Video: शादी के बाद इंटरव्यू में HR ने पूछा बेबी प्लानिंग पर सवाल, हैरान रह गई महिला, वीडियो वायरल

नौकरी के इंटरव्यू में महिलाओं से शादी और बच्चे की प्लानिंग को लेकर सवाल पूछने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया है। महिला ने बताया कि जब उन्होंने HR को अपने पति के बारे में बताया, तो उनसे पूछा गया कि क्या वह बच्चे की प्लानिंग रही है। इस सवाल के बाद महिला ने कॉर्पोरेट कंपनियों में महिलाओं को मिलने वाले समान अवसरों और महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस तरह के सवाल नौकरी के इंटरव्यू में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर चिंता पैदा करते हैं।

हैरान रह गई महिला

शताक्षी द्विवेदी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने नौकरी के इंटरव्यू के दौरान HR की ओर से पूछे गए एक सवाल का जिक्र किया। वीडियो में उन्होंने बताया कि, जब HR को पता चला कि उनकी हाल ही में शादी हुई है, तो उनसे एक ऐसा सवाल पूछा गया, जिसने उन्हें हैरान कर दिया। उन्होंने इस एक्सपीरिएंस को शेयर करते हुए इसे HR की ओर से पूछा गया सबसे गलत सवाल बताया। शताक्षी द्विवेदी ने बताया कि इंटरव्यू की शुरुआत में सब कुछ सामान्य था।

शताक्षी ने बताया कि, HR ने उनसे पूछा कि वह कहां रहती हैं और घर से ऑफिस आने-जाने में उन्हें कोई परेशानी तो नहीं होगी, क्योंकि उनका घर काफी दूर था। इस पर शताक्षी ने कहा कि उन्हें आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने ये भी बताया कि उनके पति भी उसी इलाके में आते-जाते हैं, इसलिए वह उनके साथ ऑफिस आ-जा सकती हैं।

बेबी प्लानिंग को लेकर किया सवाल

बातचीत का रुख तब बदल गया जब HR ने शताक्षी की शादी को लेकर सवाल करना शुरू कर दिया। शताक्षी ने बताया कि HR ने उनसे कहा कि आपने बताया था कि आप शादीशुदा हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि उनकी हाल ही में शादी हुई है। इसके बाद HR ने उनसे पूछा कि क्या वह जल्द ही बच्चा पैदा करने की योजना तो नहीं बना रही हैं। इस सवाल ने शताक्षी को हैरान कर दिया। इस सवाल से शताक्षी द्विवेदी असहज हो गईं।

 

वायरल हो रहा वीडियो

उन्होंने कॉर्पोरेट कंपनियों के महिला सशक्तिकरण और समान अवसर देने के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि एक तरफ कंपनियां बराबरी की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ इंटरव्यू में महिलाओं से शादी और बच्चे की प्लानिंग जैसे निजी सवाल पूछे जाते हैं। शताक्षी ने उस कंपनी का नाम नहीं बताया, जहां उनके साथ यह घटना हुई थी। सोशल मीडिया पर ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई महिलाओं ने भी अपने साथ हुए ऐसे ही अनुभव साझा किए और बताया कि नौकरी के दौरान उन्हें भी इस तरह के निजी सवालों का सामना करना पड़ा है। वहीं, कई लोगों ने इंटरव्यू में महिलाओं से ऐसे सवाल पूछने के तरीके की आलोचना की।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने लिखा कि, ‘उसके साथ भी ऐसा ही हुआ था। इंटरव्यू के दौरान उससे सीधे बच्चे पैदा करने की योजना के बारे में पूछा गया। उसने कहा कि साल 2026 में भी महिलाओं को नौकरी पाने के लिए ऐसे असहज सवालों का सामना करना पड़ रहा है।’ एक यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि, ‘इंटरव्यू के दौरान उनसे भी सीधे बच्चे की प्लानिंग को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि साल 2026 में भी महिलाओं को इस तरह के अजीब सवालों का सामना करना पड़ रहा है।’

वहीं, एक अन्य यूजर ने समाज के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अविवाहित महिलाओं से पूछा जाता कि, ‘वे शादी कब करेंगी, शादीशुदा महिलाओं से बच्चे की प्लानिंग के बारे में सवाल किए जाते हैं और मां बनने के बाद उनसे पूछा जाता है कि वे काम और बच्चे की जिम्मेदारियों को कैसे संभालेंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 22 साल की उम्र से लेकर नौकरी छोड़ने या 50 साल की उम्र तक इंटरव्यू में ऐसे सवालों का सामना करना पड़ सकता है।’

