ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

Rajesh Exports ED Raid: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी Rajesh Exports Ltd (REL) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है।

यह कार्रवाई 23 जून से शुरू हुई थी। जांच के दौरान ED को कई ऐसी बातें मिली हैं, जिन पर अब विस्तार से जांच की जा रही है।

1. विदेशी लेन-देन के दस्तावेज नहीं मिले

ED का कहना है कि कंपनी अपने कई विदेशी लेन-देन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पाई। इनमें आयात-निर्यात, विदेशों में किए गए निवेश और विदेशी कंपनियों से मिलने या उन्हें दिए जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड शामिल है।

एजेंसी के मुताबिक, दस्तावेज नहीं होने की वजह से यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि ये लेन-देन वास्तव में हुए भी थे या नहीं। ED ने यह भी कहा कि कंपनी अफ्रीका की खदानों में किए गए कथित ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं दिखा पाई।

2. ₹3,000 करोड़ के लेन-देन पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स UAE और कुछ दूसरे देशों की कंपनियों के साथ अपने देनदार और लेनदार खातों को आपस में एडजस्ट कर रही थी। ED के मुताबिक, ऐसे करीब ₹3,000 करोड़ के लेन-देन मिले हैं।

एजेंसी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पैसा आखिर कहां से आया और कहां गया।

3. फैक्ट्री स्टॉक में 40% का अंतर

छापेमारी के दौरान ED ने फैक्ट्री में मौजूद माल का भी मिलान किया। जांच में पाया गया कि कंपनी के रिकॉर्ड में जितना स्टॉक दिखाया गया था, वास्तविक स्टॉक उससे करीब 40% कम या ज्यादा था।

यानी कागजों और जमीन पर मौजूद माल के बीच बड़ा अंतर मिला है। अब एजेंसी इसकी वजह तलाश रही है।

4. अधिकारियों की सैलरी बेहद कम

ED ने कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के CFO को साल 2020 के बाद से कोई वेतन नहीं मिला।

वहीं कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को सिर्फ करीब ₹17,000 महीने की सैलरी दी जा रही थी। ED के मुताबिक, यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि कॉर्पोरेट जगत में ऊंचे पदों पर इतनी कम सैलरी देने का चलन नहीं है। खासकर, अगर कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹7.7 लाख करोड़ बताया गया होय़

5. शेयरों में हेरफेर का भी शक

ED ने कुछ संदिग्ध ब्लॉक डील्स और शेयरों में संभावित हेरफेर की ओर भी इशारा किया है।

एजेंसी के मुताबिक, इन सौदों में शामिल कुछ लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की लीक रिपोर्ट्स में भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी को शक है कि NRI बेनामी खातों का इस्तेमाल कर शेयरों में हेरफेर की गई और ₹600 करोड़ से ज्यादा रकम भारत से बाहर भेजी गई।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ीं मुश्किलें

Rajesh Exports की मुश्किलें तब बढ़ गईं, जब हाल ही में SEBI ने कंपनी पर बड़ा आरोप लगाया। रेगुलेटर का दावा है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपने रेवेन्यू को कथित तौर पर ₹15.15 लाख करोड़ तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

SEBI के मुताबिक, कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़ी आय को जिस तरह पेश किया, वह उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। खासकर स्विट्जरलैंड की Valcambi SA का रेवेन्यू। रेगुलेटर को शक है कि इससे निवेशकों के सामने कंपनी के कारोबार का आकार असलियत से कहीं बड़ा दिखाया गया।

कंपनी ने आरोपों को किया है खारिज

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अगर कोई आंकड़ों में हेरफेर करना चाहे, तो वह मुनाफा बढ़ाकर दिखाएगा। सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने से कोई खास फायदा नहीं होता।

इस बीच जांच की खबरों का असर शेयर पर भी दिखा। बुधवार को Rajesh Exports का शेयर करीब 5% गिरकर ₹102.85 पर बंद हुआ। इससे पहले स्टॉक कुछ ही कारोबारी सत्र में करीब 30% तक बढ़ गया था। फिलहाल ED और SEBI दोनों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

