IDBI Bank का शेयर मार्च के निचले स्तर से 46% चढ़ा है, 15 अक्तूबर को शेयर पर दिखेगा डील का असर

आईडीबीआई बैंक के शेयर में 14 अक्तूबर को पंख लग गए। एक समय शेयर 13 फीसदी तक चढ़ गया था। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। कारोबार के अंत में यह 8.33 फीसदी चढ़कर 89.85 रुपये पर बंद हुआ। इस साल मार्च के अपने निचले स्तर से यह शेयर 46 फीसदी चढ़ा है।

आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स को ट्रांसफर होगा

IDBI Bank में फेयरफैक्स नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। 14 अक्तूबर को यूनियन कैबिनेट ने इस प्लान को मंजूरी दे दी। इस डील पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर हो जाने की उम्मीद है। उसके बाद आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक के पास चली जाएगी।

14 अक्टूबर को IDBI Bank के शेयर में तूफानी तेजी

14 अक्तूबर को कमजोर बाजार में आईडीबीआई बैंक के शेयरों में तूफानी तेजी ने मार्केट को चौंकाया था। माना जा रहा था कि शेयर में तेजी की वजह 12 अक्तूबर को बैंक का ऐलान था जिसमें कहा गया था कि उसके बोर्ड की बैठक 17 अक्तूबर को होगी। इसमें सितंबर तिमाही के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी मिलेगी।

शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी औसत का 8 गुना था

खास बात यह है कि 14 अक्तूबर को आईडीबीआई बैंक के शेयरों में तेजी के साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी जबर्दस्त उछाल दिखा था। ट्रेडिंग वॉल्यूम औसत के मुकाबले करीब 8 गुना था। आईडीबीआई बैंक के शेयरों में बीते छह महीनों में करीब 21 फीसदी तेजी आई है। इस दौरान बैंक निफ्टी 1.82 फीसदी गिरा है।

15 अक्टूबर को शेयर पर डील का दिखेगा असर 

आईडीबीआई बैंक के शेयर पर 15 अक्तूबर को डील का असर दिखेगा। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सीएसबी बैंक में पहले से 40 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका मतलब है कि यह कंपनी पहले से भारत के बैंकिंग सेक्टर में मौजूद है। वह आगे आईडीबीआई बैंक में सीएसबी बैंक के विलय का ऐलान कर सकती है या सीएसबी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। आरबीआई के नियम के मुताबिक उसे दोनों में से किसी एक विकल्प का इस्तेमाल करना होगा।

यह भी पढ़ें: IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

फेयरफैक्स को ओपन ऑफर पेश करना होगा 

सरकार ने कई साल पहले आईडीबीआई बैंक की निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन, उसकी कोशिश सफल नहीं हुई थी। इस बीच, सरकार ने कहा है कि आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग से बैंकिंग सेक्टर में नई पूंजी आने का रास्ता खुलेगा। इससे एमएसएमई के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी। शेयर पर्चेज एग्रीमेंट के पूरा होने पर फेयरफैक्स को आईडीबीआई बैंक के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर पेश करना होगा।

Bajaj Finance-M&M के चलते Sensex लाल, Nifty कमजोर, ₹43 हजार करोड़ घटी निवेशकों की दौलत

Sensex-Nifty closed red: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी आज शुरुआती हल्की उठा-पटक के बाद तेज गिरावट दिखी। सेंसेक्स डे-हाई से 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया और निफ्टी भी 22600 के नीचे आ गया और रेड जोन में बंद भी हुए। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक गायब हो गई और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 रेड जोन में बंद हुए। इस दबाव में आज बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹43 हजार करोड़ से अधिक कम हो गया यानी कि निवेशकों की दौलत ₹43 हजार करोड़ से अधिक घट गई।

सेक्टरवाइज मार्केट को आईटी और एफएमसीजी सेक्टर ने ऊपर ले जाने की कोशिश की और इनके निफ्टी इंडेक्स 1-1% से अधिक ऊपर चढ़े। हालांकि फार्मा और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाया। निफ्टी फार्मा 1% से अधिक तो निफ्टी प्राइवेट बैंकों आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो भी करीब 1% कमजोर हुआ।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें आज 14 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 251.89 प्वाइंट्स यानी 0.34% की गिरावट के साथ 72,781.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.25 प्वाइंट्स यानी 0.44% की फिसलन के साथ 22,622.70 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में बात करें तो सेंसेक्स 161.48 प्वाइंट्स चढ़कर 73,195.26 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 616.51 प्वाइंट्स फिसलकर 72,578.75 तक आ गया और निफ्टी भी पहले 36.00 प्वाइंट्स चढ़कर 22,757.95 तक पहुंचा, जहां से यह 199.00 प्वाइंट्स टूटकर 22,558.95 तक आ गया था।

