1934 के बाद स्विटजरलैंड ने जीता नॉकआउट मैच, अलजीरिया पर दागे दो गोल

 

ब्रिल एम्बोलो और डैन एनदोये के गोल की मदद से स्विट्जरलैंड ने अल्जीरिया पर 2-0 की जीत के साथ विश्व कप के अंतिम 16 में जगह बना ली।स्विट्जरलैंड अगला मुकाबला कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा। राउंड ऑफ 16 का मैच अगले मंगलवार को वैंकूवर में खेला जाएगा।

BC Place Vancouverमें खेले गए इस मैच के दौरान पहले हाफ में ही स्विटजरलैंड ने बढ़त बना ली थी। दसवें मिनट में ही ब्रिल एम्बोलो ने पहला गोल दाग दिया और रक्षा पंक्ति ने अल्जीरिया को गोल करने का मौका नहीं दिया। पहले हाफ में अलजीरिया के पास बराबरी का एक शानदार मौका था लेकिन डिफेंडर्स ने गोलकीपर का काम आसान कर दिया।

दूसरे हाफ की शुरुआत हुई ही थी लेकिन अलजीरिया बराबरी के बजाए एक और गोल खा गई। डैन एनदोये ने 46वें मिनट में गेंद को अलजीरियन डिफेंडर्स के बीच में से निकालकर गोलकीपर को भी छका दिया। यह स्कोरलाइन अंत तक रही।

स्विट्जरलैंड ने 1938 में फ्रांस में खेले गए विश्व कप के बाद नॉकआउट राउंड का कोई मैच नहीं जीता था, लेकिन 1954 में उसकी टीम ने प्लेऑफ मैच जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।

स्विट्जरलैंड की टीम पिछले तीन विश्व कप में अंतिम 16 में पहुंची थी लेकिन इससे आगे बढ़ने में नाकाम रही।अल्जीरिया 2014 के बाद पहली बार विश्व कप में भाग ले रहा था। वह 2014 में नॉकआउट राउंड तक पहुंचा था, लेकिन तब जर्मनी से हार गया था।

कनाडा ने एक गोल कर किया द.अफ्रीका को बाहर, पहुंची क्वार्टरफाइनल में

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स्टीफन यूस्टाक्वियो के दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम के दूसरे मिनट में किये गये गोल की बदौलत कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराकर विश्व कप में अपनी पहली नॉकआउट मैच जीत हासिल करते हुए राउंड ऑफ 16 में जगह बना ली है। सोफी स्टेडियम में चल रहा तनावपूर्ण मैच अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिख रहा था, तभी यूस्टाक्वियो, जो कुछ मील दूर स्थित एलएएफसी के लिए पेशेवर रूप से खेलते हैं, ने पेनल्टी क्षेत्र के बाहर से एक शानदार वॉली शॉट लगाकर रॉनवेन विलियम्स के नेट के निचले कोने में गेंद पहुंचा दी।

सह-मेजबान कनाडा ने अंतिम मिनटों में मजबूत रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाए रखी और शनिवार को ह्यूस्टन में नीदरलैंड या मोरक्को का सामना करने के लिए आगे बढ़ गया।मैच खत्म होने के बाद कनाडा के मैनेजर जेसी मार्श ने अपने खिलाड़ियों में जोश भरते हुए कहा, “आप सब कनाडा के हीरो हैं। इस देश के भावी बच्चों के लिए, जो यह खेल खेलते हैं, आप सब कनाडा के हीरो हैं। आप लोगों की वजह से इस खेल का उज्ज्वल भविष्य है। आपको खुद पर और इस खेल पर गर्व होना चाहिए।”

कनाडा ने अपने तीसरे विश्व कप में भाग लेते हुए अपने पहले तीन मैच टोरंटो और वैंकूवर में अपने घरेलू मैदान पर खेले, लेकिन पिछले बुधवार को स्विट्जरलैंड से 2-1 से हारने के बाद उन्हें विश्व कप के मेजबान के रूप में घर से बाहर खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

