Senior Citizen FD: 8.5% ब्याज देने वाले बैंक कौन से हैं? रिटायरमेंट के बाद 20 लाख फिक्स करने पर समझिए इंट्रेस्ट इनकम का पूरा कैलकुलेशन

Senior Citizen FD Calculator: अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रखने और रिटायरमेंट के बाद रेग्युलर इनकम के लिए वरिष्ठ नागरिकों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से सबसे भरोसेमंद विकल्प रहा है। इस समय सीनियर सिटीजंस के लिए बैंकों में एफडी पर काफी आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं। खासकर स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 8.50 फीसदी प्रति वर्ष तक का अधिकतम ब्याज ऑफर कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर में जरा सा भी अंतर कुल रिटर्न पर बड़ा असर डालता है। खासकर तब जब आप अपनी रिटायरमेंट की एक बड़ी राशि निवेश कर रहे हों। सही बैंक और सही मैच्योरिटी का चुनाव कर आप बिना बड़ा जोखिम उठाए अपनी इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सा बैंक सीनियर सिटिजंस को FD पर कितना इंट्रेस्ट ऑफर कर रहा है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

जानिए प्राइवेट सेक्टर बैंक में क्या हैं दरें?

निजी क्षेत्र के बैंक वरिष्ठ नागरिकों को नीचे दी गईं ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

डीसीबी बैंक: 8.00 प्रतिशत तक ब्याज।

बंधन बैंक: 7.95 प्रतिशत तक ब्याज।

एसबीएम बैंक इंडिया: 7.80 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडसइंड बैंक: 7.75 प्रतिशत तक ब्याज।

एक्सिस बैंक: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

एचडीएफसी बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईसीआईसीआई बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईडीबीआई बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

पब्लिक सेक्टर बैंक: सरकारी बैंकों में कितना ब्याज?

देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली ब्याज दरों की जानकारी यहां नीचे दी गई है-

बैंक ऑफ इंडिया: 7.45 प्रतिशत तक ब्याज।

पंजाब एंड सिंध बैंक: 7.35 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ बड़ौदा: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडियन बैंक: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

विदेशी बैंक दे रहे इतना ब्याज

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

ड्यूश बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

एचएसबीसी बैंक: 6.00 प्रतिशत तक ब्याज।

8.5% ब्याज पर 20 लाख की FD से कितनी होगी कमाई?

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक अपने रिटायरमेंट फंड से 20 लाख रुपये की राशि 8.50% इंट्रेस्ट रेट पर FD में फिक्स करता है तो उसकी इंट्रेस्ट इनकम एक साल में 1 लाख 70 हजार रुपये होगी। यानी इसे मंथली देखें तो ये करीब 14 हजार रुपये के आसपास होगी। इसी कैलकुलेशन से 3 साल की कुल ब्याज आय 5 लाख 10 हजार और 5 साल की कुल ब्याज आए 8 लाख 50 हजार बैठती है। (नोट: अगर बैंक में ब्याज का रीइन्वेस्टमेंट या तिमाही आधार पर कम्पाउंडिंग होती है तो इंट्रेस्ट से कुल इनकम इससे भी अधिक हो सकती है।)

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे बनाएं सही रणनीति?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सीनियर सिटिजंस को अपना पूरा डिपॉजिट एक ही बैंक में रखने के बजाय कई बैंकों में बांटकर रखना चाहिए ताकि 5 लाख रुपये तक के बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर के दायरे में सुरक्षित रहा जा सके। इसके साथ ही, ज्यादा रिटर्न के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए और एफडी की अवधि का चुनाव अपनी लिक्विडिटी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

अगले 1 महीने में बैंक निफ्टी में आ सकती है 5000 अंकों की तेजी, अगले 12 महीने में डबल हो सकता है सीएनएक्स आईटी

बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए केडियानॉमिक्स के फाउंडर सुशील केडिया ने कहा कि बाजार में इस समय पैसा बनाने का टाइम आ गया है। स्वर्ग जाने का रास्ता नरक जैसा दिखता है और नर्क में जाने का रास्ता स्वर्ग जैसा दिखता है। लोग जब शेयर बाजार में सबसे ज्यादा खुश होते हैं तो नर्क की शुरुआत वहीं होती है। अभी जो लोगों के मन में नर्क जैसे हालात बने हुए यही मार्केट का बॉटम है। अब यहीं से स्वर्ग जाने का रास्ता खुलेगा। एक बात ध्यान में रखें की रुपया-डॉलर और भारतीय बाजार का संबंध बड़ा विचित्र सा है।

