Jio Platforms IPO: एंकर निवेशकों से जुटाए ₹8110 करोड़, 30 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन; कैपिटल ग्रुप और LIC रहे टॉप इनवेस्टर

जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर को खुलने वाला है। इससे पहले एंकर बुक में कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों से 8,109.85 करोड़ रुपये जुटाए। इस ऑफर के लिए संस्थागत निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही, जो एंकर बुक में उपलब्ध शेयरों की कुल कीमत से 30 गुना से भी ज्यादा है। कंपनी ने एंकर निवेशकों को प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर 7.24 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए। कैपिटल ग्रुप को 725 करोड़ रुपये के शेयर अलॉट हुए। दूसरे नंबर पर लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) रही, जिसे 499.98 करोड़ रुपये के शेयर अलॉट हुए।

एंकर बुक में ब्लैकरॉक, कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी इनवेस्टमेंट्स, टी. रो प्राइस, श्रोडर्स, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेंपलटन, इनवेस्को और प्रूडेंशियल जैसी कई बड़ी वैश्विक कंपनियों ने भी हिस्सा लिया। दुनिया के कुछ प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंडों ने भी इस इश्यू में दिलचस्पी दिखाई। इनमें सिंगापुर का GIC, नॉर्वे का नॉर्जेस बैंक इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA), PSP इनवेस्टमेंट्स, कैलिफोर्निया स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट और फ्लोरिडा रिटायरमेंट सिस्टम शामिल हैं। एंकर बुक में ड्रैगनियर इनवेस्टमेंट ग्रुप, जानूस हेंडरसन और नाइंटी वन जैसे ग्लोबल टेक स्पेशलिस्ट्स ने भी हिस्सा लिया।

भारत से म्यूचुअल फंड कंपनियां, जीवन बीमा कंपनियां और पेंशन फंड बने हिस्सा

भारत की टॉप 10 म्यूचुअल फंड कंपनियों ने भी इस ऑफरिंग में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें SBI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड शामिल हैं। घरेलू म्यूचुअल फंडों को 25 फंड हाउसेज की 95 स्कीमों के जरिए 2,784.96 करोड़ रुपये के 2.489 करोड़ शेयर मिले। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनियां और पेंशन फंड भी निवेशकों के इस समूह का हिस्सा हैं। इनमें LIC, HDFC लाइफ, SBI लाइफ, SBI पेंशन (NPS ट्रस्ट), HDFC पेंशन, ICICI प्रूडेंशियल और UTI पेंशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को 1,089.95 करोड़ रुपये के 97.4 लाख शेयर अलॉट हुए। इसके अलावा, भारत के प्रमुख फैमिली ऑफिसेज- जैसे कि इनाम फैमिली ऑफिस, प्रेमजी इनवेस्ट, जेरोधा फैमिली ऑफिस और HCL फैमिली ऑफिस ने भी जियो प्लेटफॉर्म्स में दिलचस्पी दिखाई है।

Jio Platforms IPO के लिए कितना है प्राइस बैंड

जियो IPO 23 अक्टूबर को बंद होगा। लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह साइज के मामले में देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। प्राइस बैंड ₹1065-₹1119 प्रति शेयर है। लॉट साइज 12 शेयर है। IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 28 अक्टूबर को हो सकती है। एंकर निवेशक IPO में 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं।

इस पब्लिक इश्यू में Jio Platforms के कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर और इसकी पेरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। कंपनी पात्र कर्मचारियों को फाइनल ऑफर प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट (डिस्काउंट) के साथ शेयर ऑफर कर रही है। बचे हुए नेट इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

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Jio Platforms IPO: एंकर बुक 30 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब, ब्लैकरॉक और जेपी मॉर्गन जैसे बड़े नामों ने दिखाई दिलचस्पी

Jio Platforms IPO: रिलायंस ग्रुप की Jio Platforms के IPO को लेकर बड़े निवेशकों में जबरदस्त उत्साह है। कंपनी के ₹8,110 करोड़ के एंकर बुक के मुकाबले 30 गुना से ज्यादा मांग आई है। संस्थागत निवेशकों की कुल बोलियां करीब ₹2.5 लाख करोड़ तक पहुंच गई हैं। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, भारतीय IPO बाजार में इतनी बड़ी मांग पहली बार देखने को मिली है।