दक्षिण अफ्रीका के कोच ह्यूगो ब्रूस ने कहा, “हम मैच इसलिए हार गए क्योंकि हमारी टीम में ताकत और गति की कमी थी, जब मैं इसकी तुलना अपने प्रतिद्वंदी से करता हूं। यह एक कठिन मैच था, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो हम अपने प्रदर्शन से काफी हद तक संतुष्ट हो सकते हैं। हम निराश हैं, क्योंकि हम जीतना चाहते थे, लेकिन हमें बहुत ज्यादा निराश होने की जरूरत नहीं है। हमने जो किया वह अच्छा था, और मैं अपनी टीम से बहुत खुश और गौरवान्वित हूं।”

Iran-US War: गुड न्यूज! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर हुए सहमति, कतर में होगी होर्मुज पर वार्ता

Iran-US War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक गुड न्यूज आई है। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद दोनों देशों की तरफ से किए गए हमले के बाद यह सहमति बनी है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए ‘एक्सियोस’ (Axios) ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार 30 जून को कतर में बैठक करेंगे।

यह घटनाक्रम कई दिनों से चल रहे सैन्य टकराव के बढ़ने के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक सफलता हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष दोहा में बातचीत आगे बढ़ने के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है।”

कतर में होर्मुज पर होगी चर्चा

कतर की राजधानी दोहा में होने वाली बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। यह दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक है, जहां हालिया हमलों ने शिपिंग को बाधित किया है।

इसके अलावा, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी है कि 17 जून को हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत दोनों पक्षों के बीच तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया, “MoU के सभी क्षेत्रों पर तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटेंगे और जहाज स्वतंत्र रूप से आ-जा सकेंगे।” यह उस समझौते का जिक्र है जिसके तहत होर्मुज को समुद्री ट्रैफिक के लिए फिर से खोला जाएगा।

ईरान के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध

गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर ईरानी प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट) के हमले के बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई थी। इसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। रविवार तड़के ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें और ड्रोन दागे। इससे कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक संघर्ष खत्म करने के समझौते का सम्मान करने में विफल रहता है, तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

ट्रंप ने दी चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले भी किए थे। यह एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा शिपिंग रूट्स है जिसे तेहरान ने संघर्ष के दौरान काफी हद तक बंद कर दिया था। ‘Axios’ की रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है।

ट्रंप ने लिखा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब हम अब समझदारी से काम न ले पाएं, और हमें उस काम को सैन्य रूप से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था।” उन्होंने आगे कहा, “अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही नहीं रहेगा!

राजनयिक कोशिशों को झटका लगा

17 जून के अंतरिम शांति समझौते का मकसद लड़ाई रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत बड़े मुद्दों पर बातचीत का रास्ता बनाना था। स्विट्जरलैंड में मध्यस्थता वाली बातचीत का एक दौर पहले ही हो चुका था, जिसकी अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने की थी।

वाशिंगटन ने तेहरान पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए थे। लेकिन इन राजनयिक कोशिशों के बावजूद सैन्य टकराव फिर से शुरू हो गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी नौसेना और वायु सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उसने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया है।

IRGC ने चेतावनी दी कि अमेरिकी हमलों के कारण सभी राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी तरह से रुक जाएंगी। जबकि उसके नौसैनिक कमांड ने कहा कि इस इलाके में अमेरिकी ठिकानों को आने वाले दिनों में नरक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। लेकिन कहा कि किसी अमेरिकी के हताहत होने या बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

इलाके में तनाव बरकरार

इजरायल ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर एक और हमला किया। इससे पहले शनिवार को भी लेबनान के साथ हुए हालिया संघर्ष-विराम समझौते के बावजूद एक अलग हमला किया गया था। ईरान का कहना है कि अगर व्यापक क्षेत्रीय समझौते को बनाए रखना है, तो लेबनान में लड़ाई खत्म होनी चाहिए।

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वहीं, दूसरी ओर बहरीन ने कहा कि ईरान के हमले से मुहर्रक प्रांत में एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा है। लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की है।

फ्रांस में गर्मी से 1000 लोगों की मौत:जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन समेत 16 देशों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी; सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में आग