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

महिलाएं सदियों से साहसी और संघर्षशील रही हैं : कुब्रा सैत

अभिनेत्री कुब्रा सैत ने महिला सशक्तिकरण पर अपनी राय रखते हुए कहा कि महिलाएं सदियों से साहसी और संघर्षशील रही हैं तथा उन्हें अपनी शर्तों पर जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। एक कार्यक्रम में महिलाओं की आवाज बनने के लिए सम्मानित किए जाने पर कुब्रा ने कहा कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले मंच से जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने हमेशा अपने अधिकारों और इच्छाओं के लिए संघर्ष किया है, लेकिन उनके योगदान को पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं किया गया।

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कुब्रा ने कहा मेरा मानना है कि महिलाएं सदियों से साहसी और संघर्षशील रही हैं। हमने हमेशा अपने हक और अपनी इच्छाओं के लिए लड़ाई लड़ी है। यह दर्ज किया गया हो या नहीं, लेकिन कहीं न कहीं हम यह मानने लगे हैं कि यह पुरुषों की दुनिया रही है।”उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की आवाज बनने के लिए सम्मानित होना उनके लिए खुशी की बात है। उनके अनुसार, सशक्तिकरण का अर्थ अपनी जिंदगी जीने, अनुभवों से सीखने, गलतियां करने से नहीं डरने और खुद को बेहतर इंसान बनाने का अवसर मिलना भी है। कुब्रा ने कहा कि महिलाओं को अपनी पसंद से फैसले लेने और अपनी पहचान के साथ जीवन जीने की आजादी मिलनी चाहिए।

Pic Credit : UNI

मेरठ में इकरा हसन बोलीं- 2027 में बनेगी सपा सरकार, नफरत का जवाब भाईचारे से देंगे

मेरठ में इकरा हसन बोलीं- 2027 में बनेगी सपा सरकार, नफरत का जवाब भाईचारे से देंगे

कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने मेरठ में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ी बात कहीं है। सरधना विधानसभा क्षेत्र के सेंट चार्ल्स इंटर कॉलेज में आयोजित विचार गोष्ठी और प्रतिभा सम्मान समारोह में पहुंचीं इकरा हसन ने कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति का जवाब भाईचारे, एकजुटता और आपसी सौहार्द से दिया जाएगा। कार्यक्रम में मेधावी छात्राओं को साइकलें भी वितरित की गईं।

 

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इकरा हसन ने युवाओं से शिक्षा और मेहनत के बल पर सफलता अर्जित अरने की अपील की है। उन्होंने कहा सभी को मिसाइलमैन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम से प्रेरणा लेनी चाहिए, उन्होंने साधारण परिवार से निकलकर अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। युवाओं को उनके जीवन से सीखना चाहिए और अपने लक्ष्य के लिए ईमानदारी और लगन से काम करना चाहिए।

 

साइकल सिर्फ सवारी नहीं, हमारी सोच है

मेधावी छात्राओं को साइकल वितरण को महिला शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए इकरा हसन ने कहा कि साइकल सिर्फ सवारी का साधन नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की सोच है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अपने दम पर पैडल मारकर साइकल को आगे बढ़ाया जाता है, उसी तरह जीवन में भी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहिए।

 

महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने कहा कि राजनीति और सदनों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। महिलाओं को समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने शिक्षा को महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

 

भाजपा पर निशाना, PDA को बताया सपा की ताकत

इकरा हसन ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि नफरत की राजनीति का जवाब भाईचारे से दिया जाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के सामाजिक गठजोड़ को पार्टी की ताकत बताया। इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी।

 

उन्होंने सरधना विधायक अतुल प्रधान की भी तारीफ की और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं से उनके समर्थन में जुटने की अपील की।

 

करीब 2 हजार छात्राओं को साइकल बांटने का दावा

कार्यक्रम का आयोजन सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में तकरीबन 2000 साइकलें बांटने का दावा किया गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं, अभिभावक और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

 

इकरा हसन के 2027 में सपा सरकार बनने के दावे और अतुल प्रधान के समर्थन में दिए गए बयान के बाद कार्यक्रम को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम को सपा की जनसंपर्क गतिविधि के तौर पर भी देखा जा रहा है।

Rahul Gandhi: ‘आप किसी की नहीं, खुद की हैं’, महिलाओं की पहचान और आजादी पर बोले राहुल गांधी

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत और संपत्ति हैं। उन्होंने तर्क दिया कि महिलाओं को केवल पुरुषों के साथ उनके रिश्तों के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें पारंपरिक पारिवारिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

गांधी ने कहा कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” होती हैं और उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत आकांक्षाओं, अनुभवों और महत्वाकांक्षाओं को देश की एक बड़ी ताकत बताया।

