नीलकंठ मिश्रा ने भारतीय शेयर बाजारों में तेजी नहीं टिकने की बताई बड़ी वजह, सोमवार को भी FII ने की 1148 करोड़ रुपये की बिकवाली

विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर यानी सोमवार को भी बिकवाली की। इससे पिछले हफ्ते की अच्छी तेजी के बाद हफ्ते के पहले दिन बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 1.11 फीसदी यानी 257 अंक गिरकर 22,888 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 876 अंक गिरकर 73,852 पर क्लोज हुआ। विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर जब तक बदलेगा नहीं, तब तक बाजार में तेजी टिक नहीं पाएगी।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल का बड़ा असर 

वर्ल्ड बैंक में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर-इंडिया नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड की वजह से भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। निवेश के जटिल नियमों का असर भी फॉरेन इनवेस्टर्स के इनवेस्टमेंट पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स घटाने से काम नहीं चलेगा। इनवेस्टमेंट प्रोसेस को आसान बनाना होगा, नियमों को पारदर्शी बनाना होगा और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। उन्होंने कहा कि रुपये पर जितना दिख रहा है, उससे ज्यादा दबाव है।

अमेरिका और भारतीय बाजार में रिटर्न के बीच का फर्क घटा

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट में निवेश में फायदा नहीं दिखता है। अमेरिका और भारत में रिटर्न के बीच का फर्क घट गया है, जिससे निवेश के लिहाज से भारत का अट्रैक्शन कम हुआ है। हाल में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड अमेरिका में कई दशकों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोपीय देशों में भी बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। यील्ड में उछाल से अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश में दिलचस्पी बढ़ी है।

भारतीय बाजार में घट रही विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

मिश्रा ने एक उदाहरण की मदद से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2 फीसदी और भारत में 8 फीसदी है, तो भारत में निवेश करने में फायदा है। लेकिन, अगर अमेरिका में यील्ड बढ़कर 5.3 फीसदी हो जाती है और भारत में 7.3 फीसदी रहती है भारत में निवेश में दिलचस्पी कम हो जाती है। इसका मतलब है कि फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत में निवेश करने में फायदा नहीं दिखता। ऐसी स्थिति में वे भारत की जगह अमेरिका में इनवेस्ट करना पसंद करेंगे।

FIIs ने सोमवार को शुद्ध रूप से की 1,148 करोड़ की बिकवाली

स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर को भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 1,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। उन्होंने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। लेकिन, 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से 3,201.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली के बीच DII ने लगातार खरीदारी कर भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया है।

HDFC Bank Share Price: FIIs ने बेची होल्डिंग तो शेयर धड़ाम, ब्रोकरेजेज का ये है रुझान

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज बिकवाली का भारी दबाव दिखी और इसकी वजह इसका सितंबर तिमाही का शेयरहोल्डिंग पैटर्न है। इसमें सामने आया कि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने इसमें अपनी हिस्सेदारी 2.43% कम की और अब जून तिमाही के आखिरी में 41.82% से घटकर सितंबर तिमाही के आखिरी में 39.39% (FIIs Holding in HDFC Bank) तक आ गई। इसने बैंक के शेयरों पर दबाव बढ़ाया और फिलहाल बीएसई पर यह 1.65% की गिरावट के साथ ₹692.20 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.79% टूटकर ₹691.20 तक आ गया था।

FIIs vs DII in HDFC Bank: किसकी कितनी होल्डिंग?

सितंबर 2026 तिमाही के आखिरी में एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेशकों यानी FIIs की हिस्सेदारी 2.43 पर्सेंटेज प्वाइंट्स कम होकर 39.39% पर आ गई। वहीं दूसरी तरफ इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की होल्डिंग 1.69 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़कर 43.44% हो गई। इसमें म्यूचुअल फंड्स की 31.88% हिस्सेदारी है तो ₹2 लाख तक के निवेश वाले यानी खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 10.87% है।

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सीईओ के तौर पर अनूप बागची की नियुक्ति के असर का मार्केट आकलन कर रहा है। अधिकतर ब्रोकरेज फर्म ने उनकी नियुक्ति का सपोर्ट किया है लेकिन कुछ एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि उन्हें काम संभालने में समय लगेगा।

नुवामा के बीएफएसआई एनालिस्ट हेड आनंद दामा का कहना है कि अनूप को पहले अपनी टीम फिर से बनाने की जरूरत पड़ेगी और फिर एक लंबे समय में वह नए आइडिया ला सकते हैं और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि अनूप बागची की नियुक्ति से एचडीएफसी बैंक की लीडरशिप से जुड़ी एक बड़ी चिंता दूर हो गई और अनूप बागची का अनुभव एक बड़ी ताकत साबित होगी।