लॉन्ग रन में डॉलर के मुकाबले भारत की करेंसी कमजोर होती रही है और शेयर मार्केट बढ़ता रहा है। इस गिरावट में रुपया जब भी मजबूत होता है। बाजार बढ़ जाता है। जब भी रुपए में 10% की गिरावट आई है। मार्केट में -5% से लेके प्लस 5% तक का रिटर्न मिला है। लेकिन जब रुपया 10% मजबूत होता है तो निफ्टी में 20 से 25% तक की तेजी देखने को मिली है। अब डॉलर टूटने को कगार पर है। ऐसे में आगे हमारे बाजारों को रुपए में मजबूती का फायदा मिलेगा।

ग्लोबल मार्केट पर नजर डालें तो अब बाजार में तेजी का माहौल बन गया है। लेकिन अभी बाजार में अभी टुकड़े-टुकड़े में खेलना होगा। पर अब वो हालात बन गए हैं जिसमें अच्छी कमाई हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय बैंक निफ्टी की दिशा ज्यादा साफ दिख रही है। अगले कुछ ही दिनों में निफ्टी की स्थिति भी साफ हो सकती है। लेकिन अभी के लिए कहा जा सकता है कि एक से सवा महीनें में बैंक निफ्टी में 5000 अंकों की तेजी आ सकती है।

अदाणी ग्रुप के शेयरों पर बात करते हुए सुशील केडिया ने कहा कि अदाणी एंटरप्राइज और अदाणी पोर्ट पर उनकी शॉर्ट करने की सलाह होगी। वहीं, अदाणी पावर और एनडीटीवी में लॉन्ग बेट है। इनमें बने रहने की सलाह होगी। बजाज ऑटो में भी अब शॉर्ट करने के मौके बन रहे है। बैंक शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एयू बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा आगे धमाका कर सकते हैं। वहीं, एसबीआई और कोटक बैंक नखरे दिखा सकते हैं।

हिंन्दुस्तान यूनीलीवर और टाटा कंज्यूमर यहां से 50-60 फीसदी की तेजी देखने को मिल सकती है। एशियन पेंट्स भी अच्छे करेक्शन के बाद अब भागने को तैयार है। इसमें 30 फीसदी तक की रैली देखने को मिल सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर हम पिछले 30 साल का इतिहास देखें तो पता चलता है कि जब भी रूपया-डॉलर मजबूत होता है तो सबसे ज्यादा रिटर्न एफएमसीजी और आईटी ही देते हैं। अगर मार्केट में तेजी आती है तो सबसे पहले इन्ही सेक्टर्स के शेयर भागेंगे। अगर कोई टीसीएस को 3 साल के नजरिए से खरीदे तो इसमें 7000 रुपए का भाव देखने को मिल सकता है। ट्रेंडिंग के नजरिए से भी इसमें 3200-3300 रुपए का भाव मिल सकता है। इस समय सारे ही आईटी शेयर अच्छे लग रहे हैं। अगर कोई सेक्टोरल इंडेक्स है जो अगले 12 महीनों में डबल हो सकता है तो वह है सीएनएक्स आईटी ही है।

 

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 7 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

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रिकवरी के बावजूद Sensex 374 प्वाइंट्स कमजोर, Nifty 23914 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध की आंच तेज हुई तो कच्चा तेल उबल पड़ा और इन दोनों ने मिलकर दुनिया भर में कोहराम मचा दिया। घरेलू स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया और निचले स्तर पर रिकवरी के बावजूद यह गहरे लाल बंद हुआ। ब्रोडर लेवल पर भी रिकवरी हल्की ही रही और शुरुआती कारोबार में 1% की गिरावट से हल्की रिकवरी के साथ निफ्टी मिडकैप 100 आज 0.53% तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आईटी और आईटी सेक्टर ने मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि यह संभल ही नहीं पाया। निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक और निफ्टी आईटी 1% से अधिक कमजोर हुआ। सरकारी बैंकों ने रिकवरी तो कर ली लेकिन इसके निफ्टी इंडेक्स में बढ़त मामूली रही तो दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 02 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 373.93 प्वाइंट्स यानी 0.49% की फिसलन के साथ 76,570.35 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 141.35 प्वाइंट्स यानी 0.59% की कमजोरी के साथ 23,914.45 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।

निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,86,72,129.50 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹269,860.14 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 10 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और पावरग्रिड सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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FD Interest Rates: वरिष्ठ नागरिकों के लिए गुड न्यूज! इन बैंकों ने बदलीं FD की दरें, जानें किसमें मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न

FD Interest Rates for Senior Citizens: एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और फेडरल बैंक ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बदलाव किया है। ये बैंक आम नागरिकों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों को अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं।

अगर आप या आपके घर के सीनियर सिटीजन ₹3 करोड़ से कम की एफडी में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो जानिए किस बैंक में सबसे ज्यादा रिटर्न मिल रहा है और निवेश करने से पहले किन जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज दरें

तीन प्रमुख बैंकों द्वारा सीनियर सिटीजन्स को दी जाने वाली अधिकतम और सामान्य ब्याज दरों की तुलना:

Axis Bank दे रहा है सबसे ज्यादा 7.25% ब्याज

एक्सिस बैंक ने अपने डोमेस्टिक एफडी रेट्स में संशोधन किया है। बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर रहा है। 5 साल से लेकर 10 साल तक की लंबी अवधि की एफडी पर अधिकतम 7.25% प्रति वर्ष का ब्याज दे रहा है। सीनियर सिटीजन्स के लिए कुल ब्याज दरें 3.50% से 7.25% के बीच हैं।

Federal Bank 48 महीने की FD पर 7.20% रिटर्न

फेडरल बैंक ने भी ₹3 करोड़ से कम की फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक अधिकतम 7.20% का ब्याज प्रति वर्ष दे रहा है जो 48 महीने यानी 4 साल की एफडी कराने पर मिलेगी। ऐसे ही 15 महीने की एफडी पर 7.15% और 24 महीने से 48 महीने से कम की एफडी पर 7.00% का ब्याज दिया जा रहा है।

HDFC Bank: लंबी अवधि की एफडी पर बढ़ीं दरें

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank ने कुछ स्पेशल अवधियों के लिए दरों में बढ़ोतरी की है। बैंक अधिकतम ब्याज दर 7.10% प्रति वर्ष दे रहा है जो पहले 7.00% थी। 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम की अवधि वाली एफडी पर 7.10% का ब्याज मिलेगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज दरें

FD कराने से पहले ध्यान रखें ये 3 जरूरी बातें

केवल सबसे ऊंची ब्याज दर देखकर ही फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा न लगाएं। निवेश से पहले इन 3 पहलुओं का मूल्यांकन जरूर करें:

लॉक-इन अवधि: देखें कि आपका पैसा कितने समय के लिए ब्लॉक हो रहा है। अगर आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो बहुत लंबी अवधि की एफडी चुनने से बचें।

समय से पहले निकासी शुल्क: मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ने पर बैंक कितना पेनाल्टी या चार्ज काटते हैं, इसकी जानकारी पहले ही ले लें।

ब्याज पर टैक्स: एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य होता है। आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिकों को एक वित्तीय वर्ष में एफडी/सेविंग्स ब्याज पर ₹50,000 तक की छूट मिलती है। इससे अधिक ब्याज होने पर टीडीएस कटता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank के नए CEO के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्या नई लीडरशिप निवेशकों का भरोसा लौटा पाएगी?

HDFC Bank के MD और CEO शशिधर जगदीशन के पद छोड़ने के फैसले के बाद अब नए CEO की तलाश शुरू हो गई है। यह सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं है। बैंक के सामने निवेशकों का भरोसा लौटाने और गवर्नेंस से जुड़े सवालों को पीछे छोड़ने की भी बड़ी चुनौती है।

बैंक ने शनिवार को बताया कि शशिधर जगदीशन दोबारा नियुक्ति नहीं लेंगे। उनके पद छोड़ने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल को बढ़ाने की अटकलें चल रही थीं। उनका आखिरी वर्किंग डे 26 अक्टूबर होगा। अब बैंक का बोर्ड नए CEO की नियुक्ति के लिए RBI से मंजूरी मांगेगा। नया CEO बैंक के भीतर से भी हो सकता है और बाहर से भी।

