शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 876 अंक टूटा

घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को चौतरफा बिकवाली देखी गई और बीएसई का सेंसेक्स 876 अंक की गिरावट में बंद हुआ।

सेंसेक्स सुबह 120 अंक की तेजी के साथ 74,849 अंक पर खुला, लेकिन तुरंत गिरावट में चला गया। बीच कारोबार में 73,708.54 अंक तक उतरने के बाद अंत में 876.37 अंक (1.17 प्रतिशत) टूटकर 73,852.90 अंक पर रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 257.20 अंक यानी 1.11 प्रतिशत नीचे 22,888.95 अंक पर बंद हुआ।

पिछले कारोबारी दिवस पर दोनों प्रमुख सूचकांक तीन सप्ताह से अधिक के उच्चतम स्तर पर रहे थे। वृहत बाजार में भी सभी सूचकांकों में गिरावट रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.28 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 1.08 प्रतिशत उतर गया। सेक्टर आधारित सूचकांकों में सार्वजनिक बैंकों को छोड़कर अन्य सभी समूहों के सूचकांक लाल निशान में रहे।

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वित्त, एफएमसीजी, आईटी, निजी बैंक, रियल्टी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और रसायन समूहों के सूचकांक एक से दो प्रतिशत तक की गिरावट में रहे। सेंसेक्स की कंपनियों में एक्सिस बैंक का शेयर करीब चार फीसदी टूट गया। अल्ट्राटेक सीमेंट, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनीलिवर में दो से तीन प्रतिशत की गिरावट रही। बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इटरनल और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर एक से दो प्रतिशत तक के नुकसान में रहे।

टाटा स्टील, सन फार्मा, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा और पावरग्रिड के शेयर भी टूट गए।

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शेयर बाजारों में गिरावट, सेंसेक्स 252 अंक फिसला

बैंकिंग, वित्त और ऑटो कंपनियों में बिकवाली के दबाव में घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को गिरावट रही। बीएसई का सेंसेक्स 251.89 अंक (0.34 प्रतिशत) टूटकर 72,781.89 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। सेंसेक्स ऊपर 73,195 अंक और नीचे 72,579 अंक तक गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 99.25 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 22,622.70 अंक पर रहा। पिछले कारोबारी दिवस पर दोनों प्रमुख सूचकांकों में डेढ़ फीसदी से अधिक की जबरदस्त तेजी रही थी।

वृहत बाजार में अधिकतर सूचकांक लाल निशान में रहे। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.05 प्रतिशत ऊपर रहा। स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.29 प्रतिशत फिसल गया।

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बैंकिंग, वित्त, फार्मा, ऑटो, स्वास्थ्य, रियल्टी और सीमेंट समूहों में बिकवाली हावी रही। आईटी, एफएमसीजी, तेल एवं गैस और मीडिया समूहों में लिवाली का जोर रहा।

सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस का शेयर ढाई प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा का सवा दो प्रतिशत गिर गया। बजाज फिनसर्व, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, सन फार्मा और एलएंडटी के शेयर एक से दो प्रतिशत तक टूट गए। अडानी पोर्ट्स, टाइटन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक और पावरग्रिड के शेयर भी लाल निशान में रहे।

इंफोसिस का शेयर ढाई प्रतिशत और टेक महिंद्रा का करीब सवा प्रतिशत चढ़ा। टीसीएस, हिंदुस्तान यूनीलिवर, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, बीईएल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर भी हरे निशान में रहे।

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Gold Silver Outlook: शॉर्ट टर्म में इस कारण अहम रहेगी सोने-चांदी चाल, एक्सपर्ट्स से जानिए क्या त्योहारों में बढ़ेंगे दाम

Gold Silver Outlook: सोने और चांदी की कीमतों में 13 अक्टूबर को स्थिरता देखने को मिली। अमेरिका के महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर के सोने के वायदा (futures) का भाव ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम था, जिसमें 0.01% की गिरावट आई। दिसंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा का कारोबार ₹2.22 लाख प्रति किलोग्राम पर हुआ, जिसमें 0.05% की गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है क्योंकि बाज़ार अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर फिर से विचार कर रहे हैं। हालांकि ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने से बुलियन (सोने-चांदी) को सहारा मिल सकता है, लेकिन बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और डॉलर का मजबूत होना अभी भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त हो रही है, हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता आगे की बढ़त को सीमित कर सकती है।

उन्होंने कहा कि निवेशक महंगाई और फेड के अगले नीतिगत कदमों के बारे में नए संकेतों के लिए अमेरिका के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़ों का इंतज़ार कर रहे हैं।

कीमतों में उतार-चढ़ाव क्यों?