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ट्रम्प बोले- ईरान परमाणु ठिकानों की जांच कराने को तैयार:इससे लंबे समय तक भरोसा बनेगा; UN के अधिकारी फिर तैनात होंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। ट्रम्प के मुताबिक, इससे दुनिया को लंबे समय तक भरोसा रहेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA के अधिकारी फिर से ईरान में तैनात किए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह 2015 के परमाणु समझौते जैसी व्यवस्था की वापसी होगी, जिससे ट्रम्प ने 2018 में अमेरिका को बाहर कर लिया था। इसके बाद ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी सीमित कर दी थी। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी कुछ पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है। वहीं, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार से जुड़े सबसे कठिन मुद्दों पर बातचीत अभी बाकी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. PAK पीएम बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता सफल: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत सकारात्मक रही। दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने, हाई लेवल कमेटी बनाने और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए। 2. अमेरिका ने ईरान को 60 दिन तेल बेचने की छूट दी: ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर 21 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर ईरानी सहमति के बाद लिया गया। 3. ईरान ने कहा- बातचीत के बीच भी सेना पूरी तरह अलर्ट: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है। 4. होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी: करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। यह टैंकर किस देश के हैं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई हैं। हालांकि, जहाजों की संख्या अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है। 5. स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद गालिबाफ और अराघची ओमान रवाना: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ओमान पहुंचे हैं। वहां होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा होगी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट में धमाका:13 की मौत, इनमें कई भारतीय भी शामिल; 60 से ज्यादा घायल

कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लाफान के LNG कॉम्प्लेक्स में रविवार शाम विस्फोट हुआ। इसमें 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 66 लोग घायल हुए हैं। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। मरने वालों में भारत और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं। भारतीय नागरिकों की सही संख्या अभी सामने नहीं आई है। अल-काबी ने बताया, विस्फोट रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ। हादसे में घायल हुए लोगों में भारत, कतर, तंजानिया, पाकिस्तान, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह एक हादसा था। इसमें किसी साजिश या जानबूझकर की गई हरकत के संकेत नहीं मिले हैं। उनके मुताबिक, जरूरी मरम्मत के कारण दिसंबर 2025 से प्लांट का उत्पादन पूरी तरह बंद था और इसे सिर्फ दो दिन पहले ही दोबारा शुरू किया गया था। हादसे के कारणों की शुरू कर दी गई है। हादसे से जुड़ी दो तस्वीरें… राजधानी दोहा तक धमाके की आवाज सुनाई दी ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, रविवार शाम ऑपरेशन शुरू करने की प्रक्रिया के दौरान बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में विस्फोट और आग लगी थी। आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और अब आग पर काबू पा लिया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज राजधानी दोहा तक सुनाई दी। 70 किलोमीटर दूर रहने वाले लोग भी घबरा गए। हालांकि, ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा कि हादसे से पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है और कतर से गैस की सप्लाई भी जारी रहेगी। जहां हादसा हुआ, वह बरजान गैस प्लांट कतर के सबसे बड़े गैस हब रास लाफान का हिस्सा है। इसी इलाके से दुनिया के कई देशों को गैस भेजी जाती है। यहां से घरेलू बिजली संयंत्रों और उद्योगों को भी गैस सप्लाई होती है। भारतीय दूतावस बोला- कतर के अधिकारियों से संपर्क में दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह कतर के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों के परिवारों को हरसंभव मदद दी जाएगी। दूतावास ने +974-55647502 और +975-55384683 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इसके अलावा cons.doha@mea.gov.in ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोग लापता हैं। ईरान जंग में रास लाफान की 2 यूनिट को नुकसान पहुंचा रॉयटर्स के मुताबिक, मार्च में ईरान के मिसाइल हमले में रास लाफान की दो गैस यूनिट क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इससे कतर की गैस निर्यात क्षमता का करीब 17% हिस्सा प्रभावित हुआ था। कतरएनर्जी के CEO के मुताबिक, इन यूनिटों की पूरी मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं। ईरान युद्ध के दौरान कंपनी को करीब 10 हजार कर्मचारियों को गैस संयंत्रों से हटाना पड़ा था। हालांकि मार्च में हुए मिसाइल हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, LNG प्लांट को दोबारा शुरू करना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है और इसे चरणबद्ध तरीके से किया जाता है, ताकि तापमान में अचानक बदलाव से उपकरणों को नुकसान न पहुंचे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर प्रतिबंध हटाया:अगले 60 दिन भारत भी खरीद सकता है, ईरान में फिर तैनात होंगे UN के न्यूक्लियर इंस्पेक्टर अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगी पाबंदियों में 60 दिन की ढील दे दी है। यह फैसला स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रिकॉर्ड तेजी से 100वां गोल, अब तक 2.5 लाख लोग स्टेडियम पहुंचे FIFA WC देखने

