGATI सिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है।

‘मेक इन इंडिया’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक

2020 में कोरोना महामारी के बाद विकास की भाषा में एक और बड़ा बदलाव आया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में आई मुश्किलों ने घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और प्रमुख बना दिया। सरकार अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश करती है।

‘विकसित भारत @2047’

पीएम मोदी की विकास यात्रा का मौजूदा सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ है। इसका उद्देश्य 2047 तक यानी आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश, आत्मनिर्भरता और नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक बड़े विजन के साथ जोड़ा जा रहा है।

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गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर… स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति को गिफ्ट की गईं ये 3 स्पेशल इंडियन Cheese, जानिए क्या खास है इनमें

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन तीन दिवसीय भारत दौरे पर है। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति भारत में बनी एक खास चीज (Cheese) गिफ्ट की है। ये तीनों खास चीजें(Cheese) गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर है। स्विट्जरलैंड अपनी बेहतरीन चीज की कई किस्मों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।

वहीं भारत भी अब चीज बनाने के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। इन खास भारतीय चीजों के जरिए देश की समृद्ध और तेजी से बढ़ती चीज बनाने की परंपरा की झलक मिलती है। आइए जानते हैं क्या खास है इन तीनों चीज में

गुलमर्ग, फ्रेंच-स्टाइल ब्री

गुलमर्ग की फ्रेंच-स्टाइल ब्री चीज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बनाई है। यह दिल के आकार की नरम और क्रीमी चीज है, जिसे पाश्चुराइज्ड गाय के दूध से तैयार किया जाता है। इसके ऊपर सफेद रंग की परत होती है और इसका स्वाद हल्का मिट्टी और मशरूम जैसा लगता है। इस चीज को 2026 में आयोजित मुंडियाल डो क्वेजो डो ब्रासिल प्रतियोगिता में सुपर गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

कोणार्क, फ्रेंच टॉम-स्टाइल चीज

कोणार्क फ्रेंच टॉम-स्टाइल चीज अपनी खास बनावट और स्वाद के लिए जानी जाती है। इसका छिलका प्राकृतिक और थोड़ा पारंपरिक (देहाती) अंदाज का होता है। ये चीज अंदर से यह नरम होती है। वहीं इसका स्वाद हल्के मिट्टी और नमक जैसा होता है और अंत में नींबू जैसी ताजगी महसूस होती है। इस चीज ने 2023 में नॉर्वे में हुए वर्ल्ड चीज अवॉर्ड्स में गोल्ड और 2025 में स्विट्जरलैंड में सिल्वर मेडल हासिल किया था।

येऊर, माउंटेन-स्टाइल चीज

येऊर एक माउंटेन-स्टाइल चीज़ है, जिसे स्विस ग्रुयेरे चीज़ से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। इसे करीब 8-9 महीने तक तैयार किया जाता है, जिससे इसमें हल्का मीठा, नट्स जैसा और जड़ी-बूटियों वाला स्वाद आता है। इसके छिलके को गुलाब की पंखुड़ियों और सौंफ से सजाया जाता है, जो इसे अलग पहचान देता है। ये चीज आसानी से पिघल जाती है, इसलिए इसे फोंडू और ग्रिल की गई डिशेज में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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Smit Machchhar: जिस पायलट ने आसमान में टाली तबाही, उसे नेतन्याहू का आया खास न्योता; कैप्टन स्मित संग PM मोदी भी होंगे साथ!

Captain Smit Machchhar: फ्लाईदुबई विमान में हुए हाई-स्टेक्स मिड-एयर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से खास बातचीत की। इस दौरान नेतन्याहू ने संकट की घड़ी में कैप्टन मच्छर के अदम्य साहस और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का औपचारिक न्योता भी दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार (3 अक्तूबर) रात फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी। उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे।

मच्छार ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, “आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको और मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। आप भारत और इज़राइल के बहादुर लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। मैं आपके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।”

नेतन्याहू ने आगे कहा, “आम तौर पर यह सम्मान इज़राइली नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपका स्वागत करेंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि आप जल्द ही इजरायल आएंगे… मैं आपको यहां फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे लगता है कि यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक होगी।”