सोने और चांदी से कोई ब्याज आय नहीं मिलती है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है या बाज़ार को उम्मीद होती है कि ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी, तो निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों को ज़्यादा आकर्षक मान सकते हैं, जिससे बुलियन की कीमतों पर दबाव पड़ता है। इसके विपरीत, डॉलर का कमजोर होना और ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीदें कीमती धातुओं को सहारा दे सकती हैं।

वेंचुरा (Ventura) में कमोडिटी हेड एन एस रामास्वामी ने कहा कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि कमजोर पेरोल आंकड़ों के बाद बाज़ार में अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि साल के आखिर में और 2027 की पहली छमाही में ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कीमतों पर असर डाल सकती हैं।

जियोपॉलिटिकल तनाव भी ऊर्जा की कीमतों पर असर डालकर बुलियन को प्रभावित कर रहे हैं। रामास्वामी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंताओं और ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों को और बढ़ा सकती हैं, जिससे सोने के लिए निकट भविष्य में चुनौतीपूर्ण माहौल बन सकता है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स में रिसर्च हेड, राजीव शरण ने कहा कि सोने की कीमतों पर सिर्फ़ जियोपॉलिटिकल घटनाओं के बजाय कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का ज़्यादा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कीमतों में और गिरावट आने पर त्योहारों के मौसम से पहले खरीदारी बढ़ सकती है।

निवेशकों को आगे किस चीज़ पर नजर रखनी चाहिए?

अमेरिकी महंगाई के आंकड़े बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम कारक हैं। उम्मीद से ज़्यादा महंगाई से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो सकती हैं, जबकि कम महंगाई के आंकड़े मॉनेटरी टाइटनिंग (मौद्रिक सख्ती) की चिंताओं को कम करके कीमतों को सहारा दे सकते हैं।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि सोने और चांदी के लिए निकट भविष्य का आउटलुक सतर्कता वाला बना हुआ है। उन्होंने अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और महंगाई के आंकड़ों को नज़र रखने के लिए अहम कारक बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि करेंसी में उतार-चढ़ाव भी घरेलू बुलियन की कीमतों पर असर डालते हैं क्योंकि भारत अपना ज़्यादातर सोना और चांदी आयात करता है।

भारतीय खरीदारों के लिए, कमज़ोर रुपया आयातित बुलियन को महंगा बना सकता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर हों या गिर रही हों। घरेलू कीमतें आयात शुल्क और स्थानीय मांग से भी प्रभावित होती हैं।

क्या त्योहारों का मौसम सोने को मिलेगा सहारा

धनतेरस और दिवाली से पहले गहनों की खरीदारी से घरेलू सोने की मांग को सहारा मिल सकता है, हालांकि रिटेल खरीदारी से कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी हो ज़रूरी नहीं है।

रामास्वामी को उम्मीद है कि दिवाली से पहले सोना ₹1.50 लाख से ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा, और त्योहारों की मांग के पीक समय के बाद इसमें कंसोलिडेशन (स्थिरता) हो सकता है। यह बाज़ार का एक अनुमानित आउटलुक है, न कि कीमतों की गारंटी वाली रेंज।

VT मार्केट्स के प्रिंसिपल एनालिस्ट डैनियल मुंडे ने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में साप्ताहिक निवेश से पता चलता है कि कुछ निवेशक कीमतों में गिरावट का इस्तेमाल अपनी पोजीशन बनाने और अनिश्चितता से बचाव (हेजिंग) के लिए कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि महंगाई के मज़बूत आंकड़े और ब्याज दरें बढ़ने की नई उम्मीदें रिकवरी को धीमा कर सकती हैं।