अनूप बागची अभी ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के सीईओ हैं और देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ICICI Bank में सीनियर पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने रिटेल और होलसेल बैंकिंग बिजनेस संभाला था। उन्होंने छह साल तक ICICI सिक्योरिटीज को भी लीड किया। उनकी उम्र 56 साल है तो वह लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक की कमान संभाल सकते हैं क्योंकि RBI के नियमों के मुताबिक बैंक सीईओ 70 साल की उम्र तक बने रह सकते हैं।

इंडिपेंडेंट एनालिस्ट नीरज दीवान का कहना है कि प्रोविजनल डेटा और एचडीएफसी ग्रुप के बाहर के किसी शख्स को सीईओ की कमान बैंक के लिए पॉजिटिव है लेकिन निवेशक अभी सतर्कता बरत रहे हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर कुछ और तिमाहियों तक दबाव बना रह सकता है। बैंक ने शनिवार को सितंबर के आखिरी तक अपने डिपॉजिट में लगभग 18.8% और ग्रॉस एडवांस में 16.3% की बढ़ोतरी की जानकारी दी थी।

शेयरों पर क्यों आया दबाव

साल 2023 में अपनी पैरेंट कंपनी एचडीएफसी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक के मार्जिन और ग्रोथ पर असर पड़ा। इसका असर बैंक के शेयरों पर पड़ा और अपने पियर्स के मुकाबले यह कमजोर हुआ। गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण मार्च में चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने भी सेंटीमेंट पर बुरा असर डाला। हालांकि एक स्वतंत्र जांच में उनके दावों की पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन शेयरों पर दबाव बना रहा। प्राइस-टू-एडजस्टेड बुक वैल्यू के आधार पर यह स्टॉक अब आईसीआईसीआई बैंक के मुकाबले 25% डिस्काउंट पर है और साल 2025 में अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद से इसमें लगभग 31% की गिरावट आई है।

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FII Selling: विदेशी निवेशकों ने चार दिन में ₹35000 करोड़ के शेयर बेचे, चारों दिन गिरा बाजार

FII Selling: फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FII) की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली जारी है। गुरुवार को भी FII ने करीब ₹9,484 करोड़ के शेयर बेच दिए। दूसरी ओर, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (DII) ने ₹10,041.84 करोड़ की खरीदारी की।

बाजार में लगातार गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता बढ़ा रही है। इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरकर बंद हुए।

चार दिन में ₹35,000 करोड़ की बिकवाली

FIIs ने पिछले चारों कारोबारी सत्र में लगातार बिकवाली की है। हर दिन उनकी बिकवाली ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रही।

28 सितंबर को FIIs ने ₹5,353.22 करोड़ के शेयर बेचे। 29 सितंबर को यह आंकड़ा ₹9,980.22 करोड़ रहा। 30 सितंबर को उन्होंने ₹10,148.41 करोड़ की बिकवाली की। 1 अक्टूबर को भी ₹9,484.22 करोड़ के शेयर बेचे गए। इस तरह चार कारोबारी सत्र में FIIs की कुल बिकवाली करीब ₹34,966 करोड़ पहुंच गई है।

DII ने संभाला बाजार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। 28 सितंबर को DIIs ने ₹5,189.02 करोड़ के शेयर खरीदे थे। 29 सितंबर को खरीदारी ₹6,952.71 करोड़ रही। 30 सितंबर को DIIs ने ₹11,271.73 करोड़ और 1 अक्टूबर को ₹10,041.84 करोड़ की खरीदारी की।

चार दिनों में DIIs की कुल खरीदारी करीब ₹33,455 करोड़ हो गई है। यानी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों ने सोख लिया।

लगातार चार दिन बाजार गिरा

FIIs की बिकवाली ऐसे समय बढ़ी है, जब शेयर बाजार पहले से दबाव में है। इस हफ्ते अब तक चारों कारोबारी सत्र में बाजार गिरकर बंद हुआ है। निफ्टी इस हफ्ते 3% से ज्यादा टूट चुका है। सेंसेक्स में भी करीब 3% की गिरावट आई है। निफ्टी बैंक करीब 2% नीचे है।

ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स इस हफ्ते करीब 4% गिर चुका है। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया है।

रुपया 96 के पार

डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है। गुरुवार को रुपया 48 पैसे गिरकर फिर 96 प्रति डॉलर के पार चला गया। दो महीने में यह रुपये की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच रुपये पर भी दबाव बना हुआ है।