FIFA World Cup

FIFA World Cup जब कोडी गैकपो ने नीदरलैंड्स की स्वीडन पर 5-1 की जीत के दौरान टूर्नामेंट का 100वां गोल किया।गैकपो का गोल – जो मैच में नीदरलैंड्स का तीसरा गोल था – टूर्नामेंट के 33वें मैच में 100 गोल का आंकड़ा पूरा करने वाला बना; इस तरह प्रति मैच औसतन 3.03 गोल हुए।

1954 में स्विट्जरलैंड में हुए टूर्नामेंट के बाद से यह सबसे तेज़ गति थी जब वर्ल्ड कप ने 100 गोल का आंकड़ा छुआ; उस समय सिर्फ़ 20 मैचों में ही यह मुकाम हासिल कर लिया गया था। इसकी तुलना में, ब्राज़ील 2014 और स्पेन 1982 में 100 गोल तक पहुँचने में 36 मैच लगे थे, जबकि अर्जेंटीना 1978 और संयुक्त राज्य अमेरिका 1994 में 38 मैचों की ज़रूरत पड़ी थी।

ज़्यादा गोल होने की दर के कई कारण बताए गए हैं। एक कारण आधिकारिक मैच बॉल ‘ट्रायोंडा’ है; कुछ जानकारों का मानना है कि इसने गोलकीपरों के लिए दूर से किए गए शॉट्स का अंदाज़ा लगाना मुश्किल बना दिया है, जिससे पेनल्टी एरिया के बाहर से 10 गोल हुए हैं।

दूसरों ने गर्मी के असर की ओर इशारा किया है – थकान की वजह से डिफेंस में चूक हो सकती है – जबकि अनिवार्य तीन मिनट के ‘कूलिंग ब्रेक’ ने कोचों को मैच के दौरान रणनीतिक बदलाव करने के अतिरिक्त मौके दिए हैं।

टूर्नामेंट में टीमों की संख्या बढ़ाकर 48 किए जाने को भी एक कारण बताया गया है। जर्मनी ने कुराकाओ पर 7-1 की जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की, कनाडा ने कतर को 6-0 से हराया, और ट्यूनीशिया को स्वीडन (5-1) और जापान (4-0) से करारी हार का सामना करना पड़ा।हालांकि, अन्य नतीजे बताते हैं कि बढ़े हुए फ़ॉर्मेट के कारण सिर्फ़ एकतरफ़ा मुक़ाबले ही नहीं हुए हैं।

शुरुआती 36 मैचों में कुल 2,307,947 दर्शक शामिल हुए

फीफा के जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 वर्ल्ड कप में दर्शकों की संख्या के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। फुटबॉल की वैश्विक गवर्निंग बॉडी ने बताया कि अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में खेले गए टूर्नामेंट के शुरुआती 36 मैचों में कुल 2,307,947 दर्शक शामिल हुए।

इसका मतलब है कि हर मैच में औसतन 64,100 दर्शक आए। टीवी प्रसारण के दौरान कुछ सीटें खाली दिख रही थीं, इसके बावजूद स्टेडियम में कुल क्षमता का 99.54 प्रतिशत हिस्सा भरा हुआ था। टिकट की महंगी कीमतों और कुछ भाग लेने वाले देशों के समर्थकों को यात्रा में आ रही दिक्कतों की चिंताओं के बावजूद दर्शकों की इतनी बड़ी संख्या देखने को मिली। फुटबॉल के प्रति दीवानगी वाले देश मैक्सिको में तो बड़ी संख्या में दर्शकों के आने की उम्मीद थी ही, लेकिन अमेरिका और कनाडा में भी ये आंकड़े उल्लेखनीय हैं, जहां फुटबॉल को कई अन्य स्थापित टीम खेलों से लोकप्रियता के लिए मुकाबला करना पड़ता है।