निवेशकों के लिए, शॉर्ट-टर्म रिबाउंड (अल्पकालिक उछाल) और दिशा में लगातार बदलाव के बीच का अंतर समझना ज़रूरी है। डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, महंगाई के आंकड़े, कच्चा तेल और निवेश का प्रवाह यह तय करने में मदद करेंगे कि सोना और चांदी रिकवर कर सकते हैं या दबाव में रहेंगे।

 

Gold- Silver price: सोना ₹1.50 लाख के नीचे, चांदी हुई सस्ती, अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bonus Share: 3 साल में 455% चढ़ी कीमत, अब मिलेंगे बोनस शेयर; 23 अक्टूबर रिकॉर्ड डेट

टाइटन बायोटेक बोनस शेयर देने जा रही है। शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 4 शेयरों पर एक नया शेयर बोनस के तौर पर​ मिलेगा। रिकॉर्ड डेट 23 अक्टूबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे बोनस शेयरों के हकदार होंगे। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है।

बोनस शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को होगा और इनमें ट्रेडिंग 27 अक्टूबर से की जा सकेगी। टाइटन बायोटेक फार्मास्यूटिकल, न्यूट्रास्यूटिकल, फूड एंड बेवरेजेस, बायोटेक्नोलॉजी एंड फर्मेंटेशन, कॉस्मेटिक, वेटेरिनरी एंड एनिमल फीड, एग्रीकल्चर इंडस्ट्रीज, माइक्रोबायोलॉजी कल्चर मीडिया एंड प्लांट टिश्यू कल्चर मीडिया आदि के क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं।

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, यह क्लिनिकली अप्रूव्ड कोलाजन (मछली, बोवाइन और चिकन), स्किन केयर इंग्रीडिएंट्स, बोन व जॉइंट केयर इंग्रीडिएंट्स, प्रोटीन, पशु पोषण के लिए इंग्रीडिएंट्स और कई अन्य चीजें बनाती है। कंपनी पिछले 34 सालों से बिजनेस कर रही है और इसकी मौजूदगी 100 से ज्यादा देशों में है।

Titan Biotech शेयर 2 साल में 175 प्रतिशत चढ़ा

वर्तमान में टाइटन बायोटेक के शेयर की कीमत BSE पर 398.70 रुपये है। शेयर साल 2026 में अब तक लगभग 90 प्रतिशत चढ़ा है। 2 साल में कीमत 175 प्रतिशत और और 3 साल में 455 प्रतिशत उछली है। 10 साल में शेयर 5100 प्रतिशत की बढ़त देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 55.78 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 555.65 रुपये और एडजस्टेड लो 171.40 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में टाइटन बायोटेक का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 59.17 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 9.46 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। प्रति शेयर अर्निंग 2.29 करोड़ रुपये रही। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 206.19 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 27.45 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 6.64 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी, सेंसेक्स 1,100 अंक से ज्यादा चढ़ा

Sensex

घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को जबरदस्त तेजी देखी गई और बीएसई का सेंसेक्स 1,100 अंक से अधिक की बढ़त में बंद हुआ।

सेंसेक्स पिछले कारोबारी दिवस के मुकाबले सुबह 27 अंक की तेजी के साथ 71,951.73 अंक पर खुला। खुलते ही यह लाल निशान में 71,703.56 अंक तक उतर गया लेकिन फिर तुरंत हरे निशान में आ गया।

अंत में सेंसेक्स 1,109.10 अंक (1.54 प्रतिशत) चढ़कर 73,033.78 अंक पर रहा। इससे पहले यह ऊपर 73,045.67 अंक तक गया था। इस प्रकार आज इसमें 1,342 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी सुबह सपाट खुलने के बाद अंत में 358.60 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की बढ़त में 22,721.95 अंक पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिवस पर दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे थे।

रुपये में लगातार दूसरे दिन जारी तेजी से शेयर बाजार में निवेश धारणा मजबूत हुई है। अच्छे तिमाही परिणामों से आईटी कंपनियों में ज्यादा तेजी रही। वृहत बाजार में भी चौतरफा लिवाली रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.87 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.11 प्रतिशत मजबूत हुआ।

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अच्छे तिमाही परिणामों के कारण आईटी कंपनियों में लिवाली रही। निफ्टी आईटी सूचकांक 5.22 प्रतिशत उछल गया। रियल्टी समूह का सूचकांक 2.46 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। ऑटो, बैंकिंग, वित्त, एफएमसीजी, धातु और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों के सूचकांक भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त में रहे।