इस इश्यू में दुनिया की कई बड़ी निवेश कंपनियों और सरकारी निवेश फंड ने दिलचस्पी दिखाई है। इनमें BlackRock, Fidelity Investments, JPMorgan Asset Management, Franklin Templeton, Invesco और Capital Group जैसे नाम शामिल हैं।

दुनिया के बड़े निवेशक लगा रहे दांव

Jio Platforms के IPO में सिंगापुर के GIC, नॉर्वे के Norges Bank Investment Management, Abu Dhabi Investment Authority और Qatar Investment Authority जैसे बड़े सरकारी निवेश फंड भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

विदेशी निवेशकों के अलावा भारतीय म्यूचुअल फंड कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। देश के टॉप 10 म्यूचुअल फंड हाउस ने इस इश्यू में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें SBI Mutual Fund, HDFC Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, Nippon India Mutual Fund और Kotak Mahindra Mutual Fund शामिल हैं।

LIC और बड़ी बीमा कंपनियां भी कतार में

इस IPO में देश की बड़ी बीमा और पेंशन कंपनियां भी निवेश करना चाहती हैं। इनमें LIC, HDFC Life, SBI Life, SBI Pension, HDFC Pension और ICICI Prudential के नाम शामिल हैं।

मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, इस इश्यू के लिए कई अरब डॉलर की बोलियां मिली हैं। विदेशी लॉन्ग-टर्म निवेशकों, सरकारी निवेश फंड और पेंशन फंड से बड़ी मांग आई है। टेक्नोलॉजी पर फोकस करने वाले वैश्विक फंड और बड़े फैमिली ऑफिस भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं है Jio

Jio का कारोबार अब मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़ चुका है। कंपनी ब्रॉडबैंड, क्लाउड, एंटरटेनमेंट और एंटरप्राइज सर्विसेज में भी काम कर रही है।

IPO के बाद निवेशकों को Jio Platforms में सीधे निवेश करने का मौका मिलेगा। अभी यह Reliance Industries की सब्सिडियरी है। करीब ₹2.5 लाख करोड़ की मांग और बड़े निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार में उतरने से पहले कंपनी को लेकर मजबूत उत्साह दिख रहा है।

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LIC ने लॉन्च किया नया कैंसर कवर प्लान, जानिए इसकी सबसे जरूरी बातें

एलआईसी ने अपना नया कैंसर कवर प्लान 19 अक्तूबर को लॉन्च कर दिया। इस प्लान के तहत पॉलिसीहोल्डर को कैंसर के शुरुआती चरण और बाद के चरणों में फाइनेंशियल प्रोटेक्शन मिलेगा। कंपनी ने कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह प्लान पेश किया है। इस प्लान की पूरी अवधि में प्रीमियम फिक्स्ड रहेगा।

इलाज की एक्चुअल कॉस्ट की जगह फिक्स्ड फाइनेंशियल बेनेफिट्स

LIC New Cancer Cover एक नॉन-लिंक्ड प्लान है और प्योर रिस्क प्लान है। इस प्लान के तहत पॉलिसीहोल्डर को इलाज की एक्चुअल कॉस्ट की जगह फिक्स्ड फाइनेंशियल बेनेफिट्स मिलता है। सम एश्योर्ड के 25 फीसदी का पेमेंट अर्ली स्टेज कैंसर का पता चलते ही पॉलिसीहोल्डर को कर दिया जाता है।

बाद के स्टेज वाले कैंसर का पता चलने पर 100% सम एश्योरेंड का पेमेंट

बाद के स्टेज वाले कैंसर (Major-Stage Cancer) का पता चलने पर पॉलिसीहोल्डर को 100 फीसदी अप्लिकेबल सम एश्योर्ड का पेमेंट किया जाता है। पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक, कैंसर का पता चलने के बाद पॉलिसीहोल्डर का प्रीमियम माफ हो जाता है।

प्लान को खरीदने की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 65 साल 

इस प्लान को खरीदने की न्यूनतम उम्र 18 साल है, जबकि अधिकतम उम्र 65 साल है। उम्र के कैलकुलेशन अंतिम बर्थडे के आधार पर होगा। इस प्लान में लेवल सम एश्योर्ड और इक्रिजिंग सम एश्योर्ड का विकल्प है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति दोनों में से किसी एक विकल्प का चुनाव कर सकता है।

यह पॉलिसी 10 साल या 15 साल के टर्म के लिए ली जा सकती है

इस पॉलिसी का मिनिमम टर्म 10 साल है, जबकि मैक्सिमम टर्म 15 साल है। इसका मतलब है कि अगर 18 साल का कोई व्यक्ति 10 साल के टर्म के लिए पॉलिसी खरीदता है तो उसके 28 साल के होने पर पॉलिसी मैच्योर हो जाएगी।