डूबे निवेशकों के ₹43 हजार करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 13 अक्टूबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,70,91,742.63 करोड़ था। आज यानी 14 अक्टूबर 2026 को यह घटकर ₹4,70,47,768.69 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹43,973.94 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 11 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 11 आज बढ़त के साथ बंद हुए। सबसे अधिक तेजी आज इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस में रही। वहीं दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, एमएंडएम और बजाज फिनसर्व में आज सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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126 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4578 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2563 शेयर आज मजबूत हुए तो 1810 में गिरावट रही जबकि 205 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 126 शेयर एक साल के हाई और 103 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 5 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 43 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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Trading Plan: जब तक निफ्टी 22480 के लेवल को बनाए रखता है,तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति करेगी काम

Trading Plan : मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के सेशन में यह देखना अहम होगा कि पिछले सेशन में दिखी तेजी बनी रहती है या नहीं। हालांकि मार्केट का ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है,लेकिन मोमेंटम इंडिकेटर्स में मजबूती के संकेत दिखे हैं। अगर निफ्टी अपने 10 डे EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) यानी 22,600 के इमीडिएट सपोर्ट को बनाए रखने में कामयाब रहता है तो कुछ कंसोलिडेशन की संभावना के बावजूद यह 22,800 और फिर 23,000 के लेवल तक जा सकता है। हालांकि,अगर इंडेक्स 22600 के नीचे जाता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है। ऐसे में 22,300–22,200 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया का काम करेगा।

बैंक निफ्टी को भी सेलिंग प्रेशर से बचने के लिए 55,400 और 55,100 पर सपोर्ट बनाए रखने की जरूरत है। जानकारों का कहना है कि इसके लिए ऊपर की तरफ, 56,100 और 56,500 पर रेजिस्टेंस है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

वेव्स स्ट्रैटेजी एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ आशीष क्याल का कहना है कि हाल की गिरावट के बाद ग्लोबल मार्केट में आई तेजी की वजह से बाजार में फिर से खरीदारी लौटी। दोपहर में आई तेजी की एक मुख्य वजह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) पर दिया गया बयान था,जिससे इनकी समीक्षा की उम्मीद जगी। इस पॉजिटिव माहौल को और सपोर्ट देते हुए, HCLTech और TCS के शानदार तिमाही नतीजों के दम पर IT सेक्टर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जिससे यह इंडेक्स की रिकवरी में अहम योगदान देने वाला सेक्टर बन गया।

डेली चार्ट पर चल रही गिरावट के बाद आई थोड़ी रिकवरी (पुलबैक) के ‘डायमेट्रिक पैटर्न’ की ‘वेव F’ के रूप में जारी रहने की उम्मीद है। लगातार चार सेशन के बाद,निफ्टी आखिरकार पिछले दिन के हाई से ऊपर बंद हुआ,जो चल रही गिरावट में कुछ समय के लिए विराम का संकेत है। कम समय के फ्रेम में, निफ्टी अहम POC (पॉइंट ऑफ़ कंट्रोल) वॉल्यूम प्रोफ़ाइल एरिया से ऊपर चला गया है,जो एक अच्छा संकेत है। इसके आधार पर सपोर्ट लेवल 22,620 (फ्यूचर्स) के आस-पास है, जो लगभग 22,480 स्पॉट लेवल के बराबर है।

निफ्टी निचले स्तरों से वापसी (पुलबैक) दिखा रहा है। फिलहाल, जब तक निफ्टी 22,480 के निचले स्तर को बनाए रखता है,तब तक ‘गिरावट पर खरीदारी’ (buy on dips) का ट्रेंड है और टारगेट 22,820 है।

अहम रेजिस्टेंस: 22,820

अहम सपोर्ट: 22,480

स्ट्रेटेजी: अगर निफ्टी फ्यूचर्स 22,630 से 22,650 की ओर बढ़ता है और वहां से वापस घूमता है (रिवर्स होता है), तो 22,520 के स्टॉप-लॉस के साथ खरीदारी करें। इसके लिए टारगेट 22,730-22,760 और उसके बाद 22,820 होंगे।

बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

आशीष क्याल का कहना है कि बैंक निफ्टी एक हफ्ते से ज़्यादा समय से 54,200–55,400 की सीमित रेंज में बना हुआ था। पिछले सेशन में इंडेक्स आखिरकार इस रेंज से ऊपर निकला और 31 अगस्त के बाद पहली बार डेली चार्ट पर मिडिल बोलिंगर बैंड के ऊपर बंद हुआ,जो शॉर्ट-टर्म मोमेंटम में सुधार का संकेत है।

बैंकिंग सेक्टर में हाल की रिकवरी रैली में प्राइवेट बैंकों का अहम योगदान रहा है और इनमें लगभग 4 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। जबकि PSU बैंकों की चाल अपेक्षाकृत धीमी रही है। इसके अलावा,इंडेक्स ने पिछले 3 सेशन से क्लोजिंग के आधार पर पिछले दिन के निचले स्तर को बनाए रखा है, जिससे निचले स्तरों पर खरीदारी में दिलचस्पी बढ़ने का संकेत मिलता है।

बैंक निफ्टी अपने कंसोलिडेशन रेंज के ऊपर बंद हुआ है,लेकिन लगातार ब्रेकआउट की पुष्टि के लिए और खरीदारी की ज़रूरत है। इसमें 55,770 और उससे ऊपर तक की चाल देखी जा सकती है। नीचे की तरफ,55,000 तत्काल सपोर्ट है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स वापस अपनी पिछली रेंज में जा सकता है।

अहम रेजिस्टेंस: 56,030

अहम सपोर्ट: 55,000

स्ट्रैटेजी: बैंक निफ्टी फ्यूचर्स में 55,600 के ऊपर लॉन्ग पोजीशन बनाई जा सकती है, जिसमें स्टॉप-लॉस 55,400 और टारगेट 55,800 उसके बाद 56,030 होगा।

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

 

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Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में कई बड़ी डील्स की तैयारी, जानिए आगे किन शेयरों में देखने को मिल सकता है एक्शन

बंधन बैंक में आज जोरदार तेजी है। दरअसल,ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि बंधन बैंक में बड़ी डील की तैयारी चल रही है। बैंकिंग-फाइनेंशियल सेक्टर में सिर्फ बंधन बैंक ही नहीं, बल्कि और भी डील होने की सुगबुगाहटें हैं। पिछले एक साल में बैंकिंग सेक्टर में पहले भी कई डील्स हो चुके हैं। आइए बैंकिंग और फाइनेंशियल में डील्स को लेकर क्या अपडेट हैं, इस पर डालते हैं एक नजर।

बैंकिंग-फाइनेंशियल सेक्टर में आगे भी दिखेगा एक्शन

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में कई बड़ी डील्स की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक 4 डील्स पाइपलाइन में हैं यानी इस सेक्टर के लिए 4 बड़े ट्रिगर्स हैं। बंधन बैंक में बड़ी डील्स की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक बंधन बैंक में प्रोमोटर हिस्सा ब्रिकी संभव है। GIC और IFC की करीब 30% हिस्सेदारी से एग्जिट संभव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,25–32% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी है। संभावित डील की वैल्यू 60 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। IHC संभावित खरीदारों में शामिल है। इसके लिए बातचीत में कई महीने लग सकते हैं। इस रिपोर्ट पर बंधन बैंक की प्रतिक्रिया भी आई है जिसमें कहा गया है कि उसे इस खबर को लेकर कोई जानकारी नहीं। प्रोमोटर हिस्सा बिक्री को लेकर कोई जानकारी नहीं। अबू धाबी की IHC के साथ किसी बातचीत लेकर जानकारी नहीं है।

फेडरल बैंक-जना SFB

ऐसी खबरें हैं कि जना SFB में फेडरल बैंक कंट्रोलिंग स्टेक ले सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डील अंतिम चरण में है। जना होल्डिंग्स की 16.9% हिस्सेदारी बिक्री की संभावना है। कंट्रोलिंग स्टेक लेने पर ओपन ऑफर ट्रिगर हो सकता है

DCB बैंक: फंड जुटाने की तैयारी

DCB बैंक के बोर्ड ने 2,000 करोड़ रुपए तक फंड जुटाने को मंजूरी दे दी है। इसमें 1,500 करोड़ तक इक्विटी इश्यू के जरिए जुटाए जाएंगे। इसके लिए ChrysCapital समेत PE निवेशकों से बातचीत की रिपोर्ट आई है।

IIFL फाइनेंस पर ब्लैकस्टोन की नजर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकब्लैकस्टोन, IIFL फाइनेंस में हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रहा है। Fairfax के पास पहले 13.69% हिस्सेदारी थी। जुलाई में Fairfax ने 1.49% हिस्सेदारी बेची थी।

बैंकिंग-फाइनेंशियल: 1 साल में हुईं कई बड़ी डील्स

बैंकिंग-फाइनेंशियल में 1 साल में हुईं कई बड़ी डील्स पर नजर डालें तो RBL बैंक में एमिरेट्स NBD ने 3 अरब डॉलर के निवेश से 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। वहीं, श्रीराम फाइनेंस में MUFG ने 4.4 अरब डॉलर के निवेश से 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। वहीं, YES बैंक में SMBC 1.6 अरब डॉलर के निवेश से 20 फीसदी और फेडरल बैंक में ब्लैकस्टोन ने 6,197 करोड़ रुपए के निवेश से 9.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

 

 

 

Trading Plan : वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार में जोरदार तेजी, जानिए आगे के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Stocks to Watch: 12 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 12 शेयर, बैंकिंग स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Stocks to Watch: 12 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के तिमाही नतीजों, नए ऑर्डर और कारोबारी अपडेट पर नजर रहेगी। वहीं, बैंकिंग सेक्टर में RBI के नए नियमों का असर देखने को मिल सकता है। कुछ कंपनियों के डिविडेंड और फंड जुटाने से जुड़े फैसले भी चर्चा में रहेंगे। इसके अलावा, कई शेयरों का लॉक-इन खत्म होने से उनमें हलचल देखने को मिल सकती है।

