ये कपल 30 दिनों तक घूमा यूरोप और खर्च किए 9.5 लाख रुपये फिर बताया एक-एक पैसे का पूरा हिसाब

Europe Travel Budget: भारत के कई लोगों के लिए यूरोप घूमना काफी महंगा हो सकता है, खासकर तब जब ट्रिप में कई देशों की यात्रा करनी हो और सफर करीब एक महीने तक चले। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 30 दिनों तक यूरोप घूमने में असल में कुल कितना खर्च आता है? बता दें कि एक भारतीय कपल ने अपनी पूरी ट्रिप का खर्च शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि उन्होंने रहने की जगह, फ्लाइट, खाने, ट्रांसपोर्ट और एक्टिविटीज पर कितना खर्च किया।

मुस्कान मित्तल और आशीष गुप्ता ने अपनी एक महीने की ट्रिप के दौरान 8 देशों की सैर की। उनकी यात्रा में फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, प्राग, ऑस्ट्रिया, इटली, वेटिकन सिटी और स्विट्जरलैंड शामिल थे।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो

अपने जॉइंट इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में, इस कपल ने बताया कि उन्होंने अपना ट्रैवल बजट कैसे बांटा और यह भी बताया कि ट्रिप के किस हिस्से में उनका सबसे ज्यादा खर्च हुआ।

8 देशों की यात्रा करते समय, हर जगह ठहरने की जगह का खर्च तेजी से बढ़ सकता है। इस कपल के लिए, रहने-सहने का खर्च ही सबसे बड़ा खर्च साबित हुआ।

वे Airbnb और होटलों में रुके; ज्यादातर जगहें शहर के सेंटर में या बड़े रेलवे स्टेशनों के पास थीं। मुस्कान ने कहा, “औसतन, हमने हर रात के लिए 10,000 रुपये खर्च किए।”

यूरोप तक पहुंचने की फ्लाइट भी कपल के ट्रिप बजट का एक बड़ा हिस्सा थी। उन्होंने फ्लाइट पर प्रति व्यक्ति ₹50,000 खर्च किए। सीधी फ्लाइट लेने के बजाय, उन्होंने मिडिल ईस्ट से होकर जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट बुक कीं। दो लोगों के लिए, उनकी कुल फ्लाइट का खर्च लगभग ₹1 लाख आया।

यात्रा में 8 देश शामिल थे, इसलिए शहरों के बीच घूमना भी ट्रिप का एक अहम हिस्सा था। कपल ने बताया कि उन्होंने एक महीने का ‘यूरेल ग्लोबल पास’ इस्तेमाल किया, जिसमें उनके रूट की लगभग सभी ट्रेन यात्राएं शामिल थीं और इसकी कीमत ₹58,000 थी। उन्होंने कार रेंटल और मेट्रो पर भी ₹28,000 खर्च किए।

खाने-पीने का खर्च भी एक ऐसी चीज थी जिसके लिए कपल को अपनी 30 दिन की यात्रा के दौरान प्लानिंग करनी पड़ी। उन्होंने दोनों के खाने पर रोजाना लगभग ₹5,000 खर्च किए। उन्होंने बताया, “हम दिन में एक बार बाहर खाना खाते थे, लेकिन खाने का खर्च कंट्रोल में रखने के लिए साथ में ‘रेडी-टू-ईट’ खाना भी रखते थे और अक्सर ग्रोसरी स्टोर से सामान खरीदते थे।”

यूरोप घूमना सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर जाने तक ही सीमित नहीं है। ट्रिप के दौरान कई टूरिस्ट प्लेस, अलग-अलग एक्सपीरियंस और एक्टिविटीज पर भी खर्च होता है। इस कपल ने अपनी 30 दिनों की यात्रा के दौरान एक्टिविटीज पर प्रति व्यक्ति 85,000 रुपये खर्च किए।

कपल ने अपने बजट में वीजा और ट्रैवल इंश्योरेंस का खर्च भी शामिल किया था। इन खर्चों पर उन्होंने प्रति व्यक्ति ₹15,000 खर्च किए। उन्होंने अन्य खर्चों के लिए भी प्रति व्यक्ति ₹10,000 से ₹15,000 अलग रखे थे।

रहने, फ्लाइट, ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने, घूमने-फिरने की एक्टिविटीज, वीजा, इंश्योरेंस और अन्य खर्चों को मिलाकर, इस कपल ने बताया कि दो लोगों के लिए उनकी एक महीने की यूरोप बैकपैकिंग ट्रिप का कुल खर्च लगभग 9.5 लाख रुपये आया।

इस कपल के खर्चों के ब्योरे को देखकर दूसरे यूजर्स ने भी बताया कि उन्होंने अपनी यूरोप की छुट्टियों पर कितना खर्च किया था।