सेंसेक्स की कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर आठ प्रतिशत से ज्यादा उछल गया। कंपनी ने सोमवार को बताया था कि मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में उसका शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 21.2 प्रतिशत बढ़कर 5,132 करोड़ रुपये और राजस्व 11.5 फीसदी बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

अन्य आईटी कंपनियों में टीसीएस का शेयर साढ़े छह प्रतिशत, टेक महिंद्रा का करीब पांच प्रतिशत और इंफोसिस का साढ़े चार प्रतिशत की बढ़त में रहा।

हिंदुस्तान यूनीलिवर, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस के शेयर दो से तीन प्रतिशत तक चढ़े। टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बीईएल, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और एक्सिस बैंक के शेयर एक से दो प्रतिशत तक मजूबत हुए। रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, अडानी पोर्ट्स और पावरग्रिड के शेयर भी भी हरे निशान में रहे।

कोटक महिंद्रा बैक, इटरनल और मारुति सुजुकी के शेयरों में गिरावट रही।

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Market Outlook : बाजार में दिखी जोरदार तेजी, जानिए 12 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद सेंसेक्स 879 अंक यानी 1.23%) बढ़कर 72,472 पर और निफ्टी 289 अंक यानी 1.30% बढ़कर 22,520 पर बंद हुआ। बाज़ार का रुख पॉजिटिव रहा। 2,344 शेयरों में बढ़त हुई जबकि 1,686 शेयरों में गिरावट आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो IT सेक्टर में सबसे ज़्यादा 3.02% की तेज़ी रही, जबकि FMCG में 2.25% और PSU बैंकों में 1.62% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में 1.46% और स्मॉलकैप शेयरों में 0.55% की बढ़त हुई, वहीं इंडिया VIX में 6.09% की गिरावट आई। TCS, ITC और अपोलो हॉस्पिटल्स में से हर एक में 4% से ज़्यादा की बढ़त हुई और ये निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद, वैल्यू बाइंग और शॉर्ट कवरिंग के दम पर घरेलू इक्विटी मार्केट में राहत भरी रैली देखने को मिली। Q2 अर्निंग्स सीज़न की मज़बूत शुरुआत और AI-आधारित रेवेन्यू के मौकों पर बढ़ते भरोसे के कारण IT शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के मिड-टर्म चुनावों से पहले होने की संभावना कम होने के संकेतों से भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुईं। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और बाज़ार के सेंटीमेंट में सुधार हुआ। हालांकि, लगातार हो रही FII की बिकवाली और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी, रिकवरी की उम्मीदों पर दबाव बनाए हुए है। RBI के ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) के रुख के बाद, निवेशक अब ब्याज दरों की चाल के बारे में और संकेतों के लिए सोमवार को आने वाले घरेलू CPI डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं। आगे चलकर, Q2 के नतीजे (जिसके सालाना आधार पर अच्छा रहने का अनुमान है) बाज़ार में आई तेज़ी के बने रहने के लिहाज़ से अहम होंगे।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि आज शुक्रवार को निफ्टी में अच्छी रिकवरी दिखी और इसमें 1% से ज़्यादा की बढ़त हुई। हालांकि, यह 22,600 के आसपास बने 50EMA के लेवल को पार नहीं कर पाया। अगर इंडेक्स 22,600–22,650 के रेजिस्टेंस ज़ोन के ऊपर जाता है तो शॉर्ट-टर्म ट्रेंड में सुधार हो सकता है और रिकवरी जारी रह सकती है। लेकिन, अगर यह इस ज़ोन को पार नहीं कर पाता है, तो बाज़ार में फिर से कमज़ोरी आ सकती है। निचले स्तर पर इसके लिए 22,450, 22,350 और 22,100 पर सपोर्ट हैं।

360 ONE वेल्थ की प्रेसिडेंट अनु जैन ने एक अहम टेक्निकल गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा कि मार्केट अपने 200 वीक के मूविंग एवरेज (जो एक लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है) से नीचे आ गया है। इससे पता चलता है कि एडजस्टमेंट का दौर अभी और चल सकता है। या तो कीमतें और गिर सकती हैं या फिर लंबे समय तक कंसोलिडेशन का दौर रह सकता है। इससे पता चलता है कि अभी और मुश्किल दौर आ सकता है। टेक्निकल इंडीकेटर बताते हैं कि बाजार में अभी और गिरावट की गुंजाइश है।