Banking Stocks

बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर सोमवार को नजर रहेगी। RBI ने बैंकों के लिए न्यूनतम दैनिक CRR मेंटेनेंस की सीमा 90% से बढ़ाकर 99% कर दी है। नया नियम 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से लागू होगा। RBI ने CRR दर में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके अलावा, रुपये से जुड़े कुछ फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने पर रोक लगाई है। बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर वाले फॉरेक्स डेरिवेटिव की सीमा भी 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी है।

Avenue Supermarts

रिटेल चेन डीमार्ट की पैरेंट कंपनी रिटेल Avenue Supermarts का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 8.5% बढ़कर 743.5 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 17.8% बढ़कर 19,644 करोड़ रुपये और EBITDA 15% बढ़कर 1,394 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन पिछले साल के 7.3% से घटकर 7% रह गया। मार्जिन CNBC-TV18 के अनुमान से काफी नीचे रहा, जबकि रेवेन्यू, मुनाफा और EBITDA मोटे तौर पर अनुमान के मुताबिक रहे।

Can Fin Homes

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Can Fin Homes का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 9.2% बढ़कर 274.6 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 6.6% बढ़कर 432 करोड़ रुपये रही। कंपनी की लोन बुक पिछले साल के 39,657 करोड़ रुपये से बढ़कर 43,539 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन 4.02% से घटकर 3.89% रहा। सितंबर तिमाही में ग्रॉस NPA 0.9% और नेट NPA 0.42% रहा।

Suzlon Energy

विंड एनर्जी कंपनी Suzlon करीब 550 करोड़ रुपये से गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में 3 नई AI फैक्ट्रियां लगाएगी। कंपनी के मुताबिक, इनसे 3,000 प्रत्यक्ष और 12,000 अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। नई यूनिट 2027 तक तैयार करने की योजना है।

Canara Robeco Asset Management Company

एसेट मैनेजमेंट कंपनी Canara Robeco का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 21.5% बढ़कर 59.2 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 18.6% बढ़कर 128 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, कुल AUM 1% घटकर 1.16 लाख करोड़ रुपये रहा। कंपनी के कुल फोलियो की संख्या 50.1 लाख रही। बोर्ड ने 2 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है।

Anand Rathi Wealth

वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी Anand Rathi Wealth का नेट प्रॉफिट 9.5% घटकर 89.95 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 15.7% बढ़कर 344 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन EBITDA 15.1% गिरकर 116.8 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन भी 46.2% से घटकर 34% पर आ गया। बोर्ड ने 4 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है।

Poonawalla Fincorp

NBFC कंपनी Poonawalla Fincorp का नेट प्रॉफिट पिछले साल के 74 करोड़ रुपये से बढ़कर 374.8 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 75.7% बढ़कर 1,589 करोड़ रुपये रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन जून तिमाही के 9.1% से बढ़कर 9.26% हो गया। क्रेडिट कॉस्ट और NPA में कमी देखने को मिली।

Canara HSBC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी Canara HSBC Life Insurance का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.5% बढ़कर 43.1 करोड़ रुपये रहा। नेट प्रीमियम इनकम 13% बढ़कर 2,553.2 करोड़ रुपये हो गई। FY27 की पहली छमाही में वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस 24% बढ़कर 266 करोड़ रुपये पहुंचा।

Waterways Leisure Tourism

टूरिज्म सेक्टर की कंपनी Waterways Leisure Tourism ने 54.4 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। पिछले साल यह 30.9 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू भी 30.9% बढ़कर 133 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी को पिछले साल 6.5 करोड़ रुपये का EBITDA नुकसान हुआ था। इस बार 9.7 करोड़ रुपये का EBITDA प्रॉफिट दर्ज किया गया।

Ajmera Realty

रियल एस्टेट कंपनी Ajmera Realty की दूसरी तिमाही में बेचे गए घरों का कारपेट एरिया सालाना आधार पर 68% घटकर 72,883 वर्ग फुट रहा। बिक्री की वैल्यू 69% गिरकर 224 करोड़ रुपये रही। कलेक्शन में भी 14% की गिरावट आई और यह 190 करोड़ रुपये रहा।

Kalpataru

रियल एस्टेट कंपनी Kalpataru की प्री-सेल्स सालाना आधार पर 5% घटकर 1,258 करोड़ रुपये रही। वहीं, कलेक्शन 1,189 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,189 करोड़ रुपये के आसपास रहा। कंपनी ने तिमाही के दौरान मुंबई के गोरेगांव में प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट Kalpataru Elara लॉन्च किया।

