Kolkata Durga Puja Stampede: ‘पंडाल गिर जाएगा’, माइक पर हुई अनाउंसमेंट और फिर मच गई भगदड़! कोलकाता हादसे में 19 की मौत

शनिवार शाम को कोलकाता नॉर्थ में दुर्गा पूजा के एक पंडाल में भगदड़ मचने से 19 लोगों की जान चली गई। इस मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें ज्यादातर पूजा आयोजन समिति से जुड़े हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया कि पंडाल गिरने की आशंका को लेकर की गई घोषणा के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। जिससे बाद ये दर्दनाक हादसा हो गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे की असली वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

कब हुआ हादसा

कोलकाता के मशहूर दुर्गा पूजा स्थल चोर बागान में शनिवार शाम करीब 7:30 बजे यह हादसा हुआ। बारिश के कारण एक संकरी गली में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। पुलिस के अनुसार, पंडाल के अंदर लोगों को वहां से निकलने की चेतावनी देने वाला ऐलान किया गया, जिसके बाद भीड़ में डर फैल गया। इसके चलते लोग जल्दबाजी में बाहर निकलने लगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़भाड़ वाले इलाके में मची अफरा-तफरी के कारण कई लोग इसकी चपेट में आ गए।

किया गया ये अनाउंसमेंट

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि पंडाल के अंदर अनाउंसमेंट किया गया था, जिसमें कहा गया, “पंडाल की हालत बहुत खराब है। यह गिर सकता है, इसलिए कृपया यहां से चले जाएं।” शनिवार देर रात पत्रकारों से बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि आयोजकों की ओर से की गई इस घोषणा के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई, जिसके चलते भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई और कई लोगों की जान चली गई।

फिसलकर गिरने लगे लोग

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग पंडाल की ओर जाने वाली संकरी गली में इकट्ठा हो गए थे। पंडाल के अंदर मौजूद लोग तेज बारिश के कारण बाहर नहीं निकलना चाहते थे, जबकि दूसरी ओर प्रवेश और निकास के रास्तों से लगातार लोग अंदर आ रहे थे। इसी दौरान गीली जमीन पर कई लोग फिसलकर गिरने लगे और उनके ऊपर दूसरे लोग भी गिर पड़े। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कोलकाता के पुराने दुर्गा पूजा स्थलों में शामिल चोर बागान, हावड़ा ब्रिज से दो किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। हादसे के बाद यहां का पंडाल बंद कर दिया गया। इसके अलावा, भीड़ को देखते हुए चेतला अग्रणी और ताला प्रतोय के पंडाल भी बंद करा दिए गए।

SIT करेगी जांच

पुलिस ने हादसे की जांच के लिए पंडाल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 110 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारी ने बताया कि पूजा समिति ने कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग और कोलकाता नगर निगम से जरूरी मंजूरी ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) बनाया जाएगा, जो हादसे के कारणों का पता लगाएगा और यह जांच करेगा कि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।

अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान अगर किसी की भी लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें क्लब के स्वयंसेवक, अस्थायी होमगार्ड, पुलिसकर्मी और क्लब की ओर से तैनात की गई सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से संबंधित लोगों की पहचान की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी।

Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में आखिर कैसे मची अफरा-तफरी? भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत, 25 घायल

Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम उत्तर कोलकाता में स्थित चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के बीच अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य लोग घायल हो गए। गिरिश पार्क थाना क्षेत्र स्थित सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल के एग्जिट गेट पर अचानक भगदड़ मच गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को तत्काल बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

शाम करीब 7:40 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, यह घटना 17 अक्टूबर की शाम करीब 7:40 बजे हुई। उस समय दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। पंडाल के एग्जिट गेट पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। बताया जा रहा है कि बाहर निकलने के रास्ते पर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से हालात बिगड़े। हालांकि, भगदड़ के पीछे की परिस्थितियों और घटना के सटीक कारणों को लेकर डिटेल्स जानकारी का इंतजार है।

कैसे मची भगदड़?

घटना का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उत्तर कोलकाता के चोरबागान में सामुदायिक दुर्गा पूजा के आयोजकों की एक घोषणा के बाद श्रद्धालुओं के बीच अचानक भीड़ बढ़ गई, जिससे यह दुखद हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि घटना की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार पूजा आयोजकों द्वारा लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा के कारण यह घटना हुई।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि चोरबागान दुर्गा पूजा आयोजित करने वाले क्लब के पदाधिकारियों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतकों में से दो के परिजनों के अनुसार पंडाल परिसर में निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा सीटी बजाए जाने के कारण पंडाल में एंट्री के लिए इंतजार कर रहे लोगों में अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, बारिश शुरू होते ही पंडाल के बाहर इंतजार कर रही भीड़ अचानक आगे बढ़ी। इस दौरान कुछ लोग सड़क पर गिर गए, जिससे भगदड़ मच गई। प्रशासन ने घटना के बाद भीड़भाड़ वाले कई दुर्गा पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से अपने पंडाल बंद करने की सलाह दी है। कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं।

सीएम ने कहा कि यह घटना कुछ हद तक बारिश के कारण हुई। पूजा समिति द्वारा अंदर की गई व्यवस्थाओं में भी कुछ कमियां थीं। कोलकाता पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर रही है। जो भी लापरवाही का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि हम कलकत्ता हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक जांच समिति (फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी) बनाएंगे। फिर सरकार उसकी सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई करेगी।

अमित शाह पहुंचे कोलकाता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार शाम को कोलकाता पहुंचे थे। उनका रविवार को दुर्गा पूजा पंडालों का दौरा करने का कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि भगदड़ की घटना के मद्देनजर वह अपने निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर रहे हैं। आज वह हादसे में घायल लोगों से मुलाकात करेंगे। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति की खबर सुनकर उन्हें गहरा सदमा लगा है।

सीएम अधिकारी और राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने भी सरकारी अस्पताल का दौरा किया। चोरबागान दुर्गा पूजा हाल के वर्षों में काफी लोकप्रिय हुई है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यह पूजा चित्तरंजन एवेन्यू से सटी एक संकरी सड़क पर आयोजित की जाती है।

हादसे के बाद बंद किया गया पूजा पंडाल

भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन ने सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया। मौके पर पुलिस और इमरजेंसी टीमें तैनात रहीं। अधिकारी घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने और स्थिति का आकलन करने में लगे हैं।

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भारी भीड़ बनी हादसे की वजह?

शुरुआती जानकारी के अनुसार, पंडाल के एग्जिट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होना भगदड़ की प्रमुख वजह रही। भीड़ के अचानक बढ़े दबाव के कारण लोग अफरा-तफरी में फंस गए। हालांकि, घटना के सटीक कारणों और सुरक्षा इंतजामों की भूमिका को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने आनी बाकी है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान घायलों को उपचार उपलब्ध कराने, भीड़ को नियंत्रित करने और घटना से संबंधित तथ्यों को जुटाने पर है। इस हादसे ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ मैनेजमेंट और सुरक्षित निकास व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है।

₹82 हजार करोड़ की बारिश, 25 सितंबर के बाद Nifty आज 23100 के पार बंद, लगातार दूसरे दिन Sensex ग्रीन

Share Market Rally: वैल्यू बाइंग और आईटी सेक्टर में खरीदारी के दम पर शुरुआती उठा-पटक से उबरते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तर से शानदार रिकवरी की। दिन के निचले स्तर से सेंसेक्स 766 प्वाइंट्स ऊपर चढ़ा तो निफ्टी भी 23100 के पार पहुंच गया। इससे पहले निफ्टी ने आखिरी बार 25 सितंबर को 23100 का लेवल छुआ था और इसी के पार बंद भी हुआ था। हालांकि ब्रोडर लेवल की रिकवरी फेल हो गई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 रेड से ग्रीन हुए और फिर लाल हो गए और रेड जोन में ही बंद हुए। इस मिले-जुले माहौल में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज ₹82 हजार करोड़ से अधिक बढ़ गई।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज आईटी सेक्टर से मजबूत सपोर्ट मिला, जिसका निफ्टी इंडेक्स करीब 4% मजबूत हुआ। साथ ही बैंकिंग शेयरों ने भी शानदार वापसी की और मार्केट को सपोर्ट किया। निफ्टी पीएसयू बैंक शुरुआती गिरावट से उबरते हुए आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी बढ़त रही। निफ्टी मेटल तो करीब 1% मजबूत हुआ। वहीं दूसरी तरफ एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स लाल बंद हुए।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 16 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 413.66 प्वाइंट्स यानी 0.56% की बढ़त के साथ 74,729.27 और निफ्टी भी 148.80 प्वाइंट्स यानी 0.65% की मजबूती के साथ 23,146.15 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 765.79 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,778.78 और निफ्टी दिन के निचले स्तर से 236.05 प्वाइंट्स उबरते हुए 23,149.85 तक पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स 302.62 प्वाइंट्स गिरकर 74,012.99 और निफ्टी 83.55 प्वाइंट्स फिसलकर 22,913.80 तक आया था।