2020 में संभाली थी बैंक की कमान

शशिधर जगदीशन HDFC Bank में करीब तीन दशक से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2020 में आदित्य पुरी के बाद बैंक की कमान संभाली थी। आदित्य पुरी ने 20 साल से ज्यादा समय तक बैंक का नेतृत्व किया था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जगदीशन के कार्यकाल में बैंक की बैलेंस शीट तेजी से बढ़ी। उनके नेतृत्व में 2023 में HDFC Bank का देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC Ltd के साथ मर्जर भी हुआ। हालांकि, उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में बैंक के नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े हुए।

IIFL Capital ने क्या कहा?

IIFL Capital के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिकिन शाह का कहना है कि जगदीशन का दोबारा नियुक्ति नहीं लेना शेयर के लिए बनी बड़ी अनिश्चितता को खत्म कर सकता है। उनका मानना है कि अगर RBI छोटा कार्यकाल मंजूर करता, तो शेयर पर दबाव और लंबे समय तक बना रह सकता था।

शाह के मुताबिक, अगर बैंक किसी भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार को CEO बनाता है, तो इससे नेतृत्व में नया बदलाव देखने को मिल सकता है। नए CEO को बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय भी मिल सकता है।

शेयर ने इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया

HDFC Bank भारत का सबसे मूल्यवान बैंक है। इसका मार्केट कैप करीब 116 अरब डॉलर है। इसके बावजूद इस साल बैंक का शेयर दबाव में रहा है।

इस साल शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले Nifty Bank में सिर्फ 3.5% की गिरावट रही है। HDFC Bank का यह प्रदर्शन अपने बैंकिंग इंडेक्स और बड़े प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। 2003 के बाद यह बैंक के शेयर का सबसे खराब रिलेटिव प्रदर्शन है।

गवर्नेंस को लेकर क्यों उठे सवाल?

पिछले कुछ समय में बैंक को कई विवादों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल दुबई के स्थानीय रेगुलेटर ने प्रोसेस में खामियां मिलने के बाद HDFC Bank की दुबई ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था।

मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मतभेदों का हवाला दिया था। बाद में उन्होंने कहा कि दुबई रेगुलेटर से जुड़े मुद्दों को बैंक ने जिस तरह संभाला, उससे उन्हें चिंता हुई थी। हालांकि, HDFC Bank ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। RBI ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा है कि बैंक में गवर्नेंस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।

बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग पर कार्रवाई

बैंक पर सवाल तब और बढ़े, जब एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बैंक ने एक सरकारी कंपनी को ज्यादा ब्याज दिया। इसे कथित तौर पर मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।

जुलाई में बैंक के बोर्ड ने इस मामले में जगदीशन समेत तीन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की। बोर्ड ने कहा कि डिपॉजिट रेट तय करने से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अपनी व्यावसायिक सीमा से आगे जाकर फैसले लिए थे।

बैंक के सामने अमेरिका में शेयरधारकों की संभावित कानूनी कार्रवाई का भी जोखिम है। निवेशकों ने मिस-सेलिंग के आरोप भी लगाए हैं। बैंक ने कहा है कि वह इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेगा।

नए CEO का जल्दी चयन जरूरी

नए CEO की नियुक्ति में ज्यादा देरी बैंक के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर सकती है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद यह दबाव पहले ही बढ़ चुका है।

अब निवेशक यह देखेंगे कि नया CEO कौन बनता है। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि नेतृत्व परिवर्तन कितनी आसानी से होता है। नए CEO को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत है और बैंक की ग्रोथ पर पूरा फोकस रहेगा।

HDFC Ltd के मर्जर की चुनौतियां

2023 में HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर के बाद बैंक को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मर्जर के बाद बैंक के पास लंबी अवधि वाले होम लोन का बड़ा पोर्टफोलियो आ गया। इससे बैंक की लिक्विडिटी और मार्जिन पर दबाव पड़ा है।

नए CEO के सामने इन चुनौतियों को संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। बैंक को मर्जर का पूरा फायदा निकालने के साथ अपनी ग्रोथ और मुनाफे में सुधार करना होगा।

बाजार के लिए क्यों अहम है HDFC Bank?

HDFC Bank की Nifty 50 में करीब 10% हिस्सेदारी है। इसलिए इस शेयर की बड़ी चाल का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ सकता है। बैंक के शेयर में गिरावट ने हाल के समय में Nifty पर भी दबाव बनाया है।

Nifty 50 में इस साल करीब 7.5% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले MSCI Asia Pacific Index करीब 22% चढ़ा है। ऐसे में HDFC Bank के शेयर का कमजोर प्रदर्शन भारतीय बाजार के लिए भी एक अहम मुद्दा बन गया है।

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक की कमान कौन संभालता है। निवेशक नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया, नए CEO के आने के बाद बैंक की ग्रोथ और गवर्नेंस मानकों को भी करीब से देखेंगे। अब नया नेतृत्व ही तय करेगा कि HDFC Bank आगे कितनी जल्दी निवेशकों का भरोसा वापस जीत पाता है।

Nifty Outlook: 31 अगस्त को निफ्टी किस तरफ जाएगा? HDFC Bank समेत इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank के नए CEO कौन होंगे? कैजाद भरूचा का नाम सबसे आगे, बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश

HDFC Bank New CEO: प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा लेंडर HDFC Bank अक्टूबर में नए एमडी और CEO का ऐलान कर सकता है। मौजूदा एमडी और CEO शशिधर जगदीशन अक्टूबर में अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। बैंक अपने डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का नाम आगे कर सकता है। हालांकि, अभी इस पर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

बाहरी उम्मीदवार भी तलाश रहा बैंक

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैंक एक बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। RBI के नियम के तहत CEO पद के लिए एक से ज्यादा नाम भेजने होते हैं। बैंक जिन नामों का प्रस्ताव देगा, उन पर RBI फैसला करेगा। HDFC Bank और कैजाद भरूचा ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्यों अहम है कैजाद भरूचा का नाम

कैजाद भरूचा बैंक के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह रिटेल और होलसेल, दोनों बिजनेस संभाल रहे हैं। इसलिए उन्हें जगदीशन का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। वह 2029 तक रिटायर नहीं होंगे, जो उनके पक्ष में एक अहम बात है।

RBI के नियमों में कैसे फिट बैठते हैं

RBI के नियमों के तहत फुल-टाइम डायरेक्टर का अधिकतम कार्यकाल 15 साल हो सकता है। 2029 तक भरूचा के 15 साल पूरे होंगे। ऐसे में वह CEO पद के लिए पात्र हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कार्यकाल की सीमा में छूट के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

जगदीशन ने दोबारा कार्यकाल क्यों नहीं लिया

शनिवार को HDFC Bank ने बताया कि शशिधर जगदीशन ने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। वह अक्टूबर 2020 से बैंक के MD और CEO हैं। उनका दूसरा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। बैंक ने उनके फैसले के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई।

छह महीने से नेतृत्व को लेकर उठापटक

पिछले करीब छह महीने HDFC Bank के लिए आसान नहीं रहे हैं। मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि बैंक की कुछ प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खातीं। इसके बाद बैंक के टॉप मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठने लगे।

जांच में नहीं मिले आरोपों के सबूत

चेयरमैन के आरोपों की बाद में बाहरी कानूनी समीक्षा कराई गई। इस जांच में गवर्नेंस से जुड़े आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, पिछले महीने बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग के एक अलग मामले में जगदीशन समेत चार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। इससे बैंक के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा।

शेयर पर भी दिखा असर

इस साल HDFC Bank के शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद गिरावट और तेज हो गई। जून के अंत तक बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 40% थी। 2023 में HDFC Ltd के साथ हुए बड़े मर्जर का फायदा भी निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा है।

नए CEO के सामने क्या चुनौती

HDFC Bank को अब जल्द नया CEO चुनना है। बोर्ड ने भी उत्तराधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। नए CEO के सामने शेयर की गिरावट रोकने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की चुनौती होगी। साथ ही HDFC Ltd के साथ मर्जर का पूरा फायदा निकालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 55% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank News: बैंक के एमडी शशिधर जगदीशन नहीं चाहेंगे पुनर्नियुक्ति, अक्तूबर में होंगे रिटायर

एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शशिधर जगदीशन पुनर्नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने यह फैसला ले लिया है। वह 26 अक्तूबर, 2026 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। बैंक ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है। एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है।