उम्र की रेंज के आधार पर चार मिनिमम बेसिक सम एश्योर्ड के स्लैब

18 से 34 साल के पॉलिसीहोल्डर के लिए मिनिमम बेसिक सम एश्योर्ड 35,00,000 रुपये हैं। 35 से 40 साल के पॉलिसीहोल्डर के लिए यह 30,00,000 रुपये है। 41 से 50 साल के लिए यह 20,00,000 रुपये है। 51 से 65 साल के लिए 15,00,000 रुपये है।

प्योर रिस्क हेल्थ पॉलिसी होने की वजह से किसी तरह का डेथ बेनेफिट्स नहीं 

इस पॉलिसी में किसी तरह का डेथ बेनेफिट शामिल नहीं है, क्योंकि यह टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान नहीं है। यह प्योर रिस्क हेल्थ इंश्योरेंस प्लान है। अगर पॉलिसीहोल्डर को पॉलिसी के टर्म के दौरान कैंसर की बीमारी का पता नहीं चलता है यानी इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है तो मैच्योरिटी पर उसे किसी तरह का बेनेफिट नहीं मिलेगा।

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एलआईसी से सीधे पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम में रिबेट का फायदा 

इस पॉलिसी में प्रीमियम का पेमेंट सालाना या छमाही आधार पर किया जा सकता है। सीधे एलआईसी से यह पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम में रिबेट मिलता है। एजेंट, कॉर्पोरेट एजेंट या इंश्योरेंस मार्केटिंग फर्म से पॉलिसी खरीदने पर रिबेट नहीं मिलेगा। इस प्लान में लोन की फैसिलिटी उपलब्ध नहीं है। किसी तरह की सरेंडर वैल्यू भी नहीं होगी।

Yes Bank Share Price: AT-1 बॉन्ड्स पर कोर्ट के फैसले पर दूसरे दिन भी शेयर धड़ाम, City ने घटाया टारगेट प्राइस

Yes Bank Share Price: दिग्गज प्राइवेट सेक्टर लेंडर येस बैंक के शेयर आज भी बिकवाली की आंधी में फंस गए। एक कारोबारी दिन तो पहले इंट्रा-डे में यह छह साल में सबसे बड़ी गिरावट के साथ टूटकर एक साल के निचले स्तर ₹16.98 पर आ गया था। इसके शेयरों को यह शॉक ₹8415 करोड़ के AT-1 (एडीशनल टियर-1) बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते लगा है। इस झटके में शेयर एक कारोबारी दिन पहले इंट्रा-डे में 20% टूटे थे और निचले स्तर पर हल्की रिकवरी के बावजूद 14% से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए थे। अब आज की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.98% की गिरावट के साथ ₹17.79 पर है। इंट्रा-डे में आज यह 3.86% फिसलकर ₹17.45 तक आ गया था। कुछ महीने पहले 18 जून 2026 को यह एक साल के हाई ₹25.77 पर था।

क्या है Yes Bank के AT-1 बॉन्ड्स का मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में बैंक के AT-1 बॉन्ड्स को राइट ऑफ करने यानी बट्टे खाते में डालने के फैसले को गलत ठहराया है। बता दें कि बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान ₹8400 करोड़ के इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ कर दिया गया था, जिसके चलते बॉन्ड होल्डर्स को अपना मूलधन भी गंवाना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक यस बैंक को अब इन AT-1 बॉन्ड्स पर 9.5% और 9% की तय कूपन दर के हिसाब से पेमेंट करना होगा। बैंक ने साल 2016 और साल 2017 में इन बॉन्ड्स के जरिए ₹8,415 करोड़ जुटाए थे। यह रकम कितनी है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि यह वित्त वर्ष 2026 में बैंक के ₹3476 के शुद्ध मुनाफे के दोगुने से भी अधिक है।

इस फैसले को लेकर बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि वह फिलहाल सभी कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है। बैंक ने यह भी कहा कि उसके पास कैपेटिल मैनेजमेंट के बेहतर रास्ते हैं, जिससे उसे अपने ग्रोथ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अतिरिक्त पूंजी से जुड़े फैसलों को लेकर फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहेगी। यस बैंक के मुताबिक AT-1 बॉन्ड्स से जुड़े फैसले से 30 जून 2026 तक के CET-1 रेश्यो (मुनाफा समेत) पर लगभग 250 बेसिस पॉइंट्स का असर पड़ सकता है तो प्रो-फॉर्मा आधार पर टियर-1 रेश्यो 14% पर ही बना रहेगा।