Gold Silver price: नई खरीदारी से चमकी चांदी, MCX पर सोने की कीमतों में गिरावट बरकरार

Gold Silver price: सोमवार (22 जून) को घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड की कीमतों पर दबाव बना रहा, जबकि सिल्वर में उतार-चढ़ाव रहा। क्योंकि इन्वेस्टर्स US मॉनेटरी पॉलिसी के संकेतों, डॉलर की मज़बूती और वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर नज़र रखे हुए थे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, गोल्ड अगस्त फ्यूचर्स 1.41% की गिरावट के साथ ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब ट्रेड हुआ, जबकि सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स 0.92% बढ़कर ₹2.35 लाख प्रति kg हो गया, जो मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नई खरीदारी के बीच था।

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने कहा कि MCX गोल्ड 21-दिन और 55-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा और एक अहम राइजिंग ट्रेंडलाइन सपोर्ट से भी नीचे फिसल गया, जो शॉर्ट-टर्म ट्रेंड में कमज़ोरी का संकेत है।

उन्होंने कहा, “हाल ही में ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम के ज़रूरी सपोर्ट लेवल से नीचे गिरने से टेक्निकल स्ट्रक्चर और कमज़ोर हो गया है। तुरंत सपोर्ट ₹1,46 लाख प्रति 10 ग्राम के पास है, और इस लेवल से नीचे जाने पर गिरावट ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम तक बढ़ सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि ज़्यादा ट्रेजरी यील्ड और ज़्यादा इंटरेस्ट रेट की उम्मीदों ने सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स की अपील कम कर दी है।

इस बीच, ईरान के स्विट्जरलैंड में यूनाइटेड स्टेट्स के साथ शांति वार्ता में प्रोग्रेस की रिपोर्ट के बाद बुलियन की कीमतों में हल्की रिकवरी की कोशिश हुई। हालांकि, U.S. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनियों और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जारी तनाव ने मार्केट सेंटिमेंट को सतर्क रखा।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च की कमोडिटी एनालिस्ट कावेरी मोरे ने कहा कि सोमवार (22 जून) के ट्रेड के दौरान उतार-चढ़ाव के बावजूद MCX सिल्वर पर मंदी का दबाव बना रहा। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, इंडस्ट्री के लोगों ने कहा कि कीमती धातुओं में कस्टमर्स की दिलचस्पी बनी हुई है, खासकर ज्वेलरी सेगमेंट में।

डिशीएस डिज़ाइनर ज्वेलरी की फाउंडर, दिशी सोमानी ने कहा कि भारत में सोना और चांदी, इन्वेस्टमेंट एसेट और कल्चरल खरीदारी, दोनों के तौर पर अहमियत रखते हैं। सोमानी ने कहा, “कस्टमर्स अपनी खरीदने की ताकत को लेकर जागरूक हो रहे हैं और खरीदारी करने से पहले कीमतों के ट्रेंड पर करीब से नज़र रख रहे हैं। ज्वेलरी को अब कई लोग सेंटिमेंट और इन्वेस्टमेंट का मिक्स मानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि चांदी अपनी सस्ती कीमत की वजह से युवा खरीदारों के बीच पॉपुलर होती रही, जबकि बुलियन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद अच्छी क्वालिटी की ज्वेलरी की डिमांड स्थिर रही।

Silver Price Today: MCX पर चांदी ₹4,500 उछलकर 2.37 लाख के पार पहुंची, डॉलर इंडेक्स में दबाव से मिला सपोर्ट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, जानें क्या है गिरावट की वजह

INR vs USD: सोमवार, 22 जून को भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 94.36 पर खुला, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में कमी और US-ईरान शांति बातचीत में प्रगति के संकेतों से घरेलू करेंसी के प्रति सेंटिमेंट को सपोर्ट मिलता रहा।

पिछले हफ्ते रुपया 0.8% बढ़कर 94.32 पर बंद हुआ था, जो लगभग तीन महीनों में इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त थी। करेंसी ने कई महीनों के हाई 94.18 को भी छुआ और अपनी जीत का सिलसिला लगातार छह सेशन तक जारी रखा, जो पिछले महीने 97 के करीब अपने रिकॉर्ड लो से तेजी से उबरा।

