दक्षिण कोरिया के Kospi में लगा सर्किट, चिप शेयरों की बिकवाली पर टूट गया 8%, इस कारण मचा हाहाकार

चिप शेयरों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने आज दक्षिण कोरियाई बाजार में ऐसा हाहाकार मचाया कि सर्किट लग गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश का एक अहम इंडिकेटर है और चिप शेयरों की बिकवाली में यह 8% टूट गया। चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई। सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार ही नहीं बल्कि अधिकतर एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली।

एशियाई मार्केट में कैसी है हालत

दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी में 8% की गिरावट आई है तो जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) में इंट्रा-डे में 4% और टॉपिक्स (TOPIX) में 2% की फिसलन आई। साथ ही MSCI एशिया पैसेफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जिससे इसके जुलाई के बाद के सबसे निचले बंद स्तर की ओर बढ़ने की आशंका बन गई। हालांकि भारतीय मार्केट में बात करें तो आईटी सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर शानदार रौनक दिखी और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक उछल पड़े।

इस हाहाकार की क्या है वजह

अमेरिका में सितंबर में महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़ों ने बाजार में इस आशंका को मजबूत कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी आई। अमेरिका में पांच महीने में सबसे तेज रफ्तार से महंगाई बढ़ने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है।

भारतीय मार्केट में इस कारण छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market: ‘जीडीपी मजबूत, फिर भी क्यों टूट रहा शेयर बाजार?’ हर्ष गोयनका ने बताईं ये 7 बड़ी वजहें!

Indian Stock Market Crash Reasons: भारतीय अर्थव्यवस्था जहां एक तरफ मजबूत जीडीपी ग्रोथ और बेहतरीन फंडामेंटल्स के साथ दुनिया में चमक रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू शेयर बाजार में लगातार बिकवाली और गिरावट का दौर जारी है। निवेशक इस बात से हैरान हैं कि जब देश की इकोनॉमी मजबूत है, तो शेयर बाजार लाल निशान में क्यों कारोबार कर रहा है?

इस बड़े विरोधाभास पर मशहूर उद्योगपति और आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भले ही हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि ग्लोबल लिक्विडिटी भारत से निकलकर दूसरे बाजारों की ओर बह रही है। गोयनका ने भारतीय शेयर बाजार में आ रही इस गिरावट के पीछे ये 7 प्रमुख कारण गिनाए हैं।

1. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं। एशियाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अन्य उभरते बाजारों में बेहतर अवसरों के कारण FIIs भारतीय इक्विटी से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार पर भारी दबाव बन रहा है।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिका में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार इजाफा हो रहा है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए बिना जोखिम के अमेरिका में ही बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। इसी वजह से वे भारत जैसे उभरते जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं।

3. क्रूड ऑयल की कीमतें $100 के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। महंगे तेल से भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और कॉर्पोरेट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है।

4. भारतीय रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की फंड निकासी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। रुपये में गिरावट के कारण विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर करेंसी लॉस का डर रहता है, जिससे वे बिकवाली तेज कर देते हैं।

5. इंफ्लेशन और रेट-हाइक का डर

महंगे क्रूड ऑयल और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से वैश्विक और घरेलू स्तर पर महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इससे केंद्रीय बैंकों (जैसे- अमेरिकी फेडरल रिजर्व और RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती टलने या दोबारा दरें बढ़ाने का डर बाजार में बैठ गया है।

6. भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन अभी भी ऊंचा

दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन (P/E रेशियो) अब भी काफी प्रीमियम या महंगा बना हुआ है। जब बाजारों में अनिश्चितता होती है, तो निवेशक महंगे वैल्यूएशन वाले शेयरों से मुनाफा वसूलकर सस्ते बाजारों (जैसे- चीन या ब्राजील) की ओर रुख करते हैं।

7. वैश्विक स्तर पर रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट

वैश्विक स्तर पर युद्ध के हालात, भू-राजनीतिक तनाव और बड़े आर्थिक संकटों के चलते ग्लोबल इन्वेस्टर्स जोखिम भरे संपत्तियों से दूर भाग रहे हैं। वे इक्विटी के बजाय सोना, कैश और अमेरिकी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगह पर अपनी पूंजी ट्रांसफर कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मार्केट लाल, Sensex डे-हाई से टूट गया 750 प्वाइंट्स, Nifty आया 22400 के नीचे