क्या है ब्रोकरेज फर्म का रुझान

वैश्विक इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म सिटी ने येस बैंक की सेल रेटिंग को बरकरार रखा है लेकिन टारगेट प्राइस को ₹22 से घटाकर ₹17.5 कर दिया। सिटी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का फैसला येस बैंक के लिए झटका है और इससे सीईटी-1 कम हो सकता है। सिटी का कहना है कि एटी-1 बॉन्ड्स को स्पष्ट रूप से बैंक की पूंजी बढ़ाने के लिए राइट ऑफ किया गया था। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि येस बैंक के CET-1 रेश्यो में 250 बेसिस पॉइंट की कमी आएगी और कूपन पेमेंट को स्वैच्छिक और नॉन-कम्युलेटिव मानते हुए यह गिरकर 11.5% (सिर्फ मूलधन के आधार पर) रह जाएगा। इससे बैंक की बुक वैल्यू में 13% से 14% की गिरावट आएगी, जिसके चलते बफर को फिर से बहाल करने के लिए बैंक को अतिरिक्त पूंजी जुटाने की जरूरत पड़ेगी।

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IDBI Bank की 60% हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax, लेकिन डील का इस शेयर पर भी दिखेगा असर

CSB Bank Share Price: केरलम के थ्रिसूर की प्राइवेट लेंडर सीएसबी बैंक के शेयरों पर आज इसलिए नजर रहेगी क्योंकि इसके प्रमोटर ने एक और बैंक पर दांव लगाया है। एक कारोबारी दिन पहले सामने आया कि आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी फेयरफैक्स (Fairfax) खरीदने जा रही है, जोकि सीएसबी बैंक की प्रमोटर है। अभी सीएसबी बैंक के शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को बीएसई पर यह 4.07% की बढ़त के साथ ₹320.95 पर बंद हुआ था। आईडीबीआई बैंक का भी शेयर बीएसई पर 9.07% के उछाल के साथ ₹90.44 पर बंद हुआ।

IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax और क्या है CSB Bank से कनेक्शन

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है। फेयरफैक्स सरकार और एलआईसी से आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में खरीदेगी। इसमें से 30.48% हिस्सेदारी सरकार और 30.24% हिस्सेदारी एलआईसी बेचेगी, जिसे कनाडा इंक खरीदेगी। इसकी पेरेंट कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स है। इस डील के पूरा होने के बाद यह फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी एफडीआई डील होगी।

अब सवाल उठता है कि आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री का सीएसबी बैंक से क्या लेना-देना है। सितंबर तिमाही के आखिरी में एफआईएच मॉरीशस इंवेस्टमेंट्स की इसमें 40% हिस्सेदारी है, जोकि फेयरफैक्स की एक एंटिटी है।

क्या दो बैंक में हो सकती है होल्डिंग?

बैंक ओनरशिप और कंट्रोल को लेकर आरबीआई के नियमों के मुताबिक कोई प्रमोटर एंटिटी एक समय में दो प्रतिस्पर्धी बैंक नहीं चला सकती है। ऐसे में अगर आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए फेयरफैक्स को मंजूरी मिलती है तो इसे या तो सीएसबी बैंक में हिस्सा बेचना होगा या आईडीबीआई बैंक के साथ विलय का रास्ता निकालना होगा यानी कि इंटीग्रेशन प्रोसेस और अधिक कॉम्प्लेक्स हो सकता है। सीएसबी बैंक बात करें तो इसमें फेयरफैक्स इकलौती प्रमोटर एंटिटी है और बाकी 60% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं। सितंबर तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से इसमें म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 13.15% है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले करीब 63 हजार खुदरा निवेशकों की इसमें 12.56% हिस्सेदारी है।