बजाज ऑल्ट्स की ग्रुप प्रेसिडेंट (इन्वेस्टमेंट्स) और मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO लक्ष्मी अय्यर ने हाल में आई गिरावट को मार्केट में बनी अस्वाभाविक तेजी ज़रूरी सफ़ाई बताते हुए कहा है कि मोमेंटम इंडिकेटर कमज़ोर हुए हैं और मार्केट के मज़बूत स्थिति में आने से पहले निवेशकों को और उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। अय्यर ने मौजूदा दौर की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा क पहले ज़हर मिलेगा, लेकिन आपको अमृत का इंतज़ार करना होगा। यानी असल वैल्यू सामने आने से पहले उथल-पुथल का दौर देखने को मिलेगा।

अभी हर जगह वैल्यूएशन की स्थिति सही नहीं है। अय्यर ने कहा कि वैल्यूएशन अब धीरे-धीरे सही स्तर की ओर बढ़ रहे हैं और बाज़ार के कुछ हिस्सों में ये लंबे समय के औसत से नीचे आ गए हैं। लार्ज-कैप की वैल्यूएशन ठीक लग रही है, लेकिन कई सालों की ज़बरदस्त री-रेटिंग के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप में अभी भी बहुत ज़्यादा राहत की गुंजाइश नहीं दिख रही है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड कैप स्टॉक लार्जकैप के मुकाबले 55-60% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं और स्मॉल-कैप में भी लगभग इतना ही प्रीमियम मिल रहा है। फिर भी, उनका कहना है कि कई मिड साइज़ कंपनियों की अर्निंग में मज़बूती बनी हुई है, इसलिए यह बिना सोचे-समझे खरीदारी करने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने वालों का बाज़ार है। यह स्टॉक पिकर्स) का बाज़ार है।

नुवामा एसेट मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट और हेड, अंशु कपूर की राय है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए भारत अभी भी पसंदीदा मार्केट नहीं है, क्योंकि दूसरे मार्केट में तुलनात्मक रूप से बेहतर मौके मिल रहे हैं। उनका कहना यह नहीं है कि भारत का स्ट्रक्चरल आकर्षण खत्म हो गया है, बल्कि यह है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव की वजह से निकट भविष्य में कुछ और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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मौद्रिक समाधान काफी नहीं

चुनौतियों की वजह अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला भंग होने तथा अर्थव्यवस्था की कमजोरियों में छिपी हो, तो मौद्रिक नीति जैसे बैंड-एड नाकाफी साबित होते हैं, जबकि उनके साइड इफेक्ट्स से नई दिक्कतें सामने आती हैं। 

फिलहाल ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति के मामले में अपना रुख “न्यूट्रल” से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” कर दिया है। इसका अर्थ है कि आगे ब्याज दर स्थिर रहेगी या बढ़ेगी, लेकिन यह घटेगी नहीं। फिलहाल संभावना यही है कि इस वित्त वर्ष में ब्याज दर और बढ़ेगी। पश्चिम एशिया के युद्ध से उपजे ऊर्जा एवं कमोडिटी संकट और धनी देशों में बॉन्ड ब्याज दर बढ़ने से दरपेश चुनौतियों के बीच रिजर्व बैंक के पास इसके अलावा शायद ही कोई और चारा है। भारत में अब ब्याज दर 5.5 प्रतिशत होने के बाद उम्मीद जताई गई है कि यहां से हो रहे पूंजी पलायन को रोकने में कुछ सहायता मिलेगी। ऐसा हुआ तो रुपये की गिरती कीमत को संभालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

लेकिन बुधवार को ब्याज दर में वृद्धि के एलान के बावजूद रुपया पांच महीने के निचले स्तर तक गिर गया। स्पष्टतः नई मौद्रिक नीति भी रुपये को सहारा देने के लिहाज से पर्याप्त साबित नहीं हुई। जबकि नई नीति से महंगाई और बढ़ सकती है। खुद आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगली तीन तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के औसतन लगभग 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। अगस्त में ये दर पांच फीसदी थी। नई दर की घोषणा के बाद शेयर बाजार में ऑटो एवं उपभोक्ता सामग्री से जुड़ी कंपनियों और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों के शेयरों पर उलटा असर पड़ा।