एक यूजर ने कमेंट किया, “हमने 10 दिनों के लिए 8 लाख रुपये खर्च किए।” एक और यूजर ने कहा, “यह तो काफी सही है।”

हालांकि, एक यूजर को यह रकम कम लगी। उसने कहा, “मुझे लगता है कि यह सस्ता है। हमारे मामले में, 2 लोगों की ट्रिप का खर्च रोजाना लगभग 800-900 यूरो आता है, जिसमें हवाई जहाज़ का किराया शामिल नहीं है।”

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

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नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

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विवेक कुमार

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भीषण बाढ़ और ग्लेशियर धंसने की घटना के बाद भारत ने चीन और नेपाल से लगते अपने हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि सीमावर्ती पर्वतीय इलाकों में मौजूद सभी ग्लेशियरों और हिमनदीय झीलों पर विशेष नजर रखी जाएगी। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी आपदा एक ग्लेशियर के ध्वस्त होने से पैदा हुई थी। इस घटना के बाद मलबे और पानी का विशाल प्रवाह नीचे की ओर आया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में 633 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

 

उत्तराखंड में बढ़ेगी निगरानी

भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि नेपाल के साथ साझा सीमा और समान भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है।

 

उन्होंने कहा, “चूंकि हमारी सीमा, नेपाल से लगती है और हमारी भौगोलिक स्थिति भी काफी हद तक समान है, इसलिए हमने अपने विभाग को क्षेत्र के सभी ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।”

 

मदन कौशिक ने कहा कि राज्य की टीमों को सतर्क रहने और संभावित खतरों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है ताकि किसी भी उभरती हुई स्थिति की समय रहते पहचान की जा सके।

 

उत्तराखंड भारत के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1,266 हिमनदीय झीलें मौजूद हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील है।

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के ग्लेशियर, जो लगभग दो अरब लोगों को पानी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख प्रणालियों का हिस्सा हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं। इसके चलते पर्वतीय समुदायों के सामने अप्रत्याशित और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्लेशियरों के पिघलने और स्थायी रूप से जमी बर्फ यानी पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से पर्वत ढलानों की स्थिरता कमजोर हो सकती है, जिससे भूस्खलन का जोखिम बढ़ जाता है। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

क्यों आई नेपाल में बाढ़

इसी बीच वैज्ञानिक नेपाल-तिब्बत आपदा के संभावित कारणों का अध्ययन कर रहे हैं। एएफपी से बातचीत में कई विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में फिर हो सकती हैं। न्यूजीलैंड के जीएनएस साइंस शोध संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक साइमन कॉक्स ने कहा कि जब पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा गिर जाता है तो उसके आसपास के हिस्से भी अस्थिर हो सकते हैं। उनके अनुसार इससे उसी क्षेत्र में दोबारा ध्वंस की आशंका बनी रहती है।

 

यूएसजीएस का कहना है कि नेपाल तिब्बित सीमा पर ग्लेशियर ध्वंस इतना शक्तिशाली था कि उससे निकली ऊर्जा 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर थी और इसके कारण कई भूस्खलन भी हुए।

 

फ्रांस के राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (सीएनआरएस) के ग्लेशियर विशेषज्ञ एतियां बेर्तिये ने कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि हिमालय में भूगर्भीय हालात इस तरह की घटनाओं को अधिक व्यापक बना देते हैं।

 

कार्डिफ विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जोखिम विशेषज्ञ ट्रिस्ट्रम हेल्स ने कहा कि पिछले एक दशक में दुनियाभर में ऐसी घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने हिमालय और स्विट्जरलैंड जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिया। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

हालांकि वैज्ञानिकों ने इस विशेष आपदा को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने में सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईएमओडी) ने कहा कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी ग्लेशियरों, बर्फ, पर्माफ्रॉस्ट और पर्वतीय ढलानों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि इस विशेष घटना में उसकी क्या भूमिका रही।

 

विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और तथाकथित “एट्रिब्यूशन स्टडी” की जरूरत होगी, जिसके बाद ही जलवायु परिवर्तन और इस आपदा के बीच प्रत्यक्ष संबंध के बारे में ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।

क्या लंकाई खिलाड़ी से आगे निकल पाएंगे नीरज? कल फिर फेंकेंग भाला

Neeraj Chopra

भाला फेंक के दिग्गज खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और श्रीलंका के उभरते सितारे रमेश पथिरागे शुक्रवार को लुसाने डायमंड लीग में फिर से आमने सामने होंगे, जिसमें भारतीय खिलाड़ी डायमंड लीग फाइनल में जगह बनाने की कोशिश करेगा।ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में पथिरागे ने स्वर्ण और चोपड़ा ने रजत पदक जीता था। इसके तीन सप्ताह बाद ये दोनों खिलाड़ी फिर से एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करेंगे।