कैसी है सेहत

सीएसबी बैंक ने हाल ही में सितंबर तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया है, जिसमें सामने आया कि बैंक का ग्रास एडवांसेज सालाना 22% और डिपॉजिट्स 18% की रफ्तार से बढ़ा। इस दौरान टर्म डिपॉजिट्स भी 22% बढ़ा तो गोल्ड लोन बिजनेस की ग्रोथ 36% रही। अब एक साल में शेयरों के चाल की बात करें इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 5 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹574.70 पर था, जिससे आठ महीने में यह 48.65% टूटकर 15 सितंबर 2026 को एक साल के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि अभी भी यह ₹197 के आईपीओ प्राइस से ऊपर है।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : महंगाई के आंकड़ों के बाद अमेरिका में रेट-हाइक की आशंका से ग्लोबल मार्केट का मूड खराब है। कल अमेरिकी बाजार गिरकर बंद हुए, S&P500 इंडेक्स 1% तो नैस्डेक 2% से ज्यादा लुढ़का। एशिया में भी दबाव देखने को मिल रहा है। हालांकि गिफ्ट निफ्टी में निचले स्तरों से रिकवरी दिख रही है। इधर ब्रेंट क्रूड फिसलकर 105 डॉलर के नीचे पहुंचने से सेंटिमेंट में थोड़ा सुधार हुआ है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

14 अक्टूबर को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाला। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 251.89 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 72,781.89 पर और निफ्टी 99.25 अंक या 0.44 प्रतिशत गिरकर 22,622.70 पर बंद हुआ।

अमेरिका में AI शेयरों में भारी गिरावट, कॉस्पी करीब 8% फिसला

भारतीय IT कंपनियों के लिए पॉजिटिव संकेत हैं। कल अमेरिका में चिप और AI शेयरों में तगड़ी बिकवाली दिखी। AMD, माइक्रॉन, सैनडिस्क और ऑरेकल तीन से नौ परसेंट फिसले। Philadelphia सेमीकंडक्टर इंडेक्स में लगातार छठे दिन दबाव रहा। दूसरी ओर AI शेयरों की बिकवाली से कॉस्पी में 8 परसेंट की भारी गिरावट आई है। वहीं अमेरिका में सॉफ्टवेयर कंपनियों में रौनक दिखी।

सोने-चांदी में भारी गिरावट

अमेरिका में अनुमान से ज्यादा रिटेल महंगाई आंकड़ों से सोने-चांदी में भारी गिरावट आई है। गोल्ड 4100 डॉलर के नीचे फिसल गया है। चांदी में 6 परसेंट की गिरावट आई है।

21 अक्टूबर को खुलेगा JIO का IPO, प्राइस बैंड 1065-1119 रुपए तय

देश का सबसे बड़ा IPO, 21 अक्टूबर को खुलेगा। JIO PLATFORMS के IPO का प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर के बीच है। इस आईपीओ से 30,000 करोड़ रुपए रुपए से ज्यादा जुटाने की योजना है। इसके तहत फ्रेश इश्यू के जरिए 27 करोड़ शेयर जारी होंगे। कंपनी के कर्मचारियों और शेयर होल्डरों के लिए अलग से कोटा रखा गया है।

IDBI बैंक स्ट्रैटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी

IDBI बैंक डील पर कैबिनेट का बड़ा फैसला आया है। IDBI बैंक की स्ट्रैटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी मिल गई है। कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया गया है। Fairfax सरकार और LIC की हिस्सेदारी खरीदेगी। इससे 52 हजार करोड़ से ज्यादा की FDI आने की उम्मीद है।

15% बढ़ा ICICI लोम्बार्ड का मुनाफा, टाटा टेक का मुनाफा और मार्जिन घटा

दूसरी तिमाही में ICICI लोम्बार्ड के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे। कंपनी मुनाफा 15% बढ़कर 946 करोड़ पर रहा है। Net Earned Premium में 18% की बढ़त हुई है। हालांकि अंडराइटिंग घाटे में बढ़त दिखी है। वहीं दूसरी ओर टाटा टेक का प्रॉफिट पांच परसेंट घटा है। मार्जिन पर भी दबाव दिखा है।

निफ्टी की चार कंपनियों के नतीजे आज

नतीजों के लिहाज से आज बड़ा दिन है। निफ्टी की चार कंपनियां टेक महिंद्रा, नेस्ले, जियो फाइनेंशियल और HDFC LIFE आज अपने रिजल्ट जारी करेंगी। टेक महिंद्रा की CONSTANT CURRENCY रेवेन्यू ग्रोथ डेढ़ परसेंट रह सकती है। मार्जिन फ्लैट रह सकते हैं। साथ ही इंडियन बैंक, पॉलीकैब, परसिस्टेंट समेत वायदा के नतीजों की भी लंबी लिस्ट है।

नवंबर सीरीज से वायदा में 6 नई कंपनियां

नवंबर सीरीज से वायदा में 6 नई कंपनियां शामिल होंगी। कोरोमंडल, सिटी यूनियन बैंक, डाटा पैटर्न, Karur Vysya Bank, नवीन फ्लूराइन और सिरमा SGS में 28 अक्टूबर से वायदा ट्रेडिंग शुरू होगी। वायदा में शामिल शेयरों की संख्या 218 से बढ़कर 224 हो जाएगी।

SEBI ने बुलाई SMAC की बैठक

CAS को लेकर MONEYCONTROL की बड़ी खबर आई है। सेबी ने आज सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी बैठक बुलाई है। इसमें CAS पर मिले फीडबैक पर मंथन होगा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

14 अक्टूबर को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगभग 1,857 करोड़ रुपये के शेयर बेचे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान 2,670 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

Market cues : मंदड़ियों का दबाव कम होने के बावजूद ओवरऑल टेक्निकल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर, रहें सतर्क

Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, राजेश एक्सपोर्ट्स से टाटा टेक्नोलॉजीज तक शामिल

Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते निवेशकों की नजर कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर रहेगी। कहीं तिमाही नतीजों में मुनाफे की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, तो कहीं कमाई पर दबाव दिखा है। कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं, जबकि कुछ में बड़े कारोबारी फैसले हुए हैं। इन खबरों का असर गुरुवार को शेयरों की चाल पर पड़ सकता है।

HDB Financial Services

NBFC कंपनी HDB Financial Services का मुनाफा वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 34% बढ़कर 780 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 581 करोड़ रुपये था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 15.5% बढ़कर 2,534 करोड़ रुपये पहुंच गई। कंपनी के बोर्ड ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 2 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है।

CEAT

टायर कंपनी CEAT का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में 39.8% घटकर 112 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 26.2% बढ़कर 4,762 करोड़ रुपये पहुंच गया। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से मुनाफे पर दबाव पड़ा। EBITDA 9.1% गिरकर 457 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन 13.3% से घटकर 9.6% पर आ गया।

IDBI Bank

सरकारी बैंक IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने मंजूरी दे दी है। बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए Fairfax Financials को सफल बोलीदाता चुना गया है। पुनर्गठन के बाद सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी 34% रहेगी। शेयर के लिए 75.99 रुपये का बेंचमार्क प्राइस तय किया गया था, जबकि 81 रुपये की सबसे ऊंची बोली स्वीकार की गई।

CSB Bank

निजी क्षेत्र के CSB Bank के सामने अब मर्जर या हिस्सेदारी बेचने का विकल्प हो सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक, कोई प्रमोटर एक से ज्यादा बैंकों में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी नहीं रख सकता। IDBI Bank के पुनर्गठन की मंजूरी के बाद Fairfax को CSB Bank का मर्जर IDBI Bank में करना पड़ सकता है या अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है। प्रस्तावित ढांचे में दो साल के भीतर मर्जर का रास्ता शामिल है।

Rajesh Exports

SEBI ने Rajesh Exports और इसके चेयरमैन राजेश मेहता पर लगी अंतरिम पाबंदियां जारी रखने का फैसला किया है। कंपनी के वित्तीय खुलासों में गड़बड़ियों को लेकर रेगुलेटर की चिंताएं दूर नहीं हुई हैं। राजेश मेहता अगले आदेश तक कंपनी के शेयर खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का कारोबार करने से प्रतिबंधित रहेंगे।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सब्सिडियरी Jio Platforms के IPO के लिए अहम दस्तावेज यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जमा कर दिया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को लगेगी। IPO में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित होंगे।

Tata Technologies

टाटा ग्रुप की इंजीनियरिंग कंपनी Tata Technologies का मुनाफा सालाना आधार पर 5% घटकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 181 करोड़ रुपये था। हालांकि, डॉलर में रेवेन्यू कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर 22% बढ़ा। सर्विसेज सेगमेंट का रेवेन्यू भी 26% बढ़ा। कंपनी को पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

MRPL

ONGC की सब्सिडियरी तेल कंपनी MRPL का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट करीब 195% बढ़कर 1,881 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 639 करोड़ रुपये था। कंपनी का रेवेन्यू 37.1% बढ़कर 35,590 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3,210 करोड़ रुपये हो गया, जबकि प्रॉफिट बिफोर टैक्स 2,519 करोड़ रुपये रहा।

Enviro Infra

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Enviro Infra को Arie Energy से महाराष्ट्र में 100 मेगावाट के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए 228 करोड़ रुपये का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है। यह ऑर्डर कंपनी के रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार को बढ़ाने से जुड़ा है।

