Brent Crude 111 डॉलर के करीब पहुंचा, एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।

20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर

क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं 

ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।

गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर

केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर

उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।

भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा

महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।

20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

इंडोनेशिया के शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी, क्या अब इमर्जिंग मार्केट का दर्जा गंवाने का खतरा टला?

इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में मंगलवार यानी 20 अक्तूबर को रिकवरी दिखी। शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक जकार्ता कंपोजिट 3.46 फीसदी चढ़कर 5,168 पर चल रहा था। इसकी वजह एमएससीआई की चेतावनी के बाद अथॉरिटीज की तरफ से उठाए गए कदम हैं। हालांकि, अभी यह सवाल बना हुआ है कि अथॉरिटीज की कोशिश के बाद एमएससीआई का रुख बदलेगा या नहीं। एमएससीआई ने 16 अक्तूबर यानी शुक्रवार को इंडोनेशिया के शेयर बाजार को इमर्जिंग मार्केट्स कि लिस्ट से बाहर करने की धमकी दी थी।

बीते दो सत्रों में करीब 15 फीसदी गिरा था JCI

Jakarta Composite Index (JCI) मंगलवार को एक समय 4.3 फीसदी तक उछल गया था। इससे बीते दो सत्रों में आई करीब 15 फीसदी की गिरावट के बाद बाजार को कुछ राहत मिली है। हालांकि, इस रिकवरी के बावजूद इंडोनेशिया का शेयर बाजार दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन वाला बाजार बना हुआ है। 2026 में जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 40 फीसदी गिर चुका है। दुनिया के किसी बड़े बाजार में इस दौरान शायद ही इतनी गिरावट आई है।

MSCI ने शुक्रवार को दी थी बड़ी चेतावनी 

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई। MSCI ने पिछले हफ्ते कहा था कि इंडोनेशियो को इमर्जिंग मार्केट का अपना दर्जा (Status) गंवाना पड़ सकता है। यह ग्लोबल शेयर सूचकांकों से भी बाहर हो सकता है। एमएससीआई के अचानक इस ऐलान से इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में 16 अक्तूबर को बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी। अगर एमएससीआई ऐसा करता है तो दक्षिणपूर्व एशिया की इस सबसे बड़ी इकोनॉमी से काफी पैसा बाहर जा सकता है।

एक्सचेंज ने कमी दूर करने के लिए उठाए कदम

ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI की चेतावनी के बाद इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज ने कुछ कदम उठाए हैं। उसने कहा है कि वह बेंचमार्क इंडेक्स के कैलकुलेशन से बहुत ज्यादा ओनरशिप वाली कंपनियों को हटाएगा। इस बारे में 19 अक्तूबर यानी सोमवार को एमएससीआई के प्रतिनिधियों और एक्सचेंज के अधिकारियों की बीच बातचीत हुई।

निवेशकों का भरोसा बहाल करना सबसे जरूरी

इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ जेफ्री हेंडरिक के मुताबिक, JCI में ऐसी कंपनियों का वेटेज करीब 18 फीसदी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को हटाने के समय का ऐलान बाद में होगा। हालांकि, इनवेस्टर्स का कहना है कि सिर्फ बेंचमार्क में बदलाव करने से निवेशकों का भरोसा बहाल नहीं होगा। इसके लिए कंपनियों की ओनरशिप में पारदर्शिता लानी होगी, गवर्नेंस को स्ट्रॉन्ग करना होगा और नियमों के पालन पर फोकस करना होगा।

यह भी पढ़ें: नीलकंठ मिश्रा ने भारतीय शेयर बाजारों में तेजी नहीं टिकने की बताई बड़ी वजह, सोमवार को भी FII ने की 1148 करोड़ रुपये की बिकवाली

फॉरेन इनवेस्टर्स कर चुके हैं 5 अरब डॉलर की बिकवाली

ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशक इस साल इंडोनेशिया के शेयर बाजारों में करीब 4.9 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं। अगर MSCI इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट्स की लिस्ट से हटाता है तो बाजार में और बिकवाली दिख सकती है। एमएससीआई इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट की लिस्ट से हटाकर स्टैंडएलोन मार्केट की लिस्ट में डाल सकता है। इससे इंडोनेशिया के शेयर बाजार को बड़ा झटका लगेगा।

नीलकंठ मिश्रा ने भारतीय शेयर बाजारों में तेजी नहीं टिकने की बताई बड़ी वजह, सोमवार को भी FII ने की 1148 करोड़ रुपये की बिकवाली

विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर यानी सोमवार को भी बिकवाली की। इससे पिछले हफ्ते की अच्छी तेजी के बाद हफ्ते के पहले दिन बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 1.11 फीसदी यानी 257 अंक गिरकर 22,888 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 876 अंक गिरकर 73,852 पर क्लोज हुआ। विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर जब तक बदलेगा नहीं, तब तक बाजार में तेजी टिक नहीं पाएगी।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल का बड़ा असर 

वर्ल्ड बैंक में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर-इंडिया नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड की वजह से भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। निवेश के जटिल नियमों का असर भी फॉरेन इनवेस्टर्स के इनवेस्टमेंट पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स घटाने से काम नहीं चलेगा। इनवेस्टमेंट प्रोसेस को आसान बनाना होगा, नियमों को पारदर्शी बनाना होगा और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। उन्होंने कहा कि रुपये पर जितना दिख रहा है, उससे ज्यादा दबाव है।

अमेरिका और भारतीय बाजार में रिटर्न के बीच का फर्क घटा

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट में निवेश में फायदा नहीं दिखता है। अमेरिका और भारत में रिटर्न के बीच का फर्क घट गया है, जिससे निवेश के लिहाज से भारत का अट्रैक्शन कम हुआ है। हाल में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड अमेरिका में कई दशकों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोपीय देशों में भी बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। यील्ड में उछाल से अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश में दिलचस्पी बढ़ी है।

भारतीय बाजार में घट रही विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

मिश्रा ने एक उदाहरण की मदद से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2 फीसदी और भारत में 8 फीसदी है, तो भारत में निवेश करने में फायदा है। लेकिन, अगर अमेरिका में यील्ड बढ़कर 5.3 फीसदी हो जाती है और भारत में 7.3 फीसदी रहती है भारत में निवेश में दिलचस्पी कम हो जाती है। इसका मतलब है कि फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत में निवेश करने में फायदा नहीं दिखता। ऐसी स्थिति में वे भारत की जगह अमेरिका में इनवेस्ट करना पसंद करेंगे।

FIIs ने सोमवार को शुद्ध रूप से की 1,148 करोड़ की बिकवाली

स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर को भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 1,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। उन्होंने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। लेकिन, 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से 3,201.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली के बीच DII ने लगातार खरीदारी कर भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया है।

Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार

Diwali Muhurat Trading 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने दिवाली के दिन होने वाले विशेष ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सत्र की टाइमिंग का ऐलान कर दिया है। इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दिन भारतीय शेयर बाजार नए हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत करेगा।

भारतीय शेयर बाजार में दिवाली के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में शेयर बाजार में निवेश करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और वित्तीय उन्नति बनी रहती है। आइए जानते हैं NSE द्वारा जारी मुहूर्त ट्रेडिंग का मिनट-टू-मिनट पूरा शेड्यूल।

मेन ट्रेडिंग सेशन

मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान मुख्य बाजार में कारोबार की समय-सारणी इस प्रकार रहेगी:

प्री-ओपन ऑर्डर एंट्री: दोपहर 2:05 बजे से 2:15 बजे तक (इसमें ऑर्डर दर्ज, संशोधित या रद्द किए जा सकते हैं)।

ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 2:15 बजे से 2:17 बजे तक।

प्री-ओपन बफर टाइम: दोपहर 2:17 बजे से 2:20 बजे तक।

कंटीन्यूअस ट्रेडिंग: दोपहर 2:20 बजे से शुरू होगा।

मार्केट क्लोजिंग टाइम: नॉन-क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) प्रतिभूतियों के लिए बाजार दोपहर 3:30 बजे बंद होगा, जबकि CAS सिक्योरिटीज के लिए सामान्य बाजार 3:15 बजे समाप्त होगा।

CAS और पोस्ट-क्लोज सेशन का शेड्यूल

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और उसके बाद के सत्रों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन: दोपहर 3:15 बजे से 3:20 बजे तक।
  • CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड: दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे तक।
  • ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक।
  • CAS ट्रांजिशन टाइम: दोपहर 3:35 बजे से 3:50 बजे तक।
  • पोस्ट-क्लोज सेशन: दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे तक।
  • ट्रेड मॉडिफिकेशन कट-ऑफ टाइम: शाम 4:15 बजे तक।

नोट: प्री-ओपन और CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड के अंतिम 2 मिनट में सिस्टम-ड्रिवन रैंडम क्लोजर लागू रहेगा।

ब्लॉक डील, IPO और अन्य विशेष सत्र

ब्लॉक डील विंडो: दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक खुलेगी।

IPO और री-लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए स्पेशल प्री-ओपन: दोपहर 2:05 बजे से 2:50 बजे तक (अंतिम 10 मिनट में रैंडम क्लोजर)।