₹82 हजार करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 15 अक्टूबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,71,83,561.46 करोड़ था। आज यानी 16 अक्टूबर 2026 को यह बढ़कर ₹4,72,66,122.04 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹82,560.57 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

Sensex के 18 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 18 आज ग्रीन रहे। सबसे अधिक तेजी आज टेक महिंद्रा, टीसीएस और इंफोसिस में रही तो दूसरी तरफ इंडिगो में आज सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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126 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4616 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2404 शेयर आज मजबूत हुए तो 1962 में गिरावट रही जबकि 250 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 126 शेयर एक साल के हाई और 127 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 8 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 40 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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इन चार वजहों से आज सेंसेक्स-निफ्टी में हुई तेज रिकवरी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हाहाकार, ₹4 लाख करोड़ स्वाहा, Sensex 1248 प्वाइंट कमजोर, Nifty 23063 पर बंद

Sensex-Nifty closes deep red: सेंसेक्स और बैंकेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में हाहाकार मच गया। अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली की आंच आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को आज बिकवाली की ऐसी आंधी चली कि सेंसेक्स 1264 प्वाइंट् टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23100 के नीचे आ गया और ये गहरे लाल बंद हुए। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में काफी दबाव है लेकिन मिडकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 आज ढाई फीसदी से अधिक कमजोर हुआ तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 डेढ़ फीसदी से अधिक टूटकर बंद हुआ।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज बैंकिंग शेयरों ने बुरी तरह तोड़ दिया। प्राइवेट सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स आज 2% से अधिक कमजोर हुआ को सरकारी बैंकों का निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक नीचे आया। निफ्टी मेटल करीब 2%, निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी 1% से अधिक, निफ्टी रियल्टी 1% से अधिक और निफ्टी आईटी करीब आधा फीसदी कमजोर हुआ। किसी भी सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स ग्रीन नहीं है। इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गई।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 24 सितंबर के दिन सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 1,247.71 प्वाइंट्स यानी 1.67% की गिरावट के साथ 73,580.54 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 383.70 प्वाइंट्स यानी 1.64% की फिसलन के साथ 23,063.10 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 1264.33 प्वाइंट्स टूटकर 73,563.92 और निफ्टी भी 400.65 प्वाइंट्स गिरकर 23,046.15 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹4 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,85,01,353.86 करोड़ था। आज यानी 24 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,80,99,180.54 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹402,173.32 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex का सिर्फ 1 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज सिर्फ 1 स्टॉक- एनटीपीसी ही ग्रीन बंद हुआ है। वहीं दूसरी तरफ दिन के आखिरी में आज बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

 

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पांच वजहों से आज मार्केट में चली बिकवाली की आंधी

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तीन दिनों की गिरावट से उबरा Sensex, बढ़त के साथ 23478 पर बंद Nifty, लेकिन डूबे ₹1.88 लाख करोड़

Sensex-Nifty closes green: मार्केट में आज दोनों तरफ मूवमेंट दिखा। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन खत्म होने के बाद ईरान से युद्ध होने के दावे से मार्केट को सपोर्ट मिला तो दूसरी तरफ सप्लाई की दिक्कतों ने कच्चे तेल में उबाल लाया जिससे मार्केट पर दबाव पड़ा। इसके अलावा सेक्टरवाइज मिले-जुले रुझान से भी मार्केट न तो अधिक ऊपर जा पाया और न ही नीचे आ पाया। ऐसे में सेंसेक्स और निफ्टी दिन भर लगभग फ्लैट रहे। हालांकि आखिरी समय में एकाएक इनमें उछाल आई और ये बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रौनक नहीं लौट पाई और निफ्टी मिडकैप 100 औ निफ्टी स्मॉलकैप 100 लाल बंद हुए।

