FII Selling: विदेशी निवेशकों ने चार दिन में ₹35000 करोड़ के शेयर बेचे, चारों दिन गिरा बाजार

FII Selling: फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FII) की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली जारी है। गुरुवार को भी FII ने करीब ₹9,484 करोड़ के शेयर बेच दिए। दूसरी ओर, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (DII) ने ₹10,041.84 करोड़ की खरीदारी की।

बाजार में लगातार गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता बढ़ा रही है। इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरकर बंद हुए।

चार दिन में ₹35,000 करोड़ की बिकवाली

FIIs ने पिछले चारों कारोबारी सत्र में लगातार बिकवाली की है। हर दिन उनकी बिकवाली ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रही।

28 सितंबर को FIIs ने ₹5,353.22 करोड़ के शेयर बेचे। 29 सितंबर को यह आंकड़ा ₹9,980.22 करोड़ रहा। 30 सितंबर को उन्होंने ₹10,148.41 करोड़ की बिकवाली की। 1 अक्टूबर को भी ₹9,484.22 करोड़ के शेयर बेचे गए। इस तरह चार कारोबारी सत्र में FIIs की कुल बिकवाली करीब ₹34,966 करोड़ पहुंच गई है।

DII ने संभाला बाजार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। 28 सितंबर को DIIs ने ₹5,189.02 करोड़ के शेयर खरीदे थे। 29 सितंबर को खरीदारी ₹6,952.71 करोड़ रही। 30 सितंबर को DIIs ने ₹11,271.73 करोड़ और 1 अक्टूबर को ₹10,041.84 करोड़ की खरीदारी की।

चार दिनों में DIIs की कुल खरीदारी करीब ₹33,455 करोड़ हो गई है। यानी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों ने सोख लिया।

लगातार चार दिन बाजार गिरा

FIIs की बिकवाली ऐसे समय बढ़ी है, जब शेयर बाजार पहले से दबाव में है। इस हफ्ते अब तक चारों कारोबारी सत्र में बाजार गिरकर बंद हुआ है। निफ्टी इस हफ्ते 3% से ज्यादा टूट चुका है। सेंसेक्स में भी करीब 3% की गिरावट आई है। निफ्टी बैंक करीब 2% नीचे है।

ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स इस हफ्ते करीब 4% गिर चुका है। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया है।

रुपया 96 के पार

डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है। गुरुवार को रुपया 48 पैसे गिरकर फिर 96 प्रति डॉलर के पार चला गया। दो महीने में यह रुपये की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच रुपये पर भी दबाव बना हुआ है।

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Stock Market Crash: शेयर बाजार में लगातार 8 हफ्ते की गिरावट, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट रही। 25 साल में पहली बार बाजार इतनी लंबी गिरावट की लकीर में है। इस हफ्ते चारों कारोबारी सत्रों में बाजार गिरा और Nifty के 50 में से 45 शेयर नुकसान में रहे। BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया।

ऐसे माहौल में बाजार एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को अलग-अलग रणनीति बताई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी पूरे बाजार में निवेश करने के बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टर पर फोकस करना बेहतर हो सकता है।

बॉटम-अप स्ट्रैटेजी पर फोकस

Marcellus Investment Managers के को-फाउंडर प्रमोद गुब्बी का कहना है कि मौजूदा बाजार बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग के लिए ज्यादा बेहतर है। यानी पूरे बाजार की चाल का अनुमान लगाने के बजाय मजबूत कंपनियों और बेहतर संभावनाओं वाले शेयरों को चुनने पर फोकस करना चाहिए।

उन्होंने निवेशकों को एसेट एलोकेशन पर भी ध्यान देने की सलाह दी। गुब्बी के मुताबिक इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और कमोडिटी में पैसा बांटना पोर्टफोलियो का जोखिम कम कर सकता है। हालांकि, इसका अनुपात निवेशक के लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से तय होना चाहिए।

बाजार में राहत की उम्मीद

JM Financial Services के डायरेक्टर और हेड ऑफ टेक्निकल, डेरिवेटिव्स राहुल शर्मा के मुताबिक बाजार कई संकेतकों पर ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुका है। RSI, India VIX और FII के लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो जैसे संकेतक दबाव दिखा रहे हैं।

शर्मा ने Nifty में 22,000-22,182 के स्तर को अहम बताया है। उनके मुताबिक यहां से राहत की तेजी आ सकती है। ऐसी स्थिति में Nifty में 500-800 अंकों की उछाल भी देखने को मिल सकती है।

घबराहट में बन सकता है बॉटम

DRChoksey Finserv के देवेन चोकसी कहना है कि बाजार में इस समय कैपिटुलेशन जैसी स्थिति है। मतलब कि बहुत से निवेशक घबराकर बिकवाली कर रहे हैं। इसी के चलते कुछ मजबूत शेयर भी दबाव में आ गए हैं।

उनका मानना है कि इससे बाजार में पैनिक बॉटम बन सकता है। ऐसे में उन कंपनियों में मौके बन सकते हैं, जिनके कारोबार और फंडामेंटल पर बिकवाली का असर नहीं पड़ा है। चोकसी की नजर Nifty में 21,800 के नीचे और 22,800-23,200 के ऊपर के स्तर पर है।

कंज्यूमर और फाइनेंशियल सेक्टर पर नजर

IKIGAI Asset Manager के फाउंडर और CIO पंकज तिबरेवाल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, होम इम्प्रूवमेंट और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियों पर नजर रख रहे हैं। उनके मुताबिक लंबे समय बाद B2C कंपनियां आकर्षक दिख रही हैं।

तिबरेवाल के मुताबिक फाइनेंशियल सेक्टर भी अब बेहतर दिख रहा है। खासकर प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अर्निंग्स ग्रोथ शुरू होने के संकेत हैं। इसके अलावा मेटल, माइनिंग और एग्रो कमोडिटीज में भी उन्हें मजबूत साइकिल की उम्मीद है।

क्या धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए?

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक बाजार में हालिया बिकवाली की बड़ी वजह ग्लोबल फैक्टर हैं। बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर पर है। कच्चा तेल भी महंगा बना हुआ है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ी है।

नायर का कहना है कि अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और इन चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। वहीं, छोटी अवधि के निवेशक फिलहाल इंतजार कर सकते हैं।

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