स्पेशल प्री-ओपन वाली कंपनियों का नॉर्मल मार्केट: दोपहर 3:05 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।

कॉल ऑक्शन इलिक्विड सेशन: दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे तक रहेगा।

NSE ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के दौरान एग्जिक्यूटेड सभी सौदों के लिए सेटलमेंट दायित्व अनिवार्य रूप से लागू होंगे।

Muhurat Trading: क्या इस दिवाली भी दोपहर में होगी मुहूर्त ट्रेडिंग? ब्रोकर्स और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने स्टॉक एक्सचेंजों से की अपील

पिछले साल की तरह इस बार भी दिवाली पर ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ का आयोजन दिन के समय किया जाए। ऐसा अनुरोध स्टॉक ब्रोकरों और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने एक बार फिर स्टॉक एक्सचेंजों से किया है। ब्रोकरों ने ‘ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम’ (BISF) के माध्यम से एक्सचेंजों को एक प्रस्ताव सौंपा है। पिछले साल दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग को शाम के पारंपरिक समय के बजाय दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे के बीच आयोजित किया गया था। इससे पहले भी साल 2012 में एक बार मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच रखा गया था। ऐसा शुभ समय को देखते हुए किया गया था।

मनीकंट्रोल को ब्रोकरों से पता चला है कि इस साल 8 नवंबर को दिवाली पर शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 1:47 बजे से 3:12 बजे के बीच है। उन्होंने दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच ट्रेडिंग सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय शेयर बाजारों में दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा कई सालों से चली आ रही है।

निवेशक इस विशेष सत्र में एक प्रतीकात्मक शुरुआत के तौर पर हिस्सा लेते हैं, जिसे हिंदू परंपरा में देवी लक्ष्मी की पूजा से जोड़कर देखा जाता है और यह धन-समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। यह सत्र विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने 1957 में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा शुरू की थी।

दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है मुहूर्त ट्रेडिंग

आमतौर पर, ट्रेडिंग शेड्यूल और छुट्टियों को अंतिम रूप देने से पहले एक्सचेंज आपस में परामर्श करते हैं। इन चर्चाओं के पूरा होने के बाद ही मुहूर्त ट्रेडिंग के फाइनल शेड्यूल की घोषणा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, एक्सचेंज इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं। शुरुआती योजना के तहत, मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है। इससे पहले दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक ‘ब्लॉक डील विंडो’ और उसके बाद 2:05 बजे से 2:20 बजे तक ‘प्री-ओपनिंग सेशन’ हो सकता है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है।

ब्रोकरों का तर्क है कि दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र होने से ब्रोकरेज फर्मों, स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशंस, डिपॉजिटरीज, कस्टोडियंस, बैंकों और बाजार से जुड़े अन्य संस्थानों में काम करने वाले हजारों कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा कर सकेंगे। इससे वे शाम के शुभ समय में अपने परिवारों के साथ दिवाली मना सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य नियमों में कोई ढील मांगना नहीं है, बल्कि मार्केट प्रोफेशनल्स को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने में मदद करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बाजार का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे।

UltraTech Cement Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 21% बढ़ा, रेवेन्यू रहा 19% ज्यादा

ANMI ने भी किया अनुरोध

‘एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया’ (ANMI) ने भी अलग से एक्सचेंजों से दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग कराने के प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके पीछे ‘परंपरा, समावेशिता और वर्क-लाइफ बैलेंस’ का तर्क दिया है। ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है, “इससे हमारी बाजार की पुरानी परंपरा भी बनी रहेगी और ब्रोकरों, कर्मचारियों व उनके परिवारों को देर शाम तक चलने वाले ट्रेडिंग सत्र के दबाव के बिना, साथ में दिवाली मनाने का मौका मिलेगा।”

ब्रोकरों ने ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ के बाद पूरी की जाने वाली अनुपालन (Compliance) जरूरतों का भी जिक्र किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि कुछ प्रक्रियाओं, जैसे कि सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ और फंड एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन पूरा करने की इजाजत दी जाए। अन्य सुझावों में इस स्थिति के कारण होने वाली ‘पीक मार्जिन’ की कमी पर लगने वाले जुर्माने को माफ करना, और ‘एंड-ऑफ-डे’ (EOD) एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन सुबह 9 बजे से पहले पूरा करने की छूट देना शामिल है। मौजूदा शेड्यूल के कारण स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं के कर्मचारियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