कॉकपिट में अचानक हुआ हमला

कैप्टन स्मित मच्छार ने नेतन्याहू को उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब फ्लाईदुबई की उड़ान सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके को-पायलट ने प्रार्थना करने की अनुमति मांगी। मच्छार ने बताया कि स्थानीय क्रू सदस्यों के लिए यह सामान्य बात थी, इसलिए उन्होंने पेशेवर रवैया अपनाते हुए अपना ध्यान उड़ान पर बनाए रखा। लेकिन करीब चार-पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि कॉकपिट के अंदर ही उन पर हमला किया जा रहा है। हमले के बाद उनकी आंखों के सामने धुंध छाने लगी और वह बुरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। कॉकपिट के फर्श पर पड़े होने के बावजूद उन पर लगातार वार किए जाते रहे।

‘अगर दरवाजा नहीं खोलता तो मेरी मौत हो जाती’

कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि विमान को बचाने का एकमात्र रास्ता कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दरवाजे की तरफ बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर बस एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई। लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा। इसके बाद मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और दरवाजे की तरफ गया और उसे खोल दिया।”

नेतन्याहू ने पूछा- सुरक्षित कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षित दरवाजा कैसे खोला? इस पर मच्छार ने कॉकपिट डोर की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि बाहर से कॉकपिट में एंट्री के लिए सिक्योरिटी कोड की जरूरत होती है।

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स्मित ने बताया कि विमान के अंदर मौजूद क्रू को उस समय प्रवेश करने से रोका गया था। हालांकि, कॉकपिट के अंदर की तरफ से दरवाजा एक सामान्य मैनुअल टर्न-नॉब के जरिए खोला जा सकता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कैप्टन मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा खोला और विमान को एक संभावित बड़ी त्रासदी से बचाने की कोशिश की।

यह बातचीत फ्लाईदुबई विमान में हुई उस भयावह घटना के बाद हुई है, जिसमें कॉकपिट के भीतर हिंसा के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कंट्रोल बनाए रखा और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैप्टन स्मित मच्छार के लिए ‘अशोक चक्र’ की मांग की है।

Russia Ukraine War: क्या भारत कराएगा रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत? कीव ने कहा- नई दिल्ली का सीजफायर प्लान सबसे व्यापक

Russia Ukraine War Latest News: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म कराने की दिशा में भारत ने एक अहम कूटनीतिक पहल की है। यूक्रेन ने भारत के सीजफायर प्रस्ताव को अब तक मिले सभी प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के मुताबिक, कीव को भारत के अलावा तुर्की, मिस्र और अमेरिका से भी सीजफायर के प्रस्ताव मिले हैं। यूक्रेन रूस के साथ अलग-अलग फॉर्मेट में सीजफायर पर विचार करने के लिए तैयार है।

RBC-Ukraine की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कीव में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत का प्रस्ताव इन सभी पहलों में ‘सबसे व्यापक’ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म कराने की प्रक्रिया में भूमिका निभाने की इच्छा स्पष्ट रूप से जताई है।

भारत के प्रस्ताव में क्या है?

सिबिहा के मुताबिक, यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र और काला सागर (Black Sea) दोनों में एक साथ सीजफायर चाहता है। उनका कहना है कि सिर्फ एक क्षेत्र में सीजफायर पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ऊर्जा और काला सागर में सीजफायर के लिए तैयार है। लेकिन दोनों को एक साथ शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सभी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के साथ-साथ बंदरगाहों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना भी शामिल होगा।

तुर्की-मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव भी मेज पर

यूक्रेन के सामने भारत के अलावा तीन अन्य कूटनीतिक पहल भी हैं। सिबिहा के अनुसार, तुर्की और मिस्र ने काला सागर में अनाज और कृषि क्षेत्र से जुड़े सीजफायर का जॉइंट प्रस्ताव दिया है। वहीं अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में सीजफायर का एक फ्रेमवर्क पेश किया है। यह मुद्दा पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भी चर्चा में आया था।यूक्रेन का कहना है कि वह संपर्क रेखा (Line of Contact) पर बिना किसी शर्त के सीजफायर समेत अलग-अलग फॉर्मेट पर विचार करने के लिए तैयार है।

काला सागर में फिर शुरू हो सकती है बातचीत

रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर में सीजफायर को लेकर नए दौर की बातचीत की तैयारी भी चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्की और संयुक्त राष्ट्र इस दिशा में नए प्रयास कर रहे हैं। काला सागर में सीजफायर का एक अहम उद्देश्य अनाज की आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर पहले भी दबाव पड़ा है। दोनों देशों से होने वाला अनाज निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है।