Share Market Crash: 25 साल में लगातार आठ हफ्ते की सबसे लंबी गिरावट के बाद इस हफ्ते की शुरुआत सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत की लेकिन फिर ये ढह गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी सौदे को लेकर बातचीत फिलहाल स्थिर हो गई है। इससे मार्केट को शॉक लगा और सेंसेक्स डे-हाई से 750 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22400 के नीचे के आ गया।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 722.23 प्वाइंट्स चढ़कर 72,631.93 तक पहुंचा था, जिससे फिर यह 791.75 प्वाइंट्स टूटकर 71,840.18 और निफ्टी 199.85 प्वाइंट्स उछलकर 22,621.80 तक पहुंचा था, जिससे फिर यह 224.70 प्वाइंट्स गिरकर 22,397.10 तक आ गया।

क्या है वित्त मंत्री ने? 

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली में एक इवेंट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ट्रेड डील को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत अभी भी चल रही है लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से काफी बातचीत और समझौते के बाद ऐसी स्थिति हासिल कर ली है, जहां आगे कुछ देना या लेना दोनों के लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्षों के लिए आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश बची है, तो वे उसका इस्तेमाल जरूर करेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के लिए अब आगे और समझौता करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगा। इस पर मार्केट धड़ाम हो गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड बैलेंस अभी भारत के पक्ष में है अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सौदे को लेकर बातचीत अभी चल रही है।

वित्त मंत्री ने दिया चीन का उदाहरण

भारत के साथ सौदे को लेकर अमेरिका चाहता है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड इनबैलेंस यानी कारोबारी अंसतुलन कम हो यानी कि भारत अधिक से अधिक चीजें अमेरिका से खरीदे। वित्त मंत्री ने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत और चीन के बीच भी ऐसा ही असंतुलन है और 2014 के बाद से व्यापार घाटा लगातार बहुत तेजी से बढ़ा है लेकिन केवल व्यापार घाटे को कम करना ही अगर किसी समझौते की मुख्य शर्त बन जाए, तो सवाल यह है कि बातचीत के जरिए इसे किस हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पहले कारोबारी बातचीत का उद्देश्य यह होता था कि दोनों देश अपनी समस्याएं और असमानताएं सामने रखते थे और फिर बातचीत के जरिए समाधान निकालते थे लेकिन अब व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी बातचीत में किसी देश को अपने बाजार में कुछ चीजों की पहुंच बढ़ानी होती थी तो बदले में वह दूसरे देश की कुछ चीजों को अपने यहां अधिक पहुंच देता था यानी दोनों तरफ से कुछ देना और कुछ लेना होता था लेकिन अब टैरिफ बड़ा हथियार बन गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि पहले टैरिफ यानी आयात शुल्क का इस्तेमाल कारोबारी बातचीत के दौरान एक ढांचे के तहत होता था लेकिन अब इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्या कहना है अमेरिका का

भारत के साथ कारोबारी सौदे को लेकर अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर (Jamieson Greer) का कहना है कि ट्रंप सरकार इसे लेकर आखिरी दौर में है लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता जल्द होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि G20 की बैठक के दौरान भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के साथ अच्छी बातचीत हुई। ग्रीर के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच जिन मुद्दों को लेकर मतभेद है, उसकी पहचान कर ली गई है और अब उन्हें सुलझाने के लिए काम किया जा रहा है।

India-US Trade Deal: मुश्किल में भारत-अमेरिका ट्रेड डील! 

Orient Cables IPO Listing: ₹450 पर लिस्ट ₹272 का शेयर, 97 गुना भरा था आईपीओ

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Crash: शेयर बाजार में लगातार 8 हफ्ते की गिरावट, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट रही। 25 साल में पहली बार बाजार इतनी लंबी गिरावट की लकीर में है। इस हफ्ते चारों कारोबारी सत्रों में बाजार गिरा और Nifty के 50 में से 45 शेयर नुकसान में रहे। BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया।

ऐसे माहौल में बाजार एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को अलग-अलग रणनीति बताई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी पूरे बाजार में निवेश करने के बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टर पर फोकस करना बेहतर हो सकता है।