23 वर्षीय पथिरागे इस सत्र में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं। उन्होंने दोहा और रोम डायमंड लीग में जीत हासिल करने के अलावा ग्लास्गो में 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक भी जीता है। जून में रोम में 92.62 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ उन्होंने 90 मीटर का प्रतिष्ठित आंकड़ा भी पार किया।

श्रीलंकाई खिलाड़ी ने इस सत्र में अब तक जिन नौ प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, उनमें से आठ में जीत हासिल की है। वह पहले ही डायमंड लीग फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। दूसरी तरफ चोपड़ा पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से की चोट से परेशान रहे हैं।

इसके कारण उनकी वापसी दोहा में आयोजित डायमंड लीग तक टल गई थी। ग्लास्गो में वह पूरी तरह से फिट नहीं थे, लेकिन फिर भी 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीतने में सफल रहे।राष्ट्रमंडल खेलों के बाद चोपड़ा स्विट्जरलैंड के बील चले गए थे, जहां वह अपने बचपन के कोच जयवीर चौधरी और फिजियो ईशान मारवाह के साथ अभ्यास कर रहे थे।

मौजूदा विश्व चैंपियन अरशद नदीम और जर्मनी के यूरोपीय चैंपियन जूलियन वेबर के हटने से लुसाने डायमंड लीग की चमक कुछ फीकी पड़ गई है।त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशोर्न वालकॉट और ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स की मौजूदगी के कारण अब भी मुकाबला कड़ा है।

अमेरिका के विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता कर्टिस थॉम्पसन और चेक गणराज्य के ओलंपिक रजत पदक विजेता जैकब वाडलेज भी इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले नौ खिलाड़ियों में शामिल हैं।

चोपड़ा के लिए सत्र के आखिर में होने वाले डायमंड लीग फाइनल की रैंकिंग में ऊपर पहुंचने के लिए लुसाने में होने वाली प्रतियोगिता महत्वपूर्ण है। वह फिलहाल छह अंकों के साथ सातवें स्थान पर हैं।रैंकिंग में शीर्ष छह खिलाड़ी चार और पांच सितंबर को ब्रुसेल्स में होने वाले डायमंड लीग फाइनल में भाग लेंगे।

पहला सेट हारने के बाद लक्ष्य सेन ने की जोरदार वापसी, विश्व चैंपियनशिप में जीत से आगाज

स्टार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने मंगलवार को पहला गेम गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रिया के कॉलिन्स वैलेंटाइन फिलिमोन को तीन गेम तक चले कड़े मुकाबले में हराकर बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के पुरुष एकल के दूसरे दौर में प्रवेश किया।

लक्ष्य ने 45 मिनट तक चले मुकाबले में फिलिमोन को 16-21, 21-8, 21-4 से हराया।दूसरे दौर में लक्ष्य का सामना अमेरिका के गैरेट टैन से होगा जिन्होंने स्विट्जरलैंड के टोबियास कुएंजी को 21-4, 21-15 से हराया।लक्ष्य ने धीमी शुरुआत की और उनके कम रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी ने पहले गेम में उन्हें लगातार दबाव में रखा। स्टार भारतीय खिलाड़ी लय हासिल करने के लिए जूझता दिखा। दोनों खिलाड़ी एक समय लगभग बराबरी पर चल रहे थे लेकिन लक्ष्य के लचर खेल और सहज गलतियों का फायदा उठाते हुए फिलिमोन ने लगातार छह अंक जुटाकर 17-12 की बढ़त बना ली।

 लक्ष्य ने कुछ अंक जुटाकर वापसी की कोशिश की लेकिन ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी ने धैर्य बरकरार रखते पहला गेम अपने नाम कर लिया।दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ी 7-7 की बराबरी पर थे जिसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने आक्रामक खेल के दम पर 11-8 की बढ़त हासिल कर ली।

इसके बाद लक्ष्य ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए लगातार 10 अंक जुटाए और प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं देते हुए दूसरा गेम जीतकर स्कोर 1-1 कर दिया। इस दौरान फिलिमोन की लय भी टूटती नजर आई।इसके बाद लक्ष्य को रोकना मुश्किल हो गया। उन्होंने अपना आक्रामक खेल जारी रखा और फिलिमोन से लगातार सहज गलतियां कराईं। भारतीय खिलाड़ी ने 15-1 की बढ़त के साथ मैच पर पूरी तरह पकड़ बना ली और आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