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बाजार पर मैक्रो का ट्रिपल अटैक!क्या बचेगा निफ्टी का 52-हफ्ते का निचला स्तर? जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सपाट या सतर्क रुख के साथ खुलने की संभावना है। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद GIFT निफ्टी में बहुत कम हलचल दिख रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, FII की लगातार बिकवाली, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और कमजोर ग्लोबल इक्विटी मार्केट का सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह 7:45 बजे GIFT निफ्टी 5 अंक या 0.02 फीसदी गिरकर 22,819 पर ट्रेड कर रहा था। सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर आ गया, जबकि निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए बाहरी माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $106 प्रति बैरल से ऊपर चली गई क्योंकि US-ईरान शांति प्रयासों में जल्द किसी समाधान की उम्मीद कम हो गई है। वहीं, एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट आई और US स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स भी नीचे ट्रेड कर रहे थे। वॉल स्ट्रीट भी रात भर भारी गिरावट के साथ बंद हुआ क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों और ट्रेजरी यील्ड ने महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की चाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली एक बड़ी बाधा बनी रही। FII लगातार तीसरे सेशन में नेट सेलर रहे और 28 सितंबर को 5,300 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेची। DII ने इस आउटफ्लो को संतुलित करते हुए लगभग 5,189 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी।

तेल और बॉन्ड यील्ड के दबाव से एशियाई बाजारों में गिरावट

मंगलवार को एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट देखी गई क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने ट्रेजरी यील्ड को कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.5 प्रतिशत गिर गया, जिसमें जापानी और दक्षिण कोरियाई शेयरों में गिरावट देखी गई। हांगकांग का हैंग सेंग 0.4 प्रतिशत गिर गया, जबकि शंघाई कंपोजिट में बहुत कम बदलाव हुआ। ऑस्ट्रेलियाई इक्विटी मार्केट भी मोटे तौर पर सपाट रहा। US इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही; Nasdaq 100 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत नीचे रहे।

ब्रेंट क्रूड $106 के पार पहुंचा

मंगलवार को लगातार दूसरे सेशन में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की चिंताएं, उस क्षेत्र से क्रूड एक्सपोर्ट में सुधार के संकेतों पर भारी पड़ीं। ब्रेंट क्रूड 1.6 प्रतिशत बढ़कर $106.93 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.3 प्रतिशत बढ़कर $93.80 पर पहुंच गया।

US-ईरान विवाद में जल्द ही किसी डिप्लोमैटिक समाधान की उम्मीद कम हो गई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए सप्लाई में संभावित रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता ने कहा, “तुरंत सपोर्ट 72,300–72,500 पर है, जबकि 72,900–73,000 मुख्य रेजिस्टेंस ज़ोन के तौर पर काम कर सकता है। ब्रॉडर ट्रेडिंग रेंज 72,300–73,000 है, और कुल मिलाकर रुख साइडवेज से लेकर मंदी (बेयरिश) वाला है। शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में कुछ स्थिरता लाने के लिए 73,000 के ऊपर लगातार रिकवरी की ज़रूरत होगी। कुल मिलाकर, इंडेक्स साइडवेज से लेकर मंदी वाला बना हुआ है, और जब तक मज़बूत रिबाउंड नहीं दिखता, ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए। 72,900–73,000 के ऊपर लगातार बढ़त कुछ राहत दे सकती है, जबकि 72,300 के नीचे जाने पर गिरावट का दौर और बढ़ सकता है।”

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव बने रहने की उम्मीद है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और U.S.-ईरान संघर्ष को लेकर लगातार अनिश्चितता मार्केट के सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। U.S. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि U.S. इस संघर्ष में ‘बहुत जल्द’ जीत हासिल करेगा, जबकि अधिकारी संघर्ष को खत्म करने के लिए मध्यस्थों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ज़रिए संभावित सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्रूड और US बॉन्ड यील्ड बिगाड़ सकते है बाजार का मूड, गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, इंडेक्स पर कहां रखें आज नजर

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के निचले स्तर पर खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी 100 अंक से ज़्यादा की गिरावट के साथ कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में नई तेज़ी, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और एशियाई व US इक्विटी बाज़ारों में गिरावट का असर बाजारों पर पड़ रहा है। मध्य पूर्व के अहम शिपिंग रूट पर हमले तेज़ होने के बाद ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि US में थोक महंगाई बढ़ने से अगले हफ़्ते फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हुईं।

GIFT निफ्टी सुबह 8 बजे 23,343 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो 117 अंक या 0.5 प्रतिशत नीचे था। गुरुवार को भारतीय इक्विटी बाजारों ने लगातार तीन सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था, हालांकि सीमित दायरे में कारोबार के कारण बढ़त मामूली रही। सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,902.59 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत बढ़कर 23,477.80 पर पहुंचा।