बॉटम-अप स्ट्रैटेजी पर फोकस

Marcellus Investment Managers के को-फाउंडर प्रमोद गुब्बी का कहना है कि मौजूदा बाजार बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग के लिए ज्यादा बेहतर है। यानी पूरे बाजार की चाल का अनुमान लगाने के बजाय मजबूत कंपनियों और बेहतर संभावनाओं वाले शेयरों को चुनने पर फोकस करना चाहिए।

उन्होंने निवेशकों को एसेट एलोकेशन पर भी ध्यान देने की सलाह दी। गुब्बी के मुताबिक इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और कमोडिटी में पैसा बांटना पोर्टफोलियो का जोखिम कम कर सकता है। हालांकि, इसका अनुपात निवेशक के लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से तय होना चाहिए।

बाजार में राहत की उम्मीद

JM Financial Services के डायरेक्टर और हेड ऑफ टेक्निकल, डेरिवेटिव्स राहुल शर्मा के मुताबिक बाजार कई संकेतकों पर ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुका है। RSI, India VIX और FII के लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो जैसे संकेतक दबाव दिखा रहे हैं।

शर्मा ने Nifty में 22,000-22,182 के स्तर को अहम बताया है। उनके मुताबिक यहां से राहत की तेजी आ सकती है। ऐसी स्थिति में Nifty में 500-800 अंकों की उछाल भी देखने को मिल सकती है।

घबराहट में बन सकता है बॉटम

DRChoksey Finserv के देवेन चोकसी कहना है कि बाजार में इस समय कैपिटुलेशन जैसी स्थिति है। मतलब कि बहुत से निवेशक घबराकर बिकवाली कर रहे हैं। इसी के चलते कुछ मजबूत शेयर भी दबाव में आ गए हैं।

उनका मानना है कि इससे बाजार में पैनिक बॉटम बन सकता है। ऐसे में उन कंपनियों में मौके बन सकते हैं, जिनके कारोबार और फंडामेंटल पर बिकवाली का असर नहीं पड़ा है। चोकसी की नजर Nifty में 21,800 के नीचे और 22,800-23,200 के ऊपर के स्तर पर है।

कंज्यूमर और फाइनेंशियल सेक्टर पर नजर

IKIGAI Asset Manager के फाउंडर और CIO पंकज तिबरेवाल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, होम इम्प्रूवमेंट और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियों पर नजर रख रहे हैं। उनके मुताबिक लंबे समय बाद B2C कंपनियां आकर्षक दिख रही हैं।

तिबरेवाल के मुताबिक फाइनेंशियल सेक्टर भी अब बेहतर दिख रहा है। खासकर प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अर्निंग्स ग्रोथ शुरू होने के संकेत हैं। इसके अलावा मेटल, माइनिंग और एग्रो कमोडिटीज में भी उन्हें मजबूत साइकिल की उम्मीद है।

क्या धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए?

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक बाजार में हालिया बिकवाली की बड़ी वजह ग्लोबल फैक्टर हैं। बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर पर है। कच्चा तेल भी महंगा बना हुआ है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ी है।

नायर का कहना है कि अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और इन चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। वहीं, छोटी अवधि के निवेशक फिलहाल इंतजार कर सकते हैं।

Stock Market Crash: निफ्टी में 25 साल की सबसे लंबी गिरावट, ये 7 बड़े कारण क्रैश के जिम्मेदार

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Rupee Falls: 99 तक गिर सकता है रुपया! Kotak Securities ने कहा- ये लेवल टूटा तो बढ़ेगी मुश्किल

Rupee Falls: रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 97 तक गिर सकता है। अगर 97 का स्तर टूट गया, तो यह 98.5 से 99 तक भी जा सकता है। यह अनुमान Kotak Securities के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी ने दिया है।

बनर्जी के मुताबिक रुपये पर कई तरफ से दबाव है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। इंपोर्ट महंगा हुआ है। ग्लोबल यील्ड भी ऊंची है। इन सबका असर रुपये पर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है। लेकिन ग्लोबल हालात रुपये के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

FPI की बिकवाली से दबाव

इस महीने अब तक विदेशी निवेशक करीब 6.1 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। बनर्जी के मुताबिक पिछले दो महीनों में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है।