इससे पहले त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की गैरवरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने महिला युगल में लॉरेन लैम और एलिसन क्विन ली की अमेरिका की 16वीं वरीय जोड़ी को सीधे गेम में हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।त्रीसा और गायत्री ने दूसरे दौर में महज 38 मिनट में विरोधी जोड़ी को 21-15, 21-12 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई।

भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाते हुए आत्मविश्वास के साथ खेल शुरू किया। त्रीसा ने अपने दमदार स्मैश से अंक जुटाए जबकि गायत्री ने शटल को खेल में बनाए रखने के साथ सटीक ड्रॉप शॉट लगाए और दोनों ने पहला गेम आसानी से अपने नाम किया।दूसरे गेम में भी भारतीय जोड़ी ने इसी अंदाज में शुरुआत की और ब्रेक तक 11-4 की बढ़त बना ली।

भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल जारी रखा और उनकी प्रतिद्वंद्वियों की कुछ सहज गलतियों का भी उन्हें फायदा मिला।कविप्रिया सेल्वम और सिमरन सिंघी को दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें गैब्रिएला स्टोएवा और स्टेफनी स्टोएवा की बुल्गारिया की नौवीं वरीय जोड़ी ने 32 मिनट में सीधे गेम में 21-7, 21-14 से हराया।मिश्रित युगल में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। रोहन कपूर और रुत्विका शिवानी गड्डे तथा असित सूर्या और अमृता प्रमुथेश की जोड़ियां पहले दौर में ही बाहर हो गईं।

 रोहन और रुत्विका की जोड़ी को जोनाथन बिंग सान लाई और क्रिस्टल लाई की कनाडा की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में 22-20, 19-21, 17-21 से हार मिली।असित और अमृता को एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास की तुर्किये की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में 21-16, 29-30, 22-24 से हार का सामना करना पड़ा।

भारत की एक अन्य मिश्रित युगल जोड़ी ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो अभी प्रतियोगिता में बनी हुई है। इस 15वीं वरीय जोड़ी को पहले दौर में बाई मिली थी और वह दूसरे दौर में मकाऊ के इओक चोंग लियोंग और वेंग ची एनजी से भिड़ेगी।उभरती हुई भारतीय महिला एकल खिलाड़ी उन्नति हुड्डा ने भी दूसरे दौर में जगह बना ली। उन्होंने 40 मिनट चले मुकाबले में म्यांमार की थेट हतार थुजार को 22-20, 21-16 से हराया।उन्नति का अगले दौर में सामना कनाडा की 13वीं वरीय मिशेल ली से होगा।

19 साल की यह साइकलिस्ट बनी ‘Tour De France fame’ में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय

उन्नीस साल की हर्षिता जाखड़ ने रविवार दोपहर स्विट्जरलैंड के एग्ल में ‘Tour De France fame’  का हिस्सा बनने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने इस मुश्किल रेस के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत के दौरान अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया (दो राइडर्स), नामीबिया और युगांडा के आठ प्रतिभाशाली साइक्लिस्टों के ग्रुप का नेतृत्व किया।

यह रेस 1 अगस्त को लॉज़ेन में शुरू हुई थी और 9 अगस्त को नीस में खत्म होगी। UCI Union Cyclist International: World Cycling Federation  की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, UCI द्वारा चुनी गई इस टीम को शायद अब तक की सबसे बड़ी दर्शक संख्या देखने को मिली, जब उन्होंने WCC रोड टीम के कुछ राइडर्स के साथ कोर्स के एक न्यूट्रलाइज़्ड सेक्शन (जहाँ रेस की गति नियंत्रित रहती है) पर 4.5 किलोमीटर तक साइकिल चलाई।

यूसीआई के अध्यक्ष डेविड लैपार्टिएंट स्टेज से पहले स्टार्ट पोडियम पर राइडर्स के साथ शामिल हुए और एक भारतीय को उनके बीच देखकर खुशी जताई। “हम अपने प्रतिष्ठित यूसीआई वर्ल्ड साइक्लिंग टैलेंट प्रोग्राम में भारत की बेहद प्रतिभाशाली हर्षिता जाखड़ को पाकर उत्साहित हैं। मुझे यकीन है कि उन्हें ‘Tour De France fame’ का हिस्सा बनकर अच्छा लगेगा और वह जल्द ही असल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वापस आएंगी।”

प्रोफेशनल पेलेटन (मुख्य राइडर्स का समूह) से आगे शुरू करने वाले इन राइडर्स को अलग-अलग नेशनल फेडरेशन्स से चुना जाता है, जिनके पास अपना कोई हाई-परफॉर्मेंस पाथवे नहीं है और जिन्हें यूरोपियन कोचिंग, ट्रेनिंग सुविधाओं और रेसिंग तक पहुंच नहीं मिलती है।