एशियाई बाजारों में गिरावट

शुक्रवार को एशियाई शेयरों और बॉन्ड में गिरावट आई क्योंकि निवेशक ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और US में सख्त मौद्रिक नीति की संभावना से जूझ रहे थे। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया में सबसे ज़्यादा नुकसान देखा गया। जापान का Topix 1 प्रतिशत गिरा, जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स में 2.7 प्रतिशत की गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया के S&P/ASX 200 और हांगकांग के Hang Seng में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि शंघाई कंपोजिट 0.6 प्रतिशत गिरा।

गुरुवार की बिकवाली के बाद US इक्विटी फ्यूचर्स में कुछ स्थिरता के संकेत दिखे, जिसमें एशियाई कारोबार में S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई।

मध्य पूर्व में सप्लाई से जुड़े जोखिम बढ़ने से ब्रेंट $110 के करीब पहुंचा

कच्चा तेल भारतीय बाज़ारों के लिए सबसे बड़ी मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौती बना हुआ है। फारस की खाड़ी और लाल सागर दोनों से शिपिंग के लिए बढ़ते खतरों के बीच कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी जारी है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग $110 तक पहुंचने के बाद 1% बढ़कर $108.68 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1% बढ़कर $103.45 प्रति बैरल हो गया। गुरुवार को दोनों बेंचमार्क में 6% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी।

ईरान-समर्थित हूतियों ने गुरुवार को यमन के मोचा बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया, जिससे रेड सी में शिपिंग के लिए खतरा बढ़ गया है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ट्रैफ़िक पर भी रोक लगी हुई है क्योंकि खाड़ी में टैंकरों पर हमले बढ़ गए हैं।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमलों से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है और क्रूड मार्केट में जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट

गुरुवार को अमेरिकी इक्विटी में गिरावट आई क्योंकि प्रोड्यूसर की कीमतों में बढ़ोतरी और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से यह चिंता बढ़ गई कि महंगाई के कारण फेडरल रिजर्व को अगले हफ़्ते ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। अगस्त में अमेरिकी थोक महंगाई 0.4% बढ़ी, जिससे कीमतों के दबाव को लेकर चिंता बढ़ गई। इसके जवाब में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई, और 10-साल की यील्ड लगभग तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी को उम्मीद है कि 23,500-23,600 का स्तर निफ्टी के लिए तुरंत रेजिस्टेंस का काम करेगा, जबकि 23,200 का स्तर अहम सपोर्ट बना रहेगा। 23,200 के नीचे जाने पर गिरावट 23,050-23,000 तक बढ़ सकती है, हालांकि बहुत ज़्यादा ओवरसोल्ड मोमेंटम इंडिकेटर टेक्निकल बाउंस की गुंजाइश भी बनाते हैं।

गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय इक्विटी में नेट सेलर बने रहे और उन्होंने 438 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को सपोर्ट देना जारी रखा और सेशन के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की इक्विटी खरीदी।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी 111 अंक नीचे, एशिया में भी दबाव, क्रूड $108 के पार

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market This Week :उतार-चढ़ाव के बीच बाजार लगातार चौथे हफ्ते गिरावट के साथ हुआ बंद, रुपये में जारी रही बढ़त

Market This Week : भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए। इस हफ्ते बाजार में काफ़ी उतार-चढ़ाव रहा। पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ रहे तनाव,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और FII की लगातार बिकवाली के चलते बाजार पर दबाव दिखा। हालांकि,रुपये की मजबूती,DII की खरीदारी,अच्छे GST कलेक्शन और अगस्त में ऑटोमोबाइल की अच्छी बिक्री ने बाजार को सपोर्ट दिया। 4 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में BSE सेंसेक्स 749.08 अंक या 0.96% गिरकर 76,515.43 पर बंद हुआ। जबकि निफ़्टी 277.95 अंक या 1.14% की गिरावट के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ।

निफ़्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.5% की गिरावट

इस हफ्ते निफ़्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.5% की गिरावट आई। इस गिरावट में KEI इंडस्ट्रीज, पॉलीकैब इंडिया, हैवेल्स इंडिया, KPIT टेक्नोलॉजीज़, ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, हीरो मोटोकॉर्प, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, 360 ONE WAM, लॉरस लैब्स, हिताची एनर्जी इंडिया और ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ़ इंडिया जैसी कंपनियों का योगदान रहा। दूसरी ओर, लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस, LIC हाउसिंग फाइनेंस, IDFC फर्स्ट बैंक और टाटा कम्युनिकेशंस बढ़त वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रहीं।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स सपाट हुआ बंद