हाल में FCNR(B) के जरिए भी पैसा आया है। लेकिन इससे रुपये को तुरंत फायदा नहीं मिला। इसका बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में जाने के बजाय RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में गया है।

अगर रुपये पर दबाव और बढ़ा, तो RBI बाजार में अपना दखल बढ़ा सकता है। बनर्जी के मुताबिक ग्लोबल दबाव के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है। ऐसे में 97 का स्तर जल्द दिख सकता है। इसके टूटने पर रुपया और गिर सकता है।

कच्चा तेल भी बढ़ा रहा चिंता

बनर्जी का कहना है कि रुपये पर कच्चे तेल का दबाव भी है। इसे सिर्फ Brent के फ्यूचर्स भाव से नहीं समझना चाहिए। स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमत भी मायने रखती है।

डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतें भी ऊंची हैं। दुनियाभर में रिफाइनरी से जुड़ी दिक्कतों के कारण इनकी कीमतों पर दबाव है। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। महंगा ईंधन महंगाई बढ़ा सकता है। इससे कारोबार और आम लोगों की लागत भी बढ़ती है। इसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।

RBI बढ़ा सकता है ब्याज दर

बनर्जी को आने वाले महीनों में RBI से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है। उन्हें एक से ज्यादा रेट हाइक की संभावना दिखती है। दिसंबर में भी दर बढ़ सकती है।

हालांकि, उनका कहना है कि RBI सिर्फ अमेरिकी फेड के फैसले को देखकर दरें नहीं बढ़ाएगा। घरेलू महंगाई RBI के लिए ज्यादा अहम रहेगी। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद पॉजिटिव रियल इंटरेस्ट रेट बनाए रखना भी RBI का फोकस रहेगा।

US बॉन्ड यील्ड भी परेशानी

अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड तेजी से बढ़ी है। खासकर 10 साल और उससे ज्यादा अवधि वाले बॉन्ड पर दबाव है। इसे ग्लोबल मार्केट के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।

बनर्जी के मुताबिक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों की उधारी भी फंड की मांग बढ़ा रही है। इससे लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है।

जब तक कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें कम नहीं होतीं, ग्लोबल यील्ड पर दबाव बना रह सकता है। लंबे समय तक ऊंची यील्ड और महंगी कमोडिटी से ग्लोबल ग्रोथ और वित्तीय बाजारों पर भी दबाव पड़ सकता है।

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Market Crash: इन 3 वजहों से शेयर बाजार में हाहाकार! निवेशकों के डूबे ₹4 लाख करोड़

Stock Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में आज आई तूफानी बिकवाली ने निवेशकों को भारी चपत लगाई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से हो रही ताबड़तोड़ बिकवाली और ऑटो शेयरों में आई बड़ी गिरावट के चलते बाजार क्रैश हो गया। सेंसेक्स करीब 850 अंक टूटकर 71,650 के स्तर पर आ गया, वहीं एनएसई का निफ्टी 50 263 अंक (1.16%) फिसलकर 22,356.60 के पास कारोबार कर रहा है।

1 ही दिन में डूबे ₹4 लाख करोड़!

बाजार में मचे इस हाहाकार के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भारी गिरावट के साथ नीचे आ गया है। इस चौतरफा बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति में से करीब 4 लाख करोड़ रुपये एक ही झटके में स्वाहा हो गए।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.36% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.07% तक टूट गया।

ऑटो इंडेक्स 3% गिरा: बजाज ऑटो और M&M के शेयर धड़ाम

बिक्री आंकड़ों में सुस्ती के कारण ऑटो शेयरों की सबसे ज्यादा पिटाई हुई है। बिक्री घटने की खबरों के बीच बजाज ऑटो का शेयर करीब 6% तक फिसल गया। घरेलू बिक्री के निराशाजनक आंकड़ों से एमएंडएम का शेयर भी 2.4% नीचे आ गया।

बाजार में तबाही के 3 मुख्य कारण

 1. FIIs की आक्रामक बिकवाली: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार को नीचे खींच रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बाद बीते दो कारोबारी सत्रों में FIIs ने कुल ₹20,128 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे हैं।

2. रुपये में बड़ी गिरावट: डॉलर इंडेक्स के 3 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से रुपया 0.16% गिरकर 95.9850 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया।

