हाहाकार, ₹4 लाख करोड़ स्वाहा, Sensex 1248 प्वाइंट कमजोर, Nifty 23063 पर बंद

Sensex-Nifty closes deep red: सेंसेक्स और बैंकेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में हाहाकार मच गया। अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली की आंच आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को आज बिकवाली की ऐसी आंधी चली कि सेंसेक्स 1264 प्वाइंट् टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23100 के नीचे आ गया और ये गहरे लाल बंद हुए। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में काफी दबाव है लेकिन मिडकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 आज ढाई फीसदी से अधिक कमजोर हुआ तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 डेढ़ फीसदी से अधिक टूटकर बंद हुआ।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज बैंकिंग शेयरों ने बुरी तरह तोड़ दिया। प्राइवेट सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स आज 2% से अधिक कमजोर हुआ को सरकारी बैंकों का निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक नीचे आया। निफ्टी मेटल करीब 2%, निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी 1% से अधिक, निफ्टी रियल्टी 1% से अधिक और निफ्टी आईटी करीब आधा फीसदी कमजोर हुआ। किसी भी सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स ग्रीन नहीं है। इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गई।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 24 सितंबर के दिन सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 1,247.71 प्वाइंट्स यानी 1.67% की गिरावट के साथ 73,580.54 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 383.70 प्वाइंट्स यानी 1.64% की फिसलन के साथ 23,063.10 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 1264.33 प्वाइंट्स टूटकर 73,563.92 और निफ्टी भी 400.65 प्वाइंट्स गिरकर 23,046.15 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹4 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,85,01,353.86 करोड़ था। आज यानी 24 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,80,99,180.54 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹402,173.32 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex का सिर्फ 1 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज सिर्फ 1 स्टॉक- एनटीपीसी ही ग्रीन बंद हुआ है। वहीं दूसरी तरफ दिन के आखिरी में आज बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

 

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पांच वजहों से आज मार्केट में चली बिकवाली की आंधी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: 5 सेकंड में ₹4 लाख करोड़ साफ, 700 प्वाइंट्स टूटा Sensex, इन 5 वजह से Nifty धड़ाम

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली की आंच आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को आज शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23200 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में काफी दबाव है लेकिन मिडकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में 1% से अधिक गिरावट है और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक। इस माहौल में मार्केट खुलते ही बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक कम हो गया यानी कि निवेशकों की दौलत ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गई

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:55 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 701.31 प्वाइंट्स यानी 0.94% की गिरावट के साथ 74,126.94 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 233.95 प्वाइंट्स यानी 1.00% की फिसलन के साथ 23,212.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 707.63 प्वाइंट्स टूटकर 74,120.62 और निफ्टी भी 241.35 प्वाइंट्स गिरकर 23,205.45 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

सितंबर में नए ऑर्डर में तेजी के कारण अमेरिका में बिजनेस एक्टिविटी पांच साल से अधिक समय में सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गई। इसके चलते अमेरिका के बेंचमार्क 10-साल का ट्रेजरी यील्ड साल 2007 के बाद के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया तो मार्केट ने ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी।

कच्चे तेल में उबाल

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता ने कच्चे तेल को फिर से उबाल दिया, जिसकी आंच में मार्केट झुलस गए। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के करीब पहुंच गया।

Sensex की मंथली एक्सपायरी

आज बीएसई के सेंसेक्स और बैकेंक्स समेत अन्य इंडेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट पर इसका असर दिखा। एक्सपायरी का मतलब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर अपनी पोजिशन बंद करना है यानी उसे आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।

बैंकिंग शेयरों का भारी दबाव

आज मार्केट पर बैंकिंग शेयरों ने भारी दबाव बनाया है। प्राइवेट बैंकों का निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर है तो सरकारी बैंकों का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 1% कमजोर है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पूरे दिन मार्केट में पॉजिटिव माहौल रहा, जिससे 23760 या उससे ऊपर तक तेजी की उम्मीदें जगीं, लेकिन 23490 के लेवल ने बढ़त को रोके रखा।

(यह स्टोरी अभी अपडेट हो रही है)

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trump का बिजनेस आइडिया! हर महीने ₹9500000 के खर्च में Truth Social पर दिखेगी सबसे पहले पोस्ट, सांसदों ने की शिकायत

Trump Effect: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी ने एक नई पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत सब्सक्राइबर्स को ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर आने वाली पोस्ट्स, खासतौर से हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की पोस्ट्स, आम यूजर्स से पहले देखने की सुविधा मिलेगी। खास बात ये है कि इस सर्विस के लिए सब्सक्राइबर्स को हर महीने $1 लाख यानी करीब ₹95 लाख रुपये देने होंगे। हालांकि इसने ट्रंप की राजनीतिक भूमिका और उनके कारोबारी हितों के बीच कनफ्लिक्ट ऑफ इंटेरेस्ट यानी हितों के टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप मीडिया और एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (TMTG) ने शनिवार को Truth API नाम से सब्सक्रिप्शन-बेस्ड सर्विस शुरू की। इसके तुरंत बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने अमेरिकी बाजार नियामक एसईसी से इसकी जांच करने की मांग कर दी।

क्या है पेड सर्विस की खास बात

ट्रंप मीडिया ने ट्रुथ एपीआई नाम से सब्सक्रिप्शन सर्विस पेश किया है। कंपनी के अंतरिम सीईओ केविन मैकगर्न (Kevin McGurn) का कहना है कि इसके जरिए बिजनेसेज को मार्केट पर असर डालने वाली अहम जानकारियां आम लोगों से पहले तुरंत ही मिल जाएंगी। इसके तहत ट्रेडिंग फर्म्स और अन्य सब्सक्राइबर्स को आम यूजर्स से पहले जानकारी मिल जाएगी और इसके लिए उन्हें हर महीने $1 लाख तक की फीस देनी होगी।

क्यों हो रहा विरोध

अब इसे लेकर विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सर्विसेज होने के बावजूद ट्रंप के चलते ट्रुथ सोशल के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। ट्रंप ट्रुथ सोशल के सबसे प्रभावशाली यूजर होने के साथ-साथ इसकी पैरेंट कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर भी हैं। वह अकसर इसी के जरिए अहम सरकारी नीतियों, टैरिफ, आर्थिक फैसलों और अन्य बड़े मुद्दों पर ऐलान करते हैं जिसका मार्केट पर सीधा असर पड़ता है। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर कुछ लोगों को ट्रंप की पोस्ट पहले देखने को मिल जाए तो बाकी लोगों की तुलना में उन्हें अनुचित बढ़त मिल जाएगी। उनके बयानों पर मार्केट में काफी तेज मूवमेंट दिखता है।

क्या कहना है Trump Media का

अमेरिकी सांसदों ने एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने एसईसी के चेयरमैन पॉल एटकिन्स (Paul Atkins) को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि अगर बाजार को प्रभावित करने वाली जानकारी कुछ चुनिंदा कंपनियों को पहले मिलती है, तो क्या यह बाजार के नियमों का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने इसे राष्ट्रपति के पद का व्यक्तिगत लाभ लेने के लिए गंभीर दुरुपयोग बताया। वहीं ट्रंप मीडिया का कहना है कि बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सर्विसेज की तरह ट्रुथ एपीआई एक कमर्शियल डेटा प्रोडक्ट की तरह है। बता दें कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप मीडिया के शेयरों में 70% से अधिक की गिरावट आ चुकी है और इससे कंपनी के शेयरहोल्डर्स की दौलत में अरबों डॉलर की कमी आई है।

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

Iran-US War: गुड न्यूज! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर हुए सहमति, कतर में होगी होर्मुज पर वार्ता

Iran-US War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक गुड न्यूज आई है। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद दोनों देशों की तरफ से किए गए हमले के बाद यह सहमति बनी है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए ‘एक्सियोस’ (Axios) ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार 30 जून को कतर में बैठक करेंगे।

यह घटनाक्रम कई दिनों से चल रहे सैन्य टकराव के बढ़ने के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक सफलता हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष दोहा में बातचीत आगे बढ़ने के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है।”

कतर में होर्मुज पर होगी चर्चा

कतर की राजधानी दोहा में होने वाली बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। यह दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक है, जहां हालिया हमलों ने शिपिंग को बाधित किया है।

इसके अलावा, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी है कि 17 जून को हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत दोनों पक्षों के बीच तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया, “MoU के सभी क्षेत्रों पर तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटेंगे और जहाज स्वतंत्र रूप से आ-जा सकेंगे।” यह उस समझौते का जिक्र है जिसके तहत होर्मुज को समुद्री ट्रैफिक के लिए फिर से खोला जाएगा।

ईरान के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध

गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर ईरानी प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट) के हमले के बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई थी। इसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। रविवार तड़के ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें और ड्रोन दागे। इससे कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक संघर्ष खत्म करने के समझौते का सम्मान करने में विफल रहता है, तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

ट्रंप ने दी चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले भी किए थे। यह एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा शिपिंग रूट्स है जिसे तेहरान ने संघर्ष के दौरान काफी हद तक बंद कर दिया था। ‘Axios’ की रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है।

ट्रंप ने लिखा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब हम अब समझदारी से काम न ले पाएं, और हमें उस काम को सैन्य रूप से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था।” उन्होंने आगे कहा, “अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही नहीं रहेगा!

राजनयिक कोशिशों को झटका लगा

17 जून के अंतरिम शांति समझौते का मकसद लड़ाई रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत बड़े मुद्दों पर बातचीत का रास्ता बनाना था। स्विट्जरलैंड में मध्यस्थता वाली बातचीत का एक दौर पहले ही हो चुका था, जिसकी अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने की थी।

वाशिंगटन ने तेहरान पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए थे। लेकिन इन राजनयिक कोशिशों के बावजूद सैन्य टकराव फिर से शुरू हो गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी नौसेना और वायु सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उसने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया है।

IRGC ने चेतावनी दी कि अमेरिकी हमलों के कारण सभी राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी तरह से रुक जाएंगी। जबकि उसके नौसैनिक कमांड ने कहा कि इस इलाके में अमेरिकी ठिकानों को आने वाले दिनों में नरक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। लेकिन कहा कि किसी अमेरिकी के हताहत होने या बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

इलाके में तनाव बरकरार

इजरायल ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर एक और हमला किया। इससे पहले शनिवार को भी लेबनान के साथ हुए हालिया संघर्ष-विराम समझौते के बावजूद एक अलग हमला किया गया था। ईरान का कहना है कि अगर व्यापक क्षेत्रीय समझौते को बनाए रखना है, तो लेबनान में लड़ाई खत्म होनी चाहिए।

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वहीं, दूसरी ओर बहरीन ने कहा कि ईरान के हमले से मुहर्रक प्रांत में एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा है। लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की है।