HDFC Bank ने कहा है कि शशिधर जगदीशन ने अपने फैसले के बारे में 29 अगस्त को बैंक के बोर्ड को बताया। बैंक ने कहा है कि अनुरोध करने के बावजूद उन्होंने अपनी पुनर्नियुक्ति स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। इस वजह से वह एचडीएफसी बैंक की सेवा से 26 अक्तूबर, 2026 को रिटायर करना चाहेंगे।

एचडीएफसी बैंक ने बैंक की ग्रोथ और स्टैबिलिटी के लिए जगदीशन की प्रतिबद्धता, लीडरशिप के लिए उनकी तारीफ की है। बैंक ने कहा है कि एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी के विलय में भी उनकी अहम भूमिका रही। बैंक के बोर्ड ने बेहतर भविष्य के लिए जगदीशन को शुभकामना दी है।

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जगदीशन के फैसले के बाद बैंक ने कहा कि बैंक ने जल्द उनके उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। तय समयसीमा के तहत यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। बैंक का शेयर 29 अगस्त को 1.20 फीसदी चढ़कर 719.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 24 फीसदी गिरा है।

सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान में नया मोड़, LICHF, केनरा बैंक, यूनियन बैंक NCLT के एप्रूवल को चैलेंज करेंगे

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान का विरोध किया है। वे चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल से मिले एप्रूवल को अपीलीय ट्राइब्यूनल में चैलेंज करेंगे।

तीनों मिलकर NCLAT में रिपेमेंट प्लान को करेंगे चैलेंज

LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India ने कहा है कि चंद्रा की इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स में उनकी (तीनों की मिलाकर) 8.45 फीसदी वोटिंग शेयर है। उन्होंने कहा कि वे इस रिपेमेंट प्लान का विरोध करते हैं। इस बारे में LIF HF ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, “इस प्लान को आखिर में इसलिए मंजूरी मिली क्योंकि दूसरे फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की तरफ से पेश प्लान के पक्ष में कुल 80.81 फीसदी वोट मिले।”

तीनों ने NCLT  में भी रिपेमेंट का विरोध किया था

एलआईसी एचएफ ने कहा कि वह तुरंत नेशनल कंपनी लॉ एपेलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में अपील फाइल करेगी। इसमें उसके साथ दूसरी सरकारी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस भी होंगे। Canara Bank ने कहा है कि उसने रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था। वह NCLT के ऑर्डर को NCLAT में चैलेंज करेगा।

इन तीनों का कुल वोटिंग शेयर सिर्फ 8.45 फीसदी 

केनरा बैंक ने कहा है, “उसने (1.60 वोटिंग शेयर) दूसरी सरकारी कंपनियों एलआईसी एचएफ (6.09 फीसदी वोटिंग शेयर) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (0.76 फीसदी वोटिंग शेयर) के साथ इस प्लान का विरोध किया था और चंद्रा की तरफ से पेश 6.25 करोड़ रुपये के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ वोटिंग की थी। “

मामले की फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की गई थी

बैंक ने यह भी कहा है कि उसने फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की थी, लेकिन उसके पास माइनॉरिटी वोटिंग शेयर होने से उसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। अब वह NCLT के ऑर्डर को NCLAT में चुनौती देगा। Union Bank of India ने भी कहा है कि उसने भी रिजॉल्यूशन प्लान को खारिज किया है। उसने NCLT के समक्ष भी इस रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था।

NCLT ने चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को दी है मंजूरी 

उसने कहा है कि कुछ प्राइवेट क्रेडिटर्स (लोन देने वाले) का वोटिंग शेयर ज्यादा होने से NCLT में रिपेमेंट प्लान को मंजूरी मिल गई। बैंक ने कहा है कि वह जल्द NCLAT में इस प्लान को चैलेंज करेगा। इससे पहले NCLT ने सुभाष चंद्रा की तरफ से पेश रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी थी। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की तरफ से फाइल इनसॉल्वेंसी मामले में चंद्रा ने यह रिपेमेंट प्लान पेश किया था।

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रिपेमेंट प्लान के तहत 22,000 करोड़ पेमेंट के दावे का सेटलमेंट होगा 

