GIFT Nifty दे रहा गैप-अप ओपनिंग के संकेत, क्या HDFC बैंक और IT आज संभालेंगे बाजार की कमान

Gift Nifty Indicator: 5 अक्टूबर को भारतीय बाजार में गैप-अप ओपनिंग की संभावना है, क्योंकि GIFT Nifty 140 अंक ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसे US में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी (monetary tightening) को लेकर कम होती चिंताओं और तेल की कीमतों में गिरावट से सहारा मिल रहा है।

5 अक्टूबर को सुबह 7:47 बजे, GIFT Nifty 143 अंक ऊपर 22,633.5 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले हफ्ते Nifty 50 और Sensex दोनों में लगातार आठवीं बार साप्ताहिक गिरावट देखी गई। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेज़ बढ़ोतरी जैसे कारण थे, जिन्होंने रिस्क लेने की क्षमता को कम कर दिया।

संभावित गैप-अप ओपनिंग के पीछे ये चार मुख्य कारण हैं

1) कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल के बढ़ते एक्सपोर्ट और G7 देशों द्वारा तेल स्टॉक जारी करने से सप्लाई बढ़ रही है, जबकि ईरान युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को और नुकसान की चिंताएं बनी हुई हैं।

0115 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 35 सेंट या 0.34% गिरकर $101.90 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $90.49 प्रति बैरल पर था, जिसमें 62 सेंट या 0.68% की गिरावट आई।

पिछले हफ्ते ब्रेंट ने अपनी ज़्यादातर बढ़त गंवा दी थी, जबकि WTI 1.6% नीचे था। यह गिरावट तब आई जब शुक्रवार को G7 देशों ने इमरजेंसी रिज़र्व से 100 मिलियन बैरल डीज़ल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई और US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद एनर्जी एक्सपोर्ट पर पाबंदियां न लगाने का वादा किया।

2) Accenture के Q4 नतीजे

1 अक्टूबर को Accenture के शेयरों में 22% की ज़बरदस्त उछाल आई, जो उनके लिए अब तक का सबसे अच्छा दिन साबित हुआ। कंपनी ने उम्मीद से बेहतर सालाना रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान जताया, जिससे IT कंसल्टिंग बिज़नेस की मज़बूती का पता चला। इस बिज़नेस पर AI-आधारित बदलावों (disruption) की चिंताओं का असर पड़ा था।

इस आउटलुक से पता चला कि ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनियाँ उन कंपनियों की मज़बूत मांग का फायदा उठा रही हैं जो जटिल कामों को ऑटोमेट करने और AI को अपनाने में मदद के लिए बाहरी टेक्नोलॉजी पार्टनर की तलाश कर रही हैं। इससे इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी तेज़ी आई। कॉग्निजेंट के शेयरों में लगभग 8% और IBM में लगभग 3% की बढ़त हुई। भारतीय प्रतिद्वंद्वियों विप्रो और इंफोसिस के ADRs में भी 6% से 7% के बीच बढ़त देखी गई।

3) ग्लोबल स्तर पर सकारात्मक संकेत

सोमवार को एशिया में शेयरों की शुरुआत मजबूत रही, जबकि डॉलर में थोड़ी गिरावट आई और बॉन्ड की कीमतें स्थिर रहीं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उम्मीद से कमजोर अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक पॉलिसी टाइटनिंग साइकिल (ब्याज दरें बढ़ाने की प्रक्रिया) पर अपनी उम्मीदें कम कर दीं।

चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में छुट्टियों के कारण एशिया में ट्रेडिंग कम रही, जिससे बाजारों को शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट की चालों से संकेत लेने पड़े।

पिछले हफ्ते के डेटा से पता चला कि सितंबर में अमेरिका में जॉब ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा धीमी रही और पिछले दो महीनों के नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों में भारी कटौती की गई, जिससे इस महीने फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लगभग खत्म हो गई।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, निवेशक अब इस महीने फेड द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना केवल 22% मान रहे हैं, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 64% थी।

इस महीने फेड द्वारा दरें न बढ़ाने (पॉज़) की बढ़ती संभावना से जापान के निक्केई में सत्र की शुरुआत में 2% की बढ़त हुई, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शेयरों में 0.5% की बढ़ोतरी हुई और जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.15% की बढ़त दर्ज की गई।

4) HDFC बैंक को नया CEO मिला

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने अनूप बागची को तीन साल के लिए अपना अगला चीफ एग्जीक्यूटिव (CEO) नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब कोई बाहरी व्यक्ति इस संस्थान का नेतृत्व करेगा।

55 वर्षीय बागची, शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे। जगदीशन ने अगस्त में फैसला किया था कि 26 अक्टूबर को उनका दूसरा तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे, जिससे उत्तराधिकार की एक अनियोजित और तेज प्रक्रिया शुरू हो गई।

वे ऐसे समय में कार्यभार संभाल रहे हैं जब मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं और धीमी परफॉर्मेंस से जूझ रहा है।

नए CEO की घोषणा के बाद HDFC बैंक के ADR शेयरों में लगभग 5% की बढ़त हुई।

टेक्निकल आउटलुक

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के फाउंडर गौरव उदाणी ने कहा “निफ्टी के लगभग 115 अंक ऊपर, यानी 22,535 के आसपास खुलने की उम्मीद है, जो एक मजबूत गैप-अप शुरुआत का संकेत है। हाल की कमजोरी और इंडेक्स के अहम 22,500 ज़ोन के आसपास बंद होने के बाद, यह रिकवरी उत्साहजनक है, लेकिन बढ़त को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

“तत्काल सपोर्ट 22,450–22,500 के आसपास है, जबकि 22,750–22,850 पहला रेजिस्टेंस ज़ोन होगा। अगर निफ्टी 22,850 के ऊपर बना रहता है, तो रिकवरी 23,000 की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, मैं शुरुआती चाल के पीछे भागने से बचूंगा और इसके बजाय गिरावट पर खरीदारी के मौके तलाशूंगा, बशर्ते इंडेक्स अहम सपोर्ट ज़ोन को बनाए रखे। व्यापक ट्रेंड सतर्कता वाला बना हुआ है, और निकट अवधि के सेटअप में सार्थक सुधार के लिए 23,050 के ऊपर लगातार बने रहना जरूरी होगा। तब तक, उतार-चढ़ाव और इंट्राडे में अचानक बड़े बदलावों से इनकार नहीं किया जा सकता है।”

 

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HDFC Bank के नए CEO के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्या नई लीडरशिप निवेशकों का भरोसा लौटा पाएगी?

HDFC Bank के MD और CEO शशिधर जगदीशन के पद छोड़ने के फैसले के बाद अब नए CEO की तलाश शुरू हो गई है। यह सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं है। बैंक के सामने निवेशकों का भरोसा लौटाने और गवर्नेंस से जुड़े सवालों को पीछे छोड़ने की भी बड़ी चुनौती है।

बैंक ने शनिवार को बताया कि शशिधर जगदीशन दोबारा नियुक्ति नहीं लेंगे। उनके पद छोड़ने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल को बढ़ाने की अटकलें चल रही थीं। उनका आखिरी वर्किंग डे 26 अक्टूबर होगा। अब बैंक का बोर्ड नए CEO की नियुक्ति के लिए RBI से मंजूरी मांगेगा। नया CEO बैंक के भीतर से भी हो सकता है और बाहर से भी।

2020 में संभाली थी बैंक की कमान

शशिधर जगदीशन HDFC Bank में करीब तीन दशक से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2020 में आदित्य पुरी के बाद बैंक की कमान संभाली थी। आदित्य पुरी ने 20 साल से ज्यादा समय तक बैंक का नेतृत्व किया था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जगदीशन के कार्यकाल में बैंक की बैलेंस शीट तेजी से बढ़ी। उनके नेतृत्व में 2023 में HDFC Bank का देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC Ltd के साथ मर्जर भी हुआ। हालांकि, उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में बैंक के नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े हुए।

IIFL Capital ने क्या कहा?

IIFL Capital के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिकिन शाह का कहना है कि जगदीशन का दोबारा नियुक्ति नहीं लेना शेयर के लिए बनी बड़ी अनिश्चितता को खत्म कर सकता है। उनका मानना है कि अगर RBI छोटा कार्यकाल मंजूर करता, तो शेयर पर दबाव और लंबे समय तक बना रह सकता था।

शाह के मुताबिक, अगर बैंक किसी भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार को CEO बनाता है, तो इससे नेतृत्व में नया बदलाव देखने को मिल सकता है। नए CEO को बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय भी मिल सकता है।

शेयर ने इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया

HDFC Bank भारत का सबसे मूल्यवान बैंक है। इसका मार्केट कैप करीब 116 अरब डॉलर है। इसके बावजूद इस साल बैंक का शेयर दबाव में रहा है।

इस साल शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले Nifty Bank में सिर्फ 3.5% की गिरावट रही है। HDFC Bank का यह प्रदर्शन अपने बैंकिंग इंडेक्स और बड़े प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। 2003 के बाद यह बैंक के शेयर का सबसे खराब रिलेटिव प्रदर्शन है।

गवर्नेंस को लेकर क्यों उठे सवाल?

पिछले कुछ समय में बैंक को कई विवादों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल दुबई के स्थानीय रेगुलेटर ने प्रोसेस में खामियां मिलने के बाद HDFC Bank की दुबई ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था।

मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मतभेदों का हवाला दिया था। बाद में उन्होंने कहा कि दुबई रेगुलेटर से जुड़े मुद्दों को बैंक ने जिस तरह संभाला, उससे उन्हें चिंता हुई थी। हालांकि, HDFC Bank ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। RBI ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा है कि बैंक में गवर्नेंस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।

बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग पर कार्रवाई

बैंक पर सवाल तब और बढ़े, जब एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बैंक ने एक सरकारी कंपनी को ज्यादा ब्याज दिया। इसे कथित तौर पर मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।

जुलाई में बैंक के बोर्ड ने इस मामले में जगदीशन समेत तीन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की। बोर्ड ने कहा कि डिपॉजिट रेट तय करने से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अपनी व्यावसायिक सीमा से आगे जाकर फैसले लिए थे।

बैंक के सामने अमेरिका में शेयरधारकों की संभावित कानूनी कार्रवाई का भी जोखिम है। निवेशकों ने मिस-सेलिंग के आरोप भी लगाए हैं। बैंक ने कहा है कि वह इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेगा।

नए CEO का जल्दी चयन जरूरी

नए CEO की नियुक्ति में ज्यादा देरी बैंक के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर सकती है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद यह दबाव पहले ही बढ़ चुका है।

अब निवेशक यह देखेंगे कि नया CEO कौन बनता है। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि नेतृत्व परिवर्तन कितनी आसानी से होता है। नए CEO को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत है और बैंक की ग्रोथ पर पूरा फोकस रहेगा।

HDFC Ltd के मर्जर की चुनौतियां

2023 में HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर के बाद बैंक को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मर्जर के बाद बैंक के पास लंबी अवधि वाले होम लोन का बड़ा पोर्टफोलियो आ गया। इससे बैंक की लिक्विडिटी और मार्जिन पर दबाव पड़ा है।

नए CEO के सामने इन चुनौतियों को संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। बैंक को मर्जर का पूरा फायदा निकालने के साथ अपनी ग्रोथ और मुनाफे में सुधार करना होगा।

बाजार के लिए क्यों अहम है HDFC Bank?

HDFC Bank की Nifty 50 में करीब 10% हिस्सेदारी है। इसलिए इस शेयर की बड़ी चाल का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ सकता है। बैंक के शेयर में गिरावट ने हाल के समय में Nifty पर भी दबाव बनाया है।

Nifty 50 में इस साल करीब 7.5% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले MSCI Asia Pacific Index करीब 22% चढ़ा है। ऐसे में HDFC Bank के शेयर का कमजोर प्रदर्शन भारतीय बाजार के लिए भी एक अहम मुद्दा बन गया है।

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक की कमान कौन संभालता है। निवेशक नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया, नए CEO के आने के बाद बैंक की ग्रोथ और गवर्नेंस मानकों को भी करीब से देखेंगे। अब नया नेतृत्व ही तय करेगा कि HDFC Bank आगे कितनी जल्दी निवेशकों का भरोसा वापस जीत पाता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।