3. India VIX में उछाल: बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट को दर्शाने वाला ‘इंडिया विक्स’ 5% बढ़कर 14.13 के स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता को दिखाता है।

बाजार का मौजूदा हाल

दोपहर 1:30 बजे तक भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है, जहां सेंसेक्स 837.38 अंक (1.15%) की बड़ी गिरावट के साथ 71,642.91 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं निफ्टी 50 भी 287.90 अंक (1.27%) फिसलकर 22,332.55 पर आ गया है। इसके अलावा, ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 100 में 1.56% (930.45 अंक) की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि निफ्टी बैंक 240.90 अंक (0.44%) गिरकर 54,392.15 पर और बैंकेक्स 361.82 अंक (0.58%) टूटकर 61,363.43 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Fall: 15 साल में सबसे लंबी गिरावट, Sensex लाल, 5 वजहों से Nifty आया 22500 के पास

Share Market Crash: बॉन्ड यील्ड में उछाल का दबाव ढीला नहीं हो पा रहा। आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के दिन मार्केट में बिकवाली का दबाव दिखा। इस महीने के पहले और इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज सेंसेक्स 293 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 लाल हैं।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें फिलहाल 10:23 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 72.33 प्वाइंट्स यानी 0.10% की गिरावट के साथ 72,407.96 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 57.45 प्वाइंट्स यानी 0.25% की फिसलन के साथ 22,563.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 292.67 प्वाइंट्स टूटकर 72,187.62 और निफ्टी 112.40 गिरकर 22,508.05 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

मजबूत बॉन्ड यील्ड

10-साल के अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड 5% के पार बनी हुई है, जिससे मार्केट पर दबाव भी बना हुआ है।

FIIs की तेज बिकवाली

बॉन्ड यील्ड की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता पर विदेशी निवेशकों ने बुधवार 30 सितंबर को भी भारतीय इक्विटी मार्केट में तेज बिकवाली की और ₹10,148.41 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की जिससे मार्केट पर दबाव पड़ा है। इस बिकवाली के साथ लगातार पांच कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई ने ₹34,203.14 करोड़ भारतीय शेयर बाजार से निकाल लिए।

ऑटो सेक्टर का भारी दबाव

सितंबर महीने की बिक्री के आंकड़े आने से पहले ऑटो सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का तेज दबाव दिखा और इसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया। निफ्टी मेटल भी करीब 1% कमजोर है। वहीं दूसरी तरफ आईटी और बैंकिंग शेयर मार्केट को ऊपर खींचने की कोशिश कर रहे। निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी से अधिक तो निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% मजबूत है। निफ्टी पीएसयू बैंक में भी करीब आधे फीसदी की बढ़त है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX में उछाल से मार्केट पर दबाव बना है। फिलहाल यह 0.94% की तेजी के साथ 13.62 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है, जिसका मार्केट पर असर दिख रहा है। एक्सपायरी का मतलब 1 अक्टूबर को एक्सपायर होने वाले F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) को आज स्क्वॉयर ऑफ करना है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading Ideas: कल की भारी गिरावट के बाद आज फिर बिकवाली का तूफान, जानिए कमजोर बाजार में भी कहां हो सकती है कमाई

Stock Market Crash : कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच,भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सभी सेक्टर में बिकवाली के कारण निफ्टी 22600 के करीब आ गया है। फिलहाल सेंसेक्स 506 अंक या 0.70 प्रतिशत गिरकर 72,265 के आसपास और निफ्टी 146 अंक यानी 0.64 प्रतिशत गिरकर 22,634 के आसपास कारोबार कर रहा है। निफ्टी 5 महीने के निचले लेवल पर पहुंच गया है। बैंक निफ्टी ने 54000 का लेवल तोड़ दिया है। मिडकैप-स्मॉलकैप में भी प्रेशर है। महाराष्ट्र में सूखे के बाद दरें बढ़ने की आशंका के साथ-साथ US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल में उछाल ने सेंटिमेंट खराब किए हैं। इंडिया VIX 200 DEMA के ऊपर है।

अमेरिका में टैरिफ राहत से फार्मा में जोश है। डॉ रेड्डीज करीब 2 परसेंट मजबूत हुआ है। वहीं सिप्ला भी चढ़ा है। दोनों निफ्टी के टॉप गेनर्स में शामिल हैं। भारत समेत 20 देशों के लिए स्पेसियलिटी ट्रग्स, इंग्रीडिएंट्स और ड्रग कंपोनेंट पर अब जीरो टैरिफ लगेगा। फार्मा और हेल्थ केयर को छोड़कर सभी सेक्टर लाल निशान में हैं। बैंक और फाइनेंस शेयरों में भारी गिरावट आई है। IT,एनर्जी और FMCG में भी बिकवाली है।

दिग्गज रिलायंस 52 हफ्तों के निचले लेवल पर पहुंच गया है। HDFC बैंक भी 52 वीक LOW के करीब है। इसके अलावा HUL, TATA कंज्यूमर, जियो फाइनेंस, टाटा मोटर्स PV में भी कमजोरी गहराई है।

ऐसे में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि ब्रेंट क्रूड के भाव $106 से ऊपर और US 10-साल के बॉन्ड यील्ड के 5.23% पर होने के कारण ग्लोबल मैक्रो हालात इक्विटी मार्केट के लिए अभी भी अच्छे नहीं हैं। US में उभरते मैक्रो हालात तेज ग्रोथ और बढ़ती महंगाई की ओर इशारा कर रहे हैं। AI पर भारी खर्च से ग्रोथ बढ़ रही है और उम्मीद से बेहतर ग्रोथ के कारण महंगाई भी ऊंची बनी रहेगी,जिससे फेड को एक और बार ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इसके चलते US बॉन्ड यील्ड भी बढ़ रहे हैं।

चूंकि क्रूड की बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों पर नहीं डाली गई हैं,इसलिए FY27 में भारत पर फिस्कल दबाव बढ़ेगा। इसलिए,अगर क्रूड की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं,तो फिस्कल दबाव का असर FY27 में भारत की GDP ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ पर पड़ सकता है। यह चिंता भी मार्केट पर असर डाल रही है।

लार्ज-कैप ग्रोथ स्टॉक्स के आकर्षक वैल्यूएशन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए खरीदारी के मौके दे रहे हैं

चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि ग्लोबल बाजार में सावधानी का माहौल है। वॉल स्ट्रीट में कमज़ोर कारोबार के बाद एशियाई बाज़ार भी ज़्यादातर सुस्त हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US बॉन्ड यील्ड बाजार के मूड पर दबाव बना रहे हैं। निवेशक इस हफ्ते आने वाले आर्थिक डेटा और कॉर्पोरेट गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।

आज के लिए इंडेक्स में ट्रेडिंग रणनीति

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 22941-23022 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 23117-23178-23267 पर है। इसके लिए पहला बेस 22698-22731 पर और बड़ा बेस 22610-22666 पर है। ग्लोबल हैंडओवर कमजोर है,कच्चा तेल और बॉन्ड यील्ड अभी ऊंचे स्तरों पर हैं। FIIs की कैश में जोरदार बिकवाली जारी है, नेट शॉर्ट 3.2 लाख पर हैं। आज एक्सपायरी के दिन FII का नेट शॉर्ट सबसे ऊंचे स्तर पर है। रेजिस्टेंस-1 के नीचे उछाल पर बिकवाली की रणनीति की सलाह होगी। रेजिस्टेंस-1 पार कर टिकने पर रेजिस्टेंस-2 तक तेजी की गुंजाइश है। एक्सपायरी को देखते उछाल पर बिकवाली में शुरुआती लक्ष्य बेस-1 होगा बेस-1 पर शॉर्ट को चेक करें,अगर पुट राइटर्स दिखें तो मुनाफा बांधे। अगर बेस-1 टिका तो एक्सपायरी 22750-22850 के बीच रह सकती है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 54789-55040 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 55289-55517 पर है। इसके लिए पहला बेस 54010-54188 पर और बड़ा बेस 53710-53881 पर है। कल बैंक निफ्टी में जोरदार गिरावट रही। अब 54000 पर पुट राइटर्स हावी हैं। 54800-55000 जोन में कॉल सेलर एक्टिव हैं। रेजिस्टेंस-1 के नीचे बिकवाली और उछाल में बिकवाली की रणनीति होगी। बेस-1 अहम है,अगर टिका तो पिछले क्लोज की ओर हल्का पुलबैक संभव है। सिर्फ 55040 के ऊपर ही शॉर्ट कवरिंग की उम्मीद है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Finberg Management की मधु बंसल। इनकी SPLPETRO में 865 रुपए के आसपास, 852 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 957 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं,Supriya Lifescience में इनकी 984 रुपए के आसपास, 959 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 1078 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Crash: 5 सेकंड में ₹4 लाख करोड़ साफ, 700 प्वाइंट्स टूटा Sensex, इन 5 वजह से Nifty धड़ाम