Bajel Projects

पावर ट्रांसमिशन कंपनी Bajel Projects को मुंबई में 220kV गैस इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) सबस्टेशन की सप्लाई और इंस्टॉलेशन का EPC ऑर्डर मिला है। ये सबस्टेशन सॉल्सेट और पवई में बनाए जाएंगे। कंपनी के क्लासिफिकेशन के मुताबिक, इस तरह के ऑर्डर की वैल्यू 200 करोड़ से 300 करोड़ रुपये के बीच होती है।

PTC Industries

डिफेंस कंपनी PTC Industries के बोर्ड ने QIP बंद करने को मंजूरी दी है। इसके जरिए कंपनी ने 1,800 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कंपनी ने पात्र संस्थागत निवेशकों को 8.54 लाख इक्विटी शेयर 21,060 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर जारी किए। यह फ्लोर प्राइस से 5% डिस्काउंट पर है।

शेयरहोल्डर लॉक-इन

सोमवार, 12 अक्टूबर को Kanohar Electricals, Prasol Chemicals, Glass Wall Systems, Pranav Constructions, Laser Power & Infra और Kusumgar के शेयरहोल्डर लॉक-इन की अवधि खत्म होगी। Laser Power & Infra और Kusumgar के लिए तीन महीने का लॉक-इन समाप्त होगा। बाकी कंपनियों के लिए एक महीने की लॉक-इन अवधि खत्म होगी।

Suzlon Share: सुजलॉन 3 नई फैक्ट्रियां लगाएगी, 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा; शेयर पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GDP ग्रोथ रेट 7% से ज्यादा, फिर लगातार क्यों गिर रहा भारत का शेयर बाजार?

भारतीय शेयर बाजारों में लगातार गिरावट ने इनवेस्टर्स को तगड़ी चोट पहुंचाई है। एक तरफ जहां शेयरों में सीधे पैसे लगाने वाले लोग मायूस हैं तो दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में हर महीने सिप से इनवेस्ट करने वाले लोग चिंतित है। पिछले करीब दो साल में उनका पैसा बढ़ने की जगह घटा है। अब इनवेस्टर्स का धैर्य टूटने लगा है। इस हफ्ते के मध्य में निफ्टी गिरकर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में उनके मन में एक सवाल चल रहा है। इनवेस्टर्स यह जानना चाहते हैं कि जब दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी है तो हमारा बाजार क्यों गिर रहा है?

भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर 

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट इसलिए भी परेशान कर रही है, क्योंकि देश की जीडीपी की ग्रोथ अच्छी है। यह 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है। देश का मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है। सरकार का फिस्कल डेफिसिट अनुमान के मुताबिक है। इकोनॉमी में डिमांड अच्छी है। इसकी तस्दीक हर महीने जीएसटी कलेक्शन के डेटा से हो जाती है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस के डेटा भी सामान्य हैं। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ बेहदत है। तीन साल से ज्यादा समय के बाद आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। इसका मतलब है कि अब तक इंटरेस्ट रेट ज्यादा नहीं था। किसी इकोनॉमी की स्थिति ऐसी होने पर शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखती है। लेकिन, भारत का शेयर बाजार चढ़ने की जगह गिर रहा है।

दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में शानदार तेजी 

दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों में भी बीते एक साल में अच्छी आई है। अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस (Dow Jones) इंडस्ट्रियल एवरेज ने बीते एक साल में 13.58 फीसदी रिटर्न दिया है। दक्षिण कोरिया के कोस्पी ने इस साल 83 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। यहां तक कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक FTSE ने भी बीते एक साल में करीब 12 फीसदी रिटर्न दिया है। लेकिन, बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों Nifty और Sensex में  बड़ी गिरावट आई है। निफ्टी जहां करीब 11 फीसदी फिसला है, वही सेंसेक्स 12 फीसदी से ज्यादा लुढ़का है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को पहुंचाई चोट

भारतीय बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है। बीते कई सालों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। पिछले दो सालों में यह बिकवाली काफी बढ़ी है। 2026 में FIIs की शुद्ध बिक्री 4.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही है। बर्नस्टीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में नया निवेश करने की कोई वजह नहीं दिखती। यह रिपोर्ट सितंबर के तीसरे हफ्ते में आई थी। अगर बीते दो सालों की बात की जाए तो FIIs ने भारतीय बाजार से करीब 40 अरब डॉलर निकाले हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) खासकर म्यूचुअल फंडों ने इस दौरान लगातार निवेश किया है, जिससे बाजार को बड़ा सहारा मिला है।

महंगे वैल्यूएशंस की वजह से विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली

FIIs की भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली की दो बड़ी वजहें हैं। पहला, भारतीय शेयरों की वैल्यूएशंस पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई थी। निफ्टी और सेंसेक्स की वैल्यूएशंस अपनी लंबी अवधि की औसत वैल्यूएशंस से काफी आगे निकल गई थी। इसका मतलब है कि भारतीय शेयर बाजार काफी महंगा हो गया था। इस वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने करने के लिए कंपनियों की अर्निंग्स में तेज उछाल की जरूरत थी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, जून तिमाही से कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट दिखा है। लेकिन, इससे निफ्टी की वैल्यूएशन घटकर करीब 19 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले साल 23 फीसदी तक पहुंच गई थी। दुनिया के कई दूसरे देशों के बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब भी ज्यादा है।

भारतीय बाजार में एआई और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स का अभाव

दूसरा, भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियां मौजूद नहीं हैं। पिछले दो सालों में उन बाजारों में ज्यादा तेजी आई है, जहां सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां मौजूदा हैं। इनमें पहले नंबर पर अमेरिका है। एशिया में दक्षिण कोरिया और ताइवान है। विदेशी निवेशकों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स से जुड़ी कंपनियों में जमकर निवेश किए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत जैसे बाजारों से अपने पैसे निकाले हैं। इस निवेश से एआई और सेंमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि Nvidia का मार्केट कैपिटलाइजेशन 6 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह भारत की जीडीपी से ज्यादा है। Nvidia का शेयर एक साल में 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। यही हाल दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों का है। विदेशी निवेशक उसी बाजार में निवेश करते हैं, जहां उन्हें ज्यादा प्रॉफिट की उम्मीद दिखती है।

अमेरिका और ईरान की लड़ाई ने बढ़ाया दबाव

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू हुई। इसका असर क्रूड ऑयल के उत्पादन पर पड़ा। क्रूड की सप्लाई घटने से इसकी कीमतें आसमान में पहुंच गईं। पिछले कई दिनो से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है। यह भारत जैसे देश के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि भारत क्रूड की अपनी 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है।

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क्रूड में उछाल का इकोनॉमी पर पड़ रहा असर 

क्रूड में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब आ गया है। महंगे क्रूड की वजह से इस साल ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इसका असर आम आदमी की खर्च करने की क्षमता पर पड़ रहा है। क्रूड का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ी है। इससे शेयर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।

Stocks to Watch: 7 अक्टूबर को इन 11 शेयरों पर रहेगी नजर, टाइटन से अदाणी पोर्ट्स तक शामिल

Stocks to Watch: बुधवार, 7 अक्टूबर के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर फोकस में रहेंगे। इनमें टाइटन, एशियन पेंट्स और अदाणी पोर्ट्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं। वहीं, कुछ कंपनियों ने नए निवेश और कारोबार विस्तार की जानकारी दी है।

HCLTech

आईटी सेक्टर की HCLTech ने लखनऊ में HCL IT City के विस्तार के लिए 500 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है। कंपनी ने 1,000 छात्रों के लिए AI अपस्किलिंग पहल भी शुरू की है। इससे लखनऊ में कंपनी की मौजूदगी और टेक्नोलॉजी से जुड़े कामकाज को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Asian Paints

पेंट सेक्टर की Asian Paints 29 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड मीटिंग में FY27 के अंतरिम डिविडेंड पर फैसला करेगी। डिविडेंड घोषित होने पर 4 नवंबर रिकॉर्ड डेट होगी। इसी बैठक में 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही और छमाही के वित्तीय नतीजों पर भी विचार होगा।

JSW Cement

सीमेंट सेक्टर की JSW Cement ने राजस्थान के नागौर में 1 MTPA की नई सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट शुरू की है। इसके साथ कंपनी की कुल सीमेंट ग्राइंडिंग क्षमता बढ़कर 25.1 MTPA हो गई है। नई यूनिट से कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी और बढ़ेगी।

Titan Company

ज्वेलरी और वॉच सेक्टर की Titan Company के घरेलू कारोबार में Q2 में 22% की ग्रोथ हुई। इंटरनेशनल कारोबार 97% बढ़ा। कंज्यूमर कारोबार 25% बढ़ा। ज्वेलरी 21%, वॉच 30% और आईकेयर कारोबार 28% बढ़ा।

Godrej Consumer Products

FMCG सेक्टर की Godrej Consumer Products ने इंडोनेशिया में अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के पहले चरण की शुरुआत की है। यह प्लांट इंडोनेशिया के Kendal Special Economic Zone में है। कंपनी इस देश में 500 बिलियन IDR यानी करीब 250 करोड़ रुपये निवेश कर रही है।

Adani Ports and Special Economic Zone

पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की Adani Ports and Special Economic Zone ने Paradip Mahanadi Terminal Ltd नाम से एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी बनाई है। इसका गठन ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर दो ड्राई बल्क बर्थ के डेवलपमेंट और ऑपरेशन के लिए किया गया है।

Zaggle Prepaid Ocean Services

फिनटेक सेक्टर की Zaggle Prepaid Ocean Services अब विदेशों में अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी अबू धाबी ग्लोबल मार्केट में एक सब्सिडियरी बनाएगी। इसके जरिए टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं में नए कारोबारी मौके तलाशे जाएंगे।

Utkarsh Small Finance Bank

स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग सेक्टर के Utkarsh Small Finance Bank ने सितंबर तिमाही में 3,525 करोड़ रुपये के कुल डिस्बर्समेंट की जानकारी दी है। यह पिछले साल की समान तिमाही के 2,275 करोड़ रुपये से 54.9% ज्यादा है।

Apollo Tyres

टायर सेक्टर की Apollo Tyres के CFO गौरव कुमार ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 6 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है।

Kanohar Electricals

इलेक्ट्रिकल सेक्टर की Kanohar Electricals का सितंबर तिमाही में मुनाफा 11.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 27.3 करोड़ रुपये हो गया। इनकम 67.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 137 करोड़ रुपये और EBITDA 15.4 करोड़ से बढ़कर 38.8 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन भी 22.81% से बढ़कर 28.27% हो गया।

Marsons

पावर ट्रांसफॉर्मर सेक्टर की Marsons ने Cleanhill Partners के साथ जॉइंट वेंचर बनाने का ऐलान किया है। इसका फोकस नॉर्थ अमेरिका में पावर ट्रांसफॉर्मर की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर रहेगा।

Titan Q2 Update: टाटा की कंपनी के ज्वेलरी, वॉच और आईकेयर बिजनेस में तगड़ी ग्रोथ, 78 नए स्टोर जोड़े

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ICICI Prudential Life: सिद्धार्थ मिश्रा होंगे नए MD और CEO, अनूप बागची ने इस्तीफा दिया

इंश्योरेंस कंपनी ICICI Prudential Life Insurance को नया MD और CEO मिलने वाला है। कंपनी ने सिद्धार्थ मिश्रा को यह जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। वह अनूप बागची की जगह लेंगे। बागची अब HDFC Bank जाने वाले हैं।

कंपनी ने बताया कि बोर्ड ने सिद्धार्थ मिश्रा को 6 अक्टूबर 2026 से चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बनाने की मंजूरी दी है। इसके बाद उन्हें MD और CEO की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

सिद्धार्थ मिश्रा की नियुक्ति 14 अक्टूबर 2026 से या IRDAI की मंजूरी मिलने की तारीख से प्रभावी होगी। दोनों में जो तारीख बाद में होगी, वही लागू होगी। उनका कार्यकाल पांच साल का रहेगा। नियुक्ति के लिए जरूरी मंजूरियां भी लेनी होंगी।

सिद्धार्थ मिश्रा के पास 26 साल का अनुभव

सिद्धार्थ मिश्रा को बैंकिंग सेक्टर में 26 साल से ज्यादा का अनुभव है। फिलहाल वह ICICI Bank में डिजिटल चैनल्स और पार्टनरशिप का काम देखते हैं।

इसके अलावा उनके पास वॉयस चैनल, कस्टमर सर्विस, NRI और IFIG ग्रुप्स की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्कल यूनिवर्सिटी से साइंस में बैचलर डिग्री की है। इसके बाद फाइनेंस में स्पेशलाइजेशन के साथ मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा किया।

अनूप बागची ने छोड़ा पद

अनूप बागची ICICI Prudential Life के MD और CEO पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उनका इस्तीफा 13 अक्टूबर 2026 को कारोबार खत्म होने के साथ प्रभावी होगा। बोर्ड ने गुरुवार को हुई बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार किया। यह फैसला बोर्ड नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी की सिफारिश के आधार पर लिया गया।

कंपनी ने ICICI ग्रुप में करीब तीन दशक के बागची के काम की सराहना की। कंपनी के मुताबिक, ICICI Prudential Life में उनके कार्यकाल के दौरान कारोबार को मजबूत बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। अब बागची HDFC Bank में MD और CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे।

Stocks in Focus: विजय केडिया और सुनील सिंघानिया ने सितंबर में खरीदे ये 2 शेयर, एक ने 5 साल में दिया है 2600% का मल्टीबैगर रिटर्न

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Daily Voice : अमेरिका के मिड टर्म चुनावों के बाद बाजार में आएगी तेजी, इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग शेयरों में बनेगा पैसा

Daily Voice: ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शमी को उम्मीद है कि US के मिड टर्म चुनावों के बाद जियोपॉलिटिकल हालात बेहतर होंगे। इससे कच्चे तेल की कीमतों में कमी आएगी,महंगाई के अनुमानों में गिरावट होगी,US ट्रेजरी यील्ड में नरमी आएगी, कंपनियों की मार्जिन बेहतर होगी और भारतीय इक्विटी में फंड विदेशी पैसा आना शुरू होगा। इन सबसे मार्केट को सपोर्ट मिल सकता है।

उनका मानना ​​है कि जब मार्केट FY28 की अर्निंग और रेवेन्यू ग्रोथ पर ध्यान देना शुरू करेगा तो मौजूदा लेवल से बाजार में तेजी आने की संभावना है। उनको उम्मीद है कि RBI अपनी अगली MPC मीटिंग में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। वे इसे ब्याज दरें बढ़ाने के दौर की शुरुआत के तौर पर नहीं,बल्कि महंगाई के कुछ समय के दबाव को संभालने और US ट्रेजरी यील्ड बढ़ने के बीच रुपये को सहारा देने के लिए मॉनेटरी कदम के तौर पर देखते हैं।

क्या आपको उम्मीद है कि Q2 के नतीजे कोई पॉजिटिव सरप्राइज लेकर आएंगे?

