Silver Price 4 Sept: चांदी खरीदने का बना रहे हैं प्लान? दिल्ली-कोलकाता तक जानें अपने शहर का रेट

Silver Price 4 September: अगर आप चांदी खरीदने या इसमें निवेश करने की योजना बना रहे तो इससे पहले आज का भाव जानना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिल रहा है। अलग-अलग शहरों और बाजारों में चांदी की कीमतों में थोड़ा अंतर है। वहीं, चांदी के भाव में आज हल्की तेजी देखने को मिली है। ऐसे में आइए जानते हैं कि 2 सितंबर 2026 को चांदी किस भाव पर बिक रही है और पिछले कारोबारी दिन की तुलना में इसमें कितना बदलाव आया है।

जानें अपने शहर में चांदी का दाम

आज 4 सितंबर को 999 फाइन चांदी की कीमत 2,41,990 रुपये प्रति किलोग्राम रही, वहीं 925 स्टर्लिंग चांदी 2,23,841 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में 999 फाइन चांदी के दाम करीब 6 फीसदी बढ़े हैं। वहीं, पिछले एक साल में चांदी की कीमत में 95 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

शहर के हिसाब से चांदी के रेट

मेट्रो शहरों में सिल्वर 999 फाइन के दाम

मुंबई: 2,41,560 रुपये प्रति किलो

दिल्ली: 2,41,140 रुपये प्रति किलो

चेन्नई: 2,42,260 रुपये प्रति किलो

कोलकाता: 2,41,240 रुपये प्रति किलो

बेंगलुरु: 2,41,750 रुपये प्रति किलो

हैदराबाद: 2,41,940 रुपये प्रति किलो

चांदी की कीमतों पर पड़ा असर

शुक्रवार को चांदी की कीमत 67.38 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी रही। जानकारों के मुताबिक, बॉन्ड बाजार में कमजोरी का फायदा कीमती धातुओं को मिला। इसके अलावा अमेरिका में रोजगार से जुड़े आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपनाने की संभावना बढ़ी है। इसका असर चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिला।

गुरुवार, 3 सितंबर को एमसीएक्स पर सोने और चांदी के भाव में मामूली बदलाव देखने को मिला। सोना 0.05 फीसदी की गिरावट के साथ 1,55,701 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी 0.02 फीसदी की बढ़त के साथ 2,42,391 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

US ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय को राहत:फैमिली कैटेगरी की तारीखें बढ़ीं; 1 अक्टूबर से नए वीजा नंबर मिलेंगे

अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय परिवारों के लिए सितंबर का वीजा बुलेटिन राहत लेकर आया है। परिवार-आधारित कई श्रेणियों में ग्रीन कार्ड मिलने की तारीखें काफी आगे बढ़ी हैं। हालांकि, EB-1 श्रेणी में खास बदलाव नहीं हुआ है। EB-1 श्रेणी में असाधारण प्रतिभा वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर-रिसर्चर और एमएनसी के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। भारत के लिए सितंबर में इसकी फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 है। सितंबर का वीजा बुलेटिन मौजूदा वित्त वर्ष का आखिरी बुलेटिन है। अमेरिका का वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। नए वार्षिक वीजा नंबर 1 अक्टूबर से उपलब्ध होंगे। F-1 में 13 महीने की बढ़त सितंबर वीजा बुलेटिन में भारत और चीन के लिए F-1 श्रेणी की फाइनल एक्शन डेट 15 दिसंबर 2018 से बढ़कर 22 जनवरी 2020 हो गई है। यह श्रेणी अमेरिकी नागरिकों के अविवाहित वयस्क बेटे-बेटियों के लिए है। F-2B में करीब 20 महीने की राहत ग्रीन कार्ड धारकों के अविवाहित वयस्क बेटे-बेटियों के लिए F-2B की तारीख 1 जनवरी 2018 से बढ़कर 22 अगस्त 2019 हो गई है। यानी एक महीने में करीब 20 महीने की बढ़त मिली है। F-3 में करीब 29 महीने की बढ़त अमेरिकी नागरिकों के विवाहित बेटे-बेटियों के लिए F-3 की फाइनल एक्शन डेट 15 मई 2012 से बढ़कर 22 अक्टूबर 2014 हो गई है। इसमें करीब 29 महीने की बढ़त हुई है। F-2A में एक महीने की बढ़त ग्रीन कार्ड धारकों के पति-पत्नी और नाबालिग बच्चों के लिए F-2A की तारीख 22 जुलाई 2026 से बढ़कर 22 अगस्त 2026 हो गई है। वित्त वर्ष 2026 में परिवार आधारित इमिग्रेशन की कुल सीमा 2.26 लाख और रोजगार आधारित इमिग्रेशन की सीमा 1,86,317 है। प्रति देश 7% यानी 28,862 वीजा की सीमा है। कुल मिलाकर इस महीने परिवार आधारित ग्रीन कार्ड की कई श्रेणियों में अच्छी प्रगति हुई है, जबकि EB-1 में कोई बदलाव नहीं हुआ। अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश इससे पहले अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया थआ, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए यह प्रस्ताव क्यों अहम है? यह प्रस्ताव भारतीयों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले लोगों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। फिलहाल रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर हर देश के लिए एक तय सीमा (पर-कंट्री कैप) लागू है। इसी वजह से हजारों भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में कई-कई साल लग जाते हैं। अगर यह विधेयक कानून बन जाता है, तो पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने का एक नया विकल्प मिल जाएगा।

केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

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आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

गोबर को ऊर्जा और आय में बदलेंगे 1000 विशेषज्ञ, गांवों तक तैयार होगा नेटवर्क

गोबर को ऊर्जा और आय में बदलेंगे 1000 विशेषज्ञ, गांवों तक तैयार होगा नेटवर्क

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गो-संरक्षण को केवल गोवंश के आश्रय और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती और आय के संसाधन में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ (पीएनपी) के बीच तकनीकी सहयोग का एमओयू हुआ है। इसके तहत प्रदेश में स्थापित दीनबंधु मॉडल बायोगैस संयंत्रों को तकनीकी सहयोग देने के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले संयंत्रों के लिए भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत 1,000 तकनीकी विशेषज्ञ कर्मियों का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसका लक्ष्य गोबर के वैज्ञानिक व आर्थिक उपयोग के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना है।

 

समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात जमीनी स्तर पर तकनीकी तंत्र तैयार करना है। चरणबद्ध तरीके से करीब 1,000 तकनीकी कर्मियों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह नेटवर्क दीनबंधु बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के साथ उनके संचालन, रखरखाव, तकनीकी प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग में सहयोग करेगा। इससे बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के बाद उनके नियमित और प्रभावी संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। संस्था उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 3,900 से अधिक दीनबंधु बायोगैस इकाइयों का निर्माण कर चुकी है। संस्था बायोगैस परियोजना विकास से लेकर तकनीकी डिजाइन, फीडस्टॉक एवं गोबर आकलन, संयंत्र निर्माण, संचालन एवं रखरखाव, लाभार्थियों के प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग तक पूरा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

गोबर के एक चक्र से ऊर्जा, खाद, खेती और कार्बन लाभ

नई पहल की अहमियत केवल गोबर से बायोगैस तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए बायोगैस, जैव-स्लरी, जैविक खाद/बायो-इनपुट, प्राकृतिक एवं पुनर्योजी कृषि, कार्बन लाभ की पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना है। यानी गोशाला का गोबर पहले ऊर्जा का स्रोत बनेगा और बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली जैव-स्लरी को जैविक खाद और बायो-इनपुट के रूप में खेती से जोड़ा जा सकेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक व पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस मॉडल को भविष्य में पर्यावरणीय लाभ और कार्बन परियोजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम होगा।

‘गोबर अपशिष्ट नहीं, ग्रामीण समृद्धि का संसाधन’

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय ऊर्जा, जैविक कृषि और ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखने की आवश्यकता है। दीनबंधु बायोगैस मॉडल को तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर बड़े स्तर पर लागू किया जाना गोशालाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बहुआयामी लाभ का आधार बन सकता है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध गोबर संसाधन को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और सतत कृषि से जोड़ते हुए ऐसी सर्कुलर इकोनॉमी विकसित करना है, जिसमें गोवंश संरक्षण के साथ रोजगार, ऊर्जा की बचत, कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय लाभ भी हासिल हों। प्रदेश के किसान और ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। तकनीकी नेटवर्क और स्थानीय अनुभव का मेल गोशालाओं में बायोगैस मॉडल को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक अवसर

योगी सरकार के गो-संरक्षण मॉडल में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें गोवंश संरक्षण को आर्थिक चक्र से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गोबर यदि ऊर्जा और जैविक खाद में परिवर्तित होकर खेती में वापस पहुंचता है तो गोशालाओं के संसाधनों के उपयोग के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए भी आर्थिक अवसर तैयार हो सकते हैं। इस तरह प्रदेश में ‘गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैविक कृषि और जैविक कृषि से समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है।

योगी सरकार की डिजिटल पहल, 31 हजार से ज्यादा ओबीसी युवा बन रहे तकनीकी दक्ष

योगी सरकार की डिजिटल पहल, 31 हजार से ज्यादा ओबीसी युवा बन रहे तकनीकी दक्ष

Yogi adityanath

Yogi government: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दे रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की निशुल्क ओ-लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवक-युवतियों के लिए तकनीकी शिक्षा का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना के तहत इस वर्ष 31 हजार से ज्यादा प्रशिक्षणार्थी कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की इस पहल से युवाओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल हासिल करने का अवसर मिल रहा है। 

70 हजार से ज्यादा आए थे आवेदन

वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष 31,602 प्रशिक्षणार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। 11 अगस्त से प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें सबसे अधिक आवेदन ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए आये थे। 

 

योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवाओं को बिना किसी शुल्क के आधुनिक कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिल रही है। योजना का लाभ उन ओबीसी अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है, जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है। इसके साथ ही इनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम है।

338 प्रशिक्षण संस्थानों का मजबूत नेटवर्क

प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 338 प्रशिक्षण संस्थान योजना से जुड़े हैं। इनमें 63 संस्थान केवल ओ-लेवल, 39 सीसीसी और 236 संस्थान दोनों पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इससे प्रदेश के अधिकांश जिलों में युवाओं को अपने नजदीक ही कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करने की सुविधा मिल रही है। सरकार की ओर से ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15 हजार रुपये और सीसीसी के लिए 3,500 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं पर प्रशिक्षण का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

डिजिटल शिक्षा से रोजगार की ओर बढ़ रहे युवा

योगी सरकार की यह पहल तकनीकी शिक्षा को गांव और कस्बों तक पहुंचाने के साथ युवाओं को बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण, व्यापक संस्थागत नेटवर्क और बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस योजना को रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में सरकार की एक सराहनीय पहल बना रही है।

युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना सरकार की प्राथमिकता

पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस वर्ष 31 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के लिए 338 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को उनके नजदीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।

बेंगलुरु में कैब चलाकर Uber Black ड्राइवर ने एक हफ्ते में कमाए ₹46000, कमाई देखकर सोशल मीडिया यूजर्स हुए हैरान

बेंगलुरु जैसे व्यस्त शहर में कैब चलाना किसी के लिए सिर्फ रोजगार हो सकता है, लेकिन एक Uber Black ड्राइवर ने अपनी कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी की झलक दिखाकर सोशल मीडिया पर लोगों को चौंका दिया। Instagram पर वायरल हुए एक वीडियो में Hamtor Debbarma ने बताया कि वह किस तरह अपने दिन की शुरुआत करते हैं, शहर में यात्रियों को छोड़ते हैं और इसी काम के जरिए एक सप्ताह में ₹46,000 से ज्यादा कमा लेते हैं।

सुबह की शुरुआत से सड़क तक का सफर

वीडियो की शुरुआत Hamtor की सुबह की दिनचर्या से होती है। वह उठकर ब्रश करते हैं, नहाते हैं, नाश्ता तैयार करते हैं और काम पर जाने से पहले अपने कपड़े प्रेस करते हैं। इसके बाद वह घर पर अपने काम की तैयारी करते हैं और Uber ड्राइवर की पहचान वाली सफेद शर्ट और काली पैंट पहनकर निकलते हैं।

काम शुरू करने से पहले वह अपनी कार की सफाई भी करवाते हैं। इसके बाद बेंगलुरु की सड़कों पर उनका सफर शुरू होता है, जहां वीडियो में उनकी कुछ राइड्स की छोटी-छोटी झलकियां दिखाई गई हैं।

कैब ड्राइविंग है साइड हसल

Hamtor ने बताया कि Uber Black के लिए ड्राइविंग करना उनका मुख्य काम नहीं, बल्कि एक साइड हसल है। उनके प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने B.Com की पढ़ाई Yenepoya University से की है और वह क्रिप्टो तथा फॉरेक्स ट्रेडिंग में भी रुचि रखते हैं।

वीडियो में वह दिनभर की व्यस्तता के बीच एक परिचित के साथ लंच करते हुए भी नजर आते हैं। यानी उनका दिन सिर्फ ड्राइविंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन की भी झलक देता है।

एक हफ्ते की कमाई ने चौंकाया

वीडियो का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा उनकी साप्ताहिक कमाई थी। उनके फोन की स्क्रीन पर एक सप्ताह की कमाई ₹46,022.30 दिखाई दी। इस आंकड़े को देखकर कई सोशल मीडिया यूजर्स हैरान रह गए। वीडियो के अंत में Hamtor ने अपने फॉलोअर्स के लिए एक संदेश भी साझा किया उन्होंने लोगों को विनम्र और जमीन से जुड़े रहने की सलाह दी और याद दिलाया कि कोई भी पद या स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और काम के प्रति रवैये की तारीफ की। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी जिंदगी कॉरपोरेट नौकरी करने वालों से ज्यादा शानदार नजर आ रही है। एक यूजर ने लिखा कि उनकी जिंदगी अपनी जिंदगी से ज्यादा फैंसी लग रही है। वहीं एक अन्य ने कहा कि यह कमाई कॉरपोरेट नौकरी से कहीं बेहतर है।

कुछ लोगों ने इसे IT और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए उम्मीद से जोड़कर देखा। एक कमेंट में कहा गया कि ऐसी कहानी IT प्रोफेशनल्स को भी नई संभावनाओं के बारे में सोचने की प्रेरणा देती है।

‘काम कोई छोटा नहीं होता’

इस पोस्ट पर एक यूजर ने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए Hamtor और ऐसे काम करने वाले लोगों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में पढ़े-लिखे और मेहनती लोगों की जरूरत है और अपने सपनों तक पहुंचने तक अपने काम का आनंद लेना चाहिए।

इस पूरी कहानी ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सफलता को सिर्फ पारंपरिक 9-5 नौकरी के पैमाने से क्यों देखा जाए। Hamtor की कहानी सोशल मीडिया पर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने अपने काम को छिपाने के बजाय उसे खुले तौर पर दिखाया और अपनी मेहनत से जुड़ी कमाई भी लोगों के साथ साझा की।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

करियर में तेजी से आगे बढ़ना है? रिक्रूटर ने बताए 9 ‘चालाक’ तरीके, बॉस से लेकर सैलरी तक आएंगे काम

ट्रम्प ने बोइंग डील के लिए बांग्लादेश को शुक्रिया कहा:PM से बोले- ये फाइटर जेट आपको निराश नहीं करेगा, मैं भी याद रखूंगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका से 25 बोइंग प्लेन खरीदने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश के पास अभी 14 बोइंग प्लेन हैं। बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में 14 नए बोइंग विमान का ऑर्डर भी दिया था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 30 अगस्त को बताया था कि ट्रम्प और रहमान के बीच बोइंग विमानों को लेकर बड़ी डील हुई है। इसके तहत बांग्लादेश 25 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी टैरिफ से राहत पाने के लिए डील हुई बांग्लादेश की बोइंग खरीद सिर्फ अपनी एयरलाइन का बेड़ा बढ़ाने की योजना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना और अमेरिकी टैरिफ में राहत पाना भी है। इसी वजह से बोइंग विमान खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ गया है। जब अमेरिका ने बांग्लादेश के सामान पर 37% टैरिफ लगाने की बात कही, तो बांग्लादेश ने अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान बोइंग से 25 विमान खरीदने की बात सामने आई। बाद में बांग्लादेश ने बोइंग के 14 विमानों का सौदा पक्का किया। इसकी कीमत करीब 3.7 अरब डॉलर है। इसमें 8 बोइंग 787-10, 2 बोइंग 787-9 और 4 बोइंग 737-8 MAX विमान शामिल हैं। पहला विमान नवंबर 2031 में मिलने की उम्मीद है। इस सौदे में अमेरिका का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक भी मदद करेगा। बैंक लोन की व्यवस्था करेगा और बांग्लादेश सरकार इस लोन की गारंटी देगी। ट्रम्प के दौर में हुईं बड़ी बोइंग डील ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में बांग्लादेश के अलावा कम से कम 6 देशों ने अमेरिका से बोइंग के विमान खरीदने का ऐलान किया है। 1. सऊदी अरब: मई 2025 में ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी कंपनी एविलीज ने बोइंग के 20 विमान खरीदने का पक्का ऑर्डर दिया। कंपनी ने 10 और विमान खरीदने का विकल्प भी रखा। 2. कतर: मई 2025 में ट्रम्प की कतर यात्रा के दौरान कतर एयरवेज और बोइंग के बीच 210 विमानों तक का समझौता हुआ। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच बड़े आर्थिक समझौतों का हिस्सा बताया। 3. इंडोनेशिया: जुलाई 2025 में अमेरिका से 50 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। इसके बदले अमेरिका ने इंडोनेशियाई सामान पर टैरिफ में कटौती की। 4. जापान: जुलाई 2025 में अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के तहत जापान ने 100 प्लेन खरीदने की बात कही। इनमें बोइंग विमान शामिल हैं। 5. चीन: मई 2026 में ट्रम्प ने कहा कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। बाद में बोइंग ने भी इसकी पुष्टि की। 6. साउथ कोरिया: अगस्त 2025 में साउथ कोरिया ने 103 बोइंग विमान खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद ट्रम्प ने उन पर लगा 25% टैरिफ घटाकर 10% कर दिया। ट्रम्प बोइंग विमान खरीदने पर क्यों जोर देते हैं अमेरिका में बड़े यात्री विमान बनाने वाली मुख्य कंपनी बोइंग ही है। वहां दूसरी विमान कंपनियां भी हैं, लेकिन वे ज्यादातर सैन्य या छोटे विमानों के कारोबार में हैं। बड़े यात्री विमानों के मामले में बोइंग ही अमेरिका की बड़ी कंपनी है और उसका सबसे बड़ा मुकाबला यूरोप की एयरबस से है। ट्रम्प की व्यापार नीति का सबसे बड़ा मकसद ही यही है कि दूसरे देश अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदें। इससे अमेरिका का व्यापार घाटा कम हो सकता है और अमेरिकी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। यहां बोइंग बहुत काम आती है, क्योंकि एक यात्री विमान की कीमत ही करोड़ों डॉलर होती है। अगर कोई देश 50, 100 या 200 विमान खरीदने का सौदा करता है तो अमेरिका से होने वाली खरीद का आंकड़ा एक झटके में अरबों डॉलर बढ़ जाता है। इसका फायदा सिर्फ बोइंग को नहीं मिलता। इनके निर्माण से वहां की फैक्ट्रियों, इंजीनियरों और दूसरे कामगारों को रोजगार मिलता है। उदाहरण के लिए, व्हाइट हाउस ने दक्षिण कोरिया की 103 बोइंग विमानों की डील को करीब 36.2 अरब डॉलर का बताया और कहा कि इससे अमेरिका में करीब 1.35 लाख नौकरियों को मदद मिलेगी। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…

स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

उत्तर प्रदेश के गांवों में स्वयं सहायता समूह अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला आत्मनिर्भरता के बड़े केंद्र बन रहे हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में सक्रिय 10.58 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों को आजीविका के नए अवसर मिले हैं। इन समूहों ने महिलाओं को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के साथ परिवारों की आय बढ़ाने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने का काम किया है। वहीं इन समूहों से जुड़ी 82 लाख से ज्यादा महिला किसान ग्रामीण बदलाव की नई अग्रदूत बनकर उभर रही हैं।

समूहों से निकली आत्मनिर्भरता की नई कहानी

ग्रामीण आजीविका मिशन का फोकस महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उन्हें प्रशिक्षण, ऋण, उद्यम और बाजार से जोड़कर स्थायी आय के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, हस्तशिल्प और स्वच्छता उत्पादों के निर्माण सहित कई क्षेत्रों में छोटे उद्यम संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं के हाथ में कमाई आई है तो परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। घर की जरूरतों में योगदान देने के साथ महिलाएं अपने फैसले खुद लेने और दूसरे परिवारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