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में बिकवाली की आंच आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी को आज शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23200 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में काफी दबाव है लेकिन मिडकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में 1% से अधिक गिरावट है और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक। इस माहौल में मार्केट खुलते ही बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक कम हो गया यानी कि निवेशकों की दौलत ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गई

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:55 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 701.31 प्वाइंट्स यानी 0.94% की गिरावट के साथ 74,126.94 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 233.95 प्वाइंट्स यानी 1.00% की फिसलन के साथ 23,212.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 707.63 प्वाइंट्स टूटकर 74,120.62 और निफ्टी भी 241.35 प्वाइंट्स गिरकर 23,205.45 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

सितंबर में नए ऑर्डर में तेजी के कारण अमेरिका में बिजनेस एक्टिविटी पांच साल से अधिक समय में सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गई। इसके चलते अमेरिका के बेंचमार्क 10-साल का ट्रेजरी यील्ड साल 2007 के बाद के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया तो मार्केट ने ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी।

कच्चे तेल में उबाल

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता ने कच्चे तेल को फिर से उबाल दिया, जिसकी आंच में मार्केट झुलस गए। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के करीब पहुंच गया।

Sensex की मंथली एक्सपायरी

आज बीएसई के सेंसेक्स और बैकेंक्स समेत अन्य इंडेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट पर इसका असर दिखा। एक्सपायरी का मतलब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर अपनी पोजिशन बंद करना है यानी उसे आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।

बैंकिंग शेयरों का भारी दबाव

आज मार्केट पर बैंकिंग शेयरों ने भारी दबाव बनाया है। प्राइवेट बैंकों का निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर है तो सरकारी बैंकों का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 1% कमजोर है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पूरे दिन मार्केट में पॉजिटिव माहौल रहा, जिससे 23760 या उससे ऊपर तक तेजी की उम्मीदें जगीं, लेकिन 23490 के लेवल ने बढ़त को रोके रखा।

(यह स्टोरी अभी अपडेट हो रही है)

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₹2 लाख करोड़ साफ, Sensex में 330 अंकों की गिरावट, Nifty टूटकर 23329 पर बंद

Share Market Crash: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज शुरुआती बढ़त पूरा गंवाते हुए सेंसेक्स और निफ्टी लाल हो गए और दिन के आखिरी तक ये कमजोर बने रहे। डे-हाई से सेंसेक्स 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23300 के नीचे तक आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी ऐसा रुझान दिखा और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में गिरावट है के साथ बंद हुए। सेक्टरवाइज मार्केट पर आज सबसे तगड़ा दबाव आईटी सेक्टर ने बनाया, जिसका निफ्टी इंडेक्स करीब 1% टूट गया। अधिकतर अहम सेक्टर के इंडेक्स आज लाल रहे। ओवरऑल आज बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹2 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 22 सितंबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 329.91 प्वाइंट्स यानी 0.44% की गिरावट के साथ 74,529.08 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 85.30 प्वाइंट्स यानी 0.36% की फिसलन के साथ 23,329.00 पर बंद हुआ है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 179.94 प्वाइंट्स उछलकर 75,038.93 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 615.22 प्वाइंट्स टूटकर 74,423.71 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी 50 भी 74.70 प्वाइंट्स चढ़कर 23,489.00 तक पहुंचा था, जिससे फिर यह 203.25 प्वाइंट्स गिरकर 23,285.75 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹2.37 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 21 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,82,68,385.61 करोड़ था। आज यानी 22 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,80,30,572.59 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹237,813.02 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के सिर्फ 7 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 7 ही आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज जोमैटो की एटर्नल, इंडिगो और टाटइन सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ बजाज फिनसर्व, ट्रेंट और बजाज फाइनेंस में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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इन पांच वजहों से मार्केट ने गंवाई बढ़त, लाल हुआ सेंसेक्स-निफ्टी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।