मेटल और फार्मा सेक्टर ने मार्केट को नीचे खींचने की कोशिश की और इनके निफ्टी इंडेक्स आधे फीसदी से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। आईटी और ऑटो सेक्टर ने भी मार्केट पर दबाव बनाया। वहीं दूसरी तरफ बैंकिंग शेयरों की तेजी ने मार्केट को ऊपर खींचने की कोशिश की। आज किसी भी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% से कम ही उठा-पटक रही। इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 10 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 138.36 प्वाइंट्स यानी 0.19% की बढ़त के साथ 74,902.59 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 46.30 प्वाइंट्स यानी 0.20% की मजबूती के साथ 23,477.80 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 146.73 प्वाइंट्स की बढ़त के साथ 74,910.96 के हाई और 165.76 प्वाइंट्स की फिसलन के साथ 74,598.47 तक गिरा था तो दूसरी तरफ निफ्टी इंट्रा-डे में 63.45 प्वाइंट्स चढ़कर 23,494.95 और 51.40 प्वाइंट्स गिरकर 23,380.10 तक आया था।

डूबे निवेशकों के ₹1.88 लाख करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 08 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,87,64,321.47 करोड़ था। आज यानी 09 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹ 4,83,76,596.12 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹188,242.09 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 15 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 15 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज पावरग्रिड, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एचसीएलटेक, टाटा स्टील और ट्रेट में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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Iran-US War Update: ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद तुरंत खत्म हो जाएगी जंग

इन वजहों से एक तरफ नहीं बढ़ पाया मार्केट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या बदल जाएगा दुनिया का नक्शा? UN में पास हुआ ‘Correct the Map’ प्रस्ताव, भारत ने समर्थन के साथ रखी अपनी शर्त

क्या बदल जाएगा दुनिया का नक्शा? UN में पास हुआ 'Correct the Map' प्रस्ताव, भारत ने समर्थन के साथ रखी अपनी शर्त

UN World Map Resolution

UN Correct Map resolution: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दुनिया के पारंपरिक नक्शे को बदलने और उसमें सुधार करने से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हो गया है। इस मुहिम का नेतृत्व अफ्रीकी देश टोगो ने अफ्रीकन यूनियन (AU) के 54 सदस्य देशों के समर्थन से किया था।

 

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों —विशेषकर अफ्रीका— के वास्तविक आकार और क्षेत्रफल को सही अनुपात में दर्शाना है। 

क्या है पूरा मामला?

यूएन में मतदान और देशों का रुख : संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया।

  • समर्थन करने वाले प्रमुख देश : भारत, फ्रांस, ब्रिटेन (इंग्लैंड) समेत 164 राष्ट्र।
  • विरोध करने वाला देश : एकमात्र अमेरिका (USA) ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। अमेरिका की प्रतिनिधि एरियाना फेरिनसेविच ने इसे UNGA के समय और उद्देश्य का मजाक बताया।
  • वोटिंग से दूरी बनाने वाले देश : एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन (कुल 6 देश)।

 

UN World Map Resolution

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अफ्रीकी देशों ने क्यों चलाई 'Correct the Map' मुहिम?

टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी के अनुसार, “एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है। नक्शा सोच को आकार देता है।”

 

अफ्रीकी देशों का मानना है कि गलत नक्शे के कारण विकासशील देशों की जरूरतों और क्षमताओं को कम करके आंका जाता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि उनका देश अब सरकारी कामकाज और शिक्षा में मरकेटर मैप का इस्तेमाल बंद करेगा।

क्या अब कानूनी रूप से दुनिया का नक्शा बदल जाएगा?

नहीं। यूएन का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Non-Binding) नहीं है।

 

संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि मरकेटर मैप पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और न ही किसी नए नक्शे को अनिवार्य किया गया है। यूएन केवल शैक्षणिक और संस्थागत उपयोग में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन जैसे सटीक नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है।

भारत की प्रतिक्रिया और आधिकारिक रुख

भारत ने यूएन में इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है:

  • सीमाओं से कोई लेना-देना नहीं : यह प्रस्ताव केवल महाद्वीपों के क्षेत्रफल के सही अनुपात को दिखाने के लिए है। इसका देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या जगहों के नाम से कोई संबंध नहीं है।
  • संप्रभुता पर स्पष्ट रुख : भारत का क्षेत्र— जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं— उसे केवल भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
  • कोई समझौता नहीं : भारतीय सीमाओं को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना भारत को कतई मंजूर नहीं होगा। भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

रिकवरी के बावजूद Sensex 374 प्वाइंट्स कमजोर, Nifty 23914 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध की आंच तेज हुई तो कच्चा तेल उबल पड़ा और इन दोनों ने मिलकर दुनिया भर में कोहराम मचा दिया। घरेलू स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया और निचले स्तर पर रिकवरी के बावजूद यह गहरे लाल बंद हुआ। ब्रोडर लेवल पर भी रिकवरी हल्की ही रही और शुरुआती कारोबार में 1% की गिरावट से हल्की रिकवरी के साथ निफ्टी मिडकैप 100 आज 0.53% तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आईटी और आईटी सेक्टर ने मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि यह संभल ही नहीं पाया। निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक और निफ्टी आईटी 1% से अधिक कमजोर हुआ। सरकारी बैंकों ने रिकवरी तो कर ली लेकिन इसके निफ्टी इंडेक्स में बढ़त मामूली रही तो दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 02 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 373.93 प्वाइंट्स यानी 0.49% की फिसलन के साथ 76,570.35 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 141.35 प्वाइंट्स यानी 0.59% की कमजोरी के साथ 23,914.45 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।

निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,86,72,129.50 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹269,860.14 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 10 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और पावरग्रिड सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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ये खाना है या चूहे की दावत? सूरत रेलवे स्टेशन के फूड स्टॉल का VIDEO देख भड़के लोग

सूरत रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने यात्रियों का ध्यान खींच लिया है। इसमें एक चूहा कांच के फूड काउंटर के अंदर रखा आलू पेटिज खाते हुए दिखाई दे रहा है। एक यात्री ने इस घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों ने तुरंत संबंधित स्टॉल पर कार्रवाई की। इस घटना ने रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले खाने की साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यात्रियों के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि खाने के सामान को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है और फूड स्टॉल्स की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है। घटना के बाद रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

सुबह-सुबह यात्री ने देखा पूरा मंजर

यह घटना 29 अगस्त की सुबह के शुरुआती घंटों की बताई जा रही है। एक यात्री ने देखा कि चूहा कांच के डिस्प्ले काउंटर के अंदर आराम से घूम रहा था और वहां रखे खाने में से पफ कुतर रहा था। काउंटर में यात्रियों के लिए दूसरे खाद्य पदार्थ भी रखे हुए थे। यात्री ने तुरंत इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया रेलवे

वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों तक मामला पहुंचा। इसके बाद संबंधित स्टॉल को तुरंत बंद करा दिया गया। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के मुताबिक, रेलवे को घटना की जानकारी मिलते ही स्टॉल पर कार्रवाई की गई। बंद किए गए काउंटर की सफाई भी कराई गई।

स्टॉल संचालक पर भी शुरू हुई कार्रवाई

मामले को सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रखा गया है। रेलवे के कमर्शियल विभाग ने स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे की ओर से आगे ऐसी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे संबंधित स्टॉल का कॉन्ट्रैक्ट स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

खास सफाई अभियान के बीच सामने आया मामला

हैरानी की बात यह है कि यह घटना रेलवे के एक विशेष सफाई अभियान के कुछ ही दिनों बाद सामने आई। वेस्टर्न रेलवे ने सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के फूड स्टॉल्स में डीप क्लीनिंग और सैनिटाइजेशन अभियान चलाने की घोषणा की थी। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे के खानपान केंद्रों में साफ-सफाई और हाइजीन के स्तर को बेहतर बनाना था।

16 अगस्त को भी हुआ था पेस्ट कंट्रोल

रेलवे अधिकारी के अनुसार, 16 अगस्त को स्टेशन पर पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल भी कराया गया था। इसके बावजूद फूड काउंटर के अंदर चूहे के पहुंचने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

रेलवे स्टेशन पर लोग सफर के दौरान अक्सर फूड स्टॉल से खाना और नाश्ता खरीदते हैं। ऐसे में खाने के सामान के बीच चूहे का पहुंचना यात्रियों के लिए चिंता की बात है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का सवाल यही है कि अगर कांच के बंद काउंटर के अंदर चूहा पहुंच सकता है, तो वहां रखे खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई कितनी भरोसेमंद है? फिलहाल रेलवे ने स्टॉल बंद कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना स्टेशन के फूड आउटलेट्स में नियमित सफाई और निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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न नौकरी छोड़ने की जरूरत, न ऑफिस का झंझट! इस साइड बिजनेस से 5 लाख महीने कमाने का दावा

आज के दौर में नौकरी के साथ एक्सट्रा कमाई का रास्ता तलाशने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोई ऑनलाइन काम शुरू करता है तो कोई कंटेंट क्रिएशन या छोटे कारोबार में हाथ आजमाता है। इसी बीच एक्स पर एक यूजर की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें एक ऐसे साइड बिजनेस का जिक्र किया गया है, जिसे शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत नहीं बताई गई है। पोस्ट के मुताबिक, कुछ लोग इसी काम को पार्ट-टाइम करते हुए हर महीने करीब 5 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

खास बात यह है कि इसके लिए न अपना ऑफिस खोलने की जरूरत बताई गई है और न ही कर्मचारियों या सामान के स्टॉक का झंझट है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इस कमाई के मॉडल को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि, असल कमाई कितनी होगी, यह कई बातों पर निर्भर कर सकता है।

न दुकान, न स्टाफ… फिर कमाई कैसे?

एक्स यूजर अंकित पांडे ने बताया कि उनके कुछ दोस्त रियल एस्टेट में फ्रीलांसिंग के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग’ नाम दिया और दावा किया कि इसे बेहद कम शुरुआती खर्च के साथ शुरू किया जा सकता है।

उनके मुताबिक, सबसे पहले अपने शहर के कई बिल्डरों से संपर्क करना होगा और उनके चैनल पार्टनर प्रोग्राम से जुड़ना होगा। इसके बाद उनके प्रोजेक्ट, कीमत, भुगतान योजना और कब्जे की तारीख जैसी जानकारी समझनी होगी।

असली काम है खरीदार ढूंढना

बिल्डरों से जुड़ने के बाद अगला कदम संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है। पांडे के अनुसार, खरीदार सोशल मीडिया, दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और अपने निजी नेटवर्क के जरिए खोजे जा सकते हैं। यानी इस काम में दुकान खोलने या कोई सामान खरीदकर रखने की जरूरत नहीं है। मुख्य भूमिका खरीदार और बिल्डर के बीच संपर्क बनाने, भरोसा कायम करने और सौदा पूरा कराने की होती है।

50 लाख के फ्लैट पर कितना बन सकता है कमीशन?

पांडे ने अपनी पोस्ट में एक उदाहरण के जरिए कमाई का गणित समझाया। उनके मुताबिक, अगर 50 लाख रुपये के फ्लैट पर 3 प्रतिशत कमीशन मिले, तो एक सौदे से 1.5 लाख रुपये बन सकते हैं। इसी हिसाब से तीन फ्लैट बिकने पर करीब 4.5 लाख रुपये और चार सौदों पर 6 लाख रुपये तक कमीशन बन सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट में कमीशन की दर हर जगह एक जैसी नहीं होती। यह बिल्डर, प्रोजेक्ट और समझौते के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

सुनने में आसान, लेकिन सौदा पक्का करना मुश्किल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस मॉडल को आकर्षक जरूर माना, लेकिन कई यूजर्स ने इसकी असली चुनौती भी बताई। उनका कहना था कि खरीदार ढूंढना और आखिर में डील बंद करना उतना आसान नहीं है, जितना पोस्ट में दिखाई देता है।

एक यूजर ने कहा कि इस काम में ग्राहकों की तलाश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। वहीं, दूसरे ने बताया कि कमीशन आकर्षक लग सकता है, लेकिन ग्राहक को मनाकर सौदा पूरा करना काफी मुश्किल होता है।

30 साल से यही काम कर रहे अंकल

एक यूजर ने अपने परिवार का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसके अंकल करीब तीन दशक से रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। कभी उनके महीने में 5-7 घर तक बिक जाते हैं, तो कभी लगातार 4-6 महीने तक एक भी सौदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इसलिए संभल जाती है क्योंकि उनकी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं। उनके मुताबिक, रियल एस्टेट का यह काम ऐसे व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य हो।

‘साइड इनकम’ का मौका या पूरी तरह बिक्री पर निर्भर काम?

इस पूरी चर्चा ने रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। इसमें शुरुआती निवेश कम हो सकता है, लेकिन कमाई पूरी तरह ग्राहकों, बिक्री और सौदे पूरे होने पर निर्भर करती है। यानी कागज पर यह मॉडल जितना आसान दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही नेटवर्क, भरोसे और बिक्री की क्षमता का खेल है। सोशल मीडिया पर 5 लाख रुपये महीने की कमाई का दावा भले आकर्षक हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इतनी आय की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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