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने हफ्ते के दौरान 20,187.80 का नया हाई छुआ, लेकिन आखिर में यह लगभग सपाट बंद हुआ। IFCI, वेल्सपन कॉर्प, कैप्रि ग्लोबल कैपिटल, RBL बैंक, ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, अर्बन कंपनी और इंद्रप्रस्थ गैस उन कंपनियों में शामिल थीं जिनमें सबसे ज़्यादा बढ़त देखने को मिली। जबकि आरती इंडस्ट्रीज, केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, अमारा राजा एनर्जी एंड मोबिलिटी, स्वान कॉर्प और दीपक फर्टिलाइजर्स एंड पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन में सबसे ज़्यादा गिरावट आई।

सेक्टोरल इंडेक्सों पर एक नजर

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4% और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 2.6% नीचे रहा,जबकि निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी FMCG में से हर एक में 2% की गिरावट आई। हालांकि,निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1% की बढ़त हुई।

FIIs की बिकवाली रही जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे हफ़्ते भी बिकवाली जारी रखी, हालांकि इसकी रफ़्तार धीमी रही। उन्होंने इस हफ़्ते 5,611.94 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को मज़बूत सपोर्ट देना जारी रखा और हफ़्ते के दौरान 23,156.38 करोड़ रुपये का निवेश किया।

मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 4.5 लाख करोड़ रुपये घटा

इस हफ़्ते BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गया,जिसकी मुख्य वजह बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट थी। मार्केट वैल्यू में सबसे ज़्यादा कमी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की वजह से आई, इसके बाद भारती एयरटेल, मारुति सुज़ुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा का नंबर रहा। दूसरी ओर इस हफ़्ते रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और एक्सिस बैंक ने सबसे ज़्यादा वेल्थ क्रिएट की।

अगले 1 महीने में बैंक निफ्टी में आ सकती है 5000 अंकों की तेजी, अगले 12 महीने में डबल हो सकता है सीएनएक्स आईटी

भारतीय रुपया लगातार दूसरे हफ्ते हुआ मजबूत

भारतीय रुपया लगातार दूसरे हफ्ते मजबूत हुआ और इस दौरान दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस हफ्ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 89 पैसे बढ़कर 94.49 रुपये पर बंद हुआ। जबकि, 21 अगस्त को रुपया 95.38 रुपये पर बंद हुआ था। इस हफ़्ते के दौरान,घरेलू मुद्रा 95.48 रुपये से 94.27 रुपये के दायरे में कारोबार करती रही।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, Network18 ग्रुप का हिस्सा है। Network18 को इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट कंट्रोल करता है, और रिलायंस इंडस्ट्रीज इसकी एकमात्र बेनिफिशियरी है।)

 

भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, शॉर्ट टर्म में बंपर कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया है। सुबह 10 बजे, सेंसेक्स 295.68 अंक या 0.39 प्रतिशत बढ़कर 76,866.03 पर और निफ्टी 86.50 अंक या 0.36 प्रतिशत बढ़कर 24,000.95 पर दिख रहा था। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में अडानी पोर्ट्स,पावर ग्रिड कॉर्प, एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और SBI शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में टेक महिंद्रा,नेस्ले,बजाज ऑटो,इंफोसिस और सिप्ला शामिल हैं। सेक्टर के हिसाब से देखें तो IT इंडेक्स 1% नीचे दिख रहा। जबकि बैंक,रियल्टी और मेटल इंडेक्स में 1-1% की बढ़त है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स सपाट कारोबार कर रहा है,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.7% ऊपर है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि US बॉन्ड यील्ड में थोड़ी कमी के कारण आज मार्केट का मूड बेहतर रहने की उम्मीद है। रुपये के नज़रिए से एक बड़ी अच्छी बात यह है कि कंसेशनल स्वैप सुविधा के तहत 136 अरब डॉलर की भारी रकम जुटाई गई है। FCNR(B) स्कीम के तहत जुटाए गए 127 अरब डॉलर की रकम अनुमान से कहीं ज़्यादा है। मार्केट के नज़रिए से इसका मतलब यह है कि रुपया स्थिर होगा,जिससे FIIs का भरोसा बढ़ेगा। ग्रोथ और कमाई की बेहतर संभावनाओं के कारण, US बॉन्ड यील्ड ज़्यादा होने के बावजूद FIIs के भारत में खरीदारी जारी रखने की उम्मीद है। साथ ही,बैंकों द्वारा भारी मात्रा में FCNR(B) फंड जुटाने से उनके NIMs को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह बैंकिंग स्टॉक्स के लिए अच्छी बात है।

कल बाज़ार में आई गिरावट की एक दिलचस्प बात यह है कि निफ़्टी में 141 अंकों की गिरावट के बावजूद इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने ₹9,500 करोड़ की खरीदारी की। इसमें FII की खरीदारी ₹6,688 करोड़ और DII की खरीदारी ₹2,812 करोड़ रही। साफ है कि ज़्यादातर बिकवाली रिटेल इन्वेस्टर्स,प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ‘बेयर्स'(बाज़ार गिरने की उम्मीद करने वालों) की तरफ से हुई,जिन्होंने बाज़ार की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर शेयरों की कीमतों को नीचे गिराया। आज इसमें बदलाव की संभावना है।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि वॉल स्ट्रीट के बढ़त के साथ बंद होने से ग्लोबल संकेत बेहतर हुए हैं। वहीं एशियाई बाज़ारों में राहत की रैली देखी जा रही है और US ट्रेज़री यील्ड में कमी आई है। हालांकि, US-ईरान के बीच तनाव और $95 के आस-पास कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजारों के लिए बड़ जोखिम बनी हुई हैं।

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 23951-24013 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24078-24121/24173 पर है। इसके लिए पहला बेस 23781-23841 पर और बड़ा बेस 23733-23767 पर है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस- 57281-57341 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 57640-57780/57910 पर है। इसके लिए पहला बेस 56830-57010 पर और बड़ा बेस 56530-56680 पर है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं इक्विनॉक्स रिसर्च एंड एडवाइजर्स (EQUINOX Research & Advisors) के पंकज रांदड़। इनकी अदाणी पोर्ट्स फ्यूचर्स में 1675 रुपए के आसपास, 1658 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 1715 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। मुथूट फाइनेंस फ्यूचर्स में भी इनकी 2941 रुपए के ऊपर, 2941 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ,3003 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Trading Ideas : बाजार में कंसोलीडेशन की उम्मीद, शॉर्ट टर्म में जोरदार कमाई के लिए आज इन शेयरों पर रहे नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते गिरे, क्या बाजार के अच्छे दिन अभी दूर हैं?

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट आई। बाजार में काफी उतार-चढ़ाव भी दिखा। यह बीते पांच महीनों में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला रहा। हालांकि, 28 अगस्त को यानी हफ्ते के अंतिम दिन सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए।

इस हफ्ते प्रमुख सूचकांकों में 0.47 फीसदी तक गिरावट आई

28 अगस्त को निफ्टी 0.35 फीसदी यानी 84 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। Sensex 0.43 फीसदी यानी 330 अंक चढ़कर 77,264 पर क्लोज हुआ। बीते एक हफ्ते में सेंसेक्स 0.44 फीसदी गिरा है। निफ्टी इस दौरान 0.47 फीसदी यानी 114 प्वाइंट्स गिरा है। शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट ने इनवेस्टर्स को चिंतित कर दिया है।

BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1 लाख करोड़ घटा

बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन इस हफ्ते करीब 1 लाख करोड़ रुपये घटा है। इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा का बड़ा हाथ रहा। उधर, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार दूसरे हफ्ते बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

जियोपॉलिटिकल स्थितियां अब भी चिंताजनक

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्थितियां अभी भी चिंताजनक बनी हुई हैं। खासकर मिडिलईस्ट में हालात में बदलाव नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। उधर, ईरान और ओमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बातचीत हुई है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। लेकिन, अब भी ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। यह चिंता की बात है।

अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का आसार

उधर, अमेरिका में फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद 28 अगस्त को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। वॉर्श ने यह साफ कर दिया है कि फेड का फोकस फिलहाल महंगाई को बढ़ने से रोकने पर होगा। इसका मतलब है कि अगले महीने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का एलान कर सकता है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो उसका असर भारत में भी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा। भारत में भी इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल चुका है।

क्रूड में तेजी जारी रही तो बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की कीमतें अगर नीचे नहीं आती हैं तो इनफ्लेशन बढ़ना जारी रहेगा। इस बीच इनवेस्टर्स की नजरें अगस्त के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ता है तो अक्तूबर में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका असर कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान पर पड़ेगा।

निफ्टी-सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजे अच्छे आए हैं। इससे इकोनॉमी में डिमांड स्ट्रॉन्ग रहने का संकेत मिलता है। लेकिन, शेयरों की कीमतों में बड़ी तेजी तभी दिखेगी, जब क्रूड की कीमतें नीचे आएंगी। इस बीच निफ्टी और सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड बता रहा है कि सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है। हालांकि, इंडिया वीआईएक्स में नरमिी है। यह 3.5 फीसदी गिरकर 10.68 पर आ गया है। यह अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेजज से नीचे है। इसका मतलब है कि बाजार में आगे बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। फिलहाल बाजार सीमित दायरे में रह सकता है।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 31 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और अच्छे ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। सेंसेक्स आज 331 अंक या 0.43 फीसदी बढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 85 अंक या 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ। चौतरफा खरीदारी के दम पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी तेजी आई। BSE 150 मिडकैप 0.16% चढ़ा,जबकि 250 स्मॉलकैप में 0.33% की बढ़त हुई।