दूसरी तिमाही के ज्यादातर हिस्से में महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रही है,इसलिए इनपुट कॉस्ट बढ़ने से मार्जिन पर दबाव पड़ने और Q2 की अर्निंग पर असर पड़ने की आशंका है। सर्विस सेक्टर,खासकर फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर के अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है,क्योंकि पिछले 2-3 क्वार्टर में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही है।

क्या हालिया गिरावट के बाद लार्ज-कैप शेयरों के भाव अच्छे हो गए हैं?

लार्ज-कैप कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी को लेकर निकट भविष्य की कमजोरी या अनिश्चितता पर बहुत ज़्यादा फोकस किया गया है। FII की बिकवाली के दबाव के साथ मिलकर लार्ज-कैप कंपनियों का वैल्यूएशन मल्टीपल आकर्षक स्तर पर आ गया है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल,कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव,करेंसी में दबाव से इनपुट कॉस्ट का बढ़ना और सप्लाई चेन में रुकावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन अगर आप मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के बाद डबल-डिजिट ग्रोथ की संभावना को ध्यान में रखें,तो 19.1 के P/E और 2.87 के P/B पर निफ्टी 100 निश्चित रूप से अच्छे भाव पर है।

इन चुनौतियों के बावजूद,हमने पिछली तिमाही में रेवेन्यू और अर्निंग्स में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी है। संभावना है कि US के मध्यावधि चुनावों के बाद ये हालात सामान्य हो सकते हैं।

क्या नए नियमों की वजह से हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद आपने इंश्योरेंस सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है,या आप अभी भी इस सेक्टर को लेकर सतर्क हैं?

पारंपरिक इंश्योरेंस कंपनियां अभी भी ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं और उन पर डिजिटल इंटरमीडियरीज जैसा असर नहीं पड़ा है। इनमें काफी गिरावट आई है। बाजार ने पारंपरिक इंश्योरेंस कंपनियों के लिए वॉल्यूम ग्रोथ और क्लाइंट हासिल करने की बढ़ती लागत से जुड़ी चुनौतियों को अभी पूरी तरह से नहीं समझा है।

डिजिटल इंटरमीडियरीज की बात करें तो इनकी कीमतों में काफी करेक्शन हुआ है,लेकिन इनमें निवेश से पहले कारोबार पर नए नियमों से पड़ने वाले असर को पूरी तरह से समझना जरूरी है।

क्या आपको बैंकिंग सेक्टर में नेट इंटरेस्ट मार्जिन के बढ़ने और री-रेटिंग की उम्मीद है? क्या बैंकों के भाव आकर्षक हो गया है?

पब्लिक बैंक इंडेक्स 7.1 के P/E पर और प्राइवेट बैंक इंडेक्स 16.5 के P/E पर ट्रेड कर रहे हैं। ये दोनों इंडेक्स लार्ज-कैप इंडेक्स की तुलना में भी ज़्यादा आकर्षक कीमत पर हैं। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर नेट इंटरेस्ट मार्जिन स्थिर हो जाएंगे।

पहले,क्रेडिट ग्रोथ के मुकाबले डिपॉज़िट ग्रोथ के पीछे रहने को लेकर चिंता थी,जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव पड़ा। अभी चिंता FCNR डिपॉज़िट के रूप में आने वाले बड़े फंड को लेकर है,जिसे इस्तेमाल में लाने में समय लगेगा। हालांकि,आने वाली तिमाहियों में इन फंड्स के इस्तेमाल होने की उम्मीद है, जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन में स्थिरता आएगी।

क्या आपको मैन्युफैक्चरिंग स्टॉक्स में वैल्यूएशन से जुड़े जोखिम दिख रहे हैं?

इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस्ड बड़े इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पॉजिटिव नजरिया है। इसमें पावर,लॉजिस्टिक्स,मशीनरी और EPC सेगमेंट शामिल हैं। दूसरी ओर निवेशकों को कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के वैल्यूएशन लेवल को लेकर सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इनमें ग्रोथ की उम्मीदें पहले ही पूरी तरह से कीमत में शामिल हो चुकी हैं।

 

सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर चिराग दारूवाला से जाने अक्टूबर में कैसा रहेगा बाजार, राशियों के हिसाब से कहां बनेगा पैसा

 

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