हर्षिता जाखड़ ने UCI से कहा, “मैं यहां आकर, ‘Tour De France’ को देखकर और उसका हिस्सा बनकर बहुत उत्साहित हूं। मैं यूसीआई की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे महिलाओं की रेस के दूसरे चरण की शुरुआत में अन्य प्रतिभाशाली साइक्लिस्टों के साथ साइकिल चलाने का यह मौका दिया।” राजस्थान की रहने वाली हर्षिता भारतीय साइक्लिंग सर्किट में धूम मचा रही हैं; उन्होंने जूनियर्स के लिए उपलब्ध लगभग सभी मेडल जीते हैं और सीनियर्स कैटेगरी में भी लगातार जीत हासिल कर रही हैं। उनका लक्ष्य 2026 के एशियाई खेलों में टॉप 10 में जगह बनाना और 2030 के खेलों में मेडल जीतना है।

‘Target Asian Games Group’ की एथलीट होने के नाते, वह पटियाला में साई नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में अपने पिता और कोच राकेश जाखड़ के साथ ट्रेनिंग करती हैं। राकेश जाखड़ खुद एक पूर्व साइक्लिस्ट हैं, जिन्होंने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था और वह एनआईएस पटियाला से क्वालिफाइड कोच हैं।

CWG 2026: ‘न फंड मिला, न विदेशी कोच…’ पाकिस्तान ने छोड़ा ओलंपिक मेडल विनर अरशद नदीम का साथ! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नदीम शीर्ष आठ खिलाड़ियों में भी जगह बनाने में सफल नहीं हुए और नौवें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं ओलंपिक विनर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके खेल और तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मुताबिक, अरशद नदीम के खराब प्रदर्शन की वजह सिर्फ उनका फॉर्म ही नहीं, बल्कि तैयारी के दौरान आई दिक्कतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खेल अधिकारियों ने उन्हें जरूरी सुविधाएं और पूरा सहयोग नहीं दिया, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हुई।

पाकिस्तान ने नहीं दी कोई मदद

रिपोर्टों के अनुसार, वह पूरी तरह फिट नहीं थे और उनकी तैयारियां भी प्रभावित रहीं। PTI की एक रिपोर्ट में, एथलीट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि, पिछले साल लंबे समय से अरशद नदीम के कोच रहे सलमान बट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे दूरी बना ली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद फेडरेशन ने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को अपनी तैयारियां खुद संभालने के लिए छोड़ दिया और उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई मांगों पर भी कोई जवाब नहीं दिया।

नहीं जारी किए फंड

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर रखने के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए। इसके चलते अरशद नदीम को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही प्रैक्टिस करना पड़ा। बताया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार उन्हें दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग के साथ काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बजाय उन्होंने लाहौर और ग्लासगो के अलग-अलग मौसम के बावजूद अपने पुराने कोच सलमान बट की देखरेख में ही तैयारियां पूरी कीं।

अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने भी माना कि वह कॉमनवेल्थ खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब भी नहीं थे और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रतियोगिता में उतरे। बताया गया कि खेलों से पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड में सिर्फ एक तैयारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।

दुनिया का सबसे सस्ता शहर बनी दिल्ली! डेट से लेकर इंटरनेट तक सब सस्ता, लेकिन सैलरी ने चौंकाया

दिल्ली में दुनिया का सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी मिल भी मिलता है और 3 BHK फ्लैट का मासिक किराया और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में प्रॉपर्टी की कीमत भी कम है। डेट और सस्ते इंटरनेट के बीच दिल्ली का एक कड़वा सच भी सामने आया है।  ड्यूश बैंक के हालिया ग्लोबल कॉस्ट ऑफ लिविंग सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की जिंदगी के खर्च के मामले में दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शामिल है। चाहे घर का किराया हो या किसी साथी के साथ बाहर घूमने-फिरने का खर्च, दिल्ली में खर्च दूसरे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, यहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई भी कई प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे कम बताई गई है।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

यह जानकारी ड्यूश बैंक की ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेस 2026’ रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट में दुनिया के 69 शहरों का आकलन उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत, वेतन, मकानों की लागत और जीवन की गुणवत्ता जैसे कई पैमानों पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सामान्य और किफायती डेट (बाहर घूमने और खाने का खर्च) के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे सस्ता शहर है। इसके लिए औसतन 103 डॉलर (करीब 9,920 रुपये) खर्च होते हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड का जिनेवा इस मामले में सबसे महंगा शहर है, जहां इसी तरह की आउटिंग पर 475 डॉलर (करीब 45,750 रुपये) खर्च करने पड़ते हैं।