अनुपालन की बढ़ती जरूरतों और रिपोर्टिंग की सख्त समय-सीमाओं के कारण, कर्मचारियों को अक्सर फंड एलोकेशन और सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ जैसी पोस्ट-ट्रेड प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए देर तक रुकना पड़ता है। जब तक वे अपना काम खत्म करके घर पहुंचते हैं, तब तक दिवाली मनाने का आनंद खत्म हो चुका होता है।

Ixigo Share Price: गिरते बाजार में शेयर 15% तक भागा, कंपनी के मुनाफे में लौटने से निवेशक गदगद

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Fall: महानवमी पर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 538 अंक तक फिसला; निवेशकों ने गंवाए ₹3.23 लाख करोड़

लगातार 2 कारोबारी सत्रों में बढ़त देखने के बाद भारतीय शेयर बाजारों में 19 अक्टूबर को महानवमी के मौके पर गिरावट है। सेंसेक्स बढ़त में खुला लेकिन फिर चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 538 अंक टूटकर 74,191.21 के लो तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3.23 लाख करोड़ रुपये घट गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 175 अंक से ज्यादा टूटकर 22,970.50 के लो तक गया।

शुक्रवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,73,46,932.132 करोड़ रुपये रहा था। सोमवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,70,22,982.02 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 3,23,950.112 करोड़ रुपये की कमी।

शुक्रवार को कैसी रही थी चाल

आईटी कंपनियों के शेयरों में तगड़ी खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त देखी गई थी। सेंसेक्स 413.66 अंक या 0.56 प्रतिशत बढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ था। निफ्टी 148.80 अंक या 0.65 प्रतिशत बढ़कर 23,146.15 पर बंद हुआ था। बीते सप्ताह सेंसेक्स में 2,256.94 अंक या 3.11 प्रतिशत और निफ्टी में 625.7 अंक या 2.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

Stocks to Watch: 19 अक्टूबर को Axis Bank, Yes Bank, HDFC Bank, RailTel, Zen Tech समेत इन शेयरों पर नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch on Monday: इन 5 दिग्गज बैंकिंग शेयरों में 19 अक्तूबर को दिखेगी बड़ी हलचल

Stocks to Watch on Monday:  शेयर बाजारों में 19 अक्तूबर यानी सोमवार को कई स्टॉक्स में बड़ी हलचल दिख सकती है। कई बड़े बैंकों ने हफ्ते के अंत में सितंबर तिमाही के नतीजों का एलान किया है। उनके शेयरों पर सोमवार को नतीजों का असर दिखेगा। कई बैंकों का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में अच्छा रहा है। कुछ कंपनियों को बड़े ऑर्डर्स मिले हैं। इस वजह से उनके शेयरों में तेजी दिख सकती है। आइए इन शेयरों के बारे में जानते हैं।

एचडीएफसी बैंक की NII में 10% उछाल

HDFC Bank ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट 4.7 फीसदी बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये पहुंच गया। नेट इंटरेस्ट इनकम में 9.7 का इजाफा दिखा। हालांकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.16 फीसदी से अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। साल दर साल आधार पर बैंक की ट्रेजरी ट्रेडिंग इनकम भी 67.4 फीसदी गिर गई। बैंक के शेयरों पर दूसरी तिमाही के नतीजों का असर 19 अक्तूबर को दिखेगा।

Axis Bank का प्रॉफिट 37 फीसदी उछला

Axis Bank का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में शानदार रहा है। इस दौरान बैंक का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 37.6 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 11.8 फीसदी बढ़कर 15,372 करोड़ रुपये हो गई। यह बाजार के अनुमान से ज्यादा है। एसेट क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट दिखा। इससे 19 अक्तूबर को बैंक के शेयर में तेजी दिख सकती है।

ICICI Bank का प्रॉफिट 20 फीसदी बढ़ा

ICICI Bank देश का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। सितंबर तिमाही में बैंक का प्रदर्शन अच्छा रहा है। साल दर साल आधार पर इस दौरान नेट प्रॉफिट 20.1 फीसदी बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.7 फीसदी बढ़कर 25,339 करोड़ रुपये रही। सोमवार को बैंक के शेयरों में उछाल दिख सकता है।

पीएनबी का मुनाफा 11 फीसदी बढ़ा

पंजाब नेशनल बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा रहा। इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम 10.8 फीसदी बढ़कर 11,601 करोड़ रुपये रही। नेट प्रॉफिट 12.8 फीसदी बढ़कर 5,532.2 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स गिरकर 2.55 फीसदी पर आ गया। पीएनबी सरकारी बैंक है। इसके शेयरों पर नतीजों का असर 19 अक्तूबर को दिखेगा।

यह भी पढ़ें: AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

यस बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा

प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा रहा है। बैंक का नेट प्रॉफिट इस दौरान 65.14 फीसदी बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 22.7 फीसदी बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये रही। एनपीए भी 1.3 फीसदी से घटकर 1.2 फीसदी पर आ गया। बैंक ने सितंबर तिमाही में 317.3 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया, जबकि पहली तिमाही में उसे 394.4 करोड़ रुपये का प्रोविजनिंग करना पड़ा था।

AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।

आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी

पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।

एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम

अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?

इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट

CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।

कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल

Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।

यह भी पढ़ें: FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर 

जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।

 

FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे।

इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अक्टूबर की ताजा सेलिंग के साथ विदेशी निवेशक साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर हाई यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं।

यह भी कहा कि महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण विदेशी पूंजी भारत के बजाय उन बाजारों की ओर जा रही है।

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को रेलवे से ₹134 करोड़ का ऑर्डर मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

16 अक्टूबर को की थी खरीद

16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ बाइंग की थी। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के कुछ नीचे आने और रुपये में मजबूती के कारण ऐसा हुआ था। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्व पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को बाइंग इस बात का संकेत है कि बाजार में निवेशकों की धारणा स्थिर हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में रिकवरी की राह में अब भी जोखिम बनी हुई हैं।

क्या बाजार मनाएगा आज गुड फ्राइडे का जश्न या मिलेगी निराशा, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है। गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद, GIFT निफ्टी एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। हाल ही में टेक्नोलॉजी शेयरों में हुई बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में सुधार, वॉल स्ट्रीट में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे सकती है। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार में सुधार के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 84 अंक या 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 23,072 पर कारोबार कर रहा था। यह गुरुवार को निफ्टी के 23,000 के स्तर के करीब बंद होने के बाद एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। पिछले सत्र में भारतीय बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई थी। सेंसेक्स 1,533.72 अंक (2.11 प्रतिशत) उछलकर 74,315.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 374.65 अंक (1.66 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेजी रही

सप्ताह की शुरुआत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी, जिसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी की। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें गिरने वाले शेयरों की तुलना में बढ़ने वाले शेयरों की संख्या लगभग तीन गुना अधिक रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक 2.5 प्रतिशत चढ़ा। इसने गुरुवार की उस गिरावट से उबरने में मदद की, जिसने सूचकांक को अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

जापान का टॉपिक्स (Topix) 1.7 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.9 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.4 ​​प्रतिशत ऊपर रहे। इसके विपरीत, इंडोनेशिया के बाजार में 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसका कारण यह चिंता है कि इंडोनेशिया को वैश्विक स्टॉक सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा; S&P 500 फ्यूचर्स लगभग स्थिर स्तर पर कारोबार कर रहे थे।

निवेशकों के AI शेयरों से हटने के बीच वॉल स्ट्रीट में तेजी

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। शुरुआती नुकसान से उबरते हुए, निवेशकों ने अपना ध्यान हेल्थकेयर और कंज्यूमर शेयरों की ओर मोड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन और कर्ज के स्तर को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.08 प्रतिशत बढ़कर 52,177.69 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,744.06 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.08 प्रतिशत बढ़कर 26,713.03 पर पहुंच गया।

हेल्थकेयर शेयरों (जैसे एली लिली और यूनाइटेडहेल्थ) में खरीदारी देखने को मिली, जबकि कई टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बना रहा, क्योंकि निवेशक बढ़ती उधारी लागत (borrowing costs) के बीच अपने निवेश पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे थे।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, लेकिन अभी भी $105 के ऊपर

शुक्रवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। निवेशक एक तरफ मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई के जोखिमों पर विचार कर रहे थे, तो दूसरी तरफ इस बात पर भी नजर रखे हुए थे कि क्या अमेरिका वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ (अघोषित टैंकर बेड़े) पर लगी पाबंदियों को कम करने के लिए कोई कदम उठा सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.39 प्रतिशत गिरकर $105.51 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ $97.43 प्रति बैरल पर आ गया।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों के लिए निकट भविष्य का नजरिया ‘सावधानी के साथ सकारात्मक’ (cautiously positive) बना हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में लगातार तेजी की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह को ऐसे महत्वपूर्ण कारक बताया, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

पोनमुडी के अनुसार, निवेशक विदेशी निवेश प्रवाह पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) में कोई टिकाऊ सुधार हो रहा है या नहीं। वहीं, बाजार में आई यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।