दरअसल, ऊंची ब्याज दर के कारण कार, घर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महंगे सामानों के लिए ऋण लेना महंगा हो जाएगा। इससे अनेक ग्राहकों की खरीदारी क्षमता प्रभावित होगी। इस कदम का खराब असर कच्चे माल (जैसे तांबा, स्टील), परिवहन भाड़ा और ए.सी., टीवी, फ्रिज जैसी वस्तुओं के दाम पर भी पड़ सकता है। ये सामान 5-8 प्रतिशत तक और महंगे हो सकते हैं। तो कुल सूरत बिगड़ेगी। दरअसल, जब चुनौतियों की वजह अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला के भंग होने तथा अर्थव्यवस्था की मूलभूत कमजोरियों में छिपी हो, तो मौद्रिक नीति जैसे बैंड-एड नाकाफी साबित होते हैं, जबकि इनके साइड इफेक्ट्स से नई दिक्कतें सामने आ जाती हैं।

Market View : बाजार का ढ़ांचा कमजोर, एक्सपर्ट्स जानिए अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Market View : ग्लोबल मार्केट में बिकवाली का असर भारतीय इक्विटी इंडेक्स पर भी पड़ा। US बॉन्ड यील्ड में तेजी और इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर $102 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के कारण बेंचमार्क निफ्टी 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गया। FII द्वारा घरेलू शेयरों की भारी बिकवाली और RBI द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका से भी लोकल इन्वेस्टर्स में घबराहट है,क्योंकि ऊंची ब्याज दरों से लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा। इसके चलते 8 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई और निफ्टी 22,250 के स्तर से नीचे आ गया। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64% गिरकर 22,231.80 पर आ गया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि घरेलू बाजार में आज भारी बिकवाली का दौर जारी रहा। RBI की सख़्त पॉलिसी का असर उन सेक्टर्स पर पड़ा जो ब्याज दरों में बदलाव के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म वैल्यूएशन मल्टीपल्स में बदलाव आया। FII की लगातार निकासी,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की गिरती कीमत ने इस दबाव को और बढ़ा दिया।

इसके अलावा,कच्चे तेल की कीमतों में वोलैटिलिटी,जो लगातार $100 के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं,देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। अच्छे हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा से मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का पता चलता है, जबकि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना इक्विटी वैल्यूएशन को दबाए हुए है।

मार्जिन से जुड़ी चिंताओं और टैक्टिकल प्रॉफ़िट बुकिंग के बीच मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सुस्ती रही। आगे बाज़ार का फोकस अब Q2 अर्निंग्स सीज़न पर है,जहां डिमांड की स्थिरता और इनपुट कॉस्ट को संभालने के बारे में मैनेजमेंट की कमेंट्री शॉर्ट-टर्म के लिए बाजार की दिशा तय करेंगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP-रिसर्च,अजीत मिश्रा का कहना है कि गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और बाजार लगभग 1.5 फीसदी नीचे आ गया। कमजोर शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स ज्यादातर समय दबाव में रहे और अंत में दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुए। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही।

सेक्टर के लिहाज से देखें तो बिकवाली हर तरफ थी। मेटल, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई,जबकि IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जिसने कुछ हद तक मजबूती दिखाई।

ब्रॉडर मार्केट में और भी तेज बिकवाली हुई इससे मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों इंडेक्स 2% से ज्यादा गिरे। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में जोखिम लेने से बचा जा रहा है और बाजार का दायरा (मार्केट ब्रेड्थ) कमजोर हो रहा है।

घरेलू और ग्लोबल मैक्रो चिंताओं का बाजार के सेंटीमेंट पर भारी असर रहा। RBI के रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.50% करने और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) की ओर रुख करने के फैसले से वित्तीय हालात के और सख्त होने की चिंता बढ़ गई है। साथ ही,भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत $102–103 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गई। जबकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3% के आसपास ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। TCS के तिमाही नतीजों से पहले सावधानी का माहौल और IT सेक्टर में घबराहट ने भी बाजार पर असर डाला।