गांधी ने कहा, “भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? मैं इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट हूं। भारत की सबसे बड़ी ताकत देश की 70 करोड़ महिलाओं की अनूठी यात्राएं, अनूठी कल्पनाएं और अनूठे सपने हैं जिन्हें वे जी रही हैं।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ अपने रिश्तों से मिली पहचान से परे अपनी पहचान बनाने में सक्षम होना चाहिए, साथ ही उन्होंने यह भी माना कि बेटी, पत्नी या मां होना अपने आप में कोई समस्या नहीं है।

गांधी ने कहा, “जब भी मैं पुरुषों से बात करता हूं, तो पाता हूं कि महिलाओं को अक्सर सिर्फ तीन श्रेणियों में रखा जाता है: बेटी, पत्नी या मां।”

उन्होंने आगे कहा, “इनमें से किसी भी पहचान में कोई बुराई नहीं है। लेकिन ये आपकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं।”

रिश्तों से आगे महिलाओं की अपनी पहचान जरूरी: राहुल गांधी

गांधी ने कहा कि महिलाएं प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी होती हैं, लेकिन अक्सर उनकी पहचान को पुरुषों के साथ उनके रिश्तों तक ही सीमित कर दिया जाता है।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि परिवार से जुड़ी ये तीन आम पहचानें ही महिलाओं को किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते के जरिए परिभाषित करती हैं। यानी एक महिला को उसकी अपनी पहचान रखने वाले एक व्यक्ति के बजाय बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखा जाता है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर की राहुल गांधी की बातें

कांग्रेस ने भी ‘CONTROL’ (नियंत्रण) थीम के तहत X पर गांधी की ये बातें साझा कीं और महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि समाज उन पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है।

राहुल गांधी ने कहा, “किसी को नियंत्रित करने के चार तरीके होते हैं- 1. हिंसा, 2. अपमान, 3. समय और 4. कंट्रोल।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने की इस कोशिश को अक्सर उनकी सुरक्षा और भलाई की चिंता के नाम पर सही ठहराया जाता है।

राहुल गांधी ने कहा, “इस दबाव को चिंता का नाम दे दिया जाता है। कहा जाता है- ‘हमें आपकी बहुत चिंता है, इसलिए हमें आपको नियंत्रित करने की जरूरत है।’”

कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में महिलाओं की आवाजाही, फैसले लेने की आजादी, आर्थिक स्थिति और अवसरों तक पहुंच से जुड़े कुछ आंकड़े भी शेयर किए।

पोस्ट के मुताबिक, 60% महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं, जबकि 45% महिलाएं शादी या घर की जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि सिर्फ 8% महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक है।

राहुल गांधी ने गिनाए महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप

गांधी ने हिंसा के उन तीन रूपों के बारे में भी बात की जो महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकते हैं – शारीरिक हिंसा, “मौके से जुड़ी हिंसा” (opportunity violence) और “आर्थिक हिंसा”।

शारीरिक हिंसा के तहत, कांग्रेस ने हर साल 4.5 लाख बेटियों के भ्रूण हत्या का शिकार होने, 80% महिलाओं के उत्पीड़न, 29% महिलाओं के खिलाफ शारीरिक हिंसा और 6% महिलाओं के साथ बलात्कार का जिक्र किया।

“मौके से जुड़ी हिंसा” के बारे में पोस्ट में कहा गया है कि सुरक्षा के नाम पर 50% महिलाओं को शिक्षा या नौकरी से वंचित कर दिया जाता है।

“आर्थिक हिंसा” के तहत, कांग्रेस ने महिलाओं के लिए सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल 17,500 रुपये के अतिरिक्त खर्च का जिक्र किया।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र किया

इसके बाद गांधी ने महिलाओं की आजादी पर अपनी बात रखते हुए मनुस्मृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मनुस्मृति में लिखा है कि महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

अपनी मूल बातों में, गांधी ने मनुस्मृति के एक अंश का भी हवाला दिया: “बचपन में, महिला अपने पिता के अधीन होती है। जवानी में, वह अपने पति के अधीन होती है। पति की मृत्यु के बाद, वह अपने बेटों के अधीन होती है। महिला को कभी भी आजाद नहीं होना चाहिए।”

गांधी ने कहा, “यह मनुस्मृति का सीधा उद्धरण है, और ये शब्द शर्मनाक हैं, क्योंकि ये शब्द कभी भी नहीं कहे जाने चाहिए थे।”

इसके विपरीत, उन्होंने अपनी सोच रखते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए, अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए और अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा, “मेरा मानना है कि इस देश की सबसे बड़ी ताकत यही है कि हमारी महिलाएं स्वतंत्र हों, अपने लिए खड़ी हों और खुद पर भरोसा रखें।”

राहुल गांधी ने साफ किया कि महिलाओं की आजादी का मतलब यह नहीं है कि उनके परिवार से रिश्ते नहीं हो सकते। उनका कहना था कि ये रिश्ते किसी महिला की पहचान तय नहीं करने चाहिए और न ही इसका मतलब यह होना चाहिए कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति है।