Aeroflex Industries

औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी Aeroflex Industries मार्च 2028 तक 202 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस रकम से स्टेनलेस स्टील होज, होज असेंबली और लिक्विड कूलिंग सिस्टम बनाने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। कंपनी को डेटा सेंटर और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग का फायदा मिलने की उम्मीद है।

Bajaj Consumer Care

FMCG कंपनी Bajaj Consumer Care का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 67.1% बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 42 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। रेवेन्यू 25.7% बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गया।

Cemindia Projects

अदाणी ग्रुप की कंपनी Cemindia Projects ने संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटाने के लिए QIP लॉन्च किया है। कंपनी 90.3 लाख तक शेयर जारी करेगी। इश्यू का फ्लोर प्राइस 1,158.58 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। संकेतात्मक इश्यू प्राइस 1,108 रुपये है, जो बुधवार के 1,153.50 रुपये के बंद भाव से करीब 4% डिस्काउंट पर है।

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IDBI Bank में स्टेक सेल से विनिवेश के टारगेट से ज्यादा पैसे आएंगे

केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 88,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे FY19 के बाद पहली बार यह पैसा बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा होगा। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। इसमें आईडीबीआई के निजीकरण को बड़ा हाथ होगा।

बजट में 80000 करोड़ जुटाने का टारगेट 

सरकार ने बजट में FY27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट तय किया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आईडीबीआई बैंक की स्ट्रेटेजिक स्ट्रक्चरिंग से केंद्र सरकार को करीब 26,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की स्ट्रेटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी।

सरकार आईडीबीआई बैंक में बेच रही हिस्सेदारी

सरकार और एलआईसी दोनों आईडीबीआई बैंक में कंबाइंड 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक यह हिस्सेदारी खरीदेगी। इस डील और शेयर पर्चेज एग्रीमेंट के इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24 हिस्सेदारी बेचेगी।

सरकार पहले ही जुटा चुकी है 62,124 करोड़ रुपये

इस डील के बाद भी IDBI Bank में सरकार और LIC की कंबाइंड 34 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी। इस साल 10 सितंबर तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 62,124 करोड़ रुपये जुटा लिए थे। यह इस वित्त वर्ष के लिए तय बजट टारगेट से सिर्फ 17,876 करोड़ रुपये कम था। आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री से यह टारगेट पूरा हो जाएगा।

FY19 के बाद पहली बार टारगेट से ज्यादा पैसे आएंगे

सरकार वित्त वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा पैसे जुटाएगी। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 45,306 करोड़ रुपये जुटाए थे, जो 47,000 करोड़ रुपये के तय लक्ष्य का करीब 96 फीसदी था। इसमें से 16,886 करोड़ रुपये विनिवेश से आए थे, जबकि 28,420 करोड़ रुपये एसेट मॉनेटाइजेशन से आए थे।

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जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से बढ़ा विनिवेश पर फोकस

जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने की वजह से विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन पर सरकार का फोकस बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और ईरान की लड़ाई के बाद की स्थितियों ने सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ाया है। क्रूड की कीमतें इस लड़ाई की वजह से काफी बढ़ी हैं। पिछले कुछ हफ्तों से तो ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है।

IDBI Bank का शेयर मार्च के निचले स्तर से 46% चढ़ा है, 15 अक्तूबर को शेयर पर दिखेगा डील का असर

आईडीबीआई बैंक के शेयर में 14 अक्तूबर को पंख लग गए। एक समय शेयर 13 फीसदी तक चढ़ गया था। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। कारोबार के अंत में यह 8.33 फीसदी चढ़कर 89.85 रुपये पर बंद हुआ। इस साल मार्च के अपने निचले स्तर से यह शेयर 46 फीसदी चढ़ा है।

आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स को ट्रांसफर होगा

IDBI Bank में फेयरफैक्स नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। 14 अक्तूबर को यूनियन कैबिनेट ने इस प्लान को मंजूरी दे दी। इस डील पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर हो जाने की उम्मीद है। उसके बाद आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक के पास चली जाएगी।

14 अक्टूबर को IDBI Bank के शेयर में तूफानी तेजी

14 अक्तूबर को कमजोर बाजार में आईडीबीआई बैंक के शेयरों में तूफानी तेजी ने मार्केट को चौंकाया था। माना जा रहा था कि शेयर में तेजी की वजह 12 अक्तूबर को बैंक का ऐलान था जिसमें कहा गया था कि उसके बोर्ड की बैठक 17 अक्तूबर को होगी। इसमें सितंबर तिमाही के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी मिलेगी।

शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी औसत का 8 गुना था

खास बात यह है कि 14 अक्तूबर को आईडीबीआई बैंक के शेयरों में तेजी के साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी जबर्दस्त उछाल दिखा था। ट्रेडिंग वॉल्यूम औसत के मुकाबले करीब 8 गुना था। आईडीबीआई बैंक के शेयरों में बीते छह महीनों में करीब 21 फीसदी तेजी आई है। इस दौरान बैंक निफ्टी 1.82 फीसदी गिरा है।

15 अक्टूबर को शेयर पर डील का दिखेगा असर 

आईडीबीआई बैंक के शेयर पर 15 अक्तूबर को डील का असर दिखेगा। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सीएसबी बैंक में पहले से 40 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका मतलब है कि यह कंपनी पहले से भारत के बैंकिंग सेक्टर में मौजूद है। वह आगे आईडीबीआई बैंक में सीएसबी बैंक के विलय का ऐलान कर सकती है या सीएसबी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। आरबीआई के नियम के मुताबिक उसे दोनों में से किसी एक विकल्प का इस्तेमाल करना होगा।

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फेयरफैक्स को ओपन ऑफर पेश करना होगा 

सरकार ने कई साल पहले आईडीबीआई बैंक की निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन, उसकी कोशिश सफल नहीं हुई थी। इस बीच, सरकार ने कहा है कि आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग से बैंकिंग सेक्टर में नई पूंजी आने का रास्ता खुलेगा। इससे एमएसएमई के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी। शेयर पर्चेज एग्रीमेंट के पूरा होने पर फेयरफैक्स को आईडीबीआई बैंक के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर पेश करना होगा।

कैबिनेट ने सामाजिक सहायता योजना के लिए 53428 करोड़ रुपये किए मंजूर , विकलांग पेंशन में भी हुई बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम’ (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में कार्यक्रम और उसके जुड़ी योजनाओं का नाम बदलना,विकलांग पेंशन के नियमों में बदलाव करना और वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन तथा पारिवारिक लाभ योजनाओं को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल है।

इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “दुनिया के सबसे व्यापक सोशल सिक्योरिटी नेट में से एक का विस्तार किया गया है और इसे 2031 तक बढ़ा दिया गया है। इस विस्तारित सोशल सिक्योरिटी नेट के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “विकलांग लोगों के लिए, विकलांगता पेंशन पाने की पिछली पात्रता सीमा 80 प्रतिशत विकलांगता थी। अब इस सीमा को घटाकर आधा यानी 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि 40 प्रतिशत विकलांगता वाले लोग भी विकलांग पेंशन पाने के पात्र होंगे।”

विकलांगता पेंशन में बदलाव

सबसे अहम बदलाव विकलांगता पेंशन के नियमों में हुए हैं। इसके तहत 0 से 79 साल की उम्र के लाभार्थियों को हर महीने 375 रुपये और 80 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों को 625 रुपये की मदद मिलेगी।

विकलांगता के लिए पात्रता की सीमा (बेंचमार्क) को मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा। न्यूनतम उम्र की शर्त भी हटा दी जाएगी, जिससे विकलांग लोग जन्म से ही इसके लिए पात्र हो सकेंगे।

वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन और फेमिली बेनिफिट योजनाएं बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।

कैबिनेट ने कहा कि सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा। विकलांगता पेंशन योजना के तहत संशोधित पात्रता शर्तों, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दर के बारे में विस्तार से बताने वाली गाइडलाइंस तीन महीने के भीतर जारी और लागू की जाएंगी।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

इन योजनाओं के बदलेंगे नाम

नाम बदलने की कवायद के तहत,NSAP अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया जाएगा, जबकि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया जाएगा और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना हो जाएगा।

बता दें कि NSAP को 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को मदद देने के लिए शुरू किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 (जो राज्य की नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक है) के तहत केंद्र की ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए किया गया था। इस प्रोग्राम के लिए पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है, ताकि पूरे देश में एक जैसी मदद मिल सके।

विकलांग पेंशन में किए गए बदलाव ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016’ के तहत किए गए हैं। यह कानून ‘बेंचमार्क विकलांगता’ को 40 प्रतिशत की सीमा के आधार पर परिभाषित करता है और यह प्रावधान करता है कि विकलांगता से जुड़ी सहायता राशि, अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए समान योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए।

 

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