इन चीजों के खर्च के आधार पर हुई तुलना, इंटरनेट भी सबसे सस्ता

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट में शहरों की किफायत का आकलन कई रोजमर्रा के खर्चों के आधार पर किया गया। इसमें वाइन की एक बोतल, एक जोड़ी जींस, गर्मियों की एक ड्रेस, दो कप कॉफी, मिड-रेंज रेस्तरां में दो लोगों का डिनर, दो मूवी टिकट, सार्वजनिक परिवहन के दो टिकट और 5 किलोमीटर की टैक्सी यात्रा का खर्च शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मासिक ब्रॉडबैंड इंटरनेट के मामले में भी दिल्ली सबसे सस्ता शहर रहा। यहां एक औसत इंटरनेट कनेक्शन की कीमत 7.3 डॉलर (करीब 703 रुपये) प्रति माह आंकी गई।

हालांकि, कम खर्च होने के बावजूद जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ लाइफ) के मामले में दिल्ली शीर्ष 50 शहरों में जगह नहीं बना सकी। इस रैंकिंग में लोगों की खरीदने की क्षमता, सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, घरों की किफायती कीमत, प्रदूषण, मौसम और रोजाना आने-जाने में लगने वाले समय जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।

दिल्ली में लोगों की कमाई भी काफी कम

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में घरों की कीमतें काफी कम हैं। शहर के बीचों-बीच एक वर्ग मीटर रिहायशी संपत्ति की औसत कीमत 2,465 डॉलर (करीब 2.37 लाख रुपये) है। इसी आधार पर 69 शहरों की सूची में दिल्ली 65वें स्थान पर रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली में संपत्तियों की कीमतों में 9.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, 2019 के बाद से घरों की कीमतों में 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई है।

कमाई के मामले में दिल्ली सबसे पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई के मामले में दिल्ली की स्थिति काफी कमजोर है। हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी (नेट सैलरी) के आधार पर दिल्ली 69 शहरों में 66वें स्थान पर रही। दिल्ली में औसत मासिक नेट सैलरी 538 डॉलर (करीब 51,800 रुपये) बताई गई है। यह न्यूयॉर्क में काम करने वाले लोगों की औसत कमाई का लगभग दसवां हिस्सा है। वहीं, स्विट्जरलैंड का ज़्यूरिख इस सूची में सबसे ऊपर रहा। वहां लोगों की औसत मासिक नेट सैलरी 8,363 डॉलर (करीब 8.05 लाख रुपये) दर्ज की गई।

पिछले 10 साल में डॉलर के हिसाब से घटी सैलरी

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में औसत मासिक सैलरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2012 में औसत सैलरी 633 डॉलर थी, जो 2016 में बढ़कर 653 डॉलर हो गई। इसके बाद 2019 में यह घटकर 556 डॉलर रह गई। 2025 में बढ़कर 607 डॉलर हुई, लेकिन 2026 में फिर गिरकर 538 डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली की औसत सैलरी में 17.7 फीसदी की कमी आई है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

यह अध्ययन ड्यूश बैंक रिसर्च इंस्टीट्यूट के जिम रीड और गैलिना पोज़्दन्याकोवा ने तैयार किया है। 13 जुलाई को प्रकाशित इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से नमबेओ (Numbeo) के जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें बाद में ड्यूश बैंक की रिसर्च टीम ने जांचकर और बेहतर बनाया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉफी पीने वालों के लिए दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में से एक है। यहां एक रेगुलर कैपुचीनो कॉफी की औसत कीमत 2.40 डॉलर (करीब 231 रुपये) है। वहीं, शहर के मुख्य इलाके में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया 685 डॉलर (करीब 65,970 रुपये) बताया गया है।

बीयर और सिगरेट का खर्च अब भी कम

ड्यूश बैंक की “ओएसिस इंडेक्स” (Oasis Index) रैंकिंग में दिल्ली 52वें स्थान पर रही। इस इंडेक्स में पांच बीयर और सिगरेट के दो पैकेट खरीदने में आने वाले कुल खर्च के आधार पर शहरों की तुलना की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इस पूरी खरीदारी पर औसतन 18.8 डॉलर (करीब 1,800 रुपये) खर्च होते हैं। यह न्यूयॉर्क में इसी तरह की खरीदारी पर होने वाले खर्च का लगभग 35 फीसदी है।

रैंकिंग की बात करें तो 2025 के मुकाबले दिल्ली सात स्थान ऊपर आई है। हालांकि, 2016 की रैंकिंग की तुलना में यह एक पायदान नीचे खिसक गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉलर के हिसाब से पिछले 10 वर्षों में इस बास्केट की कीमत 36 फीसदी बढ़ी है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अर्जेंटीना Vs इंग्लैंड, दो पुराने दुश्मनों का सेमीफाइनल में मुकाबला