पुतिन भी कर चुके हैं PM मोदी की तारीफ

भारत की पहल पर यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ की थी। वाल्दाई फोरम में पुतिन ने कहा था कि पीएम मोदी उन विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद लगातार यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की जरूरत का मुद्दा उठाते हैं।

पुतिन ने कहा कि रूस प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों और संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के समर्थन के लिए आभारी है। उन्होंने PM मोदी के विचारों को बहुत अच्छे विचार बताते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री संघर्ष को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करना चाहते हैं।

भारत लगातार बातचीत और शांति पर दे रहा जोर

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर कहा है कि भारत का रुख मानवीय और शांति-केंद्रित है। अब यूक्रेन द्वारा भारत के सीजफायर प्रस्ताव को ‘सबसे व्यापक’ बताया जाना भारतीय कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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PM Modi Join Bhajan Clubbing: ‘हनुमान अंश’ का ‘पार्वती’ गाना सुन मंत्रमुग्ध हुए पीएम मोदी, GEN Z के साथ भजन क्लबिंग का उठाया लुफ्त

PM Modi Join Bhajan Clubbing: शुक्रवार को दिल्ली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के मौके पर ‘भजन क्लबिंग’ इवेंट हुआ। इस शाम भक्ति और आज के दौर के संगीत का संगम देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस इवेंट में शामिल हुए। यहां ‘हनुमान अंश’ के लिए मशहूर गायक साधु तिवारी ने फिल्म का लोकप्रिय भक्ति गीत ‘पार्वती’ गाया। जब भजन बज रहा था तो प्रधानमंत्री को ‘जेन-जी’ (Gen Z) दर्शकों के साथ गाने का आनंद लेते हुए देखा गया।

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में पीएम मोदी को भीड़ के साथ पूरी तरह घुलते-मिलते, तालियां बजाते और दिल को छू लेने वाली भक्ति परफॉमेंस के दौरान ‘खंजरी’ बजाते हुए देखा गया। बाद में पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इवेंट का एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “दिल्ली में भजन क्लबिंग। शानदार!”

‘हनुमान अंश’ के एक्टर शोभिनव सत्य भी इवेंट में मौजूद थे और उन्होंने फिल्म के भक्ति गीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आनंद लेने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। NDTV से बातचीत में शोभिनव ने अफसोस जताया कि वह प्रधानमंत्री से मिल नहीं पाए। उन्होंने कहा, “उन्होंने जो कदम उठाए, जिस तरह से वह यहां आए और कुर्सी पर बैठे, ताली बजा रहे थे, पूरा आनंद ले रहे थे, ऐसा लगा जैसे वह बच्चों के बीच एक बच्चे बन गए हों। मुझे लगता है कि ऐसा केवल एक सच्चा संत ही कर सकता है। मेरे लिए वह एक सच्चे संत की तरह हैं।”

क्या है भजन क्लबिंग?

भजन क्लबिंग उभरता हुआ मूवमेंट पूरे भारत में ‘जेन-जी’ (Gen Z) का एक प्रमुख ट्रेंड है, जो भजन को नए अंदाज में पेश करता है। यह इवेंट आध्यात्मिक भजनों को आधुनिक कॉन्सर्ट-स्टाइल स्टेजिंग, शानदार लाइटों, लाइव बैंड और हाई-एनर्जी प्रोडक्शन के साथ पेश करता है। इसे खास तौर पर युवा पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक सभाओं को दिलचस्प बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह लोगों को शराब-मुक्त कॉन्सर्ट के माहौल में नाचने, भजन गाने और एक-दूसरे से घुलने-मिलने का मौका देता है।

‘हनुमान अंश’

विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित ‘हनुमान अंश’ फिल्म लक्ष्मी नारायण नाम के एक दुखी लड़के के शुरुआती जीवन की कहानी है, जो भगवान की तलाश में घर छोड़ देता है। दशकों तक भटकने, ध्यान करने और सेवा करने के बाद वह सम्मानित संत नीम करौली बाबा बन जाते हैं, जिन्हें भक्त भगवान हनुमान का अवतार मानते हैं। सिर्फ 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 375 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की और बड़े मेनस्ट्रीम स्टूडियो की फिल्मों पर पूरी तरह छा गई।