हाल की रिकवरी ने मार्केट सेंटिमेंट को बेहतर बनाने में मदद की है, जिससे यह चिंता कम हुई है कि रुपया लंबे समय तक डेप्रिसिएशन ट्रेंड में फंसा हुआ है।

करेंसी ट्रेडर्स ने कहा कि तेल की कीमतों में नरमी और वाशिंगटन और तेहरान के बीच डिप्लोमैटिक बातचीत में लगातार प्रगति से और बढ़त हो सकती है।

रुपये को सपोर्ट करते हुए, अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.7% गिरकर $79.24 प्रति बैरल पर आ गया, जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि स्विट्जरलैंड में यूनाइटेड स्टेट्स के साथ बातचीत से अच्छी प्रगति हुई है। यह बातचीत ईरानी अधिकारियों और US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के बीच मीटिंग के बाद हुई।

ईरान के कमेंट्स से इन्वेस्टर्स की यह चिंता शांत हुई कि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के नए मिलिट्री एक्शन की चेतावनी देने और तेहरान द्वारा एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देने के बाद, नाजुक शांति प्रक्रिया बिगड़ सकती है।

हाल के हफ्तों में तेल मार्केट बहुत ज़्यादा वोलाटाइल रहे हैं, ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए $82 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया था, इस डर से कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में फिर से रुकावट आएगी। हालांकि, जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से कीमतों को कम करने में मदद मिली है, जिससे भारत जैसी बड़ी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी को राहत मिली है।

रुपया सपोर्टिव फ्लो और ग्लोबल रिस्क के बीच फंसा

करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट के मुताबिक, रुपया फिलहाल दो अलग-अलग ताकतों से प्रभावित हो रहा है। एक तरफ, लगातार कर्ज का आना और फॉरेन करेंसी डिपॉजिट घरेलू करेंसी को सपोर्ट कर रहे हैं। दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में बनी अनिश्चितता और एक मजबूत US डॉलर लगातार मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि रुपया जल्द ही एक रेंज में रहेगा, और मार्केट की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सपोर्टिव कैपिटल फ्लो बाहरी जियोपॉलिटिकल और डॉलर से जुड़े दबावों से ज़्यादा हो सकता है या नहीं।

एनालिस्ट्स ने कहा, “रुपया असल में बेहतर होते घरेलू फंडामेंटल्स और बाहरी अनिश्चितताओं के बीच खींचतान में फंसा हुआ है। जब तक किसी एक को निर्णायक फायदा नहीं मिल जाता, करेंसी की चाल नपी-तुली रहने की संभावना है।”

CR फॉरेक्स एडवाइजर्स के MD अमित पाबारी के अनुसार, टेक्निकली, 94.00–94.20 ज़ोन एक मुख्य सपोर्ट एरिया के तौर पर काम करता रहेगा, जबकि 94.80–95.00 तुरंत रेजिस्टेंस बैंड बना रहेगा। डेट इनफ्लो में सुधार के संकेत और तेल की कीमतें काफी हद तक कंट्रोल में रहने के साथ, रुपये की बढ़त के पक्ष में रुझान बना हुआ है, जिसमें USD/INR के 94.00–93.80 ज़ोन की ओर बढ़ने की संभावना है।

GIFT Nifty सेंसेक्स-निफ्टी के लिए अच्छी शुरुआत के दे रहा संकेत, इन खास इवेंट्स पर बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: US-ईरान शांति बातचीत के बीच ट्रंप की नई धमकी से डरा क्रूड बाजार, कीमतों में आया 2% का उछाल, ब्रेंट $82 के निकला पार

Crude Oil Price: सोमवार, 22 जून को तेल की कीमतों में तेज़ी आई, जब प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर हिज़्बुल्लाह इज़राइल पर हमले जारी रखता है तो ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन हो सकता है। इससे यह चिंता बढ़ गई कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही शांति बातचीत में रुकावट आ सकती है।

सोमवार को मार्केट खुलने पर ब्रेंट क्रूड 2.2% तक बढ़कर $82.30 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $78 के निशान से ऊपर चढ़ गया।

आज कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

रविवार को बातचीत की शुरुआत अनिश्चित थी, जब ईरानी मीडिया ने बताया कि ट्रंप की चेतावनी के बाद तेहरान ने स्विट्जरलैंड में बातचीत रोक दी है। हालांकि, बातचीत से जुड़े सूत्रों ने कहा कि बातचीत जारी है। ईरान ने इज़राइल पर लेबनान में सीज़फ़ायर तोड़ने का भी आरोप लगाया।

स्विस रिसॉर्ट बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल बातचीत 60 दिन के बातचीत के समय की शुरुआत है, जो पिछले हफ़्ते ट्रंप के तनाव कम करने के मकसद से एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर साइन करने के बाद शुरू हुई थी। हालांकि ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, लेकिन वीकेंड में इस ज़रूरी पानी के रास्ते से तेल की सप्लाई ज़्यादातर बिना रुके जारी रही।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत सोमवार सुबह तक चली और होर्मुज स्ट्रेट से नेविगेशन को सुरक्षित रखने और दक्षिणी लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच सीज़फ़ायर का पालन पक्का करने जैसे मुद्दों पर फोकस रही।

फॉक्स न्यूज़ ने ट्रंप के हवाले से कहा कि उन्होंने ईरानी नेताओं को चेतावनी दी थी कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे, और कहा कि वे ईरान वापस नहीं जाएंगे।

इस बीच, हाल के हफ़्तों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, हालांकि वे अभी भी लड़ाई से पहले के लेवल से ऊपर हैं। यह गिरावट रिफाइनरियों द्वारा कुछ समय के लिए विकल्प ढूंढने और इस उम्मीद को बढ़ाने की वजह से हुई है कि लड़ाई का आखिरकार हल ग्लोबल एनर्जी मार्केट के तेज़ी से नॉर्मल होने का रास्ता बना सकता है।

नई अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को थोड़ा बढ़ा दिया है, यह एक ऐसा डेवलपमेंट है जो जल्द ही सेंटीमेंट पर असर डाल सकता है। इन्वेस्टर्स बातचीत से आगे की हेडलाइंस पर फोकस कर सकते हैं, क्योंकि प्रोग्रेस या बढ़ोतरी के किसी भी संकेत का एनर्जी की कीमतों और बड़े मार्केट सेंटीमेंट पर बड़ा असर पड़ सकता है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और अभी $77–78 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रही हैं, जबकि हाल ही में यह लगभग $73 प्रति बैरल तक गिर गई थी।”

 

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ट्रम्प बोले-ईरान को ₹28 लाख करोड़ देने की बात फर्जी:यह झूठ विपक्ष ने फैलाया; नेतन्याहू पर कहा- मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए देने की बात को फर्जी बताया है। उन्होंने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स की तरफ से फैलाई गई झूठी खबर है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि समझौता होने पर अमेरिका, ईरान को आर्थिक मदद के तौर पर करीब 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देगा। वहीं, ट्रम्प ने फ्रांस में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से मुलाकात में भी बताया कि अमेरिका अभी ईरान में कोई पैसा नहीं लगा रहा है। उन्होंने कहा, हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमें भविष्य में कभी भी वहां जाकर निवेश करने का अधिकार है। साथ ही, ट्रम्प ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान मुद्दे पर ज्यादा जिम्मेदारी दिखाने की सलाह दी है। ट्रम्प ने कहा, “मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता। किसी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल के लिए उतना नहीं किया, जितना मैंने किया है”। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- ईरान शर्तें पूरी करे तभी राहत मिलेगी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। अमेरिका ने फिलहाल किसी भी तत्काल आर्थिक राहत से इनकार किया है। 2. इजराइल ने डील से किनारा किया: इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा नहीं है। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी साफ किया कि दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटेगी। 3. मैक्रों ने यूरेनियम पर शर्त रखी: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय कर IAEA की निगरानी में रखा जाना चाहिए, ताकि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए न हो सके। 4. ईरान ने समझौते को अपनी जीत बताया: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ‘जीत का दस्तावेज’ बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल की नाराजगी ही साबित करती है कि बातचीत में ईरान मजबूत स्थिति में रहा। 5. दुनियाभर के देशों ने समझौते का स्वागत किया: UAE, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका-ईरान समझौते को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…