बाजार की इस तेजी की मुख्य वजह चुनिंदा IT और बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों में आई जोरदार खरीदारी रही। सेंसेक्स की बढ़त में इन्फोसिस और HDFC बैंक का सबसे बड़ा योगदान रहा। हालांकि,ICICI बैंक ने इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव डाला।

TCS,इन्फोसिस,टेक महिंद्रा,HCL टेक और टाइटन सेंसेक्स की सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं। दूसरी ओर ICICI बैंक,अल्ट्राटेक सीमेंट,एशियन पेंट्स और ITC इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि IT शेयरों में जबरदस्त तेजी की वजह से आज भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। इस सेक्टर को Nvidia की शानदार कमाई और बेहतर आउटलुक से सहारा मिला। इससे AI से जुड़े निवेश के जारी रहने को लेकर भरोसा बढ़ा और एंटरप्राइज़ AI डिप्लॉयमेंट और वर्कफ़्लो इंटीग्रेशन से जुड़ी कंपनियों को फायदा हुआ। हालांकि,निवेशकों की भागीदारी चुनिंदा शेयरों में रही क्योंकि बाजार जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयर की टिप्पणियों पर नजरें बनाए हुए हैं। इससे US में ब्याज दरों के आउटलुक और ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति के बारे में ज्यादा साफ जानकारी मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर, Q1FY27 के नतीजों का दौर काफी हद तक अच्छे नतीजों के साथ खत्म हो रहा है,इसलिए अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे बदलती ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों के बीच अर्निंग ग्रोथ पर रहेगा।

हालांकि घरेलू लिक्विडिटी की अच्छी स्थिति बाजार को स्थिरता दे रही है,लेकिन वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता के विषय हैं,जिससे निवेशक ग्रोथ और कॉर्पोरेट मुनाफे से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर,अश्विनी शमी ने कहा कि अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड के 4.6%–4.7% के 1-साल के हाई के करीब रहने के बावजूद,हाल के हफ्तों में FII का निवेश थोड़ा पॉजिटिव रहा है। हालांकि US में रिस्क-फ्री रेट्स बढ़ने से आमतौर पर उभरते बाजारों में निवेश पर असर पड़ता है। लेकिन निवेश में यह बढ़ोतरी 2 साल से ज्यादा समय तक बाजार के कंसोलिडेशन के बाद भारतीय इक्विटी की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रुझान को दिखाती है। घरेलू रिटेल और DII का मजबूत निवेश बाजार में गिरावट को संभालने में मदद कर रहा है।

बेंचमार्क इंडेक्स एक दायरे में बने हुए हैं। लार्ज-कैप निफ्टी 100 (~20x P/E) की तुलना में स्मॉल और मिड-कैप इंडेक्स (~34x और 30x P/E) का वैल्यूएशन प्रीमियम काफी ज्यादा है,जो अच्छे बॉटम-अप मौके देता है। निकट भविष्य में बाजार का फोकस दूसरी छमाही (H2) की अर्निंग, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI के लिक्विडिटी रुख पर रहने की उम्मीद है। अच्छे वैल्यूएशन के कारण BFSI और फाइनेंशियल सर्विसेज के चुनिंदा शेयरों निवेश के मौके हैं। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर,पावर और बिजनेस सर्विसेज में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं, जिन्हें कैपेक्स (capex) में सुधार और ऑपरेटिंग लेवरेज से फायदा मिल रहा है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि लगातार दो सेशन में गिरावट के बाद आज भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी दिखी। IT शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले लेकिन पॉजिटिव संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ ट्रेड कर करते दिखे। हालांकि,कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,US बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के पॉलिसी आउटलुक को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है।

कल मंथली एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान दिखी भारी उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को दिन के आखिर में होने वाली हलचल को लेकर और सतर्क कर दिया।

आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें और इंस्टीट्यूशनल फ्लो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP,रिसर्च,अजीत मिश्रा ने कहा कि आज शुक्रवार को बाजार में सुस्ती रही और मिले-जुले संकेतों के बीच मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। सपाट शुरुआत के बाद,निफ्टी पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में घूमता रहा और आखिर में 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 0.43% ऊपर 77,264.51 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nvidia के शानदार तिमाही नतीजों और रेवेन्यू के अच्छे आउटलुक के बाद ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी के दम पर IT सेक्टर सबसे आगे रहा। फार्मा और मेटल सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए,जबकि FMCG और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी सुस्ती रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है।