NCLT ने इस मामले में जो आदेश दिया है, उसके तहत क्रेडिटर्स (कर्ज देने वालों) की तरफ से पेश 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के दावों के सेटलमेंट के लिए सुभाष चंद्र 6.5 करोड़ रुपये चुकाएंगे। दिग्गज प्राइवेट बैंक HDFC Bank भी इस मामले में अपील करने के बारे में सोच रहा है। एचडीएफसी बैंक ने 27 अगस्त को कहा था कि उसने भी इस रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था।

HDFC Bank एक साल के निचले स्तर पर, रिकवरी में ₹1172 तक जाएगा शेयर, मैक्वेरी ने सीईओ को लेकर जताई दो संभावनाएं

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज काफी सुस्ती है। टूटकर यह एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था, जिससे यह रिकवर होकर हल्का ग्रीन हुआ। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के रुझानों के हिसाब से इसकी सुस्ती खरीदारी के मौके के तौर पर देख सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म ने इसे फिर आउटपरफॉर्म रेटिंग ऐसे समय में दी है, जब बैंक के अगले सीईओ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और मैक्वेरी ने इसे लेकर दो संभावनाएं जाहिर की हैं। शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 0.32% की बढ़त के साथ ₹714.30 पर है। इंट्रा-डे में यह 0.47% उछलकर ₹715.25 तक पहुंच गया था। इंट्रा-डे में यह 0.79% टूटकर ₹706.35 तक आ गया था। मैक्वेरी ने इसके शेयरों का टारगेट प्राइस ₹1,150 फिक्स किया है।

HDFC Bank के सीईओ को लेकर क्या है Macquarie का कैलकुलेशन

बैंक का अगला सीईओ कौन, इसे लेकर अनिश्चितता शेयरों पर दबाव बनाए हुए है। बैंक के वर्तमान सीईओ शशि जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूहर 2026 को समाप्त हो रहा है यानी बैंक के पास अगले सीईओ के नाम पर फैसला करने के लिए लगभग दो महीने ही बचे हैं। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार इसके चलते ही शेयरों पर दबाव बना हुआ है।

अब मैक्वेरी के मुताबिक सबसे पहले बैंक की NRC (नॉमिनेशन एंड रेम्यूनेरेशन कमेटी) कुछ कैंडिडेट्स के नाम पर विचार करेगी और एक नाम चुनेगी जिसे बोर्ड को भेजा जाएगा। राजीव कुमार की अध्यक्षता में बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद आरबीआई के पास इसे आखिरी मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मैक्वेरी के मुताबिक बोर्ड से भेजे गए नाम पर आरबीआई ने हाल-फिलहाल में 30-45 दिनों का समय लिया है। ऐसे में मैक्वेरी ने दो संभावनाएं जताई हैं।

पहला विकल्प- 6 महीने का एक्सटेंशन: अगर शशि जगदीशन को सिर्फ छह महीने का विस्तार मिलता है, तो यह संकेत हो सकता है कि बैंक का बोर्ड किसी दूसरे व्यक्ति को अगला सीईओ बनाने पर विचार कर रहा है और नए कैंडिडेट की तलाश और आरबीआई की मंजूरी के लिए उसे अतिरिक्त समय चाहिए। मैक्वेरी के मुताबिक ऐसी स्थिति में अगले सीईओ को लेकर अनिश्चितता और लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसके अलावा नए सीईओ को बैंक की जिम्मेदारी संभालने और अपनी रणनीति लागू करने में समय लग सकता है यानी बैंक के शेयरों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।

दूसरा विकल्प- पूरे तीन साल का विस्तार: मैक्वेरी के मुताबिक दूसरी संभावना ये है कि शशि जगदीशन को पूरे तीन साल का नया कार्यकाल दे दिया जाए। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि ऐसा होने पर अगले सीईओ को लेकर तत्काल बनी अनिश्चितता खत्म हो जाएगी, जिससे मौजूदा लेवल्स के आसपास शेयरों को सपोर्ट मिल सकता है। मैक्वेरी के मुताबिक इसके बाद शेयरों की चाल मुख्य रूप से बैंक के फंडामेंटल्स में सुधार पर निर्भर करेगा।

कुछ दिनों पहले एक साल के निचले स्तर पर था शेयर

एचडीएफसी बैंक के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 23 अक्टूबर 2025 को यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹1,020.35 पर था। इस हाई लेवल से 10 महीने में यह 30.77% टूटकर आज 28 अगस्त 2025 को एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर ₹706.35 पर आ गया।

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