भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है। हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया। ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। 240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है। ————————– यह भी पढ़ें….. पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी: सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने हाल ही में IX USISPF लीडरशिप समिट 2026 में भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती पर एक दिलचस्प कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सच्चा दोस्त मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच संबं
भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।
भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।
वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”
बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”
बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।
इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।
वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।
गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।
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