तकनीकी तौर पर,मामूली सुधार (पुलबैक) के बाद निफ़्टी ने एक बार फिर अप्रैल 2026 के निचले स्तर 22,182.55 को टेस्ट किया है जो मौजूदा ढांचे में और कमजोरी का संकेत है। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो बाजार 21,700–22,000 के जोन की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ़,22,400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है और उसके बाद 22,700–22,800 अगला बड़ा रेजिस्टेंस हो सकता है। मौजूदा गिरावट के दौर में इंडेक्स के नए निचले स्तर बनाने और बाजार के दायरे में तेजी से गिरावट के कारण,निकट भविष्य के लिए सतर्क रहने की ज़रूरत है।

बाजार में अपनी पोजीशन उसी हिसाब से बनानी चाहिए और हेज्ड अप्रोच (जोखिम कम करने वाला तरीका) अपनाना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि अर्निंग सीजन के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स में गिरावट जारी रही और यह पिछले सेशन के निचले स्तर से भी नीचे चला गया। पूरे सेशन के दौरान मंदड़ियों का दबदबा बना रहा और तेजड़ियों को कोई राहत नहीं मिली।

चाहे वह आवरली चार्ट हो या वीकली चार्ट, इंडेक्स क्रिटिकल मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। यह लगातार बनी कमजोरी का संकेत है। हालात निराशाजनक लग रहे हैं और यह माहौल कुछ और दिनों तक ऐसा ही बना रह सकता है।

RSI बेयरिश क्रॉसओवर में है और ओवरसोल्ड जोन में बना हुआ है। निचले स्तर पर निफ्टी के लिए 22180 पर सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स में और गिरावट आ सकती है और यह 22000 के स्तर तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 22350 पर रेजिस्टेंस है।

 

Market Outlook : कमजोर नोट पर बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 9 सितंबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन गिरी, चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: घरेलू बाजार में सोने की कीमत में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। बुधवार को दिल्ली में सोना 700 रुपये सस्ता हुआ। इसका भाव 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मंगलवार को यह 1,49,600 रुपये पर था।

24 कैरेट वाला सोना भी एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। 29 सितंबर को इसका भाव 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

कमजोर मांग का असर

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की मांग कमजोर रही। ऊपर से ग्लोबल मार्केट में भी संकेत अच्छे नहीं थे। इसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ा।

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके कारण क्रूड की कीमत फिर चढ़ी। इसका भी सोने पर दबाव पड़ा।

रुपये की कमजोरी ने संभाला

हालांकि, रुपये की कमजोरी ने सोने की कीमत को ज्यादा गिरने से रोक दिया। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 43 पैसे टूटकर 96.78 के स्तर पर बंद हुआ।

कमजोर रुपया आमतौर पर भारत में आयात होने वाले सोने को महंगा करता है। इसलिए घरेलू बाजार में सोने की गिरावट कुछ सीमित रही।

चांदी 2.27 लाख रुपये पर स्थिर

चांदी की कीमत में बुधवार को कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है, जब चांदी 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है।

हालांकि, ग्लोबल मार्केट में चांदी की हालत कमजोर रही। इसकी कीमत 2.26% गिरकर 59.97 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यह करीब तीन महीने का निचला स्तर है। चांदी इससे पहले 9 जुलाई को इस स्तर के आसपास थी।

ग्लोबल मार्केट में सोना भी दबाव में

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 47.42 डॉलर यानी 1.14% गिरकर 4,116.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। ग्लोबल ट्रेड में सोना करीब 4,120 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

मुद्रेक्स के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर है। इससे आगे ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

मजबूत डॉलर भी बना दबाव

डॉलर इस समय करीब 18 महीने के उच्च स्तर पर है। मजबूत डॉलर से सोने की कीमत पर दबाव बढ़ता है। दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 70% मानी जा रही है।

यानी फिलहाल सोने के लिए माहौल बहुत मजबूत नहीं दिख रहा। ग्लोबल ब्याज दरों और डॉलर की चाल आगे भी इसकी कीमत तय करने में अहम रहेगी।

RBI की दर बढ़ोतरी से भी बदला माहौल

इधर, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बुधवार को बड़ा फैसला लिया। RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बढ़ोतरी है।

RBI ने यह कदम बढ़ती महंगाई और कमजोर रुपये के बीच उठाया है। केंद्रीय बैंक ने आगे भी दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

आगे 75 बेसिस प्वाइंट बढ़ोतरी की उम्मीद

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट राधिका पिपलानी के मुताबिक, RBI ने अपना रुख न्यूट्रल से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

उनका मानना है कि इस साइकिल में RBI कुल 75 बेसिस प्वाइंट तक दरें बढ़ा सकता है। इससे रेपो रेट 6.25% तक पहुंच सकता है। इसमें दिसंबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी भी शामिल है। बाजार इस बढ़ोतरी की काफी हद तक उम्मीद पहले से कर रहा है।

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RBI MPC: तेजी से बढ़ रही ग्रोथ, आरबीआई की सख्ती, शेयर दबाव में, अब आगे क्या?

केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की और इसे 5.5% कर दिया। मार्केट को इसने हैरान नहीं किया, क्योंकि इसकी उम्मीद पहले से ही थी। हालांकि कुछ और बातें ऐसी रही, जिसने मार्केट का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरबीआई ने ग्रोथ का अनुमान तेजी से बढ़ाया तो दूसरी तरफ महंगाई का भी अनुमान बढ़ाया है और साथ ही अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया तो महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% किया।

मार्केट में मिला-जुला रुझान

आरबीआई के रुझान से मार्केट को मिला-जुला संकेत मिला। जीडीपी अपग्रेड निश्चित रूप से कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी बात है लेकिन महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से यह संकेत मिला कि दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है। आरबीआई गवर्नर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं।

वैसे मार्केट पहले से ही कमजोर है। पिछले महीने सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरकर 22,620 तक आ गया था, जोकि मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी तो सेंसेक्स 5.8% गिरकर 72,480 पर आ गया। साथ ही अक्टूबर में एंट्री करते ही इसने लगातार आठ हफ्तों की लगातार गिरावट दिखाई, जो 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। आरबीआई के 5 अगस्त के पॉलिसी पॉज के बाद इंडेक्स लगभग 7.5% गिर चुका है।

अब आगे क्या

आरबीआई ने अपने आउटलुक से यह संकेत दिया है कि इसका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन पर है। वैसे भी जून 2026 तिमाही में भारतीय इकॉनमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी जोकि आरबीआई के पहले के अनुमान 7% से अधिक रही। अब आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनियों की मांग और रेवेन्यू की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

अब सबसे बड़ी परीक्षा सितंबर तिमाही के नतीजे को लेकर है। निफ्टी 50 की कंपनियों से रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना करीब 20% के ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि तेल और कच्चे माल की लागत में उछाल से रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पूरा फायदा प्रॉफिट में नहीं बदल सकता है और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 100-150 बीपीएस की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में असली सवाल ये रहेगा कि कंपनियां बढ़ती लागत को कितना सोख सकती है और ईबीआईटीडीए मार्जिन कितना बचा सकती हैं। सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे पर तो मार्केट की नजर रहेगी ही लेकिन इसके अलावा आगे यह भी देखना होगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री क्या रहती है, क्या कंपनियों के पास प्राइसिंग पावर है, और वित्त वर्ष 2027 में डिमांड कैसी रहती है।

फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।

कंक्लूजन

बाजार का समीकरण बदल चुका है। 7.1% GDP ग्रोथ से कमाई का निचला स्तर तय होता है तो महंगाई की 5.2% की रफ्तार और 5.5% रेपो रेट से वैल्यूएशन रीरेटिंग की ऊपरी सीमा तय होती है। सितंबर में निफ्टी पहले ही लगभग 6% और अगस्त की पॉलिसी के बाद से लगभग 8% गिर चुका है, इसलिए अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कंपनी की कमाई उम्मीदों से बेहतर हो सकती है। फिलहाल आरबीआई ने सस्ते कर्ज की संभावना खत्म कर दी है तो इक्विटी को बड़े बदलाव की जरूरत है। खास बात ये है कि भारत का ग्रोथ इंजन बना हुआ है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कई वर्षों के हाई लेवल के करीब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मार्जिन पर दबाव से कंपनियों की मजबूत कमाई के बावजूद शेयरों का जोश फीका हो सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।