फ्रांस बनाम स्पेन के मैच के नतीजे के बाद सबकी निगाहें इंग्लैंड बनाम अर्जेंटीना के मुकाबले पर जा टिकेंगी। अर्जेंटीना 1962 में ब्राज़ील के बाद से ट्रॉफ़ी बचाने वाली पहली टीम बनने की कोशिश कर रहा है। वहीं इंग्लैंड 1966 में ट्रॉफ़ी उठाने के बाद से खिताबी मुकाबले तक नहीं पहुँचा है।लेकिन दोनों चिर प्रतिद्वंदी एक बार फिर आमने सामने हैं जहां इतिहास ने इन दोनों के बीच बहुत सारे यादगार मुकाबले देखे हैं।

“Hand of God” गोल

अटलांटा में सेमीफ़ाइनल ने वर्ल्ड कप की सबसे लंबे समय तक चलने वाली राइवलरी में से एक को फिर से शुरू कर दिया है। अर्जेंटीना ने 1986 का मशहूर क्वार्टरफाइनल जीता था जिसमें डिएगो माराडोना ने “Hand of God” गोल और गोल ऑफ़ द सेंचुरी बनाया था। इसके बाद 1998 में राउंड ऑफ़ 16 में पेनल्टी पर इंग्लैंड को बाहर कर दिया गया, जब डेविड बेकहम को डिएगो शिमोन को किक आउट करने के लिए बाहर भेज दिया गया था। बेकहम, जिन्हें घर पर हार के लिए काफी दोषी ठहराया गया था, ने 2002 में जब दोनों टीमें अगली बार मिलीं तो पेनल्टी स्पॉट से एकमात्र गोल किया।

अर्जेंटीना का सफर

गत विजेता अर्जेंटीना ने कड़ी परीक्षा पार करके आखिरी चार में जगह बनाई है। लियोनेल स्कालोनी की टीम को Round of 32 में केप वर्डे को हराने के लिए अतिरिक्त समय की ज़रूरत पड़ी, फिर 11 मिनट बाकी रहते दो गोल से पीछे होने के बाद मिस्त्र को हराया। शनिवार को स्विट्जरलैंड पर 3-1 की अतिरिक्त समय जीत में भी ऐसा ही दिखा, जिसमें जूलियन अल्वारेज़ और लुटारो मार्टिनेज ने गोल किए, जब डैन एनडोये ने एलेक्सिस मैक एलिस्टर का पहला गोल कैंसिल कर दिया था।

लियोनेल मेसी इस टूर्नामेंट में स्विट्जरलैंड के खिलाफ पहली बार गोल करने में नाकाम रहे।लेकिन अर्जेंटीना की तरक्की ने उसके आस-पास की टीम के योगदान को भी दिखाया है। सात और खिलाड़ियों ने गोल किए हैं, जिससे साउथ अमेरिकन टीम 2019 कोपा अमेरिका के बाद किसी बड़े टूर्नामेंट में लगातार पांचवें सेमीफाइनल में पहुंची ह।

इंग्लैंड का सफर

इंग्लैंड को भी इसी तरह मुश्किलों से उबरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। थॉमस ट्यूशेल की टीम ने राउंड ऑफ़ 32 में एक गोल से पिछड़ने के बाद DR कांगो को हराया और फिर 10 खिलाड़ियों के साथ आधे घंटे से ज़्यादा समय तक खेलने के बावजूद को-होस्ट मेक्सिको को हरा दिया।

फिर थ्री लायंस ने एंड्रियास श्जेल्डरुप के ओपनर से उबरकर अपने क्वार्टर फ़ाइनल में एक्स्ट्रा टाइम के बाद नॉर्वे को 2-1 से हराया।जूड बेलिंगहैम ने नॉर्वे के ख़िलाफ़ दो गोल किए और टूर्नामेंट में छह गोल करके हैरी केन के साथ इंग्लैंड के लिए जॉइंट टॉप स्कोरर बन गए।

हनीमून हो या रोमांटिक ट्रिप, इन 5 हिल स्टेशनों पर कपल रहे अलर्ट भूलकर भी न करें ये गलती!

हर कपल चाहता है कि वह अपने पार्टनर के साथ किसी शांत और खूबसूरत पहाड़ी जगह पर यादगार पल बिताए। भारत में ऐसे कई हिल स्टेशन हैं, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रोमांटिक माहौल के लिए मशहूर हैं। लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जहां मौसम, रास्ते या सेफ्टी ट्रिप को रिस्की बना सकती हैं। इसलिए ट्रिप प्लान करने से पहले इन जगहों के बारे में पूरी जानकारी लेना बेहद जरूरी है:

लाचेन और लाचुंग, सिक्किम

Tourist Places in Ladakh - Oriole Holiday

लाचेन और लाचुंग सिक्किम के सबसे खूबसूरत पहाड़ी गांवों में गिने जाते हैं, जहां बर्फ से ढके पहाड़ और शांत वादियां कपल्स को खूब अट्रैक्ट करती हैं। हालांकि, मानसून के दौरान यहां लैंडस्लाइड की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे सड़कें कई-कई घंटों या दिनों तक बंद हो सकती हैं। ज्यादा ऊंचाई के कारण कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत और हाई एल्टीट्यूड की परेशानी भी हो सकती है। अगर आप यहां घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो बारिश के मौसम से बचें और मौसम की जानकारी लेकर ही ट्रैवल करें। इस ट्रिप पर दो लोगों के लिए 4 दिन की ट्रिप, होटल, खाने-पीने और परमिट समेत लगभग ₹32,000 से ₹62,000 तक का खर्च आ सकता है।

खजियार, हिमाचल प्रदेश

खज्जियार पर्यटन: खज्जियार में घूमने के लिए सर्वोत्तम स्थान और करने योग्य गतिविधियाँ | हिमाचल प्रदेश

खजियार अपनी हरी-भरी घास, देवदार के जंगलों और शांत वातावरण के कारण ‘भारत का मिनी स्विट्जरलैंड’ कहलाता है। लेकिन बारिश और घने कोहरे के दौरान यहां की घुमावदार सड़कें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे दुर्घटना का रिस्क बढ़ जाता है। शाम के बाद कई इलाके सुनसान हो जाते हैं, इसलिए कपल्स को रात में अकेले घूमने से बचना चाहिए। अगर दो लोग यहां 3 दिन की ट्रिप करते हैं, तो होटल, यात्रा और भोजन मिलाकर लगभग ₹20,000 से ₹37,000 तक का बजट रखना पड़ सकता है।

कलिम्पोंग, पश्चिम बंगाल

कालिम्पोंग यात्रा गाइड, कैसे पहुंचें, घूमने की जगहें - किओमोई

कलिम्पोंग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, बौद्ध मठों और शानदार पहाड़ी नजारों के लिए जाना जाता है। हालांकि, मानसून के समय यहां लैंडस्लाइड और रोड बंद होने की घटनाएं आम हो जाती हैं। कई रास्ते संकरे और घुमावदार हैं, जहां कोहरे के कारण ड्राइविंग करना रिस्की हो सकता है। दो लोगों के लिए 3 दिन की यात्रा का कुल खर्च होटल, भोजन और ट्रांसपोर्ट के साथ लगभग ₹20,000 से ₹37,000 के बीच हो सकता है। सेफ जर्नी के लिए मौसम साफ होने पर ही यहां जाना बेहतर माना जाता है।

लेह-लद्दाख, जम्मू और कश्मीर

क्‍या है खेती से जुड़ा Project BOLD जिससे बदल जाएगी लद्दाख की शक्‍ल और सूरत, किसानों को होगा सीधा फायदा | What is Project BOLD which reached Leh Ladakh to protect Land

लेह-लद्दाख भारत के सबसे रोमांचक और खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक है, लेकिन यहां की ऊंचाई कई ट्रैवलर के लिए चुनौती बन सकती है। कम ऑक्सीजन के कारण सिरदर्द, चक्कर और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यहां पहुंचने के बाद पहले 24 से 48 घंटे आराम करने की सलाह दी जाती है। दो लोगों के लिए 5 से 6 दिन की इस ट्रिप में फ्लाइट, होटल, स्थानीय टैक्सी और खाने-पीने लगभग ₹50,000 से ₹90,000 तक का खर्च आ सकता है। अगर किसी को पहले से दिल या सांस से जुड़ी बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही यात्रा करें।

रोहतांग दर्रा, हिमाचल प्रदेश

रोहतांग दर्रा: कैसे पहुंचें, सबसे अच्छा समय और 2026 के लिए सुझाव

रोहतांग दर्रा अपनी बर्फीली वादियों और शानदार नजारों के लिए पॉपुलर है, लेकिन यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है। बर्फबारी, फिसलन और घने कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार खराब मौसम के चलते प्रशासन सुरक्षा कारणों से रास्ता भी बंद कर देता है। ट्रैवल से पहले परमिट बनवाना, मौसम की जानकारी लेना और गर्म कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। दो लोगों के लिए 3 से 4 दिन की ट्रिप में होटल, ट्रांसपोर्ट, भोजन और परमिट के साथ लगभग ₹23,000 से ₹42,000 तक का खर्च आ सकता है।