उन्होंने कहा, “आपके पिता, भाई, पति या बेटे के साथ रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन आप उनकी नहीं हैं। आप खुद की हैं।”

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं अपने पिता, भाई, पति और बेटों के साथ रिश्ते निभाते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रख सकती हैं और अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद ले सकती हैं।

महिलाओं को अपने फैसलों की आजादी

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महिला सशक्तिकरण को सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व या पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने महिलाओं की आने-जाने की आजादी, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अधिकार, सुरक्षा और अपनी पसंद से फैसले लेने की स्वतंत्रता को भी उतना ही जरूरी बताया।

उनकी बातों में सामाजिक नियंत्रण और सुरक्षा की भाषा के बीच संबंध भी दिखाया गया। कांग्रेस की पोस्ट में कहा गया कि महिलाओं को हिंसा, अनादर, समय की पाबंदी और नियंत्रण के जरिए सीमित किया जाता है, जबकि ऐसी पाबंदियों को उनकी सुरक्षा की चिंता के तौर पर पेश किया जा सकता है।

गांधी ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में “अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी” बताया और साथ ही यह भी कहा कि महिलाएं भारत की ताकत के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी 70 करोड़ महिलाओं की “अनोखी यात्राएं”, “अनोखी कल्पनाएं” और “अनोखे सपने” देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। साथ ही, उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे पारिवारिक रिश्तों या सामाजिक अपेक्षाओं को अपनी पहचान का एकमात्र आधार न बनने दें।

पुणे में राहुल गांधी के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि महिलाएं बेटी, पत्नी और मां बने रहने के साथ-साथ प्रोफेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर और उद्यमी भी हो सकती हैं – और राहुल गांधी के शब्दों में, आखिरकार “खुद की अपनी” हो सकती हैं।

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Independence Day 2026: 1 करोड़ युवाओं की AI ट्रेनिंग, 6 करोड़ लखपति दीदी… लाल किले से हुए वो 7 ऐलान जो बदल देंगे आपकी जिंदगी

Independence Day 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए बड़े ऐलान किए हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI), शिक्षा, खेल, सिविल डिफेंस, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, परमाणु ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी शेयर की है। इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाए जाने से देश में करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकती है।

आइए आपको विस्तार से उन 7 प्रमुख ऐलानों के बारे में बताते हैं जो आपकी जिंदगी पर असर डालने जा रहे हैं-

1. 1 करोड़ युवाओं की AI ट्रेनिंग

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि अगले एक साल में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाएगा। तेजी से बढ़ती तकनीक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम से भारत के युवा AI की दुनिया में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने में सक्षम बनेंगे।

2. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क बनाने की घोषणा की गई। कोचिंग संस्थानों के भारी वित्तीय बोझ से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत देने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), उपलब्ध प्रतिभाओं और शिक्षकों को एक साथ लाकर यह पूरा ढांचा तैयार किया जाएगा।

3. 5-15 वर्ष के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी स्पोर्ट्स टैलेंट हंट

गांवों, शहरों और स्कूलों में 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों की खेल प्रतिभा की पहचान करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। चुने गए बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। जिन ओलंपिक खेलों में भारत वर्तमान में भाग या क्वालीफाई नहीं करता है, उन पर विशेष जोर दिया जाएगा।

4. आधुनिक चुनौतियों के लिए वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क

युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए देश में एक वाइब्रेंट सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा) नेटवर्क तैयार किया जाएगा। आधुनिक समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित न रहकर रिफाइनरी, बैंकिंग सेक्टर, डेटा सेंटर और फैक्ट्रियों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं। पिछली शताब्दी के पुराने ढर्रे के स्थान पर नागरिकों को आधुनिक प्रणालियों से परिचित कराया जाएगा और एक बड़ा स्वैच्छिक बल तैयार किया जाएगा।

5. 6 करोड़ लखपति दीदी का नया लक्ष्य

देश के विकास में महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का पिछला लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। अतिरिक्त 3 करोड़ लखपति दीदी बनने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

6. आत्मनिर्भरता के लिए और सेमीकंडक्टर प्लांट्स

भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट्स शुरू हो चुके हैं और उनसे उत्पादन का निर्यात भी शुरू हो गया है। आने वाले 7-8 वर्षों में देश में 5 से 8 और नए सेमीकंडक्टर प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे, जो विकसित भारत के निर्माण में सहायक होंगे।

7. 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता

चिप्स, AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत इसी दशक में 5 नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की योजना है। साथ ही फास्ट ब्रिडर टेक्नोलॉजी में मिली सफलता को परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया।