सर्जियो गोर क्या वायसराय हैं?

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर को लेकर एक यूफोरिया बना था। आते ही उन्होंने अपनी खूब चर्चा कराई थी। वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी हैं और उनके चुनाव अभियान में बहुत सक्रिय हिस्सेदारी की थी। ट्रंप के दूसरी बार चुनाव जीतने के बाद उनकी नई टीम बनाने में भी गोर ने बड़ी भूमिका निभाई थी। तभी माना गया कि गोर को भारत का राजदूत नियुक्त करने से दोनों देशों को संबंधों में सुधार होगा। हालांकि उलटा हुआ है। जब से गोर भारत आए हैं तब से भले उनके कारण से नहीं हो लेकिन भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव आया है। राष्ट्रपति ट्रंप भारत को निशाना बना रहे हैं और अपने देश में भारतवंशियों को भी परेशान कर रहे हैं।

इस बीच गोर को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कई नेता और विपक्ष के इकोसिस्टम के इन्फ्लूएंसर गोर को वायसराय कहने लगे हैं। ‘वायसराय गोर’ कह कर उनके बारे में कुछ भी लिखा जा रहा है। गौरतलब है कि भारत पर ब्रिटिश हुकूमत के समय वायसराय ही देश पर राज करते थे। वे राजा की तरह पूरे देश में घूमते थे। गोर वैसे ही देश भर में घूम रहे हैं। वे विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में भी गए हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर का दौरा किया तो अरुणाचल प्रदेश भी गए। पिछले दिनों वे पंजाब के अमृतसर पहुंचे थे। वहां बड़ी संख्या सिख संगत के लोगों ने उनका स्वागत किया। उनके स्वागत के दौरान भारत विरोधी नारे लगे। ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाया गया। इसके साथ साथ ‘गॉड ब्लेस अमेरिका’ का भी नारा लगा। गोर के साथ 28 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी था। पता नहीं क्यों भारत की ओर से आधिकारिक रूप से इसका विरोध नहीं दर्ज कराया गया।

अब औपचारिकता भी नहीं?

इलॉन मस्क ने कुछ रोज पहले पूछा था कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं? अब ऐसा लगता है कि अंदरूनी तौर पर डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन में सचमुच ऐसी राय बनी गई है! 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ताजा भारत यात्रा के सिलसिले में यह उचित सवाल उठा है कि क्या अमेरिका अब भारत के साथ अपने संबंध में कूटनीतिक मर्यादा का पालन करने की जरूरत भी नहीं समझ रहा है। अरबपति अमेरिकी कारोबारी इलॉन मस्क ने कुछ रोज पहले पूछा था कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं? अब ऐसा लगता है कि अंदरूनी तौर पर ऐसी ही राय डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन में बनी है। इसलिए रुबियो भारतीय कारोबारियों- खासकर रिलायंस ग्रुप के साथ व्यापारिक वार्ता के लिए सीधे मुंबई और जामनगर पहुंच रहे हैं।

इस यात्रा का कार्यक्रम बनने के बाद भारत स्थित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने “उम्मीद” जताई कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रुबियो से मिलने जाएंगे। बाद में खबर आई कि जयशंकर सचमुच मुंबई जा रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम है। यह दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन भारत जैसे ‘रणनीतिक सहयोगियों’ को जूनियर पार्टनर के रूप में देखता है और इस पर नरेंद्र मोदी सरकार को कोई एतराज नहीं है! रुबियो की यात्रा का मकसद अमेरिका में रिलायंस ग्रुप के रिफाइनरी लगाने की योजना को आगे बढ़ाना है। ट्रंप प्रशासन दुनिया भर से पूंजी और उत्पादक विशेषज्ञता को जुटाने के प्रयास में लगा है, ताकि अमेरिका में औद्योगिक ढांचा फिर से खड़ा हो सके।

इस क्रम में भारतीय पूंजीपतियों पर उसकी खास निगाह है, जो सहज ही इस योजना में भागीदार बनने को उतावले दिखे हैं। अंबानी, रुइया, अडानी जैसे भारतीय समूह अमेरिका में बड़े निवेश का इरादा दिखा चुके हैं। भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए यह नई चुनौती है, जिसे खुद अभी अपने विकास के लिए बड़े पूंजी निवेश एवं कारोबारी महारत की जरूरत है। हैरतअंगेज है कि पूंजी निवेश की पलट गई इस दिशा पर ना तो भारत में कोई बहस है, और ना ही देश के दीर्घकालिक भविष्य के लिहाज से इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। जबकि इस दौर में अमेरिका सहित तमाम देश पूंजी प्रवाह को निर्देशित कर रहे हैं। बहरहाल, सबसे दुखद यह संदेश है कि अमेरिका भारत सरकार की संप्रभु प्रतिष्ठा का भी अब ख्याल नहीं रख रहा है।

PM मोदी 11 दिसंबर को कनाडा जाएंगे:ट्रेड डील पर बातचीत होगी; ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। भारत-कनाडा व्यापार समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है। भारत और कनाडा 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर सालाना 7 लाख करोड़ रुपए करना चाहते हैं। अभी दोनों देशों के बीच करीब 3 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होता है। पीएम मोदी का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिती है। ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा है। PM मोदी ने पीएम कार्नी से फोन पर बात की प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। मोदी ने इसे अच्छी बातचीत बताया। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी हो। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। कार्नी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिशों के लिए मोदी की तारीफ भी की। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते बिगड़े थे भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए। लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत दौरे के दौरान कार्नी ने भारत को भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बताया था। दिसंबर में पीएम का 3 देशों के दौरे का कार्यक्रम रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी दिसंबर में कनाडा के अलावा अमेरिका और बेल्जियम भी जा सकते हैं। इन दौरों में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 11-12 दिसंबर: कनाडा – मोदी टोरंटो और ओटावा जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत होगी। 13-15 दिसंबर: अमेरिका – फ्लोरिडा में G20 समिट में शामिल होने का कार्यक्रम है। 16-17 दिसंबर: बेल्जियम – ब्रसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा हो सकती है। कनाडा दौरे की तारीख की पुष्टि हो चुकी है। अमेरिका और बेल्जियम के कार्यक्रमों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकि है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं,10 दिन में फैसला: ट्रम्प तय करेंगे रूसी तेल खरीदने वाले किन देशों पर प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे।

PM मोदी 11 दिसंबर को कनाडा जाएंगे:ट्रेड डील पर बातचीत होगी; ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 से 12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर रहेंगें। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। भारत-कनाडा व्यापार समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है। इसके तहत दो देश व्यापार, निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए नियम तय करते हैं। भारत और कनाडा 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर सालाना 7 लाख करोड़ रुपए करना चाहते हैं। अभी दोनों देशों के बीच करीब 3 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होता है। PM मोदी का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिती है। ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा है। PM मोदी ने मार्क कार्नी से फोन पर बात की थी प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। मोदी ने इसे अच्छी बातचीत बताया। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी हो। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। कार्नी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिशों के लिए मोदी की तारीफ भी की। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते बिगड़े थे भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए। लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत दौरे के दौरान कार्नी ने भारत को भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बताया था। PM मोदी का 11 साल बाद द्विपक्षीय दौरा जून 2025 – PM मोदी का यह द्विपक्षीय दौरा नहीं था। वे G7 समिट में शामिल होने गए थे। हालांकि बैठक के इतर उन्होंने PM कार्नी से मुलाकात की थी। अप्रैल 2015 – PM मोदी कनाडा के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर थे। इस दौरे के बाद भारत ने कनाडा से यूरेनियम खरीदने का समझौता भी किया था। दिसंबर में PM का 3 देशों के दौरे का कार्यक्रम रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी दिसंबर में कनाडा के अलावा अमेरिका और बेल्जियम भी जा सकते हैं। इन दौरों में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 11-12 दिसंबर: कनाडा – मोदी टोरंटो और ओटावा जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत होगी। 13-15 दिसंबर: अमेरिका – फ्लोरिडा में G20 समिट में शामिल होने का कार्यक्रम है। 16-17 दिसंबर: बेल्जियम – ब्रसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा हो सकती है। अमेरिका और बेल्जियम के कार्यक्रमों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकि है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं,10 दिन में फैसला: ट्रम्प तय करेंगे रूसी तेल खरीदने वाले किन देशों पर प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे।

भारत पर 100% टैरिफ का फैसला 10 दिन में संभव:अमेरिकी राजदूत बोले- रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाएं या नहीं, ट्रम्प तय करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे। अमेरिकी संसद ने 18 सितंबर को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का बिल पास किया था। ट्रम्प ने भी इस कानून को मंजूरी दे दी है, लेकिन किसी देश पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि कानून पारित होने के 30 दिनों के भीतर फैसला लेना जरूरी है। गोर ने कहा कि इस कानून का मकसद किसी देश को सजा देना नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। अमेरिका दूसरे देशों के साथ मिलकर रूस को युद्ध के लिए मिलने वाले पैसे को धीरे-धीरे कम करना चाहता है। कानून में प्रतिबंध लगाने के तीन आधार सर्जियो गोर ने कहा कि संसद ने प्रतिबंधों के तीन विकल्प दिए हैं। इनमें तेल, गैस और प्रतिबंधों से बचने में मदद करना शामिल है। उन्होंने कहा, “इन प्रतिबंधों का निशाना किसी एक देश पर नहीं है। कांग्रेस ने तीन अलग-अलग श्रेणियां तय की हैं। पहली तेल, दूसरी गैस और तीसरी प्रतिबंधों से बचने में मदद करना है।” गोर ने कहा कि इन श्रेणियों में शामिल लोगों की पहचान आंकड़ों के आधार पर की जाती है। उन्होंने कहा कि भारत भी कई अन्य देशों के साथ इनमें से एक श्रेणी में आता है। ट्रम्प अब खुद रूस से डीजल खरीद रहे ट्रम्प अब खुद रूस से डीजल खरीदने जा रहे हैं। उन्होंने रूस से डीजल खरीदने पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक हटा दी है। अमेरिका में ईरान जंग के बाद डीजल की कीमतें बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन हो गई हैं। माना जा रहा है कि कीमतें कम करने के लिए ट्रम्प ने यह फैसला लिया है। अमेरिका में जंग से पहले डीजल करीब 3.70 डॉलर प्रति गैलन बिक रहा था। अब इसकी कीमत 6.28 डॉलर हो गई है। 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रम्प प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ट्रम्प के मुताबिक, रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। आगे चलकर यह मात्रा 30 लाख टन तक पहुंच सकती है। भारत से ट्रेड डील पर भी बातचीत जारी गोर ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा बाकी है। दोनों देशों के बीच करीब डेढ़ साल से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ डिफेंस, आईटी, डेटा सेंटर और चिप मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है। गोर ने भारत को AI डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र बनने के लिए उपयुक्त बताया। उनके मुताबिक, भारतीय और अमेरिकी टेक कंपनियों की साझेदारी से दोनों देशों को फायदा होगा।

रूबियो की नजर में भारत सूडान जैसा!

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अधिकारी भारत को क्या समझते हैं, यह धीरे धीरे और स्पष्ट होता जा रहा है। ट्रंप ने खुद जिस तरह से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया है और विवाद के मुद्दों को किनारे करके उनके साथ दोस्ती बढ़ाई है वह भारत के लिए अलग चिंता का विषय है। अमेरिका अब एशिया का शक्ति संतुलन साधने की पुरानी नीति से पीछे हट गया है। वह भारत को चीन के काउंटरवेट के तौर पर तैयार नहीं करेगा, बल्कि चीन की ही ताकत बढ़ा कर उसके साथ दोस्ती करेगा।

इसका संकेत इस साल नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग के समय अमेरिकी विदेश उप मंत्री ने दिया था, जब उन्होंने कहा था कि अमेरिकी किसी हाल में भारत को इतना बड़ा नहीं होने देगा कि वह एक चुनौती बन जाए। यह बात उन्होंने भारत में भारत के अधिकारियों, विदेश नीति के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों के सामने कही थी। हालांकि बीच बीच में ट्रंप प्रशासन के अधिकारी भारत को खुश करने वाली बातें भी कर देते हैं। जैसे भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू कश्मीर गए तो उन्होंने कह दिया कि कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है। इस पर भारत में खूब तालियां बजीं।

लेकिन अब कश्मीर को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जो बयान दिया है उस पर चौतरफा सन्नाटा खींच गया है। कोई कुछ नहीं बोल रहा है। एकाध सामरिक जानकारों ने इस पर सवाल उठाए लेकिन सरकारी स्तर पर इसे दबा दिया गया। मार्को रूबियो ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कहा कि, ‘एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बननी चाहिए, जो भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को हैंडल कर सके या सूडान और रवांडा में जो हो रहा है उसे संभाल सके’।

सोचें, अमेरिका के विदेश मंत्री और वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भारत और पाकिस्तान के संभावित संघर्ष की बात कही, उसे संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की जरुरत बताई और दोनों देशों की तुलना सूडान और रवांडा से की। सवाल है कि क्या अमेरिका कुछ ऐसा देख रहा है, जिससे उसको लग रहा है कि भारत की स्थिति सूडान और रवांडा जैसी हो सकती है? पाकिस्तान की स्थिति तो उस तरफ बढ़ रही है लेकिन भारत!

मार्को रूबियो का बयान इस नाते भी बहुत आपत्तिजनक है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के मामले को हैंडल करने के लिए किसी ‘इंटरनेशनल सिस्टम’ की जरुरत बताई। ध्यान रहे भारत का स्टैंड हमेशा यह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के मुद्दे दोपक्षीय हैं और इनमें भारत किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं करेगा। सारा विवाद ही इसी बात का है कि पाकिस्तान हमेशा आपसी दोपक्षीय मुद्दों का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहता है और भारत इसका विरोध करता है।

सोचें, मार्को रूबियो ने इतने स्पष्ट शब्दों में भारत की पोजिशन को चैलेंज किया और भारत व पाकिस्तान के दोपक्षीय मामले में अंतरराष्ट्रीय दखल की जरुरत बताई, साथ ही भारत की तुलना सूडान और रवांडा जैसे देशों से ही लेकिन भारत की ओर से एक शब्द नहीं कहा गया। हैरानी की बात यह है कि जिस समय रूबियो ने यह बात कही उसके तुरंत बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका गए और वहां उनकी रूबियो से मुलाकात भी हुई। दोनों के बीच दोपक्षीय वार्ता हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा की तैयारियों पर भी चर्चा हुई होने की खबर है। लेकिन रूबियो ने जो कहा उस बारे में कोई बात होने की खबर नही है।

आज का एक्सप्लेनर:तिहाड़ जेल से अमेरिका गया ‘भाड़े का सैनिक’ मैथ्यू; आतंकी साजिश के आरोप थे, फिर कैसे छूटा, क्या अब भारत लौटेगा

24 सितंबर को तिहाड़ जेल से निकला मैथ्यू वैनडाइक अमेरिका की उड़ान भर चुका है। वही भाड़े का सैनिक मैथ्यू, जिसे 6 महीने पहले भारत की सबसे सख्त आतंकवाद-रोधी एजेंसी NIA ने पकड़ा था और UAPA जैसा कड़ा कानून लगाया था। आखिर कौन है मैथ्यू, UAPA लगने के बावजूद भारत से जाने क्यों दिया गया और क्या वापस लौटेगा; 3 चैप्टर्स में पूरी कहानी… मैथ्यू वैनडाइक 1981 में अमेरिका के बाल्टीमोर में पैदा हुआ। वो खुद को मर्सिनरी बताता है, यानी भाड़े का सैनिक, जो पैसों के बदले किसी भी देश या संगठन के लिए लड़ सकता है। मैथ्यू की वेबसाइट के मुताबिक, वो ‘Sons of Liberty International’ (SOLI) नाम की प्राइवेट मिलिट्री का फाउंडर, जंग कवर करने वाला पत्रकार, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर है। वह सीरिया और इराक जैसे देशों में युद्धबंदी भी रहा है। पिछले दो दशकों में उसने दुनियाभर में कई ऑपरेशन किए… तो मैथ्यू भारत में क्या कर रहा था? गिरफ्तारी के वक्त NIA ने आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, यानी UAPA की धारा 18 लगाई, जो आतंकी साजिश, कोशिश, समर्थन, उकसाने या मदद करने से जुड़ी है। UAPA के तहत जांच पूरी करके 180 दिनों में चार्जशीट दायर करनी होती है, जो मैथ्यू के मामले में 8 सितंबर 2026 को खत्म हो रही थी। NIA ने 8 सितंबर को चार्जशीट दाखिल तो कर दी, लेकिन UAPA की धाराओं के बजाय इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लगाईं। धारा 21 वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में दाखिल होने से जुड़ी है, जबकि धारा 23 वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रुकने या वीजा नियमों को तोड़ने से जुड़ी है। NIA का तर्क था कि जांच अब भी जारी है और UAPA के तहत अपराध की पुष्टि करने के लिए अभी और वक्त चाहिए। यहीं से कानूनी छूट का एक मौका बना… कोर्ट छूट के साथ कुछ शर्तें भी लगाईं… इसके बाद 24 सितंबर की रात मैथ्यू और बाकी 6 आरोपी तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। इस पर कई विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 23-26 मई को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने मैथ्यू का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव ने यह नतीजा तय किया, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? इससे भी अहम है कि इन विदेशी संदिग्धों को वीजा कैसे मिला और इन्हें भारत के रास्ते म्यांमार जाने की इजाजत कैसे मिली? AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘UAPA के तहत किसके खिलाफ चार्जशीट दायर की जानी चाहिए, यह सर्जियो गोर तय करते हैं। भारतीय नागरिक UAPA के तहत 9 से 10 साल तक जेल में सड़ सकते हैं, क्योंकि उनके पास सर्जियो गोर नहीं हैं।’ स्ट्रैटजिक अफेयर्स एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि भारत ने बार-बार कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव के तहत विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के खिलाफ हाई-प्रोफाइल आपराधिक कार्यवाहियों को कमजोर कर दिया गया, छोड़ दिया गया या बेअसर कर दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक महीने बाद मैथ्यू और बाकी 6 आरोपियों को भारत लौटना होगा और लौटने के 72 घंटों के भीतर कोर्ट को बताना होगा। वहीं NIA की UAPA को लेकर जांच जारी है। अगर एजेंसी को सबूत मिले और अपराधों की पुष्टि हुई, तो वह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है। ऐसा हुआ तो मैथ्यू पर फिर से UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों के आरोप फिर से लग सकते हैं और केस चल सकता है। हालांकि मैथ्यू की वापसी पर संशय बना हुआ है। ज्यादातर मामलों में विदेशी आरोपियों के लौटने की गारंटी लेने वाला कोई नहीं होता। पहले भी ऐसा हो चुका है कि जब विदेशी आरोपी एक बार छूटने के बाद वापस लौटे ही नहीं। 3 चर्चित मामले… ऐसे में अगर मैथ्यू तय समय पर नहीं लौटता, तो भारत के पास 2 विकल्प हैं- जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी करना या भारत-अमेरिका की प्रत्यर्पण संधि (1997) के तहत औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करना। ————— ये भी खबर पढ़िए…. मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम रख पाकिस्तान कैसे करोड़ों जुटाएगा; ये मोस्ट वॉन्टेड आतंकी आखिर छिपा कहां है जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के सिर पर पाकिस्तान ने 70 लाख रुपए का इनाम रखा है। पाकिस्तान 2021 से दावा करता आ रहा है कि मसूद अफगानिस्तान भाग चुका है, जबकि भारतीय एजेंसियों का मानना है कि वो पाकिस्तान में ही छिपा है। पूरी खबर पढ़िए…

ब्रिक्स के दौरान सर्जियो गोर दिल्ली छोड़ गए

दिल्ली में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा था। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आए थे। यह बहुत बड़ा घटनाक्रम था। दो साल पहले दिल्ली में हुए जी 20 शिखर सम्मेलन में ये दोनों नेता शामिल नहीं हुए थे। उसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत आए थे। इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग और पुतिन दोनों का आना बड़ी बात थी। उनके अलावा ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के नेता भी दिल्ली में मौजूद थे।

लेकिन उसी समय अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर दिल्ली छोड़ गए थे। सोचें, भारत आए कई नेता ऐसे भी थे, जिनके साथ अमेरिका के बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन सबसे बचते हुए सर्जियो गोर भारत के पूर्वोत्तर की यात्रा पर चले गए। उन्होंने पूर्वोत्तर की पहली यात्रा के लिए हिंसा से प्रभावित मणिपुर का चयन किया, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले सर्जियो गोर जम्मू कश्मीर भी गए थे, जहां उन्होंने कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया। इस पर पाकिस्तान बहुत नाराज हुआ था। बहरहाल, सर्जियो गोर मणिपुर गए और वहां से वीडियो, तस्वीरें आदि सोशल मीडिया में डालीं। क्या अमेरिका इस बहाने भी कोई मैसेज करना चाहता है?

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है। हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया। ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। 240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है। ————————– यह भी पढ़ें….. पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी: सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ट्रम्प ने बोइंग डील के लिए बांग्लादेश को शुक्रिया कहा:PM से बोले- ये फाइटर जेट आपको निराश नहीं करेगा, मैं भी याद रखूंगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका से 25 बोइंग प्लेन खरीदने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश के पास अभी 14 बोइंग प्लेन हैं। बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में 14 नए बोइंग विमान का ऑर्डर भी दिया था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 30 अगस्त को बताया था कि ट्रम्प और रहमान के बीच बोइंग विमानों को लेकर बड़ी डील हुई है। इसके तहत बांग्लादेश 25 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी टैरिफ से राहत पाने के लिए डील हुई बांग्लादेश की बोइंग खरीद सिर्फ अपनी एयरलाइन का बेड़ा बढ़ाने की योजना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना और अमेरिकी टैरिफ में राहत पाना भी है। इसी वजह से बोइंग विमान खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ गया है। जब अमेरिका ने बांग्लादेश के सामान पर 37% टैरिफ लगाने की बात कही, तो बांग्लादेश ने अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान बोइंग से 25 विमान खरीदने की बात सामने आई। बाद में बांग्लादेश ने बोइंग के 14 विमानों का सौदा पक्का किया। इसकी कीमत करीब 3.7 अरब डॉलर है। इसमें 8 बोइंग 787-10, 2 बोइंग 787-9 और 4 बोइंग 737-8 MAX विमान शामिल हैं। पहला विमान नवंबर 2031 में मिलने की उम्मीद है। इस सौदे में अमेरिका का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक भी मदद करेगा। बैंक लोन की व्यवस्था करेगा और बांग्लादेश सरकार इस लोन की गारंटी देगी। ट्रम्प के दौर में हुईं बड़ी बोइंग डील ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में बांग्लादेश के अलावा कम से कम 6 देशों ने अमेरिका से बोइंग के विमान खरीदने का ऐलान किया है। 1. सऊदी अरब: मई 2025 में ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी कंपनी एविलीज ने बोइंग के 20 विमान खरीदने का पक्का ऑर्डर दिया। कंपनी ने 10 और विमान खरीदने का विकल्प भी रखा। 2. कतर: मई 2025 में ट्रम्प की कतर यात्रा के दौरान कतर एयरवेज और बोइंग के बीच 210 विमानों तक का समझौता हुआ। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच बड़े आर्थिक समझौतों का हिस्सा बताया। 3. इंडोनेशिया: जुलाई 2025 में अमेरिका से 50 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। इसके बदले अमेरिका ने इंडोनेशियाई सामान पर टैरिफ में कटौती की। 4. जापान: जुलाई 2025 में अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के तहत जापान ने 100 प्लेन खरीदने की बात कही। इनमें बोइंग विमान शामिल हैं। 5. चीन: मई 2026 में ट्रम्प ने कहा कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। बाद में बोइंग ने भी इसकी पुष्टि की। 6. साउथ कोरिया: अगस्त 2025 में साउथ कोरिया ने 103 बोइंग विमान खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद ट्रम्प ने उन पर लगा 25% टैरिफ घटाकर 10% कर दिया। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…