ग्लोबल बाजार से मिले-जुले संकेतों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच निवेशकों का मूड सतर्क बना रहा। अब सबकी नजरें जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर टिकी हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी के लिए 24,100-24,000 के जोन के आसपास की खींचतान बनी हुई है। अगर यह लेवल टूटता है और गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स 23,800–23,650 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 24,200 का लेवल तत्काल रुकावट का काम कर सकता है और उसके बाद 24,300–24,400 का जोन अहम रेजिस्टेंस लेवल होगा।

मौजूदा अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ट्रेडरों को सलाह है कि इंडेक्स को लेकर सतर्क रुख अपनाएं और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करें। निवेशकों को मज़बूत शेयरों और सेक्टर को प्राथमिकता देनी चाहिए और साथ ही रिस्क और पोजीशन मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या भारतीय बाजार पर दिखाएगी अपना असर, इंडेक्स में आज किन लेवल पर दें ध्यान

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है, कच्चे तेल की गिरती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर हुई बढ़त ने ग्लोबल माहौल को बेहतर बनाया है। ज़्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी और घरेलू स्तर पर इंस्टीट्यूशनल बाइंग से और सपोर्ट मिल सकता है। लेकिन निवेशक Nvidia की तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं, इसलिए वे सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8.10 बजे GIFT निफ्टी 75.00 अंक या 0.31 फीसदी बढ़कर 24,555 पर ट्रेड कर रहा था। घरेलू इक्विटीज़ पॉज़िटिव मोमेंटम के साथ सेशन की शुरुआत कर रही हैं, क्योंकि मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन आखिरी घंटे में हुई खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स को रिकवर करने में मदद मिली थी। मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 115.50 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 24,334.55 पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में ज़्यादातर तेजी

बुधवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर तेज़ी देखी गई, जिसे टेक्नोलॉजी स्टॉक्स और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी से सपोर्ट मिला। MSCI के एशिया-पैसिफिक इक्विटीज़ गेज में 0.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि शंघाई कंपोजिट में 0.4 प्रतिशत की बढ़त हुई। जापान का टोपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी मामूली रूप से ऊपर थे, हालांकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

बुधवार को भारतीय इक्विटीज़ के लिए कच्चे तेल की कीमतों में और तेज़ गिरावट सबसे अच्छे संकेतों में से एक है, जबकि अमेरिकी टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की है। शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले सेशन की भारी गिरावट को और बढ़ा रही है। ईरान ने कहा है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत फिर से शुरू कर दी है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2 प्रतिशत गिरकर $86.80 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.8 प्रतिशत गिरकर $80.87 प्रति बैरल पर आ गया। मंगलवार को दोनों बेंचमार्क में 3 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई थी।

टेक शेयरों में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी से वॉल स्ट्रीट में बढ़त

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुए। Nvidia के नतीजों से पहले टेक्नोलॉजी शेयरों में रिकवरी देखी गई, जबकि हाल ही में बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के बाद कच्चे तेल और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से निवेशकों को कुछ राहत मिली। Nasdaq Composite 0.66 प्रतिशत बढ़कर 26,151.30 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 7,677.24 पर बंद हुआ। Dow Jones Industrial Average 0.30 प्रतिशत बढ़कर 53,577.40 पर पहुंच गया।

बॉन्ड यील्ड में कमी ग्लोबल इक्विटी के लिए एक और सकारात्मक संकेत है। इससे पहले, कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी ने वैल्यूएशन पर दबाव डाला था और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह को लेकर चिंताएं पैदा की थीं।

FII और DII की खरीदारी

मंगलवार को इंस्टीट्यूशनल फ्लो (संस्थागत निवेश प्रवाह) सकारात्मक रहा, जिसमें विदेशी और घरेलू दोनों तरह के निवेशक नेट बायर (शुद्ध खरीदार) के तौर पर उभरे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सत्र में भी खरीदारी जारी रखी और 1,593 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी नेट बायर रहे और उन्होंने भारतीय शेयरों में 230 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी घरेलू इक्विटी के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बुधवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में तेज़ी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी से रिस्क एसेट्स के लिए माहौल बेहतर हुआ है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में नरमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर आई रिकवरी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। बेहतर माहौल को देखते हुए, GIFT निफ्टी फ्यूचर्स शुरुआती कारोबार में 24,500 के स्तर से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि निफ्टी की पिछली क्लोजिंग 24,334 थी; इससे घरेलू इक्विटी में गैप-अप ओपनिंग का संकेत मिलता है।

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि अगर निफ्टी 24,360 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह 24,550-24,700 के स्तर तक जा सकता है, जबकि शॉर्ट-टर्म सपोर्ट 24,000-23,800 के आसपास दिख रहा है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, क्रूड में नरमी 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।