बचत-ऋण के जरिये कारोबार तक पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन की बड़ी उपलब्धि यह है कि महिलाओं को बचत और ऋण की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़ाकर उद्यमिता के अवसर दिए गए। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ बाजार से जुड़ाव ने हजारों गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों की नींव रखी है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपनी पहचान कारोबारी के रूप में बना रही हैं। महिला समूहों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। एक महिला के उद्यमी बनने का असर उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समूह की दूसरी महिलाएं भी उससे प्रेरणा लेकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं।

82 लाख महिला किसान बनीं बदलाव की वाहक

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। 82 लाख महिला किसानों का जुड़ाव इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है। खेती से जुड़े काम में महिलाओं की भागीदारी को आय बढ़ाने वाले अवसरों से जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आजीविका के स्रोतों में विविधता आई है। महिला समूह अब गांवों में आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक बदलाव की भी मजबूत धुरी बन चुके हैं। समूहों में साथ काम करने से महिलाओं के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने की संस्कृति मजबूत हुई है। सफल महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी रोजगार और उद्यम की राह दिखा रही हैं।

वित्तीय समावेशन से मजबूत हुई आर्थिक नींव

ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना भी मिशन की अहम उपलब्धियों में शामिल है। वित्तीय समावेशन के जरिए महिलाओं को बचत, ऋण और अन्य आर्थिक अवसरों तक पहुंच मिली है। इससे गांवों में छोटी पूंजी के आधार पर कारोबार शुरू करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार का जोर अब इन समूहों को केवल समूह के रूप में सक्रिय रखने के बजाय उन्हें उद्यम, रोजगार और बाजार के अवसरों से जोड़कर आय के स्थायी स्रोत तैयार करने पर है। यही वजह है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण विकास के साथ महिला सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं।

गांव की अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ऊर्जा

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर रहा है। एक ओर इससे आजीविका के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की नई पहचान मिल रही है। ग्रामीण आजीविका का यह मॉडल आने वाले समय में गांवों में रोजगार और उद्यम के और अधिक अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।

7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

PM Modi appeal on Gold

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मजबूत आर्थिक विकास दर पर प्रसन्नता जताते हुए एक अनूठी अपील की है। भारत की 7.8 फीसदी की शानदार जीडीपी ग्रोथ पर देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो सोने की खरीदारी से बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश में बने सामानों को प्राथमिकता देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

 

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया कई तरह के संकटों और युद्ध की स्थितियों से जूझ रही है। कोविड महामारी के बाद से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है और दुनिया में आर्थिक स्थिरता का अभाव है। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

 

'मेड इन इंडिया' और 'वेडिंग इन इंडिया' पर जोर

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी मोह छोड़ने और 'मेड इन इंडिया' के मंत्र को अपने जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने खास तौर पर विदेश यात्राओं और विदेश में शादियों के आयोजन पर रोक लगाने या उनसे बचने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि यदि लोग देश के भीतर ही शादियों का आयोजन करेंगे, तो इससे पर्यटन, होटल, कैटरिंग, और हैंडीक्राफ्ट जैसे स्थानीय उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और देश का पैसा देश के भीतर ही रोजगार सृजन में काम आएगा। ALSO READ: पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा
 

2047 के विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आज की यह मेहनत और अनुशासन ही आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा। सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं, और देश के 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक शक्ति ही भारत को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

 

पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोना न खरीदने की अपील करने के पीछे मुख्य रूप से देश को आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

 

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना: भारत अपनी सोने की जरूरत का अधिकांश हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारी मात्रा में सोना खरीदने से देश का धन बाहर जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

'मेड इन इंडिया' और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: प्रधानमंत्री चाहते हैं कि देशवासी विदेशी वस्तुओं या अनावश्यक महंगी खरीदारी के बजाय स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों और सेवाओं पर खर्च करें, जिससे देश के भीतर ही रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिले।

वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाव: वर्तमान में दुनिया भर में युद्ध, सप्लाई चेन में बाधाएं और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे समय में देश की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित और सुदृढ़ रखने के लिए अनावश्यक और गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी से बचना जरूरी है।

2047 के विकसित भारत का लक्ष्य: देश को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों को आर्थिक अनुशासन अपनाने और अपनी गाढ़ी कमाई को देश के समग्र विकास व उत्पादक क्षेत्रों में लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।