यूरोप इन दिनों रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस में भीषण गर्मी से करीब 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई है। हेल्थ एजेंसी ने रविवार को बताया कि ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच हुईं। अतिरिक्त मौतों का मतलब है कि पिछले कुछ साल में हुई औसत मौतों की तुलना में इस बार करीब 1000 लोग ज्यादा मरे हैं। हालांकि सरकार ने न ही पिछली बार और न ही इस बार का कोई सटीक आंकड़ा दिया है। अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में 85% बुजुर्ग हैं। सबसे अधिक मौतें घरों में हुईं। खासकर राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाकों वाले इलाके में ऐसे मामले ज्यादा सामने आए। वहीं, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, डेनमार्क, इटली और स्विट्जरलैंड समेत 16 देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। न्यूज एजेंसी AFP के अनुमान के मुताबिक, रविवार को यूरोप के करीब 19.1 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कहीं सड़कें पिघल रही हैं, कहीं स्कूल बंद करने पड़े हैं, तो कहीं जंगलों में भीषण आग भड़क उठी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप का तापमान दुनिया के औसत तापमान की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। भविष्य में ऐसी गर्मी की लहरें और अधिक बार आएंगी, ज्यादा समय तक रहेंगी। यूरोपीय देशों में गर्मी की हालत ब्रिटेन: जून में गर्मी का 50 साल पुराना रिकॉर्ड 3 बार टूटा ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार लगातार तीन दिनों तक ‘रेड वार्निंग’ जारी करनी पड़ी है। ब्रिटेन में जून के महीने का 50 साल पुराना पिछला रिकॉर्ड (35.6°C) इस हफ्ते लगातार तीन दिन टूटा है। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस जून का नया रिकॉर्ड है। ब्रिटेन के इतिहास का सबसे अधिक तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस है, जो जुलाई 2022 में दर्ज किया गया था। माना जा रहा है कि यह इस साल टूट सकता है। गर्मी के कारण बिजली की मांग 45 साल में सबसे ज्यादा हो गई है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई है। इसके कारण कई बड़े अस्पतालों को इमरजेंसी घोषित करना पड़ा है। पूरे ब्रिटेन में 1,000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है। कंक्रीट और पुरानी तकनीक से बनी क्लासरूम की इमारतें इतनी गर्म हो गई हैं कि बच्चों और शिक्षकों का वहां बैठना असंभव हो गया है। अत्यधिक तापमान के कारण लोहे की रेलवे पटरियां फैल रही हैं और उनके मुड़ने का खतरा बढ़ गया है। इसके कारण ट्रेनों की रफ्तार पर सख्त स्पीड लिमिट (60 मील प्रति घंटा) लगा दी गई है। ब्रिटेन के कई इलाके में पाइप के जरिए बगीचों और कारों पर पानी डालने (होजपाइप) पर रोक लगा दी गई है। स्पेन: यूरोप में सबसे ज्यादा गर्मी, 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा स्पेन इस समय पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा तप रहा है। स्पेन के एंडुजार में तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। वहीं उत्तरी शहर बिलबाओ में जून का सर्वकालिक रिकॉर्ड टूटते हुए पारा 42.7°C दर्ज किया गया। पिछले 4 दिनों में गर्मी के कारण देश में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। अत्यधिक सूखे और भीषण गर्मी के कारण स्पेन के जंगलों में भयंकर आग भड़क उठी है। दमकल विभाग चौबीसों घंटे आग बुझाने में जुटा है, और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है। जर्मनी: 41.5 डिग्री तापमान- इतिहास में सबसे ज्यादा गर्मी पूर्वी जर्मनी के ड्रैविट्ज में शनिवार को तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह जर्मनी के इतिहास का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। वहीं, कुबशुट्स शहर में रात का तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। करीब 150 साल पहले रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह देश की सबसे गर्म रात रही। गर्मी इतनी भीषण है कि जर्मनी में कई हाइवे की सड़कें पिघलने और टूटने लगी हैं, जिससे उन्हें बंद करना पड़ा है। जर्मनी में कई स्पोर्ट्स इवेंट्स, म्यूजिक फेस्टिवल्स और कॉन्सर्ट्स को सुरक्षा के लिहाज से रद्द या स्थगित करना पड़ा है। डेनमार्क: ठंडे देश में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस पहुंचा जर्मनी का पड़ोसी डेनमार्क ठंडे देश के रूप में जाना जाता है। वहां भी इस बार ऐसी गर्मी पड़ी है जो इतिहास में कभी नहीं देखी गई। शनिवार को तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। डेनमार्क में 1874 से रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ था। इसके बाद से यह सबसे अधिकतम तापमान है। इससे पहले अगस्त 1975 में सबसे ज्यादा 36.4°C गर्मी पड़ी थी। डेनमार्क की सड़कें पिघलने लगी हैं। इस वजह से वहां भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि सड़कों को उखड़ने से बचाया जा सके। गर्मी से बचने के लिए कोपेनहेगन के मशहूर अमागर बीच और देश के दूसरे तटीय इलाकों में लाखों की संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक उमड़ पड़े। लेकिन स्थिति यह थी कि ठंडे पानी में नहाने और गर्मी से बचने के लिए बीच पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। फ्रांस: इतिहास का सबसे गर्म दिन, तापमान 44.3 डिग्री पहुंचा फ्रांस के पिसोस शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर औसत तापमान 30°C को पार कर गया, जो रिकॉर्ड में फ्रांस का सबसे गर्म दिन रहा। यहां रात का तापमान भी औसतन 22°C से नीचे नहीं गया। गर्मी से पटरियों के फैलने के कारण ट्रेनें रोकनी पड़ी हैं और बिजली ग्रिड ठप होने से 50,000 घर बिना बिजली के रह रहे हैं। फ्रांस में सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पाबंदी लगा दी है। भीषण गर्मी के कारण 1,350 से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए हैं। गर्मी के कारण सरकार ने ‘फेत द ला म्यूजिक’ नामक वार्षिक म्यूजिक फैसटीवल के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर प्रतिबंध लगा दिया। इटली: 18 शहरों में रेड अलर्ट, पो नदी में सूखे का खतरा इटली में गर्मी लगातार बढ़ रही है। सरकार ने रोम, मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस और ट्यूरिन समेत 18 शहरों में सबसे ऊंचा रेड हीट अलर्ट जारी किया है। भीषण गर्मी के कारण देश की सबसे लंबी पो नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। इस वजह से समुद्र का खारा पानी नदी में घुसने लगा है, जिससे खेती और पेयजल पर खतरा बढ़ गया है। सरकार ने कई इलाकों में लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी गई है और कामकाज के समय में भी बदलाव किए गए हैं। चेक रिपब्लिक: 40 डिग्री का ऐतिहासिक आंकड़ा पार हीटवेव ने चेक रिपब्लिक को भी नहीं बख्शा है। शनिवार को देश के डोक्सानी शहर में तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले देश का राष्ट्रीय ऑल-टाइम रिकॉर्ड 40.4°C था, जो लगभग 14 साल पहले 20 अगस्त 2012 को डोब्रिचोवाइस शहर में दर्ज किया गया था। मौसम विभाग ने पूरे देश के लिए उच्चतम स्तर का रेड अलर्ट जारी कर रखा है और लोगों को दोपहर में घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

स्विट्जरलैंड: जून का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह देश के इतिहास में जून महीने का सबसे अधिक तापमान है। भीषण गर्मी की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल ग्लेशियरों का बर्फ नुकसान रिकॉर्ड समय से पहले शुरू हो गया है। पोलैंड: 100 साल पुराना तापमान रिकॉर्ड टूटने की आशंका पोलैंड में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का अनुमान जताया है। अगर ऐसा हुआ तो 1921 में बना 40.2°C का राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट जाएगा। सरकार ने स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है और लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। कई शहरों में कूलिंग सेंटर खोले गए हैं। पुर्तगाल: 40 डिग्री के पार तापमान, जंगलों में आग का खतरा पुर्तगाल में भी तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। देश के कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी है। भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में आग का खतरा काफी बढ़ गया है। दमकल विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से जंगलों में आग जलाने या बारबेक्यू करने से बचने को कहा गया है। 40°C भारत में सामान्य क्यों है? यूरोप में आपदा कैसे बन जाता है? जब भारत में तापमान 43°C पहुंचता है, तो लोग इसे मई-जून की आम गर्मी मानकर सिर पर गमछा ओढ़ते हैं और आम पना पीते हुए काम पर निकल जाते हैं। लेकिन जब यही तापमान यूरोप में 40°C पार करता है, तो वहां रेड अलर्ट जारी हो जाता है, ट्रेनें रुक जाती हैं और इसे एक ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कर दिया जाता है। इसके पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि ज्योग्राफी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंसानी शरीर की आदत का एक पूरा विज्ञान है। i. इन्फ्रास्ट्रक्चर का फर्क यूरोप: घर और इमारतें गर्मी को अंदर रोकने के लिए बनाए जाते हैं, ताकि सर्दियों में कम हीटिंग की जरूरत पड़े। जब वहां गर्मी पड़ती है, तो ये घर ‘ओवन’ (तंदूर) की तरह काम करने लगते हैं। गर्मी अंदर तो आ जाती है, पर बाहर नहीं निकल पाती। भारत: घर इस तरह बनाए जाते हैं कि हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन हो सके। ऊंची छतें, संगमरमर या टाइल्स के फर्श और खुली खिड़कियां गर्मी को रोकने के बजाय उसे बाहर निकालने में मदद करती हैं। ii. इंसानी शरीर की आदत भारत: हमारे शरीर को बचपन से ही हाई टेम्परेचर झेलने की आदत होती है। भारत के लोगों का ‘थर्मोरेगुलेशन सिस्टम’ (शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता) अच्छा है। भारत के लोगों का शरीर ज्यादा गर्मी में पसीना बहाने लगता है जिससे शरीर को तुरंत ठंडा हो जाता है। यूरोप: यूरोप के लोगों का शरीर कम तापमान का आदी होता है। जब अचानक तापमान 40°C पहुंचता है, तो उनका शरीर इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाता। इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और ऑर्गन फेलियर का खतरा बहुत तेजी से बढ़ता है। iii. ह्यूमिडिटी का फर्क गर्मी सिर्फ तापमान से नहीं, बल्कि हवा में मौजूद नमी से तय होती है। भारत में मई और जून की सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे शरीर का तापमान कम होने में मदद मिलती है। यूरोप में जब गर्मी पड़ती है, तो हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है। उमस के कारण शरीर का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। 40°C तापमान वहां महसूस 45°C या उससे ज्यादा जैसा होता है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में गर्मी से 58 लोगों की मौत:न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद करना पड़ा; हीटवेव की चपेट में 26 यूरोपीय देश, इटली-ब्रिटेन में रेड अलर्ट
फ्रांस में गर्मी के कारण 58 लोगों की मौत हो गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, झीलों और नहरों में नहाने जा रहे हैं। इसके चलते पिछले कुछ दिनों में 40 लोगों की डूबकर मौत हो गई है। इनमें ज्यादातर युवा शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

वेनेजुएला में फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप:अब तक 1430 मौतें, 3300 लोग घायल; 72 घंटे बाद 68 हजार लोग अब भी लापता

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में रविवार को फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप आया। यूरो-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक भूकंप का केंद्र अरागुआ तट के पास समुद्र में 30 किलोमीटर की गहराई में था। यह भूकंप 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद शनिवार को 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। वेनेजुएला में अब तक 1430 लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही 3300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के 72 घंटे बाद करीब 68,900 लोग अब भी लापता हैं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भूकंप के बाद शुरू के 48 से 72 घंटे ही सबसे जरूरी होते है। इस समय लोगों को बचाने की उम्मीद ज्यादा रहती है। कई इलाकों में राहत टीमों की कमी के कारण लोग परिजन को ढूंढने के लिए खुद मलबा हटा रहे हैं। कई परिवार हथौड़ों और दूसरे औजारों से इमारतों का मलबा हटाकर अपने परिजन की तलाश कर रहे हैं। मैप में देखें, 24 जून को आए भूकंप की लोकेशन… भूकंप से जुड़ी 5 तस्वीरें… वेनेजुएला के लिए भारत ने चलाया ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ भारत ने शुक्रवार को वेनेजुएला की मदद के लिए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है। ‘अमिस्ताद’ एक स्पेनिश शब्द है जिसका मतलब ‘दोस्ती’ होता है। वेनेजुएला की आधिकारिक भाषा स्पेनिश ही है। इस ऑपरेशन का मकसद भूकंप प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द मदद पहुंचाना और घायलों का इलाज कराना है। भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमानों के जरिए करीब 35 टन राहत सामग्री भेजी गई है। इसमें जरूरी दवाइयां, मेडिकल इक्विपमेंट और राहत सामग्री शामिल हैं, जिनसे कम समय में अस्थायी इलाज सुविधाएं तैयार की जा सकती हैं। भारत ने 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम भी वेनेजुएला भेजी है। इसमें डॉक्टर, नर्स और मेडिकल एक्सपर्ट शामिल हैं। यह टीम वहां घायलों का इलाज करेगी और जरूरत पड़ने पर अस्थायी अस्पताल भी बनाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को तुरंत इलाज मिल सके। दुनिया के कई देशों से पहुंची राहत टीमें वेनेजुएला सरकार के अनुसार, अमेरिका, मेक्सिको, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों के 861 बचावकर्मी राहत कार्य में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी 25 अंतरराष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू टीमों के करीब 1000 आपातकर्मी भेजने की घोषणा की है। रेस्क्यू के लिए भारी मशीनें, दमकलकर्मी और आपातकालीन टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। अमेरिका ने भी भूकंप राहत कार्य के लिए वेनेजुएला पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। एयरपोर्ट क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत पहुंचाने में मुश्किल इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) की चीफ एलिनोर रेक्स ने बताया कि देश का मुख्य एयरपोर्ट क्षतिग्रस्त होने से बड़े पैमाने पर मदद पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि IRC के पास पड़ोसी देश कोलंबिया में राहत सामग्री मौजूद है, लेकिन उसे वेनेजुएला तक पहुंचाने के लिए एयरपोर्ट तक पहुंच जरूरी है, जो एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले दिनों में IRC की टीमें प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी, अस्थायी आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी दवाइयां व चिकित्सा सामग्री पहुंचाने पर ध्यान देंगी। वेनेजुएला में भूकंप के बाद कई सेवाएं बंद इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, भूकंप से वेनेजुएला में करीब 67.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 20 लाख लोग राजधानी कराकस में रहते हैं। बड़ी संख्या में लोगों के घर ढह गए हैं। वे सड़कों या अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। ————– ये खबर भी देखें… मलबे में दबे 18 दिन के बच्चे का रेस्क्यू:इमारतों में अभी भी फंसे लोग; सड़क पर रिलीफ कैंप; वेनेजुएला भूकंप के 20 PHOTOS-VIDEOS वेनेजुएला में भूकंप के बाद हालात बदतर हैं। दो दिन बाद भी मलबे से फंसे लोगों और शवों को निकाला जा रहा है। शुक्रवार को 18 दिन के बच्चे को उसके मां के साथ सुरक्षित निकाला गया। लोग सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। घायलों का इलाज सड़क पर किया जा रहा है। 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप बुधवार को आए थे। इनमें अब तक 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा तबाही काराकस और ला गुआइरा शहरों में हुई है। पूरी खबर देखें…

वेनेजुएला भूकंप में अब तक 920 की मौत:करीब 3300 घायल, लोग खुद मलबा हटाकर अपनों की तलाश में जुटे

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में 25 जून को आए दो भूकंप के तीन दिन बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 हो गई है। 3360 से ज्यादा लोग घायल हैं, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में सरकारी राहत टीमों की कमी के कारण लोग अपने परिजनों को ढूंढ़ने के लिए खुद मलबा हटाने में जुटे हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि अब तक 243 लोगों को जिंदा बचाया गया है। राहत और बचाव अभियान जारी है, इसलिए मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने कहा कि मलबे से जिंदा निकाला गया हर व्यक्ति किसी चमत्कार से कम नहीं है। इससे पहले सरकार ने बताया था कि 39 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। भूकंप की भयावहता की असल तस्वीर अभी आना बाकी है। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को 9.5 लाख करोड़ रुपए के नुकसान हो सकता है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने आपातकाल लगा दिया है। मैप में देखें, भूकंप की लोकेशन… भूकंप से जुड़ी 5 तस्वीरें… परिवार खुद मलबा हटाकर तलाश कर रहे सबसे ज्यादा तबाही ला गुआइरा राज्य में हुई है। यहां कई परिवार हथौड़ों और दूसरे औजारों से इमारतों का मलबा हटाकर अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी बचाव दल बहुत कम पहुंचे हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक्स्पर्ट्स के मुताबिक, भूकंप के बाद पहले 48 से 72 घंटे मलबे में दबे लोगों को जिंदा निकालने के लिए सबसे अहम होते हैं। ऐसे में हर घंटे के साथ लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। 67 लाख लोग प्रभावित, हजारों बेघर इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, भूकंप से वेनेजुएला में करीब 67.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 20 लाख लोग राजधानी कराकस में रहते हैं। बड़ी संख्या में लोगों के घर ढह गए हैं। वे खुले आसमान के नीचे या अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। वेनेजुएला में भूकंप के बाद कई सेवाएं बंद दुनिया के कई देशों से पहुंची राहत टीमें वेनेजुएला सरकार के अनुसार, अमेरिका, मेक्सिको, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों के 861 बचावकर्मी राहत कार्य में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी 25 अंतरराष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू टीमों के करीब 1000 आपातकर्मी भेजने की घोषणा की है। रेस्क्यू के लिए भारी मशीनें, दमकलकर्मी और आपातकालीन टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। अमेरिका ने भी भूकंप राहत कार्य के लिए वेनेजुएला पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। भारत ने भी राहत सामग्री भेजी भारत ने भूकंप प्रभावित वेनेजुएला की मदद के लिए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान भारतीय सेना की फील्ड हॉस्पिटल यूनिट और 35 टन से ज्यादा राहत सामग्री लेकर वेनेजुएला के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और राहत एवं बचाव कार्यों में हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। ———–

स्विट्जरलैंड ने कनाडा को घरेलू दर्शकों के सामने हराया (Video Highlights)

स्विट्जरलैंड ने दूसरे हॉफ में शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा को उसके घरेलू मैदान पर 2-1 से हराकर फीफा विश्वकप ग्रुप बी मुकाबले में शीर्ष रहते हुए नॉटआउट चरण में जगह बना ली है। वहीं इस हार के बावजूद कनाडा ने दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट में प्रवेश किया। बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए ग्रुप बी के इस मुकाबले में दोनों टीमों के आक्रामक खेल और कई मौके बनाये जाने के बावजूद 45 मिनट गोल नहीं कर सकी।

दूसरे हाफ की शुरुआत में स्विट्जरलैंड के रूबेने वर्गास ने 46वें मिनट में गोल दागकर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद 57वें मिनट में 20 वर्षीय जोहान मंजाम्बी ने गोल कर स्विट्रलैंड की बढ़त को दोगुना कर दिया। मंजाम्बी ने पूरे मैच में आक्रमण प्रदर्शन किया।

कनाडा ने वापसी का प्रयास किया और स्थानापन्न खिलाड़ी प्रॉमिस डेविड ने 76वें मिनट में गोल कर मुकाबले को रोमांचक बना दिया। अंतिम मिनटों में कनाडा ने बराबरी का प्रयास किया, लेकिन स्विस रक्षा पंक्ति ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। आखिरकार स्विट्जरलैंड ने 2-1 की जीत दर्ज कर सात अंकों के साथ ग्रुप बी में शीर्ष पर रहते हुए नॉटआउट चरण में प्रवेश किया।

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में बढ़त, माइक्रोन की मजबूत कमाई के बाद कोस्पी 5% उछला, निक्केई 1% ऊपर

Asian Market Today: US चिपमेकर माइक्रोन की अच्छी कमाई के बाद गुरुवार को एशियाई स्टॉक मार्केट में मोटे तौर पर बढ़त देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.28% बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 0.76% बढ़ा। साउथ कोरिया का कोस्पी 5% से ज़्यादा उछला, जबकि कोस्डैक 1.32% चढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने कम ओपनिंग का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी 24,114 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 62 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट बुधवार को मिला-जुला रहा, जिसमें नैस्डैक और S&P 500 मेगाकैप टेक स्टॉक्स में बिकवाली के कारण नीचे बंद हुए।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 पॉइंट्स या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 7.24 पॉइंट्स या 0.10% गिरकर 7,358.22 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 110.40 पॉइंट्स या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

एनवीडिया का स्टॉक प्राइस 0.54% गिरा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 2.27% गिरे, माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 0.37% गिरा, एप्पल का स्टॉक 0.38% गिरा, टेस्ला का स्टॉक 1.61% गिरा, और स्पेसएक्स का शेयर 1.13% गिरा।

US-ईरान शांति वार्ता

जबकि होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक नॉर्मल होने की ओर बढ़ रहा है, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बंद कमरे में हुई मीटिंग में रिपब्लिकन कांग्रेसियों को उनके ईरान युद्ध को रोकने के लिए वोट की इजाज़त देने के लिए फटकार लगाई है। US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो का कहना है कि अगले हफ़्ते स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ बातचीत तय है।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई और Q4 के अनुमान ने वॉल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, जिससे इसके शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में 15% बढ़ गए। माइक्रोन ने Q3 में $41.46 बिलियन का रेवेन्यू बताया, जो $35.85 बिलियन के अनुमान से ज़्यादा है। कंपनी ने $25.11 प्रति शेयर का एडजस्टेड प्रॉफ़िट बताया, जबकि अनुमान $20.78 प्रति शेयर था।

इसे Q4 में प्रति शेयर $31 की एडजस्टेड कमाई की उम्मीद है, जो $1 ज़्यादा या कम हो सकती है, जबकि अनुमान $25.84 प्रति शेयर था। कंपनी को चौथी तिमाही में लगभग $10 बिलियन के कैपिटल खर्च की उम्मीद है, जबकि एनालिस्ट्स को $8.89 बिलियन की उम्मीद थी।

बिटकॉइन की कीमतें

बिटकॉइन की कीमतें वापस $60,000 से नीचे आ गईं। टोकन 5.4% तक गिरकर $59,023 पर आ गया, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे कम है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, CoinGlass के इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में क्रिप्टो लॉन्ग पोजीशन में लगभग $800 मिलियन लिक्विडेट किए गए हैं। डेरिबिट के डेटा से पता चलता है कि यह गिरावट शुक्रवार को बिटकॉइन ऑप्शंस में लगभग $10 बिलियन की तिमाही एक्सपायरी से पहले हुई है।

आज सोने का रेट

US डॉलर में तेज़ी और US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की संभावना के बीच, सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही, जो एक दिन पहले सात महीने से ज़्यादा के निचले स्तर के पास रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.4% गिरकर $3,985.89 प्रति औंस हो गई, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर $4,001.60 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.2% गिरकर $57.33 प्रति औंस हो गईं।

US ट्रेजरी यील्ड

तेल की कीमतें चार महीने के सबसे निचले स्तर पर आने से US ट्रेजरी यील्ड गिर गई। 2-साल के नोट की यील्ड 4.137% पर आ गई, जो 17 जून के बाद सबसे कम है। बेंचमार्क US 10-साल के नोट पर यील्ड 4.398% पर पहुंच गई, जो 11 मई के बाद सबसे कम है। तीस-साल के ट्रेजरी यील्ड 4.849% पर आ गए, जो 8 अप्रैल के बाद सबसे कम है।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान के बीच शुरुआती शांति समझौते के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से फंसे हुए टैंकरों के निकलने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे सप्लाई की चिंता कम हुई। अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.54% गिरकर $73.34 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.38% गिरकर $70.07 प्रति बैरल पर आ गया।

डॉलर

US डॉलर मजबूत हुआ है और लगभग एक साल में अपनी सबसे तेज मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले करेंसी को मापता है, रातों-रात 101.8 के 13 महीने के पीक पर पहुंचने के बाद 101.6 के आसपास स्थिर है। यूरो लगभग $1.1353 था, और स्टर्लिंग सात महीने के सबसे निचले स्तर $1.314 पर था। 161.73 येन पर, डॉलर चार दशकों से कुछ ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे स्तर से बस थोड़ा ही दूर था।

 

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।